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Incest क्या ये गलत है ? (completed)

ममता को कुछ अजीब सा लगा। शायद माया और शशि के बीच मे कुछ झगड़ा हुआ है। ममता ने माया को पूछा," क्या बात है माया, देवरजी से झगड़ा हुआ है क्या? वो इतने उखड़ क्यों गए?
माया- नहीं, दीदी कुछ नहीं हुआ है। सब ठीक है। तुम तो जानती हो इनको कभी कभी अचानक से खिसिया जाते हैं।
ममता अपनी कच्छी और ब्रा पहने बिना, साया ( पेटीकोट) को बांध ली और ब्लाउज पहनते हुए बोली- नहीं कुछ तो बात हुई है, सच बताओ ना। फिर उसके करीब आयी तो देखा कि माया के गाल पर थप्पड़ के निशान थे। उसके मुंह से अनायास ही अचंभे से निकला," ये क्या हुआ है, मारा देवरजी ने तुझे?

माया- छोड़ो ना दीदी, पति पत्नी के बीच ये सब तो होता रहता है ना। पति हैं, हमको दो थप्पड़ मारा तो क्या हो गया। कुछ नहीं आओ, हम खाना लगाते हैं।
ममता- नहीं, देवरजी तो ऐसे नहीं हैं। वो तो काफी शांत स्वभाव के हैं। क्या बात हुई है बताओ? तुम नहीं बताओगी तो हम देवरजी से पूछेंगे।
माया की आंखों में आंसू आ गए थे। वो अपने आँचल से जब तक उसे पोछती तब तक ममता ने उसे गले लगा लिया," चुप हो जा, माया चुप ऐसे क्यों रो रही है। हम हैं ना तेरी दीदी। बता क्या बात हुई है।
माया ने बोलना शुरू किया," वो.....वो...सिसक...वो कल ऐसा हुआ कि, हमको पता चला कि इन्होंने, .....
कंचन की आवाज़ गूँजी, वो अपने सहेलियों के साथ घर के पीछे वाली गली से आ रही थी। माया चुप हो गयी। उसने अपने आंशु पोछे और बोली," दीदी कंचन आ गयी, हम बाद में बताते हैं।
कंचन की सहेलियां उसे घर के सामने छोड़कर चली गयी। कंचन आयी उसे पता नहीं था कि उसकी मौसी जो असल मे उसकी माँ थी आयी है और अपने कमरे में चली गयी। माया और ममता दोनों कमरे से बाहर निकलकर रसोई में चली गयी। ममता ने अपनी साड़ी पहन ली, कमरे से जब वो बाहर निकली तो उसे देखके कोई नहीं कह सकता था कि अभी अभी इसकी गाँड़ चुदाई हुई है। वो बिल्कुल शरीफ परिवार की महिला लग रही थी।

वहां से करीब 1000 कि मी दूर दिल्ली में कविता और जय एक दूसरे में खोए हुए थे। कविता जय की बाहों में बैठी थी, जय उसके गर्दन पर किस कर रहा था। जिससे कविता को गुदगुदी हो रही थी, वो बीच बीच मे खिलखिला कर हंस रही थी। कविता ने डीडी को संभाल के रख दिया था। जय- दीदी आज तो खूब मजा करेंगे। एक ही झटके में सारी गरीबी दूर हो गयी। अब देखना की हम तुमको कितना खुश रखेंगे। तुमको और माँ को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे। अब हमलोगों की सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।
कविता हंसकर बोली," हाँ, जय अब तो तुम करोड़पति हो गए। ये तो हमारे बाबूजी की देन है। आज हमको खुशी मिली उस कुत्ते शशिकांत ने जिसने हमे घर से बेघर कर दिया था, अब उसको पता चलायेंगे। वो दिन हम भूल नही सकते हैं, जब उसने हमको बाहर निकाल दिया था। हम चाहते हैं कि अब तुम उसका बदला लो। पर माँ अभी भी गाँव जाती रहती है, पता नहीं क्यों, कुछ समझ नहीं आता।
 
दोस्तों यहां से 2 महिला पात्र इस कहानी में बढ़ रहे हैं।
. माया उम्र 43 साल
बिल्कुल अपनी बड़ी बहन ममता की तरह ही शरीर से धनी है।
36 की चुच्चियाँ और 38 की गाँड़।
अपनी कामुकता को हरदम छुपाये रखती है। ये उसी स्कूल में शिक्षक है जिसमे अमरकांत पढाते थे।

दूसरी कंचन- उम्र 23 साल

अभी तक ग्रेजुएशन नहीं की है। बस अपनी सहेलियों संग खेलती रहती है। भगवान ने उसे 32 की चुच्चियाँ और 28 की कमर, साथ मे 36 की गाँड़ से नवाजा है। दिखने में बिल्कुल कविता के जैसी है, बस ऊंचाई में उससे लंबी है। उसकी आंखें बिल्कुल सहालग थी। होंठ एक दम पतले थे।

