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Incest क्या ये गलत है ? (completed)

कविता- झूठे ! हमारी माँ को चोदके मज़े ले रहे हो आप पापा।
जय हंसते हुए- अरे सच में।
कविता- हमको आपकी बहुत याद आती है। आप जल्दी से माँ को हमारे आपके रिश्ते के बारे में बताये ताकि कोई प्रॉब्लम ना हो।
जय- हम पूरी कोशिश करेंगे....
तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और ममता अंदर आयी। जय ने संभालते हुए कहा," हाँ पूरी कोशिश करेंगे कि परसों की ट्रेन पकड़ ले। दीदी माँ से बात करो।
जय ममता को फोन देते हुए बोला, ममता ने हाल चाल पूछा थोड़ी बात की और फ़ोन रख दिया।
ममता टॉवल लपेटने लगी तो जय ने वो टॉवल खींचकर फेंक दिया और बोला," इस कमरे में ना हम और ना तुम दोनों कपड़े नहीं पहनेंगे। आजसे दो दिन तक यानी परसों तक हम कमरे में रहेंगे और कहीं नहीं जाएंगे। सिर्फ चुदाई करेंगे और कुछ नहीं।" जय ममता को अपनी ओर खींच लिया जो पहले से नंगा था। उसको कमर से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से ममता के हाथों में झुमके रख दिये जो उसने मार्केट से खरीदे थे। और बोला," तुम गहने और मेक अप के अलावे और कुछ नहीं पहन सकती।" ममता मुस्कुराई और बोली ठीक है, पर आप ही ये पहना दीजिए ना।" जय ने ममता के कानों में वो पहना दिया। जय- हम जानते हैं कि अभी कुछ भी नहीं हैं पर दिल्ली में तुमको गहनों से लाद देंगे।"
ममता- खाना लगाते हैं, आपको भूख लगी होगी। आप बैठिए।
जय- ठीक है।
ममता नंगी ही थिरकते चूतड़ों के साथ, खाना लगाने चली गयी। ममता ने जय को खाना लाकर दिया। जय - ये तो बहुत ज्यादा है। इतना कौन खायेगा?
ममता- आप जो खाएंगे खाइये बाकी हम कहा लेंगे।
जय ने ममता को अपनी गोद मे बिठा लिया और बोला," तुम ही हमे खाना खिलाओगी।
ममता ने उसे खिलाना शुरू किया। बचपन में ममता उसे एक बच्चे की तरह खिलाती थी, टैब भी वो नंगा होता था उसकी गोद में, पर आज उसे अपने पति की तरह खिला रही थी, खुद नंगी होकर उसकी गोद में बैठकर।
 
जय- आह... बुर में लण्ड घुसाने का मज़ा ही कुछ और है खासकर अगर वो अपनी माँ की हो। मन तो करता है कि जिंदगी भर इस बुर को चोदते रहें।
ममता- हाँ, बेटा सैयांजी... खूब चोदना इस बुर को।अब तो दिन रात हाज़िर रहेंगे हम आपके लिए। हम औरतों को इस उम्र में ज़्यादा चुदवाने का मन होता है। आह...आह..
जय ममता के बाल कसके खींचता है और ," आज और आनेवाली कई रातों में तुमको सोने नहीं देंगे हम। तुमको अपनी बुर के साथ साथ अपनी गाँड़ भी हमको देनी होगी। खूब चुदवा चुदवा के गाँड़ फैलाई हो।" जय ने एक जोरदार थप्पड़ ममता के दाएं चूतड़ पर चिपका दिया।
ममता ईश......शशश... हाँ दूंगी अपनी गाँड़। मर्दों को आजकल बुर और गाँड़ दोनों ही चाहिए। ये ब्लू फिल्मों का जादू है। हम औरतों को आजकल घर के अंदर भी एक रंडी की तरह जीना पड़ता है। ताकि बिस्तर पर पति हमेशा खुश रहे।

जय ने ममता की गाँड़ की छेद को प्यार से सहलाया और फिर उस पर थूक दिया। उसने अभी गाँड़ के साथ और कोई छेड़खानी नहीं की। वो अभी ममता की गाँड़ को बस निहार रहा था। उधर ममता बुर चुदवाये जा रही थी। दोनों पसीने पसीने हो चुके थे, जबकि रूम में ऐसी लगा हुआ था। ममता को कुछ देर इसी तरह चोदने के बाद, जय ममता को अपनी ओर पीठ कर करवट लेने को कहा। ममता करवट ले ली और जय ने उसको पीछे से बाँहों में भर लिया। जय ने ममता की दोनों चुच्चियाँ अपने पंजों की गिरफ्त में ले ली। जय का लण्ड अभी भी ममता की बुर में अंदर बाहर हो रहा था। ममता अपनी गर्दन जय की ओर घुमाकर उसको चूम रही थी। दोनों एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे। धक्के खाने की वजह से ममता और जय दोनों हिल रहे थे। जय ममता की अधेड़ चूचियों को कस कस कर दबा रहा था। जिसमे ममता उसका पूरा साथ दे रही थी। ममता की चुच्चियों को जय स्पंज की तरह चाँप रहा था। ममता की चुच्चियाँ पूरी तरह दबकर उसके हाथों में समा जाती थी। फिर वो उनको कबूतरों की तरह आज़ाद कर देता और निप्पल से खेलने लगता। दोनों का चुम्बन रह रहकर और जोशीला होता जा रहा था। ममता की बांहे दोनों ऊपर की ओर थी। एक से उसने जय को अपनी ओर खींच रखा था। दोनों एक दूसरे में खोए थे और चुदाई का आनंद ले रहे थे।
जय ममता के कान के पास बोला," आआहह ममता आई लव यू जान।
ममता पूरे कामुक अंदाज़ में लगभग फुसफुसाते हुए जय का जवाब दी," आई लव यू टू।"
ममता अब झड़ने वाली थी। वो तजुर्बेदार थी। पर युवा जोश अभी भारी था।ममता को चुच्चियों की छेड़ छाड़ और चुदती बुर को एक साथ सम्भालना मुश्किल हो गया था। आखिकार ममता के बुर शांत हुई और जय को एहसास हुआ कि बुर जैसे लण्ड को अंदर ही अंदर चूस रही है। जय थोड़ी देर रुक गया। फिर अपना लण्ड बाहर निकालकर ममता के ऊपर आ गया। वो ममता की टांगों के बीच आकर फिरसे लण्ड उसकी बुर में घुसा दिया। और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा। ममता अभी झड़ी थी पर जय का पूरा साथ दे रही थी। ममता गाँड़ उठा उठा कर बुर चुदवा रही थी। तब थोड़ी देर बाद ममता एक बार और झड़ी, फिर जय ने अपना लण्ड निकाल लिया और ममता फुर्ती से जय का इशारा पाकरके लण्ड के पास आ गयी।
जय के लण्ड से मूठ का फव्वाड़ा छूटा, जो ममता के माथे से जा चिपका, दूसरी धार ममता के गाल पर, तीसरा उसके होंठो पर, फिर धार हल्की हो गयी और ममता के पूरे चेहरे को गीला कर गयी। जय अपना लण्ड उसके गाल पर रगड़ रहा था। ममता मुस्कुरा रही थी। जय- ऐसे ठूम और खूबसूरत लग रही हो।" ममता- असली मेक अप जो अब हुआ है।" दोनों ठहाके मारके हंसे। जय ने ममता की एक तस्वीर ले ली। तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई," रूम सर्विस, सर आपका खाना।"
ममता बिस्तर से उठकर बाथरूम की ओर चली गयी। जय तौलिया लपेट कर गेट खोला," आ जा यार।" उस वेटर ने रूम में हुई चुदाई की खुश्बू पहचान ली। वो मुस्कुराते हुए खाना रखके चला गया।
तभी जय के मोबाइल पर फ़ोन आया। जय ने फोन देखा वो फोन कविता का था। जय मुस्कुराया उसकी माँ अभी अभी उससे चुदी थी और बहन चुदने के लिए दिल्ली में तड़प रही थी।
जय- हेलो...कैसी हो दीदी?

