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Fantasy अनदेखे जीवन का सफ़र

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जैसे ही सब पीछे मुड़े तो वहां बस्ती के बहुत सारे बौनें खड़े थे।

उनमें से एक बौना- "हम आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं की आपने हमें उस दुष्ट से बचा लिया। हम अब यहां नहीं रहना चाहते.."

तभी वहां पहली बस्ती का राजा आता है, और कहता है- "अगर आप सब चाहें तो हमारे साथ रह सकते हैं..."

राजा की बात सुनकर सब बौने बहुत खुश होते हैं।

वीर- सही कहा आपने। आज से आप सब इनके साथ ही रहोगे। एक साथ रहने से मुश्किलें खतम हो जाती हैं।

मोम- सही कहा वीर। एकता को कोई नहीं तोड़ सकता।

फिर सब मिलकर वहां से पहली बस्ती में आ जाते हैं। बस्ती को बड़े अच्छे से सजाया गया था। सब सजावट को देखकर खुश होते हैं।

राजा- महाराज हमने आप सब के लिए दावत रखी है। मना मत कीजिएगा।

वीर- जैसे आपकी इक्षा।

फिर सब मिलकर दावत का मजा लेते हैं। उसके बाद वीर अपनी टीम के साथ शाही सवारी में बैठकर निकल

जाते हैं।

वीर- जस्सी तुम्हें एक बार वैम्पायर लोक जाकर अपनी सीट संभालनी होगी। तुम्हारे बिना वैम्पापर लोक तबाह हो जाएगा।

जस्सी- ठीक है भाई, मैं जरूर जाऊँगा।

वीर- मोहित, तुम्हें भी जाना होगा। दोनों एक साथ निकलो।

मोहित- "ठीक है भाई, हम अभी निलकते हैं.." और इतना बोलकर दोनों गायब हो जाते हैं।

बिस्वा- भाई जिन्न-लोक चलें या धरती पर?

वीर- जिन-लोक चलो गुरुजी से मिल लेते हैं।

थोड़ी देर में सब जिन्न-लोक पहुँच जाते हैं। सभी महल पहुँच चुके थे। वहां गुरुजी आते हैं।

सब एक साथ- प्रणाम गुरुजी

गुरुजी- जीते रहो बच्चो। तो बच्चा पहला सफर पार कर ही लिया तुम सबनें। एक बात बता दो अब आगे के सफर और भी कठिन होने वाले हैं, इतने की तुम सोच भी नहीं सकते। चलो अब आप सब आराम करो।

वीर- गुरुजी हम घर जाकर ही आराम करेंगे। मंत्रीजी यहां का कोई काम?

मंत्री- नहीं महाराज, सब ठीक है।

वीर- ठीक है। चलो बिस्वा सवारी बुला लाओ।

फिर सभी वहां से घर आ जाते हैं। वहां घर के सभी मेंबर इन्हें देखकर बहुत खुश होते हैं।

रिया- क्या भैया आप तो मुझे भूल ही गये।

 
वीर रिया को गोद में उठाकर. "अरे मेरा बच्चा, ऐसा हो सकता है की मैं तुझे भूल जाऊँ। यह लो तुम्हारे लिए चाकलेट लाया हूँ मैं.."

रिया चाकलेट देखकर बहुत खुश होती है और वीर को किस करके भाग जाती है।

डैड ; कैसा रहा सफर बेटा? जिस काम के लिए गये थे वो हो गया क्या?

वीर- जी डैड, जिस काम के लिए गया था वो हो गया है।

फिर सब ऐसे ही बात चीत करते रहते हैं। रात हो गई थी। वीर बारी-बारी सब लड़कियों से मिलता है। विशु तो वीर को छोड़ने का नाम ही नहीं ले रही थी।

उधर अलीजा रूम में बैठी वीर के बारे में ही सोच रही थी। अलीजा मन में- "क्या हो तुम... क्या कशिश है आप में। एक पत्न भी आपसे दूर नहीं हवा जाता। अब और इंतजार नहीं होता मुझसे। मैं आपके बिना नहीं रह सकती,

और मत तड़पाइये मुझे.."