माया जब अंदर घुसी, तो सामने ममता नग्नावस्था में खड़ी मुस्कुरा रही थी। ममता इस वक़्त काम की देवी लग रही थी। चुदने के बाद उसके बाल बिखरे हुए थे, जो लहराते हुए उसकी मस्ती भरी चुदाई की कहानी कह रहे थे। उसके चेहरे पर चुुुदने की थकान के साथ खुशी भी मिली हुई थी। आंखों में एक अजीब सी नशीली लहर दौड़ रही थी। गालों पर शशिकांत के काटने के निशान थे, आंखों का काजल उसके गालों पर बिखर चुका था। होंठों से लिपस्टिक पूरी तरह गायब हो चुका था। चूसे जाने की वजह से हल्के सूज चुके थे। बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था। उसकी 60 किलो वजनी शरीर मे कमर, जांघें, बाहें, टांगों, चूतड़ों पर अच्छी खासी चर्बी जमा थी, पर वो उसे बदसूरत या बेढंगा बनाने की बजाए उसको एक बेहद खूबसूरत सेक्सी देसी बिहारी औरत बना रही थी। उसने आभूषण के नाम पर दोनों कानों में छोटी बाली पहन रखी थी।
माया- दीदी कुछ देर रुक तो जाती, आते ही शुरू कर दी देवर के साथ मस्ती।
ममता- क्या करें, जब साल भर लौड़ा नहीं मिलता, तो समझ नहीं आता माया की क्या सही समय है। तुमको क्या है, देवरजी तो यहीं रहते हैं, खूब चुदवाती होगी। जब तुमको नही मिलेगा तो, पता चलेगा।
माया- हमको तो तुमको देखके तुम्हारी चुदने की प्यास साफ दिख रही है। शुरू की मजबूरी में, अब पूरा मज़ा ले रही हो।
ममता- तुम भी आओ ना, देवरजी के साथ तीनों मस्ती करेंगे। बड़ा मजा आएगा। हम जब साथ रहते थे, तो कई बार कितनी मस्ती की हुई है।
माया- दीदी, अभी नही कंचन आ गयी तो, छी छी क्या सोचेगी।
ममता- शर्मा क्यों रही हो बेकार में, तेरी दीदी नंगी खड़ी है कि नहीं तेरे सामने। चल आना।
माया- दीदी तुम भी ना, बस..........
शशि- ममता भौजी रहने दो उ नहीं आना चाहती तो, वैसे भी हमको अब निकलना है। कुछ काम से पटना जाना है।
ममता- आपको क्या हुआ? बोले थे ना कि आज का पूरा दिन हमलोग साथ रहेंगे।
शशि- हाँ, पर कुच्छो जरूरी काम आ गया है। परसों से छुट्टी हो जाएगी ना।
माया- कहां जा रहे हैं, सुबह भी बिना खाये निकल गए थे। कुछ खा लीजिये। खाना बन गया होगा। हम खाना निकालके लाते हैं।
शशि- हमको नहीं खाना है। तुम दोनों बहन खाओ, हम शाम तक आएंगे।
अपने कुर्ते के बटन लगाते हुए बोला। उसने उठके घड़ी बांधी, चश्मा लगाया। और ममता की साड़ी फर्श से उठाके उसके नंगे शरीर को ढक दिया। शशि घर के बाहर लगी रॉयल एनफील्ड को लेके निकल गया।
 
ममता- हाँ देवरजी, हम दोनों बहनें एक ही ससुराल में आकर खुश थी। माया ने हमारी शादी के बाद आपके भैया को भुला दिया था। और आपको अपना जीवनसाथी बनाया।
शशि- पर हमको नहीं लगता कि वो आज भी हमको चाहती है। और बाद में जो कुछ भी हुआ उसके बाद तो घर का माहौल ही बदल गया था।
ममता- हाँ, ठीक कहा आपने। ससुरजी चल बसे और अकेली सासु माँ बची थी। तीन साल हो चुके थे, हमारी शादी को पर बच्चा नहीं हो पा रहा था।
सासु माँ दिन रात हमको ताने मारती थी। एक दिन जब कोई नहीं था, तब हम फूट फूटकर रो रहे थे, की माया स्कूल से आई। उसने हमसे पूरी बात पूछी। हम सब बता दिए कि, उसके जीजाजी और आपके भैया का मूठ बहुत कम निकलता है, जिससे हमको बच्चा नहीं हो रहा था। माया हमारे दर्द को समझी और आपके भैया को बुलाकर सारी बातें पूछी। उन्होंने शर्म से कबूल किया पर अपनी माँ को नहीं बता पा रहे थे। माया ने डॉक्टर की रिपोर्ट भी पढ़ी थी।
तब आप पटना गए हुए थे, सासु माँ को लेके डॉक्टर से दिखाने।
हम और माया बहुत सोच रहे थे, की क्या किया जाए?

