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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

मेरी उसके करीब आते ही मेरी और उसकी मुस्कान गायब हो गयी। दोनों के होंठ बंद थे और एक बार तो मुझे कुछ सुझा ही नहीं मैं क्या करुं। तब तक उसके बंद होंठ मेरे बंद होंठो को हल्का सा छू गए। मेरे पुरे बदन में एक सिहरन सी उठी। उसने हल्का सा होंठ पीछे कर अपने होंठ थोड़े खोले और मेरे होंठ भी स्वतः ही खुल गए।

उसके होंठ एक बार फिर आगे बड़े और मेरे ऊपर के होंठ को छू अपने अंदर दबाने ही वाले थे कि मेरी गांड में उठे एक दर्द ने मुझे जगा दिया और मैं एकदम से पीछे हट गयी। उसके होंठ खुले के खुले रह गए।

मैं: “नहीं राहुल, ये ठीक नहीं।”

राहुल: “मैं इतना बुरा हु ! जैक को चूमा वो ठीक, पर मैं उसके जितना काबिल नहीं?”

मैं: “तुम गलत सोच रहे हो, तुम अच्छे इंसान हो मुझे पसंद हो, पर तुम मेरे बॉस हो। मैं बॉस के साथ कोई संबंध नहीं बना सकती। मुझे तुम्हारा सामना रोज ऑफिस में करना पड़ेगा। एक तरफ ऐसा रिलेशन दूसरी तरफ ऑफिस का, मैं दोनों हैंडल नहीं कर पाऊँगी। वैसे भी मैं शादीशुदा हु, मैं किसी और के साथ लंबा रिलेशन नहीं रखना चाहती।”

राहुल: “आई एम् सॉरी। तुम्हारे जैक के साथ रिश्ते को लेकर मैं इमोशनल हो गया था। थोड़ी जलन भी थी।”

मैं: “मैं किसी के साथ दिल नहीं लगाना चाहती, जैक के साथ लगाया था उसके परिणाम सामने हैं। अब और गलती नहीं करनी हैं। आज मेरी आखिरी गलती होगी। हम जिस काम के लिए आये हैं वो कर लेते हैं और फिर अपनी अपनी राह पकड़ लेते हैं, पहले की तरह।”

राहुल: “ठीक हैं मेरे बैडरूम में चलते हैं।”

राहुल और मैं अब उसके बैडरूम में आ गए थे। हम दोनों एक दूसरे की शक्ल ताक रहे थे कि आ तो गए अब शुरू कैसे करे। आज तो सैंड्रा भी नहीं जो आदेश देकर हमें शुरू करवा सके। कभी हम एक दूसरे को देखते तो कभी आस पास।

राहुल अब आगे बढ़ा और मुझे पीछे घुमा कर मेरी पीठ पर से ड्रेस की चैन नीचे खिंच खोल दी। मैं थोड़ा आगे हटी और फिर उसकी तरफ घूम कर हाथ पीछे ले जाकर अपनी चैन बंद कर दी।

मैं: “पुरे कपडे खोलने की क्या जरुरत हैं, तुम नीचे से कपडे थोड़े उठा कर ही पीछे से कर सकते हो। ”

राहुल: “मैंने सोचा तुम्हारे कपड़े गंदे हो जायेगे इसलिए.. ”

मैं: “अगर ख़राब भी हो गए तो कोई बात नहीं, मेरी पिछली बार के जो कपड़े रह गए थे वो मैं पहन लुंगी। वैसे भी मैं इन केजुअल कपड़ो में ऑफिस नहीं जा सकती।”

राहुल: “मेरे पास यहाँ कोई ऑफिस वियर नहीं हैं इसलिए मुझे मेरे कपड़े तो खोलने ही पड़ेंगे । तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं ?”

मैं: “मैं पीछे मुड़ जाती हूँ, तुम कपड़े खोल लो। ”

राहुल अपने कपड़े निकालने लगा और मैं उसकी तरफ पीठ कर खड़ी हो गयी। थोड़ी देर में उसने सब कपड़े निकाल दिए। हम दोनों बिस्तर के पास ही खड़े थे। मेरा मुँह बिस्तर की तरफ था।

राहुल ने बताया कि वो कपड़े खोल कर तैयार हैं तो मैंने अपना फ़ोन रिकॉर्डिंग के लिए राहुल को दे दिया। हमें वीडियो सैंड्रा को सबूत के तौर पर दिखाना था। राहुल ने मेरा मोबाइल एक टेबल पर सेट कर रख दिया। मैं अब भी उसकी तरफ पीठ घुमाये खड़ी थी और उसका इंतजार कर रही थी।

वो मेरे पीछे आकर खड़ा हुआ, और मैंने अपनी ड्रेस के नीचे से अंदर हाथ डाल कर अपनी पैंटी निकाल कर रख दी। मैं आगे की तरफ झुक कर उसकी ओर अपनी गांड कर दी और उसके हाथ के स्पर्श का इंतजार किया। उसका हाथ तो नहीं आया पर आवाज आ रही थी। वो अपना लंड रगड़ कर कड़क करने की कोशिश कर रहा था शायद।

राहुल: “मुझे कुछ समय दो, अपने आप को तैयार करने के लिए।”

मैं फिर सीधा खड़ी हो इंतजार करने लगी। एक दो मिनट के बाद वो फिर बोला।

राहुल: “अगर तुम्हे कोई आपत्ति ना हो तो मेरी मदद कर दोगी तैयार करने में। ”
 
राहुल: “मुझे कुछ समय दो, अपने आप को तैयार करने के लिए।”

मैं फिर सीधा खड़ी हो इंतजार करने लगी। एक दो मिनट के बाद वो फिर बोला।

राहुल: “अगर तुम्हे कोई आपत्ति ना हो तो मेरी मदद कर दोगी तैयार करने में। ”

मैं सकपका गयी, उसके लंड को कैसे हाथ लगा सकती हूँ। मगर समय बचाना था, जल्दी से इस स्तिथि से बाहर आना था। तो मैंने बिना मुड़े अपना हाथ पीछे किया और टटोलने लगी उसका लंड कहाँ हैं। उसने मेरा हाथ पकड़ा और रास्ता दिखाते हुए अपने नरम पड़े लंड पर रख दिया।

हाथ से उसके लंड को छूते ही मुझे जैसे करंट लगा और मैंने झटके से हाथ फिर खींच लिया। मैंने एक बार फिर प्रयास किया और इस बार बिना उसकी मदद के अपना हाथ पीछे ले जाकर उसके एब्स पर रख दिया, फिर बिना हाथ उठाये उसके बदन पर खिसकाते हुए उसके लंड तक ले आयी और उसे पकड़ लिया।

उसका तीन चार इंच का जेली समान नरम लंड था। मैंने उस पर अपना हाथ रगड़ना शुरू किया। हाथ पीछे की तरफ था तो संतुलन नहीं बैठ रहा था।

राहुल: “तुम मेरी तरफ घूम जाओ, नहीं देखना हो तो नीचे मत देखना। ”

मुझे उसकी बात समझ में आ गयी, मैं नजरे सीधी सामने रखते हुए उसकी तरफ मुड़ गयी। हम दोनों अब एक दूसरे के चेहरे पर देख रहे थे।

मैं एक बार फिर अपना हाथ अंदाज़े से नीचे ले गयी और एक बार में उसके लंड पर हाथ रख उसको पकड़ रगड़ने लगी।

जैसे जैसे मैं उसका लंड रगड़ रही थी वो मेरी तरफ देख हल्का सा मुस्कुरा रहा था, तो मैं भी शर्म के मारे मुस्कुरा रही थी। कुछ ही देर में उसका लंड बड़ा और कड़क होने लगा था। उसका लंड अब हल्का गरम हो चुका था पर थोड़ी नरमी अभी बाकी थी। मैंने उसके चेहरे पर देखा तो कभी एक शिकन आ जाती तो कभी उसका मुँह हल्का सा खुल जैसे सिसकी निकलने को होती और वो दबा लेता। उसकी हंसी अब गायब थी।

