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आठवाँ घर: स्मिता और विक्रम शेट्टी
अध्याय ८.३.११
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अब तक:
मेहुल ने अपनी माँ स्मिता और भाभी श्रेया की गांड मारने का कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न कर लिया था. इस मेल में उसने सुजाता की दूसरों की अधीनता में सुख पाने की कुंठा को भी अपनी माँ और भाभी को दिखा दिया था. श्रेया ने अपने पिता को इसके बारे में अवगत कराया तो अविरल ने भी अब अपना अधिकार को अपनी पत्नी पर दर्शाने का निर्णय किया.
महक के साथ मिलन में अब मात्र एक ही दिन शेष था, तो स्नेहा के साथ के लिए तीन. पिछले अंक में कहानी जिस स्थान पर रुकी थी वो स्नेहा के मेहुल के साथ वाला दिन था. हम वहीं से आरम्भ करने के बाद महक और स्नेहा के साथ मेहुल के समागम पर लौटेंगे.
“बात ये है "सूजी डार्लिंग”,” अविरल ने बैग को उठाकर सामने की टेबल पर रखा, “कि श्रेया ने मुझे तुम्हारी दबी हुई इच्छाओं से अवगत करा दिया है.”
सुजाता अचरज से अपने पति को देखती रही, फिर मुस्कराई और नीचे बैठकर अविरल के पैरों को चाटने लगी.
अब आगे:
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सुजाता का घर:
अविरल अपनी पत्नी के इस नए रूप में देखकर दुविधा में था. आज तक उसने सुजाता को अन्य लोगों पर एक प्रकार से राज करते हुए ही देखा था. उसने एक और अनुभव किया था. पिछले कुछ दिनों से उसके इस व्यवहार में स्पष्ट रूप से कमी आई थी. और वो पहले से अधिक संतुष्ट भी लग रही थी. क्या उसका वो दुर्व्यवहार का कारण उसकी इस विकृति का पोषित न हो पाना था? क्या अब वो इसीलिए अधिक प्रसन्न है क्योंकि उसे अपना सच्चा रूप दिख गया था?
“सूजी डार्लिंग, उठो और व्हिस्की लेकर आओ. और वो बड़ा कटोरा भी ले आओ जिसमें तुम नमकीन इत्यादि रखती हो. उसे खाली ही लाना.”
सुजाता ने रसोई से वो कटोरा ले आई. साथ में कुछ अल्पाहार भी ले आई. अविरल उसकी अधीनता की सीमा जानना चाहता था. सुजाता ने कटोरा अविरल के सामने रखा फिर व्हिस्की, पानी और दो ग्लास भी ले आई. उसके बाद सुजाता उसके सामने ही घुटनों के बल बैठ गई.
“सूजी डार्लिंग, मैं कुछ नियम बनाना चाहता हूँ. इनका तुम्हें पालन करना होगा. तुम उनके विषय में क्या विचार रखती हो इससे मुझे कोई अंतर नहीं पड़ता. समझ रही हो न?”
“जी.”
“एक: ये कमरा अब से मेरा और सूजी डार्लिंग का है. इस कमरे में सुजाता के लिए कोई स्थान नहीं है. कमरे के बंद होते ही तुम सूजी डार्लिंग बन जाओगी. ठीक है?”
सुजाता के उत्तर की प्रतीक्षा किये बिना ही अविरल आगे बोलै, “दो: कमरे के बाहर तुम केवल सुजाता ही रहोगी और इस नाम का कोई अर्थ नहीं होगा. हाँ अगर श्रेया या अन्य किसी को इस विषय में बात करनी हो तो उन्हें इस कमरे में ही आना होगा.”
“तीन: स्मिता और विक्रम के घर में भी ये नियम उनके कमरे में ही उपयोग में आएगा. ये आज श्रेया स्मिता को समझा देगी. इसका अर्थ ये है कि इन दो स्थानों के सिवाय तुम सदा ही सुजाता रहोगी, और इन दो स्थानों में सूजी डार्लिंग. इस व्यवस्था को कुछ समय के लिए केवल तीन लोग ही परिवर्तित कर सकते हैं: मैं, श्रेया और मेहुल.”
सुजाता आश्चर्य से अविरल को देखने लगी. अविरल मुस्कुराया.
“श्रेया ने मुझे बताया कि तुम्हें मेहुल ने ही इस राह पर डाला है, तो मैं उसके अधिकार को तो छीनने से रहा.”
“मैं कुछ कहना चाहती हूँ.” सुजाता बोली.
“मुझे आपके नियम मानने में कोई कठिनाई नहीं है. परन्तु अगर विवेक, स्नेहा और मोहन हमारे साथ रहे जैसे पिछले सप्ताह थे तो क्या होगा?”
