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Erotica मेरी कामुकता का सफ़र

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हम लोग फिर ऑफिस में आ गए और अपने काम में लग गए. शाम होने से पहले मुझे एक बार फिर पूजा का फ़ोन आया और मेरे हाथ पैर फुल गए.

मेरा फ़ोन साइलेंट पर ही था और मैंने पूरी रिंग जाने दी पर फ़ोन नहीं उठाया. कॉल ख़त्म होने के बाद मैंने पूजा का नंबर ही ब्लॉक कर दिया।

मुझमे अब हिम्मत नहीं बची थी कि मै पूजा की आवाज सुन पाऊ. किस मुंह से बात करती मै उस से .

रात को अशोक बेडरुम में मुझे चोदने के लिए तैयार था और मैंने रूबी का ध्यान करते हुए अशोक को रोका, पर वो नहीं माना. उसने कहा कि चुदने के बाद मेरी उदासी मिट जाएगी।

उदास तो मै थी और एक चुदाई की जरुरत भी थी पर रूबी को कल क्या जवाब दूंगी यह सोच मैंने मना करती रही.

परन्तु अशोक को मेरी कमजोरी पता थी, उसने मस्ती मस्ती में मेरा शार्ट और पैंटी उतार ही दी और एक बार मेरी चूत में ऊँगली जाने के बाद मै और नियंत्रित नहीं कर पायी।

अशोक ने आखिर मुझे चोद ही दिया और मै उसको मना नहीं बोल पायी। चुदते हुए यहीं दिमाग में चल रहा था कि क्या रूबी सही हैं। मेरी चूत क्या सच में लंड की गुलाम बन चुकी हैं।

चुदाई का मजा तो आ रहा था पर मन में रूबी की बातें मुझे चुभ भी रही थी।

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रूबी ने मुझे लण्ड़ का गुलाम कहा और एक महीने तक अपने पति से ना चुदवाने चैलेंज दिया मगर मैं पहली ही रात अपने पति चुदवा बैठी। अब मैं यही सोच रही थी कि रूबी को क्या जवाब दूंगी।

अगले दिन ऑफिस में मै रूबी का सामना करने से बचती रही. साथ में लंच किया और ऑफिस में इतने लोगो के बीच वो मुझ पूछ नहीं सकती थी।

रूबी की आंखे मगर लगातार मेरी आँखों में झाँक कर मेरी सच्चाई जानने की कोशिश कर रही थी। लंच के बाद वो मुझे वॉक के बहाने बाहर ले जाना चाहती थी पर मैंने काम का बहाना बना मना कर दिया।

मगर 4 बजे के करीब वो मुझे जबरदस्ती बाहर ले ही गयी। मुझे वो अकेले में ले आयी और सवाल जवाब करने लगी।

रूबी: “मुझे वैसे तुम्हारा जवाब पता हैं, पर फिर भी तुम्हारे मुंह से सुनना हैं”

मैं: “कैसा जवाब! क्या बात कर रही हो?”

रूबी: “मुझे पता नहीं चलता क्या कि तुम सुबह से मुझसे कतरा रही हो. सब पता हैं मुझको, तुमने कल रात चुदवाया हैं। एक रात भी नहीं रुक सकी!”

मैं: “मैने नहीं चुदवाया, वो तो अशोक ने बोला कि….”

रूबी: “कल को राह चलता आदमी बोलेगा तो तुम उसके साथ भी चुदवा लोगी?”

मैं: “कैसी बातें कर रही हो!”

रूबी: “तुम्हारी चूत, लंड की गुलाम हैं और तुम यह बात मान लो”

यह कहते हुए उसने मेरी दो टांगो के बीच हाथ रख मेरी पैंट के ऊपर से ही मेरी चूत को पकड़ लिया। मैंने उसका हाथ हटाया और इधर ऊधर देखा, किसी ने नहीं देखा था।

मैं: “यह क्या कर रही हो खुले में! कोई देख लेगा तो?”

रूबी: “तुम जब भी चुदवा कर आती हो ना तो तुम्हारी शक्ल बता देती हैं”

मैं: “तलाक देना इतना आसान नहीं हैं”

रूबी: “अपनी चूत की कमजोरी को किसी और चीज पर मत डालो”

मैं: “यार अभी कुछ ऐसा हुआ हैं कि मेरी आंखे खुल गयी हैं। अब बस अशोक की एक और गलती और मै उसको तलाक दे दूंगी”

रूबी: “अपनी शक्ल दिखाओ, तुम्हे चुदने से फुर्सत नहीं और तुम तलाक दोगी. मै ही पागल हूँ जो रोज एक पत्थर से सिर भिड़ाती हूँ. चलो ऑफिस के अंदर, तुम्हारा कुछ नहीं हो सकता”

रूबी ने भले ही मुझको नकार दिया था, पर रूबी की बातों और पूजा के उस थप्पड़ ने मुझको एक नयी दिशा दे दी थी। मुझे अपने आप को बदलना था। मैंने मन में ठान लिया कि मै अब अशोक की एक भी गलती को जाने नहीं दूंगी.
 
मैने आज तक जो गलतिया की हैं उसमे कही ना कही अशोक का ही हाथ रहा हैं। अगर वो मेरी ज़िन्दगी से जायेगा तो मै अपने आप सुधर जाउंगी. मैंने सोच लिया था कि अब किसी ग्रुप सेक्स के इवेंट में नहीं जाउंगी.

उस रात मैंने अशोक को मुझे चोदने नहीं दिया। उसको मैंने अपने नीचे के कपड़े तक खोलने नहीं दिए ताकि वो मुझे कमजोर ना कर पाये।

अगले दिन मै ऑफिस में बड़ी शान से गयी। रूबी के आते ही मैंने उसको पुछा कि उसको स्मोकिंग करने नहीं जाना. वो मुझे तिरछी नजरो से देखने लगी। कल तो मै उसके सामने आने से भी घबरा रही थी।

मै स्मोक नहीं करती पर रूबी के साथ जरूर जाती थी, इस बहाने हम कुछ देर अकेले में बात कर लेते थे। वो मेरे साथ बाहर आयी।

मैं: “कल रात मैंने नहीं चुदवाया”

रूबी: “वो मै शक्ल पर पढ़ लेती हूँ. एक दिन नहीं चुदवाया तो खुश होने की जरुरत नहीं”

मैं: “शुरुआत तो की ना ! मैंने एक सप्ताह का टारगेट फिक्स किया हैं। मै करके दिखा दूंगी”

रूबी: ” देखते हैं”

उस दिन रात को भी मैंने पूरा विरोध करते हुए पति को चोदने नहीं दिया और अगले दिन ऑफिस में आयी। हमारे अकेले समय में मै फिर रूबी के साथ बात कर रही थी।

मैं: “आज नहीं पुछोगी कल रात क्या हुआ था या मेरी शक्ल पढ़ ली?”

रूबी: “पढ़ ली शक्ल तुम्हारी. कल रात तुमने भले ही ना चुदवाया हो, पर तुम्हारी शक्ल बता रही हैं कि अंदर तुम कितना तड़प रही हो.”

मैं: “अगर मै चुदवाऊं तो भी तुम्हे परेशानी और ना चुदवाऊं तो भी परेशानी”

रूबी: “मुझे कोई परेशानी नहीं हैं। परेशानी तुम्हे होगी. अभी जो बिन चुदवाए तुम्हारी हालत हैं, मै बता सकती हूँ कि तुम चुदवाने के लिए कितना तड़प रही हो”

मैं: “मैने दो दिन कण्ट्रोल किया हैं, मै आगे भी कर लुंगी”

रूबी: “यह बताओ तुम्हारा पति तुम्हारी चूत में ऊँगली करता हैं उसके बाद तुम नियंत्रित नहीं कर पाती ना? फिर तुम उसको चोदने से मना नहीं बोल पाती होगी, मैंने सही बोला ना?”

मैं: “तुम्हे कैसे पता?”

