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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

वो तीनो तारीफ़ करते हुए मेरे लिए भी ताली बजाने लगे. अपनी हालत मैं ही जानती थी. मुझे उनकी तालिया सुनाई दे रही थी पर मैं कुछ सेकण्ड्स तक वही पड़ी रही.

उन लोगो ने भी मेरी हालत देखते हुए मुझे थोड़ा समय दिया. पति ने नीचे पड़ा मेरा स्लीप शर्ट लाकर मेरे सीने पर रख दिया.

मैं अब उठी और अपना शर्ट अपने सीने से दबाये रखे मम्मे छुपा दिए. मैं अपना सर अविश्वास में हिलाने लगी.

मैं: “ये क्या था यार. तुम तीनो मिलकर तो मेरे पीछे ही पड़ गए. मुझे बाँध कर रख दिया. हिलने भी नहीं दिया. और इस बदमाश पायल ने तो वो कपडा ही हटा दिया.”

मैंने अब शर्ट पहन कर बटन बंद कर दिए.

पायल: “कैसा लगा ये बता. मजा आया कि नहीं?”

मैं: “बहुत खतरनाक था, पूछो मत.”

डीपू: “सही में माहौल बहुत गरम हो गया था.”

अशोक: “बधाई हो, तुम दोनों ही पास हो गए. दोनों संस्कारी हो और इच्छाशक्ति काफी मजबुत हैं”

पायल : “यार, लेवल वन की छाती की मसाज से ये हालत हैं, तो सोचो अगर हमने लेवल टू की योनी मसाज भी प्लान किया होता तो पता नहीं तुम्हारा क्या हाल होता. तुमने अपनी हालत देखी थी, मैंने तो सोचा था कि तुम मुझसे भी ज्यादा कंट्रोल कर पाओगी.”

मैं: “नाम भी मत लो लेवल टू का.”

पायल “क्या हुआ फट गयी तुम्हारी लेवल वन से ही.”

डीपू : “अरे, इस तरह की बात मत करो. शब्दों का ध्यान रखो.”

पायल : “देखो, हमारा प्रश्न अभी भी वही का वही हैं. संस्कार की क्षमता कितनी हैं. अभी हमने सिर्फ एक तिहाई क्षमता पायी हैं.”

अशोक: “एक तिहाई कैसे? दो में से एक लेवल पार किया तो पचास प्रतिशत हुआ न.”

पायल: “असल में तीन लेवल हैं. मैंने सिर्फ दो ही बताये थे क्यों कि दोनों मसाज से जुड़े थे.”

अशोक: “तो तीसरा लेवल क्या हैं? दूसरे से भी खतरनाक हैं क्या?”

पायल: “जब हम दूसरा लेवल ही नहीं कर रहे तो तीसरे के बारे में बोलने से भी क्या फायदा.”

डीपू: “तुम्हे ट्राय करना हैं क्या दूसरा लेवल?”

पायल: “पहले के बाद मुझे डाउट हैं कि मैं दूसरा कर भी पाउंगी. क्या बोलती हो प्रतिमा?”

मैं: “मुझे अपनी इच्छाशक्ति पर यकीन हैं कि मैं कोई भी चेलेंज पूरा कर सकती हूँ. मैं ये कर सकती हूँ पर करुँगी नहीं. मुझे ये ठीक नहीं लगता.”

पायल : “कर सकती हूँ और कर लिया में बहुत फर्क होता हैं. या तो आप बोलो मत या फिर करके दिखाओ.”

अशोक: “प्लीज पायल, इसकी इच्छा नहीं हैं तो फाॅर्स मत करो.”

पायल: “मैं कहा फाॅर्स कर रही हूँ. मैं तो बस इतना कह रही हूँ कि या तो बोलो मत या फिर करो.”

डीपू “हम मर्दो को चेलेंज दिया होता तो अब तक हम लेटे हुए होते. हा हा हा, क्या बोलते हो अशोक”.

अशोक: “मगर इनकी तरह इतना टिक नहीं पाते.”

डीपू: “बात ये नहीं हैं कि आप मुकाबला जीतते हो या नहीं, बात हैं मुकाबले में उतरने की हिम्मत. मैंने थोड़ी देर पहले ही कहा था कि लड़किया थोड़ी डरपोक होती हैं.”

मैं: “मैंने तब भी कहा था मैं तुम्हारी राय से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखती.”

पायल: “ठीक हैं, मैं रेडी हूँ लेवल दो के लिए. मगर मेरे नीचे वहां पर कपड़ा ढक कर रखना होगा. और प्रतिमा मुझसे बदला लेने के लिए कपडा हटा मत देना.”

मैं: “मैं तुम्हारी तरह नहीं हूँ. वैसे भी अगर मैंने कपडा हटाया तो मेरा नंबर आएगा तब तुम भी मुझे थोड़े ही छोड़ोगी.”

पायल “तुम्हारा नंबर ! मतलब तुम भी रेडी हो लेवल दो के लिए? क्या बात हैं.”

मैं: “नहीं ऐसा नहीं हैं. मेरे मुँह से निकल गया था.”