“कुछ नहीं होगा, यही नियम रहेगा और तुम सूजी डार्लिंग ही बनी रहोगी. यही स्मिता के घर के लिए भी उपयुक्त है. अन्य परिवार के लोगों को भी इस नियम से अवगत करा दिया जायेगा, जब भी उन्हें जानने की आवश्यकता होगी.”
“और अंतिम नियम: ये रूप केवल हमारे परिवार के साथ ही होगा। बाहरी किसी भी व्यक्ति, चाहे वो समुदाय का ही क्यों न हो, इस रूप के दर्शन नहीं करेगा.”
“आप बच्चों के सामने मुझे सूजी डार्लिंग बनाये रखेंगे?”
“मुझे विश्वास है कि तुम्हें भी इसमें अत्यधिक आनंद आएगा. क्या श्रेया की दासी बनना तुम्हें अच्छा नहीं लगा था?”
“लगा था. आप ठीक कह रहे हैं. और इन नियमों के कारण कभी भी स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं होगी.”
सुजाता अब अत्यधिक उत्तेजित होने लगी थी. अगर उसके परिवार वाले भी उसे इस प्रकार से उपयोग करेंगे तो उसकी हर दबी इच्छा पूरी हो सकेगी.
“गुड गर्ल सूजी डार्लिंग. आओ इस नए जीवन के लिए एक एक पेग हो जाये.”
सुजाता उठकर पेग बनाने लगी. पहला पेग बनाते ही अविरल ने उसे रोक दिया. वो सुजाता की सीमा की जाँच करना चाहता था.
“ये मेरा ग्लास है. तुम्हारे लिए मेरे पास एक नया विचार है.”
सुजाता उसे देखने लगी. अविरल ने कटोरा उठाया और उसे थमा दिया.
“मेरे पैरों को व्हिस्की से धोकर उसे ग्लास में डालकर पीना, सूजी डार्लिंग.”
सुजाता के शरीर में एक झुरझुरी सी हुई. इस प्रकार के तिरिस्कार उसने कल्पना भी नहीं की थी.
“और आगे भी पहले मेरे पाँव धोया करोगी, इसी प्रकार से.”
“जी.”
सुजाता ने एक गिलास में व्हिस्की डाली और कटोरे को नीचे रखकर अविरल के पाँव धोये और फिर उस व्हिस्की को ग्लास में डाल लिया.
“गुड, गुड, चीयर्स माई डियर सूजी डार्लिंग!”
अविरल को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया था.
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अध्याय ८.३.११
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अब तक:
मेहुल ने अपनी माँ स्मिता और भाभी श्रेया की गांड मारने का कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न कर लिया था. इस मेल में उसने सुजाता की दूसरों की अधीनता में सुख पाने की कुंठा को भी अपनी माँ और भाभी को दिखा दिया था. श्रेया ने अपने पिता को इसके बारे में अवगत कराया तो अविरल ने भी अब अपना अधिकार को अपनी पत्नी पर दर्शाने का निर्णय किया.
महक के साथ मिलन में अब मात्र एक ही दिन शेष था, तो स्नेहा के साथ के लिए तीन. पिछले अंक में कहानी जिस स्थान पर रुकी थी वो स्नेहा के मेहुल के साथ वाला दिन था. हम वहीं से आरम्भ करने के बाद महक और स्नेहा के साथ मेहुल के समागम पर लौटेंगे.
“बात ये है "सूजी डार्लिंग”,” अविरल ने बैग को उठाकर सामने की टेबल पर रखा, “कि श्रेया ने मुझे तुम्हारी दबी हुई इच्छाओं से अवगत करा दिया है.”
सुजाता अचरज से अपने पति को देखती रही, फिर मुस्कराई और नीचे बैठकर अविरल के पैरों को चाटने लगी.
अब आगे:
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सुजाता का घर:
अविरल अपनी पत्नी के इस नए रूप में देखकर दुविधा में था. आज तक उसने सुजाता को अन्य लोगों पर एक प्रकार से राज करते हुए ही देखा था. उसने एक और अनुभव किया था. पिछले कुछ दिनों से उसके इस व्यवहार में स्पष्ट रूप से कमी आई थी. और वो पहले से अधिक संतुष्ट भी लग रही थी. क्या उसका वो दुर्व्यवहार का कारण उसकी इस विकृति का पोषित न हो पाना था? क्या अब वो इसीलिए अधिक प्रसन्न है क्योंकि उसे अपना सच्चा रूप दिख गया था?
“सूजी डार्लिंग, उठो और व्हिस्की लेकर आओ. और वो बड़ा कटोरा भी ले आओ जिसमें तुम नमकीन इत्यादि रखती हो. उसे खाली ही लाना.”
