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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

पति आगे से मेरे दोनों हाथों के गेट के अंदर अपना मुँह घुसा कर मेरे लटकते स्तनों को अंगूर की भांति चूसने लगे। मेरी तो सिसकिया निकलने लगी। मैं आँखें बंद कर इसका आंनद लेने लगी।

संजू और अमित इतना जोर से चोद रहे थे कि उनके शरीर के हमारे नितम्बो से टकराने की मुझे जोर जोर की थाप थाप की आवाज रही थी।

मैं तो उन जोर के झटको को महसूस भी कर पा रही थी। संजू का लंड मेरी चुत को रगड़ते हुए जोर जोर से अंदर बाहर हो रहा था।

पति मेरे स्तनों को छोड़ कर थोड़ा ओर अंदर खिसके और अपने मुँह से मेरे पेट को चूमने और चाटने लगे, साथ ही अपने हाथों से मेरे दोनों मम्मो को दबाने लगे।

कुछ मिनटों तक मेरे ऐसे ही मजे लेने के बाद पति ने अब भाभी की तरफ रुख किया।

पति ने अपना एक हाथ भाभी की कमर और पीठ पर तो दूसरा भाभी के पेट और मम्मो पर एक साथ फेरने लगे। मम्मो पर हाथ आते ही वो उनको दबा भी लेते और फिर फेरते हुए पेट की तरफ जाते।

मेरे पति ने बोला “अब कोई छोडो मुझे भी मौका दो अंदर डालने का।”

संजय ने बोला इधर आओ और मुझे चोदना छोड़ा। संजू अब नीचे लेट गया और मुझे उसके ऊपर उलटा लेटने को कहा।

मैं उसके ऊपर पीठ के बल लेट गयी, संजू ने अपना गीला लंड मेरी गांड के छेद में डाल दिया। मेरी भी अब प्रैक्टिस हो चुकी थी गांड में लेने की तो ज्यादा दर्द नहीं हुआ।

पति ने अब मेरी टाँगे चौड़ी की अपने हाथ को मेरी चुत पर और दरार में फेरने लगे। थोड़ा आगे बढ़कर अब होने अपना कंडोम लगा लंड मेरी चुत में उतार दिया।

मेरे दोनों छेद भरते ही उन दोनों ने आगे पीछे झटके मारने शुरू कर दिए। मैं अपने दोनों छेदो में मोटे लंड की रगड़ को महसूस करते ही पागल हुए जा रही थी।

संजू शिकायत कर रहा था कि पति की गोटिया उसके लंड से भी टकरा रही हैं। बहुत देर तक हम लोग इसी स्तिथि में चुदने के मजे लेते रहे।

उधर भाभी की जोर जोर की आ आ आ ऊ ऊ ऊ की आवाजे लगातार आने लगी। लगता था जैसे वो झड़ने वाली थी। संजू ने अमित को रुकने के लिए बोला कि भाभी को वो झड़ायेगा।

पति ने और संजू ने अपना लंड मेरे छेदो निकाला और हटे। उधर अमित ने भाभी को चोदना बंद किया, वैसे ही भाभी के आवाजे निकलनी बंद हो गयी।

संजू ने अपना कंडोम बदला और अमित की जगह ली। अब उसने अपना लंड भाभी की चुत में घुसा चोदना शुरू किया। भाभी की बंद हुई टेप एक बार फिर शुरू हो गयी।

अमित ने भाभी के लटकते मम्मो को दबाना शुरू कर दिया। जैसे जैसे भाभी की सिसकारियां बढ़ती गयी, संजू ने और जोर के झटके मारना शुरू कर दिया।

फचाल फचाक की आवाजे गूंजने लगी सबका ध्यान भाभी की तरफ गया। वो बुरी तरह से चिल्ला रही थी। उनका तो जैसे एक सपना पूरा हो रहा था।

उनका पति उनको सहला रहा था, जबकि दुसरा मर्द उनके पति के सामने उनको जम कर चोद रहा था। भाभी अब संजू को ललकार रही थी, चोद जितना दम लगा के चोद सकता हैं मेरा पति कुछ नहीं कर सकता तेरा।

अमित भी बोल रहा था लगता हैं बहुत भरी भराई बैठी हैं ये अपने पति से, चोद संजू इसकी चुत इतनी जोर से की इसका पति इसकी चुत देखे तो आगे से चुदने के लिए इसको तेरे पास ही भेजे।

