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लिंग धीरे-धीरे पूरा अंदर चला गया और आशु की बच्चेदानी से टकराया. अब मेरे लिंग को आराम मिल रहा था और मैं कुछ देर ऐसे ही आशु पर पड़ा रहा. इसी टाइम में आशु की योनी ने भी खुद को मेरे लिंग के नितुसार एडजस्ट कर लिया. दो मिनट बाद ही मेरे लिंग में ताक़त आ गई और मैंने धक्के मारने शुरू कर दिये. आज मेरे धक्कों में पहले के मुक़ाबले बहुत तीव्रता थी और हर धक्के के साथ आशु के स्तन हिल रहे थे. आशु ने अपने दोनों हाथों के नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए थे जिससे मेरी गति और तेज हो चली थी. दस मिनट तक मैंने कस कर आशु को निचोड़ डाला था और हम दोनों ही पसीने से तर थे.पर दोनों में से कोई भी अभी तक झडा नहीं था. मैं बिना अपना लिंग आशु की योनी से निकाले आशु के बगल में लेट गया और उसे अपने ऊपर खींच लिया. आशु ने अपने हाथों से अपने बाल बांधे और तेजी से मेरे लिंग पर उछलने लगी. पाँच मिनट में वो तक गई और मेरे सीने पर सर रख कर साँस लेने लग गई. पर उसके रूकते ही जैसे मेरे लिंग ने उसकी योनी में फड़कना शुरू कर दिया था. मैंने अपने दोनों कूल्हे हवा में उठाये और नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिये. आशु के स्तन थोड़े लटक गए थे और वो मेरे हर धक्के के साथ हिल रहे थे. पाँच मिनट से ज्यादा मैं भी इस पोजीशन पर नहीं टिक पाया और तक कर अपने कूल्हे नीचे टिका दिये. हैरानी की बात ये थी की आशु और मैं दोनों अब भी टिके थे!
अब मैने आशु को अपने ऊपर से धकेल के दूसरी तरफ फेंक दिया और मैं बिस्तर से उठ खड़ा हुआ. जिस तरफ आशु के पाँव थे मैं उस तरफ पहुँचा और उसके पाँव पकड़ के उसे नीचे की तरफ खिंचा. आशु उठ के बैठ गई और उसकी नजरों के सामने मेरा लिंग लहरा रहा था. लिंग थोड़ा चमक रहा था क्योंकि उस पर आशु के योनी का रस लगा हुआ था. मुझे आगे आशु को कुछ कहना नहीं पड़ा और उसने गप्प से मेरा लिंग अपने मुँह में भर लिया. कुछ ही सेकंड में उसने अपने मुँह में थूक इकठ्ठा कर लिया और मेरा पूरा लिंग उसके गर्म थूक से नहा गया.आशु ने धीरे-धीरे मेरे लिंग को निगलना शुरू कर दिया. उसके मुँह की गर्माहट मेरे लिंग में हो रहे दर्द को आराम दे रही थी और मेरे हाथ अपने हाथ उसके सर पर आ चुका था.. धीरे-धीरे आशु मेरा पूरा लिंग अपने मुँह में ले गई और ये देख कर मेरी आँखों के आगे सुकून से भरा अँधेरा छा गया.अब आशु ने धीरे-धीरे अपने मुँह को मेरे लिंग पर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं आँखें बंद किये इस मजे का आनंद ले रहा था. मुझे तो अपनी कमर भी नहीं हिलानी पड रही थी क्योंकि आशु इतनी शिद्दत से मेरे लिंग को चूस रही थी. पाँच मिनट तक मैं उसके मुँह का आनंद अपने लिंग पर लेता रहा. फिर मैंने खुद ही लिंग बाहर निकाला और आशु को ऊँगली के इशारे से पलटने को कहा. आशु पलंग के ऊपर अपने घुटने मोड़ कर घोड़ी बन गई! मैंने अपने दाहिने हाथ की चार उँगलियों पर खूब सारा थूक निकाला और आशु की योनी में सारी उँगलियाँ एक साथ घुसा दि.आशु की योनी अंदर से गीली हो चुकी थी और मैंने अपने दोनों हाथों से आशु के दोनों नितंबो को पकड़ के एक दूसरे से दूर किया और उसकी योनी के छेद पर अपना लिंग टिका दिया. मैंने एक जोरदसार शॉट मारा और पूरा लिंग अंदर तक चीरता हुआ चला गया; "आह...हहहह…ममम...आअअ अ अ अ अ अ अ अ अह्ह्म्म मम ममममम" कर के आशु करहाने लगी. उसकी करहाने की आवाज सुन के मुझे थोड़ा होश आया और मैंने दायीं तरफ टेढ़ा हो कर उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो गर्दन नीचे झुका कर सिसक रही थी.
