ममता को कुछ अजीब सा लगा। शायद माया और शशि के बीच मे कुछ झगड़ा हुआ है। ममता ने माया को पूछा," क्या बात है माया, देवरजी से झगड़ा हुआ है क्या? वो इतने उखड़ क्यों गए?
माया- नहीं, दीदी कुछ नहीं हुआ है। सब ठीक है। तुम तो जानती हो इनको कभी कभी अचानक से खिसिया जाते हैं।
ममता अपनी कच्छी और ब्रा पहने बिना, साया ( पेटीकोट) को बांध ली और ब्लाउज पहनते हुए बोली- नहीं कुछ तो बात हुई है, सच बताओ ना। फिर उसके करीब आयी तो देखा कि माया के गाल पर थप्पड़ के निशान थे। उसके मुंह से अनायास ही अचंभे से निकला," ये क्या हुआ है, मारा देवरजी ने तुझे?
माया- छोड़ो ना दीदी, पति पत्नी के बीच ये सब तो होता रहता है ना। पति हैं, हमको दो थप्पड़ मारा तो क्या हो गया। कुछ नहीं आओ, हम खाना लगाते हैं।
ममता- नहीं, देवरजी तो ऐसे नहीं हैं। वो तो काफी शांत स्वभाव के हैं। क्या बात हुई है बताओ? तुम नहीं बताओगी तो हम देवरजी से पूछेंगे।
माया की आंखों में आंसू आ गए थे। वो अपने आँचल से जब तक उसे पोछती तब तक ममता ने उसे गले लगा लिया," चुप हो जा, माया चुप ऐसे क्यों रो रही है। हम हैं ना तेरी दीदी। बता क्या बात हुई है।
माया ने बोलना शुरू किया," वो.....वो...सिसक...वो कल ऐसा हुआ कि, हमको पता चला कि इन्होंने, .....
कंचन की आवाज़ गूँजी, वो अपने सहेलियों के साथ घर के पीछे वाली गली से आ रही थी। माया चुप हो गयी। उसने अपने आंशु पोछे और बोली," दीदी कंचन आ गयी, हम बाद में बताते हैं।
कंचन की सहेलियां उसे घर के सामने छोड़कर चली गयी। कंचन आयी उसे पता नहीं था कि उसकी मौसी जो असल मे उसकी माँ थी आयी है और अपने कमरे में चली गयी। माया और ममता दोनों कमरे से बाहर निकलकर रसोई में चली गयी। ममता ने अपनी साड़ी पहन ली, कमरे से जब वो बाहर निकली तो उसे देखके कोई नहीं कह सकता था कि अभी अभी इसकी गाँड़ चुदाई हुई है। वो बिल्कुल शरीफ परिवार की महिला लग रही थी।
वहां से करीब 1000 कि मी दूर दिल्ली में कविता और जय एक दूसरे में खोए हुए थे। कविता जय की बाहों में बैठी थी, जय उसके गर्दन पर किस कर रहा था। जिससे कविता को गुदगुदी हो रही थी, वो बीच बीच मे खिलखिला कर हंस रही थी। कविता ने डीडी को संभाल के रख दिया था। जय- दीदी आज तो खूब मजा करेंगे। एक ही झटके में सारी गरीबी दूर हो गयी। अब देखना की हम तुमको कितना खुश रखेंगे। तुमको और माँ को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे। अब हमलोगों की सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।
कविता हंसकर बोली," हाँ, जय अब तो तुम करोड़पति हो गए। ये तो हमारे बाबूजी की देन है। आज हमको खुशी मिली उस कुत्ते शशिकांत ने जिसने हमे घर से बेघर कर दिया था, अब उसको पता चलायेंगे। वो दिन हम भूल नही सकते हैं, जब उसने हमको बाहर निकाल दिया था। हम चाहते हैं कि अब तुम उसका बदला लो। पर माँ अभी भी गाँव जाती रहती है, पता नहीं क्यों, कुछ समझ नहीं आता।
माया- नहीं, दीदी कुछ नहीं हुआ है। सब ठीक है। तुम तो जानती हो इनको कभी कभी अचानक से खिसिया जाते हैं।
ममता अपनी कच्छी और ब्रा पहने बिना, साया ( पेटीकोट) को बांध ली और ब्लाउज पहनते हुए बोली- नहीं कुछ तो बात हुई है, सच बताओ ना। फिर उसके करीब आयी तो देखा कि माया के गाल पर थप्पड़ के निशान थे। उसके मुंह से अनायास ही अचंभे से निकला," ये क्या हुआ है, मारा देवरजी ने तुझे?
माया- छोड़ो ना दीदी, पति पत्नी के बीच ये सब तो होता रहता है ना। पति हैं, हमको दो थप्पड़ मारा तो क्या हो गया। कुछ नहीं आओ, हम खाना लगाते हैं।
ममता- नहीं, देवरजी तो ऐसे नहीं हैं। वो तो काफी शांत स्वभाव के हैं। क्या बात हुई है बताओ? तुम नहीं बताओगी तो हम देवरजी से पूछेंगे।
माया की आंखों में आंसू आ गए थे। वो अपने आँचल से जब तक उसे पोछती तब तक ममता ने उसे गले लगा लिया," चुप हो जा, माया चुप ऐसे क्यों रो रही है। हम हैं ना तेरी दीदी। बता क्या बात हुई है।
माया ने बोलना शुरू किया," वो.....वो...सिसक...वो कल ऐसा हुआ कि, हमको पता चला कि इन्होंने, .....
कंचन की आवाज़ गूँजी, वो अपने सहेलियों के साथ घर के पीछे वाली गली से आ रही थी। माया चुप हो गयी। उसने अपने आंशु पोछे और बोली," दीदी कंचन आ गयी, हम बाद में बताते हैं।
कंचन की सहेलियां उसे घर के सामने छोड़कर चली गयी। कंचन आयी उसे पता नहीं था कि उसकी मौसी जो असल मे उसकी माँ थी आयी है और अपने कमरे में चली गयी। माया और ममता दोनों कमरे से बाहर निकलकर रसोई में चली गयी। ममता ने अपनी साड़ी पहन ली, कमरे से जब वो बाहर निकली तो उसे देखके कोई नहीं कह सकता था कि अभी अभी इसकी गाँड़ चुदाई हुई है। वो बिल्कुल शरीफ परिवार की महिला लग रही थी।
वहां से करीब 1000 कि मी दूर दिल्ली में कविता और जय एक दूसरे में खोए हुए थे। कविता जय की बाहों में बैठी थी, जय उसके गर्दन पर किस कर रहा था। जिससे कविता को गुदगुदी हो रही थी, वो बीच बीच मे खिलखिला कर हंस रही थी। कविता ने डीडी को संभाल के रख दिया था। जय- दीदी आज तो खूब मजा करेंगे। एक ही झटके में सारी गरीबी दूर हो गयी। अब देखना की हम तुमको कितना खुश रखेंगे। तुमको और माँ को कोई तकलीफ नहीं होने देंगे। अब हमलोगों की सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।
कविता हंसकर बोली," हाँ, जय अब तो तुम करोड़पति हो गए। ये तो हमारे बाबूजी की देन है। आज हमको खुशी मिली उस कुत्ते शशिकांत ने जिसने हमे घर से बेघर कर दिया था, अब उसको पता चलायेंगे। वो दिन हम भूल नही सकते हैं, जब उसने हमको बाहर निकाल दिया था। हम चाहते हैं कि अब तुम उसका बदला लो। पर माँ अभी भी गाँव जाती रहती है, पता नहीं क्यों, कुछ समझ नहीं आता।