पायल: “हां , दिल की बात जुबान पर आ ही गयी.”

अशोक: “चलो पिछली बार की तरह सबकी वोटिंग कर लेते हैं लेवल टू के लिए.”

पायल: “मैं रेडी हूँ पर कपड़ा ढकना पड़ेगा.”

डीपू: “औरतो की हिम्मत की दाद देने के लिए, पायल के लिए मेरी हां.”

अशोक: “मुझे नहीं पता मैं कर पाऊंगा या नहीं. पर कोशिश कर सकता हूँ.”

मैं: “मैं सिर्फ पायल को हारते देखना चाहूंगी इसलिए हां.”

पायल: “अब प्रतिमा के लिए वोटिंग करते हैं”

मैं: “पहले तुम्हारा हो जाने दो फिर देखते हैं.”

पायल: “नहीं, अब ये नहीं चलेगा. मेरा हो जायेगा और फिर तुम मना कर दोगी, तो मैं ना इधर की रहूंगी ना उधर की.”

डीपू : “फेयर पॉइंट हैं. या तो दोनों ही मत करो या करो तो दोनों करो”.
 
अशोक: “सही हैं, एक लड़की को हम अकेला नहीं छोड़ सकते. अब ओर कोई वोटिंग नहीं होगी. प्रतिमा का हां मतलब दोनों लड़कियों की हां और ना मतलब दोनों की ना.”

मैं थोड़ा सोच में पड़ गयी. सारा दारमदार अब मेरे निर्णय पर था. मैंने अपने पति से नजरे मिलाते हुए आँखों से सवाल पूछा.

अशोक: “मैं अपना निर्णय तुम पर थोपना नहीं चाहता. हम घूमने आये हैं. बस कोई किसी से नाराज होकर न जाये. ख़ुशी ख़ुशी जाए. इसलिए सिर्फ तुम्हारा निर्णय होगा.”

मैं: “ठीक हैं, मैं भी रेडी हूँ. पर रूल पहले से बना लो, वरना पायल पहले की तरह चीटिंग करेगी.”

पायल “मोहब्बत और जंग में सब कुछ जायज हैं. पर क्यों कि चेलेंज मसाज का हैं तो सेक्स छोड़ कर कुछ भी कर सकते हैं उकसाने के लिए. वो ढकने के लिए दुपट्टा याद रखना.”

डीपू: “ठीक हैं मैडम, तो आप ही लेवल टू की शुरुआत करो.”

पायल: “प्रतिमा का लेवल वन देख कर मेरी गीली हो गयी हैं. पहले मैं साफ़ करके आती हूँ.”

पायल अब बाथरूम में चली गयी और थोड़ी देर बाद वापिस आयी. उसके चेहरे पर लेवल टू का तनाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था.

डीपू: “बेस्ट ऑफ़ लक, किला फतह कर आना.”

पायल: “थैंक यू. अगर मेरे बाद प्रतिमा ने चेलेंज करने से मना कर दिया तो? मना करने के लिए कोई सजा भी तो होनी चाहिए.”

अशोक: “सभी लोग अपनी मर्जी से कर रहे हैं. ना करने पर सजा का क्या मतलब.”

मैं: “अरे बोला ना, मैं कर लुंगी. पर फिर भी यकीन नहीं तो जो तुम बोलो वो सजा.”

अशोक: “सजा पहले ही लिख लो वरना बाद में कोई बढ़ा चढ़ा सकता हैं.”

पायल ने नोट पैड लिया और छुपा के एक सजा लिख दी. फिर वो कागज़ फोल्ड कर अपने पर्स में डाल दिया.

फिर पायल आकर अब बिस्तर के बीच बैठ गयी. उसके एक तरफ डीपू था तो दुरी तरफ मैं थी. अशोक उसके पांवो की तरफ बैठे थे.

पायल: “अरे मैं कपडा लाना भूल गयी नीचे से ढकने के लिए.”

मैंने उसी का पहले वाला पारदर्शी सफ़ेद कपड़ा संभाल कर रखा था.

मैं: “ये रहा कपड़ा, अब लेट जाओ मैं लगा देती हूँ.”

पायल अब लेट गयी. डीपू अपने मोबाइल के स्टॉप टाइमर के साथ तैयार था. मैंने पायल के कमर से जांघो तक के हिस्से को उस कपड़े से ढक दिया.

अशोक: “पायल रेडी?”

पायल: “उम्म, हां रेडी.”

अशोक: “ठीक हैं मैं अब तुम्हारा पाजामा निकाल रहा हूँ साथ में अंदर के कपड़े भी.”

अशोक ने उस ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल का पाजामा उसकी पैंटी सहित नीचे की तरफ खींचने लगा.

मैंने वो ऊपर का कपड़ा पकडे रखा ताकि पाजामा के साथ वो भी नीचे ना खिसक जाए. अशोक ने अब पायल के नीचे के कपड़े उसकी टांगो से पुरे बाहर निकाल दिए.

