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अशोक: “ठीक हैं मैं अब तुम्हारा पाजामा निकाल रहा हूँ साथ में अंदर के कपड़े भी.”
अशोक ने उस ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल का पाजामा उसकी पैंटी सहित नीचे की तरफ खींचने लगा.
मैंने वो ऊपर का कपड़ा पकडे रखा ताकि पाजामा के साथ वो भी नीचे ना खिसक जाए. अशोक ने अब पायल के नीचे के कपड़े उसकी टांगो से पुरे बाहर निकाल दिए.
उस पारदर्शी कपडे से पायल का कमर से नीचे का पूरा जिस्म दिखाई दे रहा था. मैंने देखा कि पायल की चूत के ऊपर की तरफ काफी घने बाल थे.
वो इतनी आलसी होगी कि अपने नीचे के बाल भी साफ़ नहीं कर पाती, ये नहीं पता था मुझे. फिर सोचा शायद इसी वजह से उसने कपड़े से ढकने की मांग रखी थी. ताकि उसकी ये गन्दगी और आलसीपन बाहर ना आ जाये.
डीपू: “अशोक और पायल दोनों रेडी हो?”
पायल और अशोक: “हां रेडी.”
डीपू: “तुम्हारे दस मिनट शुरू होते हैं, थ्री, टू वन एन्ड गो.”
अशोक ने ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल के चूत के ऊपर के बालो में अपनी एक ऊँगली घुमाने लगा. पायल अपनी सांस रोके बैठी थी.
अब अशोक अपनी ऊँगली फिराते हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगा. उसकी ऊँगली अब चूत की दरार के ऊपर थी और फिर दरार में प्रवेश करते बाहरी दीवारों पर ऊपर नीचे रगड़ खाने लगी.
पायल की हलकी हलकी सिसकिया निकलने लगी. अशोक अब उसी दरार में ऊँगली ऊपर नीचे करता रहा और पायल उसी गति से सिसकिया निकाल रही थी. अशोक को अब कुछ ओर ज्यादा कोशिश करनी थी. शुरू के दो तीन मिनट बर्बाद हो चुके थे.
अशोक ने अब अपनी ऊँगली पायल की चूत के छेद पर रख दी और ऊँगली का थोड़ा ही हिस्सा अंदर बाहर कर रहा था. छेद में थोड़ी ऊँगली जाने से पायल की सिसकियाँ थोड़ी बढ़ गयी थी. अशोक ने उत्साहित होकर अब पूरी ऊँगली अंदर घुसा दी.
इससे पायल के मुँह से एक जोर की आह निकली. फिर तो अशोक नहीं रुका और अपनी ऊँगली धीमे गति से अंदर बाहर करने लगा.
पायल : “आह , नहीं अशोक अह्ह्हह्ह्ह्ह अम्म्मम्म अशोक क्या कर रहे हो. उम्म ओ माँ ना हम्म हम्म ऐसे मत करो अशोक अह्ह्ह्हह्ह.”
आधा समय बीत चूका था. मुझे पायल से बदला लेना था उसने लेवल वन में, मेरा ढका कपडा निकाल फेंका था. अगर मैं अभी उसका ढका कपड़ा निकालती हूँ तो उसकी वो बालों वाली चूत सबको दिख जाएगी और वो बहुत शर्मिंदा होगी.
वैसे भी मैं निकालू या ना, वो तो मेरा निकाल ही देगी. मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मेरी चूत तो एकदम सफाचट थी. अच्छा ही हैं हम दोनों की सफाई की तुलना हो जाएगी.
अगर मैं एकदम से कपडा निकालती तो दोनों मर्दो को ये लगता कि मैं लम्पट हूँ. इसलिए मुझे कुछ चालाकी से ये काम करना था.