मेरा लिंग तो पहले ही पूरा का पूरा उसकी योनी में समां चूका था तो मैंने उसकी पीठ पर झुक कर उसके दोनों स्तनों को पकड़ लिया और अपने दोनों हाथ से मींजने लगा. मेरा ऐसा करने से दस सेकंड में ही आशु का दर्द कम हो गया और उसने अपने कूल्हों को पीछे धकेलना शुरू कर दिया. मैं उसका सिग्नल समझ गया और अपना लिंग धीरे से बाहर निकाला और फिर धीरे से अंदर पेल दिया. २-३ मिनट तक मैं ऐसे ही धीरे-धीरे धक्के मारता रहा पर आशु ने खुद कहा; "जानू!....स.स.स.स.स.स.स... तेज...और तेज!" उसकी बात मानते हुए मैंने अपनी रेल गाडी तेज कर दी और लिंग तेजी से अंदर पेलना शुरू कर दिया. मेरे धक्कों की रफ़्तार बहुत तेज हो गई थी; "अ.स.स.स.स.स्सा..अ.अ.अ.अ.हहह...नं.म.म.." की आवाज पूरे कमरे में गूँजने लगी थी. १० मिनट की ताबड़तोड़ ठुकाई और अब आशु की हालत खराब होने लगी थी. उसकी टांगें कांपने लगी थी और मेरे अगले धक्के के साथ ही वो बिस्तर पर पस्त हो कर गिर पडी. मेरा लिंग उसकी योनी से फिसल कर बाहर आ गया था पर लिंग की कसावट कम नहीं हुई थी. मैं बिस्तर वापस चढ़ा और आशु को पलट कर सीधा किया, वो बुरी तरह हाँफ रही थी पर झड़ी वो भी नहीं थी. पर मेरा लिंग इतना अकड़ चूका था की उसका दर्द कम ही नहीं हो रहा था. मैं आशु की टांगें चौड़ी की और अपना लिंग फिर से उसकी योनी में पेल दिया. अपनी कमर को फुल स्पीड से आगे-पीछे कर रहा था. मेरा लिंग तो जैसे आशु की योनी में अपनी जगह बना चूका था और बड़ी आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था. अगले २० मिनट मैंने आशु की फुल स्पीड ठुकाई की, आशु के मुँह से तो जैसे शब्द निकलने ही बंद हो गए थे. वो मेरे हर झटके के साथ बस हिल भर रही थी. २० मिनट बाद आशु के अंदर का ज्वालमुखी फटा; "आह..हहह...ननन...मममम..." करहाते हुए वो उठ के मेरे सीने से चिपक गई ताकि मैं और झटके ना मारु. पूरे एक मिनट तक वो चिपकी रही मुझसे और उसकी योनी से सारा रस बिस्तर पर टपक रहा था. पसीने से तरबतर हम दोनों एक दूसरे से चिपटे रहे, झड़ने के एक मिनट बाद आशु धड़ाम से वापस गिर गई. पर मेरे लिंग को चैन नहीं मिला था. मैंने इतनी तेजी से झटके मारने शुरू किये की पूरा पलंग हिलने लगा था और १० मिनट बाद मैं भी उस की योनी में झड़ गया और पस्त हो कर बगल में गिर गया.साँस इतनी तेज चल रही थी की पूछो मत, पसीने से हाल बुरा था और बेचारी आशु में तो जान ही नहीं बची थी वो तो बेसुध हो चुकी थी.
अब मैने आशु को अपने ऊपर से धकेल के दूसरी तरफ फेंक दिया और मैं बिस्तर से उठ खड़ा हुआ. जिस तरफ आशु के पाँव थे मैं उस तरफ पहुँचा और उसके पाँव पकड़ के उसे नीचे की तरफ खिंचा. आशु उठ के बैठ गई और उसकी नजरों के सामने मेरा लिंग लहरा रहा था. लिंग थोड़ा चमक रहा था क्योंकि उस पर आशु के योनी का रस लगा हुआ था. मुझे आगे आशु को कुछ कहना नहीं पड़ा और उसने गप्प से मेरा लिंग अपने मुँह में भर लिया. कुछ ही सेकंड में उसने अपने मुँह में थूक इकठ्ठा कर लिया और मेरा पूरा लिंग उसके गर्म थूक से नहा गया.आशु ने धीरे-धीरे मेरे लिंग को निगलना शुरू कर दिया. उसके मुँह की गर्माहट मेरे लिंग में हो रहे दर्द को आराम दे रही थी और मेरे हाथ अपने हाथ उसके सर पर आ चुका था.. धीरे-धीरे आशु मेरा पूरा लिंग अपने मुँह में ले गई और ये देख कर मेरी आँखों के आगे सुकून से भरा अँधेरा छा गया.अब आशु ने धीरे-धीरे अपने मुँह को मेरे लिंग पर आगे-पीछे करना शुरू कर दिया. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था और मैं आँखें बंद किये इस मजे का आनंद ले रहा था. मुझे तो अपनी कमर भी नहीं हिलानी पड रही थी क्योंकि आशु इतनी शिद्दत से मेरे लिंग को चूस रही थी. पाँच मिनट तक मैं उसके मुँह का आनंद अपने लिंग पर लेता रहा. फिर मैंने खुद ही लिंग बाहर निकाला और आशु को ऊँगली के इशारे से पलटने को कहा. आशु पलंग के ऊपर अपने घुटने मोड़ कर घोड़ी बन गई! मैंने अपने दाहिने हाथ की चार उँगलियों पर खूब सारा थूक निकाला और आशु की योनी में सारी उँगलियाँ एक साथ घुसा दि.आशु की योनी अंदर से गीली हो चुकी थी और मैंने अपने दोनों हाथों से आशु के दोनों नितंबो को पकड़ के एक दूसरे से दूर किया और उसकी योनी के छेद पर अपना लिंग टिका दिया. मैंने एक जोरदसार शॉट मारा और पूरा लिंग अंदर तक चीरता हुआ चला गया; "आह...हहहह…ममम...आअअ अ अ अ अ अ अ अ अह्ह्म्म मम ममममम" कर के आशु करहाने लगी. उसकी करहाने की आवाज सुन के मुझे थोड़ा होश आया और मैंने दायीं तरफ टेढ़ा हो कर उसके चेहरे की तरफ देखा तो वो गर्दन नीचे झुका कर सिसक रही थी.
