• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

freesexkahani - बीवी के आशिक

Update 23
मैं वँहा से वापस आ चुका था मेरा मुख्य काम दो ही दिनों में हो चुका था,घर आते ही मोना मेरे गले से लग गई ,

"कितना याद आया आपका .."

"क्या याद आया काल का तो जवाब ही नही दे रही थी ,"

"तो क्यो देती आप उस कमिनी के साथ जो थे.."

मैं मुस्कुरा उठा,

"मैंने तो उसे उसी दिन झाड़ कर बाहर कर दिया था...तुम्हारे बारे में ना जाने क्या क्या बक रही थी "

वो बेहद ही प्यार से मुझे देखने लगी और मेरे गाल को चूम लिया..

"मुझे आपसे यही उम्मीद थी जान...मैं जानती थी वो साली कमीनी तो आपको भड़काने की पूरी कोशिस करेगी .."

वो मेरे गले से लग कर मुझे चूमने लगी .

"इसी लिए साली ने फिर से कोई रिप्लाइ नही किया,क्या कहती की अपने उसे धक्के मारकर बाहर निकाल दिया .."

वो हँसने लगी .

"आई लव यू जान .."

वो फिर से मेरे गले से लग गई ,मैं भी उसके कोमल बालो को सहलाने लगा.

"तो रोहित के साथ कुछ किया की नही .."

वो हल्के गुस्से से मुझे देखने लगी..फिर शरारती मुस्कान लाकर बोली

"किया ना बहुत कुछ .."

"अच्छा क्या .."

"वो नही बताऊंगी जासूस हो खुद पता कर लो .."

"अच्छा ..'

"हा"वो खिलखिलाने लगी मैंने उसे अपनी बांहो में भर लिया और उसे सीधे बिस्तर में ले जाकर पटक दिया ,

वो मुझे बड़े ही बेकरारी से देख रही थी .

"अगर मुझे पता होता की वँहा आपको डॉली मिल जाएगी तो मैं आपको कभी उसके पास जाने नही देती ..वो सच में डायन है ,आप थे जो उसके जाल से निकल आये वरना ."

मैं हँस पड़ा ..

"अब तो निकल गया ना जान छोड़ो ना उसकी बात ,तीन दिन से तड़फ रहा हु .."

उसने कुछ नही कहा बस मुस्कुराते हुए मेरे बालो को सहलाने लगी फिर मेरे कानो में हल्के से फूक मारने लगी..

मुझे एक गुदगुदी का अहसास हुआ,मैंने उसे अपने ऊपर ला लिया,और उसके बालो को अपनी उंगली में फंसा कर उसके होठो को चूमने लगा,दोनो के होठ एक दूजे में मिल चुके थे और सांसे तेज हो चुकी थी ,धड़कने बढ़ रही थी.

मैंने उसके आंखों को हल्का गीला देखा ..

"क्या हुआ जान .."

"रोहित मुझसे बात नही कर रहा है .."

"कब से "

"कल से ना जाने उसे क्या हो गया .."

"तुमने कुछ कह दिया होगा.."

वो मेरे चहरे को देखने लगी ..

"मैंने बस उसे मना किया था ,वो बेकाबू हो रहा था .."

मेरे होठो पर एक मुस्कान आ गई

"नही करना था ना उस बेचारे की भी कई तमन्नाएं रही होंगी की प्रेमिका का पति बाहर गया है तो कुछ फायदा मिल जाए लेकिन तुम तो ..बेचारे की हर तमन्ना को ही फेल कर देती हो अब वो गुस्सा तो होगा ही ना "

मोना गुस्से से मुझे मारने लगी ..

"आपको हर वक्त मजाक ही सुझा रहता है ,भूल गए क्या उस दिन क्या हालत हो गई थी आपकी .."

वो खिलखिलाने लगी

'वो तो .."

"क्या वो तो अब अगर फिर से कहे ना तो सच में रोहित के साथ ."

वो रहस्यमयी मुस्कान से मुकुस्कुराने लगी .

"क्या करेगी .."

उसकी मुस्कान और भी खिल गई ..

"जलने का बहुत ही शौक है ना आपको .."

"हा वो तो है .."

मैं भी मुस्कुराने लगा ..और उसके सीने में पके एक ताजा गोल आम को दबाने लगा,मेरा लिंग जीन्स में ही अकड़ रहा था मैंने जीन्स निकाल देने में हि अपनी भलाई समझी ..उसने भी अपनी नाइटी के अंदर हाथ डाला और अपनी ब्रा और पेंटी निकाल फेंकी..

अब मेरे जिस्म में बस एक अंडरवियर थी वही मोना के जिस्म में वो नाइटी जो एक पतले कपड़े का गाउन था जो उसके एड़ी से थोड़ा ऊपर तक था..

मेरे हाथ उसके जिस्म में फिसलते हुए उसके चहरे तक गए,मैंने उसके स्ट्राबेरी की तरह लाल होठो में अपने जलते हुए होठो को रख दिया,दोनो ही एक दूसरे के होठो से रस पीने लगे ,

मेरा लिंग तनकर मेरी अंडरवियर से बाहर आ रहा था,जिसे मैं गाउन के ऊपर से ही मोना के योनि में रगड़ रहा था ..

वो भी गर्म हो रही थी ,उसकी भी सांसे तेज हो रही थी ..

"बोलो ना जान क्या करोगी रोहित के साथ .."

उसकी एक बेहद ही शरारती मुस्कान उसके चहरे में आ गई ..

"आप नही सुधरोगे ना ."

"नही तुम ही बिगड़ जाओ .."

मैं बेचैन सा बोला ..

वो भी उत्तेजित होकर मेरे बालो को पकड़ कर मेरे होठो को चूसने लगी .

"आप जब अब बाहर कही जाओगे तो मैं फिर से रोहित को बुलाऊंगी .."

उसने अपनी कमर मेरे लिंग के ऊपर जोरो से रगड़ दी ..

"आह फिर .."मुझे उसके योनि से रसते हुए रस का आभस होने लगा था..

"फिर उसे सोफे में बैठने को कहूंगी ,वो भी मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी गोद में बिठा लेगा .."

उसने फिर से जोरो से अपनी योनि को मेरे लिंग में रगड़ा जो की अंडरवियर में होने के कारण अकड़ कर लेटा हुआ था और उसके इलास्टिक से बाहर झांक रहा था मोना उसके मोटे तने में अपनी योनि को रगड़ रही थी ,

"वो मेरे चहरे को पकड़ कर अपने होठो को मेरे होठो से मिलने की कोशिस करेगा,मैं पहले तो उसे हटा दूंगी लेकिन मुझे याद आएगा की अपने क्या कहा था और आपको तो जलने में मजा आता है ,मैं आपको फोन लगाउंगी ताकि आप मेरी आवाज सुन सको लेकिन ये बात रोहित को पता नही होगी ."

मैं बुरी तरह से उत्तेजित हो गया था,मेरी बीवी मुझसे ही मुझे चीटिंग करने की बात कर रही थी..मैंने उसे अपने नीचे कर दिया और उसके ऊपर छा गया ..

उसके गले को चूमने लगा,अब मैंने अपने अंडरवियर को निकाल दिया मेरा लिंग अब मोना के गाउन के ऊपर से ही उसके नंगे योनि पर रगड़ खा रहा था .

"आह जान ."वो सिसकी वो भी बेहद ही उत्तेजित हो गई थी ..

'आप फोन में होंगे और मैं उसके होठो को अपने होठो में ले लुंगी ,मेरी सिसकियां आपको सुनाई देगी और मैं उसे खिंचते हुए अपने बेडरूम में ले जाऊंगी ,वँहा मैं आपके माइक्रोफोन को भी आन कर दूंगी ताकि आप और भी क्लियर मेरी आवाज सुन सको ..वो मुझे बिस्तर में पटक देगा और मेरे ऊपर चढ़ जाएगा ,मैं सिसकियां लुंगी जब वो आपकी तरफ मेरे ऊपर छा जाएगा ,और फिर इसी गाउन को उतरेगा ."

वो तड़फ रही थी उसके मुह से शब्द निकलना भी मुश्किल हो रहा था..

मैंने तुरंत ही उसके गाउन को निकाल फेका ..

मेरा लिंग आसानी से उसके योनि में चला गया ..उसने मेरे बालो को जकड़ लिया

"आह रोहित मेरी जान "

रोहित का नाम सुनकर मेरा लिंग और भी कड़ा हो गया था ,मैंने तेजी से एक धक्का उसके योनि में दिया ..

"रोहित तुम्हारा कितना बड़ा है मेरी जान ,अभी से ज्यादा बड़ा है और गहरा उतारो ना इसे "

उसकी बात सुनकर मैं एक बार कांप गया ,मोना की आंखे पूरी तरह बंद थी क्या वो अभी रोहित को ही अपने साथ महसूस करने की कोशिस कर रही थी .

मैंने फिर से एक जोर का धक्का दिया और उसके होठो से अपने होठो को मिला दिया,

दोनो ही इस खेल में पूरी तरह से रम चुके थे,पहले तो मोना भी रोहित रोहित ही कह रही थी लेकिन जब खेल अपने तेजी में पहुचता गया वो जान जान कहने लगी ,अब वो जान मेरे लिए था या रोहित के लिए ये कहना बेहद ही मुश्किल काम था ...