 
अमित भी बोल रहा था लगता हैं बहुत भरी भराई बैठी हैं ये अपने पति से, चोद संजू इसकी चुत इतनी जोर से की इसका पति इसकी चुत देखे तो आगे से चुदने के लिए इसको तेरे पास ही भेजे।

अगले कुछ मिनटों में संजू ने चोद चोद कर भाभी का सब रस निकाल दिया। भाभी चीखते चिल्लाते हुए झड़ गयी। वो थक हार के वही झुक गयी पर संजू इतना जोश में था कि भाभी को चोदता ही रहा।

उसने अब भाभी को बोला कि देखता हु तेरा पति कैसे तुझे मेरे से चुदने से बचता हैं। हर बार ये ले.. ये ले बोलते हुए अंदर जोर के झटके मारने लगा और बोला बुला अपने पति को।

इतने जोर के अंदर पड़ते झटको से भाभी दर्द के मारे कराहने लगी। संजू ऐसे ही चिल्लाते हुए झड़ गया।

झड़ते हुए वो भाभी को धक्का देते हुए उन पर लेट गया और लेटे लेटे ही कुछ ओर आखिरी के झटके मारते हुए अपना रहा सहा पानी भी कंडोम में निकाल दिया।

संजू और भाभी के धराशाई होते ही अमित अब मेरे और पति की तरफ मुड़ा। हम दोनो का धीरे धीरे चोदते हुए सारा ध्यान भाभी और संजू के बीच हुए घमासान पर ही था।

अमित पति को बोला अब मुझे भी मौका दो इसे चोदने का। मैं डर गयी कि ये पाप नहीं होना चाहिए। संजू को मुझे बचाना चहिए पर वो तो गिरा पड़ा था।

मेरे मन में बस यही चल रहा था, की अब क्या होगा?

अमित ने मेरे पति की तरफ देख कर प्रस्ताव रखा कि अब वो करना चाहता हैं। मैं दुआ करने लगी कि मेरे पति मेरी इज्जत मेरे ही भाई के हाथों लूटने को ना दे दे।

पर आज शायद मेरी किस्मत अच्छी नहीं थी। मेरे पति ने मेरे ऊपर से उठना शुरू कर दिया, और मैंने डर के मारे अपने दोनों हाथों से उनको पीठ को दबोच कर फिर अपने सीने से चिपका लिया।

अमित बोला – लगता हैं ये तुमसे ही चुदवाएगी, पर सबका नंबर तो लगना चाहिए, बोलते हुए मेरे हाथों की पकड़ को ढीला करने लगा।

पति भी जोर लगा के मेरे ऊपर से हट गए। पति के हटते ही मैंने करवट बदल अमित से दूर जाने की कोशिश की, पर उसने मेरा एक हाथ पकड़ ही लिया।

अमित मुझे अपनी ओर खींचने लगा, तब तक पति मेरी दूसरी तरफ आये और मेरा दूसरा हाथ पकड़ लिया।

उन दोनों ने मेरा एक एक हाथ बिस्तर से सटा के दबा के रखा था। अब उन्होंने अपने दूसरे हाथ से झपट्टा मारते हुए मेरा एक एक मम्मा दबोच लिया और मसलने लगे।

मैं अपने पाँव पटक पटक छटपटाने लगी। एक बेलगाम घोड़ी को इस तरह बिदकते देख उनको ओर ज्यादा मजा आ रहा था।

अमित ने पति को बोला “इसके पाँव पकड़” और दोनों ने मेरे मम्मे छोड़ दिए।

पति ने मेरा एक पाँव पकड़ कर बिस्तर पर ही दबा लिया। मैं अपना दूसरा पाँव पटकती रही।

 
अमित ने अब अपनी एक टांग लंबी कर के मेरे तड़फते हुए पाँव में लपेट कर झकड़ लिया ताकि में उसे हिला ना पाऊ।

अब उसने मेरी टांग को दूसरे से दूर करना शुरू कर दिया। मेरी दोनों टांगो के बीच का गैप बढ़ने लगा और चुत भी खुलने लगी।

अब अमित ने अपना हाथ मेरी खुली चुत पर रख दिया। अब वो मेरी चुत की दरारों में ऊँगली फिराने लगा और मैं अपने आप को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करती रही।

जिन दो लोगो को मेरी रक्षा करनी चाहिए थी वो दोनों ही अभी अनजाने में मेरे भक्षक बने हुए थे। मेरे बचने की सारी आशाएं अब संजू पर थी, पर वो मेरी भाभी के ऊपर निढाल सा पड़ा था।