मेरा लिंग तो पहले ही पूरा का पूरा उसकी योनी में समां चूका था तो मैंने उसकी पीठ पर झुक कर उसके दोनों स्तनों को पकड़ लिया और अपने दोनों हाथ से मींजने लगा. मेरा ऐसा करने से दस सेकंड में ही आशु का दर्द कम हो गया और उसने अपने कूल्हों को पीछे धकेलना शुरू कर दिया. मैं उसका सिग्नल समझ गया और अपना लिंग धीरे से बाहर निकाला और फिर धीरे से अंदर पेल दिया. २-३ मिनट तक मैं ऐसे ही धीरे-धीरे धक्के मारता रहा पर आशु ने खुद कहा; "जानू!....स.स.स.स.स.स.स... तेज...और तेज!" उसकी बात मानते हुए मैंने अपनी रेल गाडी तेज कर दी और लिंग तेजी से अंदर पेलना शुरू कर दिया. मेरे धक्कों की रफ़्तार बहुत तेज हो गई थी; "अ.स.स.स.स.स्सा..अ.अ.अ.अ.हहह...नं.म.म.." की आवाज पूरे कमरे में गूँजने लगी थी. १० मिनट की ताबड़तोड़ ठुकाई और अब आशु की हालत खराब होने लगी थी. उसकी टांगें कांपने लगी थी और मेरे अगले धक्के के साथ ही वो बिस्तर पर पस्त हो कर गिर पडी. मेरा लिंग उसकी योनी से फिसल कर बाहर आ गया था पर लिंग की कसावट कम नहीं हुई थी. मैं बिस्तर वापस चढ़ा और आशु को पलट कर सीधा किया, वो बुरी तरह हाँफ रही थी पर झड़ी वो भी नहीं थी. पर मेरा लिंग इतना अकड़ चूका था की उसका दर्द कम ही नहीं हो रहा था. मैं आशु की टांगें चौड़ी की और अपना लिंग फिर से उसकी योनी में पेल दिया. अपनी कमर को फुल स्पीड से आगे-पीछे कर रहा था. मेरा लिंग तो जैसे आशु की योनी में अपनी जगह बना चूका था और बड़ी आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था. अगले २० मिनट मैंने आशु की फुल स्पीड ठुकाई की, आशु के मुँह से तो जैसे शब्द निकलने ही बंद हो गए थे. वो मेरे हर झटके के साथ बस हिल भर रही थी. २० मिनट बाद आशु के अंदर का ज्वालमुखी फटा; "आह..हहह...ननन...मममम..." करहाते हुए वो उठ के मेरे सीने से चिपक गई ताकि मैं और झटके ना मारु. पूरे एक मिनट तक वो चिपकी रही मुझसे और उसकी योनी से सारा रस बिस्तर पर टपक रहा था. पसीने से तरबतर हम दोनों एक दूसरे से चिपटे रहे, झड़ने के एक मिनट बाद आशु धड़ाम से वापस गिर गई. पर मेरे लिंग को चैन नहीं मिला था. मैंने इतनी तेजी से झटके मारने शुरू किये की पूरा पलंग हिलने लगा था और १० मिनट बाद मैं भी उस की योनी में झड़ गया और पस्त हो कर बगल में गिर गया.साँस इतनी तेज चल रही थी की पूछो मत, पसीने से हाल बुरा था और बेचारी आशु में तो जान ही नहीं बची थी वो तो बेसुध हो चुकी थी.