रूबी: “मै भी कभी बीवी थी, मुझे पता हैं”

मैं: “मैने दो दिन से अशोक को मेरे कपड़े ही नहीं खोलने दिए तो वो मेरी चूत में ऊँगली कैसे करेगा. इसलिए दो दिन से बच रही हूँ”

रूबी: “तो ऐसे कैसे तुम ज्यादा दिन टिक पाओगी? चैलेंज तो तब हैं जब वो तुम्हारी चूत में ऊँगली करे और फिर भी तुम अपने आप को नियंत्रित कर चुदने से बच जाओ. बोलो कर पाओगी?”

मैं: “नामुमकिन हैं। एक बार अगर चूत के अंदर ऊँगली गयी तो फिर मुझसे कण्ट्रोल नहीं होता”

रूबी: “यह कण्ट्रोल कर लो, फिर तुम में तलाक लेने की हिम्मत आ जाएगी”

मैं: “तुमने कैसे कण्ट्रोल किया?”

रूबी: “शाम को मेरे घर चलना बताती हूँ”

मैं: “घर क्युँ जाना, यहीं बता दो”

रूबी: “खोलो अपनी स्कर्ट”

मैं: “यहाँ खुले में! पागल हो क्या?”

रूबी: “हां तो क्या हुआ! लोगो को भी मजे लेने दो”

मैं: “हट पागल. शाम को मै तुम्हारे घर आती हूँ. पर तुम्हारा बच्चा आजकल कहा रहता हैं?”

रूबी: “इस महीने वो मेरे पति के पास रहेगी. तुम शाम को मेरे साथ चलो”
 
शाम को ऑफिस से निकलने के बाद मै रूबी के साथ उसके घर आ गयी। घर पर अशोक को फ़ोन कर बोल दिया कि मै लेट हो जाउंगी. अब हम रूबी के ड्राइंग रूम में थे.

रूबी: “चलो अपने सारे कपड़े निकालो”

मैं: “ऊपर के कपड़े क्युँ खोलने हैं?”

रूबी: “तुम्हारा पति जब तुम्हे चोदता हैं तब तुम सारे कपड़े नहीं निकालती हो?”

मैं: “निकालती हूँ, पर अभी उसकी क्या जरुरत हैं”

रूबी: “हम चुदाई का विकल्प करने वाले हैं। इसके बाद तुम्हे अपने पति के लंड की जरुरत नहीं पड़ेगी”

मैं: “पहले बताओ कि तुम करने क्या वाली हो”

रूबी: “जो तुम्हारा पति करता हैं वो मै करुंगी. तुम्हारी चूत को अपनी उंगलियों से रगड़ कर सेतुष्ट कर दूंगी, फिर तुम्हारे पति के लंड की जरुरत नहीं होगी”

मैं: “मै कोई होमोसेक्सुअल नहीं हूँ”

रूबी: “मै भी स्ट्रैट हूँ, कोई लेस्बियन नहीं हूँ. मुझे भी कोई शौक नहीं हैं तुम्हारी चूत को छुने का. मैंने सोचा तुम्हारी मदद कर दू”

मैं: “नाराज क्युँ हो रही हो? पहले ही बता देती कि यह करने वाली हो. यह तो मै खुद कर सकती हूँ”

रूबी: “पहले कभी खुद को ऊँगली की हैं”

मैं: “हां 1-2 बार”

रूबी: “मजा आया फिर?”

मैं: “हां थोड़ा बहुत”

रूबी: “जब दुसरा ऊँगली करता हैं तभी मजा आता हैं, खुद करोगी तो कैसे पूरा मजा आएगा. तुम्हे मुझसे करवाना हैं तो बोलो, वरना मुझे और भी काम पड़े हैं”

मैं: “मगर इस से मेरी चुदने की आदत कैसे छुटेगी?”

रूबी: “पहले अपने पति पर तुम्हारी जो निर्भरता हैं उसको खत्म करो. उसके लिए यह करना जरुरी हैं। मैंने भी ऐसे ही किया था, तब जाकर अपने पति को तलाक देने का मन बना पायी”

मैं: “मतलब तुम जो मुझे कहती रहती हो, वो तुम भी हो. तुम्हारी चूत भी तुम्हारे पति के लंड की गुलाम थी ? तुम भी एक दिन बिना चुदाये रह नहीं पाती थी?”

रूबी: “इतनी आदत थी कि दिन में दो-दो बार करते थे। हम एक ही ऑफिस में काम करते थे तो कभी कभी दोपहर में भी वाशरूम में कर लेते थे”

मैं: “फिर तो तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल रहा होगा अपने पति को तलाक देना!”

रूबी: “मन में ठान लो तो हो जाता हैं। अभी तुमने क्या सोचा हैं?”

मैं: “मै तैयार हूँ, पर ऊपर के कपड़े रहने देते हैं”

रूबी: “सारे कपड़े खोलो, तभी तो फीलिंग आएगी”

मैने अब अपने शर्ट के बटन खोलना शुरु किया और पूरा शर्ट निकाल कर रख दिया। अंदर से मेरा ब्रा और ब्रा से झांकते मेरे मम्मे दिखने लगे थे जो रूबी बड़े गौर से देख रही थी।

थोड़ी शरम भी आ रही थी जिसकी तरह वो मुझे घूर रही थी पर उसकी लड़कियो में दिलचस्पी नहीं हैं वो उसने मुझे पहले ही बता दिया था तो मुझे चिंता नहीं थी।

मैने अब अपनी स्कर्ट खा हूक खोला और उसको भी निकाल दिया। अब मै सिर्फ ब्रा और पैंटी में रूबी के सामने खड़ी थी और वो मुझे ऊपर से नीचे देख रही थी।

मैं: “ऐसे क्या देख रही हो? तुम्हारे इरादे तो नेक हैं? मेरे पास जो हैं वो तुम्हारे पास भी हैं”

रूबी: “यहीं देख रही हूँ कि गजब का फिगर मेंटेन किया हैं। सच सच बताना कितने आशिक हैं तुम्हारे? मेरा पति

अगर तुम्हारा पति होता तो दिन में कम से कम चार बार चोदता”

मै शर्मा कर रह गयी। मैंने अब अपना ब्रा निकाल दिया और मेरे कसे हुए बड़े से मम्मे बाहर आ गए. फिर मैंने अपनी पैंटी भी उतार दी और रूबी के सामने नंगी खड़ी हो गयी।

रूबी: “मुझे तुम्हारे पति पर तरस आ रहा हैं। अगर तुमने सच में उसको तलाक दे दिया तो बेचारा तुम्हारे इस हूस्न की जुदाई में अपनी जान ही ना दे दे. क्या खाती हो, कैसे मेंटेन करती हो ये हूस्न?”

मैं: “अभी जिस काम के लिए आये हैं वो करे?”

रूबी: “अभी तुम सोफे पर पांव चौड़े कर बैठो”

मै अब सोफे पर पीठ टिकाये बैठ गयी और एक पांव जमीन पर तो दुसरा मौड़ कर सोफे पर रख अपने पांव चौड़े कर दिए. मेरी चूत खुल कर रूबी के सामने थी।

रूबी अब आकर मेरे सामने बैठी और अपनी चारो उंगलिया आपस में सटा कर मेरी चूत पर रख ढक दी. मेरी चूत खुली थी तो उसके बीच की एक ऊँगली मेरी चूत में थोड़ा सा धंस गयी।

उसने अपनी उंगलिया ऊपर नीचे रगड़ी और मेरी आहें निकलने लगी। उसने अपनी उंगलिया और भी तेज रगड़नी शुरु कर दी तो अब तेज आहें लगातार आने लगी थी।

रूबी ने अपनी एक ऊँगली मेरी चूत में थोड़ा अंदर घुसा कर रगड़ना शुरु कर दिया था। मै अपनी आंहो को काबू करने की कोशिश कर रही थी पर पूरी तरह कामयाब नहीं हो पा रही थी।

रूबी बढे ही सधे हाथों से कामूक तरीके से मेरी चूत में अपनी ऊँगली और उतार अब अच्छे से रगड़ने लगी थी। मुझे चुदाई वाली फिलींग आने लगी थी और अब मेरे लिए आहें रोकना मुश्किल हो गया था।

तभी डोरबैल बजी और रूबी की उंगलियां थम गयी और मेरी आहें भी.

