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Guest
हम लोग फिर ऑफिस में आ गए और अपने काम में लग गए. शाम होने से पहले मुझे एक बार फिर पूजा का फ़ोन आया और मेरे हाथ पैर फुल गए.
मेरा फ़ोन साइलेंट पर ही था और मैंने पूरी रिंग जाने दी पर फ़ोन नहीं उठाया. कॉल ख़त्म होने के बाद मैंने पूजा का नंबर ही ब्लॉक कर दिया।
मुझमे अब हिम्मत नहीं बची थी कि मै पूजा की आवाज सुन पाऊ. किस मुंह से बात करती मै उस से .
रात को अशोक बेडरुम में मुझे चोदने के लिए तैयार था और मैंने रूबी का ध्यान करते हुए अशोक को रोका, पर वो नहीं माना. उसने कहा कि चुदने के बाद मेरी उदासी मिट जाएगी।
उदास तो मै थी और एक चुदाई की जरुरत भी थी पर रूबी को कल क्या जवाब दूंगी यह सोच मैंने मना करती रही.
परन्तु अशोक को मेरी कमजोरी पता थी, उसने मस्ती मस्ती में मेरा शार्ट और पैंटी उतार ही दी और एक बार मेरी चूत में ऊँगली जाने के बाद मै और नियंत्रित नहीं कर पायी।
अशोक ने आखिर मुझे चोद ही दिया और मै उसको मना नहीं बोल पायी। चुदते हुए यहीं दिमाग में चल रहा था कि क्या रूबी सही हैं। मेरी चूत क्या सच में लंड की गुलाम बन चुकी हैं।
चुदाई का मजा तो आ रहा था पर मन में रूबी की बातें मुझे चुभ भी रही थी।
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रूबी ने मुझे लण्ड़ का गुलाम कहा और एक महीने तक अपने पति से ना चुदवाने चैलेंज दिया मगर मैं पहली ही रात अपने पति चुदवा बैठी। अब मैं यही सोच रही थी कि रूबी को क्या जवाब दूंगी।
अगले दिन ऑफिस में मै रूबी का सामना करने से बचती रही. साथ में लंच किया और ऑफिस में इतने लोगो के बीच वो मुझ पूछ नहीं सकती थी।
रूबी की आंखे मगर लगातार मेरी आँखों में झाँक कर मेरी सच्चाई जानने की कोशिश कर रही थी। लंच के बाद वो मुझे वॉक के बहाने बाहर ले जाना चाहती थी पर मैंने काम का बहाना बना मना कर दिया।
मगर 4 बजे के करीब वो मुझे जबरदस्ती बाहर ले ही गयी। मुझे वो अकेले में ले आयी और सवाल जवाब करने लगी।
रूबी: “मुझे वैसे तुम्हारा जवाब पता हैं, पर फिर भी तुम्हारे मुंह से सुनना हैं”
मैं: “कैसा जवाब! क्या बात कर रही हो?”
रूबी: “मुझे पता नहीं चलता क्या कि तुम सुबह से मुझसे कतरा रही हो. सब पता हैं मुझको, तुमने कल रात चुदवाया हैं। एक रात भी नहीं रुक सकी!”
मैं: “मैने नहीं चुदवाया, वो तो अशोक ने बोला कि….”
रूबी: “कल को राह चलता आदमी बोलेगा तो तुम उसके साथ भी चुदवा लोगी?”
मैं: “कैसी बातें कर रही हो!”
रूबी: “तुम्हारी चूत, लंड की गुलाम हैं और तुम यह बात मान लो”
यह कहते हुए उसने मेरी दो टांगो के बीच हाथ रख मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरी चूत को पकड़ लिया। मैंने उसका हाथ हटाया और इधर ऊधर देखा, किसी ने नहीं देखा था।
मैं: “यह क्या कर रही हो खुले में! कोई देख लेगा तो?”
रूबी: “तुम जब भी चुदवा कर आती हो ना तो तुम्हारी शक्ल बता देती हैं”
मैं: “तलाक देना इतना आसान नहीं हैं”
रूबी: “अपनी चूत की कमजोरी को किसी और चीज पर मत डालो”
मैं: “यार अभी कुछ ऐसा हुआ हैं कि मेरी आंखे खुल गयी हैं। अब बस अशोक की एक और गलती और मै उसको तलाक दे दूंगी”
रूबी: “अपनी शक्ल दिखाओ, तुम्हे चुदने से फुर्सत नहीं और तुम तलाक दोगी. मै ही पागल हूँ जो रोज एक पत्थर से सिर भिड़ाती हूँ. चलो ऑफिस के अंदर, तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता”
रूबी ने भले ही मुझको नकार दिया था, पर रूबी की बातों और पूजा के उस थप्पड़ ने मुझको एक नयी दिशा दे दी थी। मुझे अपने आप को बदलना था। मैंने मन में ठान लिया कि मै अब अशोक की एक भी गलती को जाने नहीं दूंगी.