(सेक्स सीन्स की डिटेलिंग मैं थोड़ी कम कर रहा हु , बाकी आप लोग इमेजिंग कर लेना..ज्यादा डिटेल में जाने से साला बहुत समय और एनर्जी चली जाती है ,तो जितना जरूरत हो उतना ही डिटेल से सेक्स सीन्स लिखूंगा.बाकी की कमी सीन क्रिएट करके ही पूरी कर दूंगा..)
 
Update 24
सुबह आंखे खुली तो रात की बाते याद आयी,मेरे अधरों में एक मुस्कान आ गई ,तभी मोना बाथरूम से बाहर आयी,और मुझे देखकर मुस्कुराने लगी ,

"कल आपको बहुत मजा आ रहा था,.."

"हा आ तो रहा था,सोच रहा हु तुम्हे आगे बढ़ने ही दु .."

सुनते ही वो शर्मा गई और इठलाते हुए मेरे ऊपर आकर लेट गई,उसने अभी एक टीशर्ट ही पहना हुआ था,अभी अभी नहाकर निकल रही थी बालो में हल्की सी नमी भी बरकरार थी ,साबुन की खुशबू मेरे नथुने में समा रही थी.

"आप ऐसा मत बोला करो ,उत्तेजित करके ही छोड़ देते हो ,मुझे भी पता है की ये नही हो सकता .."

मेरी आंखे चौड़ी हो गई ..

"यानी तुम उत्तेजित होती हो .."

वो हल्के से मुस्कुराई

"इतना बोलेंगे बार बार तो उत्तेजित तो हो ही जाएगा कोई भी ,और इमेजिनेशन भी करने लगेगा,मानसिक रूप से आपने मुझे उसके साथ सुला ही दिया है ..तो..."

वो थोड़ी गंभीर भी थी तो थोड़ी उत्तेजित भी ,और साथ थी शरमाई भी ,और साथ ही घबराई भी और साथ ही थोड़ी दुखी भी और साथ ही थोड़े गुस्से में और साथ ही थोड़े जज़बातों में .

उसकी आंखों से एक साथ कई भाव टपक जा रहे थे,जिसे मैं निचोड़ने की कोशिस कर रहा था,

"तो तुम उसके साथ सोना चाहती हो ."उसने ना में सर हिलाया..

"मैं कुछ नही चाहती,मैं बस जानती हु...ये की मैं आपसे बेहद ही प्यार करती हु और ये भी की मैं रोहित की ओर भी आकर्षित हु,लेकिन मैं ये भी जानती हु की आप मुझसे बेहद प्यार करते है और किसी दूसरे के साथ सोचने तक तो ठीक है लेकिन सच में किसी के साथ सोने पर आप उसे और मुझे दोनो को मार डालेंगे.."

मेरे होठो की मुस्कान खिल गई ..

"तुम्हे नही जान बस उसे ."मैने बेहद ही आराम से कहा इतने आरम से की कोई सुने तो ख़ौफ़ खा जाए लेकिन वो मोना थी ,मेरी मोना जो मेरे फितरत से वाकिफ थी ,मेरी एक एक नश से वाकिफ थी.

वो भी मुस्कराई .

"इसीलिए तो कहती हु की आप अब ऐसी बाते मत किया करो ,मैं भी इंसान ही तो हु,दिल में अरमान तो मेरे भी जाग जाते है जबकि आप उसे बार बार घी डालकर और भड़कते हो,लकड़ी भी आपकी,घी भी आप ही डाल रहे हो ,हवा भी आप ही दे रहे हो और फिर आग भी जलाने पर तुले हो फिर अगर ये आग भड़क कर कुछ जला दे तो फिर कहोगे की गलती किसी दूसरे की है ."

मोना ने बेहद ही मतलब की बात कर दी थी,सच में ये एक ही समस्या थी की मैं अपनी गलती को स्वीकार ही नही कर रहा था इसलिये शायद मुझे इतना गुस्सा था की मैं सामने वाले को मार दूंगा...या मोना को ही मार दु.

मैं थोड़ी देर तक चुप ही रहा...वो मेरे बालो से खेल रही थी जितना द्वंद मेरे अंदर था वो उतनी ही शांत थी ..

"ठीक है तो मैं खुद की गलती मानता हु ,और आज से तुम्हे पूरी छूट देता हु ,मैं किसी को नही मारूंगा ,जो आग तुम्हारे अंदर लगी है उसे जिससे चाहे बुझाओ ..वो तुम्हारी गलती नही होगी .."

वो मेरे आंखों में देखने लगी ..

"आप तो सच में सीरियस हो गए .."

"हा मोना मैं सीरियस ही हु,तुमने सही कहा ,पत्थर को भी बार बार घिसने से निशान बन जाता है वो तो तुम्हारा दिल ही है ,तुम्हारा मन है ,उसमे अगर बार बार ये बाद डाली जाए की तुम किसी गैर मर्द के साथ भी मजे ले रही हो और इस बात से मैं भी खुस हु तो ये सच है की कभी ना कभी तुम्हारे दिल में भी ये ख्याल आएगा ,और ख्याल ही क्यो ये चाहत भी होगी...और उस चाहत को पूरा करने का तुम्हे अधिकार होना चाहिए,मेरी तरफ से तुम फ्री हो ."

उसने मेरा सपाट चहरा देखा..

और मेरे होठो में अपने होठो को घुसा दिया ..

"मैं अपनी चाहत पूरी करने के चक्कर में आपका प्यार नही खोना चाहती जान .."वो और भी जोरो से मेरे होठो को चूस रही थी .

"फिक्र मत करो जान मेरा प्यार बस तुम्हारे लिए ही है और हमेशा ही रहेगा.."मेरे आंखों में एक मोती चमका जिसे देखकर मोना थोड़ी डर गई लेकिन मेरे दिल में क्या हो रहा था ये मैं ही जानता था,और मैं कम से कम इस समय तो मोना को नही बताना चाहता था,क्योकि हर चीज का एक समय होता है .

"आप ऐसे ही रहोगे तो आपको क्या लगता है की मैं कुछ करूंगी .."

मैंने अपने होठो में एक मुस्कान ला ली ..

"सच बताऊँ मुझे भी बहुत मजा आएगा ,तुम करो तो सही "मैंने शरारत से कहा और उसने झूठे गुस्से से मुझे मारा लेकिन फिर हम दोनो ही हँस पड़े,हमारे बीच बात साफ हो चुकी थी ,अब देखना था की मोना कितना बढ़ती है.

तभी उसके मोबाइल में एक मेसेज आया,मैंने देखा वो रोहित का मेसेज था..

"लो तुम्हारे आशिक का मेसेज आ गया.."

वो मुस्कुराते हुए मेसेज को खोलकर देखने लगी और उसके चहरे का रंग थोड़ा बदल गया ...

मोना का चहरा उस मेसेज को देखकर बुझ रहा था,मैं उसके एक्सप्रेशन को देख रहा था,मुझे पता था की अखिर उसके चहरे की हवाइयां क्यो उड़ी हुई है लेकिन मैं अपने चहरे के एक्सप्रेशन को ऐसा दिखाना नही चाहता था..

"क्या हुआ ...."

"कुछ नही "

"तो तुम्हारा चहरा क्यो उतारा हुआ है.."

"नही तो .."

"क्या लिखा है तुम्हारे आशिक ने "

"पहली बात वो मेरा आशिक नही है "

"ओह अचानक से कैसे ....पहले तो वही तुम्हारा आशिक था"

वो रूठ कर उठ गई ,मैंने मेसेज देखा ..

'हाय मोना तुम्हे बताते हुए खुसी हो रही है की मैं शादी कर रहा हु,लड़की को तुम जानती हो हमारी डॉली...तो *** तारीख को हमारी सगाई **** होटल में है प्लीज् तुम और अभी जरूर आना .'

मेरे चहरे पर मुस्कान खिल गई .

मोना कपड़े बदल रही थी ..

"ओह यार मोना अब तुम किसके साथ .."

"अभी आप प्लीज् चुप रहिए .."

"अरे तुम क्यो गुस्सा हो रही हो तुम्हे तो खुश होना चाहिए तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त तुम्हारी पुरानी दोस्त के साथ शादी कर रहा है."

"यही तो दुख है की रोहित अब भी उसे नही समझ पाया ...आखिरकार उस कुतिया ने रोहित को फंसा ही लिया .."

मोना का चहरा उतर गया था..

"अरे छोड़ो भी मेरी जान ,जब वो ऐसा कर रहा है तो कुछ तो सोचा ही होगा उसने ,तुम अपना मूड ऑफ क्यो कर रही हो,"

मोना ने भी खुद को सम्हाल शायद वो मेरे सामने कुछ ज्यादा ही रियेक्ट कर रही थी.

"दुख तो आपके लिए लग रहा है आपकी फेंटेसी पूरी होने वाली जो थी .."

वो मुस्कुराई

'अरे तो उसमे क्या है तुम्हारे आशिकों की कोई कमी तो है नही .."

उसने मुझे गुस्से से देखा और हम दोनो ही खिलखिला उठे ...
 
Update 25
"थैंक्स अभी मेरे लिए तुमने ये सब किया .."

डॉली मेरे सामने बैठी थी..

"सिर्फ तुम्हारे लिए नही ,असल में तुम्हारे पापा भी यही चाहते थे.."