मैं: “अभी कौन आया होगा?”

रूबी: “मै देखती हूँ, तुम ऐसे ही रहो”

मैं: “नहीं, कोई अंदर आ गया तो?”

रूबी: “अरें, मै नहीं आने दूंगी अंदर”

मैं: “नहीं मुझ डर लगता हैं, मै अंदर बेडरुम में जा रही हूँ”

मै सोफे से उठकर बेडरुम की तरफ गयी और रूबी दरवाजा खोलने के लिए गयी। मै बेडरुम का दरवाजा थोड़ा सा खोले मुंह बाहर निकाल देख रही थी कि कौन आया हैं।

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रूबी के बताये उपाय के तहत मैं उसके घर पर अपनी चूत में उस से ऊँगली करवा कर मजे ले रही थी कि तभी डोरबेल बजी।

रूबी ने मै दरवाजा आधा ही खोला था और किसी से बातें कर रही थी। थोड़ी देर बात करने के बाद उसने दरवाजा बंद कर दिया। मुझे आवाजे साफ़ सुनाई नहीं दे रही थी तो समझ नहीं आया कि क्या हुआ।

रूबी ने अब दरवाजा बंद कर फिर सोफे के करीब आयी और मुझे इशारा किया. मै एक बार फिर उस नंगी हालत में आधी चुदी हुयी सोफे पर आकर बैठी.

मैं: “कौन था?”

रूबी: “मेरा एक आशिक था”

मैं: “मजाक मत कर”

रूबी: “मेरा पडौसी था, अकेली औरत आसान शिकार होती हैं। लाईन मारता रहता हैं मुझ पर”

मैं: “तुमने उसकी शिकायत नहीं की?”

रूबी: “शिकायत क्या करनी हैं, मै खुद संभाल लेती हूँ उसको. मुझे मर्दो को टरकाना आता हैं”

मैं: “कैसे भगाया उसको?”

रूबी: “वो मुझे पूछ रहा था कि क्या कर रही हो?”

मैं: “फिर!”

रूबी: “फिर क्या! मैंने बोल दिया कि चूत में ऊँगली कर रही थी”

मैं: “ओह! तुम उस से इस तरह की बातें करती हो?”

रूबी: “ऐसे मर्दो को ऐसी बातें करके ही तो संभालते हैं”

मैं: “तुम ऐसी बातें करती हो तो उसको तो सिगनल मिलता हैं ना! किसी दिन तुम्हारे साथ कुछ कर दिया तो”

रूबी: “उसकी हिम्मत नहीं हैं”

मैं: “तुमने बोला चूत में ऊँगली कर रही हो और उसने कुछ नहीं कहा!”

रूबी: “बोला ना, उसने कहा कि ऊँगली दिखाओ. मैंने उसको अपनी ऊँगली टेस्ट करवा दी”

मैं: “तुम पागल हो क्या? तुमने मेरी चूत के पानी से भीगी ऊँगली एक गैर मर्द को चटवा दी !!”

रूबी: “हां तो क्या हो गया, उसको तो यहीं लगा ना कि मेरी चूत में भीगी ऊँगली हैं। उसने तो उल्टा तारीफ ही की, उसको टेस्ट बहुत पसंद आया, तुम्हे तो उल्टा खुश होना चाहिए”

मैं: “तुम बहुत खतरनाक हो, तुम ऐसे मर्दो से बच कर रहना”

रूबी: “मैने उसको चूत का पानी टेस्ट करवाया, फिर उसको भागा दिया ना! मुझे मर्दो को भगाना आता हैं”

मैं: “मुझे बहुत बुरा लग रहा हैं, मेरी चूत का पानी किसी ऐसे मर्द ने टेस्ट किया हैं जो ठरकी हैं। तुम्हे ऐसा नहीं करना चाहिये था”

रूबी: “तुम तो ऐसे बोल रही हो जैसे तुम्हारी चूत तुम्हारे पति के अलावा कभी किसी ने चाटी ही नहीं होगी”

मैं: “फालतू बातें मत करो. मै जा रही हूँ”

रूबी: “काम तो पूरा करवा लो, नहीं तो रात को अपने पति से चुदवाना पड़ेगा”
 
मै फिर से अपनी पोजीशन बना कर बैठ गयी। रूबी ने एक बार फिर अपनी ऊँगली का जादू मेरी चूत में दिखाया और मै सिसकियां मारते हुए अगले कुछ मिनट में जड़ गयी। अब रूबी ने अपनी ऊँगली मेरी चूत से निकाली तो मेरे पानी से भर गयी थी।

रूबी: “तुम बोलो तो अपनी यह भीगी हुयी ऊँगली अपने पडौसी को चखा कर आती हूँ, उसका भी भला हो जाऐगा”

मैं: “तुम मेरे साथ वाशरुम में चलो और अपनी ऊँगली धो डालो”

मै रूबी को लेकर वाशरूम में गयी और पहले उसके हाथ धुलवाये और फिर अपनी सफाई करने के बाद मै बाहर आयी। फिर मैंने कपड़े पहने और रूबी को धन्यवाद बोलते हुए अपने घर आयी।

दो दिन बिना चुदाये रहने के बाद रूबी की ऊँगली से चुदाई से मै काफी सेतुष्ट महसूस कर रही थी। लगातार तीसरी रात मैंने अशोक को नहीं चोदने दिया।

उसको यहीं लगा कि मै पूजा के थप्पड़ के झटके से अभी नहीं उभरी हूँ. उसने मेरे साथ कोई जबरदस्ती नहीं की, मेरे लिए काम थोड़ा आसान हो गया था।

अगले दिन ऑफिस में मै खिली खिली सी थी और रूबी को तो पता ही था। मैंने उसको 3 उंगलिया उठा कर इशारा कर दिया कि मैंने 3 दिन कण्ट्रोल कर लिया हैं। दोपहर में हम फिर टहलते हुए बात कर रहे थे.

रूबी: “आज शाम मेरे घर चल रही हो?”

मैं: “नहीं, मै अभी अच्छा महसूस कर रही हूँ. मुझे लगता हैं मै एक सप्ताह कण्ट्रोल कर पाउंगी. अगर जरुरत हुयी तो मै कल शाम को तुम्हारे घर आ जाउंगी”

उस रात भी मैंने अशोक को मुझे चोदने नहीं दिया और उसने ज्यादा फोर्स नहीं किया. मुझे अच्छा लग रहा था कि मै सही दिशा में जा रही हूँ.

अगले दिन ऑफिस में रूबी से फिर टहलने के दौरान बातचीत हुयी. मैंने उसको बता दिया कि अब 4 दिन हो चुके हैं और मैंने अशोक से चुदाई नहीं करवाई थी।

रूबी: “आज शाम को आ रही हो, मेरा पडौसी तुम्हे बहुत याद कर रहा था”

मैं: “क्या!! तुमने उसको बता दिया मेरे बारे में?”

रूबी: “नहीं, कल शाम को फिर आया था, बोल रहा था कि उस दिन उसको टेस्ट बहुत अच्छा लगा। थोड़ा और मांग रहा था। बहुत तड़प रहा था बेचारा. मैंने उसको बोल दिया अगली बार चूत में ऊँगली करुंगी तो बता दूंगी”

मैं: “मुझे तो तुम समझ में नहीं आती हो. ऐसे कैसे किसी मर्द के साथ बातें कर सकती हो!”

