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Guest
मैने उसको ज़ोर से चूसने का इशारा किया तो वो और तेज़ी से चूसने लगी तभी मैने ज़ोर से झटका खाया और मैने पूरे ज़ोर से उसके सर को अपने लंड पे दबाते हुवे अपना वीर्य उसके मूह मे छोड़ना शुरू कर दिया अबकी बार काफ़ी ज़्यादा वीर्य निकल रहा था शिला लगातार लंड से निकले वीर्य को पी रही थी,
आख़िर मैं निढाल हो गया पर शिला लंड को तबतक चूसती रही जब तक पूरा रस ना खतम हो, उसने अंतिम बूँद तक निचोड़ ली......
मेरा लंड अभी भी, आधा खड़ा आधा बैठा था.
ना ज़्यादा कड़क, ना ज़्यादा नरम..
करीब, 7:50 हो चुके थे और हम अभी और पुणे से करीब 90-100 किलोमीटर दूर थे.
अभी भी, भारी बरसात हो रही था और बाहर बहुत अंधेरा हो गया था और हमारी कार, चली जा रही था…
अब बारी थी शिला की चुत की. हम अब तक आधे एक्सप्रेस-वे पे पहुंच चुके थे. बारिश जोरो से जारी थी ट्राफिक न के बराबर था फिर भी मैं सतर्क था कि कहीं कोई हमें देख ना ले, मेरी ज़िन्दगी में मैं पहली बार चलती गाड़ी में सेक्स करने वाला था, वो भी तब … जब गाड़ी मैं खुद चला रहा था.
मैंने शिला को इशारा किया, जिसको वो पलक झपकते ही समझ गयी और उसने अपनी जीन्स अपने पैरों से अलग कर, मेरी गोद में बैठने की जगह बना ली. मैंने भी अपनी गाड़ी की सीट जितनी हो सकती थी, पीछे की ओर की. शिला को अपनी गोद में इस तरह बिठाया कि उसका मुँह भी सड़क की तरफ था.
मैरी गाड़ी तवेरा थी और जिन्होंने वो गाड़ी रखी या चलाई है, उनको पता होगा कि उस गाड़ी में टांगों के लिए जगह कितनी ज्यादा होती है. शिला आराम से मेरी गोद में आ बैठी थी.
मैंने उससे कंडोम लगाने का कहा, तो वो बोली- रहने दो.
अब मेरा लंड उसकी चुत में जाने को हिलोरें मार रहा था. शिला ने अपना एक हाथ पीछे लिया और मेरे लंड को यूँ सीधा किया की वो आराम से उसकी चुत में चला जाए. मैंने भी एक हाथ उसके टॉप के अन्दर कर उसके बॉब्स को दबाना शुरू किया और उसको हल्के से अपने लंड पर दबाव बनाने का इशारा किया.
इशारा पाते ही शिला मेरे लंड पर बैठना शुरू हो गयी. देखते ही देखते, मेरा आधा लंड शिला की चुत में था और उसकी सिसकारियों से छलकता दर्द आराम से सुना जा सकता था.
सतीश- दर्द हो रहा है क्या मेरी जान?
शिला- हम्म … मैंने बहुत समय से सिर्फ उंगली से ही काम चलाया है सतीश … और तुम्हारा लंड तो मेरी चार चार उंगलियों के बराबर मोटा है. थोड़ा दर्द तो बनता ही है सतीश.
सतीश- तो अब देर ना करो और जल्दी से इसको पूरा निगल जाओ. जो मज़ा इस दर्द में है, वो भी इस कायनात में कहीं नहीं मिल सकता.
इतना कहते कहते मैंने अपनी गाड़ी एक अंडरपास में लगाई, गाड़ी में हैंडब्रेक लगाए और शिला की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर एक ज़ोरदार झटका उसकी चुत के नीचे से लगा दिया, जिससे मेरा करीब तीन चौथाई लंड शिला की चुत में घुस कर फंस गया.
दूसरी तरफ लंड पेवस्त होते शिला की चीख निकल गयी और उसका रोना शुरू हो गया. पर इसके साथ ही शिला झड़ भी गयी, जैसे उसकी चुत को इस बेरहमी से परम आनन्द मिला हो. उसके रस उसकी चुत से रिसते हुए मेरी जीन्स को और गीला कर रहे थे, जो पहले से ही मेरे पानी से गीली थी.
