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Incest आनंद और तड़प (तन में उत्तेजना की हलचल )

रात को सोते समय अपनी बहन की गांड और उसे पेशाब करता हुआ देखकर जो उत्तेजना का अनुभव से नहीं किया था वह सारी कसर अपनी बीवी से उसकी चुदाई करके उतार रहा था और गुलाबी दीवार के उसी छेद में से उस नजारे को देख रही थी और उत्तेजित हो रही थी सलवार उतार कर वह अपनी भाभी की बात को याद करके की शादी के बाद उसकी बुर में उसके दूल्हे का लंड जाएगा तब बार-बार पेशाब लगने वाली आदत छुट जाएगी,,, इस बात को याद करके और अपनी भैया भाभी की चुदाई बेटे करो पूरी तरह से फिट हो गई थी और अपनी बुर में उंगली डालकर अंदर बाहर कर रही थी,,,, थोड़ी देर में उसके भैया भाभी के साथ वो खुद शांत हो गई और खटिए पर आकर राजू के पास बिना सलवार पहने ही सो गई,,,,।

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गुलाबी अपनी जवानी को संभाल पाने में धीरे-धीरे असमर्थ होती जा रही थी दिन-ब-दिन उसके बदन की प्यास उसे तड़पा रही थी,,,, उम्र के मुताबिक यह सब कुछ औपचारिक ही था क्योंकि गुलाबी उम्र के उस दौर से गुजर रही थी जिस दौर में लड़कियों की शादी हो जाएगा करती थी,,,, लेकिन गुलाबी अभी तक कुंवारी थी,,,, इसलिए तो उसकी बुर में ज्यादा खुजली हो रही थी,,,,। और इस उमर में गरमागरम नजारा देखकर उसकी इच्छा और ज्यादा प्रज्वलित होती जा रही थी,,,।,,, दीवार की दरार में से अपने भैया भाभी के कमरे में उन दोनों की घमासान चुदाई देखना उसकी आदत बन चुकी थी अपनी भाभी की गरमा गरम सिसकारियों की आवाज को सुनकर उसकी मादक जवानी को अपने लंड से रोंदता हुआ अपने बड़े भाई को देख कर इतना तो वह जानती होते कि इस खेल में बहुत ज्यादा मजा आता है,,,, इसलिए इस खेल को खेलने के लिए वह भी तड़प रही थी,,,।लेकिन उसे मौका नहीं मिल पा रहा था क्योंकि ऐसा खेल खेलने के लिए उसे 1 साथी की जरूरत थी और वह साथी कौन होगा इस बारे में उसे भी बिल्कुल भी पता नहीं था,,,यह बात गुलाबी अच्छी तरह से जानती थी कि बाहर इस तरह का खिलाड़ी खेलने में मजा तो आएगा ही लेकिन बदनाम होने का डर भी है इसलिए वह अपने कदम आगे बढ़ाना नहीं चाहते थे लेकिन बदन की जवानी की गर्मी उसके मन को विचलित कर रही इसीलिए तो अपने भैया भाभी की गरमा गरम जुदाई को देखकर भाई अपनी उंगली को अपनी पूर्व में पहन कर अपनी जवानी की गर्मी को शांत कर चुकी थी और अपने भतीजे के बगल में बिना सलवार पहने ही सो गई थी,,,,।

बड़े सवेरे ही जल्दी राजू की नींद खुल गई उसे जोरों की पेशाब लगी हुई थी,,, वह आलस को मारता हुआ खटिया पर उठ कर बैठ गया आंखों में नींद अभी भी छाई हुई थी,,,।

उठने का मन है उसका बिल्कुल भी नहीं कर रहा था वीडियो सोना चाहता था लेकिन जोरो की पेशाब लगी हुई थी इसलिए उठना जरूरी था,,। सुबह की पहली पहर होने की वजह से बाहर अभी भी अंधेरा छाया हुआ था,,, कमरे में लालटेन की रोशनी अपनी आभा बिखेर रही थी,,,, राजू खटिया पर से उठने ही वाला था कि उसकी नजर गुलाबी की टांग पर घुटनों के नीचे की तरफ पहले पड़ी,,,,

राजू को तो पहले सब कुछ सामान्य ही लगा उसे लगा कि साथ सलवार घुटनों तक चढ गई होगी लेकिन उत्सुकतावश अपनी नजरों को ऊपर की तरफ उठाने लगा तो जैसे जैसे उसकी नजर ऊपर की तरफ आ रही थी वैसे वैसे उसे अपनी बुआ की नंगी टांग और भी ज्यादा नंगी होती हुई नजर आने लगी जब उसकी नजर घुटने तक पहुंच गई फिर भी उसे सलवार की किनारी नजर नही आई तो उसका दिल जोरो से धड़कने लगा,,,,,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा कि वहां क्या करें संस्कारी होने की वजह से वह अपनी बुआ की बहुत इज्जत करता था और उसकी नंगी टांगों को देखना भी उसके लिए गवारा नहीं था वह इसी कशमकश में था कि अपनी नजरों को और ऊपर उठाए या उसी तरह से बाहर चला जाए,,,,, उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था तभी उसे सुबह जो उसकी आंखों के सामने कमला चाची के अर्ध नग्न बदन के दर्शन हुए थे वह नजारा नजर आने लगा,,, उस दृश्य को याद करके उसके बदन में उत्तेजना की लहरें दौड़ने लगी,,,। अपने बदन में उत्तेजना की लहर को महसूस करके वह वहां से चला जाना चाहता था लेकिन अपने मन को बहलाने में वह नाकामयाब रहा अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बुआ तो सो रही है अगर ऐसे में कुछ देख भी लेगा तो उसकी बुआ को कहां पता चलने वाला है इसलिए वह वहीं रुका रहा,,,, अपनी नजरों को ऊपर की तरफ धीरे-धीरे बढ़ाने लगा,,,, उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,,

इस बात को लेकर कभी भी वह अपने वतन में उत्तेजना महसूस नहीं किया कि 1 जवान खूबसूरत लड़की जो कि उसकी बुआ ही है वह उसके साथ एक ही खटिया पर सोती है,,,,,,,,, लेकिन पलभर में ही उसे इस बात का एहसास होने लगा कि उसके बगल में जवानी से भरपूर उसकी बुआ सोती है,,,, धीरे-धीरे अपनी नजरों को ऊपर की तरफ ले जा रहा था लालटेन की रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था रात भर लालटेन इसी तरह से चलती रहती थी क्योंकि अंधेरे में राजू को नींद नहीं आती थी यह उसकी शुरु से आदत थी,,, गुलाबी की मक्खन जैसी चिकनी टांग देखकर राजू की हालत खराब हो रही थी लेकिन उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि आगे क्या होने वाला है वह धड़कते दिल से अपनी नजरों को उपर की तरफ ले जा रहा था,,,

और उसकी बुआ गुलाबी निश्चिंत होकर अपनी जवानी की गर्मी निकाल कर खटिया पर सोई हुई थी अपनी पुर की गर्मी शांत करने के बाद उसे इस बात का भी होश नहीं था कि वह सलवार नहीं पहनी है और वह उसी अवस्था में सो गई थी,,,,,।

राजू का दिल जोरो से धड़कना शुरू हो गया था क्योंकि उसकी नजर अपनी बुआ की इतनी मांसल जांघों पर पहुंच चुकी थी और जांघों वाला बदन भी नंगा ही था,,, अनायास उसके मन में यह ख्याल आ गया कि जिस अंग को वह सुबह कमला चाची को नहाते हुए नहीं देख पाया था शायद वह अभी देख ले,,,,, लेकिन यह ख्याल मन में आते ही राजू के तन बदन में हलचल सी होने लगी लेकिन एक मन उसका यह भी कह रहा था कि जो वह सोच रहा है वह गलत है अपनी बुआ के बारे में इस तरह के ख्याल लाना पाप है,,,, लेकिन एक मन की सद्बुद्धि वाली बातें उसके दिमाग के पल्ले नहीं पड़ रही थी लेकिन दूसरे मन की कुबुद्धि वाली विचार उसके मन को जकड़े हुए थी,,,, जिसके पास में वह पूरी तरह से हो गया था,,,,,

अपनी तो बुआ की चिकनी मांसल जांघों को देखकर उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और उत्तेजना के मारे उसकी पेशाब भी रुक गई थी,,,, आखिरकार नजरों ने अपनी मंजिल को ढूंढ ही लिया था बस पहुंचना बाकी था और देखते ही देखते राजू अपनी नजरों को ऊपर की तरफ उठाते उठाते एकदम ऊपर पहुंच गया जहां का नजारा देखकर उसकी आंखें फटी की फटी रह गई उसके होश उड़ गए और पल भर में उसके चेहरे का रंग बदलने लगा,,,,

राजू की नजर इस समय उसकी पुकाकी दोनों टांगों के बीच टिकी हुई थी उसकी कुर्ती कमर से ऊपर थी,,,,और राजू को गुलाबी के बदन का वह अंग नजर आ रहा था जिसके बारे में उसने अभी तक कल्पना भी नहीं किया था उसकी सांसों की गति पलभर में ही तेज हो गई थी,,,। उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था,,,,,वह एक नजर अपनी बुआ के चेहरे की तरफ जाना और वापस उसकी दोनों टांगों के बीच अपना ध्यान केंद्रित करने लगा उसकी बुआ अभी भी गहरी नींद में सो रही थी इस बात से बेखबर कि वह सलवार नहीं पहनी है उसकी कुर्ती ऊपर चढ़ी हुई है,,,,।

वह बड़े गौर से अपनी बुआ गुलाबी की पूरी देख रहा था जो कि एक पतली दरार की शक्ल में थी और उसके इर्द गिर्द वाली जगह तवे पर फुली हुई रोटी की तरह फुली हुई थी,,,,,,और उस पर हल्के हल्के रेशमी बाल उगे हुए थे जो कि उसकी खूबसूरती को और ज्यादा बढ़ा रहे थे,,,,, राजू अभी तक औरतों के इस अंग के भूगोल से पूरी तरह से अनजान था,,,,, इसलिए तो पहली बार अपनी बुआ की बुर देखते ही उसके तन बदन में मादकता भरे सितार बजने लगे थे,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखने लगा था,,,,,,, औरतों की भजन के भूगोल से पूरी तरह से अनजान राजू इस पल को पूरी तरह से जी लेना चाहता था आखिरकार वह भी एक मर्द था इसलिए तो औरत के खूबसूरत बुर जो कि वह बुर से बिल्कुल अनजान था फिर भी उसकी तरफ आकर्षित हुआ जा रहा था और होता भी क्यों नहीं आखिरकार मर्दों का औरतों के ईस अंग से जन्मो जन्म का नाता जो है,,,,।

राजू के मुंह में अपनी बुआ की कुल देखकर पानी आ रहा था साथ ही उसके लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी,,, वह अपनी औकात से ज्यादा फूल चुका था,,,राजू को अपना मोटा तगड़ा लंड बगावत करता हुआ महसूस होने लगा तो वह अपने हाथ से अपने पजामे के ऊपर से अपने लंड को पकड़ लिया,,,। राजू के लिए यह पहला मौका था जब वह किसी नंगी बुर को देखकर अपने लंड को पकड़े हुआ था,,।

राजू के लिए यह पल बेहद अद्भुत था,,,। राजू ने कभी सपने में भी नहीं देखा था कि वह कभी इस तरह से बुर के दर्शन कर पाएगा हालांकि एक मर्द होने के नाते इतना तो पता ही था कि औरतों के दोनों टांगों के बीच ही बुर होती है लेकिन किस तरह की होती है यह पहली बार देख रहा था और समझ रहा था,,,, उसे अपनी दुआ की बुर की बनावट बेहद मदहोश कर देने वाली लग रही थी केवल पतली दरार नजर आ रही थी अब वह दरार के अंदर कैसी है यह उसे पता नहीं था,,,,

सुबह का वक्त होने के बावजूद भी उत्तेजना के मारे उसके माथे से पसीना टपक रहा था,,,,वह अपनी बुआ की बुर को अपने हाथ से छूना चाहता था,,,, लेकिन ऐसा करने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी सुबह-सुबह कमला चाची उसे अपनी गांड चुची के साथ-साथ अपनी बुर भी दिखाना चाहती थी लेकिन बुर दिखा नहीं पाई थी जिसका मलाल कमला चाची को बहुत था,,,,लेकिन शायद राजू की किस्मत में कमला चाची की नहीं अपनी खूबसूरत और जवान बुर पहले देखना दिखा था इसीलिए तो आज उसे बिना किसी मशक्कत के बुर के दर्शन हो गए थे,,,।

राजू का दिमाग काम नहीं कर रहा था लंड पूरी तरह से अकड चुका था,,,। अब उसे पेशाब का जोर और बढ़ता हुआ महसूस हो रहा था उससे वहां और ज्यादा देर ठहर पाना सहन नहीं हो पा रहा था और इसीलिए वह अपने आप पर गुस्सा भी कर रहा था क्योंकि वह इस नजारे को और देर तक देखना चाहता था जो कि लालटेन की रोशनी में साफ नजर आ रही थी,,,वह अपने मन में यह सोचने लगा कि अच्छा हुआ उसकी बुआ करवट लेकर नहीं सोई हुई थी वरना उसे आज अपनी बुआ की बुर के दर्शन नहीं हो पाते और वह औरत के इस खूबसूरत अंग के बारे में इतनी जल्दी जान नहीं पाता,,,। गुलाबी पीठ के बल लेटी हुई थी राजु उसके खूबसूरत चेहरे को देख रहा था तभी उसकी नजर उसकी चूचियों पर गई लेकिन वह कुर्ती पहनी हुई थी,,,।कुर्ती पहनी हुई थी तो कर राजू को निराशा हाथ लगी लेकिन फिर भी आज उसकी आंखों ने बहुत कुछ देख लिया था जोरो की पेशाब लगी हुई थी इसलिए बर्दाश्त नहीं हुआ,,,, वह खटिया से नीचे उतरने लगा खटिया से नीचे उतर कर एक बार फिर से वह अपनी बुआ की दोनों टांगों के बीच की उस पतली दरार को देखने लगा और अपने लंड को जोकी पजामे में तंबू बनाए हुए था,,,, पजामे में बने तंबू को देखकर खुद राजू भी हैरान हो गया था,,,, क्योंकि एकदम खूंटे की तरह था और वह अपने मन में सोचने लगा कि अगर इस पर कपड़े टांग दिया जाए तो आराम से टंगा रह जाएगा,,,,,मुझे सोच कर कमरे से बाहर निकलने ही वाला था कि उसके मन में ख्याल आया कि अगर उसकी बुआ जाग गई और उसे खटिया पर ना पाकर और अपनी स्थिति को देखकर यही समझेगी कि वह उसकी बुर को जरूर देख रहा होगा और वह ऐसा नहीं चाहता था इसलिए जाते जाते वहां लालटेन बुझा देना चाहता था ताकि कमरे में अंधेरा रहे और उसकी बुआ को यही लगेगी लालटेन अपने आप बुझ गई थी कमरे में धूप्प अंधेरे को देख कर उन्हें ऐसा ही लगेगा तो मैंने कुछ देखा नहीं हूं,,,, राजू अपने मन में यह सोचता हुआ लालटेन को बुझा दिया,,,, लेकिन बुझाने से पहले उसे दीवार के किनारे अपनी बुआ की सलवार नजर आई,,, तो अपने मन में सोचने लगा कि उसकी बुआ ने सलवार निकालकर इधर क्यो फेंकी हैं लेकिन इसे कोई समझ नहीं आ रहा था अपने मैंने उसे लगा कि शायद गर्मी ज्यादा होने की वजह से निकाल दी होंगी और वह घर से बाहर निकल गया,,,, पेशाब करने के बाद भी वह घर वापस नहीं गया क्योंकि धीरे-धीरे उजाला होने लगा था,,,,

लेकिन उजाला होने से पहले गुलाबी की नींद खुल गई थी कमरे में चारों तरफ अंधेरा था उसे ऐसा लगा कि राखी उसके पास सोया हुआ है इसलिए अपने बगल में हाथ रखकर टटोलने लगी तो वहां कोई नहीं था उसे तभी अपनी हालत का अहसास हुआ तो वह झट से उठ खड़ी हुई,,,,,,

उसे याद आ गया कि वह जल्दबाजी में सलवार पहनना भूल गई थी और बिना सलवार के भी सो रही थी और वह सोचने लगी कि उसका भतीजा राजू इससे पहले उठकर कमरे से चला गया था तो जरूर उसकी नजर उसकी बुर पर पड़ी होगी,,,,,लेकिन उसे इस बात का एहसास हुआ कि लालटेन बंद होने की वजह से कमरे में अंधेरा था वैसे मैं उसे कुछ नजर नहीं आया होगा क्योंकि वह अपनी तसल्ली के लिए कमरे के चारों तरफ और अपने आपको खुद को देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन इतना ज्यादा दे रहा था कि उसे कुछ नजर नहीं आ रहा था तो जाकर उसे इत्मीनान हुआ और वह तुरंत खटिया से नीचे उतर कर अपनी सलवार उठा कर पहनने लगी,,,, और अपने मन में सोचने लगी कि उसका भतीजा अगर उसे इस हाल में देख लेता तो क्या होता ,,,,,,,,, और ऐसा सोचते हुए वह कमरे से बाहर निकल गई और दिनचर्या में लग गई,,।

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गुलाबी को ऐसा ही लगता था कि अंधेरे की वजह से उसका भतीजा राजु,,, कमर के नीचे उसके नंगे पन को नहीं देख पाया है इसलिए थोड़ा इत्मीनान था लेकिन इस बात से सकते में आ गई थी कि वह ऐसे कैसे अपनी सलवार पहनना भुल गई थी,,,,, बार-बार उसके मन में यही ख्याल आ रहा था किरात को अपने गुलजार भाई की गरमा गरम चुदाई देखकर खुद अपनी पूर्व में उंगली डालकर अपनी गर्मी को शांत की थी जहां से खड़ी होकर अपने भैया और भाभी की चुदाई देख रही थी वहीं पर अपनी सलवार उतार कर फेंक दी थी और शायद,,,अपने बदन की गर्मी शांत करके संतुष्टि भरे एहसास के साथ वह खटीया पर पड़ी और गहरी नींद में सो गई और शायद इसीलिए बार-बार पहनना भूल गई थी लेकिन इस बात के लिए वह बार-बारभगवान को धन्यवाद दे रही थी कि अंधेरे की वजह से उसका भतीजा उसका कुछ देख नहीं पाया था,,,,। लेकिन फिर अपने मन में यह सोचने लगे कि अगर उसका भतीजा कमर के नीचे उसके नंगे पन को देख भी लेता तो क्या होता क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि रांची दूसरे लड़कों की तरह आवारा नहीं था तो शायद उसकी नजर अगर उसकी नंगी बुर पर भी पड़ जाती तो राजू कुछ नहीं करता,,,,,,,।

यह ख्याल मन में आते ही वह अपने ही मन से सवाल कर रही थी कि ऐसा खयाल उसे क्यों आ रहा है,,,, अच्छा ही तो हुआ राजू ने कुछ देखा नहीं,,,, लेकिन देख लेता तो शायद मर्द होने के नाते एक खूबसूरत नौजवान लड़की की वर देखने की वजह से उसका लंड खड़ा हो जाता तो क्या उसका चोदने का मन नहीं करता,,,, जरूर करता,,,, अगर ऐसा हो जाता तो कितना मजा आता बाहर कहीं भी मुंह मारने की जरूरत ही नहीं पड़ती और राजू उसके वश में रहता पूरी तरह से,,, इस बात की किसी को कानों कान खबर भी नहीं पड़ती और जवान लड़का होने के नाते डाई करने में उसे परम आनंद की अनुभूति होती और यह आनंद वह खोना नहीं चाहता,,,,,