उस पारदर्शी कपडे से पायल का कमर से नीचे का पूरा जिस्म दिखाई दे रहा था. मैंने देखा कि पायल की चूत के ऊपर की तरफ काफी घने बाल थे.

वो इतनी आलसी होगी कि अपने नीचे के बाल भी साफ़ नहीं कर पाती, ये नहीं पता था मुझे. फिर सोचा शायद इसी वजह से उसने कपड़े से ढकने की मांग रखी थी. ताकि उसकी ये गन्दगी और आलसीपन बाहर ना आ जाये.
 
डीपू: “अशोक और पायल दोनों रेडी हो?”

पायल और अशोक: “हां रेडी.”

डीपू: “तुम्हारे दस मिनट शुरू होते हैं, थ्री, टू वन एन्ड गो.”

अशोक ने ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल के चूत के ऊपर के बालो में अपनी एक ऊँगली घुमाने लगा. पायल अपनी सांस रोके बैठी थी.

अब अशोक अपनी ऊँगली फिराते हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगा. उसकी ऊँगली अब चूत की दरार के ऊपर थी और फिर दरार में प्रवेश करते बाहरी दीवारों पर ऊपर नीचे रगड़ खाने लगी.

पायल की हलकी हलकी सिसकिया निकलने लगी. अशोक अब उसी दरार में ऊँगली ऊपर नीचे करता रहा और पायल उसी गति से सिसकिया निकाल रही थी. अशोक को अब कुछ ओर ज्यादा कोशिश करनी थी. शुरू के दो तीन मिनट बर्बाद हो चुके थे.

अशोक ने अब अपनी ऊँगली पायल की चूत के छेद पर रख दी और ऊँगली का थोड़ा ही हिस्सा अंदर बाहर कर रहा था. छेद में थोड़ी ऊँगली जाने से पायल की सिसकियाँ थोड़ी बढ़ गयी थी. अशोक ने उत्साहित होकर अब पूरी ऊँगली अंदर घुसा दी.

इससे पायल के मुँह से एक जोर की आह निकली. फिर तो अशोक नहीं रुका और अपनी ऊँगली धीमे गति से अंदर बाहर करने लगा.

पायल : “आह , नहीं अशोक अह्ह्हह्ह्ह्ह अम्म्मम्म अशोक क्या कर रहे हो. उम्म ओ माँ ना हम्म हम्म ऐसे मत करो अशोक अह्ह्ह्हह्ह.”

आधा समय बीत चूका था. मुझे पायल से बदला लेना था उसने लेवल वन में, मेरा ढका कपडा निकाल फेंका था. अगर मैं अभी उसका ढका कपड़ा निकालती हूँ तो उसकी वो बालों वाली चूत सबको दिख जाएगी और वो बहुत शर्मिंदा होगी.

वैसे भी मैं निकालू या ना, वो तो मेरा निकाल ही देगी. मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मेरी चूत तो एकदम सफाचट थी. अच्छा ही हैं हम दोनों की सफाई की तुलना हो जाएगी.

अगर मैं एकदम से कपडा निकालती तो दोनों मर्दो को ये लगता कि मैं लम्पट हूँ. इसलिए मुझे कुछ चालाकी से ये काम करना था.

मेरे पास प्लान था. मैंने कपडे को सही से ढकने के लिए अपना हाथ पायल के दूसरी तरफ ले गयी और कपडा उसकी जांघो पर से सही करने लगी. वापस हाथ खींचते वक्त मैंने जानबूझ कर थोड़ा कपडा अपनी उंगलियो के बीच फंसा लिया.

जैसे ही मैंने अपना हाथ वापिस खिंचा, शरीर से पूरा हट गया. पायल की बालों भरी चूत सबके सामने खुल गयी.

शर्म के मारे पायल का पूरा चेहरा लाल हो गया. पायल चिल्लाने लगी और अशोक भी रुक गया.

पायल: “मुझे पता हैं तुमने ये जानबूझ कर किया हैं.”

मैं: “अरे गलती से हुआ, अच्छा ले ले, मैं वापिस ढक देती हूँ कपड़ा.”

पायल: “अब क्या फायदा कपडे का, सब तो दिख गया, नहीं चाहिए मुझे. अब तुम देखो, मैं तो तुम्हे कपडा लगाने ही नहीं दूंगी.”

मैं: “मैं तो वैसे भी कपड़ा लगाने ही नहीं वाली थी.”

पायल: “बहुत चालु हैं प्रतिमा. अपनी भौसड़ी साफ़ करके आयी होगी इस लिए उछल रही हो.”

डीपू: “शीईईईइ गंदे शब्दों का इस्तेमाल मत करो प्लीज.”

मैं: “चलो शुरू करते हैं फिर, टाइमर थोड़ा पीछे करो अगर रोका ना हो तो.”

डीपू: “नहीं, मैंने रोक दिया था. अशोक रेडी गो.”
 
पायल के चिल्लाने से अशोक भी थोड़ा डर गया तो वो धीरे धीरे पायल की चूत के बाहर हाथ फेरता रहा.