कविता- हमारी छोड़ो, ये बताओ माँ तुमसे पटी की नहीं?
जय- अरे ममता को तो हम अभी अभी चोदे हैं। कल रात ही चोदे थे।
कविता- सच्ची, हम जानते थे तुम कर लोगे।
जय- तमीज़ से बात करो, तुम्हारी माँ को छोड़कर तुम्हारे बाप बन गए हैं। हाहाहा
कविता- अच्छाजी, ठीक है पापा।
जय ने बीते रात की पूरी बात बता दी कविता को, और कैसे उसने ममता के साथ मंदिर में शादी की।
कविता- तब तो सच में हमारे बाप बन गए।हाहाहा
जय- और नहीं तो क्या? दीदी तुम्हारी याद आ रही है.
 
जय- मज़ा आ रहा है तुमको। तुम्हारे चेहरे को हम अपने थूक से गन्दा कर रहे हैं। ये चुदाई जितनी घटिया, घिनौनी हो उतना मज़ा आता है।"
ममता आंड़ मुँह से निकालकर बोली," चेहरा को गंदा नहीं साफ कर रहे थे, आप अपने थूक से बेटा सैयांजी। आपका थूक हमारा प्रसाद है। हमारे लिए कुछ भी घिनौना नहीं है, जो आपको पसंद है। आपका जो मन चाहे वो कीजिये। हम आपको नहीं रोकने वाले।" जय उसकी बातें सुनके मुस्कुराने लगा। वो अभी भी उसके चेहरे पर लण्ड फेर रहा था। इस तरह ममता के खूबसूरत चेहरे के साथ खेलने के 10 मिनट बाद जय ने ममता के मुंह मे फिर से लण्ड दिया।
ममता बिल्कुल बेफिक्री से उसका लण्ड पूरा अपने मुँह में समा ली। जाय के लण्ड का करीब 90% भाग उसके मुंह मे था। ममता अपनी एड़ियों पर चूतड़ टिकाए हुए थी और जय की जांघों पर अपनी हथेली रखी हुई थी। जय ममता के खुले मुंह को चोद रहा था। ममता के मुंह से थूक के लंबे धागे और तार लटकने लगे थे। जय के आंड़ ममता के मुंह से चूते लार से गीले हो चुके थे, और उसके सीने और गले दोनों जगह चूकर उसको और कामुक रंडी बना रहे थे। जय ने बहुत कोशिश की पर लण्ड पूरा उसके मुँह में समा नहीं रहा था। ममता समझ गयी कि जय क्या चाह रहा है। उसने जय से कहा," हम कोशिश करते हैं पूरा लेने का, आप हमारे सर को पीछे से कसके पकड़ना।"
और फिर ममता ने एक लंबी सांस लेकर जय के लण्ड को धीरे धीरे अपने मुँह में समाने लगी। उसने धीरे धीरे सब निगल लिया, और जय उसके सर को पकड़े हुए दबाव बना रहा था,ताकि पूरा घुस जाए।
जय ऐसे ही ममता को पकड़े हुए बोला," क्या बात है, तुम तो कमाल कर दी माँ, ऐसे ही रहो थोड़ी देर। हमारे लण्ड को अपने मुँह की गहराई नापने दो। संस्कारी औरतें पति को खुश करने के लिए कुछ भी कर सकती हैं। बिस्तर में तुम तो ब्लू फिल्म की रंडियों से भी आगे निकल सकती हो। आआहह हहहहहह आआहह......।
ममता कोई दस पंद्रह सेकंड के बाद स्वतः लण्ड छोड़ दी, और जोर जोर से साँसे लेने लगी। आ...आआहह.....हहहम्म.... हहहम्म वो हांफ रही थी। ममता ने जय की ओर देखा और हल्की मुस्कान से बोली," यही चाहते थे ना आप, हम सब करेंगे। कोई शक मत रखियेगा।" ममता के मुँह से थूक के धागे जय के लण्ड से जुड़े थे। ममता ने जय के लण्ड को फिर से मुँह में घुसा लिया और इस बार वो उसकी ओर देखते हुए, आंखों से भौएँ उठाकर जैसे ये पूछ रही थी कि कैसा कर रहे हैं हम?
जय ने ममता को बोला," माँ तुम मस्त चूस रही हो।"
इस तरह कई बार ममता ने ये किया और हर बार उसकी टाइमिंग बढ़ रही थी। उसकी आंखों से आंसू आ रहे थे। जब वो लण्ड छोड़ती तो हाफबे लगती। अब जय वापिस से ममता का मुखचोदन कर रहा था। ममता पीछे नहीं हटी, बिल्कुल एक अनुभवी नारी की तरह कमान जय के हाथ में सौंप दी। कुछ देर तक उसको ऐसे चोदने के बाद जय ममता से पूछा," लण्ड चाहिए ममता रानी?
ममता- हहम्मम राजाजी। देखो ना बुर कितनी गीली हो गयी है।
जय- क्या हरामी रंडी हो तुम! चल दिखा अपनी भीगी बुर को। दिखाओ की तुमको लण्ड कहां चाहिए।

ममता बिस्तर पर कुतिया बन गयी और चूतड़ों को फैला कर भीख मांगते हुए बोली- बुर में चाहिए, देखो अपनी रंडी माँ की बुर कैसे अपने बेटे के लण्ड के लिए पनिया गयी है। अपनी माँ को अपनी बीवी बनाकर विधवा से सुहागन कर दिए। सुहागन औरत पति की रखैल होती है। हम तुम्हारी रखैल हैं। पहले माँ, फिर बीवी, और अब रखैल। इसी बुर से आप पैदा हुए और अब आपकी औलाद भी यहीं से पैदा होगी। अपनी माँ को चोदकर उसे अपने बच्चों की माँ बनाएंगे। इस बुर में अपना पवित्र वीर्य गिराकर हमको पवित्र कर दीजिए। ये आपकी रंडी बनी माँ का आग्रह है।
जय पहले ममता के गोरे नंगे भारी भरकम चूतड़ को सहलाने लगा फिर अपनी माँ की बुर पर थूका और अपने लण्ड को उसके ऊपर रगड़ने लगा। जय- तुम्हारी बुर तो अभी भी मस्त है। इतनी चुदाई और ठुकाई के बाद भी बुर अभी ज्यादा छितराई नहीं है। आज तो तुम्हारी बुर हमारे लण्ड का शिकार होगी।
ममता लण्ड छुवाये जाने से उत्तेजित हो चुकी थी," रे हरामी जल्दी से डाल ना बुर में मादरचोद। आआहह... तड़पा रहा है अपनी माँ को लण्ड के लिए उसका एहसास दिलाकर।"
जय- क्या बात है संस्कारी माँ, बिस्तर पर संस्कारों को छोड़ पूरी रंडियों की भाषा बोल रही है। हाहाहा... और उसके चिकने गाँड़ पर दो थप्पड़ लगाए।
ममता- आउच....आह......बिस्तर में हर घरेलू औरत के लिए ये आम बात है।
जय तो ये ले रंडी माँ, अपने बुर में तगड़ा लौड़ा। ममता की भीगी बुर और जय के गीले लण्ड की वजह से लण्ड बिल्कुल माखन में चाकू की तरह घुस गया।
ममता के मुंह से एक लंबी सीत्कार निकली और पूरे कमरे में गूंज गयी। जय भी आहें भर रहा था। वो ममता के पीछे घुटनो पर था।और ममता के बाल किसी घोड़ी की लगाम की तरह पकड़े हुए था। जय ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था। हर धक्के के साथ थप..थप की आवाज़ गूंज रही थी।
जय- आह...
 
