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जैसे-जैसे नीलम अंदर आ रही थी वैसे-वैसे उसकी आँखें बड़ी होती जा रही थी। मुख्य दरवाजे के पास पहुँचकर दोनों गाड़ी से उत्तरती हैं। और एक गाई आकर गाड़ी की चाभी लेता है। दोनों बंगले के अंदर एंटर करती हैं। वीर में पहले ही सबको समझा दिया था की नीलम और निशु आ रही है। इसलिए वीर की मोम और चाची पहले वाले रूप में आ जाती हैं।
मोहित आगे बढ़कर दोनों को रिसिव करता है।
वीर- आओ नीलम, कैसं आना हुआ?
नीलम- वीर बो... हाँ हम यहां स्पोर्टस की लिस्ट देने आए थे।
वीर- "आओ.." और मोम की तरफ इशारा करके- "यह हैं मेरी मोम..."
नीलम मोम को देखकर चकित थी की अभी भी इतनी जबान कैसे? नीलम- "नमस्ते आंटीजी..." कहती हैं।
निशु भी नमस्ते करती है।
मोम- नमस्ते बेटा। आओ बैठो। निशु कैसे हो बेटा?
निशु- मैं ठीक हैं आंटीजी। आप कैसी हैं?
माम- बहुत बढ़िया बेटा। संजू बेटा वेटरों को बालो ड्रिंक्स लाए।
सभी ड्राइंगररूम में बैठ जाते हैं। नीलम तो घर को ही देखें जा रही थी।
मोम- क्या हुआ बेटा, क्या देख रही हो?
नीलम. आटीजी आपका बंगला बहुत खूबसूरत है।
मोम- बेटा यह सब तो वीर की मेहनत का नतीजा है।
नीलम- आंटीजी क्या मोहित, जस्सी, बिस्वा, आशीष, यह भी आपके ही बेटे हैं?
माम- हाँ बेटा, यह भी मेरे ही बेटे हैं। यह समझ ला की यह पाँचो इस घर की नींव हैं। अगर यह हिले तो घर हिला।
माम का अपने प्रती प्यार देखकर वीर को छोड़कर बाकी चारा एमोशनल हो जाते हैं। तभी वहां वेटर आते हैं और ड्रिंक्स सर्व करते हैं।
नीलम- ओहह... हाँ यह लीजिए चीर जी आपकी लिस्ट, जो डैड ने भिजवाई है। आप सब इतनी जल्दी क्यों चलें आए?
वीर- वो जररी काम आ गया था। इसलिए मोहित और जस्मी तो दोनों लड़कियों को ही देखे जा रहे थे। यह बात मोम भी नोट कर लेती हैं। ऐसे ही कुछ देर बातें होती है। जब दोनों जाने लगती हैं तो मोम दोनों को डायमंड के कंगन पहना देती हैं। दोनों बहुत मजा करती हैं, पर मोम उन्हें पहना देती हैं। दोनों वहां से बहुत सारा प्यार लेकर निकल जाती हैं।
मोम मोहित और जस्सी के कान पकड़ लेती हैं।
मोहित- अरे मोम छोड़िये दर्द हो रहा है।
मोम- बयों कमीनों, लड़कियां पसंद भी कर ली और मुझे बताया तक नहीं।
जस्सी- सारी मोम गलती हो गईं। आगे से ऐसा नहीं करेंगे।
मोम- मुझे दोनों लड़कियां बहुत पसंद है।
यह सुनकर दोनों बहुत खुश होते हैं। ऐसे ही शाम रात हो जाती है।
उधर नरभक्षी हमले के लिए निकल चुके थे। उन्हें रात होने तक वहां पहुँच जाना था। नरभक्षियों की सेना काफी तादाद में थी। सब हल हल करते आ रहे थे।
इधर वीर, आशीष, मोहित, जस्सी, अलीजा, संज, मोम, बिस्वा, नैना, प्रीत सब जंगल की तरफ निकल पड़ते हैं।
वीर- बिस्वा घर की सुरक्षा बढ़ा दो।
जस्सी- भाई आप हमला नहीं करेंगे। जब तक हम संभाल सके, हम संभालेंगे।
माहित- ही भाई, आप आगे नहीं जाएंगे। पहले हम उनसे भिड़ेंगे।
वीर- ठीक है। ध्यान रखना।
उधर नरभक्षी पहुँच चुके थे। थोड़ी देर में वीर और पार्टी उन नरभक्षियों के सामनें खड़े थे।
मोहित- अगर अपनी जान प्यारी है तो यहां से चले जाओ। आखिरी मौका दे रहे हैं तुम्हें।
नरभक्षी- "हाहाहाहा... तुम बच्चे हमारा क्या बिगाड़ लोगे?"
