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Fantasy अनदेखे जीवन का सफ़र

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जैसे-जैसे नीलम अंदर आ रही थी वैसे-वैसे उसकी आँखें बड़ी होती जा रही थी। मुख्य दरवाजे के पास पहुँचकर दोनों गाड़ी से उत्तरती हैं। और एक गाई आकर गाड़ी की चाभी लेता है। दोनों बंगले के अंदर एंटर करती हैं। वीर में पहले ही सबको समझा दिया था की नीलम और निशु आ रही है। इसलिए वीर की मोम और चाची पहले वाले रूप में आ जाती हैं।

मोहित आगे बढ़कर दोनों को रिसिव करता है।

वीर- आओ नीलम, कैसं आना हुआ?

नीलम- वीर बो... हाँ हम यहां स्पोर्टस की लिस्ट देने आए थे।

वीर- "आओ.." और मोम की तरफ इशारा करके- "यह हैं मेरी मोम..."

नीलम मोम को देखकर चकित थी की अभी भी इतनी जबान कैसे? नीलम- "नमस्ते आंटीजी..." कहती हैं।

निशु भी नमस्ते करती है।

मोम- नमस्ते बेटा। आओ बैठो। निशु कैसे हो बेटा?

निशु- मैं ठीक हैं आंटीजी। आप कैसी हैं?

माम- बहुत बढ़िया बेटा। संजू बेटा वेटरों को बालो ड्रिंक्स लाए।

सभी ड्राइंगररूम में बैठ जाते हैं। नीलम तो घर को ही देखें जा रही थी।

मोम- क्या हुआ बेटा, क्या देख रही हो?

नीलम. आटीजी आपका बंगला बहुत खूबसूरत है।

मोम- बेटा यह सब तो वीर की मेहनत का नतीजा है।

नीलम- आंटीजी क्या मोहित, जस्सी, बिस्वा, आशीष, यह भी आपके ही बेटे हैं?

माम- हाँ बेटा, यह भी मेरे ही बेटे हैं। यह समझ ला की यह पाँचो इस घर की नींव हैं। अगर यह हिले तो घर हिला।

माम का अपने प्रती प्यार देखकर वीर को छोड़कर बाकी चारा एमोशनल हो जाते हैं। तभी वहां वेटर आते हैं और ड्रिंक्स सर्व करते हैं।

नीलम- ओहह... हाँ यह लीजिए चीर जी आपकी लिस्ट, जो डैड ने भिजवाई है। आप सब इतनी जल्दी क्यों चलें आए?

वीर- वो जररी काम आ गया था। इसलिए मोहित और जस्मी तो दोनों लड़कियों को ही देखे जा रहे थे। यह बात मोम भी नोट कर लेती हैं। ऐसे ही कुछ देर बातें होती है। जब दोनों जाने लगती हैं तो मोम दोनों को डायमंड के कंगन पहना देती हैं। दोनों बहुत मजा करती हैं, पर मोम उन्हें पहना देती हैं। दोनों वहां से बहुत सारा प्यार लेकर निकल जाती हैं।

मोम मोहित और जस्सी के कान पकड़ लेती हैं।

मोहित- अरे मोम छोड़िये दर्द हो रहा है।

मोम- बयों कमीनों, लड़कियां पसंद भी कर ली और मुझे बताया तक नहीं।

जस्सी- सारी मोम गलती हो गईं। आगे से ऐसा नहीं करेंगे।

मोम- मुझे दोनों लड़कियां बहुत पसंद है।

यह सुनकर दोनों बहुत खुश होते हैं। ऐसे ही शाम रात हो जाती है।

उधर नरभक्षी हमले के लिए निकल चुके थे। उन्हें रात होने तक वहां पहुँच जाना था। नरभक्षियों की सेना काफी तादाद में थी। सब हल हल करते आ रहे थे।

इधर वीर, आशीष, मोहित, जस्सी, अलीजा, संज, मोम, बिस्वा, नैना, प्रीत सब जंगल की तरफ निकल पड़ते हैं।

वीर- बिस्वा घर की सुरक्षा बढ़ा दो।

जस्सी- भाई आप हमला नहीं करेंगे। जब तक हम संभाल सके, हम संभालेंगे।

माहित- ही भाई, आप आगे नहीं जाएंगे। पहले हम उनसे भिड़ेंगे।

वीर- ठीक है। ध्यान रखना।

उधर नरभक्षी पहुँच चुके थे। थोड़ी देर में वीर और पार्टी उन नरभक्षियों के सामनें खड़े थे।

मोहित- अगर अपनी जान प्यारी है तो यहां से चले जाओ। आखिरी मौका दे रहे हैं तुम्हें।

नरभक्षी- "हाहाहाहा... तुम बच्चे हमारा क्या बिगाड़ लोगे?"