झड़ने की वजह से शिला रोते-रोते ऐसे कांप भी रही थी, जैसे दर्द और सुख की कोई मिश्रित भावना प्रकट कर रही हो.
सभी भाई लोगों को पता होगा कि चुदाई के समय जब लड़की रोती है, तो आदमी को किस अप्रतिम आनन्द की अनुभूति होती है.
मुझे शिला का रोना जैसे और उत्तेजक बना रहा था और मेरा लंड पहले से ज्यादा प्रचंड होता जा रहा था. मैंने देर ना करते हुए, एक और ज़ोरदार झटका लगाया, जिससे मेरा पूरा लंड शिला की चुत में घुस गया और शिला की सिसकारियां उसकी दर्द भरी चिल्लाहटों में बदल गयीं.
पर पिछली बार की ही तरह, शिला ने इस धक्के के साथ भी झड़ना शुरू कर दिया, जिससे मुझे ये यकीन हो गया कि शिला को खुश करने का माध्यम ताबड़तोड़ और बेरहम चुदाई ही है. इस दूसरे धक्के से मेरे लंड में भी ऐसा सा दर्द हुआ, जैसे वो इस टाइट चुत में जाने से कुछ छिल सा गया हो. मैंने इसके बारे में शिला को बताया, तो उसके चेहरे पर एक धीमी पर कमीनी मुस्कान नज़र आयी.
मैंने अब शिला को थोड़ा धीरे धक्के लगाने को कहा और साथ ही उसको सहलाना शुरू कर दिया … जिससे कि वो मुझे खूब मज़ा दे सके.
शिला को भी अभ्यस्त होने में करीब 25-30 धक्कों का समय लगा.
अब शिला ने भी अपनी गांड उठा उठा कर मज़ा लेना शुरू कर दिया था. मैंने भी वहां ज्यादा देर रुकना सही नहीं समझा और गाड़ी को फिर से एक्सप्रेस-वे पर डाल दिया. मैं ऐसी दौड़ती हुई धमाकेदार चुदाई पहली बार कर रहा था और शिला भी बहुत कामुक थी.
अभी तक तो बेदर्दी मैंने दिखाई थी और अब बारी शिला की थी. जैसे मैंने उसको दर्द दिया था, वैसे ही मुझे दर्द देने के लिए वो और ज्यादा उछल कूद मचा रही थी. किसी गरम चुत को छिले हुए लंड की सवारी मिल रही हो, तो वो कैसी मस्त हो जाती है, मुझे किसी को बताने की जरूरत नहीं.
शिला बीच बीच में अपने मुँह को पीछे करके मुझे चूमने चाटने की कोशिश कर रही थी. वो मेरे चेहरे पर छिले लंड के दर्द के भाव देखकर खुश होती और ‘मेरा बेबी … मेरा सोना.’ कहकर मेरी टांग भी खींच रही थी.
मैं इन सबसे बहुत उत्तेजित हो रहा था, पर शिला एक बार मेरा पानी गिरा चुकी थी … इसलिए मुझे झड़ने में थोड़ा समय लग रहा था.
मैं भी थोड़ी थोड़ी देर में शिला की गांड में उंगली कर देता, जिससे उसको और अधिक आनन्द मिलता.
शिला दो बार झड़ चुकी थी और मेरा भी लावा उबलने लगा था. थोड़ी ही देर में मेरा लंड फटने वाला था और मुझे पता था कि वो इतना पानी गिराने वाला है कि आज मेरी गाड़ी में जलजला आ जाएगा. शिला ने भी अपनी गति बढ़ा दी थी. मेरा लंड भी उसकी चुत की गर्मी के आगे पिघल गया और मेरे लंड ने अपनी पिचकारी शिला की चुत में मार दी.
जैसे ही मेरा गरम लावा शिला की चुत में गिरा, शिला भी एक बार फिर से चिल्लाते हुए झड़ने लगी और हम दोनों अपने ही रसों से पानी पानी हो गए.