थोड़ी देर में सब डाइनिंग टेबल पर मिलते हैं। इनकी लाइफ पी तरह से जादुई हो गई थी। सब काम जादू से हो रहे थे। सब हँसी खुशी डिनर करते हैं।

डैड ; तो बेटा अब कब जाओगे आगे के सफर में?

वीर- डैड अब संजू से शादी के बाद ही जाऊँगा। कल ही शादी होगी।

वीर की बात सुन सब बहुत खुश होते हैं। फिर वीर बिस्वा आशीष को सब काम समझा देता है। और उधर अवनी को भी बोल देता है नामी गिरामी लोगों की लिस्ट बनाने के लिए। फिर सभी सो जाते हैं। थके हए थे तो जल्दी नींद आ जाती है।

अगले दिन सवेरे वीर जल्दी उठ जाता है और अपने रोजमर्रा के काम फिनिश करता है। आज उसकी संजू से शादी भी।

बिस्वा और आशीष मिलकर बहुत बड़ा मैरेज पैलेस तैयार करते हैं। पैलेंस बहुत ही शानदार था। पैलेस के एड़ दरवाजे में दो शेर बनें हए थे। थोड़ा अंदर जाने पे दो फौवारे थे, और उनके बीच से जाने के लिए एक रेड कापंट बिछा हआ था। चलो थोड़ा और अंदर चलें।

अंदर एक तरफ मंडप लगा हुआ था। बिल्डिंग के बीच में कुछ टेबल और कुर्सियां लगी हुई थी, और एक तरफ खाने पीने का प्रबंध था।

 
बिस्वा और आशीष मिलकर बहुत बड़ा मैरेज पैलेस तैयार करते हैं। पैलेंस बहुत ही शानदार था। पैलेस के एड़ दरवाजे में दो शेर बनें हए थे। थोड़ा अंदर जाने पे दो फौवारे थे, और उनके बीच से जाने के लिए एक रेड कापंट बिछा हआ था। चलो थोड़ा और अंदर चलें।

अंदर एक तरफ मंडप लगा हुआ था। बिल्डिंग के बीच में कुछ टेबल और कुर्सियां लगी हुई थी, और एक तरफ खाने पीने का प्रबंध था।

वीर संजू और बाकी का परिवार भी पहुँच गया था पैलेस में। धीरे-धीरे मेहमान भी आने शुरु हो गये थे। वीर के दादाजी, डैड और चाचाजी सभी का स्वागत कर रहे थे। फिर कुछ देर में सभी मंडप के पास पहुँच गये। यही वीर पहले से ही विराजमान था।

फिर पंडित ने दहन को बुलाया। और सारे रीति रिवाजों से उनकी शादी सम्पन हई। फिर चला खाने पीने का दौर। वीर और संज ने एक प्लेट में खाना खाया।

पैलेस में एक स्टेज भी लगाया गया था। यहाँ पे मेहमान के मनोरंजन के लिए गाने बजाने वाले और डान्सर्स भी थी। फिर कुछ देर में सभी डान्सर्स को हटा दिया गया, और शुरू हुआ कपल्म डान्स। जिसमें सबसे पहले वीर और संजू ने डान्म किया। उनके बाद सभी ने कपल डान्स किया।

और आखीर में भूत भंगड़ा किया सभी ने पूरी पागलपंथी वाला। इस सबके बाद। वीर और संजू को उसमें ही एक स्टेज पर एक सोफा पड़ा था वहीं बैठा दिया। हर एक गैस्ट आकर उनको गिफ्ट दे जाता और एक पिक्चर क्लिक करवा के चला जाता। उसी तरह धूम धाम से शादी सम्पन हुई।

दोनों सभी बड़े लोगों का आशीर्वाद लेते हैं। वीर के कालेज से भी कुछ स्टूडेंट और टीचर आए थे। बाकी शहर के सभी बड़े लोग। सब वीर और संजू की गिफ्ट देते और बधाई करते जा रहे थे। वहां से फ्री होकर सब घर को निकल जाते हैं। घर के मुख्य दरवाजे पर विश, नैना, प्रिया, रिया, परी, नेहा सब दरवाजा रोके खड़ी हो जाती हैं।

परी- ऐसे आगे नहीं जाने देंगे पहले जब हल्की करो हाँ।

वीर मस्ती में- "ऐसे कैसे जेब हल्की करो? चलो साइड हो कुछ नहीं मिलेगा किसी को समझे। हटो साइड..."