जय- तुम्हारी बुर भी काफी गीली हो चुकी है साली छिनाल की बच्ची। तेरी बुर से तो ऐसा लग रहा है, नदी की धारा फूटी हो। चल अपनी उंगलियों से अपनी बुर का पानी हमको चटवाओ।" ममता ने बिना झिझिके अपना हाथ बुर पर रखा और बुर का पानी अपने हथेली पर लगाकर जय के मुंह के सामने रख दिया जिसे जय जीभ निकालकर चाटने लगा। ममता बुर से बार बार पानी अपने हाथ में लगाके जय को चटवा रही थी।

ममता," बचपन में इन्ही हाथों से खाना खिलाया था आपको, अब बुर का रस चटवा रही हूँ। अच्छा लग रहा है इन लम्हों को जीना।
जय ममता के चुच्चियों को सहला रहा था और दबा भी रहा था।" ममता कितनी नमकीन बुर है तुम्हारी, लगता है उम्र के साथ साथ और नमकीन हो रही है। तुम्हारे बुर में क्या जादू है? जितना इसको चखो उतनी प्यास बढा देती है।" और जय ने ममता को अपनी ओर खींच लिया,और उसकी बुर को मुंह में भर लिया। बुर का नमकीन स्वाद उसकी जीभ पर छा गया। ममता ने अपनी उंगलियों से बुर की दोनों फाँकों को फैला दिया था। ममता बोली," ये हुई ना बात राजाजी, आपने तो नदी की धारा में ही मुंह लगा दिया। यही है मर्दों का तरीका। आआहह...........आ... आ। चाटो बेटा सैयांजी अपनी जन्मस्थली अपनी जीभ से रगड़ रगड़ के चाटो। ऊईई.....मम्म.... उम्म्महह...हहम्मम अपनी माँ की बुर चूसना सबको नसीब नहीं होता है।"
जय बुर के एक एक हिस्से को जीभ से छेड़ते हुए, कभी उपर कभी नीचे, कभी बुर के भीतर घुसेड़ रहा था। जय खूब कस कसके बुर को चाट और चूस रहा था। ममता अपनी दोनों घुटने मुड़े हुए थे और अपनी गाँड़ उछाल उछाल कर बुर अपने बेटे से चुसवा रही थी। ममता की अधेड़ चुच्चियाँ उसकी चढ़ती उतरती साँसों के साथ ऊपर नीचे हो रही थी। उसकी चुच्चियाँ वासना और कामानंद से कड़क हो गयी थी जैसे किसी पर्वत श्रृंखला की दो चोटियाँ हो। उन दोनों पहाड़ियों के बीच की घाटी से ममता का कामोन्मादित चेहरा साफ नजर आ रहा था। उसकी आंखें अनायास आनंद से बंद हो जाती तो, कभी खुलकर अपने बेटे को बुर चूसते हुए निहारती। कभी मुंह खोलकर जोर से सीत्कारें भर्ती तो कभी कसके चूसे जाने पर अपने होंठों को दांतों से काटती। जय जब अपने दांतों से बुर के दाने को छेड़ता तो माथे पर शिकन आ जाती पर वो, उस मीठे दर्द को उफ़्फ़फ़.... आउच.. आआहह करके झेल जाती। बुर चुसवाते चुसवाते ममता का शरीर अकड़ने लगा।
ममता- उममहः जय .....आआहह.... बहुत अच्छा लग रहा है। आईईईई..... कहकर वो शांत हो गयी। जय बुर को अभी भी चूस रहा था। ममता बस थकी हुई मुस्कान दे रही थी।
जय फिर बोला," माँ तुमको मज़ा आया ना? खूब बुर से रस चुवाई हो।
ममता- खूब मजा आया है। अब आपका लण्ड चूसना है हमको।
जय- लण्ड तुमको मिलेगा पर हम तुम्हारे मुँह को चोदेंगे।" जय ने इशारा किया, तो ममता पैर मोड़कर जैसे नमाज़ में बैठते हैं, वैसे बैठ गयी। फिर जय बिस्तर पर खड़ा हो गया। ममता के आँखों के सामने जय का लण्ड मूसल सा खक़द था। जय," पहले तुम इसको गीला करो और खेलो इसके साथ फिर हम तुम्हारे सुंदर मुंह को चोदेंगे। दिखाओ अपना रंडिपन।" ये बोलकर उसने ममता के खुले बालों को कसके पकड़ लिया और खींच कर उसके खुले मुंह में लण्ड पेल दिया। ममता उसके लण्ड को हौले से चूसने लगी, वो जय के आंड को सहला रही थी। जय अपनी माँ को लण्ड चूसते हुए देख और उत्तेजित होने लगा। उसने ममता के बालों को कसके खींचा, और बोला," साली रंडी, आंखों में आंखे डालकर चूसो। ताकि तुमको एहसास हो कि किसका लण्ड चूस रही हो, अपने सगे बेटे का।" ममता मुंह लण्ड में लिए उसकी तरफ देखने लगी, और मुस्कुराई। अपने बेटे को पहले पति और अब एक मर्द की तरह कड़क होते देख रही थी। ममता की कामुक आंखें, उसकी ओर बिना पलक झपके देख रही थी। जय ममता की ओर देखा और उसने अपना लण्ड बाहर निकालकर उसके खुले मुँह में थूक दिया, फिर मुस्कुराते हुए अपना लण्ड उसके होंठों पर रगड़ने लगा। ममता बिना विरोध किये उसका सारा थूक निगल गयी। जय ने अपना गीला लौड़ा ममता के पूरे चेहरे पर घुमाने लगा। जय के लण्ड पर लगे ममता की लार उसके ही चेहरे का मेक अप कर रही थी। जय ने ममता के माथे पर थूका, फिर उसके गालों पर। फिर अपने लण्ड के सहारे उस थूक को उसके चेहरे पर फैला कर गीला कर रहा था। ममता उसके आंड को मुंह में रखी हुई थी।
 