रूबी: “जैसी दुनिया, वैसे ही रहना पड़ता हैं। तुम शाम को आ रही हो या नहीं. उसको तुम्हारी क्रीम चटवानी हैं”

मैं: “आज शाम को मै तुम्हारे यहाँ आना चाहती थी, पर अब यह सुनकर मैंने प्लान ड्राप कर दिया हैं”

रूबी: “नाराज क्युँ हो रही हो! मै थोड़े ही उसको बताउंगी कि यह तुम्हारा पानी हैं। उसको यहीं लगता हैं कि वो मेरा पानी था”

मैं: “कुछ भी हो, पर मुझे तो पता हैं ना कि मेरा पानी कोई गैर मर्द चाट रहा हैं। मुझसे यह बर्दाश्त नहीं होगा”

रूबी: “अपने पति को बर्दाश्त कर रही हो, पर तुम्हारा बेकार पानी किसी के काम आ रहा हैं वो तुम्हे बर्दाश्त नहीं !”

मैं: “नहीं मेरा मन नहीं मानता”

रूबी: “मै तुम्हारी मदद कर रही हूँ, तुम मेरी मदद कर दो”

मैं: “मेरी चूत का पानी तुम्हारा पडौसी चाटेगा तो तुम्हारा क्या भला होगा?”

रूबी: “अरें वो बहुत काम का पडौसी हैं, इसलिए तो उसको सहन कर रही हूँ. तुम्हारी चूत का पानी टेस्ट कर उसको ख़ुशी मिलती हैं तो आगे मेरी कोई मदद ही करेगा. बोलो चलेगा तुम्हे?”

मैं: “अगर तुम्हारा कोई फायदा हो रहा हैं तो ठीक हैं। पर तुम उसको नहीं बताओगी कि यह मेरी चूत का पानी हैं”

रूबी: “उसको यह बता दूंगी तो मेरा ही नुकसान हैं”

मैं: “तुम अपनी चूत का पानी क्युँ नहीं चखा देती उसको?”

रूबी: “मेरी चूत का पानी तो मेरे पति ने भी पसंद नहीं किया, जो कि मुझे दिन में 2-3 बार चोदता था, फिर वो पडौसी कैसे पसंद करेगा. उसको एक सेकण्ड में पता चल जाऐगा कि उस दिन का पानी अलग था”

मैं: “इसलिए बोलती हूँ, स्मोकिंग और शराब की आदत छोड़ दो. हेल्दी खाना खाया करो”

रूबी: “वो तो मुश्किल हैं। अपने गम मिटाने के लिए भी कुछ चाहिए”

शाम को मै एक बार फिर रूबी के घर पर थी। मैंने सारे कपड़े उतार दिए थे और अपनी पोजीशन ले ली थी। रूबी ने एक बार फिर अपनी उंगलियों से मेरी चूत को चोद दिया था। उंगलियों से चुदवाने से लंड के जितनी मजा नहीं आता पर कम से कम में जड़ रही थी जिसकी से मै अपने पति को मुझसे दूर रख पा रही थी।

मै सिसकियां मारते हुए एक बार फिर जड़ चुकी थी और रूबी की उंगलिया मेरे पानी से भर चुकी थी। उसने एक बार फिर ऊँगली मेरी चूत में घुसा दी और अंदर ही रखी।

अपना एक हाथ की दो उंगलिया मेरी चूत में दबाए रखते हुए उसने अपने पडौसी को फ़ोन किया और आने को बोला कि वो उसको चूत का पानी चटवायेगी.

मैं: “ऊँगली बाहर निकालो, मै अंदर जा रही हूँ, तुम पडौसी को ऊँगली चटवा देना”

रूबी: “डोर बैल बजने तक रुको, ऊँगली बाहर निकाल दूंगी तो मेरी उंगली पर लगा पानी सुख जाऐगा. ताजा ताजा उसको चटवाउंगी तो उसको भी मजा आएगा ना”

रूबी अपनी ऊँगली मेरी चूत में ही घुमा घुमा कर अपनी उंगलिया गीली करती रही और फिर डोर बैल बजी. मै सोफे पर ही उछल पड़ी.

रूबी ने अपनी ऊँगली बाहर निकाली और मै भाग कर वाशरूम में चली गयी। रूबी अपनी भीगी हुयी ऊँगली लेकर दरवाजा खोलने गयी।

मै अंदर से सिर बाहर निकाले देखने का प्रयास कर रही थी। रूबी ने एक बार फिर पडौसी को अंदर नहीं आने दिया। पर शायद वो अंदर आने की ज़िद कर रहा था।

फिर शायद वो शांत हुआ क्युँ कि रूबी ने अपनी ऊँगली पडौसी के मुंह में रख दी थी। फिर उसने पडौसी को रवाना कर दिया और दरवाजा बंद कर दिया था।

रूबी ने मुझको बताया कि उसका पडौसी मेरी चूत के पानी का दीवाना हो चुका हैं। मन ही मन मै गर्व महसूस कर रही थी पर सामने से शर्मा भी रही थी।

अपने वादें के मुताबिक मै सप्ताह में सिर्फ एक बार विकेंड पर अशोक के साथ चुदवाया. पर सप्ताह के दौरान मै दो बार रूबी के घर जाकर उसकी उंगली से चुदवा लेती.

अब यह मेरा विकली रुटीन बन गया था। इस तरह एक महीना निकल गया। रूबी इसी तरह मेरी चूत का पानी अपने पडौसी को चटवाटी रही. जब मेरे पिरीयड होते उस सप्ताह मै कुछ नहीं करती .

रूबी भी अपने पडौसी को बहाना मार देती कि उसका पिरीयड हैं। रूबी ने बताया कि जैसे लोगो को शराब का लत लग जाती हैं वैसे ही उसके पडौसी को मेरी चूत के पानी को चखने की लत लग चुकी हैं।

अगले कुछ सप्ताह में मैंने फ्रीक्वेंसी बढा दी. अब मै अशोक के साथ एक सप्ताह की बजाय 10 दिन में एक बार, फिर2 सप्ताह में एक बार चुदवाने लगी।
 
अशोक ने भी अब अपनी आदत सुधार ली थी और मुझे दबाव देना बंद कर दिया था। मेरा बाकी का काम तो रूबी कर ही देती. जल्दी ही मै अपना टारगेट प्राप्त कर दिया और एक महीने तक मैंने अशोक के साथ नहीं चुदवाया था। मै बहुत खुश थी और रूबी को भी बताया तो वो मेरे लिए भी खुश हुयी.

रूबी: “तो आखिर तुमने कर दिखाया!”

मैं: “तुम्हारी मदद के बिना मुश्किल था”

रूबी: “तो फिर सेलिब्रेट करे?”

मैं: “क्या करना हैं बोलो?”

रूबी: “मेरे पडौसी को लाइव तुम्हारी चूत का पानी पिलाना हैं”

मैं: “क्या मतलब हैं तुम्हारा? मै किसी मर्द को मुझे हाथ नहीं लगाने दूंगी और ना ही नंगी होउंगी”

रूबी: “जो तुम समझ रही हो वैसे नहीं. मेरा पडौसी दरवाजे के बाहर होगा और हम दोनो अंदर. मै तुम्हारी चूत में ऊँगली डालुंगी और फिर बाहर निकाल कर पडौसी को पिला दूंगी. उसको लगेगा मै अपनी चूत में ऊँगली डाल कर चटवा रही हूँ”

मैं: “और वो अंदर आ गया तो! सारा भांडा फूट जाऐगा”

रूबी: “मै दरवाजा चैन लगा कर रखुंगी। सिर्फ एक हाथ आने जाने जितनी जगह रहेगी, वो अंदर नहीं आ पाएगा”

मैं: “यह करना जरुरी हैं क्या? तुम वैसे भी उसको मेरा पानी चखा तो रही हो”

रूबी: “एक ऊँगली भर पानी से उसका पेट नहीं भरता. बार बार ऊँगली डाल कर उसको ढेर सारा ताजा पानी चटवाउंगी तो उसको मजा आएगा”

मैं: “ऐसी क्या जरुरत हैं?”