मोहित- "हाहाहाहा... ओये घोच, तुझे हम बच्चे लगते हैं। चल जस्सी इसे दिखाते हैं की हम क्या चीज है?" इतना बोलकर मोहित गुस्से में आकर एक दहाड़ मारता है और भागकर एक जंप लेता है। जंप लेकर वो अपने असली रूप में आ जाता है। जिसे देखकर नरभक्षी का गला सूखने लगता है।

उधर जस्सी की आँखें ब्लैक हो जाती हैं, और वीर की दी हुई पावर्स से वो अपने दोनों हाथों में तलवार निकाल लेता है और विजली से भी तेज रफ्तार से नरभलियों पर हमला कर देता है। एक दो सेकंड के अंदर ही बहुत से नरभलियों की कटी हुई लाशें पड़ी थीं। यह इतनी जल्दी हवा की किसी को कुछ समझ में नहीं आया। जब तक उन्हें समझ में आता मोहित भी दहाड़ मारता है। दहाड़ इतनी जबरदस्त थी की बहुत से नरभक्षी उड़ते हुए दूर जा गिरते हैं।

जस्सी अपने काम में लगा हवा था। जो भी जस्सी के सामने आता गाजर मूली की तरह कट जाता। पर नरभलियों की तादाद बहुत थी। तभी वो सभी कुछ मंत्र पढ़ने लगते हैं, और एक लाल रंग की रोशनी का घेरा उन सब पर बन जाता है।

जस्सी अपनी स्पीड से उनकी तरफ बढ़ रहा था। जैसे ही वो वहां पहुँचा, उस रोशनी से टकराया तो वो एक्दम झटके से पीछे जा गिरा। सेम ऐसा ही मोहित के साथ हुआ। यह देखकर अलीजा आगे आती है।

अलीजा- "गाइस स्टे बैंका नाउ माई टर्न..' इतना बोलकर अलीजा अपनी आँखें बंद करके हवा में खड़ी हो जाती है। जब आँखें खोलती है तो उसकी आँखें एकदम सफेद हो चुकी थी। आसमान में बादल गरजने लगे थे। अलीजा हाथ ऊपर करती है, और फिर उसी हाथ को उन नर भक्षियों की तरफ कर देती है।
 
तभी एक के बाद एक खतरनाक बिजली उन जरभक्षियों के ऊपर गिरने लगती हैं। उस बिजली की आवाज इतनी थी की सब इधर खड़े अपने कान पर हाथ रख देते हैं। बिजली के लगते ही उन नर भक्षियों की शील्ड टूट जाती है। शील्ड टूटती देखकर अलीजा तेजी से फिर से वही बिजलियां दोबारा उनपर फेंकने लगती है। जिससे नरभक्षी के चीथड़े उड़ने लगते हैं।

माहित और जस्सी भी उन सब पर टूट पड़ते हैं।

बिस्वा और आशीष वीर की तरफ देखते हैं, जैसे कह रहे हों की हमें जाने की इजाजत दें। वीर ही में सिर हिला देता है। अनुमति मिलते ही दोनों भी उन दरिंदों पर टूट पड़ते हैं।

नरभक्षियों को समझ में नहीं आ रहा था की क्या करें? उनकी आँखों के सामने मौत का नंगा नाच चल रहा था। एक के बाद एक उनके साथी मारे जा रहे थे। पर उनकी तादाद बहुत थी। तभी वो सब एक साथ हमला कर देते हैं। वो सब इनपर भारी पड़ने लगे थे।

यह देखकर मोम, प्रीत, और संजू भी कूद पड़े मैदान में। उधर जस्सी दोनों हाथों में तलवार लिए सबको काटता जा रहा था। बिस्वा अपने जिन्न रूप में आ चुका था, और जादू से एक बहुत बड़ा बवंडर तैयार करके जर भक्षियों पर छोड़ देता है, और आशीष उस बवंडर में आग लगा देता है। जर भक्षी बवंडर की चपेट में आते ही जलने लगते है

तभी उन नरभक्षियों का लीडर माइंड टु माइंड अपने साथियों को कुछ कहता है, तो सभी नरभक्षी रूक जाते हैं।

और सभी अपनी आँखें बंद करके कुछ बोलते हैं की तभी उनकी बाड़ी में से रोशनी निकलने लगी। रोशनी बहुत बढ़ गई और कुछ देखाई नहीं दे रहा था। जब रोशनी हटी तो वहां एक बहुत बड़ा नरभक्षी खड़ा था। उसकी बाड़ी गैंडे जैसी थी। भारी शरीर, उसके आगे सींगों पर आग लगी हुई थी। तभी वो इनकी तरफ भागने लगता है। जैसे जैसे वो भाग रहा था वैसे वैसे धरती कॉप रही थी।

जस्सी और मोहित उसके आगे जाकर उसे रोकने की कोशिश करने लगे। पर वो गैंडा दोनों को उठाकर दूर फेंक देता है। फिर उसके आगे अलीजा आती है और उसका भी वही हाल होता है।