जय- माँ जब तुम ऐसी बातें करती हो तो हमको बड़ा मजा आ रहा है। औरत को अपने मर्द के सामने ऐसे ही रहना चाहिए। कोई पर्दा नहीं।
ममता- यही बात हम तुमसे कहना चाहते हैं, तुम हमसे कभी कुछ नहीं छुपाना और हमसे खुलकर बताना।
जय ने ममता को खुदसे एक दम से चिपका लिया और उसके चेहरे को दोनों हाथों में ले लिया। फिर बोला," माँ तुम अबसे हमारी अर्धांगनी हो और अपने अंग से कुछ छुपता है क्या? ममता ने उसके चेहरे को अपने चुच्ची पर रख सीने से लगा लिया। थोड़ी देर दोनों इसी अवस्था में बने रहे फिर जय ममता के साड़ी के अंदर पीछे से हाथ घुसा दिया। ममता की गाँड़ की दरार में उंगली रगड़ रहा था। ममता की साड़ी उठकर घुटनो तक आ चुकी थी।
ममता- बहुत भूख लगी होगी आपको ना, सुबह से कुछ खाया नहीं है। कुछ मंगा लीजिए।
जय- फिर तुम आप बोल रही हो माँ?
ममता- आज हमारी शादी हुई है, आज हमको ये अधिकार दीजिए ना प्लीज, राजाजी। ममता बिल्कुल भीख मांगते हुए बोली।
जय- ठीक है आज के लिए ही। पर भूख तो तुमको भी लगी होगी।
ममता- आप मंगा लीजिए जो खाना हो।
जय- ठीक है। फिर जय ने सोफ़े के बगल में रखे फोन से रूम सर्विस में कॉल करके खाना आर्डर किया।

ममता- कितनी देर में खाना आएगा?
जय- माँ कोई 45 मिनट लगेंगे। तब तक हम बातें करेंगे।
ममता- क्या बातें करें जी?
जय- हमारे बारे में माँ।
ममता- आप हम पर कबसे नज़र रखे हुए थे? ममता मुस्कुराते हुए पूछी।
जय- जब से हम व्यस्क हुए हैं। तुम्हारे इस रूप ने हमको मुग्ध कर दिया था। ये सुंदर चेहरा, ये काले घुंघराले बाल, ये संभाले ना संभलने वाले तुम्हारे उभार, तुम्हारी चाल। सर से लेकर पैर तक तुम एक अप्सरा सी लगती हो। ऐसा नहीं है कि हम तुमको एक बेटे के तौर पर प्यार नहीं करते थे, पर जब भी हम तुमको गौर से देखते थे तो तुम्हारे अंदर एक प्यासी औरत की झलक मिलती थी। हम भी सिर्फ ब्लू फिल्मों से मन बहलाते थे। कितनी बार तुमको सपने में बेतहाशा चोदे हैं, तुमको ब्लू फिल्मों की हीरोइन समझ के तुम्हारी पैंटी में मूठ मारे हैं। कई बार तुम्हारी मैली पैंटी को सूंघकर मज़े लिए हैं। तुमको जब भी देखते थे तो मन होता था कि काश तुम हमारी पत्नी होती। तुम जैसी औरत को विधवा देख दिल जलता था हमारा। मुहल्ले की सारी औरतें फुल मेक अप करती थी, पर तुम सिवाय काजल के कुछ नहीं लगती थी। तुम्हारी सूनी मांग देख हमको बहुत गुस्सा आता था। पर इस कमी को हम आज दूर कर दिए हैं। तुम अबसे सब कुछ करोगी, सिंदूर लगाओगी, बिंदी भी, लिपस्टिक, रूज़, मंगलसूत्र, हाथों में चूड़ियां, पैरों में पायल और बिछिया जो भी चीज़े शादी शुदा औरतें करती हैं।"
ममता- इतना चाहते हैं आप हमको। हम कितने भाग्यशाली हैं कि अपनी कोख से इतना अच्छा बेटा पैदा किये और फिर अब उसी बेटे की पत्नी बन गए। आप जैसे लोग कम ही पैदा होते हैं। हमको माफ कर दीजिए कि हम आपके प्यार को इतनी देर से स्वीकारे, बेटा सैयांजी। आप ब्लू फिल्में देखकर खूब मूठ बर्बाद किये हैं, अब वो सब बर्बाद नहीं होगा। अब उसका एक एक बूंद हमारे तीनो छेद के माध्यम से हमारे अंदर जाएगा। हम अब एक शादी शुदा औरत की तरह रहेंगे आपसे वादा करते हैं।
जय- माँ हम तुमसे एक सवाल पूछना चाहते हैं। तुम्हारे मासिक बंद हो चुके हैं या चालू हैं?
ममता- अभी 5 दिन पहले हमारा मासिक हुआ था।
जय- मतलब अभी हो रहे हैं। आमतौर पर औरतों की मासिक बन्द हो जाती है, पर तुम्हारी अभी चालू है।
ममता- हाँ, चालू तो है पर आप टेंशन ना लो अभी 12- 15 दिन नहीं होगा।
जय- अरे हम उसके लिए नहीं बोल रहे थे।
ममता- फिर।
जय- अगर ये चालू रहे तो, तुम माँ बन सकती हो। क्या तुम अपने बच्चे के बच्चे की माँ बनोगी?
ममता- हर पत्नी का धर्म होता है कि अपने पति को बाप बनाये। ये तो सौभाग्य की बात है बेटा सैयांजी। आपने हमारे मुँह की बात छीन ली।
जय- हमको तुमसे यही उम्मीद थी, माँ की तुम हाँ ही कहोगी।पर उसके लिए तुमको चोदना होगा।
ममता ने उसके लण्ड पर हाथ रखके, कहा, " हम कब मना किये हैं बेटा सैयांजी।"
जय ने उसको गोद में लिए ही खड़ा हो गया। ममता के पैर जय की कमर पर कैंची बने हुए थे, जय ममता के चूतड़ों को कसके पकड़ा हुआ था। जय," तेरी चुदाई अभी होगी।" और ममता को बिस्तर पर ले गया। ममता को बिस्तर पर लिटा दिया। जय ममता की साड़ी उतारने लगा तो ममता कहाँ पीछे हटने वाली थी। वो उसकी मदद करते हुए खुद अपनी ब्लाउज और ब्रा उतार फेंकी। उधर जय ने उसकी साड़ी उतार दी थी। और पेटीकोट को भी झटके के साथ उतार कर फेंक दिया। ममता ने खुद अपनी पैंटी उतार दी जय ने उसके हाथों से ले लिया और सूंघने लगा। ममता ने उसका पायजामा उतार दिया। और उसकी चड्डी को उसके घुटनों तक ले आयी।जय ने अपना कुर्ता और बनियान भी निकाल दिया। ममता," क्या मस्त लण्ड है बेटा सैयांजी आपका।"
 
