"ममता तुमने ठीक समझा। ये जय का बच्चा है, जो तुम्हारे पेट मे होगा। तुम दोनों के प्यार की निशानी। जय तुमको बहुत जल्दी फिर से माँ बना देगा, पर इस बार अपनी नहीं, बल्कि अपने बच्चे की। तुम भी तो यही चाहती हो। लेकिन इसके लिए तुमको कविता को समझाना होगा। और अगर तुम उनके रिश्ते को स्वीकार लोगों, तो फिर कविता इन दिनों में बहुत खयाल भी रखेगी। ये बच्चा तुम तीनों के रिश्ते के लिए अहम होगा। तुमने अगर ज़्यादा वक़्त लगाया तो, शायद तुम माँ ना बन पाओ। क्योंकि तुम्हारी उम्र भी ढल रही है। तुम चाहो तो, इसको इस साल हक़ीक़त में बदल सकती हो।"
ममता- पर.....
" पर वर क्या? तुम खुद सोचो कि इससे हसीन मौका अब नही आएगा। हा... हा.. हा"
और वो गायब हो गयी। ममता सोच में पड़ गयी।
" आखिर अगर बच्चे खुश हैं, तो इसीमें हम भी खुश हैं। वो दोनों हमेशा हमारे पास ही रहेंगे। अगर कविता की शादी दूसरे से हो जाएगी, और हम जय के साथ रहेंगे शुरू में तो ठीक रहेगा। पर हमारे मरने के बाद जय अकेला हो जाएगा। हम अपना सुख तो भोग लेंगे, पर जय की जवानी की प्यास अधूरी रह जायेगी। उधर कविता की भी चिंता लगी रहेगी। ये ठीक रहेगा अगर कविता जय की बीवी बैंकर इसी घर मे रहे, वो उसका खूब ख्याल रखेगी। दोनों के बीच प्यार भी गहरा है। हम माँ होकर उन दोनों के बीच की दीवार नहीं बन सकते। उन दोनों नहीं हजम तीनों को एक होकर इस घर में रहना होगा।"
ये सोच ममता की नज़र घड़ी पर गयी, इस वक़्त शाम के सात बजे रहे थे। वो करीब 6 घंटो से सो रही थी। तभी उसको बुर से कुछ रिसता हुआ प्रतीत हुआ। उसने छुवा तो देखा कि खून लगा था। उसकी माहवारी शुरू हो गयी थी। वो बाथरूम गयी, और पैंटी बदली। फिर पैड लगाया और साफ सुथरी पैंटी पहन ली। मन मे खुश थी कि उसकी माहवारी चल रही है, क्योंकि बहुत जल्द नौ महीनों के लिए बंद हो जाएगी।
वो बेधड़क जय के कमरे की ओर बढ़ रही थी।
जय और कविता कमरे में बैठे एक दूसरे से बातें कर रहे थे। कविता बोल रही थी," तुम बहुत भाग्यशाली हो जो ममता दीदी का प्यार तुमको मिला। वो तुम्हारा बहुत ध्यान रखेगी। ऐसी औरतें बहुत कम होती हैं।"
ममता घुसते ही बोली," तुम्हारे जैसी लड़की भी तो कम होती हैं, जो अपने होने वाले पति को एक अधेड़ महिला के साथ बाटने को तैयार हो। आजकल ऐसी लड़कियां कहाँ करती है!
जय और कविता खड़े हो गए," माँ आओ ना। बैठो।"
ममता कविता के गाल पर हाथ फेरती हुई बोलती है," अरे हमारी बच्ची, हमारा बात का बुरा मत मानना। हमने जो कहा था, गुस्से में। तुम दोनों अगर आपस में खुश हो तो एक माँ होने के नाते उसी में हमारी भी खुशी है।"
और आप जय साहब हम दोनों को संभाल लेंगे ना। दो बीवी में परेशान तो नहीं होंगे।"
कविता- मतलब?
जय- ममता मान गयी है, कविता। याहू........ चाहे कोई मुझे जंगली कहे, केहनो दो जी कहता रहे...