गुलाबी के मन में ऐसे ख्याल आते ही उसके दिल की धड़कन बढ़ने लगी थी,,, उसे ऐसा महसूस होने लगा था कि जो कुछ भी हो सोच नहीं है वह सच हो जाएगा,,,, और इस बात का भी इसे तसल्ली थी कि उसके भतीजे का लंड उसके भाई हरिया से भी तगड़ा था,,,।जिस की गर्मी को वह अपने हथेली में लेकर महसूस कर चुकी थी और जिस तरह सेउसके लंड में पिचकारी छोड़ी थी उसे देखकर उसकी दोनों टांगों के बीच में हलचल सी मच गई थी,,,,,,, यह सब ख्याल आते ही गुलाबी का मन बहकने लगा था,,, वह कुछ कर गुजरने की सोच रही थी वह अच्छी तरह से चाहती थी कि राजू जवान होता हुआ लड़का है और वह खुद एक जवान खूबसूरत लड़की,,,, और उसका भतीजा जरूर उसकी तरफ आकर्षित होगा,,,,, गुलाबी अपनी जवानी की प्यास बुझाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार थी लेकिन उसे डर भी था कि कहीं उस्ताद आओ उल्टा ना पड़ जाए वरना वह किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रह जाएगी,,,,, यही सब सोचते हुए गुलाबी घर का काम कर रही थी,,,,,,,,

हरिया नहा धोकर बेल गाड़ी ले जाने के लिए तैयार था,,, बस जाते समय रोटी ले जाने का इंतजार कर रहा था,,, उसकी बीवी मधु उसके लिए भोजन तैयार करके उसे एक बर्तन में रखकर कपड़ा बांधकर उसे थमा देती थी जिसे हरिया अपने साथ ले जाता था और दोपहर के समय जब उसे भूख लगती थी तो खा लेता था,,,, अपने बेल को चारा पानी से तैयार करते हैं अपने बेल पर हाथ रख कर उसे सहलाते हुए वह बोला,,,।

अरे सुनती हो भोजन तैयार होगा कि नहीं बहुत देर हो रही है स्टेशन पहुंचना है वरना ट्रेन आ गई तो,,,, मेरे पहुंचने से पहले ही सवारी निकल जाएगी तब कोई फायदा नहीं रहेगा,,,,

थोड़ा रुकिए तैयार हो गया है बस बांध रही हूं,,,,,(रोटी को साफ कपड़े में बांधते हुए)

अरे खुला भी सुन तो जैसे जल्दी से अपने भैया को दे कर आ जा उन्हें बहुत देर हो रही है,,,,(गुलाबी ख्यालों में खोई हुई वहीं पास में कपड़े धो रही थी लेकिन उसे मधु की आवाज सुनाई नहीं दी तो मधु फिर जोर से बोली,,)

अरे सुन रही है या बहरी हो गई है,,,, ना जाने कौन से ख्याल में खोई हुई है,,,,,(मधु कीबातों का असर गुलाबी पर बिल्कुल भी नहीं हो रहा था वह अपनी ही धुन में थी इसलिए मधु को खड़ा होना पड़ा और वह कपड़े धो रही गुलाबी के कंधे को पकड़कर उसे जोर से झगझोरते हुए बोली,,,।)

अरे गुलाबी कौन से ख्यालों में खोई हुई है तुझे कुछ समझ में आ रहा है मैं कब से आवाज लगा रही हूं,,,,।

(मधु के द्वारा इस तरह से झकझोरे जाने पर गुलाबी एकदम से हड़बड़ा कर खड़ी हो गई मानो की किसी ने नींद में से उसे पानी डालकर जगाया हो,,,)

ककककक,,,, क्या हुआ भाभी,,,?(गुलाबी एकदम से हडबडाए हुए स्वर में बोली,,,,)

अरे हुआ कुछ नहीं तू सो गई थी इसलिए तुझे इस तरह से जगाना पड़ा,,,, रात भर जाग रही थी क्या,,,,?

नननन,,,नहीं,,,,नहीं,,,, नहीं तो,,,,, बस थोड़ा सा आंख लग गई थी,,,।(गुलाबी घबराहट के मारे हक लाते हुए बोली,,)

रात भर तेरे भैया मुझे सोने नहीं देते और सुबह तुझे नींद आती है,,,,

भला भैया क्यों तुम्हें सोने नहीं देते,,,,

इतनी ही जानने की उत्सुक है तो जाकर अपने भैया से क्यों नहीं पूछ लेती,,, मुझे सोने क्यों नहीं देते,,,,(रोटी और सब्जी रुमाल में बांदीकुई गुलाबी को थमाते हुए बोली,,,)

जा जाकर अपने भैया को दे कर आ कब से इंतजार कर रहे हैं और पूछ भी लेना कि मुझे रात भर सोने क्यों नहीं देते,,।

(अपनी भाभी की ऐसी बात सुनकर गुलाबी मुस्कुराने लगी क्योंकि अपनी भाभी के कहने का मतलब अच्छी तरह से समझती थी और अपनी आंखों से देख भी चुकी थी भले ही उसके भैया रात भर उसकी भाभी को जगाते हैं लेकिन साथ में उसके भैया की वजह से वो खुद जागती रहती है,,, अब इस बात को वह अपनी भाभी को तो बता नहीं सकती थी,,,,)

भाभी तुम्हारी समस्या है तुम ही पूछो,,,(इतना कहते हो वह खाना लेकर के पास आ गई ,,, उसके भैया बैलगाड़ी पर सवार हो चुके थे,,,,, और गुलाबी को खाना लेकर आते देखकर वह बोले)

ला जल्दी कर गुलाबी बहुत देर हो रही है,,,,

लो भैया समय पर खा लेना,,,,,(इतना कहते हुए गुलाबी कपड़ों में बंधा हुआ खाना अपने भाई हरिया को समाने लगी और हरी अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसे थामने लगा कि तभी उसकी नजर गुलाबी की कुर्ती पर गई जो कि कपड़े धोने की वजह से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और भीगे हुए कुर्ती में से गुलाबी कि दोनों चूचियां एकदम साफ झलक रही थी,,,। और जिस तरह के गंदे कपड़े धोते समय गुलाबी के मन में आ रहे थे उन उत्तेजक ख्यालों की वजह से उसके तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ ने लगी थी जिसकी उत्तेजना उसकी दोनों टांगों के बीच की दरार और उसकी चुचीयों में साफ महसूस हो रही थी जिसकी वजह से उसकी चूची की निप्पल तन कर खड़ी हो गई थी,,,, अपनी बहन की झलकती हुई चुची और उसकी कड़ी निप्पल को देखते ही,,, हरिया की धोती में खलबली मचने लगी,,, उसका लंड मुंह उठाकर देखने लगा,,,, हरिया भोजन को थाम ते हुए अपनी आंखों को अपनी बहन की छातियों पर गड़ाए हुए था पहले तो गुलाबी को कुछ समझ में नहीं आया लेकिन जैसे ही अपने बड़े भाई की नजर के सिधान को वह अपनी छातीयो पर महसूस की,,,उस बात को महसूस क्योंकि उसकी कुर्ती पूरी तरह से गीली हो चुकी थी और गीली कुर्ती में से उसकी चूचियां साफ़ झलक रही थी उसकी निप्पल साफ झलक रही थी ,,, अपने भैया के नजर को भांपते ही वह एकदम शर्म से पानी पानी हो गई उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,, और वह अपनी भाई की प्यासी नजरों को अच्छी तरह से समझ रही थी,,,,,, क्योंकि वह इसी तरह से अपने भैया को अपनी चुचूयों को देखते हुए देखी थी,,,,,,

पल भर में ही गुलाबी की सांसे भारी हो गई,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें,,,, उसके लिए यह पल बेहद कशमकश भरा हुआ था,,,,उसे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है लेकिन इतना तो जानती थी कि उसका भाई उसकी चुचियों को देखकर स्तब्ध रह गया है,,,, ऐसा उसके साथ कभी भी नहीं हुआ था कभी भी उसने अपने भाई को इस तरह से गंदी नजरों से देखते नहीं पाई थी,,,, लेकिन आज जो कुछ भी हो रहा था वह कोई स्वप्न या कल्पना नहीं था ,,,, हकीकत था,,,,, अभी भी गुलाबी उसी तरह से रोटी की पोटली को आगे बढ़ाई हुई थी और उसका भाई हरिया उसे था में हुए था वह पूरी तरह से जडवंत मूर्ति बन चुका था,,,,,,,

हरिया के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ उठी थी,,, यापन उसके लिए भी बेहद अतुल्य और लुभावना लग रहा था क्योंकि आज तक उसने इतने नजदीक से कभी भी अपनी बहन के खूबसूरत अंगो को देखा नहीं था,,,, उसकी आंखों के सामने उसकी खूबसूरत बहन गुलाबी के संतरे नजर आ रहे थे हालांकि वह कुर्ती के अंदर थे लेकिन कुर्ती के किले होने की वजह से उसका आकार और उसका हल्का का रंग साफ नजर आ रहा था,,,,,,, हरिया के लिए तो यह मौका मानो कि अनजाने में भी पुस के ढेर में रसीले आम नजर आ जाने के बराबर था,,,,इसलिए तो उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी और उसकी आंखों में वासना की चमक साफ नजर आ रही थी,,,, हरिया के लिए यह दूसरा मौका था जब अपनी बहन की खूबसूरत अंगों को देख कर पूरी तरह से उत्तेजित हो गया था,,,रात को ही उसने अनजाने में ही अपनी बहन को पेशाब करते हुए देखा था उसकी नंगी में गोल गोल गांड को देखकर जिस तरह से उसका लंड ऊबाल मार रहा था उसे अपनी जवानी का दिन याद आ गया था,,,,,, उस समय हरिया अपने आप को किसी तरह से संभाल ले गया था वरना उसका मन तो कर रहा था कि आगे बढ़े और अपनी बहन की गोरी गोरी गांड को अपने दोनों हाथों से थाम कर उसे जी भर कर प्यार करें,,,,,,,,

इस हालात में गुलाबी के तन बदन में अजीब सी कसमसाहट हो रही थी वह समझ नहीं पा रही थी कैसे हालत में वह क्या करें वह अपने भैया की हालत को अच्छी तरह से समझ रही थी उसका भाई पूरी तरह से उसकी चूचियों की तरफ आकर्षित हो चुका था,,,,,,, गुलाबी को इस बात का डर था कि जिस लालच भरी निगाहों से उसका उसकी चूची को देख रहा था कहीं वहां अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसकी चूचीयो को थाम न ले,,,, इसलिए गुलाबी खुद ही इस आकर्षण के भंवर को तोड़ते हुए बोली,,,।

भैया समय मिले तो जल्दी खाना खा लेना,,,,

(गुलाबी की आवाज सुनते ही जैसे हरिया की तंद्रा भंग हुई होगा इस तरह से हर बढ़ाते हुए अपना हाथ पीछे खींच लिया और बिना कुछ बोले और बिना नजर मिला ही बस हां ठीक है बोलकर बैलगाड़ी को आगे की तरफ हांक दिया,,, गुलाबी कुछ देर तक वहीं खड़े अपने भाई को जाकर भी देखती रही और फिर जब एक नजर अपनी छातियों पर घुमाई तो वो खुद शर्मिंदा हो गई क्योंकि उसकी गोल-गोल चूचियां एकदम साफ झलक रही थी,,,, गुलाबी का दील अभी भी जोरों से धड़क रहा था वह वापस घर में आ गई और इस बार मधु की नजर उसकी छातियों पर पड़ी तो वह जोर जोर से हंसने लगी,,,, अपनी भाभी को इस तरह से हंसता हुआ देखकर गुलाबी बोली)

तुम क्यों हंस रही हो तुम्हें क्या हो गया,,,,

अरे मुझे कुछ नहीं हुआ है लेकिन अपनी हालत तो देख तेरी कुर्ती देख पूरी तरह से गीली हो चुकी है और तेरी चूची दिख रही है,,,

(अपनी भाभी के मुंह से चुची सबसे सुनकर गुलाबी गनगना गई,,,,,,)

अरे यह तो कपड़े धोते समय गीला हो गया,,,,(अपनी कुर्ती को अपने दोनों हाथों से पकड़कर उसे झाड़ते हुए बोली)

तेरे भैया ने तो देख ही लिया होगा तेरी चूची,,,,

नहीं तो ऐसा कुछ भी नहीं हुआ,,,,

अरे पगली तू नहीं जानती तेरे भैया को चूचियां बड़ी अच्छी लगती है,,,,, देख नहीं रही है मेरी चूची को क्या हाल किए है दबा दबा कर,,,,,(मधु अपनी चूचियों की तरफ नजर डालते हुए बोली,,,,)

अरे भाभी भैया को तो बड़ी-बड़ी चूचियां पसंद होगी ना मेरी तो अभी संतरे जैसी है,,,,

अरे बुद्धू मेरी भी पहले संतरे जैसी ही थी तेरे भैया ने दबा दबा कर मेहनत की है तभी तो खरबूजे जैसी हो गई है,,,,(मधु हंसते हुए बोली)

क्या भाभी तुम भी,,,,(इतना कहकर गुलाबी फिर से कपड़े धोने बैठ गई)

लगता है तेरे भैया ठीक से तेरी चुची को देखे नहीं वरना,,,,,(इतना कहकर मधु चुप हो गई,,,)

वरना क्या भाभी,,,,(गुलाबी कपड़े धोते हुए बोली गुलाबी और जानना चाहती थी इसलिए हो सकता हूं बस अपनी भाभी को बोली थी,, ताकि उसकी भाभी उसे आगे की बात बता सके गुलाबी का दिल जोरो से,,, धड़क रहा था,,,, खास करके उसके भैया से जुड़ी बातें ना जाने क्यों अच्छी लग रही थी,,,, गुलाबी की बात सुनकर मधु बोली,,,,)

वरना क्या ,,,अरे तेरे भैया बैलगाड़ी छोड़कर तुरंत तेरी कुर्ती उतार कर फेंक देते और तेरी चुची दबा दबा कर मुंह में भर कर पीना शुरू कर देते,,,,

धत् भाभी कैसी बातें करती हो,,,,(गुलाबी एकदम से शरमा गई और शर्माते हुए बोली,,,,)

अरे सच कह रही हूं तेरे भैया को तु जानती नहीं है,,,, एक बार मौका देकर देख अपना मोटा तगड़ा लंड तेरी बुर में डालकर तेरी चुदाई करने से भी नहीं चूकेंगे,,,,,

(अपनी भाभी की इस तरह की गंदी बातें सुनकर गुलाबी पूरी तरह से उत्तेजना से गनगना गई,,,, उसे उम्मीद नहीं थी कि उसकी बातें उसके भैया को लेकर इतनी गंदी बात बोलेगी लेकिन गुलाबी को इसमें मजा आ रहा था उसकी बुर पनिया रही थी,,, अपनी भाभी की बातें सुनकर गुलाबी भी अपनी भाभी को चिढ़ाने के उद्देश्य से बोली,,,)

भाभी अगर भैया मेरे पीछे पड़ जाएंगे तो तुम्हारा क्या होगा तूमे तो भूल ही जाएंगे,,,,

अरे भगवान का लाख-लाख शुक्र होगा जो तेरे भैया मुझे छोड़ कर तेरे पीछे पड़ जाएंगे तो मेरी जान तो बचेगी नही तो रात भर सोने नहीं देते फिर तु झेलना अपने भैया को,,,,

(इतना कहकर गुलाबी काम करने लगी और गुलाबी अपनी भाभी की बातों को कल्पना का रूप देने लगी,,,,, कि कैसे उसके भैया अपने हाथों से उसकी कुर्ती निकाल कर उसके संतरे जैसी चूची को अपनी हथेली में भर भर कर दबा रहे हैं और उसे मुंह में भरकर पी रहे हैं इसके बाद अपनी गोद में उठाकर खटिया पर लेटाते हुएसलवार की डोरी को अपने हाथों से खोल कर उसकी सलवार उतार कर खटिया से नीचे फेंक दिया और अपने मोटे तगड़े लंड को हिलाते हुए खटिया पर चढ़कर उसकी दोनों टांगों को फैला कर उसकी दोनों टांगों के बीच अपने लिए जगह बनाते हुए अपने लंड को उसकी बुर में डाल दिया और जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिए इस कल्पना को करते हुए गुलाबी कपड़े धोना भुल गई और इस कल्पना में इस कदर खोई की उसकी बुर से पानी निकल गया

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हरिया बैलगाड़ी को हांक कर सीधे रेलवे स्टेशन पर ही खड़ा हुआ,,,बेल गाड़ी पर बैठ कर आया था लेकिन फिर भी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि वह इस कदर अपनी बहन की मस्ताई चुचियों को प्यासी नजरों से देख रहा था,,,,हरिया अपने मन में सोच कर हैरान हो रहा था कि यह उसे क्या हो रहा है उसके अंदर अपनी बहन को देखकर बदलाव क्यों आ रहा है जबकि वह अपनी बहन को जान से भी ज्यादा मानता था उसके बारे में कभी भी गंदे विचार उसके मन में नहीं आए थे लेकिन कुछ दिनों से हालात कुछ और ही बयां कर रहे थे उसके ना चाहते हुए भी अनजाने में ही उसकी आंखों के सामने ऐसे तेरे से नजर आ जा रहे थे कि लाख मनाने के बावजूद भी उसका मन बहक जा रहा था,,,, ऐसा उसके साथ कभी भी नहीं हुआ था हरिया स्टेशन के बाहर बैलगाड़ी पर बैठे-बैठे उस दिन की घटना से अब तक के उस दृश्य को याद करने लगा जो अचानक ही उसकी आंखों के सामने आए थे और उन पर उसको देखना उसके जेहन में उसके दिलो-दिमाग पर अपनी बहन के बारे में ही गंदे विचार आने लगे थे,,,,,,हरिया के दिमाग में पहली बार की घटना याद आ रही थी जब वह खटिया पर बैठकर दातुन कर रहा था और उसकी आंखों के सामने उसकी बहन गुलाबी घर की सफाई करते हुए झाड़ू मार रही थी,,, झाड़ू मारने की वजह से वह झुकी हुई थी जिसकी वजह से उसकी गोलाकार गांड उभर कर हरिया की आंखों के सामने अपने आप ही प्रदर्शित हो रही थी जिसे देख कर हरीया की धोती में खलबली मच गई थी,,, हरिया के लिए वह पहला मौका था जब वह अपनी बहन को दूसरी नजरों से देख कर उत्तेजित हो रहा था अपने जनपद में में उत्तेजना महसूस किया था किसी भी तरह से अपने आप को हरिया ने संभाल लिया था और आगे ना बढ़ने का अपने आप से ही वादा किया था अपनी इस हरकत पर उसे खुद भी गुस्सा आया था,,,, दूसरी मर्तबा घर के पीछे बेल को बांधते हुए अनजाने में ही उसकी बहन उसकी आंखों के सामने आ गई थी,,,उस समय हरिया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें क्योंकि उसकी आंखों के सामने ही उसकी बहन अपनी सलवार की डोरी खोलने लगी थी उसकी पीठ हरिया की तरफ थी लेकिन उसकी बहन नहीं जानती थी कि उसकी पीठ पीछे उसका भाई का है हरिया अजीब सी कशमकश महसूस कर रहा था और देखते ही देखते उसकी पहन अपनी सलवार की डोरी खोल कर के साफ करने के लिए बैठ गई अपने आपको लाख संभालने के बावजूद भी हरिया अपनी बहन की नंगी काम को देखने की लालच को रोक नहीं पाया था और उसे प्यासी आंखों से देख रहा था,,,, उसने हरिया के मन में क्या चल रहा था उससे हरिया पूरी तरह से वाकिफ था,,,,, और हरिया अपने मन पर काबू नहीं कर पाया था और अभी-अभी पानी में भीगी हुई अपनी बहन की कुर्ती में से झांक रही उसकी दोनों गुलाबी चुचियों को देखकर हरिया का मन पूरी तरह से लोटपोट हो चुका था,,, वह पूरी तरह से अपनी बहन की चूचीयो की तरफ आकर्षित हो गया था,,,,,,, जैसे ही अपनी बहन की चुचियों के आकर्षण के मंत्रमुग्ध माया में से बाहर निकला वह पूरी तरह से हड़बड़ा गया था और बैलगाड़ी को सीधा हांक कर रेलवे स्टेशन पर खड़ा हुआ था,,,, उन सब वाक्ए के बारे में सोच कर इस समय हरिया के दिल की धड़कन बढ़ गई थी और उसकी धोती में पूरी तरह से बवंडर उठ रहा था,,,, कि तभी उसका दोस्त उसका हाथ पकड़कर झकझोरते हुए बोला,,,।