ममता ने भी फूल माला जय के गले में डाली और फिर परंपरा के हिसाब से उसने जय के पाँव छुए। जय ने उसको आशिर्वाद दिया," सदा सुहागन रहो। ममता की आंखों से खुशी के आंसू जय के पैरों पर गिरे। जय ने ममता को उठाया और बोला," क्यों रो रही हो? तुम खुश नहीं हो क्या?
ममता के मुंह से अचानक निकला," हम बहुत खुश हैं कि आपने एक विधवा को स्वीकारा।" और मुस्कुराई।
तब तक पंडितजी आये और उन दोनों को प्रसाद दिया। दोनों ने उनके पैर छुए। पंडितजी बोले," बेटा अपनी पत्नी का ध्यान रखना, तुमसे उम्र में बड़ी हैं, इसलिए इनकी इज्जत करना। फिर ममता की ओर मुड़कर बोले," तुमको इस उम्र में विधवा से फिर से सुहागन बनने का मौका मिला है, बेटी। ये मौका सबको नहीं मिलता है। अपने पति का पूरा सम्मान करना, उसकी सेवा करना। ऐसे लोग कम होते हैं जो इस उम्र में औरतों को अपनाते हैं। ये तुम्हारे लिए देवता हैं। इनका पूरा ध्यान रखना।"
ममता- पंडितजी, हम पूरा कोशिश करेंगे कि हम अछि पत्नी बने। चुकी आप बोले हैं कि ये हमारे देवता हैं तो हम इनका चरणामृत पीना चाहते हैं। हमको एक लोटा पानी मिलेगा क्या?
पंडितजी अवाक रह गए और बोले- बिल्कुल सती की तरह हो तुम बेटी, ऐसी नारी तो अब होती नहीं। ठीक है ये लो। पंडितजी ने थाली से लोटा दे दिया।
जय- ये क्या कर रही हो ममता?
पंडितजी- इसकी इच्छा है इसे रोको मत बेटा। तुम भाग्यशाली हो जो तुम्हे ऐसी पत्नी मिली है।
ममता जय के चरणों के करीब बैठ गयी और लोटा से पानी डालकर उसके पैरों को अपने हाथों से धोया। फिर उसके चरणों में मत्था टेका और चुल्लू में चरणामृत लेकर पी गयी और अपनी मांग में भी लगाया। जय ने उसे उठाया और बोला," तुम्हारी जगह यहां है।" और गले से लगा लिया।
कुदरत का अद्भुत खेल था, जो कुछ घंटे पहले इसी मंदिर में माँ के पैर छू रहा था, अब वही माँ उसकी पत्नी बनके उसके पैर छू रही थी।
जय ने फिर उन सबको दान दक्षिणा दिया और दोनों नवविवाहित जोड़े की तरह मंदिर से निकलकर बाहर चले गए। जय ने ममता को कार में बिठाया। फिर दोनों एक दूसरे होटल की ओर चल दिये। टैक्सी होटल के सामने रुकी, ममता और जय उतर गए। जय ने टैक्सी को रवाना किया। फिर दोनों अंदर गए और जय ने रिसेप्शन पर हनीमून स्वीट बुक किया।
जय ने नाम पर मिस्टर एंड मिसेस झा बताया। थोड़े ही देर बाद दोनों उस कमरे में थे।
रूम में पहुंचते ही जय सोफे पर लुढ़क गया। ममता को अपने भाग्य पर भरोसा नहीं हो रहा था। ममता बिस्तर पर बैठी थ, क्योंकि वो कमरे में पहले आ चुकी थी। पर जैसे ही जय आया, ममता खड़ी हो गयी। और उसके बगल में बैठ गयी। ममता- आप थक गए हैं, लाइये हम आपकी थकान दूर कर देते हैं। आप ये पानी लीजिए। ममता ने गिलास बढाके कहा।

जय ने ममता के हाथों से गिलास ले लिया और उसको वहीं टेबल पर रख दिया। फिर ममता को अपने गोद में बिठा लिया। फिर उसके होंठों को चूमकर बोला," हमारी प्यास तो इन रसीले होंठो से बुझेगी, माँ। ममता मुस्कुराई और उसकी आँखों में कामुक नज़रों से देखते हुए बोली," अब तो सब आपका है, जो मन चाहे कीजिये।"
जय," आये हाय हमारी जान तुम्हारे साथ अभी बहुत कुछ करना है। पर तुम ये आप आप क्यों बोल रही हो, हम तुम्हारे बेटे हैं ना। तुम हमको अभी जय ही बोलोगी जब तक हम तुमको ऐसे करने के लिए नहीं कहेंगे।"
ममता- नहीं अब हम आपको ऐसे नहीं बुलाया सकते। अब आप हमारे बेटे नहीं बल्कि पति हैं। हम ऐसा नहीं कर सकते।
जय- ममता इस रिश्ते में बने रहकर तुमको चोदने का मज़ा अलग ही है।" जय धीरे से बुदबुदाते हुए" यही बात कविता से कहा था।"
ममता- क्या कुछ कहा आपने?
जय- वही कह रहा था कि तुम बिस्तर पर चुदते हुए अभी माँ बनके चुदो। फिर वो मौका भी आएगा जब तुम हमारे लिए करवा चौथ भी करोगी यानी तुम दुनिया के सामने हमारी पत्नी बनोगी।"
ममता- ठीक है बेटा, जैसा तुम कहो। पर हम तुम्हारी पत्नी होने का सब धर्म निभाएंगे।
जय- तुम मंदिर में बिल्कुल भावुक हो चुकी थी माँ। हमारे पैर छूवे और उसको धोकर चरणामृत पी। तुम बहुत अच्छी पत्नी बनोगी। हम तुमसे शादी इस पवित्र मंदिर में करना चाहते थे, क्योंकि यहाँ की सुंदर कामुक चुदाई की मुद्रा में अश्लील मूर्तियां देखकर तुम्हारे उपर की पवित्र साफ सुथरी विधवा स्त्री के अंदर से एक कामुक अप्सरा को चुदक्कड़ रंडी की तरह बाहर निकालना चाहते थे। माँ तुम एक मस्त औरत हो और जो कल अपना रूप तुमने दिखाया वैसी तो हमने कभी कल्पना भी नहीं कि थी।" जय ने ममता के कमर पर जोर से चिकोटी काट ली।
ममता चिहुंक उठी," आउच....., फिर बोली," अभी तो शुरुवात है जय हम तुमको अपना ऐसा रूप दिखाएंगे की तुमको विश्वास ही नहीं होगा कि तुम्हारी माँ ऐसी गंदी और घिनौनी हरकते भी कर सकती है। अब तक तुमने हममें एक संस्कारी पवित्र माँ को देखा है, पर अब हमको अपनी पत्नी के रूप में एक मदमस्त कामुक औरत के रूप में देखोगे।"
 