रूबी: “मेरा एक बड़ा काम अटका हुआ हैं, अगर वो खुश हो गया तो वो काम में उस से निकलवा सकती हूँ. उसको तुम्हारे बारे में पता नहीं चलेगा, पक्का”

मैं: “ठीक हैं, सिर्फ तुम्हारे लिए कर रही हूँ”

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मैंने अपना चैलेंज पूरा कर लिया था और इसकी ख़ुशी में मैं अपनी चूत का ताजा पानी रूबी के पडोसी को पिलाने को मान गयी थी।

शाम को मै रूबी के घर गयी और हमेशा की तरह मैंने पूरा नंगी हुयी और उसने मेरी चूत में ऊँगली डाल कर मुझे चोद दिया और मै जड़ गयी।

रूबी ने अपने पड़ौसी से पहले ही बात कर ली थी और उसको फ़ोन कर बुलाया. मै और रूबी अब दरवाजे के पास आये. मै दरवाजे के पीछे छुप कर खड़ी हो गयी।

मैं: “तुम भी अपने नीचे के कपड़े खोलो, वरना उसको शक हो जायेगा कि बिना कपड़े खोले तुम पानी कहा से निकाल रही हो”

रूबी: “मै भी तो दरवाजे के पिछे छुपी रहुंगी, वो कैसे देखेगा. पर ठीक हैं फिर भी महसूस करने के लिए मै खोल देती हूँ”

रूबी ने जल्दी से अपनी पैंट निकाल दी और नीचे से नंगी हो गयी।

पहली बार उसकी चूत देखी. उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे। वैसे भी उसको सफाई की क्या जरुरत, उसे थोड़े ही किसी से चुदवाना हैं। तभी बैल बजी और रूबी ने दरवाजा चैन लगा कर खोला.

मैने अपना एक पांव उठा कर अपनी चूत में जगह बनायी और रूबी ने मेरी चूत में ऊँगली डाल कर अपना हाथ दरवाजे से बाहर निकाल अपने पडौसी को चखाया.

बाहर से वाह आह की आवाजे आ रही थी और मै अपनी तारीफें सुन खुश हो रही थी। रूबी ने 15-20 बार मेरी चूत में ऊँगली डाल कर अपने पडौसी को टेस्ट करवाया था।

इस बीच वो दो तीन बार दरवाजे की खुली दरार के पास चली गयी थी जिसे शायद पडौसी का उसके नीचे का नंगापन दिख गया होगा।

दोनो बार मैंने उसके हाथ को पकड़ कर अपनी तरफ थोड़ा खिंच उसका ध्यान दिलाया कि उसने नीचे कपड़े नहीं पहने थे.

मेरी चूत अब अंदर से अच्छे से साफ़ हो चुकी थी, तब रूबी ने अपने पडौसी को जाने का बोला दिया।

पडौसी: “अपने मुंह से भी तो एक बार चाटने दो”

रूबी ने अंदर मेरी तरफ देखा, और मैंने डर के ना में सिर हिला दिया। रूबी ने अब पडौसी का ना बोल दिया और वो उदास सा चला गया।
 
रूबी ने दरवाजा बंद किया और हम दोनो ने अपनी शरारत पर खुश होते हुए एक दूसरे को गले लगा दिया। इस चक्कर में मेरे मम्मे रूबी के बंधे हुए मम्मो से टकरा कर दब जरूर गए और हमारी चूत का नंगापन भी टकरा गया था। मै फिर जल्दी से कपड़े पहन वहां से रवाना हुयी.

बाद में रूबी ने बताया कि उसका जो जरुरी काम था वो उसके पडौसी से निकलवा लिया हैं। अब हमें दरवाजे के पिछे छुपकर किया काम नहीं करना पड़ेगा.

जब सब कुछ ठीक चल रहा था तो मेरी ज़िन्दगी में फिर एक तूफान आया। मेरे पति काफी समय से शांत थे, मैंने उनको अब महीने में एक बार ही चोदने देती थी.

अशोक: “तुम्हे नहीं लगता पिछले कुछ समय से हमारी सेक्स लाईफ कमजोर पड़ गयी हैं। अब हमें फिर से मसाला लाना चाहिये। हम किसी कपल के साथ अदला बदली करते हैं”

मैं: “अब तो नाम भी मत लेना. पिछली बार याद हैं ना पूजा के साथ क्या हुआ था!”

अशोक: “अभी वो टेंशननहीं हैं। लड़की को मैंने मना लिया हैं। तुम्हे सिर्फ लड़के को मनाना हैं। वो तो तुम्हारे लिए आसान हैं। तुम लड़के को अच्छे से जानती भी हो”

मैं: “मैने सोच लिया हैं कि मै अब यह सब नहीं करुंगी. मै अब और कोई पार्टनर अदला बदली नहीं करुंगी”

अशोक: “तुमने मुझसे वादा किया था कि हम करेंगे और तुम साथ दोगी. सिर्फ एक अनुभव पूजा वाला खराब हुआ तो तुम मना कर रही हो. उसके पहले के ग्रुप सेक्स तो तुमने एन्जॉय किए थे ना!”

मैं: “मुझे अब और नहीं करना हैं”

अशोक: “‘यह तो कोई बात नहीं हुयी. यह मेरी अल्टीमेट फंतासी हैं”

कुछ समय पहले एक ग्रुप सेक्स के इवेंट में सबको उनकी फंतासी पुछी गयी थी। तब अशोक ने कहा था कि वो अपनी शादीशुदा गर्लफ्रेंड के साथ पार्टनर अदला बदली कर चोदना चाहता हैं।

मुझे डर लगा कही उसकी उसी फंतासी के बारे में तो बात नहीं कर रहा। जैसा कि आपको मेरी पिछली कहानियो से पता हैं कि मेरे पति की गर्लफ्रेंड मेरी भाभी ही हैं। उनके साथ पार्टनर अदला बदली करने का मतलब मुझे मेरे भाई के साथ चुदवाना होगा।

मैं: “तुम किस अल्टीमेट फंतासी की बात कर रहे हो?”

अशोक: “तुम्हे पता हैं उसके बारे में. मै तुम्हारी भाभी को मना चुका हूँ. अब तुम्हे अपने भाई को मनाना पड़ेगा”

मैं: “तुम्हारा दिमाग तो खराब नहीं हो गया! अब मै अपने भाई के साथ यह काम करुंगी, तुमने सोच भी कैसे लिया? मैंने तुम्हारी बात रखने के लिए ग्रुप सेक्स में जाने को तैयार हो गयी। फिर मैंने तुम्हारे कारण पूजा का चांटा भी खा लिया। तुम्हारी हिम्मत इतनी बढ़ गयी कि मुझे मेरे ही भाई के साथ सुलाओगे!”

अशोक: “इतना भड़क क्युँ रही हो. ग्रुप सेक्स के इवेंट्स में मै अकेले मजे नहीं ले रहा था। भूलो मत तुमने मुझसे भी ज्यादा मजे लिए हैं। तुम्हे तो मेरा शुक्रगुजार होना चाहिये कि तुम्हे मेरे जैसा खुली सोच वाला पति मिला हैं”

मैं: “अब मेरा मुंह मत खुलवाओ। मुझे सब पता हैं, तुमने सुमन के साथ मिलकर प्लान बनाया और मुझे उस दिन सौरभ के साथ पकड़ा था। ताकि तुम मुझे ग्रुप सेक्स के लिए ले जा पाओ”

इस घटना के बारे में और जानने के लिए आप मेरी कहानी “Jab Main Bani Love Guru” पढ़े.