वो जैसे उछली ..

"वाट ..??"

"हा उनसे मेरी इस बारे में पहले ही बात हुई थी,रोहित के लिए तुम्हारी दीवानगी को वो समझते है,और उन्हें ये भी पता था की रोहित असल में तुम्हे पसंद नही करता ,वो किसी दूसरी लड़की के पीछे है ,उन्हें ये भी पता चल चुका था की वो लड़की मेरी बीवी मोना ही है ,इसलिए उन्होंने मुझे उसके बारे में मुझसे बात की ...उन्हें पहले तो रोहित पर ही शक था की आखिर वो सही लड़का है की नही ,मैंने उन्हें मोना और रोहित के दोस्ती के बारे में बतलाया और ये भी की रोहित असल में बहुत अच्छा लड़का है,मैं उसे समझाऊँगा .. उन्हें तुम्हे लेकर भी फिक्र थी की आखिर तुम भी उसे प्यार करती हो या ऐसे ही कोई टाइम पास टाइप का रिलेशन है तुम्हरे बीच,डॉ चुतिया ने और मैंने मिलकर उन्हें समझाया था,आखिर में हम कामियाब हो गए और रोहित भी समझ गया.और तीसरा काम मुझे दिया गया था की तुम्हारे दिल से तुम्हारे पापा को लेकर जो नफरत थी उसे कम करना ,मुझे लगता है की तुम अब उन्हें इस बात के लिए माफ कर चुकी हो की उन्होंने तुम्हे दुनिया के सामने अपनी बेटी का दर्जा नही दिया "

वो थोड़ी देर तक चुप ही रही..

"डॉ तो मुझे ये हमेशा से समझते रहे लेकिन आपकी बात सुनकर मेरा गुस्सा उनपर थोड़ा तो कम हो गया ,लेकिन ये जायेगा तब जब वो दुनिया के सामने मुझे अपना ले ."

मैं भी चुप ही था..

"लेकिन मुझे एक बात समझ नही आयी की अपने रोहित को आखिर समझाया कैसे ,वो भी कुछ नही बता रहा है .."

मैं हँसने लगा ..

"बस ये हमारे बीच का एक राज है ..और तुम आम खाओ गुठलियां क्यो गिन रही हो ..."

वो झूठे गुस्से से मुझे देखने लगी लेकिन अगले ही पल उसके होठो में मुस्कान आ गई ..

सगाई जोरो से चल रही थी ,मोना असामान्य रूप से नार्मल दिख रही थी ना सिर्फ नार्मल असल में वो खुस भी थी,सारा वक्त वो डॉली और रोहित के साथ ही रही ,असल में ये डॉली के लिए भी हजम होने वाली बात नही थी लेकिन मुझे पता था की मेरी बीवी जितनी भोली लगती है उससे कही ज्यादा शातिर है,मेरे कमरे में लगाए हुए कैमरों को खोज कर उसने बहुत कुछ साबित कर दिया था,गृहमंत्री जी मेहमान की तरह ही आये ताकि सारी दुनिया के नजरो से उनका और डॉली का रिश्ता बचा हुआ रहे ,

डॉ चुतिया भी वही मिले ..

"तुम्हारी चाल काम कर गई अभी.."

उनकी वही कर्कश सी मीठी आवाज मेरे कानो में पड़ी ..

"कौन सी चाल .."

उन्होंने जवाब नही दिया बल्कि स्टेज में खड़े मोना ,डॉली और रोहित को देखते हुए बोले..

"मोना बड़ी खुस लग रही है .."

"आप कहना क्या चाह रहे हो .."

उनकी परखी नजरो ने मुझे घूरा..थोड़ी देर के लिए पूरे शरीर में एक सनसनी सी फैल गई,कही सच में उन्हें मेरी चाल का पता तो नही चल गया..

"अंडरवर्ड में मेरे कुछ कनेक्शन्स है .."

मैं आंखे फाड़े उन्हें देख रहा था..

"कही तुम्हारी नजर उस माल पर तो नही जो दुबई से आ और जा रहा है .."

अब मेरा गाला सूखने लगा था ..

"आपको क्यो लगता है की रोहित को समझाने का कनेक्शन दुबई के माल से है .."

उनके होठो में एक अर्थपूर्ण मुस्कान आ गई जिससे मुझे समझ आ गया की मुझसे ये प्रश्न करके एक गलती हो गई है ..

"यानी तुम्हे पता है की दुबई से क्या आ रहा है और बदले में क्या भेजा जा रहा है .."

"पुलिस वाला हु वो भी क्राइम ब्रांच का ,इतने तो मेरे भी खबरी है अंडरवर्ड में .."

उनके होठो में एक मुस्कान आ गई

"तब भी तुमने हेडऑफिस को इसकी कोई सूचना नही दी है..क्यो..?"

मैं हड़बड़ाया ..

"क्योकि मैं अभी मंत्री जी की ड्यूटी पर हु .."

"तुम तो मंत्री जी की ड्यूटी के बहाने अपना भी काम करने में तुले हो,एक तीर से कितने निशाने मारने का इरादा है तुम्हारा ..आखिर करना क्या चाहते हो तुम..?"

मैं चुप ही रहा मेरी आंखों में एक शैतान सा उतर आया था,मेरी मुस्कान शैतानी हो चुकी थी , जिसे डॉ ने भांप लिया था ..

"देखो अभी तुम क्या चाहते हो ये तो मुझे थोड़ा थोड़ा समझ में आने लगा है लेकिन याद रखो की माल आएगा वो थो ठीक है लेकिन जाना नही चाहिए."

इस बार डॉ की आंखे भी जल रही थी,मैंने सहमति में सर हिलाया ..

"आप चिंता ना करे मैं इतना भी कमीना नही हु .."

डॉ के होठो में एक मुस्कान आ गई

"लेकिन ये तो सच है की तुम कमीने तो हो .."

हम दोनो ही हल्के से हँस पड़े .
 
Update 26
चटाक .

इंस्पेक्टर विक्रम के गालो पर एक जोरदार थप्पड़ पड़ा था की वो गिरते हुए बचा ..

"साली इंस्पेक्टर को मारती है जानती है मैं कौन हु ."

वो भड़का .

"साले जानता है मैं कौन हु .."लड़की की आवाज से वो थोड़ा सा सहम गया था,वो उस इलाके का नया इंचार्ज था जो अभी अभी बदली लेकर आया था,वो आंखे फाड़े हुए लड़की को देख रहा था.

"मैं DSP क्राइम अभिषेक की पत्नी हु ."मोना ने गर्व से कहा ,विक्रम का गाला ही सुख गया..

उसने पास खड़े हुए कांस्टेबल की ओर देखा ..

"सर मैं तो बताने ही वाला था लेकिन अपने बोलने ही नही दिया .."

"माफी मेडम "वो हाथ जोड़कर खड़ा हो गया था ...

"लेकिन इसके साथ. ये तो शातिर मुजरिम है इसकी फोटो तो मैंने थाने में देखी थी ..आप इसके साथ वो भी यंहा वीरान जगह पर ????"

"मैं कही भी किसी के साथ भी घुमू तुझे क्या साले .."मोना का चहरा गुस्से से तमतमा गया था ,विक्रम थोड़ा सहम गया..

"और तुम्हारी फ़ोटो वँहा किसने टांग दी .."मोना ने अब्दुल की ओर देखा ..

अब्दुल ने मुस्कुरा कर कांस्टेबल को देखा ,उसने ना में सर हिलाया ..

"वो सर ने ही एक केस की फाइल से निकाल कर लगा दिया था .."कांस्टेबल डरा हुआ बोला ..

"नया है गलती हो जाती है ,इसे लेकर खान बाड़ी आ जाना,अब इसे भी तो पता चले की ये जिसके सामने खड़ा है वो यंहा के अंडरवर्ड का बेताज बादशाह है ."अब्दुल ने गुरुर के साथ कहा अब उसके आवाज में नए नए अपराधी वाली बात नही थी जो उसके यंहा आने के समय हुआ करती थी अब वो सच में किसी बादशाह की तरह व्यवहार कर रहा था.

विक्रम और भी बुरी तरह से डर गया..हुआ ये था की मोना और अब्दुल शहर से दूर एक पुरानी गाड़ियों के गोदाम के में थे,अब्दुल मोना को गाड़िया दिखा रहा था ,ऐसे तो उस गोदाम में 20 से ज्यादा लोग काम करते थे लेकिन वो चलते हुए अंदर आ गए थे,विक्रम पेट्रोलिंग में निकला था और उस जगह एक महंगी गाड़ी देख कर रुक गया था,अदंर जाते ही उसने तलाशी और जानकारी लेनी शुरू कर दी ,वँहा से कर्मचारियों ने उसे पूरी इन्फॉर्मेशन दे दी लेकिन वो फिर भी अंदर घूमने लगा,उसे एक जवान और हसीन लड़की साड़ी ने दिखाई दी हँस हँस कर एक लंबे चौड़े मर्द से बात कर रही थी ,उसे विक्रम ने पहचान लिया था ये तो वही केस वाला सस्पेक्ट था,उसने अपना पुलिसिया रुतबा दिखाने की सोची और जाकर उनसे कह पड़ा की साले इस रंडी के साथ यंहा क्या कर रहा है...और मोना के घूमते हुए हाथ ने उसका गाल लाल कर दिया,उसने सोचा था की पुलिस वर्दी देखकर दोनो ही डर जाएंगे जैसा की वो पहले भी कर चुका था लेकिन उसे नही पता था की वो किससे पंगा ले रहा था...