गाड़ी का एसी अपने पूरे जोश से गाड़ी को ठंडा कर रहा था, फिर भी हम दोनों पसीने से लथपथ थे.
थोड़ी देर बाद हम एक दूसरे से अलग हुए
आख़िर मैं निढाल हो गया पर शिला लंड को तबतक चूसती रही जब तक पूरा रस ना खतम हो, उसने अंतिम बूँद तक निचोड़ ली......
मेरा लंड अभी भी, आधा खड़ा आधा बैठा था.
ना ज़्यादा कड़क, ना ज़्यादा नरम..
करीब, 7:50 हो चुके थे और हम अभी और पुणे से करीब 90-100 किलोमीटर दूर थे.
अभी भी, भारी बरसात हो रही था और बाहर बहुत अंधेरा हो गया था और हमारी कार, चली जा रही था…
अब बारी थी शिला की चुत की. हम अब तक आधे एक्सप्रेस-वे पे पहुंच चुके थे. बारिश जोरो से जारी थी ट्राफिक न के बराबर था फिर भी मैं सतर्क था कि कहीं कोई हमें देख ना ले, मेरी ज़िन्दगी में मैं पहली बार चलती गाड़ी में सेक्स करने वाला था, वो भी तब … जब गाड़ी मैं खुद चला रहा था.
मैंने शिला को इशारा किया, जिसको वो पलक झपकते ही समझ गयी और उसने अपनी जीन्स अपने पैरों से अलग कर, मेरी गोद में बैठने की जगह बना ली. मैंने भी अपनी गाड़ी की सीट जितनी हो सकती थी, पीछे की ओर की. शिला को अपनी गोद में इस तरह बिठाया कि उसका मुँह भी सड़क की तरफ था.
मैरी गाड़ी तवेरा थी और जिन्होंने वो गाड़ी रखी या चलाई है, उनको पता होगा कि उस गाड़ी में टांगों के लिए जगह कितनी ज्यादा होती है. शिला आराम से मेरी गोद में आ बैठी थी.
मैंने उससे कंडोम लगाने का कहा, तो वो बोली- रहने दो.
अब मेरा लंड उसकी चुत में जाने को हिलोरें मार रहा था. शिला ने अपना एक हाथ पीछे लिया और मेरे लंड को यूँ सीधा किया की वो आराम से उसकी चुत में चला जाए. मैंने भी एक हाथ उसके टॉप के अन्दर कर उसके बॉब्स को दबाना शुरू किया और उसको हल्के से अपने लंड पर दबाव बनाने का इशारा किया.
इशारा पाते ही शिला मेरे लंड पर बैठना शुरू हो गयी. देखते ही देखते, मेरा आधा लंड शिला की चुत में था और उसकी सिसकारियों से छलकता दर्द आराम से सुना जा सकता था.
सतीश- दर्द हो रहा है क्या मेरी जान?
शिला- हम्म … मैंने बहुत समय से सिर्फ उंगली से ही काम चलाया है सतीश … और तुम्हारा लंड तो मेरी चार चार उंगलियों के बराबर मोटा है. थोड़ा दर्द तो बनता ही है सतीश.
सतीश- तो अब देर ना करो और जल्दी से इसको पूरा निगल जाओ. जो मज़ा इस दर्द में है, वो भी इस कायनात में कहीं नहीं मिल सकता.
इतना कहते कहते मैंने अपनी गाड़ी एक अंडरपास में लगाई, गाड़ी में हैंडब्रेक लगाए और शिला की कमर को दोनों हाथों से पकड़ कर एक ज़ोरदार झटका उसकी चुत के नीचे से लगा दिया, जिससे मेरा करीब तीन चौथाई लंड शिला की चुत में घुस कर फंस गया.
दूसरी तरफ लंड पेवस्त होते शिला की चीख निकल गयी और उसका रोना शुरू हो गया. पर इसके साथ ही शिला झड़ भी गयी, जैसे उसकी चुत को इस बेरहमी से परम आनन्द मिला हो. उसके रस उसकी चुत से रिसते हुए मेरी जीन्स को और गीला कर रहे थे, जो पहले से ही मेरे पानी से गीली थी.