अमित अपनी ऊँगली ओर भी नीचे ले गया और मेरी चुत के छेद के आस पास गोलाई में फिराने लगा।

दो तीन बार गोल गोल फिराने के बाद उसने अपनी ऊँगली का ऊपर का एक हिस्सा मेरी चुत में घुसा दिया। जिससे मेरी एक जोर की आह निकली। अगले दो सेकंड में उसकी पूरी की पूरी ऊँगली मेरे अंदर उतर चुकी थी।

अब वो मेरे अंदर अपनी ऊँगली चारो तरफ फिराते हुए मजे लेते कहने लगा, “अंदर तो मौसम बहुत गर्म हैं और गीला हैं।”

फिर उसने अपनी ऊँगली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी। मेरी ना चाहते हुए भी सिसकिया निकलने लगी।

वो दोनों हँसने लगे और बोले “अब आया न मजा इसको भी।”

तभी मेरी सिसकिया सुनकर संजू उठ गया, अपना सर ऊपर उठाते हुए अमित पर चिल्लाया “अबे छोड़ ना अमित, उसको तेरे से नहीं कराना तो क्यों पीछे पड़ा हैं”

 
अब वो मेरे अंदर अपनी ऊँगली चारो तरफ फिराते हुए मजे लेते कहने लगा, “अंदर तो मौसम बहुत गर्म हैं और गीला हैं।”

फिर उसने अपनी ऊँगली अंदर बाहर करनी शुरू कर दी। मेरी ना चाहते हुए भी सिसकिया निकलने लगी।

वो दोनों हँसने लगे और बोले “अब आया न मजा इसको भी।”

तभी मेरी सिसकिया सुनकर संजू उठ गया, अपना सर ऊपर उठाते हुए अमित पर चिल्लाया “अबे छोड़ ना अमित, उसको तेरे से नहीं कराना तो क्यों पीछे पड़ा हैं”

अमित ने अपनी ऊँगली मेरी चुत से बाहर निकाल दी। संजू अब उठ खड़ा हुआ। अमित ने मेरे हाथ और पाँव पर पकड़ भी छोड़ दी। पति ने भी मुझे छोड़ दिया। और अमित बिस्तर के कोने पर जाकर बैठ गया।

मैं भी अपने घुटने मोड़ कर बैठ गयी और अपने सीने से चिपका कर अपना मुँह घुटनो के बीच छुपा लिया।

संजू ने भाभी का हाथ पकड़ कर उनको भी उठाया और उनको बोला “चलो हम वाशरूम में खुद की थोड़ी सफाई करके आते हैं।”

अमित ने अपना कंडोम निकाल कर फेंक दिया जो भाभी पर यूज़ किया था। मैंने सर उठा के देखा, संजू और भाभी कमरे के बाहर निकल गए।

तभी अमित ने अब दूसरा कंडोम पहन लिया। मैं डर गयी उसके इरादे नेक नहीं लगते।

मैं सही थी, पर कुछ समझ पाती उससे पहले ही अमित पीछे मुड़ा और पति से बोला “संजू गया, अब लेते हे इसकी फिर से”।

उन दोनों ने मुझे फिर से पकड़ लिया, मैंने विरोध किया। उन्होंने मुझे घुटनो के बल बैठाया और मेरी पीठ को दबाते हुए मुझे मुँह के बल नीचे झुका दिया।

मेरा मुँह मास्क सहित बिस्तर से चिपका था और पति ने पीठ से दबा कर मुझे वहां चिपका ही रहने दिया।

अमित अब मेरे पिछवाड़े आ गया था और मेरे दोनों कूल्हो को अपने हाथों में भर लिया। उसका कड़क लंड रह रह के मेरे नितंबो को छू रहा था।

अब शायद वो घड़ी आ चुकी थी जब भाई बहन का रिश्ता तार तार होने वाला था। एक पाप होने वाला था। मेरी आँखों के सामने एक पिक्चर रील चल रही थी जिसमे मेरे पिछले सारे कांड चल रहे थे।

मैं आज जिस स्तिथि में थी उसकी जिम्मेदार शायद मैं ही थी। आँखों के सामने चलती हुई वो पिक्चर अचानक थम सी गयी, जब मैंने एक कड़क मांस का लोथड़ा मेरी चुत में धीरे धीरे घुसते हुए महसूस किया। मेरी दिल की धड़कने कुछ सेकंड्स के लिए रुक सी गयी थी। भाई बहन के रिश्ते पर दाग लगा गया था।