'माफ कर दीजिए सर ,मैं आज ही आया हु .."

"लगता है बहुत ईमानदार कर्मठ हो जो आते ही फाइल देखना शुरू कर दिया ,तुम अभी के अच्छे शागिर्द बनोगे .."मोना ने मुस्कुराते हुए कहा .

विक्रम ने भी मुस्कुराते हुए अपना पसीना पोछा ...
 
Update 27
"देखो तब की बात और थी अब तुम शहर में हो,यंहा के लोग पढ़े लिखे और सशक्त है ,अपने अधिकारों के बारे में जानते है तुम ऐसे ही किसी को कुछ भी नही कर सकते.."

मैं विक्रम को समझा रहा था..उसने सामने रखा अपना रम का पैक एक ही झटके में अपने हलक के अंदर उतार दिया..

"चुप कर भोसडीके मुझे ज्ञान मत चोद तेरी बीवी नही होती ना तो बताता.."

विक्रम ने अपने गाल को सहलाते हुए कहा ..

'मादरचोद पहली बात की अगर वो कोई और भी होती ना तो तू कुछ नही उखाड़ सकता था,प्यार से समझा रहा हु समझ नही आता.."

"लौड़े तेरे शहर में पुलिस वाले फट्टू होते है क्या,वहां साला एक मुजरिम तेरी बीवी के साथ था और तू उन दोनो की वकालत कर रहा है .."

मुझे उसके ऊपर गुस्सा तो बहुत आया लेकिन मैं उसे पी गया..

"भोसडीके wo तेरा ट्रांसफर एक फोन में कर देता वो ,झांट भर कर इंस्पेक्टर है तू अपनी औकात मत भूल ...और मोना एक गाड़ी देखने गई थी ,मुझे बताकर समझ गया,.."

उसने मुझे घूर कर देखा ..

"मेरे इंस्पेक्टर होने का मजाक उड़ा रहा है भोसडीके भूल मत की अगर मैंने नोट्स नही दिए होते तो तु साले अभी भी बेरोजगार घूम रहा होता."

मैंने अपना माथा पकड़ लिया ..

"अबे लौड़े के चने ,तूने भी तो वही नोट्स पढ़े थे फिर तू क्यो PSC नही निकाल पाया,अब ये मत भूलना की तू बस एक इंस्पेक्टर है और मैं एक DSP ."

उसने मुझे घूरा ..

"लौड़े अगर मेरी बहन की शादी नही होती तो मैं भी तेरे से बड़ा अधिकारी होता,साले कोचिंग के तो पैसे थे नही तेरे पास मैं कोचिंग जाता था पढ़ता था ,और उसी नोट्स को पढ़कर तू PSC नीकाल कर DSP क्या बन गया मुझे ही ज्ञान चोद रहा है ."

उसने एक ही झटके में अपना ग्लास फिर से खत्म कर दिया ..

"मादरचोद जानता हु तू कोचिंग क्यो जाता था,बहन की शादी का बहाना मत बना भोसड़ी के लौड़ी तड़ता रहता था वँहा जाकर बेचारी बहन को क्यो बीच में लाता है,साले कभी इंटरव्यू तो निकला नही तुझसे बात करता है तू साले इसी नॉकरी के काबिल था और ये भी मिल गया वो भी गनीमत है ."

उसने गुस्से से मेरी ओर देखा ,मेरी हँसी निकल गई.

"चुप कर भोसडीके उस समय की भूल आज भी दुख देती है काश उस समय पढ़ लिया होता तो तेरे ये ताने नही सुनता,साले तू DSP बन गया और मुझे बस sub इंस्पेक्टर के पोस्ट से ही संतुष्ट करना पड़ रहा है .."

मैं खिलखला कर हंसा ..विक्रम मेरे संघर्ष के दिनों का साथी था,मैं गरीब घर का था जैसे तैसे उसी की बदौलत मैं जॉब करते हुए अपनी पढ़ाई की थी ,एक नंबर का चिड़ीमार था लेकिन दिल का साफ और मदद करने में अव्वल था ,उसके कारण ही मैं सिविल सेवा में आया था,लेकिन उसके चूद के शौक ने उसे ज्यादा बढ़ने नही दिया ,वही मैं दिन रात की मेहनत से DSP बन गया और फिर अपनी काबिलियत से क्राइम बैंच तक आया..वो भी मेरी तरह चालक इंसान था लेकिन उसके अंदर ईमानदारी का एक कीड़ा था ,एक तो ईमानदार दूसरा चुद का दीवाना इसी लिए उसे नक्सली इलाको में ही रखा गया,अब जाकर मैंने गृहमंत्री से बात करके इसे अपने इलाके में पोस्टिंग दिलवाई थी .

"लेकिन यार अभी मुझे बस एक चीज समझ नही आयी की वो साला अब्दुल भाभी ऐसे बात कर रहा था जिसे ...भाई गलत मत समझना लेकिन ."

वो हिचकिचा रहा था ..

"क्योकि मेरे तरफ से तेरी भाभी को पूरी आजादी है ,और वो मुझे बता कर ही वँहा गई थी,उसे एक कर चाहिए और अब्दुल ने कहा था की उसके पास सेकंड हैंड कार की भरमार है ,सस्ते में दिला देगा तो देखने गई थी ."

"आजादी है मतलब .."

"मतलब की वो चाहे जिससे जैसे बात करे मुझे कोई प्रॉब्लम नही है .."

विक्रम ने मुझे घूरा ..

"और कुछ ज्यादा हो गया तो .."

"तो भी कोई प्रॉब्लम नही है ,वो मोना की मर्जी है .."

वो फिर से मुझे घूरता रहा ..

"मादरचोद तू चुतिया है की चोदू.."

मुझे उसकी बात पर गुस्सा नही बल्कि हँसी आयी ..

"साले तेरी बीवी किसी दूसरे के साथ और तुझे कोई प्रॉब्लम नही होगी .."

"यार जब उसकी मर्जी हो तो क्यो प्रॉब्लम होगी .."

वो भन्ना गया ..

"तब अगर भाभी मेरे साथ कुछ करे तब भी तुझे प्रॉब्लम नही होनी चाहिए .."

उसने बेहद गुस्से से मुझे देखा ..

"तो पटा ले तू ही उसे मैंने कब मना किया है ,ऐसे हॉट है की नही .."

वो अब भी गुस्से में था ..

"भाभी को उस नजर से थोड़ी देखूंगा मादरचोद...लेकिन अगर वो किसी और से सेट हुई ना तो तेरा भाई कसम लेता है की उसे अपने नीचे ले आऊंगा ...और तेरे सामने ही ."

वो इतना ही बोल पाया था की रुक गया ,शायद नशे में वो इतना बोल गया था ,उसके चहरे में ग्लानि के भाव साफ दिख रहे थे ..

"साले तू चोदू बन गया है बे ,तू मेरा वो दोस्त नही जिसने प्रहलाद को सिर्फ इसलिए मार दिया था क्योकि वो मेरी आइटम के साथ बात कर रहा था,साले मोना तेरी खुद की आइटम नही बल्कि बीवी है और तू उसके बारे में ये बोल रहा है ."

उसकी बात मेरे दिल में लग गई थी ...मैंने एक गहरी सांस ली ..

"दोस्त तूने सच कहा अब मैं वो लड़का नही रहा .."

अब मुझे उसकी आंखों में अपने लिए एक घृणा के भाव दिखे लेकिन फिर भी मैं शांत ही था ..

"तू अब गांडू हो गया है मादरचोद तुझे तो दोस्त बोलते हुए भी शर्म आ रही है ,"

उसने अपना पैक एक ही सांस में खत्मकर दिया और उठकर जाने लगा..

"सुन अगर अब्दुल तुझसे पहले मोना तो पटा ले गया तो .."

वो गुस्से से मुझे देखने लगा..

"भाभी को अगर कोई चोदेगा तो वो मैं होंउंगा कोई दूसरा नही .."

वो गरजा ..आंखों में एक अजीब से नफरत के साथ वो नफरत मेरे लिए ही थी ..

"तो याद रखना किसी को हमारी दोस्ती की भनक नही लगनी चाहिए.."

मैंने शांत स्वर में कहा वो गुस्से में मुझे देखता हुआ वँहा से निकल गया,और मैं एक लंबी सांस लेकर अपने ही कुर्सी में लेट गया मेरे आंखों में एक आंसू अनजाने में ही आ गया था ..
 
Update 28
मेरा फोन घनघना उठा था ,नंबर विक्रम का था ..

"हल्लो .."

"बे गांडू तेरी बीवी उस अब्दुल के साथ रेस्टारेंट में बैठी है .."

"तमीज से बात कर मुझसे .."मैं भड़का ,लेकिन वो हंसा

"तुझसे तमीज से बात ...किस बात की तमीज और किस बात की इज्जत जो अपनी बीवी को नही सम्हाल पाए उसे मैं चुतिया कहता हु ,और जिसे पता हो की उसकी बीवी अपने आशिक के साथ है फिर भी चुप रहे उसे गांडू.."