जब आप वापिस आये अगले दिन, तो माया और हमने ये बात आपकी माँ को बता दी। सासु माँ गंभीर हो गयी। पर उन्होंने रात को सबको बुलाया।
शशि- उस रात माँ के साथ हम और भैया के अलावे तुम दोनों बहनें भी थी। माँ ने बहुत ही गंभीर फैसला सुनाया था, जिससे तुम्हारे और हमारे रिश्ते की शुरुवात हुई। माँ ने ये बात घर के बाहर जाने नहीं देने का हम सबसे वचन लिया। फिर, माया और भैया की सहमति से, तुमको हमारे साथ सोने के लिए कहा। तुम्हारा सारा सामान भैया के कमरे से हमारे और माया के कमरे में लाया गया। माया शुरू में थोड़ा नाराज़ हुई, पर समझ गयी थी। वो भी नही चाहती थी, की अमर भैया की इज़्ज़त बाहर उछले, आखिर कभी प्यार किया था उसको। फिर हमको तुम दोनों बहन मिल गयी थी। बाद में तुमने हमारे बच्चों को जन्म दिया। माया ने कभी माँ ना बनने का फैसला किया। और उसने तुमसे तुम्हारी दूसरी बेटी, कंचन को मांगकर अपनी बेटी की तरह पाला।
ममता- वो आपको बहुत प्यार करती है। पर आपने हमे ऐसे घर से निकाला, वो समझ नहीं आया।
शशि- लोगों को शक था कि कविता और जय मेरे बच्चे हैं, उन्हें और तुमको निकालके सबका शक दूर किया। पर तुम्हे अपने पास बुलाते रहते है ना।
पिछली बार तुम बाबूजी के नाम जो मंदिर बनवाये हैं, उस बहाने से आई थी।
ममता- हाँ, उसके बाद तो आपके कमरे में हम दोनों बहनें रहने लगी, वापिस ही नही गयी। हम दोनों बहनों को पहले दियादनी, फिर सौतन बना दिया। ममता हंसकर बोली।
शशि- हमपर तो क्या गुजरी है क्या बताएं, दो जिगड़ के टुकड़े ले गयी हो। उनदोनों की तस्वीर लायी हो भौजी।
ममता- हाँ, लायी हूँ।
तभी बाहर से माया की आवाज़ गूँजी- दीदी, आते ही शुरू हो गयी क्या? दरवाज़ा खोलो। ममता ने नंगी ही दरवाज़ा उठके खोला, और माया को अंदर खींच ली। दरवाज़ा बंद कर दिया।
 
अनुभवी ममता का दर्द भी जल्दी ही मस्ती में बदलने लगा। देखते देखते उसकी गाँड़ शशि के लण्ड को अपनी मांसल गहराइयों में उतार चुकी थी। उसके लण्ड के चारों ओर ममता के गाँड़ की ऐसी घेराबंदी थी कि हल्की सी भी जगह नही बची थी, लण्ड और गाँड़ की छेद की गोलाई के बीच। गाँड़ की सिकुरन सीधी हो गयी थी।

शशि कुछ देर तक लण्ड को बस घुसाके छोड़ दिया था। ममता अब पूरी मस्ती में आ चुकी थी, वो धीरे धीरे कमर हिला रही थी। शशि ने ममता को देखा तो जैसे वो अपनी आंखों से धक्कों की भीख मांग रही थी। शशि ने धीरे धीरे से धक्का मारना शुरू किया, और फिर स्पीड बढ़ाने लगा। ममता को हल्का दर्द हुआ पर कब वो दर्द मस्ती में बदल गया उसे पता ही नहीं चला। अब शशि उसे बहुत बुरी तरह चोद रहा था। कमरे में ममता की सिसकारियां और आँहें गूंज रही थी। शशि गाँड़ मारते हुए उसके चुतरो पर थप्पड़ भी लगा रहा था। ममता - आह ओह्ह, ऊउईईई हहम्मम्म बस ऐसी ही आवाज़ें निकाल रही थी। शशि भी आआहह, उफ़्फ़फ़फ़फ़फ़ कर रहा था। इसी तरह ये चुदाई कुछ 15 मिनट चली, फिर शशि ने ममता की गाँड़ में ही अपना मूठ निकाल दिया। अपनी गाँड़ में गरम लावा महसूस करके ममता की बुर ने भी पानी छोड़ दिया। ममता अपनी चुदी हुई गाँड़ से शशि के लण्ड का पानी निकलता महसूस कर रही थी। उसकी गाँड़ की छेद इस वक़्त कोई दो से ढाई इंच चौड़ी दिख रही थी। वो पूरी तरह फैलकर ढीली हो गयी थी। पर थोड़ी देर में फिर पुरानी स्थिति में आ गयी। शशि ममता के ऊपर लेटा था, और ममता पीठ के बल लेटी हुई थी।
ममता- ले लिए ना भौजी की गाँड़?
शशि- हाँ, भौजी बहुत मज़ा आया।
ममता- क्यों, माया नहीं देती है क्या?
शशि- जो मज़ा तुममें है वो तुम्हरि बहन माया में नहीं है। उसने तो कभी हमको प्यार ही नहीं दिया। ये तो तुमको भी पता है, भौजी।
ममता उसके गाल को सहलाते हुए बोली- हाँ, याद है आज भी हमको, आपके भैया माया के स्कूल में ही थे। और वो दोनों एक दूसरे को चाहते थे। उन्होंने ससुरजी को उसका हाथ मांगने भेजा था, पर बाबूजी ने कहा कि पहले बड़ी बेटी की शादी करेंगे तब ही छोटी बेटी की। आपके बाबूजी को हम ज़्यादा पसंद आये। उन्होंने हमारी और आपके भैया का ब्याह तय कर दिया, उनकी हिम्मत नहीं थी ससुरजी के खिलाफ जाने की। आप भी तो आये थे, हमको देखने। पर ब्याह के बाद हमको पता चला कि आप हमको पसंद करते थे। ब्याह करके आये तब आपके भैया हमसे दूर ही रहते थे। बाद में उनके दूर रहने का कारण समझ मे आया था।
शशि- ढाई साल बाद में बाबूजी और तुम्हारे पिताजी ने माया और हमारा ब्याह कर दिया, क्योंकि हम तो तभी बस लफुवागिरी करते थे, पढ़ते कहा थे। कॉलेज भी महीने में एक बार जाते थे। बाबूजी ने सोचा कि माया टीचर है ही तो घर मे आमदनी आती रहेगी। माया हमारी बीवी बनके आ गयी। तुम दोनों बहन एक ही घर मे बहु बनके आ गयी।
 
