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मैं ईशा और कुणाल की अधूरी कहानी आपको बताता हूँ..
इस कहानी को ईशा ने खुद ही बताया है अब इससे आगे की कहानी ईशा की जुबानी
“अब जो घटना मैं आपको बताने जा रही हूँ वो सतीश और मेरी कहानी के एक हफ्ते बाद की ही है, सतीश और मैं जब महाबलेश्वर से वापस आये तो मैं यह तय कर चुकी थी कि अब कुणाल से मैं सम्बन्ध खत्म कर लूंगी लेकिन उसके पहले मैं खुद को यकीन दिलाना चाहती थी कुणाल मुझे प्यार नहीं करता.
वापस आने के बाद मैंने कुणाल से कहा- कुणाल, मुझे सेक्स करना है!
और वो बेचारा तो पागल ही हो गया था- हाँ करते हैं, चल, अभी चलते हैं! जैसी बातें ही उसके मुँह से निकल रही थी तब.
मैंने उसे कहा- अभी नहीं, अगले शनिवार को करेंगे और मेरी कुछ शर्तें होंगी वो माननी पड़ेंगी.
तो वो बोला- हाँ मान लूँगा!
और फिर शनिवार तक बेसबी से इन्तजार करता रहा और हर रोज मुझे याद दिलाता रहा कि हम मिल रहे हैं शनिवार को!
और उसके याद दिलाने से हर बार मेरी सोच और पक्की होती जा रही थी.पर चूंकि मैं उसे वादा कर चुकी थी तो उस वादे को निभाने मैं जाने वाली ही थी चाहे कुछ भी हो जाता.
वैसे इस बारे में जब मैंने सतीश को बताया था तो उसका चेहरा तब देखने लायक था, बड़ा ही अजीब सा मुँह बना कर रखा था इस गधे ने तीन दिन तक और जब मेरे साथ कुणाल के फ़्लैट की तरफ जा रहा था तब तो और भी अजीब.
शनिवार को कुणाल उसके फ़्लैट पर मेरा इन्तजार कर रहा था, मैं जैसे ही अंदर आई उसने मुझे उसकी बाँहों में भर लिया और बिना कुछ कहे चूमने लगा, कभी मेरे गालों को चूम रहा था और कभी गले को! इस सब में वो कभी मेरे स्तन तक भी चला जाता था चूमते हुए. उसने मुझे उसकी बाहों में जकड़ा हुआ था जिससे मेरे स्तन उसके सीने पर टकरा रहे थे, और मैं छूटना चाह कर भी नहीं छूट पा रही थी.
हालांकि वो मेरे साथ जबरदस्ती ही कर रहा था लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं था कि मुझे मजा नहीं आ रहा था, मुझे भी उसके चूमने और इस तरह से जकड़ने में बड़ा मजा आ रहा था और मैं भी उसका साथ देना ही चाहती थी.
फिर मैंने मेरी बाहें कुणाल के गले में डाल दी और उसके होंठों को मेरे होंठों से चूमने लगी, कुणाल भी मेरा पूरा साथ दे रहा था लेकिन उसके हाथ पहली बार मेरे स्तनों पर बेरोकटोक चल रहे थे, मेरे स्तनों को सहला रहे थे, दबा रहे थे.
ऐसा नहीं था कि हमने पहले एक दूसरे को चूमा नहीं था पर मैंने उससे पहले कभी कुणाल को मेरे स्तनों पर हाथ नहीं लगाने दिया था. उस दिन उसके होंठों के चूमने के साथ उसके हाथों का स्पर्श बहुत ही अच्छा लग रहा था. एक बार को लगा कि रोक दूं उसे, लेकिन मन कह रहा था कि करते रहें, और करते रहे और हम एक दूसरे को चूमते रहे, वो मेरे स्तनों को ऐसे ही सहलाता-दबाता रहा, मसलता रहा और मैं उस मस्ती का मजा लेती रही.
हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे को थोड़ी देर चूमते रहे, फिर कुणाल ने मुझे बाँहों में भर कर उठाया, गोद में ले लिया, मैंने भी अपनी टांगों से उसकी कमर को जकड़ लिया और ऐसे ही कुणाल मुझे लेकर बेडरूम में जाने लगा.
उस वक्त कुणाल ने टीशर्ट पहनी हुई थी और मैंने भी काले रंग की टीशर्ट और जींस पहनी हुई थी. वो जब मुझे बेडरूम में ले जा रहा था तो मैंने उसकी टी शर्ट उतारने की कोशिश की लेकिन वो टीशर्ट उसके बेड रूम में जाकर ही उतरी जब कुणाल ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गया. अब वो लोअर और बनियान में था और मैं पूरे कपड़ों में! उसने मेरी टीशर्ट उतारने की कोशिश की, मैंने उसका पूरा साथ दिया और हाथ ऊँचे करके थोड़ा सा ऊपर उठ कर टी शर्ट उतरवा ली.
अब मैं जींस और काली ब्रा में थी, तब मेरा वक्षाकार 34 हुआ करता था और मैं 32 नम्बर की ब्रा पहनती थी तो मेरे स्तन बाहर आने को मचल रहे थे और मैं जानती थी कि ऐसी हालत में कुणाल का खुद पर काबू रखना अगर नामुमकिन नहीं था तो नामुमकिन की हद तक मुश्किल जरूर था.
और वही हुआ, वो पागलों की तरह मेरी जींस उतारने के लिए मेरी जींस के बटन खोलने लगा और मेरे स्तनों को उसके ब्रा के ऊपर से ही चूमने लगा.
और जल्द ही उसने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए मेरी जींस को भी निकाल दिया.अब मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी और वो जींस और बनियान में!
जब उसने मेरी पैंटी उतारनी चाही तो मैंने कहा- पहले तुम तो कपड़े उतारो!
मेरा इतना कहना था कि अगले ही पल उसके सारे कपड़े जमीन पर थे.
इस कहानी को ईशा ने खुद ही बताया है अब इससे आगे की कहानी ईशा की जुबानी
“अब जो घटना मैं आपको बताने जा रही हूँ वो सतीश और मेरी कहानी के एक हफ्ते बाद की ही है, सतीश और मैं जब महाबलेश्वर से वापस आये तो मैं यह तय कर चुकी थी कि अब कुणाल से मैं सम्बन्ध खत्म कर लूंगी लेकिन उसके पहले मैं खुद को यकीन दिलाना चाहती थी कुणाल मुझे प्यार नहीं करता.
वापस आने के बाद मैंने कुणाल से कहा- कुणाल, मुझे सेक्स करना है!
और वो बेचारा तो पागल ही हो गया था- हाँ करते हैं, चल, अभी चलते हैं! जैसी बातें ही उसके मुँह से निकल रही थी तब.
मैंने उसे कहा- अभी नहीं, अगले शनिवार को करेंगे और मेरी कुछ शर्तें होंगी वो माननी पड़ेंगी.
तो वो बोला- हाँ मान लूँगा!
और फिर शनिवार तक बेसबी से इन्तजार करता रहा और हर रोज मुझे याद दिलाता रहा कि हम मिल रहे हैं शनिवार को!
और उसके याद दिलाने से हर बार मेरी सोच और पक्की होती जा रही थी.पर चूंकि मैं उसे वादा कर चुकी थी तो उस वादे को निभाने मैं जाने वाली ही थी चाहे कुछ भी हो जाता.
वैसे इस बारे में जब मैंने सतीश को बताया था तो उसका चेहरा तब देखने लायक था, बड़ा ही अजीब सा मुँह बना कर रखा था इस गधे ने तीन दिन तक और जब मेरे साथ कुणाल के फ़्लैट की तरफ जा रहा था तब तो और भी अजीब.