उसका ये मजा लेता चेहरा देख मुझे भी कुछ कुछ होने लगा, पर शरम ज्यादा थी। वो मेरी तरफ देख रहा था और मैं अपना चेहरा कैसे छुपाती। मैं बीच बीच में इधर उधर देखने लगती। उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा और मुझे दबाने लगा। मुझे भी लगा कि उसका सामना करू उससे अच्छा हैं नीचे बैठ कर रगड़ू।

मैं अब नीचे बैठ गयी और उसका लंड मेरे सामने था। उसके लंड के अंदर की नसे थोड़ी तन गयी थी। ये मेरी चूत में जाने के लायक तो था पर गांड के लिए थोड़ा और कड़क होना जरुरी था। मैं पंजो पर बैठे अपना संतुलन नहीं बना पा रही थी तो उसकी एक जांघ को पीछे से पकड़ लिया। एक इच्छा हुई उसका लंड मुँह में ले लू ताकि जल्दी कड़क हो जाये। पर आगे बढ़कर कैसे करूँ, वो क्या सोचेगा।

उसने अपना हाथ मेरे सर के पीछे रखा और आगे की तरफ अपनी ओर लाने लगा। शायद वो भी मेरी तरह यही चाहता था। मैंने अपने हाथ में पकड़ा लंड अपने मुँह में रख दिया और उसकी एक स्पष्ट आह निकली।

मैंने अब अपना दूसरा हाथ भी फ्री कर उसकी दूसरी जांघ को पीछे से पकड़ लिया।

उसका आधा लंड मेरे मुँह में था और मैं आगे पीछे हो उसे रगड़ रही थी और उसस्की सिसकिया चालू थी। थोड़ी देर में उसने मुझे मुँह में ही जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया। मैं भी अपना मुँह आगे पीछे कर रही थी और वो भी आगे पीछे हो रहा था तो इससे गति ज्यादा हुई। उसका लंड अब स्टील की भांति कड़क हो चूका था।

उसके लंड का टेस्ट मुझे अच्छा लग रहा था और उस पर उसकी सिसकिया, मैं उनमे गुम हो रुकी नहीं। फिर अचानक गप्प की आवाज आयी और उसने अपना पूरा लंड मेरे मुँह में उतार दिया और वही रुक गया, उसका लंड मेरे गले तक उतर गया था । मेरी तो सांस ही रुक गयी, और मैंने जल्दी से उसका लंड बाहर उगल दिया।

मैं अब खांसते हुए खड़ी हुई क्यों कि उसका थोड़ा पानी मेरे गले में अटक गया था। मैं अब थोड़ा सामान्य हुई, वो मुझे अब पोजीशन में लाने लगा। उसने मुझे बेड के किनारे पर घोड़ी की तरह घुटनो और कोहनियो के बल लेटा दिया। मेरे घुटने बेड के किनारे पर थे और गांड का हिस्सा बेड के बाहर लटका था। जब कि मेरा धड़ और सर बिस्तर पर था।

इस पोजीशन में आते ही मेरी ड्रेस नीचे से थोड़ी सी ऊपर हो गयी और जाँघे बाहर आ गयी। वो मेरी गांड की तरफ बिस्तर के पास नीचे खड़ा था। उसने मेरी ड्रेस नीचे से पकड़ी और ऊपर उठा कर मेरी गांड को नंगा कर दिया। ड्रेस हटते ही मेरी गांड और चूत के छेद पर हवा पड़ने लगी। मैं अपने बॉस के सामने पहली बार नंगी थी।

इस पोजीशन में जरूर उसको मेरी चूत का छेद भी दिख रहा होगा ये सोच कर मुझे और भी शरम आ रही थी। गांड मारते हुए वो मेरी शक्ल नहीं देख पायेगा बस ये ही अच्छी बात थी। मैंने सोचा मैं खड़े हो कर गांड मरवा लेती हु ताकि वो मेरी चूत को ना देख पाए। मैं खड़े होने को हुई और उसने मेरी ड्रेस को और भी ऊपर खिसका कर कमर से ऊपर कर दिया। अब मेरी नंगी गांड के साथ नंगी कमर भी उसके सामने थी।

वो नीचे खड़ा था और अपने हाथ की उंगलिया मेरे गांड के छेद पर रगड़ने लगा, चूत का छेद एकदम उसके नजदीक ही था तो उसकीउंगलिया वहा भी छूने लगी। मेरा पानी निकलने लगा था उसकी उंगलिया भीग गयी थी और उसने वो पानी मेरी गांड के छेद पर लगा दिया। वो अपना उंगलिया मेरी चूत के छेद से शुरू करते हुए रगड़ता हुए गांड के छेद तक लाते हुए चिकनाई लगा रहा था।

अनायास ही उसकी उंगलियों की छुअन से मेरी चूत अपना थोड़ा पानी छोड़ रही थी। मुझे मेरी गांड पर भी उस सारे चिकने पानी के लगने से अब ठंडाई महसूस हो रही थी ।

तभी एक कड़क गरम लोहे की छड़ की तरह चीज मेरे गांड के छेद को छू गयी। उसका लंड अब मेरे अंदर प्रवेश को तैयार था। उसने अपने लंड की टोपी मेरे गांड के छेद में घुसा हल्का धक्का मारा और उसका दो इंच लंड मेरी गांड के अंदर घुस गया और मेरी एक आह निकली।
 
अब वो अपना लंड मेरी गांड के अंदर बाहर कर चोदने लगा। उसने अपने दोनों हाथ मेरी गांड के उभारो पर रख दिए और चोदता रहा। उसने मेरी गांड पर हाथ से एक चटाका मारा। इस चुदाई के बीच उसके हाथ अब मेरी नंगी पतली कमर को पकड़े थे।

इसके बाद उसकी स्पीड अचानक तेज होती गयी गपक गपक गपक की आवाज आने लगी और इसके साथ ही मेरी हलकी सिसकिया आने लगी आह आह। थोड़ी देर इसी रफ़्तार से मुझे चोदता रहा और उसका पानी छूटने लगा और गप्पक गप्पक तेज आवाज होने लगी। उससे उसका नशा और चढ़ा और मेरी सिसकिया बढ़ने के साथ अब फुचुक फुचुक फुचुक की आवाज आने लगी और मेरी लगातार आह्ह आह्ह की आवाजे आती रही।

एक बार फिर उसकी स्पीड बढ़ी और मेरी आहहह आहहह की आवाज बिना रुके लगातार आती रही । इस मजे से मैं खुद अब पीछे धक्का मारने लगी थी । इतनी देर से कोहनियो के बल बैठे रहने के बाद अब मैं अब हथेलियों के बल आ कर थोड़ा उपर उठी और उसने मेरे गले को दोनों हाथों से पकड़ थोड़ा उठा लिया।

मैं अब 45 डिग्री के कोण पर थी और उसके झटके और गहरे हो गए और पानी के छिछलने की आवाजे आने लगी। बीच बीच में उसके झटको से मैं थोड़ा उछलने लगी थी। उसन गले से हाथ हटा फिर कमर पकड़ी ।

उसने पहले स्पीड धीमे की और फिर अचानक एक के बाद एक तेज झटके मारने लगा और मेरी आह आह लगातार चलती रही। उसने इस तरह लगातार बिना रुके तीस चालिस झटके मार दिए। उसके बाद फिर एक बार वो थोड़ा धीरे हुआ और मुझे गले से पकड़ा और धक्के मारने लगा।

वो कल की तरह जानवरो की तरह नहीं चोद रहा था। इससे मुझे दर्द नहीं हो रहा था। उसने पहले पानी बनाया और फिर ही झटके मारे थे। अब वो एक स्पीड में गछाक गछाक गछाक मारता रहा। धीरे धीरे स्पीड बढ़ी और फिर गहरे और धीमे झटके पड़ने लगे।

