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भाभी ने अपना पेटीकोट और ऊपर चढ़ा दिया और उनकी माँसल जाँघ मुझे दिखने लगी. ये देखते ही मुझे झटका लगा और मैंने तुरंत दूसरी तरफ करवट आकर ली और ये देखकर भाभी खिलखिलाकर हँस पडी. रात खाने के बाद मैं छत पर थोड़ा टहल रहा था की तभी आशु का फ़ोन आ गया और मैं उससे बात करने लगा. बात करते-करते रात के ११ बज गए, मैंने आशु को बाय कहा और फ़ोन पर एक लम्बी सी किस दी और फ़ोन रखा. मौसम अच्छा था. ठंडी-ठंडी हवाएँ जिस्म को छू रही थी और मजा बहुत आ रहा था. मैंने सोचा की आज यहीं सो जाता हूँ, पास ही एक चारपाई खड़ी थी तो मैं ने वही बिछाई और मैं दोनों हाथ अपने सर के नीचे रख सो गया.रात के एक बजे मेरे कान में भाभी की मादक आवाज पड़ी; "देवर जी!!!" ये सुनते ही मैं चौंक कर उठ गया और सामने देखा तो भाभी दिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी हे. पूनम के चाँद की रौशनी में उनका पूरा बदन जगमगा रहा था. मांसल कमर और उनके कसे हूये स्तन मेरे ऊपर कहर ढा रहे थे! मेरी नजरें अपने आप ही उनकी ऊपर-नीचे होती वक्षो पर गड़ी हुई थी. भाभी जानती थी की मैं कहाँ देख रहा हूँ इसलिए वो और जोर से सांसें लेने लगी. दिमाग में फिर से झटका लगा और मैं ने उनकी मन्त्र-मुग्ध करती वक्षो से अपनी नजरें फेर ली. "यहाँ क्या कर रहे हो देवर जी?" भाभी ने फिर से उसी मादक आवाज में कहा.
"वो मौसम अच्छा था इसलिए ...." मैंने उनसे मुँह फेरे हुए ही कहा. "हाय!!!...सच कहा देवर जी! सससस...ठंडी-ठंडी हवा तो मेरे बदन पर जादू कर रही हे. मैं भी यहीं सो जाऊँ?" भाभी की सिसकी सुन मैं उठ खड़ा हुआ और नीचे जाने लगा. "आप चले जाओगे तो मैं कहाँ सोऊँगी?" भाभी बोलती रही पर मैं रुका नहीं और अपने कमरे में आ कर दरवाजा बंद कर के लेट गया.भाभी का मुझे रिझाने का काम पूरे पांच दिन और चला और इन्हीं दिनों मैं इतना तंदुरुस्त हो गया की अपना ख्याल रख सकूँ! घर के असली दूध-दही-घी की ताक़त से जिस्म में जान आ गई थी. अब मुझे वहाँ से जल्दी से जल्दी निकलना था वरना भाभी मेरे लिंग पर चढ़ ही जाती!
एक हफ्ते बाद में वापस शहर पहुँचा तो मेरा प्यार मुझे लेने के लिए बस स्टैंड आया था. आशु मुझे देखते ही मेरे गले लग गई और उसकी पकड़ देखते ही देखते कसने लगी. "जानू! पूरे दस दिन आप मुझसे दूर रहे हो! आगे से कभी बीमार पड़े ना तो देख लेना! मैं भी आपके ही बगल में लेट जाऊँगी!" ये सुन कर मैं हँस पड़ा. हम घर पहुँचे और आशु के हाथ का खाना खा कर मन प्रसन्न हो गया.मैंने जान कर आशु को भाभी द्वारा की गई हरकतों के बारे में कुछ नहीं बताया वरना फिर वही काण्ड होता! इन पंद्रह दिनों में मैं बहुत कमजोर हो गया था इसीलिए उस दिन आशु ने मेरे ज्यादा करीब आने की कोशिश नहीं की. अगले दिन मैंने ऑफिस ज्वाइन किया तो मेरी कमजोरी नितु मैडम से छुपी नहीं और वो कहने लगी की मुझे कुछ और दिन आराम करना चाहिए.अब तो राखी ने भी ज्वाइन कर लिया था और भी मैडम की बात को ही दोहराने लगी. सिर्फ एक मेरा बॉस था जो मन ही मन गालियाँ दे रहा था.