अमित का लंड पूरा अंदर तक आ गया था और मेरी बच्चे दानी को थपकी मारते हुए फिर धीरे धीरे बाहर आने लगा। पूरा बाहर आने से पहले ही वो रुक गया और एक बार फिर रगड़ करते हुए अंदर जाने लगा। मेरी रुकी धड़कने एक बार फिर चलने लगी।

मुझे उन दोनों की हंसी कही दूर से आती हुई सुनाई पड़ रह थी, जब की वो दोनों मेरे पास ही बैठे थे।

अमित मुझे पीछे से जोर जोर से चोद रहा था और लाचारी में मेरे मुँह से अनायास ही निकल गया “बहनचोद”। जो कि एक कड़वा सत्य भी था।

गाली सुन उसको ओर जोश आ गया और वो ओर भी जोर के झटके मारने लगा।

 
इस सच को स्वीकारने के अलावा मेरे पास कोई ओर चारा न था। अमित के लंड के अंदर बाहर जाते झटको के साथ मेरा सारा विरोध और छटपटाहट धीरे धीरे शांत हो चुकी थी।

अब विरोध करने के लायक कुछ बचा ही न था। पति ने भी मेरी पीठ पर से हाथ हटा लिया था।

अमित बोला “देखा अंदर लंड जाते ही अच्छी अच्छी घोड़िया शांत हो जाती हैं” और दोनों कहकहे लगाने लगे। मैं अपना चेहरा बिस्तर में घुसाए मास्क के अंदर जैसे रो रही थी।

अमित का इसका कोई असर नहीं हुआ, उसने झटके मारना जारी रखा और सिसकिया भी निकालते जा रहा था। मेरे पहले विरोध करने पर वो जितने जोर के झटके मार रहा था अब मेरा विरोध ख़त्म होने पर उसके झटको में उग्रता नहीं रही थी।

संजू और भाभी ने हँसते हुए एक बार फिर कमरे में प्रवेश करते हैं। वहाँ की हालत देखकर संजू दंग रह गया।

वो एक बार फिर अमित पर चिल्लाया “अरे अमित तुझे मना किया था इसको छोड़ दे पर तू फिर शुरू हो गया।”

अमित ने भी जवाब दिया “तेरी क्या बहन लगती हैं जो बार बार बचा रहा हैं?”

अब संजू भला क्या बोलता। मुझे तो इसमें ही सांत्वना मिल गयी कि पति ना सही मेरा पहला प्यार ही मुझको बचाने की कोशिश तो कर रहा हैं। हालाँकि इस स्तिथि में फंसाने का जिम्मेदार भी वो ही था।

संजू ने अमित के सामने प्रस्ताव रखा कि भाभी एक बार फिर से तैयार हैं करवाने के लिए तो वो उन के साथ कर ले और मुझे छोड़ दे।

पर अमित ने मना कर दिया और भाभी को बोला “माफ़ करना पर आपको थोड़ी देर पहले ही चोदा था पर कुछ नया नहीं लगा, पर इस पूर्वी को चोदने का एक अलग ही नशा आ रहा हैं।”

बाकि लोग तो वैसे भी समझ चुके थे कि भाभी को तो वैसे भी अमित रोज चोदता हैं तो मजा कैसे आएगा।

संजू अब मेरी पीठ पर हाथ फेर सहलाने लगा और बोला “चिंता मत कर शरीर ही तो हैं, कौन चोदता हैं क्या फरक पड़ता हैं, तुम मजे लो।”

अब पति ने भी अमित से डिमांड की के मिलकर करते हैं। अमित मान गया एक से भले दो। अमित और पति मिलकर मुझे बिस्तर से उतार नीचे लाये।

पति एक कुर्सी पे जाकर बैठ गए और मुझे अपनी गोद में बैठा लिया। अमित ने मेरे दोनों पैर ऊपर उठाये और घुटनो के बल मोड़ते हुए पति की दोनों जांघो पर मेरे दोनों पैर के पंजे टिका दिए।

मैं एक ग़ुलाम की तरह उनके आदेश मानने के अलावा कुछ कर भी नहीं सकती थी।

पति ने अब अपना कंडोम निकाल दिया और अपना लंड पकड़ा और मेरी गांड में घुसाना शुरू कर दिया। दर्द से मेरी भी एक चीत्कार निकली। उन्होंने अब अपना पूरा लंड मेरी गांड में उतार दिया और अब मेरी कमर पकड़ कर मुझे ऊपर नीचे करने लगा।