मेरे पास प्लान था. मैंने कपडे को सही से ढकने के लिए अपना हाथ पायल के दूसरी तरफ ले गयी और कपडा उसकी जांघो पर से सही करने लगी. वापस हाथ खींचते वक्त मैंने जानबूझ कर थोड़ा कपडा अपनी उंगलियो के बीच फंसा लिया.
जैसे ही मैंने अपना हाथ वापिस खिंचा, शरीर से पूरा हट गया. पायल की बालों भरी चूत सबके सामने खुल गयी.
शर्म के मारे पायल का पूरा चेहरा लाल हो गया. पायल चिल्लाने लगी और अशोक भी रुक गया.
पायल: “मुझे पता हैं तुमने ये जानबूझ कर किया हैं.”
मैं: “अरे गलती से हुआ, अच्छा ले ले, मैं वापिस ढक देती हूँ कपड़ा.”
पायल: “अब क्या फायदा कपडे का, सब तो दिख गया, नहीं चाहिए मुझे. अब तुम देखो, मैं तो तुम्हे कपडा लगाने ही नहीं दूंगी.”
मैं: “मैं तो वैसे भी कपड़ा लगाने ही नहीं वाली थी.”
पायल: “बहुत चालु हैं प्रतिमा. अपनी भौसड़ी साफ़ करके आयी होगी इस लिए उछल रही हो.”
डीपू: “शीईईईइ गंदे शब्दों का इस्तेमाल मत करो प्लीज.”
मैं: “चलो शुरू करते हैं फिर, टाइमर थोड़ा पीछे करो अगर रोका ना हो तो.”
डीपू: “नहीं, मैंने रोक दिया था. अशोक रेडी गो.”
पायल के चिल्लाने से अशोक भी थोड़ा डर गया तो वो धीरे धीरे पायल की चूत के बाहर हाथ फेरता रहा.
मैं: “अशोक क्या कर रहे हो, अच्छे से करो ना. जल्दी जल्दी करो.”
पायल: “कुछ भी कर लो मैं जीत के ही रहूंगी.”
मैं: “अच्छा ये देखो.”
मैंने आगे बढ़कर उसका टैंक टॉप उसके कमर से ऊपर कर उसके मम्मो से उठाते हुए सर से पूरा बाहर निकाल कर उसको पूरी नंगी कर दिया.
पायल को पूरा नंगी देख अशोक की भी आँखें खुल गयी. उसने पायल के पाँव चौड़े किये और उसकी कमर के पास आकर बैठ गया. उसने अपना हाथ पायल की चूत पर रखा और तीव्र गति से ऊपर नीचे ऊपर नीचे रगड़ने लगा.
सिर्फ दो मिनट बचे थे, तो उसके हाथ एकदम मशीन की भांति चलने लगे. इतने जोर के झटके लग रहे थे कि पायल के मोटे मम्मे बुरी तरह से हिल ढुल रहे थे जैसे भूकंप आ गया हो.
पायल: “आह आह आह आह आह ना ना ना अशोक, ओह्ह्ह मेरी भौसड़ी जल रही हैं अशोक छोडो ओह माँ मेरा हो रहा हैं, हो रहा हैं, अशोक मेरी चूत, हाह हाह उम्म उम्म उम्म उम्म, आह आ अह्ह्हह्ह्ह्ह हो गया मेरा.”
अशोक ने उसको छोड़ दिया. पायल हांफ रही थी जैसे अभी अभी मैराथन दौड़ कर आयी थी.
डीपू: “सिर्फ दस सेकंड ही बचे थे, हार जीत का अंतर. मगर फिर से काफी अच्छे से खिंचा तुमने. मेरी अंडरवियर गीली कर दी तुमने तो.”
अशोक: “मेरे तो हाथ पैर अभी तक कांप रहे थे. मैं हाथ धो कर आता हूँ, पुरे गंदे हो गए.”
पायल अभी भी बिना कपड़ो के बेसुध लेटी हुई थी.