अरे कहां खोया है ट्रेन आ चुकी है जल्दी चल वरना सवारी हाथ से निकल जाएगी,,,,।

(अपने दोस्त की बात सुनते ही जैसे वह नींद से जागा हो एकदम से हड़बड़ा गया,,,)

सो रहा था क्या भाभी लगता है रात भर सोने नहीं देती,,,,

अरे नहीं यार ऐसे ही चल जल्दी चल,,,

(और इतना कहने के साथ ही हरिया बैलगाड़ी से नीचे उतरा और सीधे रेलवे स्टेशन की तरफ दौड़ लगा दिया)

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए,,,,,, राजू के मन में अपनी बुआ की बुर देखने की चाहत बढ़ने लगी थी,,, इसलिए वह सुबह जल्दी जागने की कोशिश करता था लेकिन ऐसा हो नहीं पाता था और गुलाबी भी लोक लाज के डर से मन होते हुए भी सलवार पहनकर सोती थी,,,,,,, उस समय तो हालात को देखते हुए और शर्म के मारे गुलाबी यही सोचकर संतुष्ट थी कि उसके भतीजे ने उसकी नंगी बुर को देखा नहीं थालेकिन अब जैसे-जैसे उसकी बुर की प्यास बुर की गर्मी बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे अपने मन में यही सोच रही थी कि काश उसका भतीजा राजु उसकी बुर को देख लिया होता तो शायद उसके मन और तन की प्यास बुझने का कोई तरीका निकाल आता,,,, लेकिन उसी तरह से अपनी बुर दिखाने की हिम्मत उसकी नहीं हो रही थी,,, उसके मन में इस बात का डर बराबर बना हुआ था कि अगर वहां कैसे सलवार उतार कर सोएगी और उसका भतीजा उसे उस हाल में देख लेगा तो कहीं ऐसा ना हो कि वह अपनी मां से बता दे कि वह बिना सलवार पहने सोती है तब क्या होगा क्योंकि वह अपने भतीजे राजू की नादानियत को अच्छी तरह से जानती थी,,,, भले ही वह शरीर से लंबा तंबा हो गया था लेकिन औरतों के मामले में उसका दिमाग ज्यादा नहीं चलता था,,,, अगर वह भी दूसरे लड़कों की तरह होता तो शायद ही खूबसूरत लड़कि के साथ एक ही खटिया पर सोने की वजह से वह अब तक उसके अंगो से छेड़खानी जरूर किया होता,,, और उसे चोदने का अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया था लेकिन ऐसाआज तक नहीं हुआ था कि जाने अनजाने में ही वह उसके अंगों को स्पर्श किया हो इसलिए गुलाबी को डर लगता था बिना सलवार पहने सोने में,,,,,,। हालांकि वह रोज अपने भैया और भाभी की चुदाई देखकर पूरी तरह से मस्त हो जाती थी उसकी आदत सी पड़ गई थी अपनी बुर मे उंगली करके सोने की,,,, ऐसे ही एक रात को राजू की नींद खुल गई उसने जोरों की प्यास लगी थी ,,,, वह नींद से उठकर खटिया पर बैठ गया,,, तो देखा कि उसकी बुआ खटीए पर ना होकर दीवार के पास खड़ी होकर कुछ देख रही थी राजू को कुछ समझ में नहीं आया वह अभी भी नींद में ही था बस प्यास लगने की वजह से जाग गया था,,,,,, वह अपनी बुआ की तरफ देखते हुए बोला,,,

बुआ मुझे प्यास लगी है,,, तुम वहां क्या कर रही हो,,,?

(अपने भतीजे की आवाज सुनते ही गुलाबी एकदम से चौक गई क्योंकि कमरे में लालटेन चल रही थी पूरे कमरे में लालटेन की रोशनी और उस समय गुलाबी दूसरे कमरे में अपने भैया भाभी कीगरमा गरम चुदाई को देखकर सलवार के ऊपर से अपनी बुर को मसल रही थी,,, राजू की आवाज कानों में पडते ही वह झट से अपने हाथ को पीछे की तरफ खींच ली,,,,सारा मजा किरकिरा हो गया था क्योंकि अंदर गुलाबी का भाई अपने लंड को उसकी भाभी की बुर में डालने ही वाला था,,,)

ककककक,,, क्या हुआ,,,?(एकदम से राजू की तरफ देखते हुए हक लाते हुए बोली)

मुझे प्यास लगी है बुआ,,,

रुक अच्छा दे रही हुं,,,(इतना कहकर वह तुरंत कमरे में ही कोने पर रखे हुए मटके में से गिलास भर कर पानी निकाल कर राजू को थमाते हुए बोली,,,)

ले पी ले,,,, रात रात को जाग कर पानी पीता है,,,

(राजू पानी का गिलास लेकर पानी पीने लगा गुलाबी की हालत खराब हो रही थी उत्तेजना के मारे उसकी बुर से पानी निकल रहा था,,।वह अपनी शर्मा की दुल्हनिया खोलकर अलीपुर में उंगली डालने की तैयारी में थी कि तभी उसकी आवाज आ गई थी इसलिए उसके सारे मजे पर पानी फिर गया था,,, गुलाबी मन ही मन में राजू पर गुस्सा कर रही थी,,, राजू पानी पीकर ग्लास को अपनी बुआ को थमाते हुए बोला,,)

लो बुआ रख दो,,,,(गुलाबी गिलास थामकर उसे वापस भटके के पास रख दी और खड़ी हो गई उसे लगा कि राजू अभी सो जाएगा लेकिन राजू बुआ की तरफ देखते हूए बोला)

दीवाल के अंदर क्या देख रही थी बुआ,,,?

(राजू के इस सवाल पर गुलाबी एकदम से झेंप गई और हकलाहट भरे स्वर में बोली)

ककककक,,, कुछ तो नहीं वो क्या है ना कि छिपकली आ गई थी इसलिए मैं उसे भगा रही थी और वह दीवाल में चली गई,,,

ओहहहह ,,,,,,, अच्छा हुआ बुआ तुम छिपकली को भगा दी मुझे छिपकली से डर लगता है,,,, अब आओ जल्दी से सो जाओ,,

तू सो जा मुझे नींद नहीं आ रही है,,,

मुझे भी नहीं आ रही है बुआ,,,,

(राजू की बात सुनकर गुलाबी को और ज्यादा गुस्सा आने लगा लेकिन कर भी क्या सकती थी वह जानते थे कि उसके जागते हैं वह अंदर के दृश्य को नहीं देख पाएगी,,, इसलिए ना चाहते हुए भी उसे सोना पड़ा,,, थोड़ी ही देर में दोनों को नींद आ गई,,,)

दूसरी तरफ कमला चाची जानबूझकर राजू को अपना अंग दिखाने की कोशिश करते हुए जिस तरह की उत्तेजना का अनुभव की थी उससे वह पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी,,, बहू वाली हो जाने के बावजूद भी इस उम्र में कमला चाची की उत्तेजना बरकरार थी,,,, इसीलिए तो वहां मन ही मन में अपने आपको राजू को समर्पित करने की ठान ली थी क्योंकि वह जानती थी जवान लंड को अपनी बुर में लेने से अत्यधिक आनंद आएगा,,,,,, कमला चाची पूरी तरह से तैयार थी लेकिन उन्हें कोई मौका नहीं मिल रहा था,,,,,,

ऐसे ही एक दिन वह अपने घर पर बैठी हुई थी उनकी बहू खाना बना रही थी कमला चाची को भूख लगी थी खाना बनने में थोड़ी देर थी उसी समय राजू अपने मन में एक आस लेकर कि आज के कुछ देखने को मिल जाएगा इसलिए वह कमला चाची के घर पर आया,,, तो दरवाजे पर खड़ा होकर दरवाजे पर दस्तक देते हुए बोला,,,।

चाची घर पर हो कि नहीं,,,,

(राजू की आवाज कानों में पड़ते ही कमला चाची का तन बदन में आनंद की लहर दौड़ में लगी लेकिन अपनी बहू की मौजूदगी में उन्हें खुशी नहीं हुई लेकिन फिर भी राजू की आवाज सुनते ही वह बोली,,,)

हां घर पर ही हूं आ जा,,,,

(कमला चाची की आवाज सुनते ही राजू दरवाजे को थोड़ा धक्का दिया तो दरवाजे अपने आप ही खुल गया और अंदर कदम रखते ही व कमला चाची को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और खाना बना रही उनकी बहू को भी नमस्ते भाभी बोल कर उनका अभिवादन किया,,,, राजू को एक बार फिर से अपनी आंखों के सामने खड़ा देखकर कमला चाची की बहू रमा उसे एकटक देखने लगी रामा को राजू अच्छा लगने लगा था उसका भोलापन उसे भा गया था,,,)

आ बैठ,,,,,(कमला चाची खटिया पर बैठने का इशारा करते हुए बोली,,,,,,, लेकिन राजू कम ने चाची को खटिया पर बैठा हुआ देखकर और धमाके उपस्थिति को देखते हुए उसका मन उदास हो गया उसे ऐसा था कि आज भी कमला चाची नहा रही हो तो मजा आ जाए,,, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था इसलिए कमला चाची की बात सुनते ही वो बोला,,)

नहीं नहीं चाची बैठने में नहीं आया हूं बस यहां से गुजर रहा था तो सोचा आप से मिलता चलु,,,।

ठीक कीया राजू,,, जो तु मिलने आ गया,,, तू अच्छा लड़का है,,,,,

(कमला चाची की :ऐसी बात सुनकर राजु मन ही मन प्रसन्न हो गया और मुस्कुराते हुए बोला,,,,)

ठीक है चाची मे चलता हूं खेतों में थोड़ा काम है,,,,,,,

(इतना कहकर वह जैसे ही चलने को हुआ तुरंत कमला चाची बोली,,,)

अरे रुक मैं भी चलती हूं मुझे भी खेतों में थोड़ा काम है,,,,

(इतना कहकर कमला चाची खटिया पर से खड़ी हो गई तो उनकी बहु रमा बोली,,)

अरे मा जी खाना तो खाते जाइए बस थोड़ी देर रह गई, है,,..

(लेकिन अपनी बहु की बात अनसुनी करते हुए कमला चाची उसके पीछे पीछे चल दी,,, कमला चाची की बहू को लगा कि शायद खाना मैं देर हो जाने के कारण हम गुस्सा कर चली गई है इसलिए वह जल्दी जल्दी बनाने लगी,,, कमला चाची को अपने पास आता देखकर राजु को अंदर ही अंदर खुशी हो रही थी,,,क्योंकि नहाते समय जिस तरह से कमला चाची अपनी अंगो का प्रदर्शन की थी उसे देखकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहरों में लगी थी और उसी अंगप्रदर्शन की लालच की वजह से ही राजू कमला चाची के पास दोबारा आया था वरना कमला चाची के पास भटकने की उसकी हिम्मत नहीं होती थी,,,। और यह हकीकत ही था कि,,, कमला चाची के अंगों को देखकर ही उसके बारे में पता चला था और रही सही कसर राजू ने अपनी बुआ की बुर देखकर पूरी कर ली थी,,,।

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और कमला थी कि अपने बदन की चाल को बेहद मादक बना रही थी वह जानती थी कि ,,, ऊंची नीची टेंढी मेढी पगडंडियों से चलते हुए उसकी कमर बलखा जा रही है जिसकी वजह से उसकी भारी-भरकम गांड की लचक कुछ ज्यादा ही मचक दे रही है,,,,,,। कमला चाची आगे आगे चलते हुए अपने मन में ही कहीं युक्तियों को जन्म दे रही थी कि किस तरह से वह राजू के सामने अपने अंग का प्रदर्शन करें जिसकी वजह से राजू पूरी तरह से उत्तेजना पास होकर उसके साथ संभोग सुख प्राप्त करें और उसे इस उम्र में भी जवानी का मजा चखा दे,,, और इस बात को भी वह चित्र भी जानती थी कि राजु पूरी तरह से औरतों के साथ खेले जाने वाले खेल में अनाड़ी है उसे धीरे-धीरे सिखाना भी पड़ेगा,,,, लेकिन एक शिक्षिका के भांती संभोग के बाराखडी में कमजोर अपने विद्यार्थी को संभोग का संपूर्ण अध्ययन कराने के लिए वह बेहद उत्सुक थी,,,,,,, और गुरु दक्षिणा के रूप में वह राजू से संपूर्ण संतुष्टि चाहती थी,,,।

देखते ही देखते दोनों घने खेतों के बीच पहुंच चुके थे,,,,,, खेतों के बीच पहुंचते ही कमला चाची बेहद उत्सुकता दिखाते हुए राजू की तरफ घूम गई और उससे बोली,,,,।

राजू हमें यह हरी हरी घास जो दिख रही है ना इन्हें उखाड़ कर एक तरफ रखना है ताकि यह जगह एकदम साफ हो जाए और हम इस पर अनाज लगा सके,,,,,,

(लेकिन शायद कमला चाची की बात कर राजू का ध्यान नहीं गया वह एकदम सन्न होकर एकटक कमला चाची की विशाल छातियों की तरफ देख रहा था,,,और देखता भी क्यों नहीं आखिरकार उसकी आंखों के सामने कमला चाची की छातियों का नजारा है कुछ अद्भुत और आकर्षक था कमला चाची राजू के आगे आगे चलते हुए मन में युक्ति सोचते हुए वह जानबूझकर अपने ब्लाउज के ऊपर के 2 बटन को खोल दी थी ताकि उनमें से उसकी चुचियों का अधिकांश भाग राजु को दिखाई दे और ऐसा ही हो रहा था,,, कमला चाची की मदमस्त कर देने वाली चुचीयां आधे से ज्यादा बाहर को झलक रही थी ऐसा लग रहा था कि कमला चाची के ब्लाउज बड़े-बड़े दशहरी आम रखे हुए हैं और वह पक कर बाहर आने के लिए मचल रहे हैं,,,, राजू की तो सांसे उपर नीचे हो रही थी क्योंकि करना चाहती थी चूचियों के निप्पल तो नहीं लेकिन निप्पल के इर्द-गिर्द भूरे रंग का घेराव साफ नजर आ रहा था,,,, राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी कमला चाची मन में युक्ति सोचकर जिस तरह का प्रहार राजू के ऊपर की थी उससे वह खड़े खड़े ढेर हो चुका था क्योंकि खेतों में काम करने के बारे में जिस तरह का निर्देश कमला चाची बता रही थी उस पर राजू का बिल्कुल भी ध्यान नहीं था और राजू अपनी फटी आंखों से कमला चाची की छातियों को बोल रहा था यह देखकर कमला चाची के तन बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी,,,। कमला चाची को अपनी युक्ति कामयाब होती नजर आ रही थी,,,। राजू के मुंह से एक भी शब्द नहीं फुट रहे थे,,,, कमला चाची ही उसका ध्यान भंग करते हुए बोली,,,)

कहां खो गया मैं तुझसे कुछ कह रही हूं,,,,,

(कमला चाची की आवाज कान में पडते ही जैसे वह होश में आया हो इस तरह से हड़बड़ा गया,,,)

ककककक,, क्या करना है चाची,,,,

अरे मैं कह रही हूं कि खेतों में से घास उखाड़ कर एक बगल में रखना है,,,,

ठीक है चाची,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह नीचे झुककर हरी हरी घास दोनों हाथों से उखाड़ना शुरू कर दिया,,, कमला चाची वहीं पास में खड़ी मुस्कुरा रही थी वह जानती थी कि उसकी युक्ती पूरी तरह से काम कर रही थी,,,,,,, उसके मन में अभी भी कुछ और युक्ति चल रही थी वह ठीक उसके सामने खड़ी हो गई और नीचे झुककर घास उखाड़ने को हुई ही थी कि,,,आधे से ज्यादा बाहर झांक रही उसकी दोनों चूचियां गप्प से ब्लाउज से बाहर निकलकर दशहरी आम की तरह झूलने लगी,,,,,,,कमला चाची अच्छी तरह से जानती थी कि उसके इस तरह से छुप जाने की वजह से उसकी भारी-भरकम खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में ठहर नहीं पाएंगी और लचक कर लटक जाएंगी,,, जैसे ही उसकी दोनों चूचियां पके हुए आम की तरह ब्लाउज में से बाहर झूल गई वैसे ही उसके मुंह से आह निकल गई,,,,)

आहहहहहह,,, यह क्या हो गया,,,,(कमला चाची यह सब तो जानबूझकर पहुंची थी ताकि वह राजू का ध्यान अपनी और कर सके क्योंकि वह जानती थी कि वह नजर मिला पानी में शर्म महसूस कर रहा थाकमला चाची के नाम से इतना निकलते ही राजू आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा तो उसकी रही है सही ताकत भी एकदम क्षीण हो गई,,,, उसकी आंखों के सामने कमला चाची की दोनों खरबूजा जैसी चूचियां उसकी छाती पर लटक रही थी मानो के जैसे कोई पपिया का फल पपिया के पेड़ पर झूल रहा हो,,, उत्तेजना के मारे राजू का गला सूखने लगा वह नीचे झुका हुआ ही कमला चाची की मदमस्त कर देने वाली चुचीयों को देख रहा था,,, जिंदगी में पहली बार राजू किसी नंगी चूची को देख रहा था,,,, इसके लिए उसकी सांसे ऊपर नीचे हो चली कमला चाची जानती थी कि राजू की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए इतना काफी था इसलिए,,, वह अपनी दोनों चुचियों को मादक अंदाज में अपने दोनों हाथेली में पकड़कर उठाते हुए खुद भी खड़ी होते हुए बोली,,,)

कमला चाची की बड़ी बड़ी चूची हो तो देख कर राजू का मन कर रहा था कि वह खुद कमला चाची के ब्लाउज के बटन को खोले

अरे दैया यह तो बाहर निकल गई,,,, बड़ी बेशर्म है किसी का भी लिहाज नहीं करती,,,(कमला चाची मुस्कुराते हुए बोली औरअपनी दोनों चुचियों को बारी-बारी से अपने हाथ से पकड़ कर ब्लाउज में ठुसने लगी,,,, राजू के लिए उसके कोमल उम्र की तुलना में यह दृश्य असहनीय था,,,।कमला चाची अपनी कामुक हरकत की वजह से ही राज्यों के तन बदन पर अपनी कामुकता का वार पर वार कर रही थी,, और राजू के लिए कमला चाची का हर एक वार घातक सिद्ध हो रहा था राजू की उमंग मारती जवानी और ज्यादा मचल उठ रही थी,,,,,, कमला चाची जानबूझकर अपनी चाची को जोर जोर से दबाते हुए और राजू को दिखाते हुए अपने ब्लाउज मे भर रही थी वह जानती थी कि ऐसा करके वह राजू के तन बदन में आग लगा रही है और यही तो वह चाहती ही थी कमला चाची की हरकत को देखकर राजू जोकि इस खेल में बिल्कुल भी अनजान था वह अपने मन में सोचने लगा कि कास कमला चाची की चूचियां उसके हाथ में होती तो कितना मजा आ जाता ,,,,

