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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

पति तो भाभी की ही खूबसूरती के पुल बांधे जा रहे थे, जैसे मैं तो वहां थी ही नहीं। देर शाम हम लोग तैयार हो कर हॉल में पहुंच गए इसके पहले की मेहमान आना शुरू ही जाये।

अब धीरे धीरे मेहमान आना शुरू हो गए थे और चहल पहल काफी बढ़ गयी थी। संजू भी आया था और बार बार मुझसे बात करने की कोशिश कर रहा था, पर दिन भर हुए काण्ड के बाद चिंता में डूबी मैंने उसको ज्यादा तवज्जो नहीं दी।

बीच बीच में समय मिलते ही ये जरूर देख लेती कि पति और भाभी कहाँ हैं और क्या कर रहे हैं। अधिकतर समय वो एक दूसरे के आस पास ही थे।

पार्टी परवान पर थी और माँ ने मुझसे कहा कि घर पर एक काम का बेग रह गया हैं तो उसको ले आ।

मैं चाबी लेकर हॉल से बाहर निकली। संजू भी मेरे पीछे पीछे आ गया। मुझसे बोलने लगा कि वो आज प्रोटेक्शन लेकर आया हैं।

मैंने उसको डांट दिया कि तो मैं क्या करू। उस दिन तुम्हारे घर पर जो भी हुआ जज्बात में हो गया, अब मुझसे फिर वही उम्मीद मत रखना। वो थोड़ा रुआंसा सा हो गया। पर सुबह से मेरी चिंता कुछ ओर थी।

संजू मेरे पीछे पीछे एक आस लिए घर तक आ गया। मैंने बाहर के दरवाजे का इनर लॉक खोला और घर में प्रवेश किया। भाभी के कमरे के आधे बंद दरवाजे से रोशनी आ रही थी।

मुझे झटका लगा कही मेरे पति और भाभी फिर से यहाँ आकर तो नहीं लग गए। मैंने संजू को इशारे से आवाज नहीं करने के लिए कहा।

हम दोनों दबे पाँव कमरे के दरवाजे के करीब पहुंचे और मैं आधे खुले दरवाजे से झाँकने लगी, संजू मेरे पीछे खड़ा हो देखने लगा।

जल्दबाजी में उन्होंने दरवाजा भी पूरा बंद नहीं किए था। दोनों शायद थोड़ी देर पहले ही पहुंचे थे, क्यों की मेरे पति मेरी भाभी की साड़ी पकड़ खींचते हुए उतार रहे थे।

संजू मेरा हाथ पकड़ कर बाहर आने का इशारा करने लगा। मैं उसके साथ बाहर आ गयी। उसको भी झटका लगा था। मेरे भैय्या का दोस्त था और मेरी भाभी को भी भाभी ही बुलाता था।

वो भाभी अभी मेरे पति के साथ इस हालत में थी। उसने कहाँ तुम्हारा रिएक्शन देख कर लगा तुम्हे पहले से अपने पति और भाभी के बारे में पता था।

मैंने कहा आज सुबह ही पता चला। उसने मेरा कंधा दबाते हुए मुझे सांत्वना दी। हम एक बार फिर दबे पाँव अंदर गए देखने लगे।

अब पति और भाभी के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। भाभी मेरे पति के ऊपर सवार होने की तैयारी में थी। उस पर बैठ कर उन्होंने पति का लंड अपनी चुत में घुसा दिया। वो ऊपर नीचे हरकत करते हुए मेरे पति को चोद रही थी।

संजू मेरे पीछे खड़ा था और थोड़ी ही देर में मुझसे चिपक गया। मैं अंदर का नजारा देखने में मग्न थी तो संजू पर ध्यान ही नहीं गया।

थोड़ी देर में वो मेरे पिछवाड़े पर रगड़ खाने लगा तो मेरा ध्यान गया। मुझे भी अंदर का नजारा देखने के बाद वो रगड़ अच्छी लग रही थी।

मेरे कुछ ना बोलने से उसके हौसले भी बढे और मेरी साडी नीचे से ऊपर उठा दी और मेरी पैंटी नीचे उतार कर मेरे नितंबो पर हाथ फेरने लगा।

मैंने उसको रोका और अपने कपडे सही किये और उसका हाथ पकड़ कर घर से बाहर ले आयी। आते वक़्त वो बैग भी साथ ले लिया जो माँ ने लाने को बोला था।

बाहर आकर मैंने उससे कहा, संजू मेरा एक काम करोगे।

उसने कहा बोलो क्या करना हैं।

मैंने उसको समझाया कि तुम्हे अंदर जाकर उन दोनों को रोकना हैं और उनको समझाना हैं कि वो जो कुछ भी कर रहे हैं वो गलत हैं। उनके दिमाग में ये बात अच्छे से बैठानी हैं कि आइन्दा वो लोग इस तरह का काम से तौबा कर ले।

