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Guest
उसके लंड के नीचे लटकती थैलिया धड़कते हुए फूल रही थी. उनमे काफी पानी भरा था, ये सोच कर डर भी लगा कि वो ये सारा पानी मेरी चूत के अंदर भर देगा.
उसने अपना लंड मुझे मुँह में लेने को कहा. पर मैं इसके लिए अभी तैयार नहीं थी.
मैंने कहा कि मैं सिर्फ हाथ लगा सकती पर मुंह में नहीं लुंगी.
वो मान गया कि कुछ् तो मिलेगा.
मैंने अब उसका लंड अपने एक हाथ में भर लिया. मेरे हाथों में ही उसका लंड कम्पन करता हुआ धक् धक् कर रहा था.
मेरे उसके लंड को पकड़ते ही उसकी सिसकी निकलनी शुरू हो गयी. उसको तड़पाने के लिए मैंने उसके लंड को ऊपर नीचे रगड़ना शुरू कर दिया और वो पागलो की तरह जोर जोर से आवाज निकालते हुए आअह, आअह करने लगा. उसने मुझे उस पर बैठ कर चोदने को कहा.
मैंने अपने पति द्वारा पायल को चोदते हुए दृश्य को याद किया और डीपू के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी. मेरे पास ज्यादा समय नहीं था, ये डर था कि उन दोनों का हो चूका होगा तो कही फिर पीछे ना लौट आये हमें ढूंढते हुए.
मैंने उसका लंबा लंड अपने हाथों में पकड़ा और जल्दी से अपनी चूत में गुसा दिया.
डीपू के मुँह से आउच निकला और मैंने ऊपर नीचे हो चोदना शुरू कर दिया. उसका लंबा लंड मेरी चूत में काफी गहराई तक चला गया था.
हम दोनों की ही मजे के मारे सिसकिया निकलने लगी थी.
थोड़ी देर बाद उसने मुझको कहा कि हम जंगल में हैं तो जंगली तरीके से चोदते हैं.
मैं उसका मतलब नहीं समझी, तो उसने मुझे नीचे उतरने को बोला. मैंने उसका लंड चूत से निकाला और उसके ऊपर से हट गयी.
उसने मुझे कहा “हम जंगल में हैं तो जंगली जनवरी की तरह चोदते हैं, बहुत मजा आएगा”.
मैंने कहा “तुम्हारी जैसी इच्छा हैं कर लो, मैं तैयार हूँ”.
वो मुझे डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था. मेरा ऊपर का थोड़ा शरीर चट्टान से ऊपर था और उस ऊंचाई से मैं नीचे देख पा रही थी. मेरे धड़ से नीचे का शरीर चट्टान के पीछे छुपा हुआ था.
उसने मुझे चट्टान की तरफ मुँह रख कर झुका कर खडी कर दिया. मैं झुक कर उसके लंड का इंतज़ार करने लगी.
तभी उसने पीछे से मेरे ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे मना करने के बावजूद मेरी ब्रा और शर्ट पूरी निकाल कर नीचे रख दी.
उसने अपना टी शर्ट भी निकाल कर पूरा नंगा हो गया और बोला “जंगलियो की तरह चोदना हैं तो कपड़ो का क्या काम.”
अब उसने अपना लंड पीछे से मेरी चूत में गुसा दिया. लंड अंदर जाते ही मेरे मुँह से एक लंबी आहह्ह्ह निकली क्यों कि एक जंगली जानवर की तरह उसका लंड भी घोड़े की तरह लंबा था.
उसको अहसास नहीं था कि उसका लंबा लंड मेरे अंदर कितना गहरा जा रहा था. वो तो बिना चिंता के मुझे जोर जोर से चोदे जा रहा था.
दर्द के मारे मेरी हालत खराब हो रही थी. होटल रूम में उसने कल रात को चोदा तो इतना दर्द नहीं दिया था.
काफी देर तक वो ऐसे ही बिना थके और रुके चोदे जा रहा था. नीचे झुके होने से मुझे अब चट्टान के पार दिखाई नहीं दे रहा था.
मैंने अब खड़े हो कर चुदवाने का सोचा, ताकि मैं निगरानी भी रख पाउ. शायद खड़े होने से मेरा थोड़ा दर्द भी थोड़ा कम हो.
मैं अब चट्टान के ऊपर मुँह निकाले खड़ी थी और वो पीछे से मुझे लगातार झटके पे झटके मार चोद रहा था.
खड़े होने से मेरा दर्द कम हो गया था और मैं चुदाई का मजा ले पा रही थी. हम दोनों की ही आह्ह्ह्ह ऊ आह्ह्ह्ह ऊ चालू थी.