कमला चाची की कामुक हरकत को देखकर राजू का मन कमला चाची की चूचियों को दबाने का कर रहा था,,

राजू की आंखों के सामने ही कमला चाची अपनी चुचियों को बारी-बारी से अपने ब्लाउज में भरकर बटन बंद कर ली इस बार केवल एक ही बटन खुला रखी क्योंकि वो जानती थी कि अगर दोनों बटन खुला रखी थी तो फिर से दोनों बाहर निकल आएगी और जितना वह राजू को दिखा चुकी थी उतना काफी था राजू के पजामे में उसके समझ के परे ही तंबू बन चुका था जिस पर कमला चाची की नजर पड़ चुकी थी और उस तंबू को देखकर कमला चाची की बुर गीली होने लगी थी,,,। राजू अपने सूखे गले को थूक निगल कर गिला करने की कोशिश करते हुए बोला,,,)

यह कैसे हो गया चाची,,,,

अरे बटन खुला था ना इसलिए,,,,(इतना कहते हुए कमला चाची अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर कमर में खुश ले जिससे उसकी साड़ी उसकी पिंडलियों तक उठ गई और उसकी चिकनी मोटी मांसल पिंडलिया साफ दीखने लगी,,,)

बटन बंद कर लेना चाहिए था ना चाची,,,,

कोई बात नहीं कहां किसी गैर ने देख लिया है तू ही तो देखा है,,,,(इतना कहकर कमला चाची मुस्कुराने लगी और कमला चाची की बात सुनकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई वह वापस नीचे झुक कर घास तोड़ने लगा,,,, और कमला चाची भी घास उखाड़ने लगी,,,, राजू अपने मन में सोच रहा था कि कमला चाची के घर देखने को छोड़ आया था लेकिन कमला चाची तो उससे भी ज्यादा दिखा दीराजू अपने मन में सोचने लगा कि कमला चाची की चूचीया कितनी बड़ी बड़ी है,,, दबाने में बहुत बहुत मजा आएगा,,, इस तरह की बातों को राजू पहली बार अपने मन में ला रहा था जिस पर उसका भी बस नहीं था,,,,,अपनी लटकती हुई चूचियों को दबा दबा कर अपने ब्लाउज में भरने की वजह से और राजू को दिखाकर उकसाने की वजह से कमला चाची की भी हालत खराब हो रही थी,,,,। कमला चाची के मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी क्योंकि वह राजु को मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी बुर दिखाना चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि बुरे के लिए इंसान कुछ भी कर सकता है,,, लेकिन कैसे दिखाएं उसे समझ नहीं आ रहा था,,,,

कुछ देर ऐसे ही गुजर गए दोनों घास उखाड़ उखाड़ कर घास का ढेर लगा चुके थे राजू के मन में वही दृश्य बार-बार घूम रहा था कमला चाची की चींटियां उसके होश उड़ा चुकी थी,,,,, वह अपने मन में यही सब सोच रहा था कि तभी कमला चाची अपनी साड़ी पकड़कर जोर-जोर से उछलने लगी,,,।

हाय ,,,, दैया काट ली रे,,,,हाय मैं मर गई बहुत जोर से काट रही है मुझे दर्द कर रहा है,,,(कमला चाची उछलते हुए अपने साडी को जोर-जोर से झटक रही थी,,, राजू के समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है कमला चाची जोर-जोर से उछल रहे थे मानो कि जैसे उनकी साड़ी में बिच्छू घुस गया हो,,,)

क्या हुआ चाची क्या हुआ क्या काट लिया,,,,,

अरे लगता है चींटी काट लई बहुत जोर से दर्द कर रहा है,,,,

चींटी लाल वाली चींटी तब तो चाची सूजन आ जाएगी,,,, जल्दी से उसे दूर करो नहीं तो और ज्यादा काट लेगी,,,,

(राजू को लग रहा था कि सही में कमला चाची को चींटी काट रही है वह यह नहीं जानता था कि कमला चार्ज की बस एक बहाना कर रही थी उसे अपनी बुर दिखाने के लिए,,,,)

आहहहहह,,,ऊईईईई , मां,,,,,,,,,,आहहहहहहह,,,,,दैया रे,,,,

(ऐसा कहते हुए कमला चाची जानबूझकर साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर वाली जगह को हथेली में भरकर दबाने लगी,,,,)

आहहहहहह ,,,, बहुत दर्द कर रहा है,,,,, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है राजू,,,,,

(कमला चाची का दर्द राजु से देखा नहीं जा रहा था जो कि बनावटी दर्द था,,,, वह इस बात से अनजान था कि कमला चाची सिर्फ और सिर्फ नाटक कर रही है,,,,,लेकिन उसका ध्यान बार-बार कमला चाची के उतरने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूची हो तो जा रहा था क्योंकि बड़े गेंद की तरह ब्लाउज में उछल रहा था,,, कमला चाची की उछलती हुई चुचियों को देख कर राजू का लंड अकड रहा था,,,,, उस नजारे पर वह पूरी तरह से मर मिटा था,,,,, तेज चलती सांसों के साथ,,,,, अपना चाची का उछलना देख रहा था,,,, कमला चाची इंतजार में कि कि राजू कुछ करें या कुछ बोले तभी राजू बोला,,,)

चाची को झाड़ी के पीछे जाकर चींटी निकाल दो नहीं तो ज्यादा दिक्कत हो जाएगी,,,,,

(राजू की इस बात पर कमला चाची को मन ही मन बहुत गुस्सा आया वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर राजू की जगह दूसरा कोई लड़का होता तो इस मौके का जरूर फायदा उठाता हूं और खुद ही उसकी साड़ी उठाकर चींटी निकालने के बहाने उसकी बरर को प्यासी नजरों से देख कर उससे छेड़खानी करता,,, लेकिन राजू बेवकूफ का बेवकूफ ही है,,, लेकिन कमला चाची इतनी जल्दी हार मानने वाली नहीं थी इसीलिए वह उसी तरह से उछलते हुए बोली,,,,)

नहीं राजू मुझसे नहीं हो पाएगा तु ही कुछ कर,,,, मुझे तो लग रहा है कि चींटी अंदर घुसश रही है,,,,

अंदर ,,,,,,अंदर कहां चाची,,,?(राजू आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

अरे तू ही क्यों नहीं देख लेता,,,,(कमला जान बुझकर दर्द दायक चेहरा बनाते हुए बोली,,,)

ममममम,,,, में,,,, मैं कैसे चाची,,,,(राजू एकदम हैरान होते हुए बोला,,,)

हां तु,,, देख कर निकाल दे वरना यह चींटी ना जाने कहां कहां काटेंगी,,,,

(कमला चाची की बातें सुनकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि कमला चाची जी जिस बारे में बात कर रही थी इस तरह की उम्मीद राजू को कभी भी नहीं थी इसलिए वह हैरान था,,,,, पर आश्चर्य से कमला चाची के चेहरे की तरफ और उसकी उछलती हुई चुचियों की तरफ देखे जा रहा था,,,।)

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कमला चाची की हालत को देखकर राजू को लग रहा था कि कमला चाची को बहुत दर्द कर रहा है और वैसे भी चींटी के काटने के दर्द से वह अनजान नहीं था वह चित्र से जानता था कि जिस जगह पर चींटी काटती है तो थोड़ा उस जगह जलन भी करती है और सूज भी जाती है,,,। इसलिए राजू को भी चिंता हो रही थी,,,, राजू के मन में दो भाव पैदा हो रहे थे एक तो उसे कमला चाची की चिंता भी हो रही थी और उसके इस तरह से उछल कूद में जाने की वजह से जिस तरह से उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में गदर मचा रही थी उसे देखकर उसे उत्तेजना भी महसूस हो रही थी और तो कमला चाची जब खुद बात बोल दी कि तु ही चींटी निकाल दे तो इस बात से राजू एकदम उत्तेजना से भर गया,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, वह बस एक टक कमला चाची को देखे जा रहा था,,,,। उसे इस तरह से आश्चर्य से देखते हुए कमला चाची बोली,,,।

ऐसे क्या देख रहा है तू ही निकाल दे,,,,

ममममम,,, में,,, कैसे चाची,,,,

अरे क्यों नहीं,,,? , तु निकाल सकता है,,,, देख राजु मेरी जल्दी मदद कर बड़े जोरों से काट रही है,,,,,आहहहहह ,,,ऊईईईईई,, मां,,,,,(दर्द से आह भरते हुए कमला चाची साड़ी के ऊपर से ही जोर से अपनी बुर को हथेली में दबोच ली,,,, कमला चाची की इस हरकत पर राजू पूरी तरह से मोहित हो गया,,,,,,, अपने अंदर वह अजीब सी हलचल तो महसूस कर रहा था उसके पजामे में पूरी तरह से तंबू तन चुका था,,, जिस पर राजू का तो नहीं लेकिन कमला चाची का ध्यान बराबर बना हुआ था कमला चाची के तन बदन में राजू के तंबू को देखकर सुरूर सा चढने लगा था,,,।राजू को इसी तरह से खाना देखकर कमला चाची अपने मन में सोची कि उसे ही कुछ करना होगा इसलिए वह,,, बोली,,)

राजु,,,, जल्दी कुछ कर,,,,,( और इतना कहने के साथ ही कमला चाची,,,एक झटके से अपनी साड़ी पकड़कर कमर तक उठा दी,,,,, पल भर के लिए भी अपनी इस हरकत को लेकर कमला चाची शर्मा महसूस नहीं की वो एकदम से बेशर्म बन चुकी थी वह जानती थी कि वह क्या कर रही है वह पूरी तरह से होशो हवास में थी,,,,साड़ी के अंदर उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी उसे किसी चींटी ने नहीं काटी थी बस वह तो 1 बहाने से मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी दिखाना चाहती थी इसे देखते हैं मर्दो पर मदहोशी छाने लगती है और वही मदहोशी वह राजू के तन बदन में उसके चेहरे पर देखना चाहती थी,,,,कमला चाची एक झटके से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी कमर को थोड़ा सा आगे की तरफ कर दी एक बेहद अद्भुत दुर्लभ और अतुल्य दृश्य राजू की आंखों के सामने था उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसकी आंखों के सामने कोई औरत इस तरह से हरकत करेगी और कमला चाची पर तो उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी,,,,,,,
 
खेले जाने वाले खेल में अनाड़ी है उसे धीरे-धीरे सिखाना भी पड़ेगा,,,, लेकिन एक शिक्षिका के भांती संभोग के बाराखडी में कमजोर अपने विद्यार्थी को संभोग का संपूर्ण अध्ययन कराने के लिए वह बेहद उत्सुक थी,,,,,,, और गुरु दक्षिणा के रूप में वह राजू से संपूर्ण संतुष्टि चाहती थी,,,।

देखते ही देखते दोनों घने खेतों के बीच पहुंच चुके थे,,,,,, खेतों के बीच पहुंचते ही कमला चाची बेहद उत्सुकता दिखाते हुए राजू की तरफ घूम गई और उससे बोली,,,,।

राजू हमें यह हरी हरी घास जो दिख रही है ना इन्हें उखाड़ कर एक तरफ रखना है ताकि यह जगह एकदम साफ हो जाए और हम इस पर अनाज लगा सके,,,,,,

(लेकिन शायद कमला चाची की बात कर राजू का ध्यान नहीं गया वह एकदम सन्न होकर एकटक कमला चाची की विशाल छातियों की तरफ देख रहा था,,,और देखता भी क्यों नहीं आखिरकार उसकी आंखों के सामने कमला चाची की छातियों का नजारा है कुछ अद्भुत और आकर्षक था कमला चाची राजू के आगे आगे चलते हुए मन में युक्ति सोचते हुए वह जानबूझकर अपने ब्लाउज के ऊपर के 2 बटन को खोल दी थी ताकि उनमें से उसकी चुचियों का अधिकांश भाग राजु को दिखाई दे और ऐसा ही हो रहा था,,, कमला चाची की मदमस्त कर देने वाली चुचीयां आधे से ज्यादा बाहर को झलक रही थी ऐसा लग रहा था कि कमला चाची के ब्लाउज बड़े-बड़े दशहरी आम रखे हुए हैं और वह पक कर बाहर आने के लिए मचल रहे हैं,,,, राजू की तो सांसे उपर नीचे हो रही थी क्योंकि करना चाहती थी चूचियों के निप्पल तो नहीं लेकिन निप्पल के इर्द-गिर्द भूरे रंग का घेराव साफ नजर आ रहा था,,,, राजू की सांसे ऊपर नीचे हो रही थी,,,, उसके दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी कमला चाची मन में युक्ति सोचकर जिस तरह का प्रहार राजू के ऊपर की थी उससे वह खड़े खड़े ढेर हो चुका था क्योंकि खेतों में काम करने के बारे में जिस तरह का निर्देश कमला चाची बता रही थी उस पर राजू का बिल्कुल भी ध्यान नहीं था और राजू अपनी फटी आंखों से कमला चाची की छातियों को बोल रहा था यह देखकर कमला चाची के तन बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी,,,। कमला चाची को अपनी युक्ति कामयाब होती नजर आ रही थी,,,। राजू के मुंह से एक भी शब्द नहीं फुट रहे थे,,,, कमला चाची ही उसका ध्यान भंग करते हुए बोली,,,)

कहां खो गया मैं तुझसे कुछ कह रही हूं,,,,,

(कमला चाची की आवाज कान में पडते ही जैसे वह होश में आया हो इस तरह से हड़बड़ा गया,,,)

ककककक,, क्या करना है चाची,,,,

अरे मैं कह रही हूं कि खेतों में से घास उखाड़ कर एक बगल में रखना है,,,,

ठीक है चाची,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह नीचे झुककर हरी हरी घास दोनों हाथों से उखाड़ना शुरू कर दिया,,, कमला चाची वहीं पास में खड़ी मुस्कुरा रही थी वह जानती थी कि उसकी युक्ती पूरी तरह से काम कर रही थी,,,,,,, उसके मन में अभी भी कुछ और युक्ति चल रही थी वह ठीक उसके सामने खड़ी हो गई और नीचे झुककर घास उखाड़ने को हुई ही थी कि,,,आधे से ज्यादा बाहर झांक रही उसकी दोनों चूचियां गप्प से ब्लाउज से बाहर निकलकर दशहरी आम की तरह झूलने लगी,,,,,,,कमला चाची अच्छी तरह से जानती थी कि उसके इस तरह से छुप जाने की वजह से उसकी भारी-भरकम खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में ठहर नहीं पाएंगी और लचक कर लटक जाएंगी,,, जैसे ही उसकी दोनों चूचियां पके हुए आम की तरह ब्लाउज में से बाहर झूल गई वैसे ही उसके मुंह से आह निकल गई,,,,)

आहहहहहह,,, यह क्या हो गया,,,,(कमला चाची यह सब तो जानबूझकर पहुंची थी ताकि वह राजू का ध्यान अपनी और कर सके क्योंकि वह जानती थी कि वह नजर मिला पानी में शर्म महसूस कर रहा थाकमला चाची के नाम से इतना निकलते ही राजू आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा तो उसकी रही है सही ताकत भी एकदम क्षीण हो गई,,,, उसकी आंखों के सामने कमला चाची की दोनों खरबूजा जैसी चूचियां उसकी छाती पर लटक रही थी मानो के जैसे कोई पपिया का फल पपिया के पेड़ पर झूल रहा हो,,, उत्तेजना के मारे राजू का गला सूखने लगा वह नीचे झुका हुआ ही कमला चाची की मदमस्त कर देने वाली चुचीयों को देख रहा था,,, जिंदगी में पहली बार राजू किसी नंगी चूची को देख रहा था,,,, इसके लिए उसकी सांसे ऊपर नीचे हो चली कमला चाची जानती थी कि राजू की उत्तेजना को बढ़ाने के लिए इतना काफी था इसलिए,,, वह अपनी दोनों चुचियों को मादक अंदाज में अपने दोनों हाथेली में पकड़कर उठाते हुए खुद भी खड़ी होते हुए बोली,,,)

कमला चाची की बड़ी बड़ी चूची हो तो देख कर राजू का मन कर रहा था कि वह खुद कमला चाची के ब्लाउज के बटन को खोले

अरे दैया यह तो बाहर निकल गई,,,, बड़ी बेशर्म है किसी का भी लिहाज नहीं करती,,,(कमला चाची मुस्कुराते हुए बोली औरअपनी दोनों चुचियों को बारी-बारी से अपने हाथ से पकड़ कर ब्लाउज में ठुसने लगी,,,, राजू के लिए उसके कोमल उम्र की तुलना में यह दृश्य असहनीय था,,,।कमला चाची अपनी कामुक हरकत की वजह से ही राज्यों के तन बदन पर अपनी कामुकता का वार पर वार कर रही थी,, और राजू के लिए कमला चाची का हर एक वार घातक सिद्ध हो रहा था राजू की उमंग मारती जवानी और ज्यादा मचल उठ रही थी,,,,,, कमला चाची जानबूझकर अपनी चाची को जोर जोर से दबाते हुए और राजू को दिखाते हुए अपने ब्लाउज मे भर रही थी वह जानती थी कि ऐसा करके वह राजू के तन बदन में आग लगा रही है और यही तो वह चाहती ही थी कमला चाची की हरकत को देखकर राजू जोकि इस खेल में बिल्कुल भी अनजान था वह अपने मन में सोचने लगा कि कास कमला चाची की चूचियां उसके हाथ में होती तो कितना मजा आ जाता ,,,,

कमला चाची की कामुक हरकत को देखकर राजू का मन कमला चाची की चूचियों को दबाने का कर रहा था,,

राजू की आंखों के सामने ही कमला चाची अपनी चुचियों को बारी-बारी से अपने ब्लाउज में भरकर बटन बंद कर ली इस बार केवल एक ही बटन खुला रखी क्योंकि वो जानती थी कि अगर दोनों बटन खुला रखी थी तो फिर से दोनों बाहर निकल आएगी और जितना वह राजू को दिखा चुकी थी उतना काफी था राजू के पजामे में उसके समझ के परे ही तंबू बन चुका था जिस पर कमला चाची की नजर पड़ चुकी थी और उस तंबू को देखकर कमला चाची की बुर गीली होने लगी थी,,,। राजू अपने सूखे गले को थूक निगल कर गिला करने की कोशिश करते हुए बोला,,,)

यह कैसे हो गया चाची,,,,

अरे बटन खुला था ना इसलिए,,,,(इतना कहते हुए कमला चाची अपनी साड़ी को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर कमर में खुश ले जिससे उसकी साड़ी उसकी पिंडलियों तक उठ गई और उसकी चिकनी मोटी मांसल पिंडलिया साफ दीखने लगी,,,)