तभी उसका रुख वीर की मोम की तरफ हो जाता है। और वो जैसे ही वीर की मोम को हिट करने वाला था की ऐन मौके पे वीर आगे आ जाता है और वीर उस गैंडे की सींगें पकड़ लेता है। और उसे एक हाथ से सींगों से पकड़कर उठाकर दूर फेंक देता है। यह देखकर सब हैरान हो जाते हैं। वीर के सभी दोस्त और परिवार वाले समझ जाते हैं की वीर के पास पावसं बढ़ गई है।

वीर की गुस्से से आँखें उल्लू हो जाती हैं, और मौसम बदलने लगता है। हवा तेज जो जाती है, साथ में बादल गरजने लगते हैं। वीर आगे बढ़कर उस गैंडे की सींगें उसके सिर से अलग कर देता है। जिसमें सारे नरभक्षी अलग हो जाते हैं। वौर वहीं नहीं रुकता। उन सब पर एक के बाद एक सब पे एनर्जी बीम से हमला कर देता है।

एनर्जी बीम लगते ही नरभक्षी की आधे से ज्यादा सना खतम हो जाती हैं। बाकी बची सेना वीर के बाकी साथी खतम कर देते हैं।

वीर बिस्वा और आशीष से- "यहां का सारा कचरा साफ कर दो। किसी को यहां कुछ दिखना नहीं चाहिए। ऐसा लगे की यहां कुछ हुआ ही नहीं...'

वीर- आप सब ठीक है ना.. किसी को चोट तो नहीं आई ना?

सब- नहीं हम सब ठीक है।

फिर सभी वहां से घर आ जाते हैं। पीछे बिस्वा और आशीष पूरे जंगल को पहले जैसा कर देते हैं।

उधर नरभक्षी अपनी हार से बुरी तरह बौखला गया था। बास कहता है- "ऐसी क्या पावर्स है उसमें की उसने मेरी हजारों की सेना को चुटकियों में खतम कर दिया?"

वहीं दूर एक प्लेनेट में हर तरफ आग ही आग लगी हुई थी। हर तरफ कोहराम मचा हवा था। वहीं एक रूम में तीन लोग खड़े थे। जिसमें एक लड़की, एक औरत और एक आदमी था।

आदमी- बेटा अगर यह शक्ति इन दुष्टों के हाथ लग गई तो सारी दुनियां तबाह हो जाएगी। बेटी एक काम करो, तुम इस शक्ति को लेकर यहां से भाग जाओ।

लड़की- लेकिन पिताजी, मैं कहां जाऊँगी इसे लेकर? यह शक्ति मेरे अंदर ज्यादा देर टिक नहीं पाएगी। मैं इसे संभाल नहीं पा रही हूँ।

तभी उस लड़की के डैड अपनी आँखें बंद करते हैं, जैसे कुछ तलाश रहे हों। थोड़ी देर में उनके चेहरा पे स्माइल आ जाती है- "बेटी एक काम करो, तुम धरती पर चली जाओ। वहां तुम्हें वीर नाम का एक लड़का मिलेगा। मैं तुम्हें उसकी पूरी डीटेल्स तुम्हारे दिमाग में ट्रान्स्फर कर देता हूँ। ये शक्ति उसे दे देना.."

औरत- ही बेटी तुम जाओ, नहीं तो यह दुष्ट किसी को नहीं छोड़ेंगे।

लड़की- पर आप लोगों को ऐसे कैसे छोड़कर जा सकती हैं।

आदमी- "बेटा तुझे जाना होगा। यह लोग हमें मारेंगे नहीं, बस बंदी बनाएंगे। जब तुम अपने काम में सफल हो गई तब उस फरिश्ते को साथ लेकर यहां आ जाना और इस दुनियां को उन दुष्टों से आजाद करवा लेना... फिर तीनों एक दूसरे के गले लगते हैं, और वो आदमी लड़की को वीर के बारे में सब बता देता है।

लड़की हाथ आगे करती है तो सामने एक अजीब सी कार आ जाती है। जो दिखने में ही बहुत अइवान्स लग रही थी। लड़की उसमें बैठकर वीर के घर का अड्रेस लिखती है, और देखते ही देखते वो कार विजली से भी तेज स्पीड से वहां से निकल जाती है।

पर उसे वो दुष्ट वहां से जाता देख लेते हैं, और उसके पीछे अपनी सेना को भेज देते हैं। लड़की अपनी स्पीड में जा रही थी की अचानक उसपे फायरिंग होने लगती है। लकिन कोई भी हथियार उस कार को छू तक न रहा था। जैसे उस कार से कोई हथियार से निकली लाइट टकराती तो उसके आगे एक शील्ड आ जाती। काफी देर तक एक दूसरे पे फायर करते रहे।

वो लड़की धरती के करीब पहँच चुकी थी की तभी पीछे से एक और बड़े से हथियार से फायर हवा और इधर से लड़की ने भी फायर कर दिया। उधर से किये हमले से लड़की की कार बुरी तरह से टूट जाती है, और लड़की नीचे की तरफ तेजी से जाने लगती है।

लड़की की तरफ से किए फायर में पीछे वाला भी नष्ट हो जाता है। लड़की की कार को आग लग जाती है, और वो ठीक वीर के घर के आगे आकर गिरती है और एक बहुत बड़ा धमाका होता है।

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कुछ देर पहले वीर और पार्टी घर आ जाते हैं।

दादाजी. कैसा रहा बेटा, सब ठीक तो है ना?