दूसरी तरफ मिठनपुरा में शशिकांत के घर पर बाहर से सब शांत था। पर शशिकांत के कमरे के बाहर बन्द दरवाज़े के बावजूद किसी औरत की चुदाई के कारण सिसकियां की आवाज़ निकल रही थी। कमरे के अंदर हल्का अंधेरा था, खिड़कियां बंद होने के बावजूद। कमरे की फर्श पर साड़ी साया ब्लाउज ब्रा पैंटी, पायजामा कुर्ता बिखरे हुए थे। बिस्तर पर शशिकांत लेटा हुआ था और उसके लण्ड पर कोई महिला बैठके उछल रही थी। वो अपने हाथ अपने सर के पीछे रखके अपनी लंबी काली जुल्फ़े उठाती है। वो कोई और नहीं ममता थी।

ममता-आआहहहहहह क्या मस्त हो रहे हैं हम। ऊफ़्फ़फ़फ़ आज तो दिनभर पेलवाएंगे। इतने दिन बाद मौका मिला है, लण्ड का स्वाद चखने का। हमने मज़बूरी में ये रिश्ता जोरा था, पर अब तो इसमें बहुत मज़ा आता है। देवरजी, हमको अपने पास ही रख लो ना। आपकी दासी बनके रहेंगे।
आआहह चोदिये अपनी भाभी को । ऊऊईईईईईईईई..... ऊफ़्फ़फ़फ़
शशि- अरे हम तो तुमको अपने पास ही रखना चाहते हैं। पर हमारी मज़बूरी तुमको पता ही है भौजी। तुम्हरे जैसी औरत को कौन नही रखना चाहेगा। तुम जिस दिन से ब्याहके ई घर में आई हो ना, तभे से तुमको चोदना चाहते थे।
शशि ने ममता को पकड़के बिस्तर पर पटक दिया, और खुद उसके ऊपर चढ़ गया। शशि का शरीर अब हल्का थुलथुला हो चुका था, पर बाहें अभी भी मजबूत थी। उसके नीचे वो पूरी दब गई।
शशि- आज भी तुम उतने खूबसूरत हो जितनी, पहले दिन भैय्या के साथे ब्याह करके आयी थी।
ममता- सच बोल रहे हो देवरजी।
शशि- और नहीं तो का? अपनी बच्ची के कसम खाते हैं। भौजी आज गाँड़ मरवाओगी?
ममता हँसके - उम्म देवरजी, क्यों नहीं।
ममता ने पूछा- कैसे मारोगे? खड़े होके या लेटकर ?
शशि बगल से सरसों तेल की शीशी लेते हुए बोला- तुम कुत्ती बन जाओ।
ममता उठके कुत्ती बन गयी और अपनी पीठ झुकाके गाँड़ बाहर निकाल ली।
शशि ने पहले उसकी गाँड़ की भूरी सिंकुड़ी छेद पर थूका और फिर ढेर सारा सरसों तेल मल दिया। ममता मस्ती में तेल मलवा रही थी। फिर शशि ने एक उंगली ममता की गाँड़ में डाली, उसके मुंह से ऊऊ............ निकल गया। ममता अपने होंठ दांतो से दबाए पीछे मुड़के शशि को कामुक दृष्टि से देख रही थी। शशि ने फिर दूसरी उंगली और धीरे से तीसरी उंगली घुसा दी। ममता पहले भी गाँड़ मरवा चुकी थी,इसलिए उसकी गाँड़ के अंदर का हल्का गुलाबी मांस दिखने लगा।
शशि ने फिर उंगलियां उसकी गाँड़ में आगे पीछे की, ममता बस आहें भर एहि थी। फिर जब उसने देखा कि गाँड़ लण्ड लेने लायक हो चुकी है। तब उसने अपने लण्ड पर तेल लगाया, जो कि पहले से ही ममता की बुर के रस की वजह से चिकना हो चुका था। उसने ममता को संभलने का मौका ही नही दिया और उसके गाँड़ के छेद पर लण्ड सटाकर घुसाने लगा। ममता हाँलाकि, इस अनुभव से परिचित थी, पर फिर भी लण्ड का सुपाड़ा घुसने से चिहुंक उठी। आआआआ ..... ऊउईईईईईईई दददेवववरररजीजीजी......
शशि ने उसकी परवाह किये बिना अपना प्रयास चालू रखा। ममता की कमर पकड़के लण्ड को धीरे धीरे उसकी गाँड़ में पूरा उतार दिया।
 
