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नितिन ने फ़ोन लगाया, मैंने उससे फ़ोन लेकर चेक किया तो पूजा को ही कॉल जा रही थी. मैंने फ़ोन अपने पास में ही बिस्तर पर रख दिया.
पूजा (फ़ोन पर): “हेलो, क्या हुआ?… हेलो… हेलो… आउच.. अब इसे तो रहने दो, सारे कपड़े मत खोलो.”
उधर से पूजा की कामुक मदहोश आवाजे आने लगी और हमें उनसे तेज आवाज करनी थी.
मैं: “कम ऑन नितिन, जोर से चोदो मुझे.”
नितिन मेरी तरह आवाज नहीं कर रहा था, पर उसने मेरी आवाज सुनकर और जोश के साथ चोदना शुरू कर दिया. मैंने एक हाथ से उसको उसकी गर्दन के पीछे से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसकी पीठ झकड़ ली. अपनी टांगे उठा कर उस पर लपेट दी और अब मैं भी चुदने के मजे लेने को तैयार थी.
मैंने आहें जोर जोर से आहें भरना शुरू किया आह्ह, आह्हहह आह्ह ओ नितिन, चोद दे मुझे, हां यही पे, हम्म, आउच, ऊहहह आहह्ह्ह आ मेरी चूत भर दे.
फिर मैंने महसूस किया फ़ोन से आती आवाज लगभग बंद हो गयी थी. जरूर उन्होंने मेरी आवाज सुन ली होगी और अब पछता रहे होंगे. मुझे और जोश आ गया. मैं और भी आवाज कर उन्हें चिढ़ाने लगी.
इस बीच मेरा मजे के मारे पानी छूटना शुरू हो गया था. नितिन का कंडोम लगा लंड मेरी चूत के पानी को चीरते हुए अंदर बाहर हो फच्चाक फच्चाक की आवाजे करने लगा. मैं फ़ोन उठा कर अपनी चूत के पास ले गयी और थोड़ी देर चुप हो कर उनको वो आवाजे सुनाने लगी.
मैं अपनों आहें तो रोक नहीं पा रही थी तो फ़ोन फिर नीचे रख दिया और हम दोनों चीखते हुए चुदने के मजे लेते रहे.
आह्हहह ओआह्ह आ आ आ आ अम्म आईईईई ईईहीहीहीही ऊहूऊऊऊऊ, उसने चोद चोद कर मेरा काफी सारा पानी निकाल दिया और मेरी नशीली आवाज की सिसकियों से वो खुद ही झड़ गया.
झड़ने के बाद भी वो अपना लंड मेरी चूत में डाले रखे हुए मुझ पर लेटा रहा. उसने फिर इसी तरह लेटे लेटे ही अपना मोबाइल उठाया और मैंने उससे छीन कर अपनी आखरी भड़ास निकालते हुए दूसरी तरफ फ़ोन पर लोगो को सुनाया “क्या मस्त चोदा हैं नितिन तुमने”.
पहली बार मेरा ध्यान गया फ़ोन तो म्यूट पर था. मतलब इतनी देर तक चिल्लाने का कोई फायदा ही नहीं हुआ. नितिन ने फ़ोन मुझसे छीना और कॉल काट दिया.
मैं: “ये तुमने म्यूट पर क्यों रखा?”
नितिन: “गलती से दब गया होगा. छोड़ो न, अपना काम तो हो गया न.”
मैं: “सिर्फ तुम्हारा ही हुआ हैं, मेरा नहीं.”
उसने मेरे ऊपर से हटते के बाद अपना इस्तेमाल किया हुआ कंडोम निकाला. फिर घुटनो के बल बैठ मेरे चेहरे के पास आ गया.
नितिन: “चलो मेरा लंड रगड़ कर तैयार करो, मैं तुम्हारा भी पुरा कर देता हूँ.”
मैं: “फ़ालतू मेहनत मत करवाओ, अब ये खड़ा नहीं होने वाला.”
नितिन: “तुम्हे अपने मुँह का जादू पता ही नहीं हैं. तुम्हारा चेहरा देख कर ही लोगो का लंड खड़ा हो जाता हैं, मुँह में लोगी तो मुर्दा लंड भी खड़ा हो जायेगा.”
मैं: “मैं पागल हूँ, इस गंदे लंड को अपने मुँह में लुंगी.”
नितिन: “मुँह में लेकर ही तो साफ़ करना हैं. एक बार लेकर देखो स्वाद पसंद ना आये तो निकाल देना.”
वो आगे बढ़कर अपना लंड मेरे मुँह के पास ले आया. वो नरम पड़ा लंड मेरे मुँह में डालता उसके पहले ही मैंने हाथ से पकड़ लिया और अपनी हथेली से रगड़ कर थोड़ा साफ़ कर लिया और हाथ से खिंच रगड़ने लगी. वो एक बार मुँह में डालने की ज़िद करता रहा तो मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले चूसना शुरू किया.
वो सिसकिया भरते हुए मेरे मुँह को ही चोदने लगा. एक हाथ से वो मेरे मम्मे भी दबा रहा था और फिर उसने हाथ लंबा कर मेरी चूत पर अपनी ऊँगली रगड़ने लगा.
उसकी उंगलियों के मेरी चूत पर रगड़ से मुझे नशा चढ़ने लगा. मैंने अपने पाँव पुरे खोल अपनी गांड को हिला उसकी ऊँगली अपनी चूत में घुसाने की कोशिश की.