अभी भी उसके आवाज में वही गुस्सा था ..

"भोसडीके मैं तेरा अधिकारी हु .."

"अरे माँ चुदाये साला,अधिकारी बनता है कर ले जो करना है नॉकरी से निकाल देगा ना और क्या करेगा ,भाड़ में जाए ऐसी नॉकरी .."

मैं उसे जानता था और इसलिए चुप रहना भी बेहतर समझा

"क्या हुआ बे गांडू .."

"वँहा क्या कर रहा है तू.."

"अब ये मत कहना की यंहा भी मोना तुझसे पूछ कर आयी है ,मादरचोद कही वो अब्दुल से चुदती तो नही ना .."

"मादरचोद ..'मैं चिल्लाया

"हद में रह तू अपने .."वो भी थोड़ा सहम गया शायद वो ज्यादा भी बोल गया था ..

"सॉरी यार वो गलती से .."

"तेरी हर गलती इसीलिए माफ कर देता हु क्योकि तू मेरा दोस्त है .."

"नही तो क्या उखाड़ लेता .."

वो हंसा ,मैं हँस तो नही पाया लेकिन साले पर गुस्सा भी नही आया

"क्या कर रही है मोना वँहा ..'

"अब तू मुझसे अपनी बीवी की जासूसी करवाएगा .."

"नही बे मैं तो तेरी मदद कर रहा हु ,अब दूसरे से चुदे उससे अच्छा है की मेरे दोस्त से ही चुदे ."

मेरी बात से वो गंभीर हो गया था ..

"अभी ..यार तू कुछ छुपा तो नही रहा है ना मुझसे ,तू ऐसा कैसे कर सकता है बे ,कौन सी बात तू अपने दिल में दबा के रखा हुआ है जो तू ये सब कर रहा है,मैं तुझे जितना जानता हु तो अपने प्यार पर किसी दूसरे का साया भी बर्दास्त नही कर सकता था आज क्या हो गया है तुझे भाई .."

उसकी आवाज में एक दर्द था ..

"बोला ना तेरा भाई अब बदल चुका है उसे मजा आता है की कोई उसकी बीवी के साथ ..अब तक कई लोग उसके आशिक बन कर घूम रहे थे अब तू भी उनमे शामिल होजा .तसल्ली रहेगी की मेरी बीवी के ऊपर चढ़ने वाला मेरा ही दोस्त है ."

वो ऐसे चुप हो गया जैसे सांप सूंघ गया हो ..

"अब बता क्या कर रहे है दोनो .."

विक्रम की नजर अब भी उस रेस्टारेंट में थी ..

"पता नही साले किस बात पर इतना हँस रहे है ,मोना बार बार बेवजह ही शर्मा रही है ,ऐसा लग रहा है कोई प्रेमी जोड़ा हो .."

मैं हंसा ..

"तो तू क्या कर रहा है ..भूल जा की वो मेरी बीवी है बस ये सोच की वो एक चूद है जो तेरा टारगेट है मुझे पता है की तूने आज तक कभी अपना टारगेट मिस नही किया है ."

वो थोड़ी देर तक कुछ नही बोला लेकिन फिर एक गहरी सांस ली जैसे कोई बड़ा फैसला कर लिया हो .

"अगर तुझे यही चाहिए तो ठीक है आज से मोना मेरे लिए मेरी भाभी नही एक टारगेट है ."

उसने फोन रख दिया....
 
Update 29
15 दिन बीत चुके थे ,ना ही विक्रम ने मुझे कुछ कहा था ना ही मोना ने ,बस मोना के तेवर थोड़े बदले से थे,वो सज धज कर घर से निकलती थी ,पहले भी वो सज धज कर ही जाती थी लेकिन अब वो मुझे बोलकर जाती थी की वो अपने आशिकों के लिए तैयार हो रही है ...शायद मुझे जलाने के लिए लेकिन मैं उसे बस इतना ही कहता था की तेरी जैसी इक्छा .

मुझे मेरे खबरी का फ़ोन आया की कलकत्ता से माल आना शुरू हो चुका है ,मेरे कान खड़े हो चुके थे .

मैंने तुरंत ही डॉ चुतिया को काल लगाया ..

"खबर पता चली आपको."

"पता तो चल गई लेकिन ...क्या तुम सच में पुलिस को इसमें शामिल नही करना चाहते.??"

"नही ...ना जाने कौन उनसे मिला हो ."

"वो तो ठीक है ऐसे भी मुझे माल दुबई जाने से रोकना है ,और उसे उनके सही जगह पर पहुचना,लेकिन जो नया इंस्पेक्टर आया है उसका क्या ,तुम्ही ने तो उसे यंहा बुलवाया है ना .."

"उसकी फिक्र मत कीजिये उसे जो चाहिए मैंने उसे उसके पीछे लगा दिया है ,अब वो कुछ और नही सोच पायेगा .."

"अभी तुम्हे पूरा भरोसा है की तुम ये कर पाओगे ,कही किसी को तुम्हारे प्लान का पता चल गया तो .."

"फिक्र मत करो नही चलेगा,जिसे पता होना चाहिए उसे मैं खुद ही बता दूंगा ,लेकिन अपने तरीके से ."

"तुम पर इतना तो भरोसा है की तुम कुछ दूर की सोच कर ही काम कर रहे होंगे .."

"थैंक्स डॉ आप भी अपनी आंखे और कान खुली रखना ,जैसे ही दुबई से माल आ जाए हमे अटैक करना होगा .."

"लेकिन किससे अटैक करेंगे,पुलिस की मदद तो तुम ले नही रहे हो ,और मेरे पास इतने आदमी भी नही है ."

"जंग लोगो से नही दिमाग से जीती जाती है डॉ ,सालो को ऐसा फ़साउंगा की बस सोचते ही रह जाएंगे की हुआ क्या था ."

मेरी आवाज में एक अजीब सी बात थी जिसने डॉ को संतुष्ट कर दिया था ...
 
Update 30
"अभी तुम्हे सम्हाल कर रहना चाहिए, मोना के कदम इतने बहक रहे है और तुम हो की बात को बिल्कुल ही मजाक में ले रहे हो .."

"क्या बहक रही है वो ,"

"वो अब्दुल के साथ घूम रही है ,कभी भी उसके साथ चले जाती है और .."

"और .."

"और कुछ नही ,तुम थोड़ा तो लगाम लगाओ यार .."

"इतना तो तुम्हारे साथ भी करती थी तो क्या तुम्हारे साथ भी वो गलत थी .."

"हम दोस्त है .."

"वो भी तो दोस्त ही है .."

"लेकिन फिर भी .."

"तू कहना क्या चाहता है बे .."

राज की बात से मेरा दिमाग पक गया था ,

"कुछ नही वो .."

"वो क्या साफ साफ बोल दे मुझसे फटती है क्या ,या मोना से फटती है जो मुझसे बात करने चला आया है .."

राज(मोना का कलीग ) थोड़ा बेचैन दिखा ..मुझे पता था की ये भी मेरे बीवी के आशिकों में एक है ..और मोना को लाइन मारने की भरपूर कोशिस में लगा हुआ रहता है लेकिन जब लोग असफल हो जाते है तो उनकी सफल लोगो से जलने लगती है और इस समय इस खेल में अब्दुल ने राज को पछाड़ दिया था ,मोना अब्दुल के साथ ही ना की राज के साथ ,राज की इतनी जली की वो मेरे ऑफिस तक पहुच चुका था .

"ऐसा नही है .."

"तो प्रॉब्लम क्या है की तू इतना बताने के लिए मेरे ऑफिस तक आ गया है ,ऐसी क्या दोस्ती है तेरे और मोना के बीच और हम तो बस उस पार्टी में ही मिले थे उसके बाद से तो आज तक हम मिले नही फिर भी तू मेरे पास आ गया आखिर राज क्या है राज जी ."

उसे अपनी गलती का अहसास हो चुका था,वो बिना किसी तैयारी के ही मेरे पास आ गया था ,और मेरे चहरे का गुस्सा भी उससे छिपा नही था ..

"कुछ नही बस दोस्ती के नाते बता रहा हु .."

"तेरी दोस्ती मोना से है ना की मुझसे "

"मोना को समझने की कोशिस की लेकिन वो संमझती नही ,"

मेरे होठो में एक व्यंगात्मक सी मुस्कान आ गई ..

"मुझे लगा की तुम्हे बता दु,लेकिन तुम भी कुछ नही सुनना चाहते खैर ओके बाय .."

"रुक...मोना के खिलाफ मेरे कान भरने से पहले ये याद रखना की मैं उसे तुझसे ज्यादा जानता हु और उसपर भरोसा करता हु समझ गया ."

उसने बस मुझे एक नजर देखा और तुरंत ही बाहर चला गया ..
 