वीर- जी दादाजी, सब ठीक है।

फिर सब ऐसे ही बातें करते रहते हैं की तभी बाहर एक बहुत बड़ा धमाका होता है। सभी बाहर की तरफ भागतें हैं तो क्या देखते है की बाहर एक लड़की अइवान्स सूट में जमीन पर लेटी हुई है, और उसको जगह-जगह से खून निकल रहा है।

वीर आगे बढ़कर उस लड़की को उठाकर अंदर ले आता है।

लड़की को हल्का-हल्का होश आने लगता है, बोलती है- "आप कौन है?"

वीर- जी मैं वीर। आप कहां से आई हैं, हवा क्या है?

लड़की- "जी मेरा नाम जूलिया है। मैं प्लैनेट से आई हूँ.." लड़की की बात सुनकर सब चकित हो जाते हैं।

वीर- प्लैनेट से? यहां आने की वजह?

फिर जूलिया वीर का सब कुछ बता देती है। शक्ति के बारे में भी, कहती है- "क्या आप मेरी मदद करेंगी."

वीर- ठीक है। हम सब आपकी मदद करेंगे।

वीर की बात सुनकर लड़की खुश हो जाती है, और वीर का हाथ पकड़ लेती है। लड़की अपनी आँखें बंद करती है। उस लड़की के हाथ से रोशनी निकलकर वीर के हाथ में चली जाती है। जिससे वीर की बाडी को बहुत तेज झटका लगता है। वीर की बाडी बहुत गर्म हो जाती है, जैसे उसमें आग निकल रही हो। तभी दोनों बेहोश हो जाते है

यह देखकर सब सकते में आ जाते हैं। मोम फौरन दोनों को उठाकर जिन्न-लोक ले जाती हैं। गुरुजी, वीर और उस लड़की को चेक करते हैं।

गुरुजी- “घबराने की जरूरत नहीं है। यह तो खुशी की बात है। अब वीर के अंदर इतनी ताकत है की यह किसी का भी मुकाबला कर सकता है। इतनी ताकत तो इसे उन मणियों को हासिल करने पर भी नहीं होती। यह कोई आम शक्ति नहीं ही खास ताकत है यह। और उस लड़की को भी जल्द ही होश आ जाएगा। घबराएं नहीं।

मोम- पर राजगुरुजी, वीर बहोश क्यों हवा?

गुरुजी- बात यह है की वीर की बाडी इतनी शक्ति झेल नहीं पाई। इसलिए वीर को ऐसी प्राब्लम का सामना करना पड़ा। थोड़ी देर में वीर की बाडी उस शक्ति को अपना लेगी। तब तक आप सब कुछ खा लें।

सभी वीर के पास ही रुक जाते हैं।

मोम- मोहित घर के बाहर जो मलवा बिखरा पड़ा है, उसे ठिकाने लगाओ। मीडिया वाले आते ही होंगे। बिस्वा समान से गिरने पर बहुत से लोगों ने उस चीज को देखा होगा, उन सबकी याददाश्त मिटा दो।

सब अपने-अपने काम पर लग जाते हैं।

थोड़ी देर में वीर की बाडी से रोशनी निकलने लगती है। वीर का रंग दूध जैसा गोरा हो जाता है। बाडी और मजबूत हो जाती है। वीर अपनी आँखें खोल देता है। वीर को अपने अंदर शक्तियों का भंडार महसूस होता है। खुद को बहुत मजबूत महसूस करता है।

मोम- शुकर है ऊपर वाले का की तुझे होश आ गया। कैसा है मेरे बच्चे?

वीर- एकदम परफेक्ट। वो लड़की कहां है?

संजू- वो दूसरे रूम में है। प्रीत और अलीजा उसके साथ हैं।

वीर उठकर उसके पास जाता है और उसके सिर पर हाथ फेर देता है। जैसे है वीर ने जूलिया के सिर पर हाथ फेरा तो उसी टाइम जूलिया होश में आ जाती है।

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*****
 
वीर- कैसी हैं आप?

जूलिया- जी मैं ठीक हूँ। लगता है शक्ति ने आपको अपना लिया है।

वीर- जी ऐसा ही कुछ समझिए। चलिए आइए बाहर चलते हैं।

फिर सब बाहर आते हैं। जूलिया बाहर आकर सब तरफ देखती है तो हैरान हो जाती है- “यह... यह हम कहां हैं?"