अशोक: “प्लान किया था तो क्या हुआ! तुम अपनी इच्छा से सौरभ के साथ चुदवा रही थी। पकड़े जाने के बाद भी तुम्हे उसके साथ चुदवाया”

मैं: “हां मै ऐसी ही हूँ. मुझे तलाक दे दो फिर. मगर मै अपने भाई के साथ यह घिनौना काम नहीं करुंगी. या तो अपनी यह ज़िद छोड़ दो या मुझे तलाक दे दो”

अशोक: “तुम तलाक तक क्युँ पहुंच रही हो. तुम शान्ति से इस बारे में सोच लो. इसमें कुछ बुरा नहीं हैं। भाई भी तो एक मर्द ही होता हैं ना, दूसरे मर्दो की तरह उसके भी एक लंड हैं। तुम इतने लंड अपनी चूत में ले चुकी हो तो यह एक और सही. लंड पर तुम्हारे भाई का नाम थोड़े ही लिखा हैं।”

मैं: “छी, कितनी गंदी सोच हैं तुम्हारी. तुम्हे मेरी भाभी के साथ करना हैं तो करो, पर मै यह सब नहीं कर सकती”

अशोक: “हमने एक दूसरे से वादा किया हैं कि किसी और के साथ करेंगे तो अदला बदली करके एक दूसरे की अनुमति से ही करेंगे”

मैं: “एक बात तुम अच्छे से समझ लो कि मै अपने भाई के साथ कुछ नहीं करुंगी”

अशोक: “तुम्हे बात नहीं करनी हैं तो ठीक हैं। मै तुम्हारी भाभी को बोलता हूँ, वो तुम्हारे भाई को मना लेगी”

मैं: “तुम पागल हो चुके हो. अगर तुमने फिर ये बात की तो मै तुम्हे छोड़ कर चली जाउंगी”

मेरा दिमाग पूरा घूम चुका था। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करु. रूबी के साथ मिलकर मैंने अच्छी खासी प्रैक्टिस कर ली थी और तलाक के लिए तैयार भी थी। पर सोचा नहीं था कि वो समय इतना जल्दी आ जायेगा.

रूबी मुझे उदास देखकर मुझसे मेरी परेशानी जानना चाहती थी पर उसको कैसे बताती की मेरा पति मुझे मेरे भाई के साथ सुलाना चाहता हैं।

रूबी ने एक बार फिर वहीं रिपिट किया कि मुझे अपने पति से तलाक ले लेना चाहिये। अगले 2- दिन अशोक ने फिर अदला बदली का नाम नहीं लिया। फिर अगले दिन वो रात को मेरे सामने आ गया।

अशोक: “मै एक गेट टुगेदर प्लान कर रहा हूँ, तुम्हारे भाई भाभी को साथ ले लेंगे. वहीं पर हम अदला बदली कर लेंगे. तुम्हारी भाभी तब तक तुम्हारे भाई को तुम्हे चोदने के लिए मना लेगी”

मैं: “खबरदार जो मेरे भाई के साथ ऐसी कोई बात की तो”

अशोक: “क्युँ! तुम्हे डर लग रहा हैं कि कही तुम्हारा भाई तुम्हे चोदने के लिए मान जाऐगा!”

मैं: “मेरा भाई तुम्हारी तरह नहीं हैं। उसको भाई बहन के रिश्ते की क़द्र हैं”

अशोक: “और अगर वो मान गया तो ! क्या फिर तुम चुदवाने को तैयार हो?”

मैं “मेरा भाई ऐसा कभी नहीं करेगा”

अशोक: “तुम्हे अपने भाई पर इतना यकीन हैं तो तुम हां बोल दो. वो ना बोल देगा तो वैसे ही कुछ नहीं होगा।..क्या हुआ, बोलती बंद हो गयी?”

मै कुछ नहीं बोली. मुझे मेरे भाई पर यकीन हैं पर फिर भी मन में एक डर था। मर्द तो मर्द ही होते हैं, उनके मन में क्या चल रहा हो क्या पता.

मेरे बदन को देख कर तो लड़कियां भी अपने आप पर काबू नहीं रखती फिर मेरा भाई मेरे बारे में कुछ सोच ही सकता हैं। अशोक ने मेरे मन में एक संदेह डाल दिया था। मैंने अशोक को इस बारे में बात करने से ही मना बोल दिया।
 
इस बातचीत के 3 दिन बाद ही मुझे भाभी का मैसेज मिला कि अशोक ने हम चारो के घुमने का प्लान बनाया हैं और वो लोग लंबे समय बाद वेकेशन की तैयारी कर रहे हैं। अशोक के आते ही मै उस पर टूट पड़ी.

मैं: “मैने तुम्हे मना किया था फिर भी तुमने मेरे भाई भाभी को इसमें घसीट लिया!”

अशोक: “इतना गुस्सा क्युँ हो रही हो. तुम्हारा भाई मान गया हैं और तुम्हे चोदने के लिए बेकरार हो रहा हैं, इसलिए प्लान बनाया हैं। अब क्या बोलती हो? इतना मत सोचो. भाई हो या पति सबके पास लंड ही होता हैं जो मजे दिलाता हैं। एक बार उस से बात कर लो, उसको बोल दो कि तुम उसके साथ चुदवाने को बेताब हो. सब सेट हो जायेगा”

मैं: “ठीक हैं, मैंने भी फैसला कर लिया हैं”

अशोक: “यह हुयी ना बात। यह बताओ एक ही रूम बुक कराऊ या अलग अलग. अगर तुम्हे मेरे सामने अपने भाई को चोदने में शर्म आये तो दो कमरे बुक कर देता हूँ”

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मैंने अपनी चुदाई की लत पर काबू पा लिया था और फिर अशोक ने मुझे मेरे ही भाई के साथ सोने का फरमान सुना दिया और अब मुझे अपनी ज़िन्दगी का फैसला लेना था।

मैं: “मैने ये निर्णय कर लिया हैं कि मै तुम्हे तलाक दे रही हूँ”

अशोक: “अपने भाई भाभी के साथ अदला बदली के बाद तलाक दोगी या पहले? तलाक क्या मजाक हैं!”

अगले दिन ही जाकर मै रूबी की मदद से एक वकील से मिली और अपने तलाक की प्रक्रिया शुरु कर दी. भाभी को मैंने बोल दिया कि मै बहुत व्यस्त हूँ और घुमने का कार्यक्रम रोकना पड़ेगा.

एक दिन जाकर मैंने तलाक के कागज़ अशोक के सामने रख दिए. अशोक को यकीन नहीं हुआ कि जो लड़की इतने सालो से उसकी ज्यादतियां बर्दाश्त कर रही थी वो ऐसा कदम भी ले सकती हैं।

उसने मुझे बहुत मनाने की कोशिश की पर मै अब ठान चुकी थी कि अब बहुत हो चूका. घर परिवार वालो को पता चला तो बहुत बवाल हुआ पर मै पीछे नहीं हटी.

कोर्ट से हमको एक साल का समय मिला सोचने के लिए और उसके बाद ही तलाक मिल सकता था। मैंने अपने लिए अलग घर किराये पर ले लिया था, बच्चा कभी मेरे तो कभी मेरे पति के साथ रहता.

हम दोनो ही काम करते थे तो बच्चा दिन भर उसकी दादी के घर ही रहता और शाम को हम पति पत्नी दोनो अपनी बारी के हिसाब से उसे अपने पास रखते।

मै अपने घर जाकर अपने भाई को क्या मुंह दिखाती, जब कि वो खुद मुझे चोदने को तैयार हो चुका था। पर माँ के बुलावे पर मुझे जाना पड़ा.