मैंने उसको बताया कि ये काम मैं नहीं कर सकती, क्योंकि ये हम तीनो के लिए बहुत शर्मनाक होगा और एक दूसरे से शायद फिर कभी नजरे ना मिला पाए, इसलिए ये काम तो तुम्हे ही करना पड़ेगा।

संजू बोला ठीक हैं समझा दूंगा पर फिर तुम मुझे अपने साथ करने दोगी, मैं प्रोटेक्शन भी लाया हु।

मैंने उसको डांट दिया, मैं इतनी तनाव में हु और तुमको ये सब सूझ रहा हैं। हम अपना बाद में देखेंगे पहले तुम मेरा ये काम कर दो। मैं अभी वापस हॉल में जा रही हू, ये बैग देना हैं। तुम इन दोनों को हॉल में ले आना। और मेरे बारे में मत बताना कि मैं यहाँ आयी थी और इनको देख लिया था।

संजू ने आश्वस्त किया कि वो सब समझ गया हैं। संजू अब वापस घर के अंदर गया और मैं बैग लिए वापस हॉल की तरफ चली आयी।

 
पुरे रास्ते और हॉल में पहुंच कर भी मेरी चिंता घर पे क्या हो रहा होगा इस पर थी। मैं दो तीन मिनट से ज्यादा वहां ठहर नहीं पायी और एक बार फिर अपने घर की तरफ बढ़ गयी।

रास्ते में ध्यान रख रही थी कि कही वो लोग सामने से आते हुए ना मिल जाए, कोई बहाना भी सोचने लगी।

अब मैं घर पर पहुंच गयी। चाबी मेरे पास ही रह गयी थी तो डरते डरते धीरे से बाहर का दरवाजा खोला, अंदर कोई दिखाई नहीं दे रहा था। पर अभी भी भाभी के कमरे के आधे खुले दरवाजे से रोशनी आ रही थी।

शायद वो लोग अभी भी अंदर ही थे। अंदर से कुछ आवाजे आ रही थी। मैं अंदर जाऊ या न जाऊ सोच में पड़ गयी कि कही पति और भाभी मुझे देख ना ले।

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फिर मैं हिम्मत करके कमरे के दरवाजे के पास पहुंची और अंदर झांकने लगी। अंदर का नजारा देख के मेरा सर चकरा गया। मेरी भाभी डॉगी बनी हुई थी और पीछे से संजू उनको चोद रहा था जब की उनके मुँह में मेरे पति अपना लंड घुसाए उनका मुँह चोद रहे थे।

मैंने संजू को किस काम के लिए भेजा और वो क्या कर रहा था। जिस संजू को रखवाली के लिए भेजा था वो ही तिजोरी में सेंध मार रहा था।

भाभी और पति ने मिलकर इस संजू को भी पटा लिया था या फिर संजू ने ही इन दोनों की मज़बूरी का फायदा उठाते हुए उनको ब्लैकमेल किया होगा।

संजू मेरे साथ करने के लिए जो कंडोम लाया था उसका अब वो इस्तेमाल कर रहा था। शायद मेरी ही गलती थी, मैंने ही उसको अपने साथ करने को ना बोला था, इसलिए उसको जैसे ही मौका मिला दूसरे के साथ हो लिया।

मेरी भाभी आगे पीछे दोनों छेदो में चुदवा रही थी और कही ना कही मैं भी इसकी जिम्मेदार थी, ना मैं संजू को भेजती ना भाभी फंसती।

संजू पीछे से भाभी को इतने जोर के झटके मार रहा था कि पति को कुछ करने की जरुरत ही नहीं थी, भाभी का मुँह उन झटको की वजह से अपने आप आगे पीछे होते हुए चुद रहा था।

अभी तो मैं अंदर जाकर उनको डांट कर रोक भी नहीं सकती थी, क्योंकि संजू बोल सकता था कि मैं उनको थोड़ी देर पहले ही देख कर जा चुकी हु, और मैंने ही संजू को अंदर भेजा था। मैं खुद फंस सकती थी। उससे भी बड़ी बात संजू मेरा वो भेद खोल सकता था जो हम दोनों के बीच उसके घर पर हुआ था।

मैंने चुप चाप रह कर देखते रहने का फैसला किया ताकि पता तो चले मेरे जाने के बाद इनके बीच क्या सौदा हुआ हैं।

थोड़ी देर के बाद उन्होंने पोजीशन चेंज की। पति नीचे लेट लेट गए और भाभी उनके ऊपर पेट के बल। पति ने अपना लंड भाभी की चुत में घुसा दिया। ऊपर से संजू भाभी के ऊपर लेट गया।