जय और कविता एक दूसरे की आंखों में खो जाते हैं, और दोनों के होंठ एक दूसरे को चुम्बक की तरह पकड़ लेते हैं। कविता उसे बहुत पैशनेटली चूम रही थी, कभी अपनी जीभ उसके मुंह मे घुसा देती, तो कभी जीभ से उसके होंठ चाटने लगती। फिर होंठों को होंठों से खूब रगड़ती, और चुसने लगती। जय इस चुम्मे का आनंद प्राप्त करते हुए उसकी गाँड़ को टटोल रहा था। कभी उसके चूतड़ों को सहलाता तो कभी उसपर हल्के चपत लगाता। दोनों ऐसे करीब 5 मिनट तक चूम रहे थे, की तभी जय के मोबाइल की घंटी बजी। कविता ने चुम्बन तोड़ा और फोन उठाके जय को दी। जय ने देखा वो उसकी माँ का फोन था। जय ने कविता को मोबाइल दिखाके बोला, " माँ का फोन है।"

कविता उसके ऊपर से उठना चाही, पर जय ने उसे कमर से जकड़ रखा था।
कविता लाज से बोली," भाई प्लीज उठने दो ना।"
जय- क्यों माँ तुमको देखेगी थोड़े ही। और मोबाइल स्पीकर पर लगाके फोन उठाके बोला- माँ, प्रणाम।
दूसरी तरफ से ममता की आवाज़ आयी- कैसे हो बेटा, ठीक हो ना? हम यहां सुबह 6 बजे पहुंच गए थे।
जय- अच्छे हैं, मिठनपुरा पहुंच गई?
ममता- हाँ, पहुंच गए वहीं से बोल रहे हैं। कविता कहां है?
जय- यही है, हमारे ऊपर.....कहके उसने जीभ बाहर निकाली और कविता को देखने लगा जैसे गलती हो गयी हो।
ममता- क्या मतलब?
जय- हमारे रूम के ऊपर जो छत है ना उसपर गयी है, कपड़े डालने।
ममता- अच्छा अच्छा ठीक है हम रखते हैं, यहां नेटवर्क ठीक नहीं है।
जय- ठीक है माँ, प्रणाम। उसके ये बोलने से पहले ही फोन काट चुका था।
कविता उसे देखकर हसने लगी। अभी फंस गए थे ना, हम्मम्म बोलो।
जय- हाँ, पर संभाल लिए हम।
कविता ने बोला- अरे तुम्हारे नाम से कूरियर आया है, बाहर पड़ा है हॉल में। तुम हाथ मूंह धो लो। फिर नास्ता करते हैं।
जय- ठीक है।
कविता उठके उसके रूम को ठीक करने लगी, और जय बाथरूम में चल गया। थोड़ी देर बाद जय बाहर आया तब तक कविता नास्ता लगा चुकी थी।दोनों नास्ता करने बैठ गए। कविता जय की गोद मे बैठ गयी। और उसे तोड़के निवाला खिलाने लगी। जय ने वो कूरियर उठाया और खोला। अंदर एक डिमांड ड्राफ्ट था, और कुछ कागज़। जय ने देखा तो वो सरक उठा। मुंह का निवाला बाहर आ गया। कविता ने उसे पानी दिया। और पीठ सहलाने लगी। कविता- कक...क क्या हुआ जय? ठीक हो ना।
जय खांसते हुए- हाथ मे पकड़ा डिमांड ड्राफ्ट कविता को दिखाता है। कविता का मुंह वो देखकर खुला रह जाता है।
On demand Pay to Mr. Jaykant Jha
Amount- Two crore fifty five lakh rupees only
In figures- 2,55,00,000/-

