सत्य- दीदी, ये ठीक कह रही है। तुम खुद भी जय से शादी कर लो।
ममता मुस्कुराते हुए," फिर तो ये हमारी दूसरी शादी होगी।"
सत्य और कविता उसकी ओर एक पल देखे और फिर मुस्कुरा उठे। सब इतनी आसानी से हो जाएगा, ममता ने कभी नहीं सोचा था। पर ये उसीका आईडिया था, की वो अभी ये बात किसी से नहीं कहेंगी। यहां तक कि जय को भी नहीं।
ममता ने उसी समय कविता को फोन लगाया और बोली कि सत्यप्रकाश बहुत बीमार है, जल्दी आ जाओ अगली गाड़ी पकड़ कर। माया बहुत हड़बड़ा गयी, पर अगले ही दिन गाड़ी पकड़ अकेले ही चल दी थी। और 24 घंटे के अंदर दिल्ली पहुंच गई। जब वो स्टेशन पर उतरी तो, सामने सत्य को देखी, उसने सत्य की ओर देखा और पूछी," क्या हो गया है, ठीक हो ना तुम, दीदी बोली कि तुम्हारी तबियत बहुत खराब है।
सत्य- हां, हम ठीक हैं, तुम घबराओ मत, चलो घर चलो।
दोनों ऑटो पकड़ घर की ओर चल दिये। वैसे तो, सत्य पहले भी माया को ऐसे अपनी प्रेमिका के तौर पर देखता था। पर आज कुछ और ही बात थी।ममता की कही बात उसे एक नए उमंग और ऊर्जा से भर चुकी थी। शायद हां शायद माया उसकी हो जाएगी या शायद इस बार माया से उसकी आखिरी मुलाक़ात होगी। ऑटो में माया सो गई थी। उसकी जुल्फे हवा में लहरा रही थी। उसका ब्लाउज काफी लो कट था। चुच्चियों कि अर्ध गोलाइयों काफी बाहर थी। उसका आँचल ढलकर किनारे हो चुका था। चूचियों के बीच उसका मंगलसूत्र उसकी सुहाग की निशानी था। सत्य को वो काफी चुभ रहा था।
घर पहुंची तो वो सीधे ममता से बोली, की तुम बोली थी कि सत्य बीमार है पर वो तो सामने ठीक ठाक खड़ा है।
ममता- ये ऊपर से ठीक है, पर अंदर से बीमार है। इसे बहुत गंभीर बीमारी हो गया है।
माया- क्या कौन सा कहीं एड्स वगैरह तो नहीं हो गया है?
ममता- अरे नहीं, उससे भी खतरनाक बीमारी, इसे लवेरिया हो गया है।
माया- लवेरिया, ये कौन सा बीमारी है।
ममता- इसको एक लड़की से प्यार हो गया है। और उससे इसकी शादी करनी है। नहीं तो ये पागल हो जाएगा। पिछले 10 साल से ये उसको प्यार करता है, पर उससे कुछ कह नहीं पा रहा है।
माया- अरे हमको तो तुमलोग डरा दिए। हम बोले कि पता नहीं क्या हो गया। सत्य को कौन पसंद है। चलो उससे बात करें। बहुत उम्र हो गया है इसका वैसे भी।
ममता- कहीं जाना नहीं है। वो लड़की यहां है।
माया- अच्छा कहां है, घर पर बुलाये हो। किधर है?
ममता- मिलवाएंगे, पर तुम पहले नहां लो, तैयार हो जाओ।
माया- चलो ये भी ठीक है। हम फ्रेश हो जाते हैं।
ममता मुस्कुराते हुए," फिर तो ये हमारी दूसरी शादी होगी।"
सत्य और कविता उसकी ओर एक पल देखे और फिर मुस्कुरा उठे। सब इतनी आसानी से हो जाएगा, ममता ने कभी नहीं सोचा था। पर ये उसीका आईडिया था, की वो अभी ये बात किसी से नहीं कहेंगी। यहां तक कि जय को भी नहीं।
ममता ने उसी समय कविता को फोन लगाया और बोली कि सत्यप्रकाश बहुत बीमार है, जल्दी आ जाओ अगली गाड़ी पकड़ कर। माया बहुत हड़बड़ा गयी, पर अगले ही दिन गाड़ी पकड़ अकेले ही चल दी थी। और 24 घंटे के अंदर दिल्ली पहुंच गई। जब वो स्टेशन पर उतरी तो, सामने सत्य को देखी, उसने सत्य की ओर देखा और पूछी," क्या हो गया है, ठीक हो ना तुम, दीदी बोली कि तुम्हारी तबियत बहुत खराब है।
सत्य- हां, हम ठीक हैं, तुम घबराओ मत, चलो घर चलो।
दोनों ऑटो पकड़ घर की ओर चल दिये। वैसे तो, सत्य पहले भी माया को ऐसे अपनी प्रेमिका के तौर पर देखता था। पर आज कुछ और ही बात थी।ममता की कही बात उसे एक नए उमंग और ऊर्जा से भर चुकी थी। शायद हां शायद माया उसकी हो जाएगी या शायद इस बार माया से उसकी आखिरी मुलाक़ात होगी। ऑटो में माया सो गई थी। उसकी जुल्फे हवा में लहरा रही थी। उसका ब्लाउज काफी लो कट था। चुच्चियों कि अर्ध गोलाइयों काफी बाहर थी। उसका आँचल ढलकर किनारे हो चुका था। चूचियों के बीच उसका मंगलसूत्र उसकी सुहाग की निशानी था। सत्य को वो काफी चुभ रहा था।
घर पहुंची तो वो सीधे ममता से बोली, की तुम बोली थी कि सत्य बीमार है पर वो तो सामने ठीक ठाक खड़ा है।
ममता- ये ऊपर से ठीक है, पर अंदर से बीमार है। इसे बहुत गंभीर बीमारी हो गया है।
माया- क्या कौन सा कहीं एड्स वगैरह तो नहीं हो गया है?
ममता- अरे नहीं, उससे भी खतरनाक बीमारी, इसे लवेरिया हो गया है।
माया- लवेरिया, ये कौन सा बीमारी है।
ममता- इसको एक लड़की से प्यार हो गया है। और उससे इसकी शादी करनी है। नहीं तो ये पागल हो जाएगा। पिछले 10 साल से ये उसको प्यार करता है, पर उससे कुछ कह नहीं पा रहा है।
माया- अरे हमको तो तुमलोग डरा दिए। हम बोले कि पता नहीं क्या हो गया। सत्य को कौन पसंद है। चलो उससे बात करें। बहुत उम्र हो गया है इसका वैसे भी।
ममता- कहीं जाना नहीं है। वो लड़की यहां है।
माया- अच्छा कहां है, घर पर बुलाये हो। किधर है?
ममता- मिलवाएंगे, पर तुम पहले नहां लो, तैयार हो जाओ।
माया- चलो ये भी ठीक है। हम फ्रेश हो जाते हैं।