बटन बंद कर लेना चाहिए था ना चाची,,,,

कोई बात नहीं कहां किसी गैर ने देख लिया है तू ही तो देखा है,,,,(इतना कहकर कमला चाची मुस्कुराने लगी और कमला चाची की बात सुनकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ गई वह वापस नीचे झुक कर घास तोड़ने लगा,,,, और कमला चाची भी घास उखाड़ने लगी,,,, राजू अपने मन में सोच रहा था कि कमला चाची के घर देखने को छोड़ आया था लेकिन कमला चाची तो उससे भी ज्यादा दिखा दीराजू अपने मन में सोचने लगा कि कमला चाची की चूचीया कितनी बड़ी बड़ी है,,, दबाने में बहुत बहुत मजा आएगा,,, इस तरह की बातों को राजू पहली बार अपने मन में ला रहा था जिस पर उसका भी बस नहीं था,,,,,अपनी लटकती हुई चूचियों को दबा दबा कर अपने ब्लाउज में भरने की वजह से और राजू को दिखाकर उकसाने की वजह से कमला चाची की भी हालत खराब हो रही थी,,,,। कमला चाची के मन में उत्सुकता बढ़ती जा रही थी क्योंकि वह राजु को मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी बुर दिखाना चाहती थी क्योंकि वह जानती थी कि बुरे के लिए इंसान कुछ भी कर सकता है,,, लेकिन कैसे दिखाएं उसे समझ नहीं आ रहा था,,,,

कुछ देर ऐसे ही गुजर गए दोनों घास उखाड़ उखाड़ कर घास का ढेर लगा चुके थे राजू के मन में वही दृश्य बार-बार घूम रहा था कमला चाची की चींटियां उसके होश उड़ा चुकी थी,,,,, वह अपने मन में यही सब सोच रहा था कि तभी कमला चाची अपनी साड़ी पकड़कर जोर-जोर से उछलने लगी,,,।

हाय ,,,, दैया काट ली रे,,,,हाय मैं मर गई बहुत जोर से काट रही है मुझे दर्द कर रहा है,,,(कमला चाची उछलते हुए अपने साडी को जोर-जोर से झटक रही थी,,, राजू के समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है कमला चाची जोर-जोर से उछल रहे थे मानो कि जैसे उनकी साड़ी में बिच्छू घुस गया हो,,,)

क्या हुआ चाची क्या हुआ क्या काट लिया,,,,,

अरे लगता है चींटी काट लई बहुत जोर से दर्द कर रहा है,,,,

चींटी लाल वाली चींटी तब तो चाची सूजन आ जाएगी,,,, जल्दी से उसे दूर करो नहीं तो और ज्यादा काट लेगी,,,,

(राजू को लग रहा था कि सही में कमला चाची को चींटी काट रही है वह यह नहीं जानता था कि कमला चार्ज की बस एक बहाना कर रही थी उसे अपनी बुर दिखाने के लिए,,,,)

आहहहहह,,,ऊईईईई , मां,,,,,,,,,,आहहहहहहह,,,,,दैया रे,,,,

(ऐसा कहते हुए कमला चाची जानबूझकर साड़ी के ऊपर से ही अपनी बुर वाली जगह को हथेली में भरकर दबाने लगी,,,,)

आहहहहहह ,,,, बहुत दर्द कर रहा है,,,,, मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है राजू,,,,,

(कमला चाची का दर्द राजु से देखा नहीं जा रहा था जो कि बनावटी दर्द था,,,, वह इस बात से अनजान था कि कमला चाची सिर्फ और सिर्फ नाटक कर रही है,,,,,लेकिन उसका ध्यान बार-बार कमला चाची के उतरने की वजह से उसकी बड़ी बड़ी चूची हो तो जा रहा था क्योंकि बड़े गेंद की तरह ब्लाउज में उछल रहा था,,, कमला चाची की उछलती हुई चुचियों को देख कर राजू का लंड अकड रहा था,,,,, उस नजारे पर वह पूरी तरह से मर मिटा था,,,,, तेज चलती सांसों के साथ,,,,, अपना चाची का उछलना देख रहा था,,,, कमला चाची इंतजार में कि कि राजू कुछ करें या कुछ बोले तभी राजू बोला,,,)

चाची को झाड़ी के पीछे जाकर चींटी निकाल दो नहीं तो ज्यादा दिक्कत हो जाएगी,,,,,

(राजू की इस बात पर कमला चाची को मन ही मन बहुत गुस्सा आया वह अपने मन में यही सोच रही थी कि अगर राजू की जगह दूसरा कोई लड़का होता तो इस मौके का जरूर फायदा उठाता हूं और खुद ही उसकी साड़ी उठाकर चींटी निकालने के बहाने उसकी बरर को प्यासी नजरों से देख कर उससे छेड़खानी करता,,, लेकिन राजू बेवकूफ का बेवकूफ ही है,,, लेकिन कमला चाची इतनी जल्दी हार मानने वाली नहीं थी इसीलिए वह उसी तरह से उछलते हुए बोली,,,,)

नहीं राजू मुझसे नहीं हो पाएगा तु ही कुछ कर,,,, मुझे तो लग रहा है कि चींटी अंदर घुसश रही है,,,,

अंदर ,,,,,,अंदर कहां चाची,,,?(राजू आश्चर्य जताते हुए बोला,,,)

अरे तू ही क्यों नहीं देख लेता,,,,(कमला जान बुझकर दर्द दायक चेहरा बनाते हुए बोली,,,)

ममममम,,,, में,,,, मैं कैसे चाची,,,,(राजू एकदम हैरान होते हुए बोला,,,)

हां तु,,, देख कर निकाल दे वरना यह चींटी ना जाने कहां कहां काटेंगी,,,,

(कमला चाची की बातें सुनकर राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि कमला चाची जी जिस बारे में बात कर रही थी इस तरह की उम्मीद राजू को कभी भी नहीं थी इसलिए वह हैरान था,,,,, पर आश्चर्य से कमला चाची के चेहरे की तरफ और उसकी उछलती हुई चुचियों की तरफ देखे जा रहा था,,,।)

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कमला चाची की हालत को देखकर राजू को लग रहा था कि कमला चाची को बहुत दर्द कर रहा है और वैसे भी चींटी के काटने के दर्द से वह अनजान नहीं था वह चित्र से जानता था कि जिस जगह पर चींटी काटती है तो थोड़ा उस जगह जलन भी करती है और सूज भी जाती है,,,। इसलिए राजू को भी चिंता हो रही थी,,,, राजू के मन में दो भाव पैदा हो रहे थे एक तो उसे कमला चाची की चिंता भी हो रही थी और उसके इस तरह से उछल कूद में जाने की वजह से जिस तरह से उसकी खरबूजे जैसी चूचियां ब्लाउज में गदर मचा रही थी उसे देखकर उसे उत्तेजना भी महसूस हो रही थी और तो कमला चाची जब खुद बात बोल दी कि तु ही चींटी निकाल दे तो इस बात से राजू एकदम उत्तेजना से भर गया,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,, वह बस एक टक कमला चाची को देखे जा रहा था,,,,। उसे इस तरह से आश्चर्य से देखते हुए कमला चाची बोली,,,।

ऐसे क्या देख रहा है तू ही निकाल दे,,,,

ममममम,,, में,,, कैसे चाची,,,,

अरे क्यों नहीं,,,? , तु निकाल सकता है,,,, देख राजु मेरी जल्दी मदद कर बड़े जोरों से काट रही है,,,,,आहहहहह ,,,ऊईईईईई,, मां,,,,,(दर्द से आह भरते हुए कमला चाची साड़ी के ऊपर से ही जोर से अपनी बुर को हथेली में दबोच ली,,,, कमला चाची की इस हरकत पर राजू पूरी तरह से मोहित हो गया,,,,,,, अपने अंदर वह अजीब सी हलचल तो महसूस कर रहा था उसके पजामे में पूरी तरह से तंबू तन चुका था,,, जिस पर राजू का तो नहीं लेकिन कमला चाची का ध्यान बराबर बना हुआ था कमला चाची के तन बदन में राजू के तंबू को देखकर सुरूर सा चढने लगा था,,,।राजू को इसी तरह से खाना देखकर कमला चाची अपने मन में सोची कि उसे ही कुछ करना होगा इसलिए वह,,, बोली,,)

राजु,,,, जल्दी कुछ कर,,,,,( और इतना कहने के साथ ही कमला चाची,,,एक झटके से अपनी साड़ी पकड़कर कमर तक उठा दी,,,,, पल भर के लिए भी अपनी इस हरकत को लेकर कमला चाची शर्मा महसूस नहीं की वो एकदम से बेशर्म बन चुकी थी वह जानती थी कि वह क्या कर रही है वह पूरी तरह से होशो हवास में थी,,,,साड़ी के अंदर उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं थी उसे किसी चींटी ने नहीं काटी थी बस वह तो 1 बहाने से मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी दिखाना चाहती थी इसे देखते हैं मर्दो पर मदहोशी छाने लगती है और वही मदहोशी वह राजू के तन बदन में उसके चेहरे पर देखना चाहती थी,,,,कमला चाची एक झटके से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी कमर को थोड़ा सा आगे की तरफ कर दी एक बेहद अद्भुत दुर्लभ और अतुल्य दृश्य राजू की आंखों के सामने था उसकी आंखें फटी की फटी रह गई थी उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि उसकी आंखों के सामने कोई औरत इस तरह से हरकत करेगी और कमला चाची पर तो उसे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी,,,,,,,

दोपहर का समय था दुर दुर तक कोई नजर नहीं आ रहा था,,, चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था सिर्फ पंछियों के कलरव की आवाज ही सुनाई दे रही थी,,, ऐसे में खेतों के बीच अद्भुत और कामुकता से भरा हुआ दृश्य अपनी कामुकता फैला रहा था,,,,,, राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी सब कुछ उसकी आंखों के सामने था फिर भी उसे किसी सपने की तरह लग रहा था क्योंकि हकीकत की तो उसे उम्मीद भी नहीं थी,,,, कमला चाची की भी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थीक्योंकि वह जिसके सामने अपनी साड़ी उठाकर खड़ी थी और उसके बेटे से भी कम उम्र का था और कभी कमला चाची ने सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी कम उम्र के लड़के के सामने उसे इस तरह से साड़ी उठाकर अपनी वासना का प्रदर्शन करना होगा और वैसे भी बहुत पहले से ही वासनामई औरत थी,,,,,,। गहरी सांस लेते हुए कमला चाची बोली,,,।

देख राजु चीटियां नजर आ रही है कि नहीं,,,,! (कमला चाची को अच्छी तरह से मालूम था कि कोई चींटी वीटी नहीं थी फिर भी वह एक बहाने से राजू को अपने पास बुलाना चाहती थी ताकी अपनी रसीली बुर कि उसे दर्शन करा सकें,,,कमला चाची की बात सुनते ही वह अपना एक कदम आगे बढ़ाया उसका दिल जोरों से धड़क रहा था,,, वह वहीं रुक कर कमला चाची की दोनों टांगों के बीच की स्थिति का जायजा लेने लगा,,, राजु के तन बदन में आग लग रही थी,,,, वह वहीं खड़ा हो कर देख रहा था आगे बढ़ने की उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी तो कमला चाची फिर बोली,,,)

अरे दूर से क्या देख रहा है पास आकर देख,,,,

(कमला चाची की इस तरह की बातें राजू के लिए खुला आमंत्रण थी लेकिन राजू उसके आमंत्रण को उसके इशारे को समझ नहीं पा रहा था उसे ऐसा लग रहा था कि वाकई में कमला चाची से चीटियां देखने के लिए कह रही है,,,, कमला चाची की बात सुनकर और एक कदम और आगे बढ़ाया उसके और कमला चाची के बीच केवल अब 1 फीट की दूरी का ही फासला रह गया था,,,, अद्भुत नजारा राजू ने कभी सपने में भी नहीं देखा था राजू के लिए यह नजारा मादकता का विस्फोट कि तरह था,,, किसी जवान औरत का इस तरह से साड़ी उठाकर अपनी बुर दिखाना शायद इतना उत्तेजक नहीं होता उनकी एक उम्र दराज औरत का इस तरह से अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी बुर का प्रदर्शन करना बेहद कामोत्तेजक और उन मादक था राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर अपने चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी अगर उत्तेजना नापने का कोई साधन होता तो शायद इस समय उत्तेजना का कांटा पार कर गया होता,, जैसे ज्वर नापने का थर्मामीटर होता है अगर इसी तरह से कुत्ते से ना कभी थर्मामीटर होता तो शायद उत्तेजना के मारे थर्मामीटर भी भूल जाता है इस तरह की उत्तेजना का अनुभव राजू अपने तन बदन में कर रहा था कमला चाची की सांसे भी तेजी से चुल रही थीक्योंकि उम्र के इस दौर में अब तक उसने इस तरह की हरकत कभी नहीं की थी हालांकि मर्दों के प्रति उसका आकर्षण हमेशा से बनाई रहता था लेकिन राजू के उम्र के लड़के के साथ यह उसका पहला अनुभव था,,,,।

कमला चाची उसी तरह से साड़ी को कमर तक उठाएं अपनी बुर दिखा रही थी जिस पर झांटों का झुरमुट से बना हुआ था,,,, और घूंघराले बालों के झुरमुट में छुपी बुर को देखने की कोशिश राजू बड़े जोड़-तोड़ से कर रहा था लेकिन घने बालों की वजह से कमला चाची की बुर उसे नजर नहीं आ रही थी,,,, राजू बड़े गौर से कमला चाची की बुर वाली जगह पर देख रहा था कि तभी कमला चाची बोल पड़ी,,,,

आहहहहह राजु,,, देखना कब से काट रही है मुझे परेशान की हुई है और तू दूर से बस देखे जा रहे हैं पास आकर देख जल्दी से इसे अपने हाथों से निकाल,,,,(कमला चाची उत्तेजना में और राजू को मदहोश करने के उद्देश्य से ऐसा बोलते हुए अपनी हथेली को अपनी बुर पर रखकर उसे मसल दी,,,राजू के लिए कमला चाची की हरकत उत्तेजना की पराकाष्ठा थी वह और ज्यादा नजदीक आ गया उसका खुद का मन कर रहा था कि वह अपने हाथों से कमला चाची की बुर को स्पर्श करें उसे छू ले लेकिन उसे डर लग रहा था,,,,,,, वो डरते हुए कमला चाची से बोला,,,)

अब क्या करूं चाची,,,,

अरे करना क्या है मेरी बुर पर देख झांट के बाल में देख,,, चिंटीव फसी हो तो जल्दी से निकाल,,,,(कमला चाची गहरी सांस लेते हुए बोली,,, राजू अजीब सी उलझन में फंसा हुआ था जो कुछ भी कमला चाची कह रही थी वह सब उसे करने का बहुत मन कर रहा था लेकिन डर रहा था,,,, फिर भी डरते हुए बोला)

मैं करूं चाची,,,,

हां और कौन करेगा मैं ठीक से ढूंढ नहीं पाऊंगी,,,,

लेकिन कोई देख लेगा तो,,,( राजू घबराते में चारों तरफ नजर दौड़ाते हुए बोला,,,,राजू की बातें सुनकर कमला चाची मन में ही मुस्कुराने लगी वह इस बात से ही संतुष्ट थी कि चलो रांची को इतना तो पता है कि यह सब अकेले में सबसे छिपकर किया जाता है,,,)

तू डर मत यहां कोई नहीं आने वाला है और कोई देखने वाला भी नहीं है और वैसे भी तू कोई केयर थोड़ी है तो अच्छा लड़का है तुझे मैं अपना समझती हूं इसलिए मैं तुझे बोल रही हूं फिर जगह अगर कोई होता तो मैं उससे से थोड़ी बोलती,,,

(कमला चाची की बातें सुनकर राजु को थोड़ी तसल्ली हुई वह,,, थोड़ा सा छुप गया था कि कमला चाची की बुर को अच्छे से देख सके,,,, झुकने पर राजू को कमला चाची की बुर बड़े अच्छे से दिखाई दे रही थी अपना हाथ आगे बढ़ा कर कमला चाची के घुंघराले बालों पर रख दिया और उसके अंदर उंगली घुमाने लगा राजू की यह हरकत कमला चाची के तन बदन में उत्तेजना की लहर को बढ़ावा दे रही थी,,,, राजू तो सच में जाटों के झुरमुट के बीच में चीटियों को ढूंढ रहा था उसकी उंगली चारों तरफ घूम रही थी इस हरकत को अंजाम देने में राजू को भी अत्यधिक आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी रह रह कर उसकी उंगलियां कमला चाची की बुर पर स्पर्श हो जा रही थी जिससे कमला चाची की उत्तेजना पर जा रही थी और राजू की हालत खराब हो जा रही थी,,,, वह अपनी उंगली को झांटों में गोल गोल घुमा रहा था,,,, तो कमला चाची बोली,,,।

क्या हुआ मिला क्या,,,,?

नहीं चाची कुछ भी नजर नहीं आ रहा है,,, मुझे लगता है कि चींटी चली गई है,,,,(कमला चाची की तरफ देखते हुए राजू बोला)

आहहहहह,,,, ऐसे कैसे चली गई है देख मुझे अभी भी काट रही है अच्छे से देख बालों को फैला फैलाकर देख,,,,।

(राजू बड़े अच्छे से कमला चाची की बुर को देखना चाहता था जिंदगी में एक ही बार गुड़ के दर्शन किया था और वह भी अपनी बुआ गुलाबी की बुर के जो कि एक पतली दरार के रूप में थी और बेहद खूबसूरत नजार‌ आ रहीं थी उस पर हल्के हल्के ही बाल थे,,,, लेकिन कमला चाची की बुर पर तो बालों का जंगल उगा हुआ थागुलाबी की बुर देखने में राजू को बिल्कुल भी दिक्कत नहीं हो रही थी लेकिन कमला चाची की बुर देखने में राजू को दिक्कत महसूस हो रही थी लेकिन अब चाची की बात सुनते ही उसे उम्मीद की किरण नजर आने लगी और वह अपने हाथों की उंगलियों से कमला चाची की बुर के बाल को इधर-उधर फैलाते हुए उसकी बुर देखने की कोशिश करने लगा और ऐसा करने पर उसे कमला चाची की बुर उसकी गुलाबी पत्ती उसकी पतली दरार बड़े अच्छे से नजर आने लगी,,,,,कमला चाची की फोटो देखने में उसे इस बात का एहसास हुआ था कि उसकी बाकि पुर मात्र एक पतली दरार के रूप में नजर आ रही थी और कमला चाची की बुक हल्की सी खुली हुई थी शायद यह उम्र की वजह से थी,,।

राजू अपनी उंगली से बड़े अच्छे से बुरके ऊपर ईधर उधर घुमा कर चींटी को ढूंढ रहा था,,, लेकिन उसे चींटी कहीं भी नजर नहीं आ रही थी लेकिन ऐसा करने में उसे ऐसा सुख प्राप्त हो रहा था जिसके बारे में उसने कभी कल्पना भी नहीं किया था कमला चाची की बुर से अनजाने में खेलते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच लटकता खंजर में दर्द महसूस होने लगा था,,,, क्योंकि उसके लंड की अकड़ बढ़ते जा रही थी,,,,दूसरी तरफ एक जवान लड़के के ऊंगलीयो का स्पर्श अपनी बुर के ऊपर महसूस करके कमला चाची पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी इस उम्र में भी उसकी उत्तेजना बरकरार थी,,, राजू की हरकतों में उसे पूरी तरह से चुदवासी बना दिया था जिसके चलते उसकी गुलाबी बुर के गुलाबी छेद में से मदन रस का रिसाव होना शुरू हो गया था,,,, जोकि धीरे-धीरे राजू की अंगुलियों पर रीश रहा था,,,। राजू का ध्यान पूरी तरह से कमला चाची की बुर पर टिका हुआ था,,, वह अपनी नजरों को इधर उधर भी नहीं घुमा रहा था,,,। कमला चाची की बुर का जायजा लेने में वह पूरी तरह से मशरुफ हो चुका था,,। देखते-देखते अनजाने में ही राजू ने अपनी उंगली के पोर से कमला चाची की बुर के गुलाबी पत्तियों को छेड़ दिया,,,, तो वैसे ही तुरंत कमला चाची के मुंह से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,।