वीर यह बात थोड़ी रुखाई से बोला था, जिसे सुनकर सभी लड़कियों का चेहरा मुझा जाता है। सभी पीछे हटने ही वाली थी की तभी ……………

वीर- "अपने भाई को अब तक समझ नहीं पाईं.." और वीर अपनी बाहें फैलाकर खड़ा जाता है।

जैसे ही सब लड़कियां पीछे मुड़कर वीर की तरफ देखती हैं तो वीर को बाहें फैलाये खड़ा पाती हैं और खुशी से भागती हुई वीर को हग कर लेती हैं।

वीर- "यह लो...' कहकर वीर सभी लड़कियों को गोल्डेन काई देता है, और कहता है- "कुछ भी चाहिए हो जितना भी खर्च करना हो इससे करना समझी... और हाँ मेरी नानी रिया, आप बड़ी हो जाओ फिर आपको भी मिलेगा। तब तक आपको यह चाकलेट और ये डायमंड नेकलेस."

सब बहुत खुश थे।

 
परी- भाई मैं यह कार्ड नहीं ले सकती। पहले ही आपने बहुत कुछ दिया है।

वीर- मार खाएगी। नहीं ले सकता? क्या तू मुझे अपना भाई नहीं समझती क्या? चुपचाप रख तुझे तेरे भाई की कसम

परी भागकर वीर के गले लग जाती है, और कहती है- "मेरा कोई भाई नहीं था इसलिए भाई की अहमियत समझ नहीं पाईं। अब आप मिल गये हो और कुछ नहीं चाहिए."

परी की बात सुनकर सबकी आँखों में आँसू आ जाते हैं।

मोम- "चुप कर मेरी बच्ची..." और मोम आकर परी को गले लगा लेती हैं। ऐसे ही सब अंदर आ जाते हैं।

उधर संजू प्रीत के कान में कुछ कहती है। जिसे सुनकर प्रीत के चेहरा पे शरारती स्माइल आ जाती है। घर के अंदर आकर वीर की मोम असली रूप में आकर सब रीति रिवाज करती हैं। फिर सभी अपने-अपने रूम में चले जाते हैं।

वीर- अपने रूम की तरफ जाता है। यहां जस्सी मोहित बिस्वा आशीष पहले से रास्ता रोके खड़े थे।

बिस्वा- भाई ऐसे अंदर नहीं जाने देंगे। लगान देना होगा।

वीर- "तुम सबके पास तो सब कुछ है क्या दूं? हाँ एक काम कर सकता हूँ..." कहकर वीर अपनी आँखें बंद करता है की तभी वीर के हाथ से रोशनी निकलकर उन चारों के अंदर चली जाती है।

वीर- दोस्तों, मैंने तुम चारों को अपनी पावर का चौथा हिस्सा तुम चारों में बांट दिया है और कुछ तुम लोगों को क्या दूं सब कुछ तो है ही तुम्हारे पास।

जस्सी- "यार इसकी क्या जरूरत थी? हम तो मजाक कर रहे थे। भाई तूने हमें अपनी जिंदगी में शामिल कर लिया और क्या चाहिए?"

बिस्वा- और नहीं तो क्या? आपकी वजह से मुझे मेरी परी मिली है, और क्या चाहिए?