मैंने और डीपू ने उसको उसके कपडे और कुछ पेपर नैपकिन दिए सफाई के लिए. उसने सफाई करके के बाद अपने कपडे पहन लिया. तब तक अशोक भी हाथ धोकर आ गये.
पायल: “देखो मेरे हाथ पैर अभी तक कांप रहे हैं. और प्रतिमा तुमने मुझे लाइफ में पहली बार सबके सामने नंगी कर दिया. तुमसे तो मैं अपना बदला लेकर रहूंगी.”
सच पूछो तो मैं बुरी तरह से डर गयी थी. पता नहीं वो क्या हरकत करेगी. पायल अब डीपू के कान में कुछ फुसफुसाने लगी. डीपू ने अपना सर ना में हिलाया.
डीपू :”पागल हो क्या, ये बहुत ज्यादा हो जाएगा.”
पायल: “ये भी मसाज में ही आता हैं, रूल के हिसाब से चलेगा.”
अशोक: “मेरी बीवी के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हो तुम. कुछ उलटा सीधा तो नहीं कर रहे?”
पायल: “सब कुछ रूल्स के अंतर्गत ही होगा, चिंता मत करो.”
मैं: “मुझे पायल पे भरोसा नहीं. मुझे नहीं करना अब.”
पायल: “मुझे पता था ये धोखा देगी. सोच लो, अगर नहीं किया तो सजा मिलेगी.”
मैं: “तुम जो करने वाली हो उससे तो वो सजा ही ठीक होगी. लाओ क्या सजा हैं.”
पायल ने अपना पर्स खोला और चिठ्ठी मुझे देते हुई बोली “सिर्फ तुम पढ़ना और फिर निर्णय लो कि लेवल टू करना हैं या सजा भुगतनी हैं.”
पायल के बाद मैं भी चेलेंज के पहले लेवल के तहत अपने मम्मो की मसाज करवा चुकी थी और झड़ते झड़ते बची.
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अशोक ने उस ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल का पाजामा उसकी पैंटी सहित नीचे की तरफ खींचने लगा.
मैंने वो ऊपर का कपड़ा पकडे रखा ताकि पाजामा के साथ वो भी नीचे ना खिसक जाए. अशोक ने अब पायल के नीचे के कपड़े उसकी टांगो से पुरे बाहर निकाल दिए.
उस पारदर्शी कपडे से पायल का कमर से नीचे का पूरा जिस्म दिखाई दे रहा था. मैंने देखा कि पायल की चूत के ऊपर की तरफ काफी घने बाल थे.
वो इतनी आलसी होगी कि अपने नीचे के बाल भी साफ़ नहीं कर पाती, ये नहीं पता था मुझे. फिर सोचा शायद इसी वजह से उसने कपड़े से ढकने की मांग रखी थी. ताकि उसकी ये गन्दगी और आलसीपन बाहर ना आ जाये.
डीपू: “अशोक और पायल दोनों रेडी हो?”
पायल और अशोक: “हां रेडी.”
डीपू: “तुम्हारे दस मिनट शुरू होते हैं, थ्री, टू वन एन्ड गो.”
अशोक ने ढके हुए कपड़े में हाथ डाला और पायल के चूत के ऊपर के बालो में अपनी एक ऊँगली घुमाने लगा. पायल अपनी सांस रोके बैठी थी.
अब अशोक अपनी ऊँगली फिराते हुए धीरे धीरे नीचे लाने लगा. उसकी ऊँगली अब चूत की दरार के ऊपर थी और फिर दरार में प्रवेश करते बाहरी दीवारों पर ऊपर नीचे रगड़ खाने लगी.
पायल की हलकी हलकी सिसकिया निकलने लगी. अशोक अब उसी दरार में ऊँगली ऊपर नीचे करता रहा और पायल उसी गति से सिसकिया निकाल रही थी. अशोक को अब कुछ ओर ज्यादा कोशिश करनी थी. शुरू के दो तीन मिनट बर्बाद हो चुके थे.