पूजा (फ़ोन पर): “हेलो, क्या हुआ?… हेलो… हेलो… आउच.. अब इसे तो रहने दो, सारे कपड़े मत खोलो.”
उधर से पूजा की कामुक मदहोश आवाजे आने लगी और हमें उनसे तेज आवाज करनी थी.
मैं: “कम ऑन नितिन, जोर से चोदो मुझे.”
नितिन मेरी तरह आवाज नहीं कर रहा था, पर उसने मेरी आवाज सुनकर और जोश के साथ चोदना शुरू कर दिया. मैंने एक हाथ से उसको उसकी गर्दन के पीछे से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से उसकी पीठ झकड़ ली. अपनी टांगे उठा कर उस पर लपेट दी और अब मैं भी चुदने के मजे लेने को तैयार थी.
मैंने आहें जोर जोर से आहें भरना शुरू किया आह्ह, आह्हहह आह्ह ओ नितिन, चोद दे मुझे, हां यही पे, हम्म, आउच, ऊहहह आहह्ह्ह आ मेरी चूत भर दे.
फिर मैंने महसूस किया फ़ोन से आती आवाज लगभग बंद हो गयी थी. जरूर उन्होंने मेरी आवाज सुन ली होगी और अब पछता रहे होंगे. मुझे और जोश आ गया. मैं और भी आवाज कर उन्हें चिढ़ाने लगी.
इस बीच मेरा मजे के मारे पानी छूटना शुरू हो गया था. नितिन का कंडोम लगा लंड मेरी चूत के पानी को चीरते हुए अंदर बाहर हो फच्चाक फच्चाक की आवाजे करने लगा. मैं फ़ोन उठा कर अपनी चूत के पास ले गयी और थोड़ी देर चुप हो कर उनको वो आवाजे सुनाने लगी.
मैं अपनों आहें तो रोक नहीं पा रही थी तो फ़ोन फिर नीचे रख दिया और हम दोनों चीखते हुए चुदने के मजे लेते रहे.
आह्हहह ओआह्ह आ आ आ आ अम्म आईईईई ईईहीहीहीही ऊहूऊऊऊऊ, उसने चोद चोद कर मेरा काफी सारा पानी निकाल दिया और मेरी नशीली आवाज की सिसकियों से वो खुद ही झड़ गया.
झड़ने के बाद भी वो अपना लंड मेरी चूत में डाले रखे हुए मुझ पर लेटा रहा. उसने फिर इसी तरह लेटे लेटे ही अपना मोबाइल उठाया और मैंने उससे छीन कर अपनी आखरी भड़ास निकालते हुए दूसरी तरफ फ़ोन पर लोगो को सुनाया “क्या मस्त चोदा हैं नितिन तुमने”.
पहली बार मेरा ध्यान गया फ़ोन तो म्यूट पर था. मतलब इतनी देर तक चिल्लाने का कोई फायदा ही नहीं हुआ. नितिन ने फ़ोन मुझसे छीना और कॉल काट दिया.
मैं: “ये तुमने म्यूट पर क्यों रखा?”
नितिन: “गलती से दब गया होगा. छोड़ो न, अपना काम तो हो गया न.”
मैं: “सिर्फ तुम्हारा ही हुआ हैं, मेरा नहीं.”
उसने मेरे ऊपर से हटते के बाद अपना इस्तेमाल किया हुआ कंडोम निकाला. फिर घुटनो के बल बैठ मेरे चेहरे के पास आ गया.
नितिन: “चलो मेरा लंड रगड़ कर तैयार करो, मैं तुम्हारा भी पुरा कर देता हूँ.”
मैं: “फ़ालतू मेहनत मत करवाओ, अब ये खड़ा नहीं होने वाला.”
नितिन: “तुम्हे अपने मुँह का जादू पता ही नहीं हैं. तुम्हारा चेहरा देख कर ही लोगो का लंड खड़ा हो जाता हैं, मुँह में लोगी तो मुर्दा लंड भी खड़ा हो जायेगा.”
मैं: “मैं पागल हूँ, इस गंदे लंड को अपने मुँह में लुंगी.”
नितिन: “मुँह में लेकर ही तो साफ़ करना हैं. एक बार लेकर देखो स्वाद पसंद ना आये तो निकाल देना.”
वो आगे बढ़कर अपना लंड मेरे मुँह के पास ले आया. वो नरम पड़ा लंड मेरे मुँह में डालता उसके पहले ही मैंने हाथ से पकड़ लिया और अपनी हथेली से रगड़ कर थोड़ा साफ़ कर लिया और हाथ से खिंच रगड़ने लगी. वो एक बार मुँह में डालने की ज़िद करता रहा तो मैंने उसका लंड अपने मुँह में ले चूसना शुरू किया.
वो सिसकिया भरते हुए मेरे मुँह को ही चोदने लगा. एक हाथ से वो मेरे मम्मे भी दबा रहा था और फिर उसने हाथ लंबा कर मेरी चूत पर अपनी ऊँगली रगड़ने लगा.
उसकी उंगलियों के मेरी चूत पर रगड़ से मुझे नशा चढ़ने लगा. मैंने अपने पाँव पुरे खोल अपनी गांड को हिला उसकी ऊँगली अपनी चूत में घुसाने की कोशिश की.