मैं: “अशोक क्या कर रहे हो, अच्छे से करो ना. जल्दी जल्दी करो.”

पायल: “कुछ भी कर लो मैं जीत के ही रहूंगी.”

मैं: “अच्छा ये देखो.”

मैंने आगे बढ़कर उसका टैंक टॉप उसके कमर से ऊपर कर उसके मम्मो से उठाते हुए सर से पूरा बाहर निकाल कर उसको पूरी नंगी कर दिया.

पायल को पूरा नंगी देख अशोक की भी आँखें खुल गयी. उसने पायल के पाँव चौड़े किये और उसकी कमर के पास आकर बैठ गया. उसने अपना हाथ पायल की चूत पर रखा और तीव्र गति से ऊपर नीचे ऊपर नीचे रगड़ने लगा.

सिर्फ दो मिनट बचे थे, तो उसके हाथ एकदम मशीन की भांति चलने लगे. इतने जोर के झटके लग रहे थे कि पायल के मोटे मम्मे बुरी तरह से हिल ढुल रहे थे जैसे भूकंप आ गया हो.

पायल: “आह आह आह आह आह ना ना ना अशोक, ओह्ह्ह मेरी भौसड़ी जल रही हैं अशोक छोडो ओह माँ मेरा हो रहा हैं, हो रहा हैं, अशोक मेरी चूत, हाह हाह उम्म उम्म उम्म उम्म, आह आ अह्ह्हह्ह्ह्ह हो गया मेरा.”

अशोक ने उसको छोड़ दिया. पायल हांफ रही थी जैसे अभी अभी मैराथन दौड़ कर आयी थी.

डीपू: “सिर्फ दस सेकंड ही बचे थे, हार जीत का अंतर. मगर फिर से काफी अच्छे से खिंचा तुमने. मेरी अंडरवियर गीली कर दी तुमने तो.”

अशोक: “मेरे तो हाथ पैर अभी तक कांप रहे थे. मैं हाथ धो कर आता हूँ, पुरे गंदे हो गए.”

पायल अभी भी बिना कपड़ो के बेसुध लेटी हुई थी.

मैंने और डीपू ने उसको उसके कपडे और कुछ पेपर नैपकिन दिए सफाई के लिए. उसने सफाई करके के बाद अपने कपडे पहन लिया. तब तक अशोक भी हाथ धोकर आ गये.

पायल: “देखो मेरे हाथ पैर अभी तक कांप रहे हैं. और प्रतिमा तुमने मुझे लाइफ में पहली बार सबके सामने नंगी कर दिया. तुमसे तो मैं अपना बदला लेकर रहूंगी.”

सच पूछो तो मैं बुरी तरह से डर गयी थी. पता नहीं वो क्या हरकत करेगी. पायल अब डीपू के कान में कुछ फुसफुसाने लगी. डीपू ने अपना सर ना में हिलाया.

डीपू :”पागल हो क्या, ये बहुत ज्यादा हो जाएगा.”

पायल: “ये भी मसाज में ही आता हैं, रूल के हिसाब से चलेगा.”

अशोक: “मेरी बीवी के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हो तुम. कुछ उलटा सीधा तो नहीं कर रहे?”

पायल: “सब कुछ रूल्स के अंतर्गत ही होगा, चिंता मत करो.”

मैं: “मुझे पायल पे भरोसा नहीं. मुझे नहीं करना अब.”

पायल: “मुझे पता था ये धोखा देगी. सोच लो, अगर नहीं किया तो सजा मिलेगी.”

मैं: “तुम जो करने वाली हो उससे तो वो सजा ही ठीक होगी. लाओ क्या सजा हैं.”

पायल ने अपना पर्स खोला और चिठ्ठी मुझे देते हुई बोली “सिर्फ तुम पढ़ना और फिर निर्णय लो कि लेवल टू करना हैं या सजा भुगतनी हैं.”

मैंने चिट्ठी में से सजा पढ़ी और मेरे पैरो तले जमीन खिसक गयी. सजा से मेरा फंसना तय था. कम से कम लेवल टू में कुछ रूल तो थे. मैंने अब गेम पलटने की सोची. मुझे लग रहा था कि मुझे हराने के लिए पायल कोई न कोई रूल जरूर तोड़ेगी तो मैं ये वाली सजा उस पर डाल सकती हूँ.

मैं: “मैं लेवल टू ही कर देती हूँ.”

अशोक: “ऐसा क्या लिखा हैं चिट्ठी में?”

डीपू: “कोई हमें भी तो बताओ?”

पायल ने मेरे हाथ से चिट्ठी ली और वापिस समेट कर अपने पर्स में बंद कर दी.

पायल : “सजा ली ही नहीं तो बताने से क्या फायदा.”

मैं: “मैं तैयार तो हूँ, पर अगर पायल ने कोई रूल तोड़ा तो उसको भी सजा मिलनी चाहिए. ये चिठ्ठी वाली सजा.”
 
अब पायल का मुँह छोटा सा हो गया. अब डरने की बारी उसकी थी. पर फिर कुछ सोच उसने स्वीकार कर लिया.