झड़ने की वजह से शिला रोते-रोते ऐसे कांप भी रही थी, जैसे दर्द और सुख की कोई मिश्रित भावना प्रकट कर रही हो.
सभी भाई लोगों को पता होगा कि चुदाई के समय जब लड़की रोती है, तो आदमी को किस अप्रतिम आनन्द की अनुभूति होती है.
मुझे शिला का रोना जैसे और उत्तेजक बना रहा था और मेरा लंड पहले से ज्यादा प्रचंड होता जा रहा था. मैंने देर ना करते हुए, एक और ज़ोरदार झटका लगाया, जिससे मेरा पूरा लंड शिला की चुत में घुस गया और शिला की सिसकारियां उसकी दर्द भरी चिल्लाहटों में बदल गयीं.
पर पिछली बार की ही तरह, शिला ने इस धक्के के साथ भी झड़ना शुरू कर दिया, जिससे मुझे ये यकीन हो गया कि शिला को खुश करने का माध्यम ताबड़तोड़ और बेरहम चुदाई ही है. इस दूसरे धक्के से मेरे लंड में भी ऐसा सा दर्द हुआ, जैसे वो इस टाइट चुत में जाने से कुछ छिल सा गया हो. मैंने इसके बारे में शिला को बताया, तो उसके चेहरे पर एक धीमी पर कमीनी मुस्कान नज़र आयी.
मैंने अब शिला को थोड़ा धीरे धक्के लगाने को कहा और साथ ही उसको सहलाना शुरू कर दिया … जिससे कि वो मुझे खूब मज़ा दे सके.
शिला को भी अभ्यस्त होने में करीब 25-30 धक्कों का समय लगा.
अब शिला ने भी अपनी गांड उठा उठा कर मज़ा लेना शुरू कर दिया था. मैंने भी वहां ज्यादा देर रुकना सही नहीं समझा और गाड़ी को फिर से एक्सप्रेस-वे पर डाल दिया. मैं ऐसी दौड़ती हुई धमाकेदार चुदाई पहली बार कर रहा था और शिला भी बहुत कामुक थी.
अभी तक तो बेदर्दी मैंने दिखाई थी और अब बारी शिला की थी. जैसे मैंने उसको दर्द दिया था, वैसे ही मुझे दर्द देने के लिए वो और ज्यादा उछल कूद मचा रही थी. किसी गरम चुत को छिले हुए लंड की सवारी मिल रही हो, तो वो कैसी मस्त हो जाती है, मुझे किसी को बताने की जरूरत नहीं.
शिला बीच बीच में अपने मुँह को पीछे करके मुझे चूमने चाटने की कोशिश कर रही थी. वो मेरे चेहरे पर छिले लंड के दर्द के भाव देखकर खुश होती और ‘मेरा बेबी … मेरा सोना.’ कहकर मेरी टांग भी खींच रही थी.
मैं इन सबसे बहुत उत्तेजित हो रहा था, पर शिला एक बार मेरा पानी गिरा चुकी थी … इसलिए मुझे झड़ने में थोड़ा समय लग रहा था.
मैं भी थोड़ी थोड़ी देर में शिला की गांड में उंगली कर देता, जिससे उसको और अधिक आनन्द मिलता.
शिला दो बार झड़ चुकी थी और मेरा भी लावा उबलने लगा था. थोड़ी ही देर में मेरा लंड फटने वाला था और मुझे पता था कि वो इतना पानी गिराने वाला है कि आज मेरी गाड़ी में जलजला आ जाएगा. शिला ने भी अपनी गति बढ़ा दी थी. मेरा लंड भी उसकी चुत की गर्मी के आगे पिघल गया और मेरे लंड ने अपनी पिचकारी शिला की चुत में मार दी.
जैसे ही मेरा गरम लावा शिला की चुत में गिरा, शिला भी एक बार फिर से चिल्लाते हुए झड़ने लगी और हम दोनों अपने ही रसों से पानी पानी हो गए.
गाड़ी का एसी अपने पूरे जोश से गाड़ी को ठंडा कर रहा था, फिर भी हम दोनों पसीने से लथपथ थे.
थोड़ी देर बाद हम एक दूसरे से अलग हुए