दो भूरी चमड़ियो वाले मर्दो के बीच भाभी का गौरा जिस्म ऐसा लग रहा था, जैसे ब्राउन ब्रेड के बीच चीस रख दिया हो। भाभी अब सैंडविच बंद चुकी थी।

संजू अब अपना लंड भी भाभी की चुत में घुसाने की कोशिश करने लगा जहां पहले से पति का लंड घुसा हुआ था।

थोड़ी देर वो संघर्ष करता रहा और अंत में उसने थोड़ा बहुत अंदर घुसा ही दिया। भाभी तो दर्द के मारे चीखने लगी। मुझे उन पर बहुत दया आयी। इस सब की जिम्मेदार शायद मैं ही थी।

एक मेरा पति और दूसरा मेरा पहला प्यार, दोनों ही आज मेरी भाभी के साथ लगे हुए थे। कही ना कही दोनों ही मुझे धोखा दे रहे थे। देखा जाए तो मेरा पहला प्यार, मेरे पति के पहले प्यार को चोद रहा था।

फिलहाल संजू का ज्यादा देर भाभी के अंदर टिका नहीं और उसने बाहर निकाल दिया। अब उसने भाभी के पीछे वाले छेद में अपना लंड घुसा दिया। भाभी एक बार फिर चीख पड़ी। अब उनके दोनों छेद लंड से भर गए थे।

भाभी अब जोर जोर की आवाजे निकलते हुए मस्त चुदवा रही थी। मुझे जो दर्द की चीखें लग रही थी वो दरअसल मजे की थी, क्यों कि भाभी उन दोनों को जोर से झटके मारने को बोल रही थी।

भाभी का ऐसा रूप होगा ऐसा तो कभी सोचा न था। काश उनकी जगह मैं होती, एक छेद में मेरा पति तो दूसरे में मेरा पहला प्यार, कितना मजा आता। उन लोगो को मजा लेते हुए देख मेरी भी इच्छा होने लगी, पर कुछ कर नहीं सकती थी।

कमरे में उन तीनो की आवाजे गूंजने लगी। भाभी ने दोनों को बोला एक साथ झटका मारो। दोनों ने ऐसा ही किया। हर झटके साथ तीनो की एक सुर में आह निकलने लगी।

इस तरह का ट्रिपल मजा मैंने कभी जिंदगी में नहीं देखा था। ये सब देख मेरी तो पैंटी गीली हो गयी। उस वक़्त वहां कोई ओर होता तो शायद मैं खड़े खड़े ही चुदवा लेती।

इतनी देर तक चोदते और चुदवाते तीनो ही हांफने लगे, पर उनको मजा ही इतना आ रहा था, कि वो छोड़ने को ही तैयार नहीं थे।

संजू ने पति को बोला अब में आगे से मारता हु और तुम पीछे से आओ, तुमने वैसे भी प्रोटेक्शन नहीं पहना हैं तो इसको कुछ हो जायेगा। पति अपना राज तो खोल नहीं सकते थे तो वो मान गए।

संजू पीछे हटा और भाभी को पति के ऊपर पीठ के बल लेटा दिया। पहले पति ने अपना लंड भाभी की गांड में घुसा दिया और फिर संजू भाभी की टाँगे चौड़ा कर बीच में बैठ गया।

उसने अब अपना लंड पकड़ कर भाभी की चुत में घुसा दिया। एक बार फिर झटको पे झटके लगने शुरू हो गए। भाभी चिल्लाये जा रही थी और दोनों मर्द बिना रहम किये ओर जोर से झटके मारने लगे।

 
मुझे डर लगा कही आज भाभी के दोनों छेद फट ही ना जाए।

संजू चोदते हुए बोल रहा था, बहुत दिंनो से तेरी चुत मारने का मन था आज जाके पकड़ में आयी हैं। आज तो फाड़ के रख दूंगा।

भाभी भी नशे में आ गयी थी और बेशर्मी से बोली फाड़ डालो मैं भी देखु कितना जोर हैं तुम में।

पति ने अब चोदना बंद कर दिया था, शायद इतनी आवाजों में पता ही नहीं चला कब वो झड़ गए।

थोड़ी देर में संजू और भाभी के बीच बात गन्दी बातें शुरू हो गयी।

भाभी बोली चोद दे मुझको संजू जोर से चोद।

संजू और तेजी से करते हुए बोलता ले ले अपनी चुत में मेरा सब माल।

थोड़ी देर में भाभी चिल्लाते हुए झड़ गयी और उसके बाद संजू भी कपकपाते हुए झड़ गया।

काम ख़त्म कर तीनो नंगे ही बिस्तर पे आस पास लेटे थे। भाभी के पाँव दरवाजे की तरफ थे और टाँगे खुली थी।