वहां जाकर मैंने भाभी से बात कर ली. तब मुझे पता चला कि मेरे पति अशोक ने मुझसे झूठ बोला था। भाभी को इस अदला बदली के बारे में कुछ नहीं पता था, उन्हे सिर्फ वेकेशन के बारे में पता था।

अशोक की गंदी सोच को देखते हुए भाभी ने कसम खा ली कि वो अशोक से अपने रिश्ते तोड़ देगी. मुझे ख़ुशी मिली कि कम से कम मेरे भाई का घर बर्बाद नहीं होगा।

रूबी मेरे फैसला से बहुत खुश थी। मुझे अब किसी मर्द की चुदाई मिलना बंद हो चुका था पर रूबी अपनी ऊँगली से मेरी मदद कर देती थी।

कभी कभी मुझे आश्चर्य होता था कि रूबी को ऊँगली से चुदने की जरुरत नहीं होती. मुझे भी उसके जैसा बनना था जब मुझे ऊँगली करने तक की जरुरत महसूस ना हो और पूरा कण्ट्रोल कर पाऊ जैसे रूबी करती हैं।

मैंने एक बार उसको पूछ ही लिया कि वो चाहे तो मै भी उसको अपनी ऊँगली से मजा दिला सकती हूँ, पर उसने मना बोल दिया कि उसको ऊँगली की जरुरत नहीं.

मैने भी सोचा मुझे भी अपनी चूत में ऊँगली की आदत छोड़ने की कोशिश करनी होगी. ऑफिस में भी यह बात पता चल गयी कि मै अपने पति से अलग रह रही हूँ.

जैसा कि रूबी ने बताया था, अकेली औरत को देख मर्द लाईन मारते ही हैं। मेरे ऑफिस में भी मर्द अब मुझे आकर अफ़सोस जताते और मुझे कोई मदद चाहिये हो तो वो मदद देने की पेशकश करते.

शुरू शुरु मै तो मुझे लगता कि वो लोग मेरी मदद करना चाहते हैं पर फिर रूबी ने बताया कि वो मेरी किस तरह की मदद की बात कर रहे थे.

अकेली औरतो की परेशानी मुझे अब समझ आने लगी थी और रूबी के प्रति मेरा आदर और बढ़ गया था। मैंने यह भी महसूस किया कि अब मेरा बॉस राहुल मुझसे ज्यादा बातें करने लगा था।
 
हमारे बीच पहले जो कुछ भी हुआ था, मुझे पता था कि वो मुझसे आज भी प्यार करता हैं। मैंने तो उसको कब का माफ़ कर दिया था पर मै शादी शुदा होकर उसके साथ कोई रिश्ता नहीं रखना चाहती थी।

पर अब में फिर से सिंगल थी और राहुल के साथ रिश्ता बनाने का मौका भी था। शायद राहुल को भी इसमें एक मौका दिखाई दिया।

वैसे भी मैंने राहुल को अपने पति के बाद का दुसरा विकल्प माना था। शायद मेरे लिए यह सबसे सही अवसर था कि मै राहुल के साथ अपने प्यार को आगे बढा पाऊ. मगर मै आगे बढ़कर राहुल को कैसे बोलती इसलिए चुप ही रही.

अशोक और मेरे बीच यह निर्णय हुआ था कि दोपहर में बच्चा मेरी सासुजी के घर ही रहेगी और शाम को ऑफिस के आने के बाद हम दोनो बारी बारी से उसे अपने पास रखेंगे।

एक दिन जब मै अपने बच्चे को पिक अप करने सासुजी के घर के बाहर पहुंची और कार से बाहर निकली तो सामने से पूजा आती दिखी. एक नजर उस पर पड़ते ही मै डर गयी और घर की तरफ बढ़ी। फिर उसकी आवाज सुनाई दी जो मुझे पूकार रही थी।

यहाँ बीच मोहल्ले में वो फिर से मुझे थप्पड़ ना लगा दे या सबके सामने मुझे डाँट कर मेरी पोल खोल ना दे इस डर से मै गेट खोल कर अंदर जाने लगी।

तब तक वो मेरे पास आ गयी थी और मेरे कंधे पर हाथ रख दिया। मैंने अपना एक हाथ अपने गाल पर रखे उसको देखने लगी।

पूजा: ”मुझे नजरअंदाज कर रही हो? आई एम सॉरी , उस दिन मैंने तुम्हे चांटा मार दिया। मुझे एसी प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिये थी। उसके बाद मैंने तुम्हे कई बार माफ़ी मांगने के लिए फ़ोन किया पर लगा ही नहीं. प्लीज माफ़ कर दो.”

मैने थोड़ा आश्चर्य हुआ कि गलती तो मैंने की फिर भी वो माफ़ी मांग रही थी। हो सकता हैं उसने भी मुझे माफ़ कर फिर से दोस्ती करने की सोच ली हो.

मैं: “तुम क्युँ माफ़ी मांग रही हो? माफ़ी तो मुझे मांगनी थी, मैंने तुम्हे ऐसा कुछ करने को बोला. तुमने तो मुझे सही रास्ता बता दिया”

पूजा: “यार, तुमने नितीन के सामने ऐसा बोला इसलिए घबरा कर मैंने थप्पड़ मार दिया। नितीन पहले ही मुझ पर शक करता हैं, मै हां बोलती तो फिर उसको लगता कि मै सच में चरित्रहीन हूँ”

मैं: “मतलब… नितीन नहीं होता तो तुम तैयार थी!”

पूजा: “हां”

मैं: “फिर भी तुमने उन दोनो के सामने मुझे थप्पड़ मार कर मेरा अपमान किया और खुद को बड़ा चरित्रवान दिखाया!!”

पूजा: “मैने तुम्हे बताया तो था कि डांस करते करते ही मै बहक गयी थी। मेरे अंदर कपड़े गीले हो चुके थे, कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया था”

मैं: “मुझे तो तुम्हारा मना करना पसंद आया था कि तुम ऐसी नहीं हो. तुमसे प्रेरित होकर तो मै अशोक से अलग हो गयी”

पूजा: “तुम्हारे बारे में सुनकर बुरा लगा। पर अशोक ने उस दिन मुझ पर जादू कर दिया था। काश उस दिन नितीन साथ में नहीं होता तो मेरी इच्छा पूरी हो जाती। तुम तो वैसे ही अशोक से अलग हो गयी हो, वो भी अकेला होगा, तुम अशोक से बात कर सकती हो मेरे बारे में, नितीन को पता नहीं चलना चाहिये बस”

मेरी काटो तो खून नहीं वाली हालत थी। मैंने पूजा को क्या समझा और वो क्या निकली. वो तो तैयार बैठी थी अशोक के साथ चुदवाने के लिए. पर अब मुझे वैसे भी क्या फर्क पड़ता.

मैं: “तुम खुद बात क्युँ नहीं कर लेती, वो तो वैसे ही तैयार हैं”

पूजा: “आगे बढ़कर उसको कैसे बोलू? वैसे भी वो मुझे मिलता कहा हैं। तुम भी आज इतने दिनों बाद बड़ी मुश्किल से मिली हो. तुम तो मेरी सहेली हो, मेरे एक काम नहीं करोगी?”

मैं: “मै देखती हूँ, क्या कर सकती हूँ”

अब उसकी मदद करना मतलब नितीन के साथ मुझे सोना पड़ेगा जो मै करना नहीं चाहती थी। मै उस ज़िन्दगी से बहुत दूर आ चुकी थी।

मुझे इस चीज से कोई परेशानी नहीं थी कि पूजा मेरे पति से चुदवाना चाहती थी। पर बुरा यह लगा कि इस पूजा ने ही सबसे पहले मुझे यह अहसास दिलाया था कि मै गलत रास्ते पर हूँ, मगर वो खुद गलत रास्ते पर ही थी।

पर मुझे ख़ुशी थी कि उसके चक्कर में मै अब सही रास्ते पर आ चुकी थी। हर औरत तो पूजा की तरह नहीं हो सकती. रूबी अभी भी मेरी ताकत थी।

फिर थोड़े दिन बाद जब मै अपने बच्चे को पिक अप करने अशोक के घर गयी थी तो अशोक ने भी विनती की.