दरअसल ये एक इन्शुरन्स कंपनी की तरफ से आया था। अमरकांत झा के नाम पर कोई एक करोड़ की बीमा थी। जोकि समय पर भुगतान ना होने की वजह से पटना हाई कोर्ट ने भुगतान की राशि ढाई गुनी कर दी थी। साथ में जजमेंट की कॉपी भी लगी थी। दोनों भाई बहन अचानक से ज़ोर से चिल्लाए और फिर शांत हो गए।
जय ने उसे फिर पढ़के सारी बाते बताई। दीदी तुमको पता था इसके बारे में।
कविता- नहीं हमको बिल्कुल नहीं पता।
जय- इसमें हमारे वकील का नाम भी नहीं है। जरूर माँ को पता होगा।
जय ने फोन लगाया तो ममता का फोन आउट ऑफ कवरेज बात रहा था। कोई 3 4 बार लगाने पर भी, नहीं लगा।
दोनों बहुत खुश थे।
 
जय वहीं बैठा रहा।
कविता थोड़ी देर बाद खाना लेके आयी, और अपने थके हुए भाई को प्यार से देखी। उसकी आंख लग गयी थी। कविता ने उसके माथे से पसीना पोछा और अपने नीचे बैठ गयी। उसके सर को अपने चुच्चियों के बीच रख लिया," हमारे भैया अब लगता है तूम थक गए हो। खाना तो खा लो।" और निवाला तोड़के उसके मुँह में दी।
जय- तुमने शुरू से हमारा ख्याल रखा है, पहले दीदी की तरह और माँ की तरह भी।
कविता- अब पत्नी की तरह भी रखेंगे। एक पत्नी का पति की ओर जो भी कर्तव्य होता है, तुम्हारे लिए करेंगे।
जय- दीदी, तुम भी खाओ ना।
कविता- तुम खिलाओगे तभी ना।भूल गए क्या?
जय- अच्छा ये लो, उसने अपने मुंह मे चबाया आधा निवाला कविता के मुंह मे दे दिया।
कविता- जल्दी खाते हैं, और चलते हैं, ये जमा करने।
दोनों ने जल्दी खाना खाया और तैयार हो गए। कविता लेग्गिंग्स और कुर्ती पहनी थी। जय हमेशा की तरह टी शर्ट और जीन्स डाल चुका था। जय ने कविता को देखा, तो बोला," क्या माल लग रही हो जानेमन, तुम तो बाहर जाने का इरादा ही बदल दोगी।" जय कविता को अपने गोद मे उठा के बोला।
कविता- हहम्म, जय तैयार होने दो ना। वरना बैंक बंद हो जाएगा।
जय ने उसे किस करते हुए बोला," हहम्मम्म ठीक है, अभी छोड़ देता हूँ।
कविता हँसकर बोली - बदमाश, कहीं के !
दोनों बाहर आकर ऑटो लेकर सीधा बैंक पहुंच गए, जहां कविता की माँ की पेंशन आती थी। कविता जानती थी कि मैनेजर उसको गंदी नज़रो से देखता है, इसीलिए वो अपने भाई से चिपककर, उसके हाथ मे हाथ डालके बैंक में घुसी।
मैनेजर उसे देखके हतप्रभ रह गया। वो इतना मेक अप कभी नहीं करती थी।
बोल्ड रेड लिपस्टिक, आईलाइनर, काजल, मस्करा, गालों पर फाउंडेशन इत्यादि सब लगाई हुई थी। और साथ में एक मुस्टंडा लड़का भी। मैनेजर को देखके वो खुद बोली," मैनेजर साहब, कैसे हैं?
मैनेजर- जी ठीक हूँ। आप...
कविता- एक छोटा सा काम है, हेल्प करेंगे।" वो डीडी उसके तरफ बढाके बोली," इसे जमा करना है।
मैनेजर- जी जरूर। उसने जब राशि देखी तो मुंह खुला रह गया।" क्या बात है, आइये आइये केबिन में, मेरा तो पूरा काम बन गया। इससे मेरा टारगेट पूरा हो जाएगा। थैंक यू।
कविता और जय उसके चैम्बर में बैठे थे। कविता जय के कंधों से चिपक के बैठी थी, जैसे मैनेजर को एहसास दिला रही हो, की ये मेरा मर्द है।
मैनेजर ने जय के खाते में वो जमा करवा दिया।
मैनेजर- कुछ लेंगे आपलोग?
कविता मैनेजर के सामने जय से बोली- डार्लिंग, आप कुछ लोगे। मैनेजर साब कुछ पूछ रहे हैं।
जय- नहीं, जानू कुछ नहीं।
मैनेजर- ये कौन है कविता जी?
कविता- जय से चिपकते हुए बोली, ये हमारे होने वाले पति हैं।
जय और मैनेजर दोनों चौंक गए। जय कविता के उस बेबाक रवैये से जिससे वो अपने सगे भाई को होने वाला पति बता रही थी। और मैनेजर तो अपना दिल टूटने की वजह से।
दोनों मैनेजर को शॉक में छोड़कर बाहर निकल आये।
 
जय कविता को वेहा से एक ऑटो में बिठा ले गया। जय रास्ते में कविता से उत्सुकता से पूछा, " तुमने मैनेजर को क्यों बोला कि हम तुम्हारे होने वाले पति हैं?
कविता मुस्कुराती हुई," क्यों, गलत कहा। तुम हमसे शादी नहीं करोगे क्या?
वो मैनेजर हमको हरदम गंदी नज़रों से देखता था। आज उसका मुंह देखा, कैसा हो गया था। अब तुम हमारे पति बनके ही बाहर घूमना।
जय- अच्छा ये बात है। फिर ठीक किया तुमने हमारी धर्मपत्नी।" उसे बाहों में भर लिया।