सहहहहह आहहहहहहह,,,,,,,,ऊमममममममम,,,,

क्या हुआ चाची,,,(उसकी गरम सिसकारी की आवाज को सुनकर राजेश की तरफ देखते हुए बोला,,,)

ककककक,,, कुछ नहीं राजू फिर से काट रही है,,,,(कमला चाची गर्म आहे भरते हुए बोली,,,)

लेकिन चाची यहां तो मुझे कुछ भी नजर नहीं आ रहा है,,,,(राजू अपने दोनों हाथों की उंगलियों से झांट के बालों को फैलाते हुए बोला,,,)

ध्यान से देख राजु मुझे बड़ी तकलीफ हो रही है,,,,आहहहहह नहीईईईई,,,,,।

क्या चाची सच में बहुत तकलीफ हो रही है,,,

अरे बहुत तकलीफ हो रही है मुझे तो डर है कहीं सूज ना जाए,,,,। देख बड़े अच्छे से मेरी बुर को देख,,,,आहहहहह राजु,,,

(कमला चाची के मुंह से बुर शब्द सुन कर राजु पूरी तरह से रोमांचित हो उठा,,,)

रुको चाची में फिर से देखता हूं,,,,,,

(कमला चाची उसी तरह से अपनी साड़ी उठाए हुए राजू को अपनी बुर बड़े अच्छे से दिखा रही थी और राजू को मजा भी आ रहा था लेकिन इस बात से अनजान था कि कमला चाची उसे चींटी वाली बात झूठ कह रही है और वह चींटी ढूंढने में ही व्यस्त था,,, लेकिन चींटी ढुंढते हुए उसे अद्भुत आनंद की प्राप्ति भी हो रही थी,,,, राजू फिर से बड़े ध्यान से देखने लगा राजू को कमला चाची की बुर का गुलाबी छेद बड़े साफ तौर पर नजर आ रहा था वह उसे गुलाबी छेद को देखते हुए कमला चाची से बोला,,,)

चाची चींटी तो नहीं नजर आ रही है लेकिन तुम्हारे बुर का गुलाबी छेद नजर आ रहा है,,,,।

(राजू के मुंह से बुर शब्द और गुलाबी छेद सुनकर वह पूरी तरह से मस्त हो गई,,, पलवल में ही राजू के इन शब्दों ने उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ा दिया क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि राजू किस बारे में बात कर रहा है,,, इसलिए मदहोशी भरे शब्दों में वह बोली,,)

हां,,, राजू लगता है चींटी उसी चीज में चली गई है मुझे वही दर्द हो रहा है,,,,सहहहहह,,आहहहहहह,,,,,(कमला चाची पूरी तरह से मदहोश हो गई थी उसकी बातों को सुनकर राजु बोला,,,)

तो अब क्या करूं चाची,,,,(राजू उत्सुकता बस कमला चाची की तरफ देखते हुए बोला,,,, राजू की बात सुनकर कमला चाची बोली)

करना क्या है राजू उसे निकालना तो पड़ेगा ही अपनी उंगली डालकर उसे निकाल बाहर वरना यह मेरी बुर सुजा देगा,,,,,,

(कमला चाची पर हस्ताक्षर में बनी कमला चाची की इस तरह की गंदी बातों को सुनकर राजू के तन बदन में जो आग लग रही थी उसे बयां करना शायद शब्दों में मुश्किल हो रहा था कमला चाची की गंदी बातें उत्तेजना की आग में घी डालने का काम कर रहा था,,,, कमला चाची की बातें सुनकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढने लगी और उसका गला सूखने लगा,,, इसलिए वह अपने थुक से अपने गले को गिला करने की कोशिश करने लगा,,,, कमला चाची ने उसे अद्भुत काम सौंप दीया था,,,। जिसे करने में राजू को बहुत खुशी भी हो रही थी और वह उत्सुक भी था,,, कमला चाची चाहती तो राजू से सीधे-सीधे उसका लंड अपनी बुर में डालने के लिए कह देती और राजू इंकार भी नहीं करता लेकिन उसे न जाने क्यों धीरे-धीरे इस खेल में मजा आ रहा था राजू के नादानियत उसे और ज्यादा मदहोश कर रही थी,,,
 
राजू के दिल की धड़कन बढने लगी थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,, वह अपनी बीच वाली उंगली को बुरके छेद में डालना शुरू कर दिया,,,,कमला चाची अपने मन में यही सोच रही थी कि राजू के लिए यह संभोग का पहला शबक था जिसमें वह धीरे-धीरे कामयाब हो रहा था,,, कमला चाची की बुर उत्तेजना के मारे पूरी तरह से गीली हो चुकी थी इसीलिए राजू की उंगली बड़े आराम से अंदर की तरफ सरक रही थी,,,,जैसे-जैसे राजू की उंगली बुर के अंदर जा रही थी वैसे वैसे कमला चाची की हालत खराब होती जा रही थी उसके चेहरे का हाव भाव उसका रंग बदलता जा रहा था और पल भर में ही उसके गोरे गोरे गाल लाल टमाटर कि तरह हो गए,,,,, राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी,,,, उसे मजा आ रहा था कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि दोबारा कभी उसे इतनी नजदीक से किसी औरत की बुर को देखने का मौका भी मिलेगा और उसने उंगली डालने का भी मौका मिलेगा लेकिन राजू के सोचने के विपरीत हो रहा था और इसमें राजू को मजा भी आ रहा था,,,,धीरे-धीरे करके राजु अपनी आधी से ज्यादा ऊंगली वकमला चाची की बुर के अंदर डाल दिया था,,, बुर के अंदर अपनी उंगली पर बेहद गर्मी महसुस हो रही थी,,, इसलिेए वह उत्सुकता बस बोला,,,,।

चाची तुम्हारे बुर के अंदर तो बहुत गर्मी है,,,

क्यों क्या हुआ रे,,,,(कमला चाची मदहोश होते हुए बोली,,)

मेरी उंगली तुम्हारी बुर के अंदर जाकर जल रही है,,,,

(राजू की बात सुनकर पूरी तरह से कामोत्तेजना मे मदहोश होते हुए भी हंसने लगी और वह बोली,,)

तो क्या तुझे क्या लगा औरत की बुर ऐसे ही नरम नरम होती है सिर्फ ऊपर से ही मुलायम होती है अंदर तो‌ शोला दहकता रहता है,,,,

सच में चाची बहुत गर्म है,,,,,(ऐसा कहते हुए राजू अपनी पूरी उंगली कमला चाची की बुर में डाल दिया,,, जैसे ही उसकी पूरी उंगली बुर के अंदर तक घुशी वैसे ही कमला चाची कि सिसकारी फूट पड़ी,,,,)

सहहहहह आहहहहहहह,,,,,

क्या हुआ ,,,, चाची,,,,

ककककक,,,कुछ नहीं अपनी उंगली को अंदर बाहर कर ताकि चींटी आराम से बाहर भी कर सकें,,,

(कमला चाची की बात सुनते ही राजू उसी तरह से अपनी ऊंगलीको अंदर बाहर करते हुए अनजाने में ही उसकी बुर में अपनी उंगली पेलने लगा,,, कमला चाची की उत्तेजना और सिसकारी बढ़ने लगी,,,, राजू का मजा आने लगा,,, राजू जो कि अभी तक औरत की बुर तो देख लिया मैंने तुम कहां के दर्शन नहीं कर पाया था जो कि उसकी आंखों के बेहद करीब थी लेकिन फिर भी उसका ध्यान कमला चाची की गांड पर ना होकर उसकी बुर पर ही टिका हुआ था,,, लेकिन उत्तेजना के मारे वहअपना एक हाथ कमला चाची के पीछे की तरफ ले जाकर उसकी नरम नरम बड़ी-बड़ी गांड को अपनी हथेली में दबाए हुए था,,,जिससे वह पूरी तरह से अनजान था लेकिन कमला चाची को इसका अहसास बड़ी अच्छी तरह से था और जिस तरह से वह अपनी हथेली में जोर-जोर से उसकी गांड को दबा रहा था उससे चाची का मजा दोगुना होता जा रहा था,,,।

सहहहहह आहहहहह ,,,आहहहहहहह,,,,, और जोर से राजू और जोर से अंदर बाहर कर,,,,आहहहहहहहह,,,,

(कमला चाची की बातें सुनकर राजू बड़ी तेजी से अपनी ऊंगली को बुर के अंदर बाहर कर रहा था जिसमें से चप-चप की आवाज आना शुरू हो गई थी,,,कमला और राजू दोनों चींटी के बारे में बिल्कुल भी भुल गए थे बस दोनों अपने अपने तरीके से मजा ले रहे थे,,,, कमला की गरम सिसकारियां खेतों में गूंजने लगी थी वह गर्म सिसकारी लेते हुए बोली,,,।)

सहहहहह ,आहहहहह,,, राजु तुझे मेरी बुर कैसी लगी,,,?

आहहहहहह बहुत अच्छी है चाची ,,,,, बहुत खूबसूरत है,,,,

मेरी बुर के अंदर तेरी उंगली तुझे बहुत गर्म महसूस हो रही है ना,,

बहुत ज्यादा गर्म लग रही है चाची,,,

मैं जानती हूं बुर के अंदर उंगली बुर की गर्मी नही सहन कर पाती,,,, बुर के अंदर केवल एक ही चीज इसकी गर्मी को सहन कर पाती है,,,।

कौन सी चीज है चाची,,(राजू लपालप अपनी उंगली को कमला की बुर में पेलते हुए बोला,,,)

लंड,,,,,,

(कमला चाची के मुंह से लंड शब्द सुनकर जैसे कि राजू को अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था इसलिए वह दोबारा पूछा,,)

क्या चाची,,,?

लंड रे,,,,,बुर की गर्मी को केवल लंड ही सहन कर सकता है और बुर की गर्मी को उतार भी सकता है,,,,

क्या कह रही हो चाची,,,,

(राजू आश्चर्य जताते हुए बोला चाची के मुंह से सुनी यह बातें राजु के लिए बिल्कुल नंई थी,,, कमला चाची इसी मौके की तलाश में थी वह राजू से एकदम से पूछ बैठी,,,)

तु अपनी उंगली की जगह लंड डालेगा इसमें,,,,

(कमला चाची के मुंह से इतनी गंदी बात सुनकर राजू उत्सुकता उत्तेजना और आश्चर्य से कमला चाची की तरफ देखने लगा उसे यकीन नहीं हो रहा था कि कमला चाची उससे यह सवाल पूछ रही है,,,, राजू का गला सूखता जा रहा था,,,, कमला चाची की बुर में अभी भी उसकी उंगली पूरी तरह से घुसी हुई थी,,, कमला चाची देखना चाहती थी कि राजू क्या कहता है व चित्र से जानती थी कि राजु उसकी बात को इंकार नहीं कर पाएंगा,,, राजू ही क्यों कोई भी लड़का उसके इस प्रस्ताव को ठुकरा नहीं पाएगा वह अच्छी तरह से जानती थी,,, राजू कि हां मैं जवाब देता इससे पहले ही उसके कानों में और कमला के कानों में जो आवाज पड़ी उससे वह दोनों एकदम से चौक गए,,,।

माजी खाना लेकर आई हूं,,,,

(इतना सुनते ही कमला चाची के होश उड़ गए वह तुरंत राजू से बोली,,)

निकाल निकाल अपनी उंगली निकाल जल्दी कर,,,,(राजू की आवाज सुनकर हैरान हो गया था और तुरंत अपनी उंगली को कमला चाची की बुर से बाहर निकाल लिया था,,, कमला चाची तुरंत अपनी साड़ी को कमर से नीचे छोड़ दी और व्यवस्थित करने लगी और अपनी बहू रमा के आने से पहले ही बाहर राजू को जो काम कर रहा था वह काम करने के लिए बोल दिया और इस बारे में उसी से बिल्कुल भी बात ना करें,, यह बात, राजू भी अच्छी तरह से जानता था कि इस तरह की बातें किसी को बताना नहीं चाहिए था इसलिए व कमला चाची की बात मानते हुए घास उखाड़ना शुरू कर दिया,,, कमला चाची अपने काम में लग गई,,, और उसकी बहू रमा खाना लेकर पहुंच गई,,,।

......................
 
कमला चाची का दिल जोरों से धड़क रहा था उन्हें इस बात का डर था कि कहीं उसकी बहू ने सब कुछ देख तो नहीं लिया लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था करना चाहती की बहू रमा उसे ढूंढते हुए खेतों के बीच पहुंच तो गई थी लेकिन वह अपनी आंखों से ऐसा कुछ भी नहीं देखी थी जिससे उसके मन में शंका हो,,,,, अपनी बहू रमा की आवाज सुनते ही कमला चाची अपनी शाडी को तुरंत नीचे गिरा कर खुद भी काम करने लग गई थी और राजू को भी काम करने के लिए बोल दी थी राजू भाई मौके की नजाकत को समझते हुए तुरंत उसी तरह से काम करने लगा था जैसा कि एक इंसान खेतों में काम करता है हालांकि जिस तरह का दृश्य अपनी आंखों से देखा था उसके चलते उसके लंड की हालत बिल्कुल खराब हो रही थी,,, राजू को अपने लंड में दर्द महसूस हो रहा था। राजू अक्सर खेतों में काम करने के लिए जाया करता था लेकिन जिंदगी में पहली बार खेतों में काम करते हुए राजू ने अपनी आंखों से इतने सुहावने दृश्य को अपनी आंखों से देखा था,,,। राजू के साथ-साथ कमला चाची की भी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी उसे अपनी बहू रामा पर गुस्सा आ रहा था कि ऐन मौके पर वह आ गई वरना आज वह राजू के साथ अपने मन की कर लेती कमला चाची उसी तरह से नीचे झुककर घास उखाडते हुए बोली,,,।

तू क्यों इधर आ गई बहु,,,,?

आपके लिए खाना लेकर आई थी माजी,,,

अरे मैं वापस घर आ कर खा लेती यहां लेकर आने की क्या जरूरत थी,,,

मुझे लगा कि आप नाराज हो कर चली गई हो इसलिए मैं लेकर आ गई,,,

नहीं रे ऐसी कोई बात नहीं है बस थोड़ा सा काम था इसलिए आ गई,,,,( कमला चाची उसी तरह से अपना काम करते हुए बोली दूसरी तरफ रमा भले ही अपने सांसों से बात कर रहे थे लेकिन उसकी नजर राजू की तरफ थी,,, राजू का भोलापन उसे एकदम भा गया था,,, एक तरह से वह उसे मन ही मन में पसंद करने लगी थी,,,)

अच्छा छोड़िए माजी यह सब पहले खाना खा लीजिए,,,

नहीं अभी नहीं खाऊंगी तू रख कर जा यहां से खेतों का काम पूरा होते ही मैं खाना खा लूंगी,,,( कमला चाची किसी भी तरह से अपनी बाबू को वहां से भगाना चाहती थी क्योंकि रंग में भंग वह पहले ही डाल चुकी थी अगर आज का मौका उसके हाथ से निकल गया तो ना जाने कब ऐसा मौका हाथ लगेगा इसलिए वह अपनी बहू को वहां से चले जाने के लिए बोल रही थी ताकि उसके जाते ही वह अपनी रासलीला को एक बार फिर से शुरू कर सकें,,,)

नही माजी पहले आप खाना खा लीजिए तो मैं चली जाती हूं वरना मुझे ऐसा ही लगा कि आप नाराज हैं,,,( रमा बात तो अपनी सास से कर रही थी लेकिन वह देख राजु को रही थी क्योंकि उसे इस तरह से देखना भी उसे अच्छा लग रहा था,,)

नहीं नहीं तू जा यहां से,,, धूप तेज होने वाली है और तू घर खुला छोड़ कर आई है,,,,,,, घर इस तरह से छोड़कर नहीं आना चाहिए था जा जल्दी चोरों उचक्कों का भरोसा नहीं होता वह.लोग ऐसे ही मौके की तलाश में लगे रहते हैं,,,,। जा अब यहां रुक मत,,,

ठीक है माजी मैं जा रही हूं लेकिन खाना खा लेना और राजू तुम भी खाना खा लेना,,,,

ठीक है भाभी मैं भी खा लूंगा,,,,

( राजू भी काम रोक कर उसकी तरफ देख कर मुस्कुराते हुए बोला जवाब में वह भी राजू को देख कर मुस्कुरा दी और वहां से चलती बनी,,, कमला चाची वहीं खड़ी होकर उसे जाते हुए देखती रही और जब तक वह आंखों से ओझल नहीं हो गई तब तक वह उसे ही देखती रही जैसे ही वह आंखों से ओझल हुई तो उसकी जान में जान आई,,,)

बाप रे आज तो बाल बाल बचे अगर उसकी नजर पड़ जाती तो न जाने क्या हो जाता,,,

सही कह रही हो चाची,,,,( राजू की कमला चाची के सुर में सुर मिलाते हुए बोला वैसे रमा के आ जाने से उसे भी अच्छा नहीं लगा था क्योंकि बेहद खूबसूरत नजारा जो उसके सामने चल रहा था वह कमला चाची की तरफ देखते हुए बोला)

अब तो ठीक है ना चाची,,,,?