मेरे पति ने अब अपनी दोनों टाँगे फैलानी शुरू की जिससे उस पर रखी मेरी टाँगे भी खुलने लगी। संजू और भाभी बिस्तर पर बैठे इस नज़ारे का आनंद ले रहे थे।

अमित अब आगे बढ़ा और हम दोनों की टांगो के बीच आकर मेरी चुत को रगड़ने लगा और अपना अंगूठा चुत की खुली दरार में डाल कर फिराने लगे। मैं भी अब तड़पने लगी थी और सिसकिया मारने लगी।

अब अमित घुटनो के बल बैठा और अपना लंड पकड़ मेरी चुत की खुली दरारों में पर ऊपर नीचे रगड़ने लगा। रगड़ते हुए अचानक मेरे खुले छेद में उसने अपना लंड घुसेड़ दिया। अमित ने अपने दोनों हाथ मेरे मुड़े घुटनो के नीचे डालें और पाँव को थोड़ा उठा दिया।

 
अब अमित घुटनो के बल बैठा और अपना लंड पकड़ मेरी चुत की खुली दरारों में पर ऊपर नीचे रगड़ने लगा। रगड़ते हुए अचानक मेरे खुले छेद में उसने अपना लंड घुसेड़ दिया। अमित ने अपने दोनों हाथ मेरे मुड़े घुटनो के नीचे डालें और पाँव को थोड़ा उठा दिया।

एक तरफ अमित सामने से आगे पीछे झटके मार कर मजे दिला रहा था, तो नीचे से मेरा पति अपना लंड मेरी गांड में अंदर घुसाए ऊपर नीचे करने की कोशिश कर रहा था।

पति ने अब मेरी कमर छोड़ी और मेरे दोनों मम्मे पकड़ लिए और मसलने लगे। फिर उन्होंने मेरी तनी चूंचिया दो ऊँगली में दबा नॉब की तरह घुमाने लगा.

मेरा भाई और पति मेरे दोनों छेदो में अपना लंड घुसाए मुझे मजा दिला रहे थे। मैं भी अब अह्ह्ह्ह उह्ह्ह करते हुए लगातार सिसकिया निकाल रही थी।

क्योकि अंत में मै भी थी तो एक औरत, उस मजे को नजर अंदाज भी नहीं कर सकती थी।

पति भी अब जोर जोर से सिसकिया निकालने लगे और मेरी चूंचिया छोड़ मेरी कमर पर हाथ रख एक बार फिर मुझे ऊपर नीचे करने लगा। थोड़ी ही देर में उन्होंने जोर की चीख निकाली और उनका सारा गरम पानी मेरी गांड में छूट गया।

अमित अब भी मुझे आगे से चोदे जा रहा था। हम तीनो की हालत देख संजू और भाभी का फिर से मूड बनने लगा।

संजू हमारी तरफ टाँगे कर बिस्तर पर लेट गया और भाभी हमारी तरफ पीठ कर संजू पर झुकी। उनका मुँह दूसरी तरफ था तो भाभी ने हिम्मत कर अपना मास्क निकाल दिया और संजू का लंड चूसने लगी।

जबकि उनको इतना भी डर नहीं था कि उनका चेहरा उनके पति को दिख जाएगा।

अपने पति और भाई से एक साथ चुदवाते हुए, ना चाहते हुए भी मैं आनंद सागर में हिचकोले खा रही थी। पति मेरी गांड में ही झड़ चुके थे। उधर भाभी उत्साह में अपना मास्क निकाले संजू का लंड चूस रही थी।

पति का हो चूका तो उन्होंने कहाँ “मेरा हो गया, मुझे नीचे से निकलने दो, फिर तुम दोनों करते रहना”।

अमित ने अपना लंड मेरी चुत से बाहर निकाला और पीछे हटा। मैं पति के ऊपर से नीचे उतरी। पति के लंड से निकला हुआ पानी मेरी गांड में जमा था जो लंड के बाहर आते ही रिसने लगा।

पति को पूरा लंड पानी से तरबतर हो गंदा हो चुका था। पति बोले मैं वाशरूम जाकर साफ़ करके आता हूँ।

अमित ने मुझको बोला “अब बिस्तर पर करते हैं।” मुझे ले जाकर संजू के पास लेटा दिया।

मैंने देखा भाभी ने मास्क नहीं लगा रखा हैं और उनका चेहरा थोड़ा दिख रहा हैं, अमित के मेरे पास आते ही उसको भाभी का चेहरा दिख सकता हैं, पर भाभी तो चूसने में इतनी मगन थी कि उनको कोई अहसास ही नहीं था इस बात का।