अशोक ने अब अपनी ऊँगली पायल की चूत के छेद पर रख दी और ऊँगली का थोड़ा ही हिस्सा अंदर बाहर कर रहा था. छेद में थोड़ी ऊँगली जाने से पायल की सिसकियाँ थोड़ी बढ़ गयी थी. अशोक ने उत्साहित होकर अब पूरी ऊँगली अंदर घुसा दी.
इससे पायल के मुँह से एक जोर की आह निकली. फिर तो अशोक नहीं रुका और अपनी ऊँगली धीमे गति से अंदर बाहर करने लगा.
पायल : “आह , नहीं अशोक अह्ह्हह्ह्ह्ह अम्म्मम्म अशोक क्या कर रहे हो. उम्म ओ माँ ना हम्म हम्म ऐसे मत करो अशोक अह्ह्ह्हह्ह.”
आधा समय बीत चूका था. मुझे पायल से बदला लेना था उसने लेवल वन में, मेरा ढका कपडा निकाल फेंका था. अगर मैं अभी उसका ढका कपड़ा निकालती हूँ तो उसकी वो बालों वाली चूत सबको दिख जाएगी और वो बहुत शर्मिंदा होगी.
वैसे भी मैं निकालू या ना, वो तो मेरा निकाल ही देगी. मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मेरी चूत तो एकदम सफाचट थी. अच्छा ही हैं हम दोनों की सफाई की तुलना हो जाएगी.
अगर मैं एकदम से कपडा निकालती तो दोनों मर्दो को ये लगता कि मैं लम्पट हूँ. इसलिए मुझे कुछ चालाकी से ये काम करना था.
मेरे पास प्लान था. मैंने कपडे को सही से ढकने के लिए अपना हाथ पायल के दूसरी तरफ ले गयी और कपडा उसकी जांघो पर से सही करने लगी. वापस हाथ खींचते वक्त मैंने जानबूझ कर थोड़ा कपडा अपनी उंगलियो के बीच फंसा लिया.
जैसे ही मैंने अपना हाथ वापिस खिंचा, शरीर से पूरा हट गया. पायल की बालों भरी चूत सबके सामने खुल गयी.
शर्म के मारे पायल का पूरा चेहरा लाल हो गया. पायल चिल्लाने लगी और अशोक भी रुक गया.
पायल: “मुझे पता हैं तुमने ये जानबूझ कर किया हैं.”
मैं: “अरे गलती से हुआ, अच्छा ले ले, मैं वापिस ढक देती हूँ कपड़ा.”
पायल: “अब क्या फायदा कपडे का, सब तो दिख गया, नहीं चाहिए मुझे. अब तुम देखो, मैं तो तुम्हे कपडा लगाने ही नहीं दूंगी.”
मैं: “मैं तो वैसे भी कपड़ा लगाने ही नहीं वाली थी.”
पायल: “बहुत चालु हैं प्रतिमा. अपनी भौसड़ी साफ़ करके आयी होगी इस लिए उछल रही हो.”
डीपू: “शीईईईइ गंदे शब्दों का इस्तेमाल मत करो प्लीज.”
मैं: “चलो शुरू करते हैं फिर, टाइमर थोड़ा पीछे करो अगर रोका ना हो तो.”
डीपू: “नहीं, मैंने रोक दिया था. अशोक रेडी गो.”
पायल के चिल्लाने से अशोक भी थोड़ा डर गया तो वो धीरे धीरे पायल की चूत के बाहर हाथ फेरता रहा.
मैं: “अशोक क्या कर रहे हो, अच्छे से करो ना. जल्दी जल्दी करो.”
पायल: “कुछ भी कर लो मैं जीत के ही रहूंगी.”
मैं: “अच्छा ये देखो.”
मैंने आगे बढ़कर उसका टैंक टॉप उसके कमर से ऊपर कर उसके मम्मो से उठाते हुए सर से पूरा बाहर निकाल कर उसको पूरी नंगी कर दिया.