संजू- जूलिया जी हम जिन्न-लोक में है।

जूलिया- जिन्न-लोक... हम तो पृथ्वी पर थे ना... तो यहां कैसे?

संजू- क्योंकी हम सब जिन्न जिन्नी हैं। पहले इंसान थे पर बाद में जिन्न जिन्नी बन गये। क्योंकी वीर यहां का राजा है।

जूलिया संजू की बात सुनकर चकित थी।

वीर और बाकी सब गुरुजी के पास जाते हैं।

गुरुजी- महाराज आपको होश आ गया। मैं आप ही के पास आ रहा था। आपको तो सब पता चल ही गया होगा।

गरुजी- हाँ वीर सब पता चल गया है। पर तम लोग अभी वहां नहीं जा सकते। जब तक तम्हें पता नहीं लग जाता। वहां तुम तो रह पाओगे, पर तुम्हारे साथी नहीं। उनके पास इतनी पावर्स नहीं हैं की वो वहां टिक पाएं। इस लड़की के पास तुम्हारे जितनी पावर है। लेकिन जब से तुम्हें इसने शक्ति दी है तब से तुम महा शक्तिशाली हो गये हो। बेटा तुममें से जो प्रकाश निकल रहा है उसे तुम्हें छिपा के रखना होगा। कालेज में भी किसी पर भी हाथ नहीं उठाना। तुम्हारा एक थप्पड़ दूसरे की जान ले सकता है, हल्की से चपत भी।

वीर- जी गुरुजी, मैं ध्यान रखूगा।

गुरुजी- जूलिया बेटा, तुम्हें वीर को छोड़कर बाकी सबको ट्रेंड करना होगा।

जूलिया- जी गुरुजी। मैं तैयार हूँ।

फिर सब खाना खाकर वहां से घर आ जाते हैं। जूलिया को उसका रूम दिखाया जाता है। सुबह के 5:00 बज चुके थे।

अगले दिन सब लेट उठते हैं। वीर तैयार होकर बाहर आकर ड्राइंगरूम में बैठ जाता है।

वीर- गुड मार्निंग एवरीबडी।

सब एक साथ- गुड मार्निंग वीर।

वीर- जूलिया तुम्हारा प्लैनेट भी क्या हमारी धरती जैसा है?

जूलिया- नहीं बहुत फर्क है। वहां के लोग यहां के लोगों से बहुत आगे हैं। टेक्नोलोजी बहुत अड्वान्स है। हमारी भाषा भी अलग है। पर हम हर जगह की भाषा जानते हैं।

वीर- और तुम्हारे वहां किसने हमला किया?

जूलिया- "सायर नाम का प्लैनेट है। उसका जो राजा है वो बहत ही खतरनाक और बेरहम है। हमारे प्लैनेट और साथ में कुछ और प्लैनेट वालों ने मिलकर एक शक्ति का निर्माण किया, और उस शक्ति को मुझे सौंप दिया गया। उस राजा के बाद अगर कोई शक्तिशाली है तो वो मैं थी। मैं चाहती तो उससे मुकाबला भी कर सकती थी। लेकिन अगर यह शक्ति उसके हाथ लग जाती तो सारा ब्रह्माण्ड तबाह कर देता वो। मेरे पैदा होते ही मुझमें शक्तियां थीं, जो वो राजा पाना चाहता था। वो मुझसे शादी करना चाहता था। पर मेरे पिताजी ने मना कर दिया, और वो दुश्मनी पर उतर आया। उसके पास बहुत सेना है। मेरे वहां से आने के बाद तो उसने मेरे मोम डैड को भी बंधक बना लिया होगा...” इतना बोलकर जूलिया रोने लगी। उसकी आँखों से ब्लू कलर के आँसू टपकने लगे।
 
मोम- ना मेरी बच्ची रो मत। मैं हूँ ना तेरी माँ। हम सब तेरे साथ हैं। हम जाएंगे तेरे मोम डैड को लाने।

जूलिया- वीर तुम्हारे पास पावर्स कहां से आईं?

वीर जूलिया को सब बता देता है शुरू से लेकर अब तक।

जूलिया- क्या मुझे भी जगह मिलेगी आप सबके दिलों में?

जूलिया की बात सुनकर सब उसे गले लगा लेते हैं। जूलिया दिखने में बहुत खूबसूरत है। जो भी उसे देखे उसी में खो जाए।

वीर- चलो यारों कालेज चलें। प्रिंसिपल सर के मेसेज आए हुए हैं। जूलिया तुम्हें चलना है साथ या यहीं रहना है?

जूलिया- नहीं मुझे भी जाना है। मैं भी यहां सब कुछ देखना चाहती हूँ।

वीर- “तो चलो..." फिर सब बाहर आते हैं। वीर गाड़ियां मँगवाता है। पर जूलिया उसे रोके देती है।

जूलिया- "रुको वीर, आज हम मेरी कार में चलेंगे.." कहकर जूलिया हाथ आगे करती है तो वहां एक ऐसी कार आती है जिसे देखकर सबकी आँखें बड़ी हो जाती हैं।

मोहित- ओह्ह... माई गोड... क्या कार है यार।

जस्सी- हाँ यार क्या बात है। हमारे पास ऐसी कारें क्यों नहीं हैं?