मेरा पानी छूटने से फचाक फचाक, फच्च फच्च की आवाज़ आस पास पक्षियों के कलरव के साथ मिल सुनाई दे रही थी.
थोड़ी ही देर में मैं झड़ने के करीब आयी. तभी मैंने देखा दूर से अशोक और पायल आते हुए दिखाई दिए. मैं थोड़ा झुक गयी ताकि सिर्फ मेरा मुँह दिखाई दे वरना उनको पता चल जाता कि मैं टॉपलेस हूँ.
मैंने डीपू को आगाह किया कि वो लोग आ रहे हैं. पर उस पर तो भूत सवार था मुझे पूरा चोदने का.
मुझे जल्दी से कपडे पहनने थे पर वो मुझे चोदने के चक्कर में छोड़ने को ही तैयार नहीं था. तभी उन दोनों की नजर चट्टान से झांकते मेरे चेहरे पर पड़ी.
उन्होंने अपना हाथ हिला मुझे इशारा किया. मैंने भी अपना आधा हाथ ऊपर कर उनको वही रुकने का इशारा किया और कहा कि हम नीचे ही आ रहे हैं.
मेरी आवाज सुन जैसे डीपू की नींद खुली और उसने जल्दी जल्दी झटके मारने शुरू कर दिए. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख पर कण्ट्रोल किया. उसके झटके इतने जबरदस्त थे कि मैं वही झड़ गयी और साथ ही साथ वो भी.
इधर जब मैं झड़ रही थी तो उसी दौरान पायल मुझे पूछ रही थी कि वहा ऊपर से क्या अच्छा देखने का हैं तो वो भी आते हैं.
झड़ते वक़्त मेरे चेहरे के एक्सप्रेशन ऐसे तनाव के थे कि पायल घबरा गयी कि मुझे क्या हो गया हैं जो मैं ऐसा चेहरा बना रही हूँ.
पर झड़ते ही मैंने अपने आप को संभाला और पायल और अशोक को कहा कि यहाँ ऊपर से कुछ ख़ास नहीं दिख रहा, तुम लोग वही ठहरो हम नीचे आ रहे हैं.
वो लोग वही रुक गए. मैं नीचे झुकी और अपने कपडे जल्दी जल्दी पहनने लगी.
उसने अपना लंड मुझे मुँह में लेने को कहा. पर मैं इसके लिए अभी तैयार नहीं थी.
मैंने कहा कि मैं सिर्फ हाथ लगा सकती पर मुंह में नहीं लुंगी.
वो मान गया कि कुछ् तो मिलेगा.
मैंने अब उसका लंड अपने एक हाथ में भर लिया. मेरे हाथों में ही उसका लंड कम्पन करता हुआ धक् धक् कर रहा था.
मेरे उसके लंड को पकड़ते ही उसकी सिसकी निकलनी शुरू हो गयी. उसको तड़पाने के लिए मैंने उसके लंड को ऊपर नीचे रगड़ना शुरू कर दिया और वो पागलो की तरह जोर जोर से आवाज निकालते हुए आअह, आअह करने लगा. उसने मुझे उस पर बैठ कर चोदने को कहा.
मैंने अपने पति द्वारा पायल को चोदते हुए दृश्य को याद किया और डीपू के ऊपर चढ़ कर बैठ गयी. मेरे पास ज्यादा समय नहीं था, ये डर था कि उन दोनों का हो चूका होगा तो कही फिर पीछे ना लौट आये हमें ढूंढते हुए.
मैंने उसका लंबा लंड अपने हाथों में पकड़ा और जल्दी से अपनी चूत में गुसा दिया.
डीपू के मुँह से आउच निकला और मैंने ऊपर नीचे हो चोदना शुरू कर दिया. उसका लंबा लंड मेरी चूत में काफी गहराई तक चला गया था.
हम दोनों की ही मजे के मारे सिसकिया निकलने लगी थी.
थोड़ी देर बाद उसने मुझको कहा कि हम जंगल में हैं तो जंगली तरीके से चोदते हैं.
मैं उसका मतलब नहीं समझी, तो उसने मुझे नीचे उतरने को बोला. मैंने उसका लंड चूत से निकाला और उसके ऊपर से हट गयी.
उसने मुझे कहा “हम जंगल में हैं तो जंगली जनवरी की तरह चोदते हैं, बहुत मजा आएगा”.
मैंने कहा “तुम्हारी जैसी इच्छा हैं कर लो, मैं तैयार हूँ”.