संजू ने समय रहते एक हाथ से भाभी का चेहरा ढक लिया और दूसरे हाथ से मास्क उठा कर भाभी के चेहरे के साइड में लगा दिया। अमित ने मेरी टाँगे चौड़ी कर फोल्ड कर दी और झुक कर अपने मुँह से मेरी चुत चाटने लगा।

थोड़ी देर चाटने के बाद अमित मुझसे बोला “ये पास वाली अपना मास्क हटा के लंड मुँह में ले रही हैं, तू भी ऐसा ही कर।”

अमित ने अपना कंडोम निकाल कर फेंक दिया। मेरी तरफ टाँगे कर सीधा लेट गया और मुझे उस पर लेट कर 69 पोजीशन बनाने को कहा। मैं उसके कहे अनुसार उस पर लेट गयी। उसके होंठ एक बार फिर मेरी चुत पर चलने लगे। उसका लंड मेरे मास्क के नीचे था।

अमित ने मुझे उसका लंड भी मुंह में लेने को कहा। मैंने डरते हुए उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा और एक अजीब सी घबराहट हुई और उसे छोड़ दिया।

उसने थोड़ा जोर से फिर मुझे मुँह में लेने को कहा। मुझे लगा कही वो आकर मेरा मास्क ही ना हटा दे। उसका लंड रह रह कर फडफडा रहा था और ऊपर नीचे हो रहा था।

 
मैंने एक बार फिर उसका लंड अपने हाथ में लिया। पति बाहर गए थे और भाभी दूसरी तरफ मुँह कर संजू का लंड चूसने में लगी थी।

मैंने अपना मास्क थोड़ा ऊपर उठा कर ललाट पर कर दिया और आँखें बंद कर ये सोचते हुए मुंह में लेने लगी, कि ये लंड पति का हैं।

मुंह में लंड जाते ही मुझे गिन्न आने लगी। मैं फिर निकालना चाहती थी पर अमित नीचे से ही झटके मारते हुए मेरे मुंह को चोदने लगा।

थोड़ी देर मुंह में रखने के बाद मुझे वो भी दूसरे लंडो की तरह ही लगा और मैं ऐसे ही उसे चूसने लगी।

नीचे से अमित ने अब अपनी जबान से मेरी चुत को चाटना और चोदना शुरू कर दिया। अमित की खुरदरी गीली जबान मेरी चुत में चल रही थी और मैं पागल हुई जा रही थी।

तभी पति कमरे में आये। मैंने तुरंत अपने खुले बालो को बिखेर कर अपने चेहरे को ढक लिया और एक हाथ से साइड फेस को छुपाने लगी।

दोनों लड़कियों को लंड चूसते देख पति का भी मूड खुश हो गया। मैंने उंगलियों के झरोखे से देखा वो अपना नरम पड़ा लंड अपने हाथों से रगड़ते हुए कड़क करने लगे।

मैं अपनी जबान को अमित के लंड की टोपी के चारो तरफ फेरते हुए रगड़ रही थी। थोड़ी थोड़ी देर में उसका एक बून्द पानी लंड से निकलता और मैं उसको अपनी जबान से चाट कर साफ़ कर देती।

पति का लंड अब कड़क हो चूका था और वो कंडोम पहन कर उलटी लेती भाभी के ऊपर चढ़ गए।

उनका चेहरा भी अब दूसरी तरफ था तो मैंने अपना हाथ जो चेहरे को ढका था हटा लिया और इत्मीनान से अमित की टोपी को आइसक्रीम की तरह चाटती रही।

मैं अब तक अमित का बून्द बून्द पानी चाट रही थी, अब मैंने उसका पूरा लंड मुँह में घुसा कर अंदर ही रखे घुमाने लगी। उसका नमकीन मीठा गुनगुना पानी मेरे मुँह से होते हुए गले में जाने लगा।

थोड़ी देर के लिए मैं भूल गयी कि मैं किसके साथ कर रही हूँ और इस ग्रुप सेक्स में मुझे भी मजा रहा था और मदहोशी में मेरा भी पानी छूटने लगा था।

अमित को जैसे ही मेरे पानी का स्वाद लगा, थोड़ी देर तो उसने चाटा फिर उसने चाटना छोड़ दिया और मुझको बोला “मुंह से बहुत चोद लिया अब लंड से चोदने की बारी है।”

उसने मुझे अपने ऊपर से हटा लिया और मैंने तुरंत अपना मास्क नीचे खिसका कर चेहरे को फिर ढक लिया। अमित ने बिस्तर से उतर कर नया कंडोम पहन लिया।