मैं अब बिस्तर के बीच जाकर लेट गयी और वो सफ़ेद कपड़ा ले कमर से जांघो तक ढक दिया. अशोक मेरे सिरहाने बैठ गए और डीपू मेरे पावो के पास.

पायल अपने बेग से दो फीते ले आयी और डीपू को बोली इसके दोनों पैर चौड़े कर टांगो को एक दूजे से दूर बिस्तर से बाँध देना ताकि हिल ना पाए.

अशोक: “टांग बांधने की क्या जरुरत हैं, वो तो वैसे भी तैयार हैं.”

पायल: “ये सब ज्यादा उकसाने के तरीके हैं और रूल के अंदर हैं.” पायल ने अब वो ढका कपड़ा मेरे ऊपर से हटा दिया.

पायल: “तुम तो बोल रही थी ना कि तुम बिना कपड़े से ढके करवाओगी. ये कपड़ा नहीं मिलेगा अब तुम्हे.”

फिर पायल ने मेरा एक हाथ सिरहाने लाकर बिस्तर पर दबा दिया और दूसरा हाथ अशोक से कह के बिस्तर पर दबवा लिया. पायल ने अब मेरे स्लीप शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया.

मैं: “मसाज नीचे की हैं तो ऊपर के कपड़े क्यों खोलना?”

पायल: “ये तुम्हे तब याद नहीं आया जब मेरा टॉप खोला था.”

उसने मेरे सारे बटन खोल कर शर्ट को सीने और पेट से पूरा हटा कर साइड में कर दिया. थोड़ी देर पहले लेवल वन वाली ही स्तिथि हो गयी थी मेरी.

डीपू: “प्रतिमा अब मैं तुम्हारा शार्ट निकाल रहा हूँ.”

उसने कल रात की तरह एक बार फिर मेरे शार्ट में अपनी ऊँगली घुसाई और धीरे धीरे प्यार से शार्ट को नीचे खिसकाने लगा. फर्क सिर्फ इतना था कि आज मेरे पति और खुद की पत्नी की मौजूदगी में उतार रहा था. मैंने पैंटी अभी भी पहनी हुई थी.

डीपू: “अरे तुम्हारी भी पैंटी गीली हो गयी थी क्या?”

पायल और अशोक भी मेरा हाथ छोड़े बिना, थोड़ी देर के लिए झुक कर देखने लगे. मैं शरमा गयी, उसने सबके सामने बोल दिया, चुप भी तो रह सकता था.

डीपू ने अब अपनी उंगलिया मेरी पैंटी में फँसायी और मजे लेते हुए धीरे धीरे नीचे खिसकाने लगा. मेरे पति के सामने उनकी बीवी को उनका दोस्त नंगी कर रहा था. जैसे जैसे मेरी पैंटी नीचे खिसकी मेरी गोरी गोरी चिकनी सफाचट चूत नजर आती गयी.

मैंने पायल का चेहरा देखा, मेरी सफाई देख उसका चेहरा देखने लायक था. मुझे बहुत ख़ुशी मिली. फिर अगले ही क्षण सोचने लगी मेरे पति क्या सोच रहे होंगे. मैंने ही लेवल टू के लिए हामी भरी थी. अब अगर मैं उनके सामने डीपू के हाथों झड़ गयी तो?

डीपू ने अब मेरी पैंटी टांगो से पूरी निकाल दी थी. डीपू ने अब वो फीते उठाये जो पायल ने उसे मेरी टांग बाँधने को दिए थे और एक एक फीता दोनों एड़ियों के वहा बाँधने लगा.

अशोक: “तुम सही में टाँगे बाँधने वाले हो?”

डीपू: “हां, मैडम की फरमाइश हैं, पूरी करनी पड़ेगी.”

उसने अब मेरी एक टांग पकड़ी और थोड़ा साइड में ले जाकर फैला दिया और उस फीते को पलंग के कोने से बांध दिया. मैं अपनी दूसरी टांग को भी पहले वाली के साथ रखे रही ताकि टाँगे ना खुले.

अब उसने मेरी दूसरी टांग पकड़ी और दूसरी तरफ ले जाकर टांगो को फैला दिया और उसको भी बाँध दिया. मेरी दोनों टांगो के एक दूसरे से दूर फैलते ही मेरी चूत की दरार खुल गयी.

डीपू: “ठीक हैं ना पायल?”

पायल: “देखो छेद खुला कि नहीं, वरना ओर चौड़े करो इसके पाँव.”

डीपू: “आकर देख लो, खुल गया हैं छेद.”

उनकी बातें सुन मैं शरमा रही थी. मैं किसी से नजरे नहीं मिला पा रही थी और छत की तरफ देखने लगी. पता नहीं कैसे मैं इस मुसीबत फंस गयी. किस घडी में मैंने हां बोल दिया और मुझे पता ही नहीं चला था. डीपू मेरी कमर की बगल में आकर बैठ गया.
 
अशोक: “तुम्हारी तैयारियां हो गयी हो तो शुरू करे? चलो थ्री टू वन गो.”