मैं उनके दोनों छेद देख पा रही थी जहां केले की मोटाई जितनी आकार की गुफा सी बन गयी थी। दोनों छेदो से पानी रिस रहा था।

मैं अब उनकी बातें सुनने लगी।

भाभी ने कहाँ कि कल रात को अशोक अपने शहर के लिए निकल जाएगा, उसके पहले दिन का कही प्रोग्राम बनाते हैं, वैसे भी मेरे पति तो कल काम पर जाने वाले हैं।

मेरे पति ने बोला मुश्किल हैं मेरी वाइफ का क्या करेंगे। तीनो अगले दिन का प्लान बना रहे थे, और मैं बाहर खड़ी हो सुनती रही।

मेरे पति, मेरी भाभी और मेरा पहला प्यार तीनो ने मिलकर जमकर चुदने के मजे लिए और अब वो अगले दिन का दिन का भी प्लान बना रहे थे, जब कि मैं बाहर खड़े खड़े ये सब देख रही थी। और उनके देसी ग्रुप सेक्स का मजा भी ले रही थी।

मैंने अब कान लगा कर उनका प्लान जानने की कोशिश की। जितना मुझे याद हैं उसको अक्षरत मैं आपको यहाँ बताने जा रही हूँ।

भाभी: कल रात को अशोक अपने शहर के लिए निकल जाएगा, उसके पहले दिन का कही प्रोग्राम बनाते हैं, वैसे भी मेरे पति तो कल काम पर जाने वाले हैं।

अशोक (मेरे पति): कल का मुश्किल हैं, मेरी वाइफ के सामने यहाँ से कैसे निकलेंगे।

भाभी: मैं ये मौका छोड़ना नहीं चाहती, तुम पता नहीं फिर कब आओगे।

संजू: तुम दोनों का चक्कर कब से चल रहा हैं वैसे?

अशोक: मेरे चचेरे भाई की शादी के दौरान मुलाक़ात हुई और पहली नजर में प्यार हो गया।

भाभी: ये हम दोनों का पहला प्यार था।

अशोक: पहला प्यार तो पहला प्यार होता हैं। संजू तुम्हारा पहला प्यार कौन हैं?

[बाहर मेरी हालत खस्ता हो गई, कही संजू मेरा और उसका सारा राज ना खोल दे]

संजू: वो छोडो, कल का क्या प्रोग्राम हैं, आज के जैसा ही करना हैं। मेरे एक दोस्त का घर खाली हैं। वहां मिल सकते हैं।

भाभी: ठीक हैं तो कल दोपहर में कोई बहाना बना कर मैं और अशोक आ जायेंगे, एड्रेस भेज दो हमे।

अशोक: क्या बहाना मार के जायेंगे, मेरी बीवी को शक हुआ तो?

संजू: तो उनको भी ले आओ। वैसे भी एक जन कम हैं।

अशोक: यार ये मरवाएगा। मेरी बीवी को क्या बोलूंगा? मैं तुम्हारी भाभी को चोदता चाहता हूँ तो देखने के लिए तुम भी आओ।

संजू: आपने क्या कभी अपनी बीवी से पूछा हैं? हो सकता हैं उसकी भी इच्छा हो, या फिर तुम ही अपनी बीवी को शेयर नहीं करना चाहते।

अशोक: नहीं, ऐसा नहीं हैं।

संजू: क्यू आपने कभी देखा हैं क्या अपनी पत्नी को किसी के साथ करते हुए?

[मैंने सोचा, देखा तो हैं जब बच्चे पैदा करने के लिए साजिश कर रहे थे, क्लोसेट के अंदर से दो लोगो से चुदते हुए मुझे देख रहे थे और फिर बस के अंदर भी देखा था]

भाभी: संजू, तुम बडा इंटरेस्ट ले रहे हो इनकी बीवी में! क्या बात हैं?

संजू: नहीं ऐसे ही बस।

अशोक: सच सच बता, अगर कोई बात हैं तो। मैं नाराज नहीं हो होऊंगा। हम दोनों तो वैसे भी अभी अभी मिलकर इसको चोद रहे थे।

 
संजू: सच पूछो तो, जैसे ये भाभी आपके लिए प्यार हैं तो मेरा बचपन का प्यार आपकी बीवी हैं।

भाभी: क्या बात कर रहा हैं संजू? पहले कभी अहसास तक नहीं होने दिया। अशोक तुमको जलन हो रही नहीं ना?

अशोक: थोड़ी थोड़ी शायद हो रही हैं।

संजू: तो फिर अशोक कल तुम अपनी बीवी को भी ला रहे हो न?