वीर- अब जाने का क्या लोगे? जाओ भी अब।

सब हँसते हए 'आल दि बैट' बोलकर चले जाते हैं।

वीर गम में एंटर करता है, और सामने देखकर चकित हो जाता है।

***## ####*

 
सामने बैड पे एक नहीं बल्की तीन लड़कियां घूघट ऑटे बैठी थी। वीर बैड के पास जाकर पहली लड़की का घूघट उठाता है जिसे देख कर वीर के चेहरे पे शरारती स्माइल आ जाती है। बाकी के दो चहरे देखने के बाद वीर कहता है- "क्या बात है, लगता है आज मेरी वाट लगने वाली हैं."

मोम- "मैंने तो बोला था पर यह माने तब ना.." उनका इशारा संजू की तरफ था।

संजू- "आपको कैसे पीछे रहने दे सकती हैं। मैं अपनी सुहागरात स्पेशल बनाना चाहती हैं.."

फिर वीर तीनों देवियों को डायमंड के बसलेंट देता है, और कहता है- "यह काई आम ब्रेसलेट नहीं हैं। इनमें भी पावर्स हैं और कभी भी तुम तीनों बूटी नहीं होगी। यह अगर एक बार पहन लिया तो दोबारा उतरंगा नहीं।

तीनों वो ब्रेसलेट पहन लेती है। ब्रेसलेट पहनते है तीनों की बाडी चमकने लगती हैं। चेहरा पे एक अलग सा नर आ गया था। तीनों और भी सुंदर लगने लगती है।

वीर सबसे पहले संजू के पास जाता है और उसे किस करने लगता है। संजू की धड़कन बहुत तेज चल रही थी।

और उसकी बाडी हल्की कॉप भी रही थी। उधर प्रीत और मोम दोनों आपस में किस करने लगती हैं।

वीर संजू को बेड पे लेटा देता है। जादू से कपड़े गायब कर के पहले पी बाडी को देखता है। जिससे संजू और शर्मा जाती है। ऊपर वाले ने बड़े अच्छे से हर एक अंग को बड़ी सरलता से बनाया था। छोटी सी चूत एकदम क्लीन शेव, दूध से भी सफेद। वीर संज की पूरी बाड़ी में किस की बौछार कर देता है। संजू की बाडी हल्की-हल्की कॉप रही थी जो और भी सुंदर लग रही थी।

वीर नीचे सरक के संजू के दूध को पकड़कर चूसने लगता है। वीर के ऐसा करने में संजू की बाडी झटका लेती है। वीर बड़े प्यार से संजू के दूध चूसे जा रहा था। थोड़ी देर दूध चूसने के बाद वीर नीचे की तरफ बढ़ता है, और हल्की सी चूत पे किस कर के उस पर टूट पड़ता है। संजू की बाड़ी में हाई वोल्टेज विजली दौड़ने लगती है। वीर अपनी जीभ को ऊपर-नीचे करने लगता है। जिससे से संजू के मुँह से हल्की-हल्की सिसकियां शुरू हो जाती हैं।

उधर माम और प्रीत दोनों लगे हुए थे। प्रीत मोम को लेटाकर माम की चूत चूसे जा रही थी। प्रीत का एक हाथ मोम की चूचियों पे था और साथ ही प्रीत मोम की चूत में उंगली कर रही थी।

संज- आह्ह... जान क्या कर दिया आपने में पागल हो जाऊँगी... ऐसे ही चूसते रहो आह्ह... में आने वाली है..."

वीर अपनी जीभ और तेज चलाने लगता है। थोड़ी देर में संजू झड़ जाती है। दो मिनट लेटे रहने के बाद संजू बैंड पे बैठ जाती है और वीर के लण्ड को पकड़कर ऊपर से नीचे तक जीभ से चाटती है। संजू का पहली बार था। अच्छी तरह चाटने के बाद संजू लण्ड को मुँह में लेकर चूसने लगती है। वीर का लण्ड बड़ी मुश्किल से संजू के मुँह में जा रहा था। संजू गपागप लण्ड चूसने लग जाती है। संजू का पहला अनुभव था, फिर भी बहुत अच्छा कर रही थी।

वीर आँख बंद किए चुसाई का मजा लिए जा रहा था। थोड़ी देर चुसाई के बाद वीर मंजू को बेड पे लेटा देता है, और कहता है- "जान ददं हागा, बदाश्त कर लेना...