तुझे क्या लगता है ठीक हो गया है अभी भी वैसे ही तकलीफ है मेरी बुर में जलन हो रही है,,, ऐसा लगता है कि जैसे एकदम अंदर घुस गई है और वहां काट रही है,,,,( कमला चाची जानबूझकर साड़ी के ऊपर से अपनी बुर को खुजाते हुए बोली,,, कमला चाची की हरकत को देखकर राजू के पजामे में फिर से हरकत होने लगी,,,,)

तो क्या करोगी चाची मुझे तो नहीं लगता कि मेरी उंगली से काम बन पाएगा,,,

हां तु सच कह रहा है मेरी बुर के अंदर तेरी उंगली छोटी पड़ रही है,,,( कमला चाची मादकता भरी गहरी सांस लेते हुए बोली,,, और राजू कमला चाची के मुंह से बार-बार बुर शब्द सुनकर मदहोश हुआ जा रहा था,,, राजू फिर से कमला चाची की बुर में अपनी उंगली पेलना चाहता था क्योंकि उसे ऐसा करने में बहुत मजा आ रहा था,,, लेकिन अपने मन से खुले शब्दों में कहने में उसे शर्म आ रही थी कमला चाची की बात सुनकर राजू बोला,,,)

तो फिर अब क्या करोगी चाची,,,,,( राजू कुतूहल भरी नजरों से कमला चाची की तरफ देखते हूए बोला,,, कमला चाची का भी दिल जोरों से धड़क रहा था एक बार फिर से उनके तन बदन में उमंग जागने लगी क्योंकि राजु के लंड से ना सही उसकी ऊंगली से उसकी बुर पानी पानी हो गई थी,,।)

आहहहहह,,, मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करु,,, मेरी बुर में बहुत ज्यादा जलन हो रही है,,,( कमला चाची उसी तरह से अपनी बुर को साड़ी के ऊपर से मसलते हुज बोली,,,)

एक काम करो चाची पेशाब कर लो हो सकता है पेशाब की धार के साथ चींटी भी बाहर निकल जाए,,,( राजू कुछ देर तक सोचते हुए बोला,,,, राजु की बात सुनते ही कमला चाची का दिल जोरो से धड़कने लगा क्योंकि जो वह बात कह रहा था उसके बारे में कमला चाची भी नहीं सोची थी और ऐसा करने में शायद उसका काम बन सकता था एक अनजान जवान लड़के के सामने पेशाब करने में उसके तन बदन में कैसी हलचल होती है यह भी कमला चाची देखना चाहती थी उसे पूरा यकीन था कि उसे पेशाब करता हुआ देख कर राजू के तन बदन में आग लग जाएगी और वह चुदवासा हो जाएगा,,,)

क्या इससे काम बन जाएगा,,,

क्यों नहीं चाची जरूर बन जाएगा,,,,( पेशाब करने वाली बात कहकर राजू के तन बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी जिससे एक बार फिर से उसके पजामे में तंबू बनना शुरू हो गया था और तंबु को देखकर कमला चाची की हालत खराब हो रही थी,,, दोनों तो तन बदन में उत्तेजना अपना असर दिखा रहा था कमला चाची राजू की बात सुनकर उत्सुक हो गई थी पेशाब करने के लिए इसलिए वह तुरंत,, खेत के किनारे आगे बढ़ते हुए बोली,,,)

तु कहता है तो यह भी कर के देख लेती हूं,,,( इतना कहते हुए कमला चाची खेत के किनारे पहुंच गई और राजू का दिल जोरो से धड़कने लगा कमला चाची राजू की तरफ देखते हुए धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर की तरफ उठाने लगी कमला चाची अपनी चूची के साथ-साथ राजू को अपनी बुर के दर्शन करवा चुकी थी केवल अपनी नंगी गांड अभी तक पूरी तरह से नंगी नहीं दिखाई थी इसलिए वह इस बार राजू की तरफ अपनी पीठ करके खड़ी हो गई थी,,, धीरे-धीरे अपनी साड़ी को ऊपर उठा रही थी राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था और देखते ही देखते कमला चाची अपनी साड़ी को कमर तक उठा दी और राजू की आंखों के सामने कमला चाची की बड़ी-बड़ी एकदम गोरी गांड चमक उठी,,,, सुनहरी धूप में कमला चाची की गोरी गांड सोने के आभूषण की तरह चमक रही थी जिसे देखकर राजू का लंड पूरी तरह से अकड़ गया,,,, कमला चाची की बड़ी-बड़ी गाड देख कर.राजु की.हालत खराब हो गई,,,, राजू पहली बार किसी औरत की नंगी गांड को देख रहा था हालांकि उसने औरतों की बुर को दो बार देख चुका था लेकिन अभी तक उनकी मदमस्त कर देने वाली गांड के दर्शन नहीं हुए थे और वह भी कमला चाची ने अपनी साड़ी कमर तक उठाकर अपनी गांड के दर्शन करवा दी थी,,,,, पल-पल राजू की हालत खराब हो रही थी और जिस तरह से कमला चाची अपनी पीठ राजू की तरफ करके अपनी साड़ी कमर तक उठा कर रखे हुए थी,,, उसे अच्छी तरह से मालूम था कि उसकी बड़ी बड़ी गांड राजू को साफ दिखाई दे रही होगी और वहां यही देखना चाहती थी कि उसकी नंगी गांड देखकर राज्यों के हाव-भाव पर क्या असर होता है,,, अभी देखने के लिए वह अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए पीछे नजर करके राजू की तरफ देखे तो वह मन ही मन प्रसन्न हो गई,,, पर जानबूझकर अपनी गांड को थोड़ा मटका कर नीचे की तरफ बैठ गई,,, उसे अपनी कामुक हरकतों पर पूरा यकीन था कि राजू पूरी तरह से उसके वश में होता चला जा रहा है,,। देखते ही देखते कमला चाची राजू की आंखों के सामने पेशाब करने के लिए नीचे बैठ गई थी लेकिन उसके मन में कुछ और सुझ रहा था,,,,। वह कुछ देर तक उसी तरह से बैठी रही और पीछे खड़ा राजू अपनी आंखों के सामने कमला चाची को इस तरह से बैठकर पेशाब करते हुए देख रहा था उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसके दिल की धड़कन किसी इंजन की तरह चल रही थी उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था क्योंकि जिंदगी में पहली बार वह अपनी आंखों से किसी औरत को पेशाब करते हुए देखने जा रहा था और वह भी बिना किसी दिक्कत के,,,, उत्तेजना के मारे उसका गला सूखता जा रहा था,,, कमला चाची की गोरी गोरी गांड उसकी आंखों की चमक बढ़ा रही थी,,,,, तभी कमला चाची बोली,,,।

आहहह राजू मुझसे पेशाब नहीं हो रहा है,,,,

क्यों चाची,,?( ऐसा कहते हुए राजू उसके करीब पहुंच गया,,,)

पता नहीं क्यों लेकिन मुझसे पेशाब नहीं हो रहा है,,,,

तो क्या होगा चाची,,,,

एक काम कर तू मेरी आंखों के सामने पेशाब कर शायद ऐसा हो सकता है कि तुझे पेशाब करता हुआ देखकर मेरी बुर से भी पेशाब निकलने लगे,,,

( कमला चाची की बातें सुनकर राजू के दिल की धड़कन बढ़ने लगी उसे समझ नहीं आता क्या करें,,)

क्या ऐसा हो सकता है चाची,,,,

हां बिल्कुल हो सकता है,,, तु जल्दी कर मेरे बुर की जलन बढ़ती जा रही है,,,,

( कमला चाची की इस तरह की बातें राजू के होश उड़ा रहे थे वह कमला चाची की बात मानने को तैयार हो गया था और उसके बगल में ही खड़ा होकर अपने पजामे को नीचे करने लगा,,, देखते ही देखते वह अपने पहचानी को नीचे करके अपना लंड बाहर निकाल दिया,,,, जिसे देखकर कमला चाची की सांस अटक गई कमला चाची ने अपनी पूरी जवानी में इस तरह का तगड़ा लंड कभी नहीं देखी थी,,, उत्तेजना के मारे और उत्सुकता के मारे उसकी बुर फूलने पिचकने लगी थी,,, कमला चाची से रहा नहीं गया और उसके मुंह से निकल गया,,,)

बाप रे इतना बड़ा लंबा और मोटा इतना तगड़ा तो मैंने आज तक नहीं देखी,,,( कमला चाची के मुंह से अपने लंड की तारीफ सुनकर राजू का सीना गदगद हुआ जा रहा था,,, कमला चाची प्यासी आंखों से उसके हथियार को देखे जा रही थी और उससे रहा नहीं गया और वह अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के लंड़ को अपने हाथ में पकड़ ली,,,, एक औरत का हाथ अपने लंड पर महसुस करते ही राजू और ज्यादा उत्तेजित हो गया,,, राजू कुछ बोल पाता इससे पहले ही कमला चाची बोली,,,)

अब मुत राजू,,,

( बस इतना सुनना था कि राजू की पेशाब फूट पड़ी वह जोरों से मुतना शुरू कर दिया,,, और उसे देखकर कमला चाची से भी रहा नहीं गया और उसकी बुर से पेशाब की तेज धार फूट पड़ी,,, राजू की सासे बड़ी गहरी चल रही थी वह अपनी नजरों को कमला चाची की दोनों टांगों के बीच डालकर उसे पेशाब करता हुआ देख रहा था,,, यह नजारा राजू के लिए बेहद अद्भुत और अतुल्य था क्योंकि उसने आज तक इस तरह का नजारा नहीं देखा था इसलिए उसकी उत्तेजना परम शिखर पर थी,,, थोड़ी ही देर में राजू और कमला चाची दोनों ने ही मित्र विसर्जन का कार्यक्रम समाप्त कर दिया पेशाब करने के तुरंत बाद राजू बोला,,,)

अब कैसा लग रहा है चाची चींटी निकल गई,,,

( राजू के मोटे तगड़े लंडको देखकर कमला चाची की हालत खराब हो गई थी और वह जल्द से जल्द उसे अपनी बुर.में लेकर चुदवाना चाहती थी,,,, इसलिए सीधे-सीधे अपने मतलब पर.आते हुए वह बोली,,)

नहीं रे मुझे तो बिल्कुल भी आराम नहीं हुआ,,,( ऐसा कहते हुए वह खड़ी हो गई लेकिन अपनी साड़ी पर कमर तक पकड़कर उठाए हुए थी और राजू प्यासी नजरों से कमला चाची की बुर को देख रहा था,,,) अब एक ही रास्ता रह गया है मुझे इस तकलीफ से निजात दिलाने का ,,,

वह क्या चाची,,,?

इस बार तू अपना मोटा तगड़ा लंड मेरी बुर में डाल,,,( इस बार बेझिझक कमला चाची अपने मन की बात राजू को बोल दी,,, राजू को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें उसी तरह का कोई भी अनुभव नहीं था,, लेकिन जो कुछ भी कमला चाची बोल रही थी उसे करने के लिए वह पूरी तरह से तैयार था क्योंकि उसकी बात को ही सुनकर राजू के तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी,,,)

लेकिन कैसे चाची मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है
 
तू चिंता मत कर तुझे कुछ भी ज्यादा करने की जरूरत नहीं है जैसा मैं कहता हूं वैसा करते रहना मुझे अपने आप आराम मिल जाएगा,,,( ऐसा कहने के साथ ही कमला चाची अच्छी सी जगह ढूंढने लगी और घास के ढेर पर अच्छी जगह देखकर उसी तरह से अपनी साड़ी कमर तक उठाए हुए उसी पर लेट गई,,, उत्तेजना के मारे राजू का गला सूख रहा था,,, कमला चाची की घास के ढेर पर लेटी हुई थी और अपनी दोनों टांगों को फैला दी थी,,, इस तरह की हरकत करने की वजह से कमला चाची के भी तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह अपने तन बदन में इस उम्र में भी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी,,,। कमला चाची की नजर राजू के हथियार पर थी जो की पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा था,,,, कमला चाची इशारे से राजू को अपनी दोनों टांगों के बीच बुलाते हुए बोली,,,)

अब जल्दी से आजा मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,

( इतना सुनते ही राजू तुरंत एक हाथ से अपना लंड पकड़ कर कमला चाची की दोनों टांगों के बीच पहुंच गया और बोला,,,)

अब क्या करूं चाची,,,?

बस अब घुटनों के बल बैठ जा मेरे बिल्कुल करीब आकर,,,

( इतना सुनते ही राजू अपने घुटनों के बल बैठने को चला तभी उसे कमला चाची पजामा उतारने के लिए बोली,, और राजू भी बिना देर किए हुए अपना पजामा उतार कर कमर के नीचे पूरी तरह से नंगा हो गया,,,)

हां अब ठीक है अब घुटनों के बल बैठ जा और जैसा मैं बताती हूं वैसा ही कर,,,

( कमला चाची की बात सुनकर राजू जैसा जैसा वह बता रही थी वैसा ही कर रहा था वह घुटनों के बल बैठ गया था और कमला चाची को आगे की तरफ सरक कर अपनी मोटी मोटी जांघो को उसकी जांघों पर चढ़ा दी ऐसा करने से उसकी बुर.ओर लंड की दूरी पूरी तरह से खत्म हो गई,,, कमला चाची का उत्तेजना के मारे गला सूख रहा था अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर उसे अपनीनी गुलाबी बुर के छेद पर रख दी और राजू को धक्का मारने के लिए बोली राजू की हालत बिल्कुल खराब थी उसके तन बदन में आग लग रही थी पहली बार उसका लंड* बुर * से स्पर्श हो रहा था,,,। राजू की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी चुदाई के ज्ञान से वह बिल्कुल अनजान था,,,। लेकिन कमला चाची ने उसे बताई थी कि कुछ भी हो उसे अपना पूरा लंड* उसकी बुर की गहराई में उतार देना है तभी उसे आराम मिलेगा और देखते ही देखते राजू पूरी तरह से ही उसकी बुर की गहराई में उतर गया,,,।

आहहहहहह,,( जैसे ही राजू का पूरा मुसल.उसकी गहराई में उतरा कमला चाची के मुंह से सिसकारी भरी आवाज निकल गई,,,।)

क्या हुआ चाची,,,,

कुछ नहीं हुआ राजू देखे बस तू अपना काम कर अपने घंटे को अंदर बाहर करना शुरू कर दें और जितना तेज हो सकता है उतनी जोर से अपनी कमर हिला तब जाकर मुझे आराम मिलेगा,,,

( राजू को कमला चाची का आदेश और दिशा निर्देश मिल चुका था इसलिए अब उसे पूछने की जरूरत नहीं थी,,, राजू उसी तरह से अपनी कमर हिलाते हुए अपने लंड को कमला चाची की बुर के अंदर बाहर करना शुरू कर दिया,,, कमला चाची को उम्र के इस दौर में एक जवान लड़के से चुदवाने में बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी और राजू की यह पहली चुदाई* थी जिसमें उसे बहुत मजा आ रहा था,,, वह बड़े जोर से अपनी कमर हिला रहा था कमला चाची राजू के ताकत को देखकर पूरी तरह से मचल उठी थी उसकी बुर पानी पानी हो रही थी,,। राजू की कमर किसी इंजन की तरह ऊपर नीचे हो रही थी ,,, फच फच. की आवाज खेतों में गूंज रही थी,,,,

तकरीबन आधे घंटे जैसी घमासान चुदाई के बाद राजु को अपने अंदर कुछ महसूस होने के लगा वह अपने अंदर की इस कशमकश को समझ पाता इससे पहले ही उसके लंड से पानी का फव्वारा फूट पड़ा,,,, और वह कमला चाची के ऊपर ढेर हो गया,,,, लेकिन देर होने के पहले वह कमला चाची को तीन बार झाड़ चुका था,,,, कुछ देर तक वह उसी के ऊपर पड़ा रहा और जब शांत हुआ तो वह कमला चाची के ऊपर से उठने लगा,,,, कमला चाची मुस्कुराते हुए बोली,,।

बाप रे गजब की ताकत है तेरे में,,,,

अब कैसा लग रहा है चाची,,,,

अब जाकर राहत महसूस हो रही है अब लगता है कि चींटी निकल गई,,,( ऐसा कहते हुए मुस्कुराने लगी और अपने कपड़ों को दुरुस्त करते हुए बोली,,)

देख इस बारे में किसी को भी कानो कान खबर नहीं होनी चाहिए,,, तुझे मजा आया ना,,,

हां चाची मुझे बहुत मजा आया,,,

अगर आगे भी इसी तरह का मजा लेना है तो किसी को बताना नहीं और सीधे मेरे पास चले आना जब भी मैं बुलाऊं तो चले ही आना तुझे ऐसा ही मजा दुंगी,,,

ठीक है चाची मैं किसी को भी नहीं बताऊंगा,,,

तू बहुत अच्छा लड़का है चल अब चल कर खाना खा लेते हैं

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राजू कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी जिंदगी में इस तरह से बहार आएगी,,, कमला चाची इस तरह से तन और मन से आत्मसमर्पण कर देगी इस बारे में उसे कभी अंदाजा नहीं था वह अपने मन में यह सोच रहा था कि उसके दोस्त लोग सही कह रहे थे कि कमला चाची उसका लेना चाहती है,,, तभी तो उसे से हंस हंस कर बात करती रहती है और दूसरों को भाव भी नहीं देती थी,,, राजू बहुत खुश था इतना तो उसे मालूम ही था कि जो कुछ भी वह कमला चाची के साथ किया था उसे सरल भाषा में चुदाई कहते हैं जो कि वह बड़े अच्छे से संतुष्टि प्राप्त कर चुका था,,,। तेरी मां चोद दूंगा तेरी बहन चोद दूंगा इन शब्दों कोइनकेंती भाषाओं को राजू अपने दोस्तों के मुंह से कई बार सुन चुका था एक दूसरे को गाली देते हुए लेकिन इसके असली मतलब और मकसद को आज जाकर समझ पाया था और उस पल को जिया था जिसके एहसास से वह अभी भी पूरी तरह से गदगद हुए जा रहा था,,,,, राजू ने कभी अपने इस उम्र में भी औरतों के खूबसूरत अंगों के बारे में कभी कल्पना भी नहीं किया था,,, औरतों का खूबसूरत है उनकी बनावट उनका खूबसूरत बदन उसकी कल्पना से परे था,,,,,

पहली बार उसे औरतों के खूबसूरत हमको की झलक कमला चाची के नहाने की वजह से ही प्राप्त हुई थी और दूसरी बात रही सही कसर वह अपनी बुआ की बुर देखकर पूरा कर लिया था लेकिन उसे यह नहीं मालूम था कि बुर के अंदर लंड डालने में ईतना मजा आता है,,,,,, राजू को अपने आप पर इतना विश्वास बिल्कुल भी नहीं था कि कमला चाची के दिए गए कार्य को वह सिद्ध कर पाएगा,,, कमला चाची अपनी सारी युक्ति लगा चुकी थी,,, राजू के साथ संभोग करने के लिए,,,,,,, जो कुछ भी संभव हो पाया था वह कमला चाची के निर्देश की वजह से ही संभव हो पाया था वरना राजू तो इस खेल में खिलाड़ी नहीं बल्कि अनाड़ी था लेकिन अब उसे खिलाड़ी बनाने की पहली सीढ़ी को कमला चाची खुद पार करा चुकी थी,,, ,, ऐसा लग रहा था कि मानो कमला चाची एक शिक्षिका के रूप में अपने विद्यार्थी राजू को संभोग का प्रकरण सिखा रही हैं,,, और राजू धीरे-धीरे उसमे खरा उतरता जा रहा था,,,,,

कमला चाची की चुदाई करते समय राजू का मन बहुत मजा आ रहा है कमला चाची की चूचियों को अपने हाथ में पकड़ कर दबाने के लिए लेकिन राजू को यह बिल्कुल भी नहीं मालूम था कि संभोग करते समय किसी औरत को चोदते समय और ज्यादा मस्ती और सुख प्राप्ति के लिए ऐसा ही किया जाता है लेकिन उसके दिमाग में यह बात संभोग की पराकाष्ठा और उन्मादकता की वजह से उत्पन्न हो रही थी बार-बार उसका मन गुरुत्वाकर्षण बल के चलते कमला चाची की बड़ी बड़ी चूचीयो पर खींची चली जा रही थी,,, लेकिन ऐसा करने से वह डर भी रहा था वह केवल कमला चाची के दिशा निर्देश अनुसार अपनी कमर को जोर जोर से हिला रहा था लेकिन ऐसा करने में जो सुख उसे प्राप्त हो रहा था ऐसा तो कभी उसने कल्पना भी नहीं किया था,,,

अपने लंड को छोड़ दी और सीखना चाची की बुर के अंदर बाहर करते हुए राजू कमला चाची के चेहरे पर बदलते भाव छोटे बड़े अच्छे से देख रहा था,,,और उसके मुख से निकल रही गरमा-गरम से इस कार्य की आवाज को सुनकर भी वह कुछ ज्यादा ही मस्ती में आ जा रहा था,,,,,, खेतों में काम करने के बहाने आकर जो कुछ भी राजू ने पाया था उससे वह बेहद खुश था,,,। राजू यह बात भी अच्छी तरह से जानता था कि कमला चाची की चुदाई के बारे में अगर उसके दोस्तों को पता चलेगा तो वह जल भूल जाएंगे इसलिए वह मन ही मन में प्रसन्न भी हो रहा था,,,,। राजू के हाव भाव को देखकर ऐसा ही लग रहा था कि जैसे कि मां कमला चाची के साथ प्रथम संभोग के बाद से ही बड़ा और समझदार होने लगा है,,,,