सुजाता ने रसोई से वो कटोरा ले आई. साथ में कुछ अल्पाहार भी ले आई. अविरल उसकी अधीनता की सीमा जानना चाहता था. सुजाता ने कटोरा अविरल के सामने रखा फिर व्हिस्की, पानी और दो ग्लास भी ले आई. उसके बाद सुजाता उसके सामने ही घुटनों के बल बैठ गई.
“सूजी डार्लिंग, मैं कुछ नियम बनाना चाहता हूँ. इनका तुम्हें पालन करना होगा. तुम उनके विषय में क्या विचार रखती हो इससे मुझे कोई अंतर नहीं पड़ता. समझ रही हो न?”
“जी.”
“एक: ये कमरा अब से मेरा और सूजी डार्लिंग का है. इस कमरे में सुजाता के लिए कोई स्थान नहीं है. कमरे के बंद होते ही तुम सूजी डार्लिंग बन जाओगी. ठीक है?”
सुजाता के उत्तर की प्रतीक्षा किये बिना ही अविरल आगे बोलै, “दो: कमरे के बाहर तुम केवल सुजाता ही रहोगी और इस नाम का कोई अर्थ नहीं होगा. हाँ अगर श्रेया या अन्य किसी को इस विषय में बात करनी हो तो उन्हें इस कमरे में ही आना होगा.”
“तीन: स्मिता और विक्रम के घर में भी ये नियम उनके कमरे में ही उपयोग में आएगा. ये आज श्रेया स्मिता को समझा देगी. इसका अर्थ ये है कि इन दो स्थानों के सिवाय तुम सदा ही सुजाता रहोगी, और इन दो स्थानों में सूजी डार्लिंग. इस व्यवस्था को कुछ समय के लिए केवल तीन लोग ही परिवर्तित कर सकते हैं: मैं, श्रेया और मेहुल.”
सुजाता आश्चर्य से अविरल को देखने लगी. अविरल मुस्कुराया.
“श्रेया ने मुझे बताया कि तुम्हें मेहुल ने ही इस राह पर डाला है, तो मैं उसके अधिकार को तो छीनने से रहा.”
“मैं कुछ कहना चाहती हूँ.” सुजाता बोली.
“मुझे आपके नियम मानने में कोई कठिनाई नहीं है. परन्तु अगर विवेक, स्नेहा और मोहन हमारे साथ रहे जैसे पिछले सप्ताह थे तो क्या होगा?”
“कुछ नहीं होगा, यही नियम रहेगा और तुम सूजी डार्लिंग ही बनी रहोगी. यही स्मिता के घर के लिए भी उपयुक्त है. अन्य परिवार के लोगों को भी इस नियम से अवगत करा दिया जायेगा, जब भी उन्हें जानने की आवश्यकता होगी.”
“और अंतिम नियम: ये रूप केवल हमारे परिवार के साथ ही होगा। बाहरी किसी भी व्यक्ति, चाहे वो समुदाय का ही क्यों न हो, इस रूप के दर्शन नहीं करेगा.”
“आप बच्चों के सामने मुझे सूजी डार्लिंग बनाये रखेंगे?”
“मुझे विश्वास है कि तुम्हें भी इसमें अत्यधिक आनंद आएगा. क्या श्रेया की दासी बनना तुम्हें अच्छा नहीं लगा था?”
“लगा था. आप ठीक कह रहे हैं. और इन नियमों के कारण कभी भी स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं होगी.”
सुजाता अब अत्यधिक उत्तेजित होने लगी थी. अगर उसके परिवार वाले भी उसे इस प्रकार से उपयोग करेंगे तो उसकी हर दबी इच्छा पूरी हो सकेगी.
“गुड गर्ल सूजी डार्लिंग. आओ इस नए जीवन के लिए एक एक पेग हो जाये.”
सुजाता उठकर पेग बनाने लगी. पहला पेग बनाते ही अविरल ने उसे रोक दिया. वो सुजाता की सीमा की जाँच करना चाहता था.
“ये मेरा ग्लास है. तुम्हारे लिए मेरे पास एक नया विचार है.”
सुजाता उसे देखने लगी. अविरल ने कटोरा उठाया और उसे थमा दिया.
“मेरे पैरों को व्हिस्की से धोकर उसे ग्लास में डालकर पीना, सूजी डार्लिंग.”
सुजाता के शरीर में एक झुरझुरी सी हुई. इस प्रकार के तिरिस्कार उसने कल्पना भी नहीं की थी.
“और आगे भी पहले मेरे पाँव धोया करोगी, इसी प्रकार से.”
“जी.”
सुजाता ने एक गिलास में व्हिस्की डाली और कटोरे को नीचे रखकर अविरल के पाँव धोये और फिर उस व्हिस्की को ग्लास में डाल लिया.
“गुड, गुड, चीयर्स माई डियर सूजी डार्लिंग!”
अविरल को अपने प्रश्न का उत्तर मिल गया था.
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