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Guest
सोमवार को भी आना ही था। मैंने अपने सारे छोटे कपड़े एक बेग में भर स्टोर रूम में छुपा दिए। मुझे अब इनकी कोई जरुरत नहीं थी और भूल कर भी उन्हें नहीं पहनना था। मैंने अपने पुराने वाले कपड़े जो बदन को पुरे ढकने वाले ऑफिस वियर थे निकाल लिए और गले में सीने को ढकता स्कार्फ़ पहन लिया।
अपनी कुर्सी पर बैठ मेरा दिल धक् धक् कर रहा था। राहुल आया और सीधा अपने केबिन में चला गया, अपनी आदत के अनुसार बिना दाएं बाएं देखे। मुझे डर था कि कही वो मुझे अंदर बुला ना ले। जल्द ही उसका बुलावा भी आया। मैंने अपना स्कार्फ़ थोड़ा और नीचे खिंच कर अपना पूरा सीना ढकने की कोशिश की और डरते हुए उसके केबिन में प्रवेश किया।
वो अपने लैपटॉप में डूबे हुए ही मुझे कुछ काम के निर्देश देने लगा। मेरी तरफ देखा तक नहीं। शायद ऑफिस वाला राहुल, पार्टी वाले राहुल से एकदम अलग था, जैसे दो जुड़वाँ भाई अलग अलग व्यवहार के साथ। मैं अब बाहर जाने लगी और उसकी आवाज सुन रुक गयी।
राहुल: “प्रतिमा, हो सके तो कल रात के लिए माफ़ कर देना। माफ़ी लायक तो नहीं हूँ, पर पता नहीं मुझे कल
रात क्या हो गया था।”
मैंने बिना पीछे मुड़े उसकी पूरी बात सुनी और केबिन के दरवाजे से बाहर आ गयी। अपनी सीट पर बैठे ये सोचने लगी मैंने जो प्रतिक्रिया दी वो सही थी या नहीं। मुझे कुछ जवाब तो देना चाहिए था, कही मैंने अशिष्ट व्यवहार तो नहीं किया था राहुल के साथ। क्या मुझे वापिस अंदर जाकर उसको माफ़ कर देना चाहिए या थोड़ा और इंतजार करना चाहिए।
तभी मुझे राहुल का एक ईमेल मिला, उसने मुझे उसके आज के सारे अपॉइंटमेंट कैंसिल करने को बोला। ईमेल पूरा पढ़ा ही था कि राहुल अपने केबिन से निकला और चला गया। शायद वो मुझसे नाराज था और गुस्से में घर चला गया।
अगले दिन भी वो ऑफिस नहीं आया और घर से ही ऑफिस का काम करता रहा। उसके फेस तो फेस मीटिंग्स सारे कैंसिल करने का ईमेल आया था। उसके जैसे चरित्रवान पुरुष से अगर कोई छोटी सी गलती हो जाये तो उसके लिए ये बहुत बड़ी बात थी। हालांकि उसने गलत कुछ किया नहीं था, बल्कि करने वाला था।
मैं अब क्या करू, उसने जो किया उसके लिए माफ़ करू या खुद माफ़ी मांगू अपने किये की। सोचा फ़ोन करू, पर शायद शब्द ही मुँह से ना निकले। अंत में मैंने उसको मैसेज किया कि उसने जो भी किया वो नेचुरल था, मैंने बुरा नहीं माना हैं और हम उस घटना से आगे बढ़ सकते हैं। उसका थैंक यू का मैसेज आया।
अगले दिन राहुल ऑफिस आया और फिर से पहले वाला राहुल बन चूका था। हमने सब कुछ भुला दिया था।
दो महीने बाद ऑफिस में काफी हलचल थी, कंपनी के एक पुराने क्लाइंट के साथ बहुत बड़ी डील होने वाली थी। ये डील कंपनी को बहुत फायदा पहुंचाने वाली थी वरना काफी नुकसान की उम्मीद थी क्यों कि इस डील को पाने के लिए काफी तैयारियां कर ली गयी थी ।