जूलिया- "सब आयेगी। आपके पास भी ऐसी कार आयेगी...” फिर जूलिया बाकी सबके लिए भी कार लाती है। सबकी कारें एक से बढ़कर एक थीं। पर जो कार वीर की थी वो सबसे हटकर थी।

जस्सी- “यह गलत है। वीर को सबसे स्टाइलिश कार, हम सबके लिए वैसी क्यों नहीं?"

जूलिया- “क्योंकी वो राजा है, और वो उस प्लैनेट का भी राजा बनेगा। क्योंकी अब वो शक्तियां वीर की गुलाम

फिर वीर कार में बैठता है, और साथ में संजू, अलीजा, प्रीत, और जूलिया बैठती हैं। कार अंदर से बहुत बड़ी थी, चाहे तो सारे उसमें बैठ सकते थे। पर लोगों को क्या कहते? फिर सब कारें रोड पर दौड़ने लगती हैं। आते जाते लोगों की निगाह तो इन लोगों पर ही थी। हर कोई उस कार को देखकर आहें भर रहा था। जैसे ही गाड़ियां कालेज में एंटर होती हैं, सब वहीं थम जाते हैं। हर कोई सोच रहा था की काश ऐसी गाड़ी मेरे पास भी होती।

सभी गाड़ियां एक साथ आकर पार्किंग में रुकती हैं। सबसे पहले गाड़ी से जूलिया उतरती है। यह देखकर सब जूलिया को ही देखने लगते हैं। कुछ लड़के लड़कियां बात करते हैं।

लड़का- लगता है वीर से भी ज्यादा अमीर है।

लड़की- पर इतनी गाड़ियां?

लड़का- हो सकता है साथ में दोस्त हो। पर क्या लड़की है यार... बहुत हाट है वो।

तभी उसी गाड़ी से अलीजा, संजू, और प्रीत उतरती हैं। यह देखकर सब चकित हो जाते हैं। फिर आखीर में निकलता है वीर।

जिसे देखकर लड़कियां- "ओह गोड... यह तो वीर ही है। इसका मतलब वो लड़की वीर के साथ है?"

लड़का- यार क्या किश्मत पाई है इस लड़के ने। वर्ल्ड का नम्बर एक बिज़नेसमैन है और इटनी हाट लड़कियां।

लड़की- यार दिन-ब-दिन वीर कितना हाट होता जा रहा है। काश मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बना ले।
 
लड़का- यार क्या किश्मत पाई है इस लड़के ने। वर्ल्ड का नम्बर एक बिज़नेसमैन है और इटनी हाट लड़कियां।

लड़की- यार दिन-ब-दिन वीर कितना हाट होता जा रहा है। काश मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बना ले।

उधर वीर के उतरते ही बाकी सब भी गाड़ियों से उतार जाते हैं। वहीं निशु और नीलम इन्हें ही देख रही थी, और हाथ हिलाकर कँटीन में आने के लिए कहती हैं। वीर और पार्टी कँटीन में आ जाती है। वीर जूलिया को निशु और नीलम से मिलवाता है।

निशु- क्या बात है नई-नई कारें... वीर साहब इतना पैसा कारों पर क्यों खर्च करते हो। इससे अच्छा की गरीबों के लिए घर बनवा दो।

निशु की बात सुनकर वीर- “वाह निशु क्या आइडिया दिया है। यार यह मैंने पहले क्यों नहीं सोचा? जस्सी मोहित इस शहर में जितने भी बेघर हैं, उनकी लिस्ट बनाओ। हम सबके लिए घर बनवायेंगे.."

वीर की बात सुनकर निशु और नीलम चकित हो जाती हैं।

निशु- वीर मैंने जस्ट बात बोलनी है। तुम मजाक कर रहे हो ना?

वीर- नहीं निशु, मैं सच कह रहा हूँ। बेघर लोगों को रहने के लिए घर दिया जाएगा, और काम भी। मैं नई फेक्टरियां खोल रहा हूँ, उन सबको काम भी दूंगा।

वीर की बात सुनकर सबको वीर पर गर्व महसूस होता है।

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कड़ी_64

वीर- थैक्स निशु आज तूने जो कहा मैं बहुत खुश हूँ। क्या तुम दोनों भी हमारा साथ दोगी।

नीलम- क्यों नहीं वीर, हम दोनों भी तुम सबके साथ हैं।

वीर- "दोस्तों एक काम करो। प्रिंसिपल से बात करके सब स्टूडेंट को ग्राउंड में जमा करो। नीलम अपने डैड से बात करो जाओ...” सब अपने-अपने काम पर लग जाते हैं।

उधर प्लैनेट पर जूलिया के मोम डैड को बंदी बना लिया जाता है। तभी वहां एक रोबदार आदमी आता है।

आदमी- कहां भेजा है अपनी बेटी को?