Update 31
रात के लगभग 1 बजे थे घना ठंड था जिससे हड्डियां भी कांप रही थी ,मेरे हाथो में बस एक टार्च था जिसे भी मैं जला नही रहा था,रम के चार पैक ने मुझमें थोड़ी गर्मी का संचार तो किया था लेकिन फिर भी हाथ पैर कांप ही रहे थे,मैंने अपनी बाइक उस गोदाम से थोड़ी ही दूर में खड़ा किया हुआ था ,मोबाइल साइलेंट में था , और अंधेरे में आंखों को अरजेस्ट करने की कोशिस करते हुए मैं दीवाल की मदद से कोई ऐसी जगह तलाश रहा था जिससे मैं उस गोदाम के अंदर जा सकू ,लगभग 10 एकड़ के फैलाव में फैले हुए उस विशाल खुले हुए गोदाम में 500 से ज्यादा अलग अलग किस्म की गाड़िया बिकने आयी हुई थी ,उठा डंप की गई थी ,मैं बेहद ही सावधानी के साथ दीवार फांद गया और अभी तक मैंने टार्च का उपयोग नही किया था ,मैं सारा गोदाम ही सुनसान था,गेट पर बने हुए एक छोटे से मकान में एक गार्ड सो रहा था ,वही बाकी के कर्मचारी भी बड़े बड़े रजाई ओढे घोड़े बेच कर सो रहे थे ,मेरे लिए वँहा स्वत्रन्त्र होकर घूमना आसान हो गया था ,लेकिन फिर भी मैं कोई रिस्क नही लेना चाह रहा था लेकिन फिर एक जगह जाकर मैं ठिठक गया,दो गार्ड पूरी मुस्तैदी से तैनात दिखाई दिए ये गोदाम के सबसे पीछे का हिस्सा था ,थोड़ी आग जला रखी थी जिससे उन्हें गर्मी मिलती रहे वही ओल्डमोंक की एक खाली बोतल से भी समझ आ रहा था की ये नशे में तो है लेकिन फिर भी पूरी तरह से सतर्क है .

ये ही इतना समझने को काफी था की जिस माल की तलाश में मैं यंहा पहुचा हु वो यंही रखा गया था.

मेरे होठो में एक मुस्कान आ गई,जब मैंने पास ही खड़ी एक बड़ी सी गाड़ी को देखा ,लगभग 30 चक्कों की गाड़ी थी जिसमे महंगी कारो को ले जाया जाता है ,उसका यंहा होने का एक ही मतलब था की माल की डिलवरी यंही से होगी या इसी से होगी ,मैंने एक ट्रेकिंग डिवाइस निकाल कर उस ट्रक में ऐसे लगा दिया की किसी को दिखाई ना दे .

मैं जिस तरह से आया था चुप चाप उसी तरह से वापस भी चला गया,ये सब करने में मुझे मुश्किल से आधे घण्टे ही लगे थे .

1:30 हो चुका था..मैंने मोना को काल किया ..

"हल्लो कहा हो अभी .."

उसकी सांसे थोड़ी तेज थी .

"मैं अभी ..आप कहा हो "

"मैं घर आने को अभी निकल रहा हु ,आधा घंटा लगेगा .."

"ओह .."उधर से आवाज बिल्कुल शांत सी आने लगी

"तुम कहा हो .."

"मैं थोड़ी देर में आ जाऊंगी थोड़ा लेट हो गई आज .."

"अब्दुल के साथ हो .."मैंने तुरंत ही पूछ लिया

"हा ..मैं भी यंहा से निकल रही हु .."

उसने के सपाट जवाब दिया और फोन रख दिया,मेरे होठो की मुस्कान और भी गाढ़ी हो चुकी थी .

मैं तुरंत ही अपनी गाड़ी को बिना स्टार्ट किये ही ढुलाते हुए उस गोदाम के गेट के पास लाया,

करीब 15 मिनट हुए थे की गेट खुला ,मैंने भी अपना हेलमेट पहन लिया था ,मेरी निगाह लगातार उस गेट पर ही थी ,एक महंगी गाड़ी वँहा से निकली जो की अब्दुल की गाड़ी थी ,मैं साफ देख सकता था की पीछे औरत बैठी थी और ड्राइवर गाड़ी चला रहा था .

उस औरत को मैं पहचान सकता था ,पहचानता भी कैसे नही वो मेरी जान जो थी ,वही लंबे बाल जो अभी बिखरे हुए थे वो उसे सम्हाल रही थी ,मैं उस गाड़ी के पीछे हो गया लेकिन दूरी बनाये रखी,जबतक की गाड़ी भीड़ भाड़ वाले रोड में नही आ गई .

वो गाड़ी तेजी से चल रही थी जैसे उसे कही एक निश्चित समय में पहुचनी हो .

मोना अपने बालो को संवार थी ,वही वो अपने पर्स से दर्पण निकाल कर अपने होठो के साथ कुछ कर रही थी ,चलती हुई गाड़ी में वो अपना हुलिया ठीक कर रही थी जिसका मतलब साफ था की उसका हुलिया किसी ने पहले बिगड़ा था.

वो गाड़ी मेरे बंगले के पास आकर रुकी और मोना उतर कर गेट के पास रुकी अंदर देखा,मेरी गाड़ी नही होने के कारण शायद उसे थोड़ी शांति मिली हो ,मैं दूर ही खड़ा सब देख रहा था की वो अदंर चली गई ,थोड़ी देर बाद मैं भी घर पहुचा गया.

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं अंदर गया तो मोना दर्पण के सामने खड़ी हुई थी,उसने अभी भी वो कपड़े पहने हुए थे,मैंने उसे पीछे से जाकर जकड़ लिया .

"कहा थी ..??"

"बताई ना अब्दुल के साथ .."

"कहा.."

"उसके फॉर्महाउस में .."

मेरा माथा ठनका .

"ओह तो क्या हुआ तुम्हारे बीच "

उसने मुझे अपने से दूर किया और मेरे चहरे को देखने लगी

"अपने कहा था की आप कुछ नही पूछोगे."उसकी मुस्कान बेहद ही कातिलाना थी

"अरे लेकिन इतना तो हक बनता है पति हु तुम्हारा .."

वो खिलखिलाई

"अब नही बनता जो जानना है खुद ही पता कर लो ...हमारे करार के अनुसार मैं आपको कुछ भी बताने के लिए बाध्य नही हु और किसी के भी साथ कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र हु .."

मैं उसे आंखे फाड़े देख रहा था वो हंसती हुई जाने लगी मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने से सटा लिया ..

"बहुत कानूनी बात कर रही है.."

उसके दिल की धड़कन तेज थी वही मेरा दिल भी तेजी से धड़क रहा था ,वो थोड़ी घबराई जरूर लेकिन फिर मुस्कुराने लगी ..

"मेरे पति ही कानून की भाषा समझते है तो मैं क्या करू ,अपने साफ साफ कहा था ,अब मुकरने से कोई फायदा नही है या ये कह दो की मत कर ,नही करूंगी ,लेकिन कुछ पूछना नही जो बताने के लायक होगा मैं बता दूंगी लेकिन जब मेरी मर्जी हो तो ..आजादी दिए हो तो पूरा दो वरना मत ही दो .."

उसके हर शब्द मेरे दिल में तीर के जैसे लग रहे थे,मुझे लगा की मुझसे कोई गलती हो गई लेकिन अगले ही पल मेरे जेहन में कई दृश्य एक साथ घूम गए मेरी पकड़ मोना के ऊपर ढीली पड़ गई मैं माथा पकड़ कर बिस्तर में बैठ गया.

"क्या हुआ मैंने तो पहले ही कहा था की आपसे ये सब सहन नही होगा लेकिन आप तो अपनी पतिव्रता पत्नी को दूसरे के बांहो में भेजने के लिए आतुर थे...लेकिन आपसे एक वादा है जब रुकने को कहोगे तब ही रुक जाऊंगी कही आपकी ये फेंटेसी हमे महंगी ना पड़ जाए .."

मैं माथा पकड़ कर तो बैठा था लेकिन मेरे होठो में एक तेड़ी मुस्कान आ गई जिसे मैंने मोना से छिपाया और थोड़ा सम्हालते हुए कहा ..

"जब तक सह पाऊंगा तब तक तुम्हे नही रोकूंगा मैं भी देखना चाहता हु की आखिर मैं किस हद तक जा सकता हु ...और तुम किस हद तक.."

वो मुस्कुराई

"मेरी फिक्र मत करो मैं किसी भी हद तक जा सकती हु,मेरे लिए कोई भी हद नही है बस आप अपनी सोचो ऐसे भी आपको कैसे पता चलेगा की मैं किस हद तक गई हु ."

वो बेहद ही कातिलाना मुस्कान से मुस्कुरा रही थी ,वो मुझे जलाने में कोई कसर नही छोड़ती थी ..

मैंने उसके हाथ को पकड़ कर उसे अपने बिस्तर में खिंच लिया ,वो अब मेरे ऊपर लेटी हुई थी,उसके मुह से थोड़ी शराब की बदबू आ रही थी जो उसके खुद के परफ्यूम में कही घुल जा रही थी ,साड़ी का पल्लू नीचे हो गया था उसके वक्ष उसके गोल्डन कलर के ब्लाउज से बाहर झांक रहे थे और मेरे सीने में जा धंसे ...उसके बाल मेरे चहरे से टकरा रहे थे जिसे उसने बाजू किया उसका चहरा अब मेरे चहरे के ऊपर था ..

वो अब भी उसी मुस्कान के साथ थी उसने अपनी कमर को मेरे कमर पर हल्के से चलाया .

"आप नही सुधरोगे,दिल की धड़कने तो बढ़ी हुई है लेकिन लंड बिल्कुल तना हुआ है .."वो खिलखिलाई} ..