गांव में दोपहर हो चली थी। बड़े से घर में, कंचन इस समय अकेले थी। शशिकांत तो कोर्ट गया था, और माया स्कूल में थी। कंचन जो कि अब जवान हो चली थी, उसके अंदर भी चुदाई की भूख और प्यास दोनों जाग रही थी। आखिर वो भी तो उसी खून की पैदाइश थी। खुद को अकेला पाकर उसने पहले कमरे को बंद कर लिया। और अपने बिस्तर के नीचे दबी, अश्लील कहानियों वाली किताब निकाल ली, जो कि उसे उसकी सहेली नीलम ने दी थी। उसमें चुदाई की काफी तस्वीरें भी थी, जिसमे पूरी नंगी लड़कियां बेहद कामुक अंदाज़ में मर्दों से चुदते हुए नज़र आ रही थी। किसी ने अपनी बुर में तो किसीने गाँड़ में लण्ड ले रखा था। किसीके होंठ सुपाड़े से चिपके हुए थे, तो कोई लण्ड चूस रही थी। कही तो एक लड़की बुर और गाँड़ के साथ साथ अपने मुँह में लण्ड को घुसा रखा था। कंचन तस्वीरें देखने के साथ साथ उसमें ऐसी भद्दी कहानी पढ़ रही थी, जिसमें एक लड़की को उसके बाप और भाई चोदते हैं, वो भी एक साथ। कंचन को पता था, की गाँव में अक्सर लड़कियों के साथ, ऐसा होता है कि घर के मर्द ही उनको खूब चोदते हैं। उसकी पहचान की एक दो लड़कियों ने उसे बताया भी था, की कैसे उसके भाई और चाचा ने उनको रखैलों की तरह घर मे रखा है। कुछ तो अपने ननिहाल में मामा से चुदकर आती थी। तो उसे इन चीजों के बारे में पता था। वो मज़े लेकर उन कहानियों को पढ़ रही थी। ऐसे करते हुए कब उसकी सलवार के भीतर उसकी उंगलियां पहुंच गई पता ही नहीं चला। वो अपनी कच्छी के भीतर छुपी कुंवारी बुर को मसल रही थी। कहानी पढ़ते हुए उसने, अपनी सलवार और कमीज़ उतार दी। और सफेद रंग की ब्रा और पैंटी में पेट के बल लेट गयी। उस सफेद ब्रा पैंटी में वो कमाल की आइटम लग रही थी। गांव में रहने के बावजूद उसने काफी डिज़ाइनर और स्टाइलिश कपड़े ले रखे थे। उसकी मेक अप और परफ़्यूम से लेकर सैंडल तक सब कमाल थे। उस पर तो गांव के कई लड़के फिदा थे पर, उसकी ऊंची जात और स्तर के वजह से कोई उसे कुछ कह नही पाता था। नहीं तो अब तक वो किसी ना किसी से चुद चुकी होती। पर बेचारी के नसीब में भगवान ने लण्ड नहीं, फिलहाल उसकी उंगलियां ही दे रखी थी। वो सब कुछ पढ़ते हुए तेज़ी से बुर में उंगलियां अंदर बाहर कर रही थी। थोड़ी ही देर में उसकी किताब हाथ से छूट गयी और, आँख बंद हो गयी। उसने अपने होंठ दांतों में भींच लिए, और चुच्चियों को दूसरे हाथ से कसके दबाने लगी। उसके मुंह से अनायास ही सिसकारियां फूटने लगी। उसके बुर के अंदर का लावा आखिर फूट गया, और एक ज़ोर की ," आआहहहहहहहहहह" के साथ वो झड़ गयी। कंचन की पैंटी पूरी तरह गीली हो चली थी। वो उसी तरह लेट गयी थोड़ी देर के लिए।

उधर दूसरी तरफ जय और ममता नवविवाहित जोड़े की तरह एक दूसरे के साथ प्यार जता रहे थे। ममता 46 साल की होकर भी किसी 18 साल की लड़की के समान जय की बाहों में पूर्ण नग्न अवस्था में समर्पण कर लेटी थी। दोनों खाना खाकर लेटे हुए थे। जय ममता के खुले बालों से खेल रहा था, और ममता उसकी छाती सहला रही थी।
जय- माँ, तुमसे एक बात पूछूँ?
ममता- हां.. पूछो।
जय- इस बुर को तो हम चख लिए, अब अपनी भूरी छेद का जलवा कब दिखाओगी, उसका मज़ा कब दोगी?
ममता- भूरी छेद??? ..........खुलकर बोलो राजाजी।
जय ममता के गाँड़ के छेद पर उंगली दबाते हुए बोला," तुम्हरी गाँड़, कब मरवाओगी?
ममता हंसते हुए, " धत, वो चुदवाने की चीज़ थोड़े ही है। वहां से तो हम हगते हैं।
जय- झूठ बोलती हो तुम, गाँड़ मरवा मरवाक़े ये छेद खुल गयी है और चूतड़ों का साइज भी डबल हो गया है। तुमको देख के अंधा भी कैह देगा कि बहुत गाँड़ मरवाई हो।

ममता ठहाके लगाते हुए हंसने लगी। फिर उसके होंठों को चूमते हुए बोली," तुम सब मर्दलोग आजकल बुर के कम और औरतों की गाँड़ के ज़्यादा शौकीन होते जा रहे हो। कोई बात नहीं हम ये इच्छा पूरी करेंगे।
जय- माँ, औरतों की बुर से भी ज़्यादा मज़ा उनकी गाँड़ मारने में आता है। और सच बात तो ये है कि औरतें भी आजकल बुर और गाँड़ एक समान ही मरवाती हैं।
जय ममता के चूतड़ों को मसलते हुए बोला। जय, " तुम अपनी गाँड़ का स्वाद हमको चखा दो। चलो खड़ी हो जाओ हमारे पैर की तरफ मुड़के, अपनी दोनों टांगे हमारी छाती के अगले बगल डालो, और अपनी भारी भरकम गाँड़ हिलाओ।" ममता ने ठीक वैसा ही किया, वो खड़ी हो गयी जिससे उसकी गाँड़ जय की ओर थी। उसने अपने बाल बांध लिए थे। और जय थप्पड़ चूतड़ पर पड़ते ही अपनी गाँड़ हिलाने लगी। वो पीछे देखते हुए मुस्कुरा भी रही थी। और जय उसकी गाँड़ की थिरकन में एक अजीब सा आनंद पा रहा था। ममता उम्रदराज़ होने के बावजूद काफी अच्छे से चूतड़ में हरकत ला रही थी। कभी वो अपने चूतड़ पर खुद थप्पड़ लगा देती, और उनको फैला के अपनी गाँड़ की छेद जय को दिखाती। फिर झुकती और ज़ोर ज़ोर से गाँड़ हिलाती। जय उसकी गाँड़ पर थूक देता तो वो उसपर खुद का थूक हथेली से रगड़कर चूतड़ को चमका देती। जय का लण्ड फिर सलामी देने लगा.
 
उसने ममता की जांघ पकड़ ली और उसको अपने मुंह पर ही बैठा लिया। ममता उठना चाहती थी, पर जय ने उसकी गाँड़ की छेद को अपने मुंह के कब्जे में ले लिया। ममता अपने हाथ से अपने खुले बाल समेट ली और अपनी गाँड़ को रगड़ने लगी। वो मुस्कुरा रही थी। ज़िंदगी में पहली बार कोई उसकी गाँड़ चूस रहा था। उसे इसका अनुभव नहीं था। उसने जय को रोकना चाहा पर जय कहां मानने वाला था। उसने ममता की भूरी गाँड़ की छेद में अपनी जीभ घुसा दी और चाटने लगा।
ममता- आहह ! जय छोड़ो जीभ अंदर क्यों घुसा दिया? गंदी जगह है वो, वहां से टट्टी करते हैं हम। ममता उठना चाही तो उठ नहीं पाई, बल्कि जय ने उसकी मोटी जांघों को कसके पकड़ रखा था। इसलिए उठ ही नही पाई।
जय- माँ, तुमको मज़ा आ रहा है ना? हमको तो तुम्हारी गाँड़ चाटने में बहुत मज़ा आ रहा है। तुम ऐसे ही बैठी रहो और हमको चाटने दो अपनी स्वादिष्ट गाँड़ को।
ममता- मज़ा आ रहा है, पर वो तो गंदी जगह है ना। लेकिन अगर तुमको मज़ा आ रहा है, हमारी गाँड़ की छेद से छेड़छाड़ करने में तो हम अपने पिछले छेद को तुमको खूब चटवाएँगे। लो मज़े इस स्वादिष्ट मीठी गाँड़ की।
जय लपलपाती जीभ से ममता की गाँड़ के स्वाद का पूरा मज़ा ले रहा था। फिर उसने कहा," तुमको भी इस गाँड़ का स्वाद चखाएंगे, तुम्हारी गाँड़ मारने के बाद अपने लण्ड पे।"
ममता अब तक गाँड़ चुसवाते हुए मस्त हो चली थी। उसे नहीं मालूम था कि गाँड़ चटवाने और चुसवाने में इतना आनंद आता है। जय ममता की गाँड़ को बेतहासा चूस रहा था। अब ममता गाँड़ को उसके मुंह पर रगड़ रही थी। ऐसा करते हुए जय के मुंह पर कभी ममता की गाँड़ छू जाती तो कभी उसकी गुलाबी बुर। उसकी चुच्चियाँ हिलोरे मार रही थी। और मस्ती में बड़बड़ा रही थी," चाटो जी गाँड़ को, बड़ा अच्छा लग रहा है। उफ़्फ़फ़, हाय, क्या मज़ा है इस भूरी सिंकुड़ी छेद को चटवाने में। चाट ले बेटा, खूब चूस।
गाँड़ और बुर का स्वाद थोड़ी और देर लेने के बाद, जय का लण्ड पत्थर की तरह कड़क हो चला था, जिसे अब ममता की गाँड़ ही अपने अंदर लेकर मोम सी पिघला सकती थी।
जय ने ममता के चूतड़ों पर एक तमाचा मारा, और बोला," उठ, साली रंडी की बच्ची, छिनाल औरत, चल घोड़ी बन जा।
ममता- हां हाँ जरूर। उफ़्फ़फ़ ये एक नया ही एहसास था। क्या मस्त मज़ा मिला हमको आज। आज इस लण्ड को अपनी गाँड़ की गहराइयों का एहसास कराएंगे।
जय- पहले कुत्ती बनकर चूस इसे। अपने थूक से नहला दो इसे माँ। तुम्हारी गाँड़ तो पहले से ही गीली है।