कविता - अरे ये ऑटोवाला गलत जा रहा है। हमारा घर तो उधर है। रोको इसको। अरे.....भैया
जय उसको रोकते हुये बोला- सही जा रहा है, मत रोको हम तुमको एक खास जगह ले जा रहे हैं। ये जगह हम बहुत खोजके निकाले हैं।
ऑटोवाला एक बिल्डिंग के पास रोककर उनको उतार दिया। जय ने उसे भाड़ा देकर छोड़ दिया। जय कविता को अंदर लेकर गया। वहां अंदर बहुत अंधेरा सा था। कुछ लड़के लडकिया वहा खड़े थे। अंदर एक कमरे में जाकर जय ने देखा कि वेहा एक महिला बैठी थी। जय ने उससे कुछ बात की और कविता की ओर इशारा किया। महिला ने उन दोनों को बैठने का इशारा किया।
कविता- ये कैसी जगह है जय, कहा लाये हो हमको।
जय- यहां नाभि और अंदर के हिस्सों में छिदाई और टैटू करते हैं ये लोग।
कविता-तुम क्या करवाने वाले हो?
जय- हम नहीं तुम करवाओगी, दीदी।
कविता- क्या? हम नहीं जय हम नहीं छिदवाएँगे अंदर में कुछ भी।
जय- अभी छिदवाने का इरादा नहीं है। अभी तो बस टैटू करा लो।" जय कविता के चुत्तरों को दबाके बोला, " इस पर करा लो, तुम एकदम बवाल लगोगी।"
कविता- कोई देख लेगा तो, क्या समझेगा? जय- कौन देखेगा तुम्हारे नंगी गाँड़ को हमारे अलावे। तुम डरो मत, हम हैं ना।
कविता- पर,
जय- पर वर कुछ नहीं, ये करवाओ ना तुम बहुत सेक्सी लगोगी।
कविता- ठीक है, तुम जीते और क्या चाहते हो? अपने नाभि पे इशारा करके बोली, यहां छिदवा लें?
जय उसको बाहों में उठाके बोला- तुमने मुंह की बात छीन ली। बहुत सेक्सी लगोगी जब तुम्हारा पेट खुला रहेगा, और उसमें छोटी रिंग लगी होगी। बिल्कुल प्रियंका चोपड़ा जैसी। तुमको ये करवाने का मन था क्या?
कविता- हम कई बार देखें हैं तुम्हारे लैपटॉप पर प्रियंका की छिदी नाभि की तस्वीर। हमको पता था कि तुमको ये पसंद है। इसलिए पूछे।
जय- कविता दीदी तुम तो हमको एकदम बीवी की तरह समझती हो। आई लव यू।
कविता- हम भी तुमको बहुत प्यार करते हैं। इस प्यार की कसम है कभी अकेले मत छोड़ना हमको।
जय- प्राण छोड़ देंगे, पर जान तुमको नहीं छोड़ेंगे।
तभी वो महिला आयी, और कविता को अंदर चलने को कहा। कविता उसके साथ अंदर चली गयी।
 
कविता अपने नाभि की ओर इशारा करी और बोली- यहां पियरसिंग करवानी है।
महिला- पर आपके पति ने तो सिर्फ टैटू के लिए बोला है।
कविता- हमने अभी सोचा कि ये भी करवाएंगे।
महिला हँसकर- ओके। उन्होंने आपको ऐसा करने बोला ?
कविता- नहीं हमने ही कहा।
महिला- क्या बात है, मैडम आप जैसी औरतें रहेंगी तो सब मर्द खुश रहेंगे। आखिर यहाँ कितनी औरतें हैं जो ये सब करवाने को तैयार होती हैं। मैं तो कहती हूँ कि अपने पति को सरप्राइज देना हो तो वेजिनल पियरसिंग करवा लीजिये।
कविता- आप वेजिनल पियरसिंग करती हैं ! क्या वो करवाने के बाद सेक्स से दूर रहना पड़ता है।
महिला- नहीं, बस कुछ दिनों तक पूरा ख्याल रखिये की इन्फेक्शन ना हो। मैं यहां से कुछ दवा दूंगी सफाई और लगाने के लिए।
कविता- क्या करवाना सेफ होगा, और पता नहीं पसंद आएगा उनको?
महिला- एकदम सेफ है, और मर्दों को आजकल ऐसी ही औरतें पसंद हैं।
कविता- क्या करूँ समझ नहीं आ रहा।
महिला- अगर आपके पति को किंकी सेक्स पसंद है तो जरूर करवाइए, आपका मज़ा दुगना हो जाएगा।
कविता- ठीक है, फिर कर दीजिए।
महिला- ये हुई ना बात! आइये अपनी लेग्गिंग्स और पैंटी उतार दीजिए।
कविता ने अपनी लेग्गिंग्स और पंतय उतार दी। और कमर के नीचे से नंगी हो गयी। महिला ने उसे सोफे पर लेटने को कहा। कविता के लेटने पर महिला ने उसकी कुर्ती नाभि से ऊपर उठा दी। महिला ने एक कैंचिनुमा औजार पकड़ रखा था, जिससे उसने पहले बुर के ऊपर की चमड़ी को ऊपर उठा लिया। फिर उसने एक सुई लेकर धीरे से छेद कर दिया और छोड़ दिया। फिर उसने नाभि की चमड़ी को ऐसे ही उठाके उसमें भी छेद कर दिया। कविता को ज्यादा दर्द नहीं हुआ शायद इसलिए कि वो महिला काफी अनुभवी थी। फिर उसने छोटा सा लंबा आभूषण उसकी दोनों नए छिदी छेद में घुसा दिया।
 