अशोक: नहीं भाई, एक ही रात में उसको इन सब कामो के लिए समझाना नामुमकिन हैं। अगर ना मानी और शक हो गया तो हम लोग भी नहीं जा पाएंगे।

भाभी: चलो अभी कपडे पहनते हैं और कम्युनिटी हॉल चलते हैं, बहुत देर से गायब हैं, संजू की तरह कोई यहाँ ढूंढते हुए यहाँ ना जाए।

तीनो अब कपडे पहनने लगे और मैं वहां से निकल कर हॉल की तरफ बढ़ी। थोड़ी देर में वो तीनो भी वहां पहुंचे। मैंने संजू को एक कोने में अलग से बुलाया।

मैं: संजू तूने मुझको धोखा दिया, तुमको उन दोनों को रोकने के लिए भेजा था और तुम उनके साथ ही हो लिए।

संजू: मतलब तुम वापिस घर पर आयी थी और सब देख लिया! मैं क्या करता? मैं उनको उस हालत में देख कर अपने आप को मजे लेने से रोक नहीं पाया। तुमने तो वैसे भी मुझको मना कर दिया था। मैं तो भरा भराया बैठा था।

मैं: भरे भराये तो आज थे तो फिर कल का फिर प्रोग्राम बनाने की क्या जरुरत थी।

संजू: क्या बताऊ, थ्रीसम में कितना मजा आता हैं। मैंने तो तुमको भी शामिल करने के लिए बोला था पर वो लोग नहीं माने।

मैं: तुमको ये प्रोग्राम कैंसिल करना पड़ेगा। मैं घर पर कुढ़ती रहूंगी और तुम लोग वहां मजे लोगे।

संजू: ठीक हैं एक काम करते हैं, मेरे दोस्त का घर बड़ा हैं, उन दोनों को करने दो आपस में, हम दोनों दूसरे कमरे में अलग से कर लेंगे।

मैं: तुम्हारे साथ तो मैं अब कभी नहीं सोने वाली, मुझे छोड़ कर तुम किसी ओर के साथ कर रहे थे।

संजू: तुम अपने पति को धोखा देकर मेरे साथ सोइ थी वो धोखा नहीं पर मैं किसी के साथ सोया तो धोखेबाज! ये तो पाखंड हैं।

मैं: ठीक हैं, अभी क्या करना हैं, मैं पकडे नहीं जाना चाहती बस। पर एक बार थ्रीसम ट्राय करना है मुझे भी।

संजू: मेरे पास एक प्लान हैं, इन दोनों के घर से निकलने के पहले ही तुम अपनी सहेली से मिलने जाने का बोल कर मैं एड्रेस दूंगा वहा आ जाना। ये दोनों भी वही आने वाले हैं। तुम्हारा चेहरा छुपा के मैं तुम्हे अपनी एक दोस्त की तरह मिलवाऊंगा। तुम भी हमारे साथ मजे ले सकती हो बिना अपनी पहचान बताये।

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मैं: मेरे कपडे और आवाज सुन के पहचान नहीं जायेंगे वो दोनों?

संजू: मैं अपनी बीवी के कपडे लेते आऊंगा, वो पहन लेना। थोड़ी गले से आवाज निकाल कर बात करना तो आवाज बदल जाएगी और पहचान में नहीं आएगी। तुम्हारी बॉडी पर वैसे भी कोई निशान नहीं जिसको देख कर पति पहचान जाए।

मै: ठीक हैं तम एड्रेस भेजो मुझे, पर कुछ भी गड़बड़ हो तो संभाल लेना।

फंक्शन समाप्त होने के बाद हम सब लोग घर पहुंचे। मैं चिंतित थी कल के प्रोग्राम के बारे में। पूरी रात मैं ठीक से सो नहीं पायी, सोचा कही रात को ये निकल कर फिर मेरी भाभी से मिलने ना पहुंच जाए।

सुबह सुबह ही मैंने सबको बता दिया कि मैं दोपहर से पहले अपनी सहेली से मिलने जाने वाली हूँ और थोड़ा देर से ही आउंगी। सुबह के सारे काम ख़त्म करने के बाद माँ से पता चला कि भाभी बाजार जाने वाली हैं अपनी कुछ साड़िया बनवाने के लिए।

नाश्ता करते हुए पति ने भी बताया कि इसी शहर में उनका एक दोस्त रहता हैं, अब यहाँ आया हूँ तो सोचा उससे मिलता चलू, फिर कब मौका मिलेगा।

मैं घर से निकल गयी और संजू के बताये एड्रेस पर पहुंच गयी। वो वहां पहले से मौजूद था। पहले उसने मुझे अपनी हेयर स्टाइल बदलने को कहा। फिर उसने अपने साथ लाये हुए सलवार कमीज मुझे दिए और कपडे बदलने को कहाँ।