मेरा फ़ोन साइलेंट पर ही था और मैंने पूरी रिंग जाने दी पर फ़ोन नहीं उठाया. कॉल ख़त्म होने के बाद मैंने पूजा का नंबर ही ब्लॉक कर दिया।
मुझमे अब हिम्मत नहीं बची थी कि मै पूजा की आवाज सुन पाऊ. किस मुंह से बात करती मै उस से .
रात को अशोक बेडरुम में मुझे चोदने के लिए तैयार था और मैंने रूबी का ध्यान करते हुए अशोक को रोका, पर वो नहीं माना. उसने कहा कि चुदने के बाद मेरी उदासी मिट जाएगी।
उदास तो मै थी और एक चुदाई की जरुरत भी थी पर रूबी को कल क्या जवाब दूंगी यह सोच मैंने मना करती रही.
परन्तु अशोक को मेरी कमजोरी पता थी, उसने मस्ती मस्ती में मेरा शार्ट और पैंटी उतार ही दी और एक बार मेरी चूत में ऊँगली जाने के बाद मै और नियंत्रित नहीं कर पायी।
अशोक ने आखिर मुझे चोद ही दिया और मै उसको मना नहीं बोल पायी। चुदते हुए यहीं दिमाग में चल रहा था कि क्या रूबी सही हैं। मेरी चूत क्या सच में लंड की गुलाम बन चुकी हैं।
चुदाई का मजा तो आ रहा था पर मन में रूबी की बातें मुझे चुभ भी रही थी।
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रूबी ने मुझे लण्ड़ का गुलाम कहा और एक महीने तक अपने पति से ना चुदवाने चैलेंज दिया मगर मैं पहली ही रात अपने पति चुदवा बैठी। अब मैं यही सोच रही थी कि रूबी को क्या जवाब दूंगी।
अगले दिन ऑफिस में मै रूबी का सामना करने से बचती रही. साथ में लंच किया और ऑफिस में इतने लोगो के बीच वो मुझ पूछ नहीं सकती थी।
रूबी की आंखे मगर लगातार मेरी आँखों में झाँक कर मेरी सच्चाई जानने की कोशिश कर रही थी। लंच के बाद वो मुझे वॉक के बहाने बाहर ले जाना चाहती थी पर मैंने काम का बहाना बना मना कर दिया।
मगर 4 बजे के करीब वो मुझे जबरदस्ती बाहर ले ही गयी। मुझे वो अकेले में ले आयी और सवाल जवाब करने लगी।
रूबी: “मुझे वैसे तुम्हारा जवाब पता हैं, पर फिर भी तुम्हारे मुंह से सुनना हैं”
मैं: “कैसा जवाब! क्या बात कर रही हो?”
रूबी: “मुझे पता नहीं चलता क्या कि तुम सुबह से मुझसे कतरा रही हो. सब पता हैं मुझको, तुमने कल रात चुदवाया हैं। एक रात भी नहीं रुक सकी!”
मैं: “मैने नहीं चुदवाया, वो तो अशोक ने बोला कि….”
रूबी: “कल को राह चलता आदमी बोलेगा तो तुम उसके साथ भी चुदवा लोगी?”
मैं: “कैसी बातें कर रही हो!”
रूबी: “तुम्हारी चूत, लंड की गुलाम हैं और तुम यह बात मान लो”
यह कहते हुए उसने मेरी दो टांगो के बीच हाथ रख मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरी चूत को पकड़ लिया। मैंने उसका हाथ हटाया और इधर ऊधर देखा, किसी ने नहीं देखा था।
मैं: “यह क्या कर रही हो खुले में! कोई देख लेगा तो?”
रूबी: “तुम जब भी चुदवा कर आती हो ना तो तुम्हारी शक्ल बता देती हैं”
मैं: “तलाक देना इतना आसान नहीं हैं”
रूबी: “अपनी चूत की कमजोरी को किसी और चीज पर मत डालो”
मैं: “यार अभी कुछ ऐसा हुआ हैं कि मेरी आंखे खुल गयी हैं। अब बस अशोक की एक और गलती और मै उसको तलाक दे दूंगी”
रूबी: “अपनी शक्ल दिखाओ, तुम्हे चुदने से फुर्सत नहीं और तुम तलाक दोगी. मै ही पागल हूँ जो रोज एक पत्थर से सिर भिड़ाती हूँ. चलो ऑफिस के अंदर, तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता”
रूबी ने भले ही मुझको नकार दिया था, पर रूबी की बातों और पूजा के उस थप्पड़ ने मुझको एक नयी दिशा दे दी थी। मुझे अपने आप को बदलना था। मैंने मन में ठान लिया कि मै अब अशोक की एक भी गलती को जाने नहीं दूंगी.