उस दिन मैं शाम को आशु से मिल नहीं पाया क्योंकि काम बहुत ज्यादा था और राखी मैडम से बैलेंस शीट फाइनल नहीं हो रही थी तो मुझे उसकी मदद करनी पडी. शाम को देर हो गई थी इसलिए मैंने ही उसे घर ड्राप किया था. अगले दिन मुझे आशु का फ़ोन आया तो वो बहुत घबराई हुई थी!
मैं: क्या हुआ? तू घबराई हुई क्यों है?
आशु: आई…. आई…. आई थिंक आई एम प्रेग्नंट!!!
मैं: क्या???!!!! ह….हाऊ…. दिस … हॅपेंड?!
आशु: आई मिस …..माई पिरियड!
ये सुन कर दोनों खामोश हो गए, मेरा दिमाग तो जैसे सुन्न हो चूका था.
आशु: जानू! हेल्लो???? जानू????
आशु की आवाज सुन कर मैं अपनी सोच से बाहर निकला;
मैं: मैं आ रहा हूँ तेरे कॉलेज, मुझे लाल बत्ती पर मिल.
इतना कह कर मैं ऑफिस से भागा.मैडम ने मुझे भागते हुए देखा तो तुरंत मुझे कॉल कर दिया. मैं अभी बाइक के पास ही पहुँचा था. मैंने उन्हें झूठ बोल दिया की परिवार के किसी लड़के को हॉस्पिटल लाये हे. मैं बाइक भगाता हुआ कॉलेज पहुँचा और आशु वहीँ इंतजार कर रही थी. मैं उसे ले कर शहर के दवाखाने नहीं जा सकता था वरना कल को कोई काण्ड अवश्य होता. इसलिए मैं उसे ले कर बाराबंकी आ गया.दो घंटे के रास्ते में हमारी कोई भी बात नहीं हुई, आशु मेरे जिस्म से चिपकी बस सुबक रही थी. उसकी आँख के आँसू मेरी कमीज पीछे से भीगा रहे थे. शहर में घुसते ही पहले मैंने आशु को एक मंगलसूत्र खरीद कर दिया और साथ ही मैं सिंदूर की एक डिब्बी.आशु हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी;
आशु: हम शादी कर रहे हैं? (उसने खुश होते हुए कहा.)
मैं: नहीं! ये सिन्दूर लगा ले और मंगलसूत्र पहन ले अगर डॉक्टर पूछे तो कहना की हमारी शादी को ५ महीने ही हुए हे.
ये सुन कर आशु मायूस हो गई. पर मेरा ध्यान अभी सिर्फ इस बात को जानने में था की क्या वो प्रेग्नेंट है? दिमाग तैयारी करने लगा था की अगर वो प्रेग्नेंट है तो मुझे उसके साथ जल्द से जल्द भागना होगा! एक महंगे से हॉस्पिटल के बाहर मैंने बाइक रोकी और फिर हम दोनों अंदर पहुंचे. कार्ड बनवा कर हम भितर गए.डिटेल में मैंने अपना नंबर डाला और आशु का नाम बदल कर प्रिया कर दिया. कुछ देर इंतजार करने के बाद हम डॉक्टर के केबिन में घुसे और डॉक्टर ने हम दोनों का नाम पूछा तो मैंने उन्हें अपना नाम रितेश बताया.ये सुन कर आशु थोड़ा हैरान हुई क्योंकि मैं आशु को नकली नाम बताना भूल गया था. मैंने आशु का हाथ दबा कर उसे समझा दिया.
डॉक्टर: तो बताइये मिस्टर शुभम क्या समस्या है?
मैं: जी मॅडम ... मुझे लगता है की प्रिया प्रेग्नेंट है... और अभी हम दोनों ही जॉब कर रहे हैं तो.... आई होप यू कॅन अंडर स्टँड!
डॉक्टर: हा ... हा .... प्रिया आप चलो मेरे साथ.
आशु उठ कर उनके साथ चली गई और करीब १५ मिनट बाद डॉक्टर और आशु साथ आये.
डॉक्टर: यू शुड ह्याव युज प्रिकॉशन!
मैं: मॅडम ... वो... सॉरी! पर आशु ने आई पिल तो ली थी.
डॉक्टर: ७२ घंटों के अंदर ली थी?
मैं: नहीं मॅडम .... थोड़ा लेट हो गई थी!
डॉक्टर: देखो इस समय आशु के साथ थोड़ी कम्प्लीकेशन है! शी इज नॉट फिजिकली फिट टू बी a मॉम! अल्सो, यू कान्ट चुस दीं अबोर्शन… कौज देन शी वॉन्ट बी एबल टू कन्सिव …एवर!