वो फिर रुक गया और मैं एक दम स्लो मोशन में आगे पीछे हुई। जिससे पानी की चपड़ चपड़ आवाज हुई और उसकी स्पीड बढ़ने के साथ गचड़ गचड़ पानी की आवाज तेज आवाज आने लगी। वो मेरी गांड पूरी हिलाते हुए हुए कम्पन करवा रहा था।

मुझे तो मजा आ रहा था पर उसने अपना लंड अब बाहर निकाल दिया। उसने मुझे आगे खिसकाया और मैं घुटनो के बल चल कर बिस्तर के बीच में आ गयी। वो भी अब बिस्तर पर चढ़ मेरे पीछे आ गया। घुटनो के बल खड़े होने से मेरी ड्रेस फिर से नीचे हो गयी थी। उसने मेरी ड्रेस को नीचे से पकड़ा और एक बार फिर कमर तक ऊपर कर दिया।

मैं अभी भी घुटनो के बल खड़ी थी और उसने ड्रेस उठाते हुए एक झटके में पूरी सर से बाहर निकाल दी। मैं अब सिर्फ ब्रा में खड़ी थी। हम दोनों एक मजेदार काम के बीच में थे तो उसको मना नहीं किया और उसने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे पकडे रहने के बावजूद उसको पूरा निकाल दिया। मैंने जल्दी से आगे झुक कर वापिस कोहनी के बल डॉगी बन बैठी और वो अब बिस्तर पर घुटनो के बल मेरे पीछे बैठा था ।

उसने एक हाथ मेरी कमर पर रखा और इसबार अपना लंड मेरी चूत और गांड के छेद के बीच आस पास घुमा कर मुझे तड़पा रहा था। उसने झटके से अपना लंड मेरी चूत के छेद में डाला और चूत में होते पहले के दर्द से मैं कोहनियो से अपने हथेलियो के बल आ गयी।

उसने जल्दी से मुझे एक बार फिर दोनों हाथ से गले से पकड़ थोड़ा ऊपर आगे से उठा दिया। उसके लंड के मेरे अंदर होते झटको से मैं कमजोर पड़ गयी और चाहते हुए भी उसको रोक नहीं पायी। उसने अब अपना लंड अंदर गोल गोल घुमा कर जैसे अंदर के पानी को मथने लगा और लस्सी बनाने लगा।

मुझे असीम आनद की प्राप्ति हुई और एक हल्का दर्द भी उठा और मेरी तेज आवाज में आहहहहहहहहहहह निकली जो आठ दस सेकण्ड्स लम्बी आह थी और मैंने अपना एक हाथ बिस्तर पर तीन चार बार पटक अपनी स्तिथि बताई। मैं आगे बढ़ उससे अलग हुई।

मैं: “मैंने तुम्हे आगे डालने की इजाजत नहीं दी थी। ”

राहुल: “सॉरी, मैं वो रोक नहीं पाया। अभी पूरा करने दो।”

मैं: “अब आगे के छेद में मत डालना, तो पूरा करने दूगी।”

राहुल: ” ठीक हैं, तुम ही कर लो। ”

वो अब नीचे लेट गया। मैं उसे अपनी चूत सामने से दिखाने में शरमा रही थी तो मैं उसकी तरफ पीठ करके उसके लंड पर बैठ गयी। मेरे पाँव घुटनो से मुड़ कर पीछे की तरफ थे।

मैंने उसका लंड अपनी गांड में डाला और हम दोनों को फिर चैन मिला। मैंने अपने हाथ पीछे ले जाकर उसके सीने पर रख सहारा लिया और अपने शरीर को ऊपर नीचे कर उसे चोदने लगी। उसके हाथ मेरी पतली कमर को पकडे हुए थे।

मेरी गांड से अब पच्च पच्च की आवाज आने लगी और हम दोनों आहें भरने लगे। असहनीय मजा होने पर मैंने अपने दोनों मम्में दबाये और फिर आसमान में सर उठाये उसको चोदती रही।

थोड़ी ही देर में वो चीखते हुए आहें भर झड़ गया। मैं जब उस पर से उठी तो मेरी गांड और जाँघे फड़फड़ा रही थी और उसका छोड़ा पानी मेरी गांड से झर रहा था।
 
राहुल ने मेरी गांड मार दी थी और मैंने आखिरी बाधा पार कर ली थी। मैं जल्दी से अपने कपड़े उठाये बिना उसकी तरफ मुड़े बाथरूम को भागी। मैंने अपनी दूसरी परीक्षा पास कर ली थी। मैं इसी में खुश थी कि मैंने राहुल को अपने मम्मे और आगे से पूरी चूत नहीं दिखाई थी। हालांकि उसने कुछ पलो के लिए मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया था पर उसे मैंने अपनी चूत पूरी नहीं चोदने दी।

मैंने अपनी साफ़ सफाई कर कपड़े पहन लिए और बाहर निकल बैडरूम में आयी। वो वहां नहीं था। मैं हॉल में आयी तो वो वहां के बाथरूम से बाहर आया। वो अंदर बेडरूम में गया और आते वक़्त मेरे पहले वाले कपड़े ले आया जो दो दिन पहले मैंने यहाँ छोड़ दिए थे।

राहुल: “तुम्हे ऑफिस के लिए ये कपड़े पहनने थे ना, ये लो . इसमें तुम्हारी ब्रा और पैंटी भी हैं”

मैंने वो कपड़े उससे लिए। उसकी इतनी बेबाक बात पर मुझे शर्म आ गयी, उसने भले ही मुझे चोदा था पर इतना अधिकार तो नहीं था कि इस तरह बात मुँह पर करें। मैं उससे कपड़े लगभग छीनते हुए बैडरूम में भागी।

मैंने अपनी ड्रेस उतारी और ब्रा और पैंटी में आ गयी। वो अंदर के कपडे काले रंग के थे, मेरी कुर्ते वाली सफ़ेद ड्रेस से मैच नहीं होते। इसलिए मुझे उन्हें भी उतारना पड़ा, ताकि दूसरा वाला पूरा सेट पहन सकू। मगर तभी राहुल धड़धड़ाते हुए अंदर आ गया। मैंने दीवार की तरफ मुँह कर लिया।

राहुल: “सॉरी, मैं अपनी बेल्ट भूल गया था। मुझे आदत नहीं कि मेरे कमरे में लड़किया कपड़े भी बदलती हैं। ”

मैं: “अब तो पता चल गया अब क्यों घूर रहे हो, बाहर जाओ।”

राहुल: “तुम्हे नहीं, तुम्हारी पीठ पर तिल देख रहा था, बहुत खूबसूरत लग रहा हैं। ”

मैंने अपने बाल पीठ पर कर दिए

राहुल: “तुम्हारे बाल इतने भी लंबे नहीं कि कमर के नीचे के दूसरे तिल को छुपा सके। ”

मेरे पति ने बताया था कि मेरी गांड की दरार जहा शुरू होती हैं वहा थोड़ा ऊपर एक तिल हैं। मैंने एक हाथ से अपने उस तिल को छुपा लिया।

मेरे पहनने के कपड़े मेरे पीछे की तरफ थे, जहा वो खडा था तो कपड़े पहन भी नहीं सकती थी।

उसने मेरी गांड की दरार में ऊँगली रख दी।

राहुल: “तिल यहाँ हैं ”

मैंने उसका हाथ हटाने की कोशिश की, और वो अपनी ऊँगली नीचे खिसकाते हुए मेरी गांड की दरार के साथ चलाता रहा और मैं अपना हाथ उसके हाथ के पीछे पीछे ले जा रोकने की। उसकी ऊँगली अब मेरी चूत के दरार पर थी और हलकी सी अंदर थोड़ी घुसा दी। मैं आगे बढ़ी पर दीवार से चिपक गयी। उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत में थोड़ी और उतारी और मेरी सिसकियाँ निकलने लगी।

मैं: “मुझे वहां दर्द हो रहा हैं, प्लीज बाहर निकालो ऊँगली ”

राहुल : “तो फिर कब करने दोगी, कल?”