"शायद यही सोच रहे होंगे की अब्दुल ने मेरे साथ क्या किया होगा,ऐसे भी जब आपका फोन आया था तो मेरी सांसे तेज थी ,टूट सोचो वो उस संयम मेरे साथ क्या कर रहा था .?"

मैंने उसे जोरो से जकड़ कर उसे अपने नीचे ले आया ,उसके गोरे उरोजों को देखकर मेरा लिंग और भी तन गया वो जीन्स में मुझे दर्द दे रहा था .

मैंने अपने जीन्स को निकाल फेका मेरे अंडरवियर में मेरा मूसल मोना के जांघो के बीच रगड़ खा रहा था ,वो भी हल्की सिसकारी ले रही थी .

मैं उसके होठो में अपने होठो को घुसा दिया ,वो जैसे तड़फने लगी ..

"क्या किया अब्दुल ने तेरे साथ .."

वो मुस्कुराई ..

"खुद पता कर लो .."

वो खिलखिलाई

"साली पूरी रंडी बनती जा रही है .."

"यही तो चाहते थे ना की आपकी बीवी दुसरो के लिए रंडी बन जाए .."उसका स्वर ऐसा था जैसे वो बेहद ही उत्तेजित हो ..

मैंने उसे कोई जवाब नही दिया बस उसके साड़ी को खोलने लगा ,उसकी कमर में मुझे एक खरोच के निशान दिखे मेरी नजर वहां अटक गई थी ..

"क्या देख रहे हो ये मेरे प्रेमी ने मुझे दिया है ,साला कितने जोरो से पकड़ता है .."

मैं और भी मचल गया और बुरी तरह से उत्तेजित होकर उसके ऊपर टूट पड़ा,उसके होठो में एक विजयी मुस्कान आ गई थी जो मुझसे नही छुप पाई थी ,मैं भी जानता था की उसकी मुस्कान कितनी सार्थक थी असल में उसका पलड़ा मुझसे हमेशा से ही भारी रहा था ,और आज उसे अपने असली जीत का अहसास हो रहा होगा...और मैं उसे यही अहसास दिलाना चाहता था ..

मैं और भी जोरो से उसके ऊपर टूटा,दोनो ही नंगे होकर सेक्स के खेल में जुट गए थे..

"आह आह मेरी जान अब्दुल जोर से करो ना .."

मैं किसी पिस्टल की तरह उसे पेल रहा था ..

"मादरचोद रंडी ये ले .."मैं और भी जोरो से उसे पेलने लगा उसके होठो की मुस्कान और भी बढ़ गई ..

"आह रोहित मेरी जान ..आह राज ..शर्मा जी .."

वो मुझे उत्तेजित करने के लिए अपने हर आशिक का नाम ले रही थी .

"सभी तुझे मिल कर चोडेंगे साली रंडी .."मैं जोरो से पेल रहा था ..

"हा सभी एक साथ एक साथ ..आह मेरी जान आह चोदो ना इंस्पेक्टर साहब ...विक्रांत .."

मैं चौका और उसे देखने लगा ...वो रंडिपन की हद सी मुस्कुराई ..

"ये नया आशिक है मेरा आप अपना काम चालू रखो ना "

उसकी वो मुस्कान मुझे जलाने के हद से ज्यादा ही थी मैंने जोरो से उसके गाल पर थप्पड़ मारा लेकिन वो फि भी मुस्कुरा रही थी ..

"अब अपनी रंडी बीवी का रंडिपन देखो मेरी जान .."

उसने हंसते हुए कहा और खिलखिलाने लगी,मैं उसके गालो को जोरो से दबा दिया और जोरो से उसे पेलने लगा,,,

वो भी मस्त थी और मैं भी जलन की हद में अपना गुस्सा निकाल रहा था लेकिन मोना को इसमें बेहद ही मजा आ रहा था,मैं उसके ऊपर पूरी तरह से छा गया था ऐसा सेक्स हमने अपने पूरे जीवन में कभी नही क्या था शायद यही वो मजा था जिसके कारण लोग जलना भी पसंद कर लेते है ...मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दिया और अपना लावा पूरा उसके अंदर उड़ेल दिया..

सांसे जब थोड़ी सामान्य हुई हमारे होठ मिल गए ..
 
Update 32
"नही साहब वो तो कल रात अपने हवेली में ही था ."

मेरा खबरी कह रहा था..

"सच कह रहा है कही निकला नही ."

"नही साहब कल तो कुछ लोगो के साथ ही था,कोई बाहर से आये थे "

"और उसकी गाड़ी लेकर कौन गया था .."

"कौन सी कई गाड़िया है उसके पास तो ."

"वो सफेद रंग की मर्सडीज नंबर ****** "

"वो कल रात को यंहा नही थी,शायद ड्राइवर उसे लेके किसी काम से ले गया हो ."

"ड्राइवर से पता करके बता की किस काम से गया था और कहा गया था .."

"ओके साहब .."

मैं सोच में पड़ गया था की अगर अब्दुल अपने हवेली में मीटिंग में था और वही रहा तो रात में मोना के साथ गोदाम में कौन था ...गाड़ी तो अब्दुल की ही थी ,शायद ड्राइवर ही कुछ बता पाए .

,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

मैं ट्रक की लोकेशन देख रहा था वो गोदाम से निकल कर फिर एक सुनसान जगह पर जा रुका था,वो असल में अब्दुल का फॉर्महाउस था ,वँहा से वो ट्रक फिर से गोदाम चला गया ,माल को इकठ्ठा करके फॉर्महाउस में ट्रांसफर कर दिया गया था ,अब क्लाइंट के आने का इंतजार था ,...मुझे फॉर्महाउस के लिए निकलना था ताकि मैं उस जगह को अच्छे से समझ कर अपना प्लान बना सकू क्योकि मुझे उम्मीद थी की सब खेल वही होगा,वो शहर से लगभग 20 किलो मीटर बाहर था और वँहा से समुद्र की दूरी कुछ 50 किलोमीटर की ही थी ,माल वही से देश के बाहर जाना था ,और जंहा तक मुझे आभस था की क्लाइंट को भी वही से आना था ,...लेकिन कुछ कहा नही जा सकता था ...क्योकि इसके बारे में किसी खबरी को कोई पुख्ता जानकारी अभी तक नही थी .

मैं निकलने ही वाला था की मेरा फोन घनघनाया .

"हल्लो "

"हा साहब वो ड्राइवर कल किसी काम से गोदाम गया था अब्दुल को लेके लेकिन फिर वो नया इंस्पेक्टर आ पहुचा वँहा ,अब्दुल की रांड ने उसे कहा की वो वँहा से निकल जाए तो वो दूसरी गाड़ी लेके निकल गया ,और वो लड़की इंस्पेक्टर के साथ वही रुक गई,फिर उन दोनो को ही ड्राइवर घुमाने ले गया था फिर जाकर गोदाम में ही छोड़ा और फिर उस लड़की को उसके घर छोड़ कर वापस हवेली में आ गया ."

"अब्दुल की रांड.?"

"हा वो एक औरत है आजकल अब्दुल के साथ ही दिख जाती है ,मुझे लगा की वो अब्दुल की कोई माल होगी ,ऐसे ड्राइवर ने बताया की उसने इंस्पेक्टर को अच्छे से सेट कर लिया शायद पुरानी जानपहचान थी दोनो में,वो तलाशी लेने आया था लेकिन कुछ ही नही किया,वो बाहर गए और दारू पीकर वापस आये ,ड्राइवर बता रहा था की वापस आते वक्त इंस्पेक्टर ने लड़की को बुरी तरह से मसला हा हा हा .."

वो एक घिनोनि सी हँसी में हंसा ..

"हा चल ठीक है ,तू अब्दुल पर नजर रख लड़की कोई भी हो हमे उससे कोई मतलब नही है ...अभी वो कहा है.."

"साहब वो शायद फॉर्महाउस को ही निकला है ,अपनी उसी आइटम के साथ ."

"ओके.."

मैंने घड़ी देखी दिन के 2 बजे थे इसवक्त तो मोना को अपने ऑफिस में होना चाहिए था लेकिन वो अब्दुल के साथ ही ,दोनो का याराना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था.

और कल वो अब्दुल नही बल्कि विक्रम के साथ थी ..मतलब अब्दुल उसे अपने हथियार की तरह भी यूज़ कर रहा था.

मैंने एक गहरी सांस ली क्योकि मेरे लिए ये जरूरी था ...मैं तुरंत ही तैयार होकर फॉर्महाउस की तरफ निकल कर भागा ..

*****************

कई एकड़ में फैला हुआ वो फार्महाउस बेहद ही सुनसान लग रहा था,लेकिन बाहर से ही अंदर की सच्चाई का मुझे अभी तक तो पता भी था मैंने हमेशा की तरह पहले अपने बाइक को ठिकाने लगाया और फिर दीवाल खुदकर अंदर पहुच गया था .