ये सुन कर हम दोनों के दूसरे को देखने लगे और हमारी परेशानियाँ हमारी शक्ल से दिख रही थी.
डॉक्टर: सी आई विल राईट सम मेडिकेशन विच.. शी ह्याज टू टेक ऑन अ डेली बेसिस, दिस विल् ओन्ली डीले दीं प्रेग्नानसी. इफ शी स्टॉप दीं मेडिकेशन, देन शी विल ह्याव टू कन्सिव दीं बेबी. शी अल्सो निड मल्टी व्हिटॅमिन टू बी फिजिकली फिट इन ऑर्डर टू … यू नो… बी अ मॉम. वन मोर थिंग आई ह्याड लाईक टू आस्क, हाऊ लाँग ह्याव यू बिन म्यारीड?
मैं: ५ मंथ ! बट व्हाय?
डॉक्टर: यू दिडंत टेल मी एनीथिंग अबाउट योवर वाइफ ऑर्गास्म?
अब ये सुन कर तो मैं दंग रह गया!
"वो मौसम अच्छा था इसलिए ...." मैंने उनसे मुँह फेरे हुए ही कहा. "हाय!!!...सच कहा देवर जी! सससस...ठंडी-ठंडी हवा तो मेरे बदन पर जादू कर रही हे. मैं भी यहीं सो जाऊँ?" भाभी की सिसकी सुन मैं उठ खड़ा हुआ और नीचे जाने लगा. "आप चले जाओगे तो मैं कहाँ सोऊँगी?" भाभी बोलती रही पर मैं रुका नहीं और अपने कमरे में आ कर दरवाजा बंद कर के लेट गया.भाभी का मुझे रिझाने का काम पूरे पांच दिन और चला और इन्हीं दिनों मैं इतना तंदुरुस्त हो गया की अपना ख्याल रख सकूँ! घर के असली दूध-दही-घी की ताक़त से जिस्म में जान आ गई थी. अब मुझे वहाँ से जल्दी से जल्दी निकलना था वरना भाभी मेरे लिंग पर चढ़ ही जाती!
एक हफ्ते बाद में वापस शहर पहुँचा तो मेरा प्यार मुझे लेने के लिए बस स्टैंड आया था. आशु मुझे देखते ही मेरे गले लग गई और उसकी पकड़ देखते ही देखते कसने लगी. "जानू! पूरे दस दिन आप मुझसे दूर रहे हो! आगे से कभी बीमार पड़े ना तो देख लेना! मैं भी आपके ही बगल में लेट जाऊँगी!" ये सुन कर मैं हँस पड़ा. हम घर पहुँचे और आशु के हाथ का खाना खा कर मन प्रसन्न हो गया.मैंने जान कर आशु को भाभी द्वारा की गई हरकतों के बारे में कुछ नहीं बताया वरना फिर वही काण्ड होता! इन पंद्रह दिनों में मैं बहुत कमजोर हो गया था इसीलिए उस दिन आशु ने मेरे ज्यादा करीब आने की कोशिश नहीं की. अगले दिन मैंने ऑफिस ज्वाइन किया तो मेरी कमजोरी नितु मैडम से छुपी नहीं और वो कहने लगी की मुझे कुछ और दिन आराम करना चाहिए.अब तो राखी ने भी ज्वाइन कर लिया था और भी मैडम की बात को ही दोहराने लगी. सिर्फ एक मेरा बॉस था जो मन ही मन गालियाँ दे रहा था.
उस दिन मैं शाम को आशु से मिल नहीं पाया क्योंकि काम बहुत ज्यादा था और राखी मैडम से बैलेंस शीट फाइनल नहीं हो रही थी तो मुझे उसकी मदद करनी पडी. शाम को देर हो गई थी इसलिए मैंने ही उसे घर ड्राप किया था. अगले दिन मुझे आशु का फ़ोन आया तो वो बहुत घबराई हुई थी!
मैं: क्या हुआ? तू घबराई हुई क्यों है?
आशु: आई…. आई…. आई थिंक आई एम प्रेग्नंट!!!
मैं: क्या???!!!! ह….हाऊ…. दिस … हॅपेंड?!
आशु: आई मिस …..माई पिरियड!
ये सुन कर दोनों खामोश हो गए, मेरा दिमाग तो जैसे सुन्न हो चूका था.
आशु: जानू! हेल्लो???? जानू????
आशु की आवाज सुन कर मैं अपनी सोच से बाहर निकला;
मैं: मैं आ रहा हूँ तेरे कॉलेज, मुझे लाल बत्ती पर मिल.