मैं: “पता नहीं ”

उसने अपनी ऊँगली अंदर ही हिलाते हुए घुमा दी और मेरी एक और आह निकली।

राहुल: “फिर कब?”

मैं: “कल”

उसने एक बार फिर अपनी ऊँगली हिला दी और मेरी एक और आह निकली।

राहुल: “पक्का कल !”

मैं: “हां पक्का”

राहुल: “कपड़े सारे खोलने दोगी ?”

मैं: “खोल लेना”

राहुल: “मुँह लगाने दोगी अपनी चूत में”

मैं: “नहीं”

उसने ऊँगली और अंदर घुसा दी।

मैं: “ऊह ऊह, लगा देना मुंह भी ”

राहुल ने अपनी ऊँगली मेरी चूत से निकाल दी और मैंने राहत ली। वो थोड़ी देर और रखता तो शायद मैं झड़ जाती। मेरी पीठ अभी भी उसकी तरफ थी और वो मेरे एकदम पीछे खड़ा था।

राहुल: “ऑफिस में करने दोगी?”

मैं: “तुम्हारी मांगे कुछ ज्यादा नहीं बढ़ गयी।”

उसने मेरी नंगी पीठ पर पड़े मेरे लंबे खुले बाल हटाए हुए और अपने होंठ से चूमने लगा। अपना हाथ मेरी गांड पर मलने लगा। फिर अपनी ऊँगली मेरी गांड पर फिराते हुए एक बार फिर मेरी चूत में घुसा दी। इस बार मैंने नहीं रोका, मैं चाहती थी वो मेरा अधूरा काम ऊँगली से ही पूरा कर ले।

राहुल: “क्या कहा? ऑफिस में करने दोगी ”

मैं: “नहीं”

उसने अपनी ऊँगली मेरी चूत में हिलानी शुरू कर दी और मेरी मजे में आहें निकलने शुरू हो गयी। मैं चाहती थी कि वो अब मेरा पूरा करे।

राहुल: “ऑफिस में करने दोगी ?”

मैं: “नहीं…आह्ह आह”

राहुल: “अब बोलो ”

मैं: “नहीं…आह्ह आह”

मैं उसे ना बोलती रही और वो और भी अंदर ऊँगली घुसा अंदर घूमाता रहा। मेरा अब पानी बनने लगा था और मैं लगातार नशीली आहें भर रही थी।

राहुल : “मेरे केबिन में करेंगे ?”

मैं: “आह्ह हां करेंगे आह्ह ”

राहुल : “ऑफिस के वाशरूम में करेंगे ?”

मैं: “आईई हां करेंगे आअह ”

राहुल : “मेरी कार में करेंगे ?”

मैं: ” हां हां उहुहु हां करेंगे ”

राहुल: “अपने पति के सामने करवाओगी ?”

मैं: ” हां , आह , नहीं करवाउंगी , अकेले में सिर्फ उह उह ”

वो ऊँगली और भी जोर जोर से अंदर बाहर कर चोदने लगा और मैंने अपने पाँव चौड़े कर लिए थे।

राहुल: “पति के सामने करवाओगी ?”

में: “आह्ह…नहीं, आह्ह…नहीं आह आह आह उम्म आहआह ”

राहुल: “बोलो करवाओगी ?”

मैं: “नहीं करवाउंगी…आह आह आह, नहीं..ऊहूहु…हां…आईई हां करवाऊंगी, करवाउंगी पति के सामने करवाऊंगी …आह्ह आह्ह आह्ह उउउउऊ हा”

और मैं खड़े खड़े ही उसकी ऊँगली से झड़ गयी। मेरे पैर थर थर कांप रहे थे। मैं दीवार की तरफ मुँह कर दीवार से चिपके हुए खड़ी रही जब तक कि राहुल वहां से बाहर नहीं चला गया। उसके जाते ही मैंने जल्दी से कपड़े पहन लिए ।
 
अब मैं सोच रही थी कि पिछले कुछ मिनटों में मैंने क्या किया। मैंने अपनी कमजोरी को राहुल के सामने पूरा खोल दिया और उसके इशारो पर नाचती रही। फिर सोचा वो चाहता तो उस वक़्त मेरी चूत को अपने लंड से भी चोद सकता था या मुझे आगे से पूरा नंगा देख सकता था जो मैं अब तक छुपाती आ रही थी। पर इतना होने के बाद मैं उसका सामना कैसे करुँगी।

मैं अब नजरे झुकाये बाहर आयी। राहुल अपना सूट पहन तैयार था। हम दोनों बाहर आकर कार में बैठे। हम दोनों चुपचाप बैठे थे।

राहुल: “तुम्हे अपने आप को रोकना नहीं चाहिए, तुम्हारी बहुत सी दबी हुई इच्छाएं हैं, उनको बाहर आने दो, रोको मत। खुल कर जियो।”

मैं चुप चाप नजरे झुकाये सब सुनती रही।

राहुल: “कुछ तो बोलो ”

मैं कुछ नहीं बोल पायी। चुप ही रही।

राहुल: “तो फिर कल मेरे केबिन से शुरू करे”

मेरे मुँह पर तो जैसे शर्म का ताला लग चूका था, मैंने सिर्फ ना में गरदन हिला दी।

राहुल: “हां बोल कर अब पीछे मत हटो। इतनी जगहों के लिए हां बोला था…अच्छा बताओ उन सब में से कौन सी जगह के लिए तैयार हो।

मैं सर झुकाये शर्म से सिर्फ गरदन हिलाते हुए ना कर रही थी।

राहुल: “अरे शर्माओ मत, बोल भी दो, अब कैसी शर्म”

मैं: “इसी कारण से मैंने उस दिन तुम्हारी जगह जोसफ को चुना था। एक बार कुछ हो गया तो हमेशा मुझे ऐसी बातें सुनने को मिलेगी।”

राहुल: “अच्छा सॉरी, मैं बार बार नहीं बोलूंगा, बस एक बार बता दो, कहा करेंगे?”

मैं: “जो होना था हो चूका, अब कुछ नहीं होगा”

राहुल: ” अच्छा ठीक हैं, अब मैं नहीं बोलूंगा। वैसे डील मिलने वाली हैं तो हम सेलिब्रेट करते हैं।”

मैं: “तुम फिर से वैसी ही बातें कर रहे हो। ”

राहुल: “मैं असली पार्टी की बात का रहा था। फार्म हाउस पर पार्टी रखते हैं ।”

मैं: “ऊप्स सॉरी, इस बार मैं पति को भी लाऊंगी. पार्टी में।”

राहुल: “ओह, तो पति के सामने करवाने का ऑप्शन चुना हैं तो तुमने। ठीक हैं। ”

मैं: “हे? मैं पार्टी की बात कर रही हूँ। वैसे भी पति के सामने करवाने से बेहतर बंद कमरे में करवा लू।”

राहुल: “मैं तो पहले ही बोल रहा था, मेरे केबिन में कर लेते हैं। तो कल का पक्का रखे प्रोग्राम फिर। ”

मैं: “अब इस बारे में कोई भी बात की तो मैं कार से उतर जाऊंगी”

राहुल “इस पार्टी में वैसे भी सिर्फ स्टाफ होगा उसकी फॅमिली नहीं। फॅमिली के लिए तो सालाना पार्टी होती ही है।”

उसके बाद राहुल पुरे रास्ते चुप ही रहा। पर कार ऑफिस पहुंचते ही उसने मुझे फिर छेड़ ही दिया।

राहुल: “अभी मैं बार बार याद नहीं दिलवाऊंगा, कल मेरे केबिन में हमारा प्रोग्राम हैं।”

मैं सर हिलाते हुए ऑफिस में आ गयी। ये तो मुझे अब ऐसे ही परेशान करता रहेगा। वैसे ये वाला राहुल पहले के खड़ूस राहुल बॉस से बेहतर था।