मुझे इस कंपनी में अब काफी महीने हो गए थे और मेरी मेहनत और राहुल के भरोसे के बल मैं अब सिर्फ एक सेक्रटरी नहीं रही थी पर राहुल का दायां हाथ बन चुकी थी। मेरी भी इस डील में काफी बड़ी भूमिका थी । ये एक विदेशी क्लाइंट था, नाम था बॉब।
अगले महीने वो यहाँ डील साइन करने आने वाला था। इस बीच हमारा काम काफी बढ़ गया था। फिर पता चला कि बॉब किसी और काम से नहीं आ पायेगा और इसके बदले उसकी बीवी सैंड्रा आने वाली थी, जो कंपनी की वीपी भी थी।
आखिर सैंड्रा हमारे शहर आयी और एक होटल में रुकी। अगले दिन हमारी मीटिंग होनी थी पर राहुल ने शिष्टाचार के नाते सुबह उसके होटल में जाकर उसको फूलो का गुलदस्ता दे स्वागत करने का निर्णय किया। राहुल चाहता था कि मैं भी उसके साथ जाऊ, ताकि वो मुझे उनसे मिलवा सके क्यों कि मैं पहली बार मिलूंगी उनसे।
सुबह नौ बजे के करीब उस होटल में पहुंचे। दरवाजे पर दस्तक दी पर कुछ देर तक किसी ने दरवाजा नहीं खोला। मैं चाहती थी कि फिर से दस्तक दी जाये पर राहुल ने मना कर दिया और हमने थोड़ा और इंतजार किया। राहुल सही था, एक महिला ने दरवाजा खोला।
सामने सैंड्रा खड़ी थी, एक पेंतीस के लगभग उम्र की एक बेहद खूबसूरत सी महिला थी। घुंघराले भूरे खुले बाल और भूरी आँखें, पूरा गौरा रंग बहुत ही आकर्षक थी । उसने एक छोटा सा गाउन पहन रखा था जो घुटनो के ऊपर ही ख़त्म हो गया था और ऊपर नूडल स्ट्रैप थे। गाउन का गला इतना गहरा था कि बीच से उसके दोनों मम्मो की घाटियां साफ़ दिखाई दे रही थी।
अपनी कुर्सी पर बैठ मेरा दिल धक् धक् कर रहा था। राहुल आया और सीधा अपने केबिन में चला गया, अपनी आदत के अनुसार बिना दाएं बाएं देखे। मुझे डर था कि कही वो मुझे अंदर बुला ना ले। जल्द ही उसका बुलावा भी आया। मैंने अपना स्कार्फ़ थोड़ा और नीचे खिंच कर अपना पूरा सीना ढकने की कोशिश की और डरते हुए उसके केबिन में प्रवेश किया।
वो अपने लैपटॉप में डूबे हुए ही मुझे कुछ काम के निर्देश देने लगा। मेरी तरफ देखा तक नहीं। शायद ऑफिस वाला राहुल, पार्टी वाले राहुल से एकदम अलग था, जैसे दो जुड़वाँ भाई अलग अलग व्यवहार के साथ। मैं अब बाहर जाने लगी और उसकी आवाज सुन रुक गयी।
राहुल: “प्रतिमा, हो सके तो कल रात के लिए माफ़ कर देना। माफ़ी लायक तो नहीं हूँ, पर पता नहीं मुझे कल
रात क्या हो गया था।”
मैंने बिना पीछे मुड़े उसकी पूरी बात सुनी और केबिन के दरवाजे से बाहर आ गयी। अपनी सीट पर बैठे ये सोचने लगी मैंने जो प्रतिक्रिया दी वो सही थी या नहीं। मुझे कुछ जवाब तो देना चाहिए था, कही मैंने अशिष्ट व्यवहार तो नहीं किया था राहुल के साथ। क्या मुझे वापिस अंदर जाकर उसको माफ़ कर देना चाहिए या थोड़ा और इंतजार करना चाहिए।