महिला- आप पर बहुत जँच रही है दोनों। आपको ज्यादा तकलीफ नहीं हुई होगी।
कविता- नहीं, हल्का सा ही दर्द हुआ।
महिला- अब पलट जाइये आपकी टैटू की बारी।
फिर वो महिला टैटू करने वाली मशीन लेकर उसकी दांयी चूत्तर पर लाल होठों की टैटू बनाने लगी। कविता को दर्द हो रहा था, पर अब जब वो जय को पति मान चुकी थी, तो उसकी हर इच्छा पूरी करना चाहती थी।
थोड़ी देर में उसके चूत्तर पर लाल होठ का टैटू बनके तैयार हो गया। फिर काली स्याही से उसपर जय लिख दिया। महिला ने उसे आधे घंटे लेटे रहने को कहा। कविता वैसे ही लेटी रही। कुछ देर बाद कविता फिर कपड़े पहन कर बाहर आ गयी। जय उसे देखके खुश हो रहा था। महिला ने उसे एक किट दिया था जिसमें दवाइयां थी।
जय ने पैसे दिए और कविता को ऑटो में बैठाके घर ले आया।
शाम हो चली थी।
उधर दूसरी तरफ शशिकांत घर पहुंचा तो सीधा अपने कमरे में चला गया। माया ने खाना भिजवाया, तो उसने खाने से इनकार कर दिया।
ममता और माया ने कुछ खास तैयारियां कर रखी थी, उसे खुश करने के लिए। ममता को पता था कि शशिकांत कैसे मानेगा। रात को जब बारह बज गए तब ममता शशि के कमरे में पहुंच गई। शशि ने ममता को देखा तो खुश हो गया। वो वहां दारू पी रहा था। उसने माया को आवाज़ लगाई की वो चखना लेके आये। ममता उसके लिए चखना लेकर आई थी।
ममता- हम लेके आये हैं, आपके लिए देवरजी।
शशि पर दारू का नशा चढ़ा हुआ था। उसने ममता को देखा और बोला- अरे हमरी रंडी भौजी, आयी है चखना लेकर। क्या लायी हो? शशि दारू पीने के बाद गालियां बहुत देता था, और ममता को इसकी आदत थी।
ममता- मछली फ्राई और पनीर रोल साथ में हम भी है, चाहे तो चख लीजिये।
शशि- इधर आओगी तब ना चखेंगे। इधर आ कपड़े उताड़ दो।
ममता हंसते हुए बिस्तर पर चखना रख दी। और शशि के सामने जाकर खड़ी हो गयी। फिर बोली," अपनी भौजी को खुद नंगी करने में आपको बहुत अच्छा लगता है ना। तो आप ही नंगी करो ना हमको।"
शशि ने ममता के साये का नाड़ा खोल दिया, जो उसकी चिकनी मोटी जांघों से फिसलकर उसके पैरों में जा गिरा। फिर वो पीछे मुड़कर बोली- ये ब्लाउज को भी मत छोड़िए, उताड़ दीजिए। शशि ने उन धागों को भी खोल दिया। उसने ब्लाउज को खुद अपनी बाहों से निकाल दिया। ममता अब एक दम नंगी हो चुकी थी। पर शर्म की शिकन भी उसके चेहरे पर नहीं थी।
ममता अपने देवरजी की ओर मुड़ी और उसकी जांघों पर बैठ गयी। शशि ने उसे कमर से पकड़ लिया। शशि के मुंह से दारू की महक आ रही थी।
ममता- देवरजी, लाइये हम पिलाते हैं।" और उसके हाथ से गिलास ले ली। फिर अपने हाथों से उसको दारू पिलाने लगी। वो चखना लेने के लिए हाथ बढ़ा ही रहा था कि ममता, ने रोक दिया," आप मत छुइये ना, ये लीजिये।" और अपने हाथों से मछली खिलाने लगी।
शशि- तुमको देखके कौन बोलेगा की ऊंची जाति और शरीफ घर की औरत हो। कोई कोठे की सस्ती रंडी लग रही हो। हा..हा
 
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