दोपहर बाद सैंड्रा और जोसफ हमारे ऑफिस में आये। मैंने और राहुल ने उनको रिसीव किया और सीधा राहुल के केबिन में आये। सभी लोगो को अपेक्षा थी कि आज हमें डील मिल ही जाएगी। हम चारो राहुल के केबिन में पहुंचे और बैठ गए।

सैंड्रा: “राहुल मैंने बोला वो काम हुआ कि नहीं।”

राहुल: “हो गया हैं, प्रतिमा जरा वीडियो दिखाओ।”

मैं अपने मोबाइल पर पहले ही वीडियो ओपन कर तैयार बैठी थी। मैंने अपना मोबाइल सैंड्रा की तरफ बढ़ाया।

सैंड्रा: “सबूत की जरुरत नहीं, राहुल का चेहरा ही बता रहा हैं कि काम हो गया।”

राहुल: “ठीक हैं प्रतिमा तुम जाओ। कुछ काम होगा तो बुला लूंगा। ”
 
मैं अब बाहर अपने क्यूबिकल में आ गयी। फ़ालतू में इतनी मेहनत कर अपनी इज्जत गवाई, राहुल अपना ये वाला सतुष्ट चेहरा दिखा देता तो मुझे कुछ करना ही नहीं पड़ता। मैंने फिर भी वो वीडियो डिलीट नहीं किया, पता नहीं कब मांग ले । डील साइन होंने तक तो रखना ही था।

करीब पंद्रह मिनट के बाद वो तीनो बाहर आये। राहुल ने तीन बार ताली बजा कर सबका ध्यान आकर्षित किया और अपने पास बुलाया कुछ घोषणा करनी थी। सबको आभास हो गया क्या घोषणा हैं। मैं भी खड़ी हुई। मेरी जगह तो केबिन के एकदम बाहर ही थी। मैंने देखा जोसफ का

विशाल शरीर मेरे सामने था और मैं उसके आगे खड़े राहुल को बड़ी मुश्किल से देख पा रही थी।

जोसफ के दोनों हाथ उसकी पीठ की तरफ थे और मोबाइल खुला था। मैंने ध्यान दिया उसमे लिखा था “मेरे पास तुम्हारे लिए एक वीडियो हैं। अपना मोबाइल नंबर मुझे नीचे लिखे नंबर भेजो , मैं तुम्हे वो वीडियो भेजूंगा।”

जोसफ दूसरे लोगो से छुपा कर मुझे कोई मेसेज दे रहा था। वो कौनसे वीडियो की बात कर रहा था। तब तक सारा स्टाफ राहुल के सामने जमा हो गया था और राहुल सब स्टाफ का शुक्रिया कर रहा था।

मुझे जोसफ का मेसेज देख लगा उसके पास जरूर मेरे और उसके बीच गेस्ट हाउस में हुई चुदाई का वीडियो हैं और वो मुझे ब्लैकमेल करना चाहता हैं। कल तो बड़ा दिलदार बन कर दया दिखा रहा था और आज ब्लैकमेल पर उतर आया। मैंने जल्दी से अपने मोबाइल से उसके मोबाइल स्क्रीन का फोटो ले लिया ताकि उसका नंबर तो नोट कर लू, बाकि क्या करना हैं, बाद में देखा जायेगा।

राहुल ने घोषणा कर दी कि हमे डील मिल चुकी हैं और सारा ऑफिस तालियों की गड़गड़ाहट से भर गया। किसी को भी नहीं पता कि उसके लिए मैं दो बार अपनी इज्जत दे चुकी हु और एक राक्षस उसी दौरान मेरा फिर से भंजन करने को उतारू था।

बाकी सब उपस्थित लोग बहुत खुश थे सिर्फ मैं चिंता में थी। राहुल ने इस इस डील मिलने की ख़ुशी में अगले दिन शुक्रवार को शाम को अपने फार्म हाउस में पार्टी की घोषणा की । सैंड्रा व जोसफ विदा ले जाने लगे, जाते जाते जोसफ मुझे आँखों से इशारे कर गया।

सब लोग अपनी अपनी जगह लौटने लगे और मैं तनाव में अपनी सीट पर बैठ गयी। मेरी मुसीबते तो ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। मैंने सोचा मुझे राहुल को सब बता देना चाहिए। पर वो तो खुद मेरे मजे ले रहा था। राहुल इतना बुरा तो नहीं होगा, हो सकता हैं उसने वो सब मजाक किया हो, इस मामले में मेरी मदद कर देगा।

बहु देर तक मैं निर्णय नहीं ले पायी। फिर बहुत सोच विचार कर घंटे भर बाद मैंने जोसफ के नंबर पर मैसेज किया “मुझे पता हैं तुम मुझे ब्लैकमेल कर रहे हो। अगले हफ्ते तुम जहा बुलाओगे आ जाउंगी, पर तुम्हे मेरे वीडियो डिलीट करने होंगे।”

मुझे डर लगा कही वो आज या कल ना बुला ले, मुझे थोड़ा समय चाहिए था सोचने का।मैंने पहले अपना और राहुल के बीच का सुबह वाला वीडियो डिलीट किया। फिर मैंने तुरंत अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया। अंत में मैंने सोचा मुझे राहुल की मदद लेनी चाहिए। मैं राहुल के केबिन में गयी।

राहुल:: “अरे तुम आज ही आ गयी, केबिन में करने का तो कल प्रोग्राम हैं। तुम इतना सीरियस क्यों हो?”

मैंने उसे जोसफ की ब्लैकमेलिंग के बारे में सब बताया।
 
राहुल: “तुम अपना फ़ोन कल पार्टी तक बंद ही रखो, मैं सैंड्रा को बोल कर जोसफ को समझा दूंगा। चिंता मत करो तुम्हे अब जोसफ परेशान नहीं करेगा, मेरी गारंटी हैं”

मुझे उसकी बात सुन सांत्वना मिली और वापिस अपनी सीट पर आ गयी।

रात भर मैं सोचती रही, एक तरफ राहुल हैं जो मेरी दुसरो से बराबर रक्षा कर रहा हैं, दूसरी तरफ हैं मेरा पति अशोक, जिसने कई बार मुझे मुसीबत में डाल दिया। मेरी इज्जत से लोगो को खिलवाड़ करने दी। मेरे दिल में अब राहुल के लिए आकर्षण बढ़ने लगा था।

अगली सुबह तैयार होते वक्त मुझे अपने वो छोटे कपड़े याद आये जो मैंने राहुल का ध्यान आकर्षित कर तारीफ़ पाने को खरीद तो लिए थे पर आज तक पहने नहीं थे। मैंने वो मिनी स्कर्ट निकाली और पहन ली। उसको पहनने का समय आखिर आ ही गया था। अब मैं ऐसे छोटे कपड़े पहन राहुल के सामने बेधड़क जा सकती हूँ। उसके ऊपर मैंने स्लीवलेस टॉप पहन लिया।

मुझे पहली बार इतने छोटे कपड़े पहने देख ऑफिस मे सबकी आँखें खुल गयी। मैं अपने हाई हील सैंडल के साथ मिनी स्कर्ट में ऑफिस में आकर्षण का केंद्र बन गयी। ऑफिस में वैसे भी शाम को होने वाली पार्टी का माहौल था।

राहुल ऑफिस में आया और आज पहली बार उसने केबिन में जाने से पहले मेरी तरफ मुड़ कर देखा। उसका मेरे ऊपर अधिकार जो बढ़ गया था। अपने जरुरी काम निपटाने के बाद उसने मुझे केबिन में बुलाया। मैं उसके केबिन में पहुंची, वो मुझे ऊपर से नीचे घूरते हुए देखने लगा ।

राहुल: “बहुत हॉट लग रही हो। ”

मैं: “थैंक यू , कुछ काम था मुझसे”

