कविता- झूठे ! हमारी माँ को चोदके मज़े ले रहे हो आप पापा।
जय हंसते हुए- अरे सच में।
कविता- हमको आपकी बहुत याद आती है। आप जल्दी से माँ को हमारे आपके रिश्ते के बारे में बताये ताकि कोई प्रॉब्लम ना हो।
जय- हम पूरी कोशिश करेंगे....
तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और ममता अंदर आयी। जय ने संभालते हुए कहा," हाँ पूरी कोशिश करेंगे कि परसों की ट्रेन पकड़ ले। दीदी माँ से बात करो।
जय ममता को फोन देते हुए बोला, ममता ने हाल चाल पूछा थोड़ी बात की और फ़ोन रख दिया।
ममता टॉवल लपेटने लगी तो जय ने वो टॉवल खींचकर फेंक दिया और बोला," इस कमरे में ना हम और ना तुम दोनों कपड़े नहीं पहनेंगे। आजसे दो दिन तक यानी परसों तक हम कमरे में रहेंगे और कहीं नहीं जाएंगे। सिर्फ चुदाई करेंगे और कुछ नहीं।" जय ममता को अपनी ओर खींच लिया जो पहले से नंगा था। उसको कमर से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से ममता के हाथों में झुमके रख दिये जो उसने मार्केट से खरीदे थे। और बोला," तुम गहने और मेक अप के अलावे और कुछ नहीं पहन सकती।" ममता मुस्कुराई और बोली ठीक है, पर आप ही ये पहना दीजिए ना।" जय ने ममता के कानों में वो पहना दिया। जय- हम जानते हैं कि अभी कुछ भी नहीं हैं पर दिल्ली में तुमको गहनों से लाद देंगे।"
ममता- खाना लगाते हैं, आपको भूख लगी होगी। आप बैठिए।
जय- ठीक है।
ममता नंगी ही थिरकते चूतड़ों के साथ, खाना लगाने चली गयी। ममता ने जय को खाना लाकर दिया। जय - ये तो बहुत ज्यादा है। इतना कौन खायेगा?
ममता- आप जो खाएंगे खाइये बाकी हम कहा लेंगे।
जय ने ममता को अपनी गोद मे बिठा लिया और बोला," तुम ही हमे खाना खिलाओगी।
ममता ने उसे खिलाना शुरू किया। बचपन में ममता उसे एक बच्चे की तरह खिलाती थी, टैब भी वो नंगा होता था उसकी गोद में, पर आज उसे अपने पति की तरह खिला रही थी, खुद नंगी होकर उसकी गोद में बैठकर।
जय हंसते हुए- अरे सच में।
कविता- हमको आपकी बहुत याद आती है। आप जल्दी से माँ को हमारे आपके रिश्ते के बारे में बताये ताकि कोई प्रॉब्लम ना हो।
जय- हम पूरी कोशिश करेंगे....
तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और ममता अंदर आयी। जय ने संभालते हुए कहा," हाँ पूरी कोशिश करेंगे कि परसों की ट्रेन पकड़ ले। दीदी माँ से बात करो।
जय ममता को फोन देते हुए बोला, ममता ने हाल चाल पूछा थोड़ी बात की और फ़ोन रख दिया।
ममता टॉवल लपेटने लगी तो जय ने वो टॉवल खींचकर फेंक दिया और बोला," इस कमरे में ना हम और ना तुम दोनों कपड़े नहीं पहनेंगे। आजसे दो दिन तक यानी परसों तक हम कमरे में रहेंगे और कहीं नहीं जाएंगे। सिर्फ चुदाई करेंगे और कुछ नहीं।" जय ममता को अपनी ओर खींच लिया जो पहले से नंगा था। उसको कमर से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से ममता के हाथों में झुमके रख दिये जो उसने मार्केट से खरीदे थे। और बोला," तुम गहने और मेक अप के अलावे और कुछ नहीं पहन सकती।" ममता मुस्कुराई और बोली ठीक है, पर आप ही ये पहना दीजिए ना।" जय ने ममता के कानों में वो पहना दिया। जय- हम जानते हैं कि अभी कुछ भी नहीं हैं पर दिल्ली में तुमको गहनों से लाद देंगे।"
ममता- खाना लगाते हैं, आपको भूख लगी होगी। आप बैठिए।
जय- ठीक है।
ममता नंगी ही थिरकते चूतड़ों के साथ, खाना लगाने चली गयी। ममता ने जय को खाना लाकर दिया। जय - ये तो बहुत ज्यादा है। इतना कौन खायेगा?
ममता- आप जो खाएंगे खाइये बाकी हम कहा लेंगे।
जय ने ममता को अपनी गोद मे बिठा लिया और बोला," तुम ही हमे खाना खिलाओगी।
ममता ने उसे खिलाना शुरू किया। बचपन में ममता उसे एक बच्चे की तरह खिलाती थी, टैब भी वो नंगा होता था उसकी गोद में, पर आज उसे अपने पति की तरह खिला रही थी, खुद नंगी होकर उसकी गोद में बैठकर।