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अगले 15 मिनट में सतीश झड़ गया. सतीश उसके बदन पे निढाल सा गिर गया. सतीश हांफ रहा था. श्वेता सतीश के नीचे दबी थी. उसने सतीश को धकेल के अपने ऊपर से हटाया. सतीश हट उसके बगल में बेड पे पीठ के बल लेट गया. सतीश अपने सांसों पे काबू पाने की कोशिश ही रहा था.
तभी श्वेता उठी और बोली- “लेकिन अभी मेरा नहीं हुआ”
श्वेता सतीश के टपकते लंड को मुँह में लेके चूसने लगी. जब कुछ देर में सतीश सामान्य हुआ तो सतीश ने देखा. वह बेड पे पीठ के सहारे लेटा था. श्वेता अपनी गांड सतीश की तरफ किये लौड़े को चूस रही थी. श्वेता की खुली हुई चुत का लाल सुराख़ उसे दिख रहा था.
क्या मस्त पाव रोटी की तरह थी श्वेता की चुत. श्वेता की चुत से सतीश का और उसका सम्मलित रस टपक रहा था. श्वेता की गुलाबी चुत चमक रही थी. सतीश ने एक उंगली डाल के श्वेता की चुत का मुआयना किया. कोई हलचल नहीं हुई. श्वेता अपने काम में लगी हुई थी.
सतीश ने देखा श्वेता की चुत एकदम गीली हो चुकी थी. सतीश ने 2 उंगलियां डाल दी कोई फर्क नहीं पड़ा. सतीश ने चार उंगलिया पेल दीं, उसने लंड मुँह से निकाला और चीख उठी
“आह आहह आहह …!!
उसका एक हाथ सतीश के लौड़े पे अभी भी चल रहा था. सतीश ने उंगलियां निकालीं, जो उसके रस से भीगी हुई थीं. सतीश उंगलियों को उसके मुँह के पास ले गया. श्वेता चाट गयी और उसे एक कामुक स्माइल दी.
सतीश ने भी श्वेता की चुत रस को चाटा. चुत रस सेक्स में एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है. उसकी बहन की चूत का रस तो उसके लाइफ का सबसे टेस्टी जूस था.
अब श्वेता आगे झुक गयी और लौड़े को वापस मुँह में ले लिया और चूसने लगी. उसकी फूली तथा उभरी हुई गांड उसे साफ नजर आ रही थी. सतीश ने एक हल्की सी चपत उसके गांड पे लगा दी. उसकी गांड में कम्पन हुआ, तो सतीश को बड़ा मजा आया. सतीश ऐसे ही धीरे धीरे उसके गांड पे चपत लगाता रहा. उसके गांड कामुक अंदाज में हिलते.
श्वेता आगे की तरफ झुकी, सतीश के लौड़े को फिर से खड़ा करने के मशक्कत में जुटी थी. कभी श्वेता लंड को पूरा मुँह में ले के चूसती, सतीश के बॉल्स को चाटती. श्वेता पूरे मन से लंड चूस रही थी.
कुछ मिनट बाद श्वेता की मेहनत रंग लाई. सतीश का लंड फिर से फुंफकारने लगा. सतीश का लंड फिर रॉड की तरह टाइट हो गया. लंड फिर से तैयार था, श्वेता की चुत के परखच्चे उड़ाने के लिए.
कहानी जारी रहेगी
तभी श्वेता उठी और बोली- “लेकिन अभी मेरा नहीं हुआ”
श्वेता सतीश के टपकते लंड को मुँह में लेके चूसने लगी. जब कुछ देर में सतीश सामान्य हुआ तो सतीश ने देखा. वह बेड पे पीठ के सहारे लेटा था. श्वेता अपनी गांड सतीश की तरफ किये लौड़े को चूस रही थी. श्वेता की खुली हुई चुत का लाल सुराख़ उसे दिख रहा था.
क्या मस्त पाव रोटी की तरह थी श्वेता की चुत. श्वेता की चुत से सतीश का और उसका सम्मलित रस टपक रहा था. श्वेता की गुलाबी चुत चमक रही थी. सतीश ने एक उंगली डाल के श्वेता की चुत का मुआयना किया. कोई हलचल नहीं हुई. श्वेता अपने काम में लगी हुई थी.
सतीश ने देखा श्वेता की चुत एकदम गीली हो चुकी थी. सतीश ने 2 उंगलियां डाल दी कोई फर्क नहीं पड़ा. सतीश ने चार उंगलिया पेल दीं, उसने लंड मुँह से निकाला और चीख उठी
“आह आहह आहह …!!
उसका एक हाथ सतीश के लौड़े पे अभी भी चल रहा था. सतीश ने उंगलियां निकालीं, जो उसके रस से भीगी हुई थीं. सतीश उंगलियों को उसके मुँह के पास ले गया. श्वेता चाट गयी और उसे एक कामुक स्माइल दी.
सतीश ने भी श्वेता की चुत रस को चाटा. चुत रस सेक्स में एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है. उसकी बहन की चूत का रस तो उसके लाइफ का सबसे टेस्टी जूस था.
अब श्वेता आगे झुक गयी और लौड़े को वापस मुँह में ले लिया और चूसने लगी. उसकी फूली तथा उभरी हुई गांड उसे साफ नजर आ रही थी. सतीश ने एक हल्की सी चपत उसके गांड पे लगा दी. उसकी गांड में कम्पन हुआ, तो सतीश को बड़ा मजा आया. सतीश ऐसे ही धीरे धीरे उसके गांड पे चपत लगाता रहा. उसके गांड कामुक अंदाज में हिलते.
श्वेता आगे की तरफ झुकी, सतीश के लौड़े को फिर से खड़ा करने के मशक्कत में जुटी थी. कभी श्वेता लंड को पूरा मुँह में ले के चूसती, सतीश के बॉल्स को चाटती. श्वेता पूरे मन से लंड चूस रही थी.
कुछ मिनट बाद श्वेता की मेहनत रंग लाई. सतीश का लंड फिर से फुंफकारने लगा. सतीश का लंड फिर रॉड की तरह टाइट हो गया. लंड फिर से तैयार था, श्वेता की चुत के परखच्चे उड़ाने के लिए.
कहानी जारी रहेगी