राहुल: “मैंने प्रमोशन की लिस्ट बना दी हैं , इसमें तुम्हारा भी नाम हैं । बधाई हो ”

मैं: “थैंक यू सो मच।”

राहुल: “ट्रीट तो बनती हैं।”

मैं: “ठीक हैं, कौनसी मिठाई खाओगे ले आउंगी। ”

राहुल: “मुझे मिठाई इतनी पसंद नहीं, जूस पी लूंगा।”

मैं: “ठीक हैं, मिल जायेगा।”

राहुल: “तो पिलाओ अभी।”

मैं: “चलो बाहर शॉप पर। ”

राहुल : “फ्रूट का नहीं, मुझे तुम्हारे दोनों होंठों का रस पीना हैं। ”

जिसका मुझे डर था वही हो रहा था। वो मुझे शर्मिंदा कर रहा था।

मैं: “मुझे नहीं चाहिए ऐसा प्रमोशन।”

राहुल: “प्रमोशन तो तुम्हारा हक़ हैं, ट्रीट नहीं देनी तो मत दो, एक दोस्त की हैसियत से मांग रहा था, कोई जबरदस्ती नहीं। ”

मैं अब वापिस मुड़ कर जाने लगी।

राहुल: “मैंने सैंड्रा से बात की थी जोसफ के बारे में। जोसफ कल बाहर जा रहा हैं किसी ख़ास काम से, अगले हफ्ते उसके आने के बाद सैंड्रा उसे समझा देगी। ”

मैं: “थैंक यू, मैं कल सुबह तक फ़ोन बंद ही रखूंगी। तुमने मेरी बहुत बड़ी हेल्प की हैं। ”

राहुल: “मैं तो तुम्हे दोस्त मानता हूँ, तुम मानो या ना मानो।”

मैं: “तुम नाराज हो? पर मैं ये नहीं कर सकती। ”

राहुल: “जैक को तो चूमा था।”

मैं: “सिर्फ दो सेकंड के लिए इजाजत दूंगी, और ये आखिरी बार होगा। ”

राहुल: “पांच सेकण्ड्स और दोनों होंठो पर।”

मैं: “हम्म, ठीक हैं पांच सेकंड से एक सेकंड भी ज्यादा नहीं, मैं गिनूँगी।”
 
मैं राहुल के करीब पहुंची, हम दोनों की ही साँसे बहुत तेज चल रही थी। दो बार चूमते चूमते मैंने उसे रोक दिया था और आज आख़िरकार पांच सेकंड के लिए ही सही मैंने उसे इजाजत दे दी थी। उसने अपने दोनों हाथ मेरे एक एक कान के नीचे गले के पास रखे और मुझे अपने करीब खिंचा। हम इतने करीब थे की एक दूसरे की गरम साँसे महसूस कर रहे थे।

उसने अपना सर थोड़ा तिरछा किया और मैंने अपने होंठ जरा सा खोल कर आँखें बंद कर ली। वो घड़ी आ चुकी थी जब पहली बार राहुल मुझे चूमेगा। जल्द ही मेरा ऊपर वाला होंठ उसके दोनों होंठो के बीच था, और उसने उसे चूसना शुरू कर दिया। मेरी गिनती चालू थी और उसने मेरे होंठ तीन बार ही चूसे थे कि मैं अलग हो गयी पांच सेकंड हो चुके थे।

मैंने आँखें खोली । मेरे होंठ उसके रस से गीले हो चुके थे और उसके होंठ मेरे रस से। मेरी साँसे और भी गहरी हो चुकी थी। वो फिर से आगे बढ़ा, अपने वादे के मुताबिक उसको मेरा निचला होंठ भी चूसना था। इस बार उसने अपने होंठो के बीच मेरा निचला होंठ भरा और जल्दी जल्दी मेरा रस लेने लगा। उसका मजा शुरू ही हुआ कि मेरे पांच सेकंड हो चुके थे और हम अलग हुए।

मैंअपने होंठो पर जबान फेर रही थी क्यों कि वहा मीठी गुदगुदी हो रही थी। वो मुझे तरसती निगाहो से देख रहा था मुँह को लगा हाथ को ना आया। उसकी प्यास तो पूरी मिटी भी नहीं थी। मैं मुड़ कर जाने लगी और उसने मुझे रोक लिया।

राहुल: “कहाँ जा रही हो? नीचे के होंठ बाकी हैं अभी।”

मैं: “अभी निचला होंठ ही तो चूसा था तुमने। ”

उसने मेरी चूत की तरफ इशारा किया और बोला : “मैं यहाँ के, नीचे के होंठो की बात कर रहा था।”

मैं: “नहीं वहां नहीं, मैं कपड़े खोल नहीं दिखा सकती”

राहुल: “कल तो खोले थे ”

मैं: “पर सामने से तो नहीं दिखाया था ”

राहुल: “फिर भी पीछे से तुम्हारे नीचे वाले होंठ दिख रहे थे, वैसे ही दिखा दो, मैं रस ले लूंगा ऐसे ही।”

मैं: “सिर्फ पांच सेकंड के लिए। ”

राहुल: “पांच सेकंड अगर आगे से होंठ चूमने दोगी तो। पीछे से कोई समय सीमा नहीं होगी। सोच लो।”

मैं अभी भी शर्म से राहुल को अपनी चूत सामने से दिखाने में असहज थी। इसलिए पीछे से मेरी चूत का रस पिलाने के लिए मान गयी।

मैं: “पीछे से चुम लो, पर सिर्फ एक मिनट। मंजूर हो तो बोलो वरना मैं जाती हूँ। ”

राहुल: “ठीक हैं, मेरे टेबल पर आ जाओ।”

वो अपनी कुर्सी पर जाकर बैठ गया और मैं उसकी तरफ पीठ कर खड़ी हो गयी। उसने मेरी मिनी स्कर्ट का हुक खोल कर ढीला कर दिया और नीचे से हाथ डाल कर मेरी पैंटी पूरी निकाल दी। फिर मुझे अपनी टेबल पर चढ़ा कर मुझे कल की तरह कोहनियो और घुटनो के बल बैठा दिया। उसने मेरी मिनी स्कर्ट को ऊपर की तरफ खींच कर मेरी गांड को नंगा कर दिया।

उसकी पहले की चुंबन और बने माहौल से मेरी चूत वैसे ही थोड़ी गीली हो अपना रस छोड़ चुकी थी।

राहुल: “अपने पाँव और खोलो, अपने होंठ पुरे दिखाओ….हां ऐसे….पहले थोड़ा रस बनाता हु फिर चूसूंगा”

ये कहते हुए उसने अपनी ऊँगली मेरी खुली चूत की दरार में रगड़नी शुरू कर दी। उसकी ऊँगली की रगड़ से मेरी गांड और टाँगे थरथराने लगी। इसके साथ ही मेरी चूत में और पानी बनने लगा और बाहर आने को उतारू हो गया। मगर वो अपनी ऊँगली प्यार से फेरता रहा। मैं मेरी चूत के होंठ गीले महसूस कर रही थी।

मैंने अपने सर को दोनों हाथों के बीच डालते अपनी दोनों टांगो के बीच देखा। राहुल की ऊँगली मेरी चूत पर घुम कर गीली हो चुकी थी। मेरी चूत के होंठ खुले थे और बीच में घाटी बन चुकी थी जहा उसकी ऊँगली रगड़ रही थी । थोड़ी देर बाद तो मेरी चूत से दो तीन बून्द पानी नीचे टेबल पर टपक पड़ा।

मैं: “बन गया रस, अब जल्दी से पी कर ख़त्म करो ये नाटक”

राहुल: “तुम बोलो तो ऊँगली की जगह थोड़ी मोटी चीज डाल दू? ज्यादा मजा आएगा दोनों को ”

मैं: “नहीं, मैं अपनी चीख रोक नहीं पाऊँगी, ये ऑफिस हैं।”

राहुल: “तो आज शाम पार्टी में कर सकते हैं ?”