यहाँ तक कि मेरी ब्रा और पैंटी भी वो नयी खरीद कर लाया था। नाप तो मेरा वो कुछ दिन पहले ही ले चूका था शायद।

उसके दोस्त की बीवी का मेक अप का सामान पड़ा था, तो नए सिरे से अलग तरह का मेकअप करवाया। उसने अब मुझ पर अलग तरह का परफ्यूम छिड़का जो मैं कभी इस्तेमाल नहीं करती।

मैंने जो थोड़े बहुत गहने पहने थे वो भी खुलवा दिए, और वहां पड़े नकली गहने पहना दिए। अब मेरे ऊपर मेरी कोई पहचान नहीं बची थी।

उसने अब अपने बैग से चार मास्क निकाले। उसने कहाँ कि हम चारो ये मास्क पहन कर ही करेंगे।

इन सब के बीच मैं उसको अलग अलग तरह की आवाज बना के दिखा रही थी। हमने एक आवाज को फाइनल कर लिया था। वैसे भी मास्क पहना होगा तो आवाज वैसे भी दब के थोड़ी अलग ही आएगी।

 
उसने अब अपने बैग से चार मास्क निकाले। उसने कहाँ कि हम चारो ये मास्क पहन कर ही करेंगे।

इन सब के बीच मैं उसको अलग अलग तरह की आवाज बना के दिखा रही थी। हमने एक आवाज को फाइनल कर लिया था। वैसे भी मास्क पहना होगा तो आवाज वैसे भी दब के थोड़ी अलग ही आएगी।

हमने थोड़ा इंतज़ार किया और फिर दरवाजे की घंटी बजी। शायद वो दोनों आ गए थे। मैंने तुरंत एक मास्क पहन लिया। बाकि के तीनो मास्क लेकर संजू दरवाजा खोलने गया।

मैं अंदर बैडरूम में ही इंतजार करने लगी। मुझे बाहर उनकी आवाजे आ रही थी, संजू उनको बाहर समझा रहा था कि मेरी एक दोस्त भी हमारा साथ देगी। तुम लोग उसके लिए अनजान हो तो एक दूसरे की पहचान छुपाना जरुरी हैं तो सब मास्क पहनेंगे।

मुझे अंदर बहुत डर लग रहा था। अगर पकड़ी गयी तो बहुत फजीहत होगी। मेरे पति के सामने मेरी इमेज ख़राब हो जाएगी।

वो तीनो मास्क पहन कर अंदर दाखिल हुए। संजू ने सबको मिलवाया, मेरा नाम पूर्वी बताया। अपने ही परिवार वालो से मुझे मिलवाया जा रहा था।

भाभी बटन वाला शर्ट और जीन्स पहने थी। उस टाइट शर्ट से उनके उभरे हुए वक्ष बहुत सेक्सी लग रहे थे, और स्किनी जीन्स से उनके कूल्हे गजब ढा रहे थे। संजू ने भाभी के फिगर की तारीफ़ की।

हम सब लोग डबल बेड पर घेरा बना के बैठ गए। भाभी ने बोला जल्दी शुरू करते हैं वापिस घर भी जाना हैं। संजू बोला कपडे उतारने से शुरू करते हैं और लेडीज फर्स्ट।

ये कहते हुए उसने भाभी के शर्ट के उपर के दो बटन खोल दिए। बटन खुलते ही भाभी के मम्मे शर्ट के अंदर से झाँकने लगे। संजू ने अपनी उंगलिया उन मम्मो पर रख दी और दबाने लगा।

पति ने बोला मजे लेना हैं तो पुरे खोल के ले, और उन्होंने भाभी के शर्ट को खिंच जीन्स के अंदर से निकाल लिया और शर्ट के बाकी बटन भी खोल दिए।

भाभी का गुलाबी ब्रा दिखने लगा और उसमे से बाहर निकलते हुए मम्मे। संजू ने भाभी के पीछे जाकर शर्ट को कंधो से होते हुए हाथों से पूरा निकाल दिया।

पति अब अपना हाथ भाभी के ब्रा में घुसा मम्मे मसलने लगे। तब तक पीछे से संजू ने भाभी के ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को शरीर से अलग कर दिया। भाभी बोली मुझ अकेली को ही नगी करोगे या पूर्वी को भी करोगे।

मेरे पति अब भाभी के मम्मे छोड़ कर मेरे सीने पर हाथ रख मेरे मम्मे दबा कर महसूस करने लगे। अरे बाप रे बहुत जबरदस्त हैं ये तो।

पति मुझसे पूछने लगे ये तुम्हारा कुरता निकाल दू? मैंने हां बोला तो उन्होंने बिना देरी किये मेरा कुर्ता ऊपर कर सर से निकाल दिया।