ममता और कविता- हम प्यार के तूफानों में घिरे हैं हम क्या करें। जय ने दोनों माँ बेटी को दांये बाएं गले से लगा लिया। तीनों फिर ज़ोर से बोले," याहू......"
तीनो खूब हँस रहे थे। जय के एक बगल उसकी माँ और दूसरी तरफ उसकी दीदी थी, जो कि अब उसकी प्रेमिकाएं बन चुकी थी।
ममता- पर.....
" पर वर क्या? तुम खुद सोचो कि इससे हसीन मौका अब नही आएगा। हा... हा.. हा"
और वो गायब हो गयी। ममता सोच में पड़ गयी।
" आखिर अगर बच्चे खुश हैं, तो इसीमें हम भी खुश हैं। वो दोनों हमेशा हमारे पास ही रहेंगे। अगर कविता की शादी दूसरे से हो जाएगी, और हम जय के साथ रहेंगे शुरू में तो ठीक रहेगा। पर हमारे मरने के बाद जय अकेला हो जाएगा। हम अपना सुख तो भोग लेंगे, पर जय की जवानी की प्यास अधूरी रह जायेगी। उधर कविता की भी चिंता लगी रहेगी। ये ठीक रहेगा अगर कविता जय की बीवी बैंकर इसी घर मे रहे, वो उसका खूब ख्याल रखेगी। दोनों के बीच प्यार भी गहरा है। हम माँ होकर उन दोनों के बीच की दीवार नहीं बन सकते। उन दोनों नहीं हजम तीनों को एक होकर इस घर में रहना होगा।"
ये सोच ममता की नज़र घड़ी पर गयी, इस वक़्त शाम के सात बजे रहे थे। वो करीब 6 घंटो से सो रही थी। तभी उसको बुर से कुछ रिसता हुआ प्रतीत हुआ। उसने छुवा तो देखा कि खून लगा था। उसकी माहवारी शुरू हो गयी थी। वो बाथरूम गयी, और पैंटी बदली। फिर पैड लगाया और साफ सुथरी पैंटी पहन ली। मन मे खुश थी कि उसकी माहवारी चल रही है, क्योंकि बहुत जल्द नौ महीनों के लिए बंद हो जाएगी।
वो बेधड़क जय के कमरे की ओर बढ़ रही थी।
जय और कविता कमरे में बैठे एक दूसरे से बातें कर रहे थे। कविता बोल रही थी," तुम बहुत भाग्यशाली हो जो ममता दीदी का प्यार तुमको मिला। वो तुम्हारा बहुत ध्यान रखेगी। ऐसी औरतें बहुत कम होती हैं।"
ममता घुसते ही बोली," तुम्हारे जैसी लड़की भी तो कम होती हैं, जो अपने होने वाले पति को एक अधेड़ महिला के साथ बाटने को तैयार हो। आजकल ऐसी लड़कियां कहाँ करती है!
जय और कविता खड़े हो गए," माँ आओ ना। बैठो।"
ममता कविता के गाल पर हाथ फेरती हुई बोलती है," अरे हमारी बच्ची, हमारा बात का बुरा मत मानना। हमने जो कहा था, गुस्से में। तुम दोनों अगर आपस में खुश हो तो एक माँ होने के नाते उसी में हमारी भी खुशी है।"
और आप जय साहब हम दोनों को संभाल लेंगे ना। दो बीवी में परेशान तो नहीं होंगे।"
कविता- मतलब?
जय- ममता मान गयी है, कविता। याहू........ चाहे कोई मुझे जंगली कहे, केहनो दो जी कहता रहे...
ममता और कविता- हम प्यार के तूफानों में घिरे हैं हम क्या करें। जय ने दोनों माँ बेटी को दांये बाएं गले से लगा लिया। तीनों फिर ज़ोर से बोले," याहू......"
तीनो खूब हँस रहे थे। जय के एक बगल उसकी माँ और दूसरी तरफ उसकी दीदी थी, जो कि अब उसकी प्रेमिकाएं बन चुकी थी।