शनिवार को कुणाल उसके फ़्लैट पर मेरा इन्तजार कर रहा था, मैं जैसे ही अंदर आई उसने मुझे उसकी बाँहों में भर लिया और बिना कुछ कहे चूमने लगा, कभी मेरे गालों को चूम रहा था और कभी गले को! इस सब में वो कभी मेरे स्तन तक भी चला जाता था चूमते हुए. उसने मुझे उसकी बाहों में जकड़ा हुआ था जिससे मेरे स्तन उसके सीने पर टकरा रहे थे, और मैं छूटना चाह कर भी नहीं छूट पा रही थी.
हालांकि वो मेरे साथ जबरदस्ती ही कर रहा था लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं था कि मुझे मजा नहीं आ रहा था, मुझे भी उसके चूमने और इस तरह से जकड़ने में बड़ा मजा आ रहा था और मैं भी उसका साथ देना ही चाहती थी.
फिर मैंने मेरी बाहें कुणाल के गले में डाल दी और उसके होंठों को मेरे होंठों से चूमने लगी, कुणाल भी मेरा पूरा साथ दे रहा था लेकिन उसके हाथ पहली बार मेरे स्तनों पर बेरोकटोक चल रहे थे, मेरे स्तनों को सहला रहे थे, दबा रहे थे.
ऐसा नहीं था कि हमने पहले एक दूसरे को चूमा नहीं था पर मैंने उससे पहले कभी कुणाल को मेरे स्तनों पर हाथ नहीं लगाने दिया था. उस दिन उसके होंठों के चूमने के साथ उसके हाथों का स्पर्श बहुत ही अच्छा लग रहा था. एक बार को लगा कि रोक दूं उसे, लेकिन मन कह रहा था कि करते रहें, और करते रहे और हम एक दूसरे को चूमते रहे, वो मेरे स्तनों को ऐसे ही सहलाता-दबाता रहा, मसलता रहा और मैं उस मस्ती का मजा लेती रही.
हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे को थोड़ी देर चूमते रहे, फिर कुणाल ने मुझे बाँहों में भर कर उठाया, गोद में ले लिया, मैंने भी अपनी टांगों से उसकी कमर को जकड़ लिया और ऐसे ही कुणाल मुझे लेकर बेडरूम में जाने लगा.
उस वक्त कुणाल ने टीशर्ट पहनी हुई थी और मैंने भी काले रंग की टीशर्ट और जींस पहनी हुई थी. वो जब मुझे बेडरूम में ले जा रहा था तो मैंने उसकी टी शर्ट उतारने की कोशिश की लेकिन वो टीशर्ट उसके बेड रूम में जाकर ही उतरी जब कुणाल ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गया. अब वो लोअर और बनियान में था और मैं पूरे कपड़ों में! उसने मेरी टीशर्ट उतारने की कोशिश की, मैंने उसका पूरा साथ दिया और हाथ ऊँचे करके थोड़ा सा ऊपर उठ कर टी शर्ट उतरवा ली.
अब मैं जींस और काली ब्रा में थी, तब मेरा वक्षाकार 34 हुआ करता था और मैं 32 नम्बर की ब्रा पहनती थी तो मेरे स्तन बाहर आने को मचल रहे थे और मैं जानती थी कि ऐसी हालत में कुणाल का खुद पर काबू रखना अगर नामुमकिन नहीं था तो नामुमकिन की हद तक मुश्किल जरूर था.
और वही हुआ, वो पागलों की तरह मेरी जींस उतारने के लिए मेरी जींस के बटन खोलने लगा और मेरे स्तनों को उसके ब्रा के ऊपर से ही चूमने लगा.
और जल्द ही उसने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल करते हुए मेरी जींस को भी निकाल दिया.अब मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी में थी और वो जींस और बनियान में!
जब उसने मेरी पैंटी उतारनी चाही तो मैंने कहा- पहले तुम तो कपड़े उतारो!
मेरा इतना कहना था कि अगले ही पल उसके सारे कपड़े जमीन पर थे.