मैंने मास्क पकड़ कर रखा ताकि कुरता निकलते वक़्त मास्क ना निकल जाये। उन्होंने अब मेरा ब्रा भी निकाल दिया।

मेरे एकदम टाइट तने हुए मम्मे देख कर संजू भाभी को छोड़ कर मेरे पास आ गया। मेरा एक मम्मा पति तो दूसरा संजू दबा रहा था। भाभी अकेले पड़ गयी।

भाभी अब आगे बढ़ी और उन दोनों का हाथ मेरे मम्मो से हटाते हुए मेरे सीने से चिपक गयी। हम दोनों के मम्मे आपस में एक दूसरे के दबाने लगे। उनके मम्मे एक दम नरम थे और मेरे टाइट मम्मो से पुरे दब गए।

दोनों मर्द हम दोनों की पीठ पर हाथ फेरने लगे। संजू ने मेरा हाथ ऊपर किया और मेरी कांख के नीचे और मम्मो के बगल में अपना मुँह और जबान फेरने लगा। मेरे मीठी सी गुदगुदी होने लगी और करंट दौड़ गया।

मेरा रिएक्शन देख पति ने भी भाभी के ऐसा ही किया और बगल में चूमने लगे। जिससे भाभी की सिसकिया निकलने लगी।

उन दोनों मर्दो ने ऐसा मास्क पहना था जिसमे नाक के नीचे के हिस्सा कवर नहीं था जब कि लड़कियों के मास्क में पूरा चेहरा कवर था।

जिससे वो लोग हमें चुम पा रहे थे पर हम कुछ चूसने का मजा नहीं ले सकते थे। एक तरह से अच्छा भी था मेरी पहचान पूरी छुपी रहती।

उन दोनों की चुम्मा चाटी चालू ही थी कि संजू का फ़ोन बजा। उसने किसी से कहाँ कि “आ जाओ, मैं यही हु”।

 
मेरे पति ने चाटना बंद किया और हम तीनो संजू की तरफ देखने लगे।

पति ने पूछा “कोई आ रहा हैं क्या यहाँ?”

संजू ने भाभी की तरफ देखा और पूछा “ये जीन्स की पैंट किसने खरीदी?”

भाभी ने जवाब दिया कि उनके पति ने खरीदी हैं।

संजू ने बोला कि “तो इसको निकाल देते हैं”।

संजू ने अब भाभी की पैंट और पैंटी निकाल दी और बोला कि आपके पति अमित यही आ रहे हैं तो आपकी पैंट पहचान जायेंगे, इसको छुपा दो कही।

हम तीनो घर वाले बिस्तर से उछल कर नीचे आ खड़े हुए।

भाभी ने पूछा “क्या मजाक हैं ये?”

संजू ने कहाँ “डरो मत तुम लोगो ने मास्क पहन रखा हैं। सुबह अमित फ़ोन पर बोल रहा था कि फंक्शन में काम करके बहुत थकान हो गयी तो मैंने उसको यहाँ आने को बोल दिया। भाभी तुम चिंता मत करो अपने पति की आँखों के सामने किसी से चुदवाने का मजा ही कुछ ओर होता हैं, उसके बारे में सोचो। आज इस चीज के भी मजे लेके देखो।”

भाभी एक दम तनाव में आ गयी साथ में मेरे पति भी। उनका तो आधा मास्क भी नीचे से खुला था।

मगर सबसे ज्यादा अगर कोई तनाव में था तो वो थी मैं। ये सोच कर ही मैं सिहर उठी कि मैं अपने ही भाई के सामने नंगी होउंगी। और अगर उसने मुझे यहाँ वहा हाथ लगा दिया तो गजब ही हो जायेगा। और अगर उन्होंने अनजाने में ही सही मेरे साथ कुछ करने की कोशिश कि तो पाप हो जायेगा।

मैंने तुरंत कुर्ता उठाया और कमरे से बाहर जाने लगी। संजू ने मेरा हाथ पकड़ कर रोक लिया। पति और भाभी आश्चर्य से देखने लगे कि इस अनजानी लड़की को क्या हो गया। भागना तो उन दोनों को चाहिए था।

संजू ने मुझको रोकते हुए कहा, “घबराओ मत तुमने भी मास्क पहन रखा हैं। अगर तुमको उस नए बन्दे से नहीं करवाना तो मैं संभाल लूंगा। जब तक तुम इस कमरे में हो तब तक ही तुम्हारी पहचान सुरक्षित हैं, बाहर गयी तो मेरी गारंटी नहीं।”

मैं उसके शब्दों में छुपी चेतावनी समझ गयी। मेरे पास रुकने के अलावा कोई चारा नहीं था।