उधर संजू जोर जोर से सिसकारियां मारने लगा और उसने अपना सारा पानी भाभी के मुंह में छोड़ दिया। उसने अभी भी हाथ और मास्क से भाभी का चेहरा छुपा रखा था।

भाभी अब संजू के लंड पर लगे पानी को चाट कर साफ़ करने लगी। फिर संजू ने सावधानी से फिर उनको मास्क पहना दिया।

संजू अब भाभी के सामने से हटा, भाभी वही लेटे लेटे मेरे पति से पीछे से चुदवा रही थी। संजू अब बिस्तर से नीचे उतर आया, उसका लंड तो भाभी ने चाट कर वैसे ही साफ़ कर दिया था।

अमित अब बिस्तर पर लेट गया और मुझको उस पर बैठने के बोला। मैं उसका सामना नहीं करना चाहती थी तो उसकी तरफ पीठ करके उसके लंड पर बैठ गयी।

मैंने उसका लंड पकड़ा और अपनी चुत में घुसा कर उसके पैरो की तरफ झुक गयी। मैं अब अपने कूल्हों को ऊपर नीचे करते हुए उसके लंड को अपनी चुत के अंदर बाहर कर रगड़ने लगी।

अमित अपने लंड को मेरी चुत से अंदर बाहर होते हुए देख पा रहा था। वो वहां का दृश्य देख पागल हो गया और बोला “क्या मस्त गांड हैं, और गुलाबी खुली चुत में मेरा लंड मस्त अंदर बाहर हो रहा हैं”।

उसकी तारीफ़ सुन मैं भी जोर जोर से उसको चोदने लगी। अमित की सिसकारियां निकलने लगी।

उधर पति भाभी को पीछे से जम के जोर जोर से चोद रहे थे, जिससे थाप थाप की आवाजे आ रही थी। संजू मेरे सामने आया और मेरे मास्क को ऊपर कर दिया।

संजू को पता था बाकी तीनो लोग मेरी पीठ की तरफ थे, तो मेरा चेहरा देख नहीं पाएंगे। संजू ने अपना लटकता हुआ लंड मेरे मुंह में डाल दिया।

संजू का लंड अभी भी पानी की वजह से थोड़ा चिकना था। मुझे उसका स्वाद अमित के जैसा स्वादिष्ट नहीं लगा। मैं उसका लंड मुँह से निकालना चाहती थी पर संजू ने मेरा मुँह पकड़ कर उसको निकलने नहीं दिया।

अमित ने मेरी गांड के दोनों पाटो को चौड़ा कर अपनी ऊँगली मेरे पीछे के छेद में डाल दी और ऊँगली अंदर बाहर करने लगा। मेरे तीनो छेद भर चुके थे।

वो अब एक हाथ से ऊँगली कर रहा था तो दूसरे हाथ से पिछवाड़े पर चमाट मारने लगा।

मैं अब झड़ने वाली थी, तो मैंने अपने झटके जोर से मारने शुरू कर दिए। अमित ओर जोर से सिसकारियां मारने लगा।

मेरे मुँह में संजू का लंड था जो धीरे धीरे फिर कड़क हो बड़ा होने लगा था। मैं ढंग से अपनी ख़ुशी भी नहीं बता पा रही थी और मुँह से दबी हुई आहें निकल रही थी।

मैं झड़ने को हुई और मैंने अपना पूरा मुंह खोल कर आवाज निकलते हुए आहें भरने लगी, उसी बीच अमित भी बच्चो की तरह आ आ आ उई उई आ आ ओह माय गॉड.. ओह माय गॉड करता हुआ मेरे साथ ही झड़ गया।

संजू ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल मेरा मास्क फिर चेहरे पर ढक दिया। मैं अमित के ऊपर से हट गयी।

मुझे वाशरूम जाना था पर अमित वाशरूम की तरफ चला गया। संजू मुझे बोला वाशरूम खाली हो तब तक ला मैं भी तुम्हारा चख लेता हूँ।

संजू बिस्तर पर लेट गया और अपना सर बिस्तर के किनारे पर ले आया। मैंने अपने पाँव चौड़े कर अपनी गीली चुत उसके होठों पर रख दी। वो अब आराम से मेरी चुत पर जबान फेर चाटने लगा।

 
संजू ने अपना लंड मेरे मुँह से निकाल मेरा मास्क फिर चेहरे पर ढक दिया। मैं अमित के ऊपर से हट गयी।