डीपू ने वहा से शुरू किया जहा अशोक ने ख़त्म किया था. अपनी एक ऊँगली मेरी चूत की दरारों पर रखी और जोर जोर से ऊपर नीचे रगड़ने लगा. उस रगड़ से उत्तेजित हो मैं आहें भरने लगी.

फिर उसने एक बजाय उंगलिया बढ़ाते हुए दो और फिर चार कर दी. अशोक की तरह वो भी तेजी से मशीन की तरह ऊपर नीचे हाथ कर बड़ी तेजी से रगड़ रहा था.

मेरी चिकनी सफाचट चूत की वजह से उसका हाथ अच्छे से फिसल रहा था पर घर्षण वैसा नहीं हो पाया जो पायल के बालों की वजह से पहले हुआ था.

मैं लगातार सिसकियाँ निकाले तड़प रही थी, क्यों कि जब भी उसकी उंगलिया नीचे जाती तो मेरी खुली चूत की वजह से उसकी उंगलिया मेरे छेद में थोड़ी धंसती हुई निकल रही थी.

तीन मिनट ऐसे ही निकल गए और डीपू को लगा कि पैतरा बदलना पड़ेगा. डीपू अब आकर मेरी दोनों फैली टांगो के बीच आकर बैठ गया.

उसने अब अपनी एक ऊँगली मेरे छेद में डाली और तेजी से अंदर बाहर करने लगा. ये तरकीब मेरे लिए ज्यादा परेशानी खड़ी करने वाली थी. उसकी ऊँगली के मेरी चूत को अंदर बाहर भेदने से मुझे मजा आने लगा. मैं जैसे तैसे नियंत्रण कर रही थी.

डीपू अब एक की बजाय दो उंगलियों से निशाना भेदने लगा. मेरी ओर तेज आहें निकलने लगी.

पायल डीपू का उत्साहवर्धन कर रही थी और मेरे पति मेरे कंधे पर एक हाथ फेरते हुए मुझे ढांढस बंधा रहे थे.

अब छह मिनट हो गए थे.

पायल: “दोनों में डालो डीपू दोनों में, जल्दी.”

डीपू थोड़ा ओर झुका और अपना अंगूठा मेरी गांड के छेद में डाल दिया. उसकी दो उंगलिया मेरी चूत के छेद में और अंगूठा गांड के छेद में एक साथ अंदर और बाहर हो रहे थे और मेरे लिए नियंत्रण करना ओर मुश्किल होता जा रहा था.

मैंने तड़प के मारे पाँव को ऊपर नीचे हिलाने की कोशिश की, जिससे जल्द ही पाँव को बांधें रखे वो फीते खुल गए और टाँगे आज़ाद हो गयी. मैं अपना मुँह खुला रख सदमे में सिसकियाँ निकाल रही थी.

अशोक ने घोषणा की आखिरी दो मिनट.

पायल : “डीपू अपना आखरी दांव लगा ही दो.”

डीपू ने अपनी उंगलिया मेरे छेदो से बाहर निकाली और मेरे घुटनो को मोड़ कर टाँगे ऊपर कर चौड़ी कर दी. अशोक और मैंने सोचा नहीं था कि वो ये करेगा.

उसने अपने होंठ मेरी चूत पर रख दिए. मेरी चूत की दोनों पंखुड़ियों को बारी बारी से अपने होंठों में फंसा हल्का सा ऊपर खिंच छोड़ देता.

मेरे दिमाग ने नशे के मारे काम करना बंद किया. मैं जोर जोर से गला फाड़ते हुए चिल्ला रही थी.

अशोक: “ये गलत हैं, इसकी बात नहीं हुई थी.”

पायल: “मसाज हाथ से करो या मुँह से, करना तो मसाज ही हैं. ये रूल के अंदर ही हैं.”

मेरे हाथ अभी भी पायल और अशोक ने दबा रखे थे और मैं तड़प रही थी.

पायल ने अब अपने दूसरे हाथ से मेरी चूंचीयों को दबाना शुरू कर दिया था. मैं अब चारो तरफ से गिर चुकी थी. मैंने हथियार डाल दिए. वो उन्माद मैं सहन नहीं कर पा रही थी. मुझे अब वो झड़ने की शर्मिंदगी झेलनी ही थी.

शायद उत्तेजनाओं को दबाने की शक्ति में, मेरे और पायल के बीच कोई फर्क नहीं था. मैं रह रह कर तड़प के मारे कभी अपने सीने का हिस्सा ऊँचा उठा देती तो कभी कूल्हों को बिस्तर से उठा ऊँचा कर देती.

जानिए कैसे आरती क्लर्क से अपने बॉस की पत्नी बन गयी, उसकी देसी चूत चुदाई ने उसे कहाँ से कहाँ पहोंचाया, इस न्यू सेक्स कहानी में पढ़िए.

जैसे ही मेरा सीना ऊँचा होता तो खिंचाव से मेरे मम्मे और भी तन जाते और मेरे सीने के कर्व ओर भी खूबसूरती सी दिखाई देते.