जूलिया के डैड- मुझे नहीं पता वो कहां गई होगी। मेरा खुद का उससे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

आदमी- “देख खुद बता दे तो तेरे लिए अच्छा होगा। अगर मैंने तेरी बेटी को ढूँढ़ा तो वो मरेगी। अगर तू बता देगा तो तुम तीनों की जान बख्श दी जाएगी। दो दिन का समय है तुम दोनों के पास...” इतना बोलकर वो आदमी वहां से चला जाता है।

जूलिया के डैड- कितना भी ढूँढ ले जोर्डन वो तुम्हें नहीं मिलेगी। अगर मिल भी गई तो तुम्हें उससे कुछ हासिल नहीं होगा। शक्तियां तो वीर के पास जा चुकी हैं, और खुद शक्तियां उसकी गुलाम बन गई हैं।

इधर सब टीचर और स्टूडेंट ग्राउंड में जमा हो जाते हैं। तभी वीर और पार्टी एक साथ स्टेज पे एंटेरी लेते हैं।

वीर- "गुड मार्निंग टीचर्स और स्टूडेंट्स। आप सब मुझे जानते ही हो, और मेरे दोस्तों को भी। मैं आज आप सबसे हेल्प चाहता हूँ। मैंने और मेरे दोस्तों ने यह सोचा है की हम गरीब लोगों के लिए घर बनवायेंगे। जो लोग बेघर हैं, चाहे हजारों घर बने या लाखों, मैं पैसे दूँगा। बस आप सब पता करें की कौन बेघर है, कौन नहीं?"

वीर की बातें सुनकर सारे स्टूडेंट और टीचर्स चकित थे।

वीर- तो दोस्तों क्या आप हमारी हेल्प करेंगे?

सब एक साथ- हाँ। हम सब आपकी हेल्प करेंगे।

तभी स्टेज पर प्रिंसिपल आता है- “बच्चों आज मुझे मेरे स्टूडेंटस पर गर्व होता है। मैं बहुत खुश हूँ जो वीर और उसके दोस्त हमारे कालेज में स्टडी कर रहे हैं। आज मेरी तरफ से आप सब फ्री हैं। जो वीर ने कहा है आप सब ग्रुप बनाकर निकले और पता करें की कौन बेघर है और उसकी लिस्ट बनाएं..."

वीर और पार्टी सबको अपना-अपना नम्बर दे देते हैं। वीर प्रिंसिपल सर को बैंक्स करता है, साथ देने के लिए। सभी स्टूडेंटस निकल पड़ते हैं। पूरी मुंबई शहर में बेघर लोगों की लिस्ट बनाने। यह खबर आग की तरह फैल जाती है। मीडिया वाले तेजी से कालेज में पहँच जाते हैं।

वीर कँटीन में ही बैठा था।

रिपोर्टर- “आइए हम बात करते हैं वीर से, जिन्होंने अभी-अभी यह एलान किया है की वो गरीब बेघरों को रहने के लिए घर और काम देंगे। सर, क्या आपने अभी जो कहा वो सच है या ऐसी ही अफवाह है?"

वीर- "बिल्कुल सच है। पहले मेरे दिमाग में यह बात नहीं आई थी। लेकिन मेरे एक दोस्त ने मुझे यह आइडिया दिया। मुझे उसका आइडिया सही लगा और मैंने अपने सभी कालेज के स्टूडेंट को बात कही। सभी ने मुझे सहमति दी और अब सब स्टूडेंट काम पर लग चुके हैं..."

रिपोर्टर्स- कुछ लोगों का कहना है की आप बस ऐसे ही हवा में तीर छोड़ रहे हैं।

वीर- “हाहाहाहा... जो लोग यह कह रहे हैं। एक साल के अंदर वो अपना बयान बदल लेंगे...” इतना बोलकर वीर वहां से निकल जाता है.." और रिपोर्टर्स आवाज देते रह जाते हैं।

यह खबर तेजी से मुंबई में फैल जाती है। राजनीति में हड़कंप मच जाता है। हर कोई वीर को अपनी पार्टी में शामिल करने के लिए भाग-दौड़ कर रहे थे। ऐसे ही दो दिन निकल जाते हैं। पर वीर किसी भी पार्टी को जोइन करने से मना कर देता है।
 
सवेरे 8:00 बजे वीर के बंगले पर एरिया मैनेजर।

वीर- सबने लिस्ट तैयार कर ली है क्या?

बिस्वा- हाँ भाई हो गई है। लाखो लोग बेघर हैं, और बेरोजगार हैं।

वीर अवनी को याद करता है। तभी वहां अवनी आ जाती है।

वीर- अवनी, मैंने जो तुम्हें बोला था वो हो गया?