पायल को पूरा नंगी देख अशोक की भी आँखें खुल गयी. उसने पायल के पाँव चौड़े किये और उसकी कमर के पास आकर बैठ गया. उसने अपना हाथ पायल की चूत पर रखा और तीव्र गति से ऊपर नीचे ऊपर नीचे रगड़ने लगा.
सिर्फ दो मिनट बचे थे, तो उसके हाथ एकदम मशीन की भांति चलने लगे. इतने जोर के झटके लग रहे थे कि पायल के मोटे मम्मे बुरी तरह से हिल ढुल रहे थे जैसे भूकंप आ गया हो.
पायल: “आह आह आह आह आह ना ना ना अशोक, ओह्ह्ह मेरी भौसड़ी जल रही हैं अशोक छोडो ओह माँ मेरा हो रहा हैं, हो रहा हैं, अशोक मेरी चूत, हाह हाह उम्म उम्म उम्म उम्म, आह आ अह्ह्हह्ह्ह्ह हो गया मेरा.”
अशोक ने उसको छोड़ दिया. पायल हांफ रही थी जैसे अभी अभी मैराथन दौड़ कर आयी थी.
डीपू: “सिर्फ दस सेकंड ही बचे थे, हार जीत का अंतर. मगर फिर से काफी अच्छे से खिंचा तुमने. मेरी अंडरवियर गीली कर दी तुमने तो.”
अशोक: “मेरे तो हाथ पैर अभी तक कांप रहे थे. मैं हाथ धो कर आता हूँ, पुरे गंदे हो गए.”
पायल अभी भी बिना कपड़ो के बेसुध लेटी हुई थी.
मैंने और डीपू ने उसको उसके कपडे और कुछ पेपर नैपकिन दिए सफाई के लिए. उसने सफाई करके के बाद अपने कपडे पहन लिया. तब तक अशोक भी हाथ धोकर आ गये.
पायल: “देखो मेरे हाथ पैर अभी तक कांप रहे हैं. और प्रतिमा तुमने मुझे लाइफ में पहली बार सबके सामने नंगी कर दिया. तुमसे तो मैं अपना बदला लेकर रहूंगी.”
सच पूछो तो मैं बुरी तरह से डर गयी थी. पता नहीं वो क्या हरकत करेगी. पायल अब डीपू के कान में कुछ फुसफुसाने लगी. डीपू ने अपना सर ना में हिलाया.
डीपू :”पागल हो क्या, ये बहुत ज्यादा हो जाएगा.”
पायल: “ये भी मसाज में ही आता हैं, रूल के हिसाब से चलेगा.”
अशोक: “मेरी बीवी के खिलाफ क्या प्लान बना रहे हो तुम. कुछ उलटा सीधा तो नहीं कर रहे?”
पायल: “सब कुछ रूल्स के अंतर्गत ही होगा, चिंता मत करो.”
मैं: “मुझे पायल पे भरोसा नहीं. मुझे नहीं करना अब.”
पायल: “मुझे पता था ये धोखा देगी. सोच लो, अगर नहीं किया तो सजा मिलेगी.”
मैं: “तुम जो करने वाली हो उससे तो वो सजा ही ठीक होगी. लाओ क्या सजा हैं.”
पायल ने अपना पर्स खोला और चिठ्ठी मुझे देते हुई बोली “सिर्फ तुम पढ़ना और फिर निर्णय लो कि लेवल टू करना हैं या सजा भुगतनी हैं.”
पायल के बाद मैं भी चेलेंज के पहले लेवल के तहत अपने मम्मो की मसाज करवा चुकी थी और झड़ते झड़ते बची.
विराट ने कैसे अपनी सगी सगी भाभी की चुदाई करी और उनको अपने लंड को महोताज बनाया, यह जानिए उसकी देसी चुदाई कहानी में उसी की जुबानी.