कमला चाची और राजू दोनों खाना खा रहे थे,,, कमला चाची राजू के साथ चुदवा कर बेहद खुश थी,,,वह बहुत पहले से ही राजू के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहती थी लेकिन उसे कभी मौका नहीं मिल रहा था और राजू की नादानी को देखते हुए अपना कदम आगे बढ़ाने में उसे डर भी लग रहा था लेकिन सब कुछ बड़े आराम से हो चुका था जिसकी उसे तसल्ली थी,,,। लेकिन कमला चाची राजू के साथ खुलकर चुदाई का मजा लेना चाहती थी और ऐसा हो नहीं पाया था,,, चींटी काटने वाली युक्ति उसकी कामयाब हो चुकी थी,,,,,, राजू के साथ उसकी उंगलियों से छेड़खानी में ही उसे बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी लेकिन जिस तरह से उसकी बहू रमा खेतों पर पहुंच चुकी थी उसे देखते हुए कमला चाची के मन में इस बात का डर बैठ गया था कि अगर आगे मौका हाथ से चला जाएगा तो ऐसा मौका न जाने कब मिलेगा ,,,,,, वह पहले से ही पेशाब करते हुए राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड के दर्शन करके पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी कमला चाची राजू की तरह बवाल मचा देने वाला लंड नहीं देखी थी,,,, इसीलिए तो पेशाब करते समय राजू के लंड के दर्शन करते हुए उसकी बुर पानी फेंक दी थी,,,।राजू के साथ खुलकर मस्ती करना चाहती थी उसके मोटे तगड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना चाहती थी और उसे अपना दूध पिलाना चाहती थी और साथ में अपनी मस्त रसीली बुर के अंदर उसकी जीभ को महसूस करना चाहती थी,,, और हर आसन में संभोग का भरपूर मजा लेना चाहती थी लेकिन शायद इस समय उसके पास समय बिल्कुल भी नहीं था और वहां राजू के मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी और इसी लालच के कुछ और ना करके बस आनंद को लेकर संतुष्ट हो चुकी थी उसका काम बन चुका था वह जानती थी कि एक बार चुदाई कर देने के बाद राजू का आकर्षण उसकी तरफ और ज्यादा बढ़ जाएगा एक तरह से वह उसका गुलाम बन जाएगा और वह जब चाहे तब राजू के साथ चुदाई का भरपूर आनंद लूट सकेगी और कमला चाची अपनी तरफ से सारी चालें चल चुकी थी और पूरी बाजी कमला चाची के हाथ में आ चुकी थी,,,।

देख राजू जो कुछ भी यहां पर हम दोनों ने किया इस बारे में किसी को भी मत बताना मैं फिर तुझ से कह देती हूं,,,(रोटी के टुकड़े को मुंह में डालते हुए कमला चाची बोली)

नहीं नहीं चाची ऐसा कभी नहीं होगा,,,, लेकिन तुम्हें अब तो आराम हो गया ना,,,

अरे आराम कैसे नहीं होगा,,, तेरा इतना लंबा मोटा लंड है और मेरी बुर में जाकर सारी कसर निकाल दिया है,, सारी परेशानियां दूर हो गई है,,,(खाना खाते खाते ही इतना कहने के साथ ही वह एक हाथ से बैठे हुए अपनी साड़ी के ऊपर उठा कर अपने बालों से भरी हुई बुर दिखाते हुए बोली,,)

देख नहीं रहा है तेरा उपचार पाकर कैसा पानी छोड़ रही है,,, लेकिन तू जानता भी है कि जो हम दोनों ने किया है इसे क्या कहते हैं,,,।

(कमला चाची के कहने का मतलब पूरा जो अच्छी तरह से जानता था जवान लड़का होने के नाते और जमाल लड़कों के संगत में उसे गाली गलौज करते हुए और अपने दोस्तों की बातों को सुनकर इतना तो मालूम ही था कि एक औरत के साथ एक लड़का जब उसकी बुर में लंड डालता है तो उसे क्या कहते हैं लेकिन फिर भी अनजान बनते हुए बोला)

नहीं तो,,,, क्या कहते हैं चाची,,,?( सब्जी को रोटी में लगाकर मुंह में डालते हुए बोला)
 
सच में तु एकदम बुद्धू है,,,, अरे बुद्धू हम दोनों ने जो किया उसे चुदाई कहते हैं,,,,।

वो ,,,,, अब समझा,,,, इसीलिए सब गाली गलौज करते हुए कहते हैं तेरी मां चोद दूंगा तेरी बहन चोद दूंगा,,,,।

हां अब जाकर तू समझा,,,,

लेकिन चाची ऐसा करने में मुझे ना जाने क्यों बहुत मजा आ रहा था बहुत अजीब सा लग रहा था,,,,(राजू एकदम से अनजान बनते हुए बोला,,हालांकि यह बात सच ही था कि संभोग के सुख के अनुभव सेवा बिल्कुल अज्ञान था,,, और राजू की यह बात सुनकर कमला चाची मुस्कुराते हुए बोली)

अरे ऐसा ही होता है इस खेल में इतना मजा आता है कि पूछो मत तभी तो सब खेलने के लिए बेकरार रहते हैं,,,,, मैं अच्छी तरह से जानती हूं कि तेरे दोस्त लोग भी मेरे बारे में न जाने कैसी कैसी बातें करते रहते हैं,,।

हां चाची तुम सही कह रही हो जब भी तुम मुझसे बातें करती हो ना तो मेरे दोस्त लोग ना जाने क्यों मुझसे जलते रहते हैं,,,

क्या कहते हैं,,, तेरे दोस्त लोग,,,

अरे बहुत कुछ कहते हैं गंदी गंदी बातें करते हैं,,,

अरे बताएगा भी की कैसी कैसी बातें करते हैं,,,,

अरे चाची पूछो मत जब भी तुम मुझसे बातें करती हो तो वह लोग यही कहते हैं कि लगता है चाची को तेरा पसंद आ गया है,,, चाची तेरे से चुदवाना चाहती है,,,

(राजू की यह बात सुनकर कमला चाची मुस्कुराने लगी और मुस्कुराते हुए बोली)

सच ही तो कहते हैं तेरे दोस्त मुझे तु शुरु से बहुत अच्छा लगता है और अब तो तु मुझे और ज्यादा अच्छा लगने लगा है,,,

ऐसा क्यों चाची,,,

तेरे लंड की वजह से,,,, हां राजू मैं सच कह रही हूं तेरे जैसा मोटा तगड़ा लंड शायद गांव में किसी के पास नहीं है,,,तभी तो तू अपने लंड को मेरी बुर में डालकर आज मुझे एकदम मस्त कर दिया,,,,,,

(कमला चाची की बात सुनकर राजू मन ही मन में बहुत खुश हो रहा था क्योंकि कमला चाची उसके लंड की बडाई कर रही थी,,,, कमला चाची की बात सुनकर राजु तपाक से बोला,,,)

लेकिन चाची मेरे दोस्त तो मेरा मजाक उड़ाते हैं कि तेरे पास है ही नहीं तभी तो कमला चाची के साथ कुछ कर नहीं पाता अगर तेरी जगह हम होते तो कब से कमला चाची को मस्त कर देते,,,

तो दिखा देना चाहिए था ना खोल कर एक दिन सबका मुंह बंद हो जाता तेरा लंड देखकर,,,,,,,

जाने दो ना चाची वह लोग अच्छे लोग नहीं है उन लोगों के साथ मुझे बहस में नहीं उतरना है,,,और वैसे भी अगर यह बात मेरे पिताजी को पता चल गई तो मेरी खैर नहीं,,,,,,।

हां सच कह रहा है तू,,, इस बात की किसी को कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए अगर ऐसा हुआ तो आकर भी हम दोनों ऐसे ही मजा करते रहेंगे और पकड़े गए तो सब कुछ खत्म,,,,

तुम चिंता मत करो चाची किसी को कानों कान खबर नहीं होगी,,,,

बहुत अच्छा है तू,,,,(ऐसा कहते हुए कमला चाची अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के सर पर हाथ फेरने लगी,,, राजू के लंड की मोटाई को वह अपने बुर के अंदरूनी हिस्सों पर बड़े अच्छे से उसकी रगड़ को महसूस कर पाई थी ऐसा अनुभव से अपनी जवानी के दिनों में ही प्राप्त हुआ था इस उम्र में किसी लड़के का उसकी बुर की दीवारों को रगड़ देगा इस बात का अंदाजा उसे भी बिल्कुल नहीं था कमला चाची अपने मन ही मन में यही सोच रही थी कि राजू ने अपने लंबे लंड से उसके बुर का भोसड़ा बना दिया था,,,,,, और कमला चाची इस बात से भी हैरान थे कि जिंदगी में पहली बार संभोग करते हुए राजु दूसरों की अपेक्षा जल्दी स्खलित नहीं हुआ था,,, तीन बार उसका पानी निकालने के बाद ही उसके खुद का पानी निकला था,,,, उसके लंड से निकली लावा की पिचकारी उसे अपने बच्चेदानी पर साफ महसूस हुई थी जिसके बदौलत वह तुरंत उसके साथ झड़ गई थी,,।

राजू और कमला चाची दोनों खाना खा चुके थे लेकिन एक बार फिर से कमला चाची की बुर पानी छोड़ने लगी उसकी पूर्व में खुजली होना शुरू हो गई वह एक बार फिर से राजू के लंड को अपनी बुर में लेना चाहती थी,,,, उसे इस बात की आशंका थी कि राजु दूसरी बार कर पाएगा कि नहीं,,,,,, और राजू के मन में भी यही चल रहा था कि एक बार फिर से चाची को चोदने को मिल जाता तो बहुतमजा आता क्योंकि एक बार फिर से पजामे में उसके मुसल ने हरकत करना शुरू कर दिया था,,,, लेकिन यह बात राजू अपने मुंह से नहीं कह सकता था इसलिए खामोश ही रहा लेकिन उसके मन की बात जैसे कमला जान गई हो इस तरह से बैठे बैठे ही,, अपनी साड़ी को ऊपर उठा कर एक बार फिर से राजू को अपनी बुर का दर्शन करते हुए बोली,,,)

देख राजू तेरे लंड ने ईसका क्या हाल किया है कैसे पानी छोड़ रही है,,,,

(कमला चाची की इस हरकत पर एक बार फिर से कमला चाची की बुर के दर्शन करके राजू पूरी तरह से उत्तेजित हो गया और उसे प्यासी नजरों से देखते हुए बोला,,,)

हां चाची अब क्या करना है,,,,

करना क्या है एक बार फिर से तेरे को डालना पड़ेगा लेकिन इस बार पीछे से,,,,

पीछे से मैं कुछ समझा नहीं,,,,

ऐसे तो नहीं समझेगा रुक मैं तुझे बताती हूं ,,(इतना कहते हुए कमला चाची अपनी जगह से खड़ी हो गई और पास में ही घनी झाड़ियों के पास जाकर खड़ी हो गई राजू वहीं खड़ा खड़ा कमला चाची को देख रहा था कमला चाची झाड़ियों के पास खड़ी होकर पीछे नजर घुमाकर राजु को देखी और मुस्कुराने लगी,,, राजू की नजर से खूबसूरत गोलाकार बड़ी बड़ी गांड पर ही टिकी हुई थी जिसे देख कर उसके मुंह के साथ उसके लंड में भी पानी आ रहा था,,,, कमला चाची राजू को देखते हुए अपनी सारी को पकड़कर एक बार फिर से ऊपर की तरफ उठाने लगी,,,, और देखते ही देखते राजू की आंखों के सामने कमला चाची अपनी साड़ी कमर तक उठा दी,,,राजू कमला चाची की भरपूर नंगी गांड को देखकर मचल उठा गांड की दोनों फांके बड़े-बड़े तरबूज की तरह थी जिसे पकड़ कर दबाने की इच्छा राजू की बहुत कर रही थी,,, कमला चाची उसी तरह से ही राज्यों की तरह मुस्कुराकर देखते हुए अपने दोनों हथेली को जोर से अपनी गांड पर मारते हुए बोली,,,।)

बोल राजू कैसी है मेरी गांड,,,?

बहुत खूबसूरत है चाची,,,,(राजू प्यासी आंखों से कमला चाची की गांड को देखते हुए बोला,,)

कभी किसी औरत की गांड देखा है कि नहीं,,,

नहीं चाची पहली बार देख रहा हूं और वह भी आपकी,,,

तो दूर क्यों खड़ा है पास आना,,,

(कमला चाची की बात सुनकर राजू तुरंत उसके पास पहुंच गया और उसके बेहद करीब खड़ा हो गया कमला चाची की बेहद नजदीक जिसे वह प्यासी नजरों से देख रहा था)

पकड़ कर देख कैसा लगता हैं,,,,(चाची अपने अपने मुंह से अपने नितम्बों को पकड़ने का आमंत्रण देते हुए बोली,,, राजू का मन तो पहले से यही कह रहा था इसलिए हम ना चाहत की बात करते हैं वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा दिया लेकिन कमला चाची की गांड पर पहुंचते-पहुंचते उसके हाथों में कंपन होने लगा लेकिन फिर भी वह कमला चाची की गांड पकड़ ही लिया ,,, कमला चाची की गांड को पकड़कर उसे बेहद आनंद की अनुभूति हो रही थी,,,, कमला चाची ने जिस तरह से अपने हाथों से अपनी गांड पर दो चपत लगाई थी उसी तरह से राजू भी कमला चाची की गांड पर चपत लगा दिया और उसे चपत लगाने में बहुत मजा आया क्योंकि चपत लगते ही कमला चाची के मुंह से सिसकारी फूट पड़ी,,,। कमला चाची को भी बहुत मजा आ रहा था लेकिन वह वक्त बर्बाद नहीं करना चाहती थी,,, इसलिए वह मुस्कुराते हुए झुक गई,,, झुकने के बाद अपनी गांड को थोड़ा और ऊपर उठाते हुए बोली,,,।

राजू तुझे मेरी बराबर दिख रही है कि नहीं,,,?

( कमला चाची की बातें सुनकर राजू तुरंत झुक कर कमला चाची की गांड के बीचो-बीच देखने लगा उसे कमला चाची के बड़े साफ तौर पर नजर आ रही थी,,)

हां चाची एकदम साफ नजर आ रही है,,,

बस राजू बेटा पीछे से तुझे अपने लंड को उसमें डालना है जैसा आगे से किया था वैसे पीछे से करना है कर तो लेगा ना,,

हां चाचा तुम बिल्कुल चिंता मत करो आराम से कर लुंगा,,,,

बस बेटा यही तेरे मुंह से सुनना था अब जल्दी से डाल दे,,,
 
बस बेटा यही तेरे मुंह से सुनना था अब जल्दी से डाल दे,,,

(इतना सुनने के बाद ही राखी एक बार फिर से अपना पजामा उतार कर फेंक दिया और कमला चाची के पीछे खड़े होकर अपने लंड को कमला चाची की गुलाबी बुर पर रखते हुए जोरदार धक्का मारा कमला चाची की बुर पहले से गीली हो चुकी थी इसने एक बार फिर से गच के आवाज के साथ राजू का लंड कमला चाची के बुर में प्रवेश कर गया,,, कमला चाची के मन में आशंका थी कि राजू जिस तरह से आगे से कर पाया था क्या पीछे से कर पाएगा पर यही वह देखना चाहती थी क्योंकि कमला चाची जानती थी कि उसकी गांड बहुत बड़ी-बड़ी थी ऐसे में पीछे से कर पाना आसान नहीं होता था और इसका उसे खुद का अनुभव था जिन जिन के साथ उसने शारीरिक संबंध बनाई थी वह लोग पीछे से उसे संतुष्ट करने में नाकामयाब हो गए थे,,, लेकिन कमला चाची के चेहरे पर चमक पैदा होने लगी क्योंकि देखते ही देखते राजीव अपना पूरा लंड उसकी बुर में पीछे से डाल चुका था और उसकी बड़ी बड़ी गांड पकड़ कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया था एक अच्छी अध्यापिका का यही काम होता है कि वह जो काम भी अपने विद्यार्थी को सिखाए वह बड़े लगन से और अच्छे तरीके से सिखाएं,,, और यह काम कमला चाची बखूबी कर दिखाई थी और एक अच्छे विद्यार्थी का भी फर्ज होता है कि अपने अध्यापक के द्वारा सिखाए गए हरपाठ का वह अच्छी तरीके से कंठस्थ कर ले ताकि जरूरत पड़ने पर वह बेझिझक बोल सके या कर सके और वही काम राजू ने भी किया था बस एक बार ही कमला चाची ने उसे बताई थी कि बुर के अंदर लग जाने पर क्या करना हैऔर राजू वही अच्छे तरीके से कर भी रहा था आगे से भी पीछे से भी देखते ही देखते राजू के धक्के तीव्र गति से होने लगे कमला चाची की आंखों से आंसू टपकने लगे थे क्योंकि राजू लगातार अपनी कमर हिला रहा था इससे इस उम्र में भी कमला चाची को अपनी बुर में दर्द को महसूस हो रहा था लेकिन अद्भुत हो रही थी ऐसा सुख उसने आज तक नहीं भोगी थी,,,खेतों में उसकी गरम सिसकारियां गूंज रही थी लेकिन उसकी सिसकारियां को सुनने वाला कोई नहीं था,,,एक बार फिर राजू के तन बदन में अद्भुत ऊर्जा के साथ-साथ असीम सुख की अनुभूति होने लगी,,, राजू कमला चाची की बड़ी बड़ी गांड को दोनों हाथों से थामैं अपनी कमर हिला रहा था किसी औरत को चोदने में कितना मजा आता है यह बात राजू को पहली बार महसूस हो रहा था वरना वह इन सब बातों को बहुत ही खराब मानता था जब कभी भी उसके दोस्त उससे इस तरह की बातें करते थे,,,,लेकिन कमला चाची को चोदते हुए वहां अपने मन में यह सोचने लगा कि वह अब तक इस अद्भुत सुख से वंचित कैसे रह गया था,,,,।

और देखते ही देखते घमासान सिकाई करने के बाद एक साथ कमला चाची और राजू अपना लावा फेंकने लगे और संतुष्ट होने के बाद चुपचाप खेतों से वापस घर आ गए,,,,राजू को अब चुदाई की तलब लग चुकी थी औरतों के प्रति उसका आकर्षण बढ़ने लगा था,,,लेकिन कई दिनों से उसकी मुलाकात कमलआ चाची से नहीं हुई थी,,,, इसलिए उसकी तडप बढ़ती जा रही थी,,, ऐसे ही एक रात को गुलाबी गहरी नींद में सो रही थी और अचानक उसकी नींद खुल गई लालटेन की रोशनी पूरे कमरे में उजाला दे रहा था बहुत कर पानी पिया और वापस खटिया पर बैठकर सोने ही वाला था कि उसका ध्यान उस दिन की बात पर चला गया जब उसकी नींद ऐसे ही खुली थी और उसकी बुआ कोने में खड़ी होकर न जाने क्या देख रही थी राजू को कुतूहल हुआ और वह धीरे से खटिया पर से उठ कर खड़ा हो गया एक नजर अपनी बुआ पर डाला तो और करवट लेकर सो रही थी और उसकी मादक गांड उभरी हुई थी जिसे देख कर राजू का मन मचल उठा लेकिन वहां उसी जगह पर आ गया जहां से उसकी बुआ ना जाने क्या कर रही थी वहां पर पहुंचकर वह उसी जगह पर आग लगा कर इधर-उधर करने लगा उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि उसकी बुआ कर क्या रही थीलेकिन काफी देर तक मशक्कत करने के बाद उसे समझ में नहीं आया और बता छोड़ कर वापस खटिया पर आने की तैयारी कर रहा था कि तभी उसे हल्की सी रोशनी नजर आने लगी रोशनी का पीछा करते हुए उसे बहुत ही जल्द दीवार में बना हुआ वह छेद नजर आने लगा राजू बड़े गौर से उस क्षेंद में से अंदर देखने का प्रयास करने लगा तो अगले ही पल अंदर का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए,,,।

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