अशोक: “आज रात यहीं रुक जाओ, बहुत दिनों से करने को नहीं मिला मुझे”

मैं: “तुम्हे मेरी क्या जरुरत हैं, तुम्हारे लिए तो बहुत सी लड़कियां तैयार होगी”

अशोक: “कोई लड़की नहीं हैं! एक रात की ही तो बात हैं, रुक जाओ”

मैं: “तुम्हारे तो इतने दोस्त हैं, चले जाओ किसी के भी घर, वो अपनी बीवी दे देंगे तुम्हे चोदने के लिए”

अशोक: “तुम्हे पाने की लालच में दे भी देते पर अब कौन देगा?”

मैं: “तुम्हारी पूजा मिली थी थोड़े दिन पहले, वो तैयार हैं। कर लो उसके साथ”

अशोक: “अच्छा!! पर वो नितीन क्युँ मानेगा? तुम मेरे साथ ना सही ,नितीन के साथ चुदवाने को तैयार हो जाओ तो वो मुझे पूजा को चोदने देगा. अब तो पूजा भी तैयार हैं तो कोई परेशानी ही नहीं हैं”

मैं: “तुम्हारी गलत इच्छाओ के लिए मै क्युँ बलि दू? मुझे ऐसा कोई शौक नहीं हैं। मैंने तुम्हे खाली बता दिया हैं कि पूजा तैयार हैं, अब तुम्हे कैसे करना हैं वो तुम दोनो देख लो”

अशोक: “ऐसे मत करो, वो नितीन तो पूजा पर पहरा रखता हैं, उसकी इजाजत के बिना मै नहीं कर सकता”

मैं: “मै तुम्हारी इसमें कोई मदद नहीं कर सकती”
 
अशोक: “मेरा जन्मदिन आने वाला हैं। मै पूजा और तुम्हारी सुलह के बहाने उन दोनो को पार्टी पर बुलाता हूँ, तुम भी आ जाना. मेरी थोड़ी मदद कर देना, नितिन को थोड़ा व्यस्त रखना तब तक मै पूजा के साथ कर लूंगा. इस बहाने तुम पूजा की भी मदद कर दोगी”

मैं: “तुम ध्यान से सुन लो, मै नितीन के साथ कुछ करने वाली नहीं हूँ”

अशोक: “तुम्हे कुछ नहीं करना हैं, सिर्फ पार्टी में आ जाना बस. हर साल तुम मुझे जन्मदिन गिफ्ट देती हो, इस बार तुम्हारा आना ही मेरे लिए गिफ्ट होगा, प्लीज…प्लीज”

पूजा ने मुझे अशोक और नितीन के सामने थप्पड़ मारा था और मुझे उसके मुकाबले चरित्रहीन साबित कर दिया था। यह मौका था जब मै पूजा से उन्ही लोगो के सामने माफ़ी मंगवा सकती थी। तो मैंने पार्टी में आने का हां बोल दिया।

अगले दिन मैंने पूजा को फ़ोन कर बोल दिया कि अशोक उसे और नितीन को अपनी जन्मदिन पार्टी में बुलाने वाला हैं। तो उसके पास अशोक से चुदने का भी मौका होगा और मुझसे उन दोनो के सामने माफ़ी मांगने का भी.

पूजा यह सुनकर बहुत खुश हुयी. मै खुश थी कि मेरा जो अपमान हुआ था उसका बोझ उतर जाऐगा और हो सकता हैं मै अशोक और पूजा की एक होने में मदद भी कर दू .

जन्मदिन वाले दिन मै अशोक के घर पहुंची. वो अकेला ही था। उसने मेरे अलावा सिर्फ पूजा और नितीन को ही बुलाया था। यहाँ तक कि हमारा बच्चा भी नहीं था।

अशोक: “धन्यवाद , तुम आ गयी। यार तुम अगर नितीन के साथ करने को मान जाओ तो मेरा और पूजा का काम आसान हो जायेगा”

मैं: “तुम चाहते हो कि मै चली जाऊ तो चली जाती हूँ, पर फिर यह विनती मत करना”

अशोक: “मेरे अंदर आग लगी हैं, मुझे चोदना हैं। ना तुम करने दे रही हो, और ना मेरी मदद कर रही हो”

मैं: “मुझे जितनी मदद करनी थी वो मैंने कर दी. इस से ज्यादा उम्मीद मत रखना”

अशोक: “अच्छा ठीक हैं, मै अगर पूजा को लेकर अंदर जाऊ तो नितीन को यहाँ रोके रखना”

मैं: “मै 5-10 मिनट से ज्यादा नहीं रोक पाउंगी, नितीन भी कोई पागल नहीं हैं, उसे पता चल जाऐगा. 5-10 मिनट में जो कर सकते हो कर लेना”

.....................

अशोक की बर्थडे पार्टी में अशोक और पूजा का चुदाई का इरादा था और मेरा मकसद था पूजा से माफ़ी मंगवाना। मैं तय समय पर पहुंच गयी थी पर अशोक मुझे नितिन के साथ चुदने को मना रहा था।

तभी डोरबैल बजी और अशोक ने जाकर दरवाजा खोला. नितिन और पूजा आ गए थे। पूजा आज तो कुछ ज्यादा ही सजी संवरी थी। बालो का जूड़ा बना था और उसकी वो ही दो लम्बी झुल्फे दोनो तरफ लटकी थी।

मरून लिपस्टिक में रंगे उसके होंठ चमक रहे थे और मादक लग रहे थे और उसकी बड़ी सी स्माईल में खिल रही थी। माथे पर छोटी सी चमकीली बिंदी थी।

उसने आज भी चमकीली साड़ी पहनी थी पर उस दिन से ज्यादा फर्क था। आज उसकी साड़ी पारदर्शी थी। पेटीकोट को नाभी से 3 इंच नीचे बाँधा था और पारदर्शी साड़ी से उसका पतला पेट और नाभी साफ़ दिख रही थी।

जब वो पीछे मुड़ी तो उसकी पीठ पूरी नंगी थी और सिर्फ ब्लाउज की दो डोरिया बंधी थी। उसको भी अच्छी तरह आता था कि मर्दो को कपड़ो से दीवाना कैसे करते हैं।

हमेशा की तरह उसका आकर्षण उसकी मटकती गांड थी जो उस टाइट बंधी साड़ी में अच्छे से खिल कर दिख रही थी। वो तीनो चल मेरे पास आये.

अशोक: “चलो भाई, प्रतिमा और पूजा अपने गिले शिकवे मिटा लो”

पूजा ने मुझ गले लगाया. उसके बड़े से मम्मे मेरे मम्मो से टकरा कर थोड़ा दब गए. उसके मम्मे बहुत मुलायम थे.

पूजा: “उस दिन मैंने प्रतिमा को ग़लतफ़हमी में चांटा मार दिया था। वो तो सिर्फ डांस पार्टनर के लिए बात कर रही थी और मै कुछ और ही गलत समझ गयी”

हम सब उसकी शक्ल देखने लगे, जो मुस्कुरा रही थी। उसने बड़ी सफाई से झूठ भी बोल दिया और माफ़ी भी मांग ली थी।

पूजा: “प्रतिमा, मुझे उस दिन लगा तुम कुछ गंदी बात कर रही हो, पर बाद में मुझे लगा तुम तो सिर्फ डांस के लिए मुझे अशोक के साथ पार्टनर बना रही थी। आज तुम जो बोलोगी वो करेंगे. क्युँ नितिन?”

नितीन: “मुझे तो उस दिन भी कोई परेशानी नहीं थी और आज भी नहीं हैं”

अशोक: “हां तो चलो संगीत से शुरु करते हैं”

अशोक ने पहले ही शायद तैयारी कर रखी थी और बहुत ही मादक गानो को प्ले कर दिया। कमरे में हल्की लाल रंग की रोशनी कर दी. अशोक तो पूजा का हाथ पकड़े डांस के लिए ले गया।

नितीन मुझे भी आग्रह करने लगा पर मैंने उसको रुकने को बोला. मै और नितीन अब बैठ कर डांस देखने लगे। अशोक तो इतने दिन से किसी औरत को हाथ लगाने के लिए भी तड़प रहा था ऊपर से वो मादक गाना.
 
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