संजू ने मुझको बोला कि भाभी की पहचान छुपाने में मदद करू। संजू ने बोला कि अमित पांच मिनट में आने वाला हैं। सब बिंदास मजे लेते रहो कोई पकड़ा नहीं जायेगा।

मेरी तरह मैंने भाभी का भी मेकअप और बाल थोड़े अलग किये। अपने आप को आईने में देखने के बाद भाभी बहुत कॉंफिडेंट नजर आयी। भाभी बहुत उत्साहित थी, शायद काफी समय से वो ऐसा कुछ करना चाह रही थी।

थोड़ी देर में डोर बेल बजी, संजू ने एक और मास्क बैग से निकाला और बाहर अमित को लेने गया। मैं थरथर कांप रही थी। अपने लालच की वजह से मैं इस शर्मनाक स्थिति में फंस चुकी थी। मैंने शर्म के मारे अपने कुर्ते से सीना ढक लिया।

 
थोड़ी देर में डोर बेल बजी, संजू ने एक और मास्क बैग से निकाला और बाहर अमित को लेने गया। मैं थरथर कांप रही थी। अपने लालच की वजह से मैं इस शर्मनाक स्थिति में फंस चुकी थी। मैंने शर्म के मारे अपने कुर्ते से सीना ढक लिया।

संजू और अमित मास्क पहने हुए कमरे में आये। संजू ने फर्जी नामों से सबका परिचय कराया।

संजू बोला एक के ही दर्शन करने को मिलेंगे दूसरे का नहीं?

अमित आगे बढ़ कर मेरे कपडे निकालता, उसके पहले ही संजू आगे बढ़ा और मेरा कुरता मुझसे छीन लिया। घबराहट से मेरा चेहरा पूरा पसीना पसीना हो गया।

संजू ने अब मेरे सलवार का नाड़ा खोलते हुए उसको पैंटी सहित पैरो से बाहर निकाल दिया।

मैंने दोनों पांवो को तुरंत बंद करते अपना अंग छुपा लिया। संजू ने भाभी को मेरे पास बैठा दिया। तीनो मर्द अब हमारे सामने आ खड़े हुए। संजू ने दोनों लड़कियों को पाँव चौड़े कर अपनी चुत दिखाने को कहा।

भाभी ने दोनों पाँव चौड़े कर अपनी चुत खोल दी। बारी बारी से संजू और अमित ने अपनी उंगलिया उनकी चुत पर फिरा निरिक्षण किया।

संजू ने मुझे भी पाँव खोलने को कहा पर मैंने ऐसा नहीं किया। उसने अब आगे बढ़ कर जबरदस्ती मेरा एक पाँव पकड़ हटाने की कोशिश की, दुसरा पाँव अमित ने पकड़ा और दोनों ने विपरीत दिशा में पाँव को हटाते हुए मेरी चुत खोल दी।

अमित ने अपनी ऊँगली मेरी चुत पर घुमाई। मेरा दिल धक् से रह गया। ये क्या अनर्थ हो गया। इस चीज की मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

मैंने जोर लगा के फिर पाँव जोड़ने की कोशिश की पर अमित वहाँ उंगलिया फेरता रहा। संजू ने फिर मेरा पैर छोड़ा और अमित को भी जाने देने को कहा। अमित ने मुझे छोड़ा और मेरी जान में जान आयी।

उन्होंने हम दोनों लड़कियों को बिस्तर के कोने पे, पाँव घुटनो के बल मोड़ कर उल्टा बैठा दिया। हमारे गांड बाहर की तरफ थी इस पर वो लोग बारी से चमाट मार रहे थे। बीच बीच में जोर से पड़ रही थी जिससे दर्द के मारे मेरी और भाभी की चीख निकल रही थी।

उन तीनो मर्दो ने अब अपने सारे कपडे निकाल दिए। संजू ने बैग से ढेर सारे कंडोम निकाले और साइड टेबल पर रख दिए, उन तीनो ने एक एक कंडोम पहन लिया।

संजू ने अमित को बोला कि वो भाभी का मजा ले और वो मेरी लेगा। मेरे पति दोनों में से किसी का भी साथ दे सकते हैं।

अमित बोला ये गलत हैं, सबको सबके साथ मौका मिलना चाहिए।

संजू ने कहा बाद में देखते हैं, पहले शुरू तो करो। पति ने मुझे चुना क्यों कि भाभी को तो उन्होने कल रात को ही चोदा था।

मैं और भाभी अभी भी उसी पोजीशन में थे। उन्होंने हम दोनों को डॉगी स्टाइल में बैठाया।

संजू मेरे पीछे आया और अमित भाभी के पीछे और एक साथ दोनों ने हमारी चुत में प्रवेश किया। इतने तनाव के बाद लंड अंदर घुसते ही जैसे मुझे बहुत चैन मिला।

 
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