मोहित- "हाहाहाहा... ओये घोच, तुझे हम बच्चे लगते हैं। चल जस्सी इसे दिखाते हैं की हम क्या चीज है?" इतना बोलकर मोहित गुस्से में आकर एक दहाड़ मारता है और भागकर एक जंप लेता है। जंप लेकर वो अपने असली रूप में आ जाता है। जिसे देखकर नरभक्षी का गला सूखने लगता है।
उधर जस्सी की आँखें ब्लैक हो जाती हैं, और वीर की दी हुई पावर्स से वो अपने दोनों हाथों में तलवार निकाल लेता है और विजली से भी तेज रफ्तार से नरभलियों पर हमला कर देता है। एक दो सेकंड के अंदर ही बहुत से नरभलियों की कटी हुई लाशें पड़ी थीं। यह इतनी जल्दी हवा की किसी को कुछ समझ में नहीं आया। जब तक उन्हें समझ में आता मोहित भी दहाड़ मारता है। दहाड़ इतनी जबरदस्त थी की बहुत से नरभक्षी उड़ते हुए दूर जा गिरते हैं।
जस्सी अपने काम में लगा हवा था। जो भी जस्सी के सामने आता गाजर मूली की तरह कट जाता। पर नरभलियों की तादाद बहुत थी। तभी वो सभी कुछ मंत्र पढ़ने लगते हैं, और एक लाल रंग की रोशनी का घेरा उन सब पर बन जाता है।
जस्सी अपनी स्पीड से उनकी तरफ बढ़ रहा था। जैसे ही वो वहां पहुँचा, उस रोशनी से टकराया तो वो एक्दम झटके से पीछे जा गिरा। सेम ऐसा ही मोहित के साथ हुआ। यह देखकर अलीजा आगे आती है।
अलीजा- "गाइस स्टे बैंका नाउ माई टर्न..' इतना बोलकर अलीजा अपनी आँखें बंद करके हवा में खड़ी हो जाती है। जब आँखें खोलती है तो उसकी आँखें एकदम सफेद हो चुकी थी। आसमान में बादल गरजने लगे थे। अलीजा हाथ ऊपर करती है, और फिर उसी हाथ को उन नर भक्षियों की तरफ कर देती है।
मोहित आगे बढ़कर दोनों को रिसिव करता है।
वीर- आओ नीलम, कैसं आना हुआ?
नीलम- वीर बो... हाँ हम यहां स्पोर्टस की लिस्ट देने आए थे।
वीर- "आओ.." और मोम की तरफ इशारा करके- "यह हैं मेरी मोम..."
नीलम मोम को देखकर चकित थी की अभी भी इतनी जबान कैसे? नीलम- "नमस्ते आंटीजी..." कहती हैं।
निशु भी नमस्ते करती है।
मोम- नमस्ते बेटा। आओ बैठो। निशु कैसे हो बेटा?
निशु- मैं ठीक हैं आंटीजी। आप कैसी हैं?
माम- बहुत बढ़िया बेटा। संजू बेटा वेटरों को बालो ड्रिंक्स लाए।
सभी ड्राइंगररूम में बैठ जाते हैं। नीलम तो घर को ही देखें जा रही थी।
मोम- क्या हुआ बेटा, क्या देख रही हो?
नीलम. आटीजी आपका बंगला बहुत खूबसूरत है।
मोम- बेटा यह सब तो वीर की मेहनत का नतीजा है।
नीलम- आंटीजी क्या मोहित, जस्सी, बिस्वा, आशीष, यह भी आपके ही बेटे हैं?
माम- हाँ बेटा, यह भी मेरे ही बेटे हैं। यह समझ ला की यह पाँचो इस घर की नींव हैं। अगर यह हिले तो घर हिला।
माम का अपने प्रती प्यार देखकर वीर को छोड़कर बाकी चारा एमोशनल हो जाते हैं। तभी वहां वेटर आते हैं और ड्रिंक्स सर्व करते हैं।
नीलम- ओहह... हाँ यह लीजिए चीर जी आपकी लिस्ट, जो डैड ने भिजवाई है। आप सब इतनी जल्दी क्यों चलें आए?