मैं: “तुम्हे ये काम करना हैं या मैं जाऊ ?”

उसने अब ऊँगली रगड़ना बंद किया और मैं उसके होंठ और दाढ़ी को अपनी दोनों टांगो के बीच देख सकती थी। उसके मुँह के होंठ मेरी चूत के होंठो पर लग रस चाट कर मजे ले रहे थे और मैं हलकी सिसकियाँ निकाल रही थी। मैंने भी घडी का ध्यान नहीं रखा और वो एक मिनट की बजाय काफी ज्यादा मेरे चूत के होंठो को मुँह में दबा मजा लेता रहा।
 
मैं अनियंत्रित होने लगी, कही मैं झड़ ही ना जाऊ इसलिए मैंने उसको रोका और थोड़ा आगे हटी। अपनी स्कर्ट नीचे कर दी और पीछे खिसक कर टेबल से उतर गयी । मैं अपनी स्कर्ट का हुक फिर बांधती उससे पहले ही उसने मुझे मेरी कमर से पकड़ कर मुझ सहित अपनी कुर्सी पर बैठ गया। मैं उसकी जांघो पर बैठी थी।

उसने एक हाथ से मुझे झकड़े हुए दूसरे हाथ से अपने पैंट की चैन खोल दी और अपना कड़क हो चुका लंड बाहर निकाल दिया। वो एकदम तैयार था चोदने के लिए। क्या वो मुझे यही ऑफिस में चोदने वाला था। मैं उसको मना करने लगी कि यहाँ नहीं कर सकते पर उसने मेरी स्कर्ट को पीछे से ऊपर कर अपनी गोद में बैठा लिया।

मैं अपनी गांड पर उसके कठोर लंड की छुअन का अनुभव कर रही थी। मेरी चूत तो पहले ही गीली थी तो आसानी से उसका लंड एक झटके में मेरी चूत के अंदर फिसल गया। बाकी का उसने जोर लगाते हुए मेरी चूत में चार पांच इंच लंड अंदर कर दिया। मैं उठने की कोशिश कर रही थी पर वो मुझे नीचे बैठाये रख रहा था।

मैं उठने की कोशिश करती और वो मुझे नीचे बैठा देता, इस चक्कर में उसका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था। मैं तो पहले ही झड़ने वाली थी पर अब उसके लंड की चूत में होती रगड़ से मैं झड़ने की करीब आ गयी।

मैंने अब ऊपर उठना ही बंद कर दिया। पर उसका लंड उत्तेजना के मारे मेरी चूत में बिना हरकत के ही सिकुड़ और फुल रहा था। जिससे मेरी चूत में भी कम्पन हो रहा था। मैं किसी भी क्षण झड़ने वाली थी।

मैं: “राहुल, मेरा पानी निकलने वाला हैं, तुम्हारी पैंट खराब हो जाएगी।”

राहुल ने मुझे छोड़ दिया और बोला: “चलो छोड़ दिया, तुम्हारी इच्छा तुम उठना चाहती हो या चुदना चाहती हो”

मेरी ऐसी हालत थी कि मैं चाहते हुए भी उठ नहीं पा रही थी। मैंने सोचा मैं पूरा कर ही लेती हूँ। पर तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और मैं घबरा कर राहुल के ऊपर से उठी। एक सांस में मैंने जल्दी से अपनी स्कर्ट नीचे की और उसका हुक लगा लिया। मैं वापिस टेबल के दूसरी तरफ आ गयी, तब तक राहुल ने भी अपनी चैन बंद कर कुर्सी सही लगा ली।

ये सब मुश्किल से पांच सात सेकण्ड्स में हो गया और राहुल ने दस्तक देने वाले को अंदर बुलाया। वो सुधा आंटी थी, वो शायद किसी काम से आयी थी।

मैं एकदम घबराई हुई खड़ी थी और राहुल से इजाजत लेकर बाहर आयी और सीधा वाशरूम गयी। मेरी चूत में अभी तक हलकी सी हलचल थी, मेरी पैंटी भी राहुल की कुर्सी के आस पास कही गिरी पड़ी थी जो जल्दबाजी में मैंने नहीं उठायी थी क्यों कि पहनने का समय ही नहीं था ।

मैं बाल बाल बची, अगर कोई बिना दस्तक अंदर आ जाता तो पुरे ऑफिस में मेरी ही बातें होती। वाशरूम से मैं वापस आयी देखा सुधा आंटी केबिन से बाहर आ चुकी थी।

मुझे अंदर जाकर अपनी पैंटी लेनी थी पर हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं सीधा अपनी जगह आकर बैठ गयी। अंदर पैंटी नहीं पहने होने से कुछ खाली खाली सा लग रहा था। करीब आधे घंटे बाद मैं फिर राहुल के केबिन में गयी।

राहुल ने ऑफिस के केबिन में ही मेरे मजे लूट लिए थे और हम पकडे जाने से बाल बाल बच गए थे। इस चक्कर में मेरी पैंटी उसके केबिन में रह गयी जो मुझे चाहिए थी, मैं फिर राहुल के केबिन में गयी।

मैं: “मेरे कपड़े यहाँ रह गए थे”

राहुल: “कौन से कपड़े?”

मुझे पता था वो जानबूझ कर अनजान बन मेरे मुँह से सुनना चाहता था। मैं वापिस जाने लगी तो उसने आवाज लगा कर रोका। मैंने मुड़ कर देखा वो अपने हाथ में मेरी पैंटी पकड़ हिला रहा था।

राहुल: “ये चाहिए तुम्हे?”

मैंने आगे आकर अपना हाथ बढ़ाया, पर उसने अपना हाथ पीछे खिंच लिया।

राहुल: “इसे मैं तुम्हे पहनाउंगा ”

मै: “नहीं चाहिए, तुम्ही पहन लो”

राहुल: “अच्छा ये लो। पर इसे हाथ में लेकर बाहर कैसे जाओगी? किसी ने देख लिया तो ! पहनना तो यहाँ मेरे सामने ही पड़ेगा।”

बात तो उसकी भी सही थी। ऑफिस के अंदर तो पर्स लेकर नहीं घूम सकती। मुझे उसके सामने ही वो पैंटी पहननी थी। मैंने उससे वो पैंटी ली और उसकी तरफ पीठ कर मैंने पैंटी पांवो में डाल ऊपर खिंच ली और बड़ी सावधानी से बिना अपने ज्यादा अंग दिखाए वो पहन ली।

राहुल: “थोड़ा थोड़ा करने से मजा नहीं आया, पूरा करना हैं ढंग से”

मैं: “आगे से मैं ऑफिस में तुम्हारे पास भी नहीं आउंगी, पकड़े जाते तो आज?”

राहुल: “यहाँ नहीं करेंगे तो कहा करेंगे?”

मैं: “क्या करना हैं तुम्हे?”