संजू. में कितना भी चीखू तुम रूकना मत। प्लीज... तुम्हें मेरी कसम

वीर की माम संज के पास आ जाती हैं, और कहती हैं- "बेटा आराम से मेरी फूल जैसी बच्ची को दर्द कम देना.."

और वीर की मोम वीर के लण्ड को चूसकर अच्छी तरह से गीला कर देती हैं, और प्रीत संजू की चूत को चूसकर गीला कर देती है।

वीर चूत पे लण्ड रखकर एक जोरदार धक्का मारता है, तो आधा लण्ड सील तोड़ता हवा अंदर घुस जाता है।

संजू लण्ड चूत में अंदर घुसते ही चीख पड़ती है- "आअह्ह... मर गई माँ ओह्ह.."

 
मोम संजू के होंठों पे किस करने लगती हैं. और प्रीत संजू का दूध चूसने लगती है। वीर देर ना करते हुये एक और धक्का मारता है, जिससे सारा लण्ड अंदर चला जाता है। संजू तो बेहोश होने वाली हो गई थी। वीर से संजू का दर्द देखा नहीं जा रहा था इसलिए वीर अपने हाथ से एक रोशनी निकालकर संजू के अंदर छोड़ देता है जिससे संजू का सारा दर्द गायब हो जाता है।

वीर की मोम वीर को पीछे से हग करके वीर की पीठ पे किस करने लगती है, और वीर तेजी से संज को चोदने लगता है।

संजू- "आहह... ही चोदो मुझे ओहह... बहुत मजा आ रहा है। हाँ हाँ और तेज.."

वीर अपनी पूरी स्पीड से चोदे जा रहा था। पूरे कमरे में एक अलग ही आवाज गूंज रही थी। थोड़ी ही देर में संज टिक नहीं पाती और झड़ जाती है। और मजे से साइड होकर बेड पे अपने ऑर्गेज्म को महसूस करने लगती है।

वीर मोम को घोड़ी बना लेता है, और पीछे आकर लण्ड को चूत पे रखता है। प्रीत वीर के लण्ड को चूत पे सेट करती है। वीर एक धक्कं से सारा लण्ड चूत के अंदर कर देता है, और ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर देता है। बार साथ-साथ प्रीत को किस भी किए जा रहा था, और लगातार धक्के मार रहा था।

रूम में फक-फक की आवाज गूंजने लगती है।

मोम- "आअहह... बेटू क्या मजा है तेरे में... जब से जवान हुई हैं ऐसा लग रहा है काश त शुरू से ही मेरे साथ होता... और तेज बैट फाड़ दें आज मेरी... आअहह... और तेज.."

वीर- "सारी जिंदगी ऐसे ही चोदूंगा मोम, ऐसे है मजा देता रहूंगा." फिर वीर मोम को साइड पोजीशन में लेटाकर चूत चोदने लगता है।

मोम की ताबड़तोड़ चुदाई के बाद प्रीत का नम्बर आता है। उससे पहले तीनों मिलकर वीर को नीचे लेटा देती हैं,

और संजू वीर के मुँह में बैठ जाती है, और प्रीत वीर के लण्ड को मुँह में ले लेती है और चूसने लगती है।

संज- "कसम से आज मजा आ गया। मैं बहुत खुश हैं और बैंक यूटु आल."

मोम- हाँ आज बहुत मजा आया।

प्रीत बड़े मजे से लण्ड चूसे जा रही थी। थोड़ी देर चुसाई के बाद प्रीत बेड पर लेट जाती है, और साथ में मोम भी। दोनों किस करने लगती हैं। वीर प्रीत की चूत पे लण्ड रखकर धक्का मारता है। वीर प्रीत को चोदने लगता है। सारी रात इनका यहीं खेल चलता है। कोई भी थक नहीं रहा था। बस मजे में एक दूसरे को चोदने में लगे हुए थे।

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