वो मुझे डॉगी स्टाइल में चोदना चाहता था. मेरा ऊपर का थोड़ा शरीर चट्टान से ऊपर था और उस ऊंचाई से मैं नीचे देख पा रही थी. मेरे धड़ से नीचे का शरीर चट्टान के पीछे छुपा हुआ था.
उसने मुझे चट्टान की तरफ मुँह रख कर झुका कर खडी कर दिया. मैं झुक कर उसके लंड का इंतज़ार करने लगी.
तभी उसने पीछे से मेरे ब्रा का हुक खोल दिया और मेरे मना करने के बावजूद मेरी ब्रा और शर्ट पूरी निकाल कर नीचे रख दी.
उसने अपना टी शर्ट भी निकाल कर पूरा नंगा हो गया और बोला “जंगलियो की तरह चोदना हैं तो कपड़ो का क्या काम.”
अब उसने अपना लंड पीछे से मेरी चूत में गुसा दिया. लंड अंदर जाते ही मेरे मुँह से एक लंबी आहह्ह्ह निकली क्यों कि एक जंगली जानवर की तरह उसका लंड भी घोड़े की तरह लंबा था.
उसको अहसास नहीं था कि उसका लंबा लंड मेरे अंदर कितना गहरा जा रहा था. वो तो बिना चिंता के मुझे जोर जोर से चोदे जा रहा था.
दर्द के मारे मेरी हालत खराब हो रही थी. होटल रूम में उसने कल रात को चोदा तो इतना दर्द नहीं दिया था.
काफी देर तक वो ऐसे ही बिना थके और रुके चोदे जा रहा था. नीचे झुके होने से मुझे अब चट्टान के पार दिखाई नहीं दे रहा था.
मैंने अब खड़े हो कर चुदवाने का सोचा, ताकि मैं निगरानी भी रख पाउ. शायद खड़े होने से मेरा थोड़ा दर्द भी थोड़ा कम हो.
मैं अब चट्टान के ऊपर मुँह निकाले खड़ी थी और वो पीछे से मुझे लगातार झटके पे झटके मार चोद रहा था.
खड़े होने से मेरा दर्द कम हो गया था और मैं चुदाई का मजा ले पा रही थी. हम दोनों की ही आह्ह्ह्ह ऊ आह्ह्ह्ह ऊ चालू थी.
मेरा पानी छूटने से फचाक फचाक, फच्च फच्च की आवाज़ आस पास पक्षियों के कलरव के साथ मिल सुनाई दे रही थी.
थोड़ी ही देर में मैं झड़ने के करीब आयी. तभी मैंने देखा दूर से अशोक और पायल आते हुए दिखाई दिए. मैं थोड़ा झुक गयी ताकि सिर्फ मेरा मुँह दिखाई दे वरना उनको पता चल जाता कि मैं टॉपलेस हूँ.
मैंने डीपू को आगाह किया कि वो लोग आ रहे हैं. पर उस पर तो भूत सवार था मुझे पूरा चोदने का.
मुझे जल्दी से कपडे पहनने थे पर वो मुझे चोदने के चक्कर में छोड़ने को ही तैयार नहीं था. तभी उन दोनों की नजर चट्टान से झांकते मेरे चेहरे पर पड़ी.
उन्होंने अपना हाथ हिला मुझे इशारा किया. मैंने भी अपना आधा हाथ ऊपर कर उनको वही रुकने का इशारा किया और कहा कि हम नीचे ही आ रहे हैं.
मेरी आवाज सुन जैसे डीपू की नींद खुली और उसने जल्दी जल्दी झटके मारने शुरू कर दिए. मैंने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख पर कण्ट्रोल किया. उसके झटके इतने जबरदस्त थे कि मैं वही झड़ गयी और साथ ही साथ वो भी.
इधर जब मैं झड़ रही थी तो उसी दौरान पायल मुझे पूछ रही थी कि वहा ऊपर से क्या अच्छा देखने का हैं तो वो भी आते हैं.
झड़ते वक़्त मेरे चेहरे के एक्सप्रेशन ऐसे तनाव के थे कि पायल घबरा गयी कि मुझे क्या हो गया हैं जो मैं ऐसा चेहरा बना रही हूँ.
पर झड़ते ही मैंने अपने आप को संभाला और पायल और अशोक को कहा कि यहाँ ऊपर से कुछ ख़ास नहीं दिख रहा, तुम लोग वही ठहरो हम नीचे आ रहे हैं.
वो लोग वही रुक गए. मैं नीचे झुकी और अपने कपडे जल्दी जल्दी पहनने लगी.