डीपू चपड़ चपड़ की आवाज करते हुए अपनी जबान से मेरे छेद को चोद रहा था.

मैं अब झड़ने के करीब थी और मैं आह आह आह करते हुए अपना पानी छोड़ना शुरू ही करने वाली थी कि तभी स्टॉप टाइमर बज उठा.

डीपू को उठना पड़ा और बाकि दोनों ने भी मुझे छोड़ दिया.

पायल: “क्या यार एक बार फिर से होते होते रह गया. ये मुंह से मसाज तुम्हे थोड़ा पहले ट्राय करना था.”

डीपू के छोड़ देने के बाद भी मैं उसकी जबान अपनी चूत में महसूस कर पा रही थी. मेरी चूत के होंठ जैसे फड़फड़ाते हुए हलकी मसाज दे रहे थे. मेरे अंदर अभी भी कोई हलचल हो रही थी.
 
मैंने महसूस किया कि मेरा पानी अंदर ही अंदर धीरे धीरे छूट रहा हैं.

तभी मैंने जल्दी से अपनी पैंटी और शार्ट पहन लिया. मैंने अपना स्लिप शर्ट आगे की और से कवर करते हुए बिना किसी से बात किये भागते हुए बाथरूम में गयी.

मैंने अपनी ऊँगली चूत के अंदर डाल हिलाते हुए अपनी रही सही कसर पूरी कर झड़ गयी और अपनी अच्छे से सफाई की. ऊपर वाले को शुक्रिया कहा कि मुझे एक शर्मनाक स्तिथि से बाल बाल बचा लिया.

जब मैं बाहर आयी तो उन्होंने मेरा हाल चाल पूछा.

मैं: “हो गया तुम्हारा चैलेंज पूरा, तुम्हारे चैलेंज के चक्कर में मैंने अपनी इज़्ज़त गवां दी.”

पायल: “तुम तो ऐसे बात कर रही हो जैसे किसी ने तुम्हारे साथ शारीरिक संबंध बना लिए हो.”

मैं: “अब बचा ही क्या था? कपडे खुल गए, हाथ, मुँह सब तो लगा दिया.”

अशोक: “अरे तुम इतना मत सोचो. ये सिर्फ एक चेलेंज था. और तुमने तो दोनों चेलेंज पार किये हैं.”

पायल: “इस चैलेंज के बहाने पता चला कि हमारी सहनशक्ति कितनी हैं. और इससे भी ज्यादा ये कि हमारे पतियों की सहनशक्ति कितनी हैं. तुमने ध्यान दिया, जब हमारे साथ ये हो रहा था तो पतियों की क्या हालत थी?”

डीपू: “क्या हालत थी? तुम्हारे साथ हुआ तब मैं एकदम नार्मल था.”

मैं: “अब झूठ मत बोलो, मैंने भी देखी थी तुम्हारी हालत.”

पायल: “अभी साबित करती हूँ डेमो देके. अशोक जरा अपनी गोदी में जगह बनाना तो.”

ये कहते हुए पायल अशोक की गोद में जा बैठी और डीपू के हाव भाव पढ़ने लगी.

पायल: “कैसा लग रहा हैं, मैं अशोक की गोद में बैठी हूँ?”

डीपू : “ऐसा कुछ नहीं हैं. एक दोस्त दूसरे की गोद में नहीं बैठ सकता क्या?”

पायल ने अब अशोक का एक हाथ पकड़ा और उसके पंजे को अपनी छाती के उभारो से दो इंच दूर पकड़ कर रखा.

पायल: “अब जलन हो रही हैं क्या?”

मैं: “ये देखो, डीपू के माथे पर शिकन शुरू हो गयी हैं. इसको जलन हो रही हैं.”

मेरे चिढ़ाने से नाराज हो, डीपू ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी तरफ खिंच कर मुझे अपनी गोद में बैठा दिया.

डीपू : “अब बोलो पायल, तुम्हे कैसा लग रहा हैं?”

पायल ने जो अशोक का हाथ पकड़ रखा था उस पंजे को अपने एक मम्मे पर रख दिया.

अशोक: “अरे, ये क्या कर रही हो. चेलेंज ख़त्म हो चूका हैं.”

पायल : “बोलो डीपू, जलन हुई न?”

डीपू ने तेजी से मेरे स्लीप शर्ट का ऊपर का एक बटन खोल दिया. मैं एक दम चीखी और अपना बटन बंद करने को हाथ बढ़ाया, पर डीपू ने मेरी दोनों पतली कलाइयों को मेरी गोद में रख अपने एक हाथ से झकड़ लिया. मेरे शर्ट के एक बटन खुलने से मेरा क्लीवेज दिखने लगा.

मैं: “तुम दोनों की लड़ाई में मुझे क्यों पीस रहे हो?”
 
उन दोनों के बीच एक दूजे को जलाने का कम्पटीशन शुरू हो चूका था. पायल ने अब अशोक का दूसरा हाथ पकड़ा और उसके दूसरे पंजे को भी अपने दूसरे मम्मे पर रख दिया. मेरे पति उनकी इस नादानी पर हंस पड़े. पायल डीपू को देखने लगी.