ममता झुककर कुत्ती बन गयी, और अपने बाल संवारते हुए, लण्ड को अपने प्यासे मुंह मे गले तक ले गयी। वो लण्ड चूसने की पुरानी उस्ताद थी। लंड उसे वाकई बहुत कड़क लग रहा था। उसने अपने जुबान का भरपूर उपयोग किया। उसके आंड़ को सहलाते हुए, वो चूसने में पूरी मगन थी। जय ने अपने एक पैर ममता की पीठ पर रखा था, और ममता के बाल सहलाते हुए उसको खूब गालियाँ दे रहा था। मादरचोद, मा की लौड़ी, भोंसड़ीवाली, चुद्दक्कड़ रांड, और भी कई अलंकारों से उसको नवाज़ा। ममता गालियां सुनके और जोश में आ जा रही थी और चूसने की गति बढ़ जाती है। थोड़ी देर बाद जय ने ममता के मुंह से लण्ड निकाल लिया। फिर ममता उसी तरह घोड़ी बनी हुई थी, वो जय की ओर बेसब्री, और कामुक अंदाज़ से उसको पीछे आती देख रही थी।
ममता- बेटा, इस रंडी की गाँड़ मारने के लिए तेल लगा लो। नहीं तो दुखेगा।
जय- तुम्हारी गाँड़ मादरजात, पहले से खुली हुई है हमारा थूक से ही गीला हो जाएगा। और ढेर सारा थूक गाँड़ की छेद पर मुंह से थूक दिया। ममता उसको अपने गाँड़ पर फैलाने लगी, फिर जय ने ममता की गाँड़ की छेद पर लण्ड टिकाया और पहले खूब रगड़ा लण्ड को उसकी भूरी सिंकुड़ी हुई छेद पर। ममता को ये एहसास हुआ और उसे लग गया, की उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा लण्ड उसकी गाँड़ में घुसने वाला है। वो वासना से ओत प्रोत थी। जय ने ममता के बाल को कसके पकड़ा, और लण्ड को दूसरे हाथ से गाँड़ में घुसाने लगा। लण्ड धीरे से गाँड़ की छेद की परिमिति को बढ़ाते हुए गाँड़ में प्रवेश करने लगा। जय धीरे से लण्ड घुसा रहा था। पर ममता की चीख अभी 1/3 सुपाड़ा घुसने समय ही निकलने लगी। जय डर गया और रुक गया, तब ममता पीछे मुरी, और हंसते हुए बोली," अरे, जान मजाक किया था, डालो ना।
 
जय ने उसके बाल को कसके खींचा, " साली देख अब तुम, कैसे तुम्हारी गाँड़ का गड्ढा बनाते हैं। इतना चोदूंगा की अपनी माँ को याद करोगी। बूझी तुम। रुक साली अभी बताते हैं, ये ले।
पूरा लण्ड एक साथ ममता की कसी हुई गाँड़ में उतर गया। ममता ने हालांकि गाँड़ बहुत मरवाई थी, पर इतना मोटा तगड़ा लौड़ा पहली बार ले रही थी। इसलिए उसकी चीख निकल गयी। वो लगभग रोते हुए बोली कि," जय आराम से तो डालते, कहीं गाँड़ फट जाती तो।
जय- तुमको अब पता चला, कैसा लगता है गाँड़ में लण्ड घुसता है तो। अब तो घुस गया, थोड़ी देर में गाँड़ उसको जगह दे देगी, और तुमको मज़ा आएगा।
ममता- अरे, हमारे सैयां बेटाजी, हम अपना सब तुमको दे चुके हैं और साथ में मज़ा लूटना है ना। आआहह ..... थोड़ा देर बस लण्ड को गाँड़ में स्थिर रखो, फिर खूब चोदना। तुम तो लण्ड ऐसे डाले हो कि, गाँड़ से लण्ड डालके मुंह से निकाल दोगे।
जय- ठीक है माँ, पर तुमने ही हमको उकसाया, एक तो तुम्हारी मस्त थुलथुली चूतड़ों को देखकर और दूसरी तुम्हारी गाँड़ की भूरी छेद।
कुछ देर ऐसे ही रहने के बाद, ममता ने कहा," हैं अब लगता है, की गाँड़ अभ्यस्त हो गयी है। अब चोदो अपनी माँ की गाँड़ को जितना जी चाहे। अब मज़ा आएगा बेटा सैयांजी।