जैसा की मुझे लगा था की बाहर से सुनसान दिखाने वाली ये जगह अंदर से कुछ और ही होगी ,बिल्कुल वही हो रहा था ,वँहा कई लोग उपस्थित थे,कुछ गार्ड बाहर दिख गए जो बेहद ही चौकन्ने दिख रहे थे ,वही कुछ कार भी खड़ी थी ,चारो ओर बड़े बड़े पेड़ थे और बीचों बीच में एक बड़ा सा भवन बना हुआ था ,दो मंजिल के इस घर में मुझे सेंध मारनी थी,मैं ऐसे कई काम पहले भी कर चुका था इसलिए उतना डर मेरे अंदर नही था ,मैं जानता था की ऐसी जगहों में बाहर ही गार्ड्स ज्यादा होते है लेकिन अंदर मुझे कोई भी नही मिलने वाला क्योकि ऐसी जगह अधिकतर लोगो के ऐयासी की अड्डे होते है ,मैं धीरे धीरे बस जगह पहुच गया जंहा से मुझे अंदर जाना था,वो भवन के पीछे का हिस्सा था,अपने दूरबीन से पहले तो अच्छे से नुमाइना किया फिर एक ड्रोन की सहायता से पूरा जायजा भी ले लिया,ऊपर वाली खिड़की खुली थी वही एक खिड़की जो की नीचे थी वँहा से कुछ लोग बैठे हुए दिख रहे थे,ऐसे दो गार्ड भी थे लेकिन वो एक इंटरवेल में ही वँहा आते और सब ठीक देखकर जाते थे मैं वो इंटरवेल भी नोट कर चुका था अब मुझे उसी इंटरवेल में अंदर दाखिल होना था ,मेरे लिए ये छोटी बात थी.

मैं अंदर पहुच गया और जो काम करने आया था वो करने लगा,मुझे छोटे छोटे माइक्रोफोन सारे घर में लगाने थे,जंहा तक मैं लगा सकू,क्योकि मैं वँहा कैमरा नही लगा सकता था ,इस बार ऐसे माइक्रोफोन लगाए थे जो किसी डिवाइस के पकड़ में ना आ सके क्योकि मोना ने मुझे पहले ही सबक दे दिया था ,मैं सचेत हो चुका था...मैं एक कमरे को छोड़कर सभी में कोई ना कोई माइक्रोफोन लगाने में सफल रहा एक वही कमरा बच गया था जिसमे कुछ लोग बैठे थे,मैं ऊपर गया और नीचे उस कमरे को ध्यान से देखने लगा,पूरे घर में कोई नही था कुछ लोग बस एक ही कमरे में थे शायद कोई बड़ी मीटिंग हो रही हो .

मुझे मोना की याद आयी और मैने उसे फोन लगा दिया,रिंग बहुत देर तक बजा लेकिन वो नही उठाई मैंने दुबारा लगाया इस बार वो कमरा खुला और मोना बाहर हाल में पहुची मैं ऊपर से उसे देख पा रहा था वो मेरे सामने ही थी लेकिन नीचे थी,कमरा खुला तो मैंने देखा वो एक बड़ा कमरा है जो की शायद किसमीटिंग के लिए ही बनाया गया हो ..

"हल्लो "

"कहा है मेरी जान .."

वो हल्के से हँसी ,मैं देख सकता था वो अब भी इठला रही थी,एक पीले रंग की साड़ी में वो मेरे सामने खड़ी थी जिसे पहन कर वो घर से निकली थी .

"क्या हुआ जान आज दोपहर में ही काल कर लिया.."

"बस सोच रहा था की तुम कहा होगी .."

"कहा होंगी वही ऑफिस में हु और आप ..??"

"मैं बाहर जा रहा हु शाम तक आऊंगा ,मंन्त्री जी ने रोहित और डॉली के शादी के काम की जिम्मेदारी मुझे ही सौप दी है ."

वो थोड़ी अपसेट हो गई ..

"बस अब आपका यही काम बच गया है की अब उनकी शादी में काम भी करोगे .."मैं हँस पड़ा ऐसे ये गलत तो नही था की मंन्त्री जी ने मुझे ये कहा था,उन्होंने कहा जरूर था लेकिन मैं वो सब काम दुसरो को सौप कर इस केस में भिड़ा हुआ था..

"अरे जान तुम नाराज क्यो हो रही हो ...ऐसे तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है मेरे पास .."

"क्या ..??"

"आओगी तो बताऊंगा ऐसे आज तो जल्दी आओगी ना .."

उसने एक नजर उस कमरे की ओर देखा ..

"हा पुराने समय में ऑफिस से छूट कर .."

"ओह तो आज अपने आशिक अब्दुल के पास नही जा रही हो "

वो फिर से हँसी

"क्यो चले जाऊ क्या कल तो बहुत मजे किये आपने भी "

तभी कमरे का गेट फिर से खुला अब्दुल बाहर आ चुका था ,मोना ने उसे उंगली में हाथ रखकर इशारा किया की वो चुप ही रहे ..लेकिन वो चहरे में शरारत लिए उसके पास आया और पीछे से उसके गले से लग गया,उस लंबा चौड़ा आदमी के अंदर मोना जैसे गायब ही हो गई थी ,मोना ने उसे हाथो से मारा लेकिन वो हटा नही ..

"ऊमह छोड़ो ना अभी का फोन है सुन लेगा तो .."

मोना ने फोन को थोड़ा दूर किया लेकिन उसे नही पता था की मैं ऊपर से भी उसकी बात सुन सकता था ..

"तो क्या कल जैसे आज भी मजे लेगा सोच सोचकर .."अब्दुल की बात से जैसे मेरे सीने में एक तेज दर्द हुआ,मतलब साफ था की अब्दुल को भी पता था की मैं हमारे रिलेशनशिप को लेकर क्या फेंटेसी लिए हुआ हु .

मोना हँसी और उसने जोरो से अब्दुल को धक्का दिया और फिर से फोन अपने कानो से लगा ली ..

"आज कही नही जा रही, आ जाऊंगी शाम तक चलो रखती हु काम पर जाना है ."

मोना ने तुरंत ही फोन काट दिया क्योकि अब्दुल उसे फिर से पकड़ चुका था ..

"तुम ना मरवाओगे मुझे एक दिन .."

"अरे जब वो भी यही चाहता है तो फिर .."

"चाहता तो क्या उसके सामने ही करे ...भड़क गया ना तो तुम्हारा कुछ भी नही छोड़ेगा जानते हो ना उसका गुस्सा ,"

अब्दुल थोड़ा चिंतित हुआ ..

"लेकिन फिर हमारा क्या होगा.."

"जो अभी है हम वैसे ही रहेंगे,उसे हल्के हल्के से पता चलने दो उसे भी मजा आएगा और हमे भी ,ऐसे भी मैं उससे बहुत प्यार करती हु .."

मोना हंसते हुए उसके बांहो में सिमट गई .

मेरी बीवी मेरे सामने थी वो कह रही थी की वो मुझसे प्यार करती है लेकिन थी वो किसी दूसरे की बांहो में .

दोनो के होठ मिल गए और मैं गुस्से से भरने लगा,मैं कुछ भी ऐसा नही करना चाहता था की ताकि मुझे और मेरे प्लान को कोई प्रॉब्लम हो जाए ..मैं चुप चाप ही वँहा से निकलने की सोची लेकिन एक चीज मुझे अभी भी करनी थी वो था एक पावरफुल माइक्रोफोन उस कमरे में पहुचना ,मेरे दिमाग में एक आईडिया आया की इंतजार ही इसका एक रास्ता है ,और मैं वापस ऊपर के कमरे में चला गया...मैं बहुत देर तक वेट करता रहा ,लगभग शाम 5 बज चुके थे जब उनकी मीटिंग खत्म हुई सभी लोग जा चुके थे,मोना ने भी मुझे फोन कर बता दिया था की वो घर पहुच रही है .

मैं उस कमरे में दाखिल हुआ अपना काम कर 7 बजे तक घर पहुचा .

"अरे मेरी जान कितने थके हुए लग रहे हो .."

"हा यार इतना काम तो मैं अपने शादी में नही किया .."

मैं हंसते हुए उसके होठो को अपने होठो में ले लिया .

"कुछ सरप्राइज देने वाले थे.."

"हा मंन्त्री जी ने मुझे एक ईमान दिया है .."

मोना की आंखे खुली की खुली रह गई..

"क्या ..??"

मैंने एक इन्वलोप उसके सामने रख दिया ..

"ये क्या है ..??"

"खोल कर देखो .."

उसने उसे खोला और फिर कभी उसे तो कभी मुझे देखने लगी ..

"क्या हुआ तुम्हे पसंद नही आया .."

"वाओ जान "वो खड़ी हुई और फिर से मुझसे लिपट गई

"लेकिन ये तो उसी रात की फ्लाइट है जिस रात रोहित और डॉली की शादी होगी ..??"

"हा समझ लो की हमे पहले जाना होगा "

"कितने कमीने है साले हम जाकर उनके स्वागत के लिए वँहा खड़े रहे फिर वो आएंगे "

"देखो यार उनकी शादी कोई बड़े समारोह में तो होनी नही है दूसरे दिन ही उन दोनो की फ्लाइट है स्विटीजरलैंड की तो एक दिन पहले हम चले जायेगे तो क्या हो जाएगा ..ऐसे भी मंन्त्री जी चाहते है हम दोनो भी अपना सेकंड हनीमून मना आये तो बुराई क्या है ...मैं तो कभी अपने इतने कम पेमेंट में तुम्हे नही घुमा पाऊंगा .."

वो बड़ी इमोशनल होकर मुझे देखने लगी और फिर हमारे होठ फिर से मिल गए ..
 
Back
Top