मुझे वाशरूम जाना था पर अमित वाशरूम की तरफ चला गया। संजू मुझे बोला वाशरूम खाली हो तब तक ला मैं भी तुम्हारा चख लेता हूँ।

संजू बिस्तर पर लेट गया और अपना सर बिस्तर के किनारे पर ले आया। मैंने अपने पाँव चौड़े कर अपनी गीली चुत उसके होठों पर रख दी। वो अब आराम से मेरी चुत पर जबान फेर चाटने लगा।

थोड़ी देर में अमित वापस आ गया। संजू ने चाटना छोड़ कर मुझे वाशरूम जाने को कहाँ। मैं जब वापिस आयी तो देखा, उन्होंने भाभी को नंगी खडी कर रखा था और मेरे पति उसकी टांगो के बीच घुसकर नीचे से चाट रहे थे, जब कि संजू भाभी के मम्मे मुँह में भर काट रहा था। भाभी रह रह कर कभी दर्द तो कभी मजे से कराह रही थी।

अमित कुर्सी भी बैठा अपनी पत्नी को मजे लेता देख रहा था, और उसको अहसास भी ना था वो लोग उसकी बीवी के साथ ही कर रहे थे।

मुझे अंदर आया देख अमित बोला इसको भी ऐसे ही खड़ा करते हैं और मैं इसके मोटे मम्मे काटूंगा। संजू ने मुझको बोला “तुम अब घर जाओ।”

मैंने अपने बिखरे कपडे उठाये और वो मुझे दूसरे कमरे में ले आया जहा, मैंने सुबह कपडे चेंज किये थे। आते वक़्त उसने उन लोगो को बैडरूम में बाहर से बंद कर दिया था।

अपने भाई के साथ करने का बहुत दुःख था मगर ग्रुप सेक्स का मजा लेने की ख़ुशी भी थी। मैंने जल्दी जल्दी अपने कपडे पहने और पहले जिस तरह आयी थी वैसे तैयार हो गयी।

तैयार होते होते मैं संजू को बहुत भला बुरा सुनाये जा रही थी, कि उसकी वजह से मुझे अपने भाई के साथ सोना पड़ा।

मेरे तैयार होते ही संजू हँसते हुए बोला “चिंता मत कर वो तेरा भाई अमित नहीं, ये बस डील डोल में तुम्हारे भाई जैसा दीखता हैं। इसका नाम कुछ ओर हैं, और इस घर का मालिक हैं। इसकी बीवी कुछ दिन के लिए बाहर गयी हुई हैं इसलिए हम यहाँ हैं, वरना हम किसी होटल में जाते।”

मैं संजू की तरफ आश्चर्य से देख रही थी। मुझे यकीन नहीं हो रहा था। अमित के कपडे वो नहीं थे जो सुबह भाई पहन कर गया था और आवाज में भी थोड़ा अंतर था।

जब मुझे अहसास हुआ उसने क्या बोला हैं, तो मैं ख़ुशी के मारे कूद कर उसकी गोद में उछल बैठ गयी और उसने भी मुझे लपक लिया।

मैंने उसको टाइट हग किया और फिर उसके होठों को अपने होठों में दबा एक थैंक यू किस भी किया।

उसने कहाँ “कभी कभी मजा दुगुना करने के लिए और उत्तेजना बढ़ाने के लिए झूठ भी बोलना पड़ता हैं। अब देखो तुम्हारी भाभी क्या इतने ज्यादा मजे ले पाती। कल रात को ही वो बोल रही थी कि उसको अपने पति के सामने कभी चुदवाने का बहुत मन हैं, तो मैंने नकली में ही सही उसकी इच्छा पूरी कर दी”।

उसने कहना जारी रखा “इस सब चक्कर में तुम पीस गयी पर उन दोनों आदमियों को तुम्हारे नखरो की वजह से मजा आ गया” ।

मैं उसकी गोद से उतरी, मेरे ऊपर से गुनाह का बोझ उतर गया था। मैंने उसको शिकायत की कि तुमने किसी भी ऐरे गेरे आदमी के साथ मुझे सुला दिया।

उसने कहा “मैंने तो तुम्हे बहुत बचाने की कोशिश की पर तुम हो ही इतनी सेक्सी कोई कण्ट्रोल कैसे करे। तुम्हारे लिए अपने भाई के साथ सोना बेटर था ये इस ऐरे गेरे के साथ? वैसे भी ये अच्छे घर का हैं, पहली बार अपनी बीवी के अलावा किसी ओर के साथ कर रहा था”।

 
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