जय ने ममता की गाँड़ की छेद जिसमें उसका लण्ड ऐसे फंसा था, जैसे गूँथे हुए आंटे में किसीने लकड़ी गाड़ दी हो, पर थूक दिया। गाँड़ की छेद के किनारे गहरे भूरे रंग के थे। जय ने अपनी उंगली से थूक को छेद के चारों ओर पोत दिया। फिर उसने लण्ड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा। लण्ड को उसने बमुश्किल आधा इंच ही अंदर बाहर कर रहा था। धीरे धीरे उसने अपनी रफ्तार बढ़ानी शुरू की। उसे अपने लण्ड पर गाँड़ का कसाव मूंग के हलवे की तरह लग रहा था। लण्ड का एहसास, ममता को भी बहुत आनन्ददायक लग रहा था। गाँड़ के अंदर जो नर्व एन्डिंग्स होती है, इसलिए गाँड़ की चुदाई का मज़ा डबल हो रहा था। जय गाँड़ मारने में मस्त, ममता गाँड़ मरवाने में मस्त थी। धीरे धीरे उनकी मस्ती, अब आक्रामक कामुक जोश में बदलने लगी। जय अब आधे से भी ज़्यादा लण्ड अंदर बाहर कर रहा था। ममता भी अपनी गाँड़ पीछे करके लण्ड लेने में कोई कोतुआहि नहीं बरत रही थी। जय एक हाथ से ममता के बाल खींच रहा था, और दूसरे हाथ से उसके चर्बीदार चूतड़ को मसल रहा था। अब पूरी तेज़ी से गाँड़ मराई चल रही थी। ममता की गाँड़ से कुछ ग्रीज़ की तरह तरल पदार्थ रिसने लगा, और जय के लण्ड पर चिपकने लगा। चुकी वो गाँड़ की छेद पहले भी मरवा चुकी थी तो, गाँड़ से बाहर चूने लगी। जय ये सब देख रहा था, उसने सोचा," क्यों ना अब ममता को उसकी गाँड़ से चूते इस रस को चटवाया जाए।
जय ने ये सोचकर कमर की हरकत रोक दी। फिर दोनों चूतड़ों को फैलाके अपने लण्ड को धीरे धीरे बाहर निकाला। गाँड़ की छेद उसके लण्ड की गोलाई इतनी चौड़ी हो चुकी थी, और लण्ड पर वो पदार्थ ढेर सारा चिपक गया था। गाँड़ के अंदर का हिस्सा गुलाबी रंग का साफ दिख रहा था। लण्ड बाहर निकलने की वजह से गाँड़ के अंदर का हिस्सा ममता की सांस के साथ, ऊपर नीचे हो रहा था। जय ने गाँड़ के अंदर ही थूक दिया। वो ये दृश्य देखकर जैसे मदहोश हो रहा था, तभी ममता ने टोका," क्या हुआ क्यों निकाल लिया लण्ड बाहर बेटा सैयांजी ?
जय ने उसकी ओर मुस्कुरा के देखा और बोला," इधर आओ और चूसो इस लण्ड पर लगे अपने गाँड़ की रस को।
ममता पीछे घूम गयी और लण्ड को जड़ से पकड़ लिया, फिर जय की आंखों में देखते हुए, अपनी जीभ बाहर निकाली और लण्ड के निचले हिस्से को चाटने लगी। फिर, सुपाड़े को चूसी, फिर लण्ड के दांये बांये और फिर लण्ड के ऊपरी हिस्से पर अपनी जुबान फिराने लगी। जय उसके बालों को संवारते हुए उसकी ओर प्यार से देख रहा था। ममता ने उसकी ओर देखा और कहा," हमारी गाँड़ मीठी है, बहुत बेटा सैयांजी। और मुस्कुराई।
जय- क्यों ना होगी, तुम हो ही स्वीट, अब पता चला हम गाँड़ क्यों चाट रहे थे।
ममता के मुंह मे लण्ड था, पर हंसी रुक नही पाई। "अब रोज़ चटवाऊंगी और चाटूंगी, लंड से चुदवाने के बाद। राजाजी, ये एक नई चीज पता चली हमको।"
फिर जय ने लण्ड को छुड़ा लिया और बोला, अभी पहले तुम्हारी गाँड़ की चुदाई अधूरी है। तुम अपने बुर को मसलती रहना, तब तुमको और मज़ा आएगा।
फिर जय ने ममता को पीठ के बल अपने सामने लिटा दिया। उसके बाल बिखरे हुए थे। होंठों पर लण्ड चूसने के बाद चमक थी। आंखों में कामुकता की प्यास। चूचियों तनकर पहाड़ सी लग रही थी। जय ने उसके गाँड़ के नीचे तकिया, लगा दिया। और फिर उसकी गाँड़ में लण्ड घुसा दिया। ममता अपनी बुर मसलने लगी और जय उसकी दोनों चूचियों को अपने पंजों की गिरफ्त में ले लिया। अब फिर से घमासान चुदाई शुरू होने वाली थी।
 
जय ने अब ममता की फिर से गाँड़ मारनी शुरू की।ममता की गाँड़ भी ढीली हो चुकी थी। अब लण्ड के आवागमन में कोई दिक्कत नहीं थी। वो गाँड़ मरवाते हुए अपने बुर के दाने को छेड़ रही थी। जय ने उसकी बुर पर थूक दिया तो ममता उसे पूरे बुर पर मलने लगी।
ममता- आआहह, ऐसे ही आआहह उफ़्फ़फ़ चोदो इसस... हमको। लण्ड चाहे बुर में घुसे या गाँड़ में लड़की मस्त हो ही जाती है।
जय- माँ देखो ना तुम्हारी गाँड़ कैसे लण्ड को अपने अंदर समा रही है।जैसे लण्ड का स्वागत कर रही है, की आओ और हमको फैला दो।
ममता- औरत की गाँड़ चुदने के लिए ही बनी है राजा, ये बात समझ लो। तो क्यों ना स्वागत करे वो। उस पर इतना मस्त लौड़ा, आआहह हहहहहह। चोदो अपनी माँ की गाँड़ को और अपने लण्ड की मोहर लगा दो। उफ़्फ़फ़
जय- तुम फिक्र मत करो माँ, तुम्हारी गाँड़ की तबियत से चुदाई होगी, कोई कमी नहीं रहने दूंगा। अपनी बीवी की हर ख्वाइश पूरी करेंगे। टुंगरी गाँड़ ने पहले से ही लण्ड को जकड़ रखा है, जैसे उसे अंदर खींच रही है, उफ़्फ़फ़। आह हहहहह, ओह्ह।
ममता- मूठ गिरने वाला है क्या, बेटा ?
जय- हाँ, पियोगी । आहहहहहह...
ममता - अंदर ही गिरा दो। हमारा भी होने वाला है।
जय- ठीक है, ये लो।
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद जय ने मूठ अपनी माँ की गाँड़ में निकाल दिया। करीब 5-7 पिचकारी मारते हुए जय चीखता हुआ, ममता के चूचियों पर सर रखकर लेट गया। उधर बुर के मसलने और गाँड़ में मूठ की धाराओं को महसूस करके, ममता भी झड़ गयी। और दोनों उसी तरह लेटे रहे। थोड़ी देर बाद जय का लण्ड धीरे से निकलने लगा, तो ममता ने अपनी गाँड़ में पास परी अपनी पैंटी घुसा ली। और फिर जय को गले से चिपका लिया।
जय जैसे बेहोश था। दोनों चुदाई से थक चुके थे। इसलिए दोनों को नींद ने अपने आगोश में ले लिया।
उधर कंचन को होश आया। उसने अपनी गीली पैंटी उतारी और ब्रा भी। पूर्ण नग्न होने से वो तराशी हुई मूर्ति लग रही थी। अनछुए कोमल यौवनांग किसी मर्द के एहसास के लिए तड़प रहे थे। वो इससे बेखबर थी कि कोई मर्द उसे इस हालात में देख ले तो उसे लड़की से औरत बना देगा। उसकी उम्र शादी के बराबर की हो भी तो चुकी थी। जो वो कहानी पढ़ रही थी, उसे ख्याल आया कि कोई उसका भी ऐसा ही भाई होता, जिसके साथ वो जवानी के मज़े लूटती। वो इस बात से बेखबर थी कि किस्मत ने उसके तार उसके भाई से ही जोड़े हुए हैं, पर उसमें शायद अभी देर थी। क्योंकि अभी तो उसकी माँ ही उसके भाई के साथ अपनी बची खुची जवानी के मज़े ले रही थी।
 
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