इतना कह कर मैं ऑफिस से भागा.मैडम ने मुझे भागते हुए देखा तो तुरंत मुझे कॉल कर दिया. मैं अभी बाइक के पास ही पहुँचा था. मैंने उन्हें झूठ बोल दिया की परिवार के किसी लड़के को हॉस्पिटल लाये हे. मैं बाइक भगाता हुआ कॉलेज पहुँचा और आशु वहीँ इंतजार कर रही थी. मैं उसे ले कर शहर के दवाखाने नहीं जा सकता था वरना कल को कोई काण्ड अवश्य होता. इसलिए मैं उसे ले कर बाराबंकी आ गया.दो घंटे के रास्ते में हमारी कोई भी बात नहीं हुई, आशु मेरे जिस्म से चिपकी बस सुबक रही थी. उसकी आँख के आँसू मेरी कमीज पीछे से भीगा रहे थे. शहर में घुसते ही पहले मैंने आशु को एक मंगलसूत्र खरीद कर दिया और साथ ही मैं सिंदूर की एक डिब्बी.आशु हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी;
आशु: हम शादी कर रहे हैं? (उसने खुश होते हुए कहा.)
मैं: नहीं! ये सिन्दूर लगा ले और मंगलसूत्र पहन ले अगर डॉक्टर पूछे तो कहना की हमारी शादी को ५ महीने ही हुए हे.
ये सुन कर आशु मायूस हो गई. पर मेरा ध्यान अभी सिर्फ इस बात को जानने में था की क्या वो प्रेग्नेंट है? दिमाग तैयारी करने लगा था की अगर वो प्रेग्नेंट है तो मुझे उसके साथ जल्द से जल्द भागना होगा! एक महंगे से हॉस्पिटल के बाहर मैंने बाइक रोकी और फिर हम दोनों अंदर पहुंचे. कार्ड बनवा कर हम भितर गए.डिटेल में मैंने अपना नंबर डाला और आशु का नाम बदल कर प्रिया कर दिया. कुछ देर इंतजार करने के बाद हम डॉक्टर के केबिन में घुसे और डॉक्टर ने हम दोनों का नाम पूछा तो मैंने उन्हें अपना नाम रितेश बताया.ये सुन कर आशु थोड़ा हैरान हुई क्योंकि मैं आशु को नकली नाम बताना भूल गया था. मैंने आशु का हाथ दबा कर उसे समझा दिया.
डॉक्टर: तो बताइये मिस्टर शुभम क्या समस्या है?
मैं: जी मॅडम ... मुझे लगता है की प्रिया प्रेग्नेंट है... और अभी हम दोनों ही जॉब कर रहे हैं तो.... आई होप यू कॅन अंडर स्टँड!
डॉक्टर: हा ... हा .... प्रिया आप चलो मेरे साथ.
आशु उठ कर उनके साथ चली गई और करीब १५ मिनट बाद डॉक्टर और आशु साथ आये.
डॉक्टर: यू शुड ह्याव युज प्रिकॉशन!
मैं: मॅडम ... वो... सॉरी! पर आशु ने आई पिल तो ली थी.
डॉक्टर: ७२ घंटों के अंदर ली थी?
मैं: नहीं मॅडम .... थोड़ा लेट हो गई थी!
डॉक्टर: देखो इस समय आशु के साथ थोड़ी कम्प्लीकेशन है! शी इज नॉट फिजिकली फिट टू बी a मॉम! अल्सो, यू कान्ट चुस दीं अबोर्शन… कौज देन शी वॉन्ट बी एबल टू कन्सिव …एवर!
ये सुन कर हम दोनों के दूसरे को देखने लगे और हमारी परेशानियाँ हमारी शक्ल से दिख रही थी.
डॉक्टर: सी आई विल राईट सम मेडिकेशन विच.. शी ह्याज टू टेक ऑन अ डेली बेसिस, दिस विल् ओन्ली डीले दीं प्रेग्नानसी. इफ शी स्टॉप दीं मेडिकेशन, देन शी विल ह्याव टू कन्सिव दीं बेबी. शी अल्सो निड मल्टी व्हिटॅमिन टू बी फिजिकली फिट इन ऑर्डर टू … यू नो… बी अ मॉम. वन मोर थिंग आई ह्याड लाईक टू आस्क, हाऊ लाँग ह्याव यू बिन म्यारीड?
मैं: ५ मंथ ! बट व्हाय?
डॉक्टर: यू दिडंत टेल मी एनीथिंग अबाउट योवर वाइफ ऑर्गास्म?
अब ये सुन कर तो मैं दंग रह गया!