तभी मुझे राहुल का एक ईमेल मिला, उसने मुझे उसके आज के सारे अपॉइंटमेंट कैंसिल करने को बोला। ईमेल पूरा पढ़ा ही था कि राहुल अपने केबिन से निकला और चला गया। शायद वो मुझसे नाराज था और गुस्से में घर चला गया।
अगले दिन भी वो ऑफिस नहीं आया और घर से ही ऑफिस का काम करता रहा। उसके फेस तो फेस मीटिंग्स सारे कैंसिल करने का ईमेल आया था। उसके जैसे चरित्रवान पुरुष से अगर कोई छोटी सी गलती हो जाये तो उसके लिए ये बहुत बड़ी बात थी। हालांकि उसने गलत कुछ किया नहीं था, बल्कि करने वाला था।
मैं अब क्या करू, उसने जो किया उसके लिए माफ़ करू या खुद माफ़ी मांगू अपने किये की। सोचा फ़ोन करू, पर शायद शब्द ही मुँह से ना निकले। अंत में मैंने उसको मैसेज किया कि उसने जो भी किया वो नेचुरल था, मैंने बुरा नहीं माना हैं और हम उस घटना से आगे बढ़ सकते हैं। उसका थैंक यू का मैसेज आया।
अगले दिन राहुल ऑफिस आया और फिर से पहले वाला राहुल बन चूका था। हमने सब कुछ भुला दिया था।
दो महीने बाद ऑफिस में काफी हलचल थी, कंपनी के एक पुराने क्लाइंट के साथ बहुत बड़ी डील होने वाली थी। ये डील कंपनी को बहुत फायदा पहुंचाने वाली थी वरना काफी नुकसान की उम्मीद थी क्यों कि इस डील को पाने के लिए काफी तैयारियां कर ली गयी थी ।
मुझे इस कंपनी में अब काफी महीने हो गए थे और मेरी मेहनत और राहुल के भरोसे के बल मैं अब सिर्फ एक सेक्रटरी नहीं रही थी पर राहुल का दायां हाथ बन चुकी थी। मेरी भी इस डील में काफी बड़ी भूमिका थी । ये एक विदेशी क्लाइंट था, नाम था बॉब।
अगले महीने वो यहाँ डील साइन करने आने वाला था। इस बीच हमारा काम काफी बढ़ गया था। फिर पता चला कि बॉब किसी और काम से नहीं आ पायेगा और इसके बदले उसकी बीवी सैंड्रा आने वाली थी, जो कंपनी की वीपी भी थी।
आखिर सैंड्रा हमारे शहर आयी और एक होटल में रुकी। अगले दिन हमारी मीटिंग होनी थी पर राहुल ने शिष्टाचार के नाते सुबह उसके होटल में जाकर उसको फूलो का गुलदस्ता दे स्वागत करने का निर्णय किया। राहुल चाहता था कि मैं भी उसके साथ जाऊ, ताकि वो मुझे उनसे मिलवा सके क्यों कि मैं पहली बार मिलूंगी उनसे।
सुबह नौ बजे के करीब उस होटल में पहुंचे। दरवाजे पर दस्तक दी पर कुछ देर तक किसी ने दरवाजा नहीं खोला। मैं चाहती थी कि फिर से दस्तक दी जाये पर राहुल ने मना कर दिया और हमने थोड़ा और इंतजार किया। राहुल सही था, एक महिला ने दरवाजा खोला।
सामने सैंड्रा खड़ी थी, एक पेंतीस के लगभग उम्र की एक बेहद खूबसूरत सी महिला थी। घुंघराले भूरे खुले बाल और भूरी आँखें, पूरा गौरा रंग बहुत ही आकर्षक थी । उसने एक छोटा सा गाउन पहन रखा था जो घुटनो के ऊपर ही ख़त्म हो गया था और ऊपर नूडल स्ट्रैप थे। गाउन का गला इतना गहरा था कि बीच से उसके दोनों मम्मो की घाटियां साफ़ दिखाई दे रही थी।