अवनी- जी सर, यू.एस.ए. की सबसे बड़ी कंपनी से बात हई है। वो कल तक आ जाएंगे, और घर बनाने का काम शुरू हो जाएगा। जहां घर बनने हैं, वो जगह भी क्लियर हो गई है, और सरकार से अनुमति भी मिल गई है।

वीर- अवनी एक काम करो। हमारे भी आदमी उनमें शामिल करो, जिससे जल्दी काम होगा।

फिर सब ऐसे ही बात करते रहते हैं। वीर और बाकी सब कालेज जाने की बजाए जिन्न-लोक चले जाते हैं। जिन्न कर वीर अपने असली रूप में आ जाता है। यह देखकर वहां सबके सब वीर के आगे अपना सिर झुका के खड़े हो जाते हैं। यह देखकर जूलिया बहुत प्रभावित होती है और वो खुद वीर के आगे सिर झुका के खड़ी हो जाती है।

वीर वहां से सीधा अपनी राजगद्दी पर बैठ जाता है- “सब बैठ जाइए। मंत्रीजी कोई बातचीत?"

मंत्रीजी- महाराज हमारी सेना लगभग 4 लाख के करीब पहुंच चुकी है। हम चाहते हैं की आप उन्हें कुछ नये लड़ाई के तरीके सिखाएं।

वीर- मंत्रीजी, यह काम मेरी दोस्त जलिया करेगी। उन सबको एक ऐसा फाइटर बनाएगी की कोई भी उनका मुकाबला नहीं कर सकता है। क्यों जूलिया, हमारी सेना को आप सिखाएंगी?

जूलिया सिर झुका के- “महाराज मैं बहुत खुश हूँ आपने मुझे इस काबिल समझा। मैं आज से ही यह काम शुरू कर देती हूँ.."

वीर- मंत्रीजी और कछ किसी विषय पर बात।

मंत्रीजी- महाराज हम हर तीन साल बाद यहां बहुत बड़ा उत्सव मनाते हैं। अगर आपकी अनुमति हो तो हम तैयारी शुरू करें?

वीर- "इसमें पूछने की क्या बात है? मेरी तरफ से पूरी छूट है। अगर कोई फैसला लेना हो तो आप गुरुजी से

आज्ञा ले सकते हैं। मेरे बाद वो सब कछ हैं...” फिर वीर वहां से खड़ा होता है, और बाहर की तरफ चल देता है।

उसके पीछे-पीछे सब बाहर आ जाते हैं। वीर वहां से सीधा सेना के पास जाता है। अपनी विशाल सेना देखकर वीर बहुत खुश होता है। महाराज को वहां देखकर सारी सेना सिर झुकाए खड़ी हो जाती है।

वीर- "मेरे प्यारे सेनानियों, आज से आपको फाइट के नये तरीके सिखाए जाएंगे। एक ऐसी फाइट जो कभी किसी ने नहीं की होगी। आप सब तैयार हैं?"

सब एक साथ- “जी महाराज हम तैयार हैं.” और सेना का शोर पूरे जिन्न-लोक में गूंजने लगता है।

वीर- “जूलिया तुम काम शुरू करो..."

फिर वीर वहां से अपने रूम में चला जाता है और नार्मल हो जाता है।

अलीजा- जान, हम शादी कब कर रहे हैं?

वीर- कहो तो अभी कर लूं।

वीर की बात पे अलीजा शर्मा जाती है।

संजू- बड़ी जल्दी है तुझे सुहागरात मानने की, है ना?

अलीजा- ऐसा पति देखकर किसे जल्दी नहीं होगी?

प्रीत- हाहाहाहा... जान इसे भी कली से फूल बना ही दो।

ऐसे ही हँसी खुशी से शाम तक वहां रहते हैं। और जूलिया सेना को अपनी आडवांस टेक्नोलाजी की फाइट के बारे में सबको ज्ञान देती है। फिर सब वहां से घर आ जाते हैं। घर आकर क्या देखते हैं की निशु और नीलम वहीं बैठे थे ड्राइंगरूम में।

नीलम- ये तुम लोग कहां गायब हो जाते हो?

निशु- ना कालेज आए, ना कोई फोन किया?

मोहित- यार बस थोड़ा काम से बाहर गये थे।

नीलम- “यार बता तो देते। क्या तुम हम लोगों को कुछ नहीं समझते?" और नीलम की आवाज में दुख था।

मोहित आगे बढ़कर नीलम के कंधे पर हाथ रखकर- "सारी नीलम, आगे से ऐसा नहीं होगा। जहां भी जाएंगे तुम्हें बताकर जाएंगे। अब खुश?"

निशु- और तुम जस्सी... बड़ा कहता था हम दोस्त हैं, अब कहां गई तुम्हारी दोस्ती?

जस्सी- “सारी नीलम और सारी निशु। आगे से कभी तुम दोनों को ऐसे अकेला छोड़कर नहीं जाएंगे.."

इधर वीर और बिस्वा सब इन्हें देखकर हँसे जा रहे थे।

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