वीर- वो जररी काम आ गया था। इसलिए मोहित और जस्मी तो दोनों लड़कियों को ही देखे जा रहे थे। यह बात मोम भी नोट कर लेती हैं। ऐसे ही कुछ देर बातें होती है। जब दोनों जाने लगती हैं तो मोम दोनों को डायमंड के कंगन पहना देती हैं। दोनों बहुत मजा करती हैं, पर मोम उन्हें पहना देती हैं। दोनों वहां से बहुत सारा प्यार लेकर निकल जाती हैं।
मोम मोहित और जस्सी के कान पकड़ लेती हैं।
मोहित- अरे मोम छोड़िये दर्द हो रहा है।
मोम- बयों कमीनों, लड़कियां पसंद भी कर ली और मुझे बताया तक नहीं।
जस्सी- सारी मोम गलती हो गईं। आगे से ऐसा नहीं करेंगे।
मोम- मुझे दोनों लड़कियां बहुत पसंद है।
यह सुनकर दोनों बहुत खुश होते हैं। ऐसे ही शाम रात हो जाती है।
उधर नरभक्षी हमले के लिए निकल चुके थे। उन्हें रात होने तक वहां पहुँच जाना था। नरभक्षियों की सेना काफी तादाद में थी। सब हल हल करते आ रहे थे।
इधर वीर, आशीष, मोहित, जस्सी, अलीजा, संज, मोम, बिस्वा, नैना, प्रीत सब जंगल की तरफ निकल पड़ते हैं।
वीर- बिस्वा घर की सुरक्षा बढ़ा दो।
जस्सी- भाई आप हमला नहीं करेंगे। जब तक हम संभाल सके, हम संभालेंगे।
माहित- ही भाई, आप आगे नहीं जाएंगे। पहले हम उनसे भिड़ेंगे।
वीर- ठीक है। ध्यान रखना।
उधर नरभक्षी पहुँच चुके थे। थोड़ी देर में वीर और पार्टी उन नरभक्षियों के सामनें खड़े थे।
मोहित- अगर अपनी जान प्यारी है तो यहां से चले जाओ। आखिरी मौका दे रहे हैं तुम्हें।
नरभक्षी- "हाहाहाहा... तुम बच्चे हमारा क्या बिगाड़ लोगे?"
मोहित- "हाहाहाहा... ओये घोच, तुझे हम बच्चे लगते हैं। चल जस्सी इसे दिखाते हैं की हम क्या चीज है?" इतना बोलकर मोहित गुस्से में आकर एक दहाड़ मारता है और भागकर एक जंप लेता है। जंप लेकर वो अपने असली रूप में आ जाता है। जिसे देखकर नरभक्षी का गला सूखने लगता है।
उधर जस्सी की आँखें ब्लैक हो जाती हैं, और वीर की दी हुई पावर्स से वो अपने दोनों हाथों में तलवार निकाल लेता है और विजली से भी तेज रफ्तार से नरभलियों पर हमला कर देता है। एक दो सेकंड के अंदर ही बहुत से नरभलियों की कटी हुई लाशें पड़ी थीं। यह इतनी जल्दी हवा की किसी को कुछ समझ में नहीं आया। जब तक उन्हें समझ में आता मोहित भी दहाड़ मारता है। दहाड़ इतनी जबरदस्त थी की बहुत से नरभक्षी उड़ते हुए दूर जा गिरते हैं।
जस्सी अपने काम में लगा हवा था। जो भी जस्सी के सामने आता गाजर मूली की तरह कट जाता। पर नरभलियों की तादाद बहुत थी। तभी वो सभी कुछ मंत्र पढ़ने लगते हैं, और एक लाल रंग की रोशनी का घेरा उन सब पर बन जाता है।
जस्सी अपनी स्पीड से उनकी तरफ बढ़ रहा था। जैसे ही वो वहां पहुँचा, उस रोशनी से टकराया तो वो एक्दम झटके से पीछे जा गिरा। सेम ऐसा ही मोहित के साथ हुआ। यह देखकर अलीजा आगे आती है।
अलीजा- "गाइस स्टे बैंका नाउ माई टर्न..' इतना बोलकर अलीजा अपनी आँखें बंद करके हवा में खड़ी हो जाती है। जब आँखें खोलती है तो उसकी आँखें एकदम सफेद हो चुकी थी। आसमान में बादल गरजने लगे थे। अलीजा हाथ ऊपर करती है, और फिर उसी हाथ को उन नर भक्षियों की तरफ कर देती है।