राहुल: “चार काम करने हैं। पहला, तुम्हारे ऊपर और नीचे के होंठो का जी भर कर रस चूसना हैं। दूसरा, तुम्हारे मम्मे देखने हैं और चूसने हैं। तीसरा, तुम्हारे मम्मो को अपने हाथो से दूध दुहना हैं। चौथा, सामने से तुम्हारी चूत के दर्शन कर पूरा चोदना हैं”

मैं: “सैंड्रा का शुक्र मनाओ कि तुम मेरे कपड़े खोल पाए और कल पीछे से कुछ कर पाए। बाकि के ये चारो काम तुम सपने में ही करना”

राहुल: “ये चारो काम आज रात को ही होंगे पार्टी के बाद । तुम आज रात मेरे साथ मेरे फार्म हाउस पर ही रुकने वाली हो। अपने घर पर बोल कर आना कि सुबह आओगी”

मैं: “ऐसा कुछ नहीं होने वाला हैं”

राहुल: “और पांचवा काम तुम करने वाली हो, मैं तुम्हारा नीचे का रस लूंगा तो तुम भी तो मेरा रस चुसोगी”

मैं: “मैं भी देखती हु, कैसे होता हैं ”

मैं अब बाहर अपनी सीट पर आ गयी। मगर मन में यही चल रहा था कि क्या वो मेरे साथ सच में ये सब करने वाला हैं। पर मैं क्यों उसके साथ रात को रहूंगी। इतने लोगो के बीच तो वो हाथ लगा नहीं पायेगा। शाम को पार्टी के चक्कर में सब लोग ऑफिस से जल्दी निकल गए घर जाकर तैयार होने के लिए।
 
घर आकर मैं भी तैयार होने लगी। आज राहुल मेरे कपड़े देख भड़क ना जाये इसलिए मैंने जो ब्लाउज पहना वो पीठ से पूरा बंद था। कोहनियो तक आस्तीन थी और चाइनीज कॉलर था। मैंने अपनी नारंगी रंग की साड़ी लपेट दी। पुरे कपड़े पहनने के बावजूद मैं अपने कर्व तो नहीं छुपा सकती थी। बिना अंगप्रदर्शन किये हुए भी मेरे सीने और गांड के उभार मेरी तरफ किसी को भी आकर्षित करने को काफी थे।

राहुल ने पार्टी स्थल तक पहुंचने की व्यवस्था कर दी थी।

आज सब लोग बिना फेमिली के आये थे तो वहा पर माहौल बिलकुल ही अलग था। ऑफिस की सारी कुंवारी लड़कियों सहित शादीशुदा लड़किया भी छोटे कपड़े और स्किन दिखाऊ साड़ी पहन आयी थी। शायद पिछली बार पार्टी में मैंने जो कपड़े पहने थे उससे प्रेरणा ली थी।

पुरुष स्टाफ की तो चांदी हो गयी थी। आज उनको रोकने वाले उनके पति और पत्निया भी नही थी, सब अपने अरमान पुरे कर सकते थे। अपने पसंद के साथियो के साथ सब चिपक कर डांस कर रहे थे। मुझे पुरे कपड़ो में देख सबको थोड़ा आश्चर्य भी हुआ।

राहुल ने पास आकर मेरे साथ डांस करने को बोला पर मैं पहले ही सोच कर आयी थी उसको ज्यादा पास आने का मौका नहीं देना वरना वो अपनी चारो गन्दी ख्वाहिशे पूरी ना कर सके। मेरे मना करने पर भी वो मुस्कुराता रहा।

अब वो दूसरी लड़कियों के साथ बारी बारी से डांस करने लगा। वो उनसे कुछ ज्यादा ही चिपक रहा था, उसका हाथ लगातार लड़कियों की कमर और पीठ पर था। वो लड़किया भी जैसे इसी का इंतजार कर रही थी। उनको तो जैसे प्रमोशन का शॉर्टकट मिल गया था।

राहुल के हाथ कभी कभार कमर से खिसक कर लड़कियों की गांड पर भी आ गए थे। जब भी वो एक दूसरे के कान में कुछ बोलने के लिये पास आते तो उनके मम्मे राहुल के सीने से दब भी रहे थे ।

एक शादी शुदा औरत तो राहुल के साथ कुछ ज्यादा ही चिपक गयी थी, उसकी कमर के नीचे का हिस्सा आगे से राहुल से पूरा चिपक गया था। मैं ना जाने क्यों वो सब नहीं देख पा रही थी। मुझे वो सब देख जलन हो रही थी।

वो सब मिलकर मुझसे राहुल को दूर कर रही थी या मैंने खुद ही राहुल से दुरी बना उन्हें मौका दे दिया था। मुझे अहसास हुआ शायद मैं राहुल से शायद प्यार करने लगी थी। पर राहुल के मन में मेरे लिए क्या हैं, अगर कुछ होता तो वो इस तरह दूसरी लड़कियों के साथ इस तरह चिपक कर डांस नहीं करता।

एक चालीस साल के सहकर्मी ने मेरे साथ डांस करने का प्रस्ताव रखा और मैंने मान भी लिया, पहला मौका था जब मैंने राहुल के अलावा ऑफिस में किसी के साथ डांस का करना स्वीकार्य किया था। उसको तो जैसे खजाना हाथ लग गया।

बाकि के युवक आश्चर्य करने लगे, उन जैसे अच्छे दिखने वाले लड़को को छोड़ मैंने अपने से ज्यादा उम्र वाले को डांस पार्टनर चुना। मैंने कपड़े पुरे पहन रखे थे फिर भी साड़ी के ऊपर से ही वो मेरी कमर को पकड़े था। मैं उससे थोड़ी दुरी बनाये हुए थी ताकि मेरे सीने का उभार उससे ना छुए।

इन सब के बीच मेरी नजरे बराबर राहुल पर थी कि वो क्या कर रहा हैं। बीच में एक दो बार वो अपनी अलग अलग डांस पार्टनर के साथ हॉल से बाहर भी गया था, शायद उनके अंगो को अच्छे से छूने के लिए अकेले में ले गया हो। वो लड़किया तो उसे चूमने भी देगी।

सब लोग अब हॉल से निकल कर बाहर बरामदे में लगे डिनर के लिए आ गए। राहुल अभी भी अपनी गोपियों के बीच में ही था और हंस हंस कर जैसे मुझे जलाते हुए मजे ले रहा था।

खाना हो जाने के बाद सभी लोग बाहर गार्डन में ही आपस में बातें कर रहे थे। शायद राहुल सही था, मैं ही जलन में पागल हो गयी थी। कैटरर अपने सामन समेट कर जा रहा था। कुछ लोग जा चुके थे और कुछ जाने की तैयारी में थे।

राहुल एक साड़ी वाली लड़की को लेकर वापिस अंदर गया। मुझे दाल में काला लगा, मैं थोड़ी देर बाद अंदर गयी। वो दोनों सामने से बाहर ही रहे थे। राहुल ने उस युवती को बाहर जाने दिया और मेरे लिए वही रुक गया।

राहुल: “तुम मेरा पीछा कर रही हो?”

मैं: “मुझे सब पता हैं तुम आज पार्टी में क्या कर रहे थे, सबसे बड़ा चिपक चिपक कर डांस कर रहे थे। मुझे तो लगा तुम्हे सिर्फ मुझ में रूही दिखाई देती हैं। पहले मुझे रात को यहाँ रुकने को बोल रहे थे, मैंने मना किया तो अभी जो गयी हैं उसको रात को रोकने वाले हो। ”

राहुल: “तुम्हारे अलावा इन सब की कैब मैं बुला चूका हूँ । तुम कहो तो तुम्हारी कैब भी मंगवा लेता हु। एक तरफ मेरा बैडरूम हैं, दूसरी तरफ बाहर जाने का रास्ता। तुम्हारी इच्छा हैं, तुम कहाँ जाना चाहती हो। मैं बाहर सब लोगो को विदा करने जा रहा हूँ”

शायद राहुल सही था, मैं ही जलन में पागल हो गयी थी। राहुल हाल से बाहर जाने लगा और मैं बैडरूम की तरफ मुड़ी तभी उसकी आवाज आयी।

राहुल: “मुझे मेरे चारो काम करने दोगी तो ही अंदर जाना ”

मैं उसके चारो काम याद कर बहुत शरमाई और भाग कर बैडरूम में चली गयी। अंदर जाकर मैंने अपना मेकअप ठीक किया और अच्छे से देख लिया सब ठीक हैं । परफ्यूम लगा लिया और माउथ स्प्रे कर दिया। फिर याद आया पति को तो बोला ही नहीं कि रात को यही रुकने वाली हूँ।

मैंने अपना मोबाइल निकाला जो कल दोपहर से जोसफ के डर से स्विच ऑफ था । मैंने फ़ोन स्विच ऑन किया और अशोक को फ़ोन लगा कर झूठ बता दिया कि आज हम सब ऑफिस वाले यही रुकने वाले हैं, मैं अगली सुबह आ जाउंगी।
 
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