डीपू ने अपने फ्री हाथ से मेरे स्लीप शर्ट का दूसरा बटन भी खोल दिया और अपना हाथ मेरे शर्ट में घुसा कर मेरा मम्मा दबोच लिया. मैं जोर से चिल्लाई “क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे.”

अशोक ने पायल को अपनी गोद से हटाया और डीपू को डांटने लगे “ये अब तुम्हारा ज्यादा हो रहा हैं. चेलेंज तक ठीक था, मर्जी से हो रहा था पर उसकी इच्छा के खिलाफ उसको तुम हाथ नहीं लगा सकते.”

डीपू ने मुझे छोड़ दिया और अशोक से बोला: “सॉरी अशोक, मेरा ये मकसद नहीं था. मैंने मजाक मजाक में लिमिट क्रॉस कर दी. सॉरी प्रतिमा, मैंने तुम्हे गलत नीयत से नहीं छुआ था. बस ऐसे ही पायल को जलाने के लिए किया था.”

पायल: “एकदम सही, मैं यही चेक कर रही थी. डीपू मुझे अशोक की गोदी में नहीं देख पाया और अशोक ये नहीं सहन कर पाया कि कोई दूसरा प्रतिमा को छू रहा हैं. तुम मर्दो ने सिर्फ कहने भर के लिए उस चेलेंज के लिए हां बोला था पर असल में तुम पछता रहे थे.”

अशोक: “मैं तो सिर्फ प्रतिमा को बचा रहा था.”

मैं: “बीवी की रक्षा की वो अच्छा किया तुमने, पर जलन तो हुई थी ना?”

अशोक: “अब मैं कैसे यकीन दिलाऊ. मुझे अच्छा लगा कि तुमने चैलेंज लिया और जीती भी.”

डीपू: “मैं भी समर्थन करता हूँ. जलन वाली कोई बात ही नहीं थी.”

पायल: “अगर प्रतिमा चेलेंज हार जाती फिर भी तुम यही कहते अशोक?”

अशोक: “हां भाई, हार जीत से क्या फ़र्क़ पड़ता हैं. ये कोई असली टेस्ट थोड़े ही था. मुझे अपनी वाइफ पर पूरा यकीन हैं.”

पायल: “शरीर को नियंत्रित करने का ही तो चेलेंज था. अगर इससे थोड़ा मुश्किल टेस्ट होता तो शायद प्रतिमा हार जाती.”

डीपू: “तुम्हारा इशारा चेलेंज के तीसरे लेवल की तरफ तो नहीं हैं?”

अब वो लोग तीसरे लेवल की भी बात करने लगे थे. मुझे अब वहाँ से दूर जाना ही सही लगा.

मैं: “चलो अशोक, अब चलते हैं.”

पायल : “ये लो, ये तो सुनने से भी डर रही हैं. वैसे ये चेलेंज सिर्फ बीवियों का नहीं पतियों का भी हैं.”

अशोक: “फिर तो सुनना पड़ेगा, ऐसा क्या हैं?”

पायल: “इस टेस्ट में सारे कपल एक साथ लेटते हैं. पर कुछ इस तरह कि पति पत्नी आस-पास नहीं लेट सकते. बीवियों को कोशिश करनी हैं कि वो बिना अपने शरीर का नियंत्रण खोये पूरी रात गुजारे. जो बीवी सुबह तक नियंत्रण रख पायी वो जीत जाती हैं. इसी तरह पतियों को कोशिश करनी हैं कि वो दूसरे की बीवियों को उकसा कर उन्हें हरवाये ताकि उनकी खुद की बीवी जीत जाये.”

डीपू: “ऐसे तो कोई भी पति दूसरे की पत्नी के साथ जबरदस्ती भी कर सकता हैं.”

पायल: “रुल के हिसाब से कोई किसी के साथ जबरदस्ती नहीं कर सकता और न ही शारीरिक संबंध बनाने की अनुमति होती हैं. हार तब होती हैं जब बीवी ये स्वीकार कर ले कि वह अब ओर नियंत्रण नहीं कर पाएगी या फिर उसका खुद ही हो जाये. जैसा मुझे दूसरे लेवल में हुआ था.”

अशोक: “मतलब औरतो की सेफ्टी हैं इसमें. कोई जोर जबरदस्ती नहीं.”

मैं: “ओर पति लोग उकसाने के लिए क्या क्या करेंगे?”

पायल: “कपड़े खोलने और अपने शरीर से उसके शरीर को छूने की खुली छूट हैं, पर मर्द अपना कोई अंग स्त्री के अंगो में नहीं डाल सकते. ऊँगली तक नहीं.”

डीपू: “फिर तो ये बीवियों के लिए बहुत आसान हो जायेगा.”

अशोक: “ये तो पिछले दो लेवल से ज्यादा आसान हैं. मुझे लगा तीसरा लेवल सबसे कठिन होगा.”
 
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