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बाथरूम से फ्लश की आवाज आयी और मैं घबरा गयी कि अशोक आने वाला हैं, पर रंजन ने मुझे बिस्तर से लटका के रखा था और मैं उसके झटके के अलावा हिल भी नहीं पा रही थी.
इन्ही रुक रुक कर पड़ते झटको के बीच अशोक बैडरूम में आया और मुझे चुदता देख रंजन को रोकने लगा.
अशोक: “सुहागरात हो गयी, छोड़ दे अब तो.”
रंजन झटके मारते मारते ही बोला “अभी चौबीस घंटे कहा हुए. थ्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह.. अभी तो ये मेरी बीवी हैं, थ्प्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह.. बीवी को चोदने में क्या बुराई हैं.”
मैं अपने आप को अशोक की नजर में खुद को एक शिकार दिखाते हुए उससे बचाने की गुहार करने लगी.
मैं: “अशोक थ्प्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह्ह.. छुड़ाओ ना मुझे थ्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह..”
अशोक ने आगे बढ़कर रंजन को रोका और मैं उसके चंगुल से छूट कर उठ खड़ी हुई. मेरा दुल्हन का वेश वहा बिखरा पड़ा था. मैंने अपना शर्ट पाजामा निकाला और बिना पहने ही उसे लेकर बाथरूम में भाग गयी.
थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम से निकली. अशोक सोच रहा था कि वो काम पर जाए ना जाये. एक छुट्टी वो पहले ही ले चूका था, तो आज रुकने का मुश्किल था और उसे मुझे ना चाहते हुए भी अपने टेम्पररी पति के भरोसे छोड़ कर जाना था.
अशोक ने मुझसे कल रात के व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी. मैंने अशोक के लिए लंच पैक कर के दिया, मैंने अशोक को विदा किया ये जानते हुए कि रंजन मेरा पुरे दिन क्या हाल करने वाला था.
मैं कपड़े लेने बेडरूम में गयी तब तक रंजन अंदर बेडरूम में ऐसे ही नंगा पड़ा था. रंजन ने मुझे फिर पकड़ लिया.
मैं: “छोडो मुझे.”
रंजन: “मेरी बीवी हो, ऐसे कैसे छोड़ दूँ.”
मैं: “अपनी बीवी को नहाने भी नहीं दोगे क्या?”
रंजन: “चलो मैं भी आता हूँ, पति पत्नी आज साथ में नहाएंगे.”
मैं अपने असली पति के साथ भी आज तक बाथरूम में साथ नहीं नहाई फिर ये तो एक दिन का पति था.
रंजन मुझे ले कर बाथरूम में आ गया साथ में नहाने को. मुझे सीधा ले जाकर शॉवर के नीचे खडी कर दिया और शॉवर चालू कर दिया. मैंने शर्ट और पाजामा पहन रखा था जो थोड़ी ही देर में पूरा गीला हो गया. उसने मुझे पीछे से झकड़ कर रखा था.
उसने तो वैसे भी कपड़े नहीं पहन रखे थे, पर कपड़ो के गीले होने से मैं असहज होने लगी. उसने अब आगे से मेरे गीले शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया.
एक एक बटन खुलने के साथ ही मेरा ब्रा दिखने लगा. सारे बटन खोल उसने शर्ट को मेरे कंधो और हाथों से निकाल नीचे फेंक दिया.
उसके बाद उसने मेरे ब्रा सहित मेरे बड़े मम्मो को मसलना शुरू कर दिया. मेरे मम्मे दबने से ब्रा के ऊपर से फूल फूलकर कर बाहर आ रहे थे. उसने अपने होंठ मेरे कंधो पर रख चूमना शुरू किया और मैं सिसकिया भरने लगी.
नमिता के एक आशिक ने कैसे उसकी कुवारी चूत की चुदाई करी, कैसे नमिता उसके लोडे की दीवानी हो गयी यह सब जानिए उनकी चुदाई स्टोरी में!
इन्ही रुक रुक कर पड़ते झटको के बीच अशोक बैडरूम में आया और मुझे चुदता देख रंजन को रोकने लगा.
अशोक: “सुहागरात हो गयी, छोड़ दे अब तो.”
रंजन झटके मारते मारते ही बोला “अभी चौबीस घंटे कहा हुए. थ्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह.. अभी तो ये मेरी बीवी हैं, थ्प्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह.. बीवी को चोदने में क्या बुराई हैं.”
मैं अपने आप को अशोक की नजर में खुद को एक शिकार दिखाते हुए उससे बचाने की गुहार करने लगी.
मैं: “अशोक थ्प्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह्ह.. छुड़ाओ ना मुझे थ्प्पप्प्प [झटका] आह्हह्ह्ह..”
अशोक ने आगे बढ़कर रंजन को रोका और मैं उसके चंगुल से छूट कर उठ खड़ी हुई. मेरा दुल्हन का वेश वहा बिखरा पड़ा था. मैंने अपना शर्ट पाजामा निकाला और बिना पहने ही उसे लेकर बाथरूम में भाग गयी.
थोड़ी देर बाद मैं बाथरूम से निकली. अशोक सोच रहा था कि वो काम पर जाए ना जाये. एक छुट्टी वो पहले ही ले चूका था, तो आज रुकने का मुश्किल था और उसे मुझे ना चाहते हुए भी अपने टेम्पररी पति के भरोसे छोड़ कर जाना था.
अशोक ने मुझसे कल रात के व्यवहार के लिए माफ़ी मांगी. मैंने अशोक के लिए लंच पैक कर के दिया, मैंने अशोक को विदा किया ये जानते हुए कि रंजन मेरा पुरे दिन क्या हाल करने वाला था.
मैं कपड़े लेने बेडरूम में गयी तब तक रंजन अंदर बेडरूम में ऐसे ही नंगा पड़ा था. रंजन ने मुझे फिर पकड़ लिया.
मैं: “छोडो मुझे.”
रंजन: “मेरी बीवी हो, ऐसे कैसे छोड़ दूँ.”
मैं: “अपनी बीवी को नहाने भी नहीं दोगे क्या?”
रंजन: “चलो मैं भी आता हूँ, पति पत्नी आज साथ में नहाएंगे.”
मैं अपने असली पति के साथ भी आज तक बाथरूम में साथ नहीं नहाई फिर ये तो एक दिन का पति था.
रंजन मुझे ले कर बाथरूम में आ गया साथ में नहाने को. मुझे सीधा ले जाकर शॉवर के नीचे खडी कर दिया और शॉवर चालू कर दिया. मैंने शर्ट और पाजामा पहन रखा था जो थोड़ी ही देर में पूरा गीला हो गया. उसने मुझे पीछे से झकड़ कर रखा था.
उसने तो वैसे भी कपड़े नहीं पहन रखे थे, पर कपड़ो के गीले होने से मैं असहज होने लगी. उसने अब आगे से मेरे गीले शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिया.
एक एक बटन खुलने के साथ ही मेरा ब्रा दिखने लगा. सारे बटन खोल उसने शर्ट को मेरे कंधो और हाथों से निकाल नीचे फेंक दिया.
उसके बाद उसने मेरे ब्रा सहित मेरे बड़े मम्मो को मसलना शुरू कर दिया. मेरे मम्मे दबने से ब्रा के ऊपर से फूल फूलकर कर बाहर आ रहे थे. उसने अपने होंठ मेरे कंधो पर रख चूमना शुरू किया और मैं सिसकिया भरने लगी.
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