ममता का पूरा चेहरा और बाल भीग चुके थे। उसके कंधों और चुच्चियों से जय का गरमा गरम मूत बह रहा था। ममता की आंखें अभी बंद थी। उसने चेहरा अलग हटाया और आंखों को अपने हाथों से पोछा। फिर कनखियों से देखा तो जय अपना लण्ड हाथ मे पकड़कर उसके ऊपर मूत रहा था। वो मुस्कुरा रहा था।
तभी ममता बोली," जय ये क्या कर दिया तुमने, हमही पर मूत दिए। हमको पेशाब करवाने लाये थे और तुम हम पर पेशाब कर रहे हो। अरे हटाओ ना लण्ड अपना, हम पर मूतने में तुमको मज़ा आ रहा है। देखो हम पूरे गीले हो गए हैं।"
जय ने देखा कि ममता का मुंह खुला हुआ है तो, उसके मुंह में लण्ड से निशाना लगाकर ममता के मुँह में मूतने लगा। जय की मूत की पीली धार सीधा ममता की जीभ से टकराई। ममता का मुंह तुरंत मूत से भर गया, उसने उसे उगल दिया। जय ये सब देख हंसता रहा, फिर बोला," अरे इसीमें तो मज़ा आता है, हमको।
तुम अभी बहुत अच्छी लग रही हो माँ। हमारे ख्याल से हर औरत को ये ज़रूर करना चाहिए। अपने मर्द के मूत/ पेशाब से नहाना चाहिए और उसका मूत भी अमृत समझकर पीना चाहिए। ये औरत के समर्पण को दर्शाता है। हां, भले ही थोड़ा सा अजीब लग सकता है, और पहली बार में ये सब कर भी नहीं सकती। पर जिनकी आत्माएं एक हो जाये, उनके लिए ये तो कुछ भी नहीं। और अपनी पत्नी से तो इसकी कामना कर ही सकते हैं।
सेक्स का ये एक घिनौना और गंदा रूप है, पर तुमको इसमें खुदको ढालना होगा। तुमको तो इसके भी आगे बढ़ना है। तुमको पूरी निर्लज्ज होना पड़ेगा और इन चीज़ों के परहेज से बचना होगा।"
जय के लण्ड से पेशाब गिरना बंद हो चुका था। ममता खड़ी हो गयी और अपने चेहरे को पोछने के लिए आगे बढ़ने लगी। उसके बाल गीले हो चुके थे, चेहरा भी गीला था। चुचकों पर मूत की बूंदे मोतियों की तरह लटककर चू रही थी। उसका साया भी थोड़ा सा गीला हो चुका था।
जय ने उसे देखा और अपनी बांहों में पकड़ लिया। ममता बोली," जय हमको छोड़ो ना, धोने दो देखो पूरा पेशाब से गीला कर दिए हो। हमको बहुत शर्म आ रहा है। पूरा बदबू है।"
तभी ममता बोली," जय ये क्या कर दिया तुमने, हमही पर मूत दिए। हमको पेशाब करवाने लाये थे और तुम हम पर पेशाब कर रहे हो। अरे हटाओ ना लण्ड अपना, हम पर मूतने में तुमको मज़ा आ रहा है। देखो हम पूरे गीले हो गए हैं।"
जय ने देखा कि ममता का मुंह खुला हुआ है तो, उसके मुंह में लण्ड से निशाना लगाकर ममता के मुँह में मूतने लगा। जय की मूत की पीली धार सीधा ममता की जीभ से टकराई। ममता का मुंह तुरंत मूत से भर गया, उसने उसे उगल दिया। जय ये सब देख हंसता रहा, फिर बोला," अरे इसीमें तो मज़ा आता है, हमको।
तुम अभी बहुत अच्छी लग रही हो माँ। हमारे ख्याल से हर औरत को ये ज़रूर करना चाहिए। अपने मर्द के मूत/ पेशाब से नहाना चाहिए और उसका मूत भी अमृत समझकर पीना चाहिए। ये औरत के समर्पण को दर्शाता है। हां, भले ही थोड़ा सा अजीब लग सकता है, और पहली बार में ये सब कर भी नहीं सकती। पर जिनकी आत्माएं एक हो जाये, उनके लिए ये तो कुछ भी नहीं। और अपनी पत्नी से तो इसकी कामना कर ही सकते हैं।
सेक्स का ये एक घिनौना और गंदा रूप है, पर तुमको इसमें खुदको ढालना होगा। तुमको तो इसके भी आगे बढ़ना है। तुमको पूरी निर्लज्ज होना पड़ेगा और इन चीज़ों के परहेज से बचना होगा।"
जय के लण्ड से पेशाब गिरना बंद हो चुका था। ममता खड़ी हो गयी और अपने चेहरे को पोछने के लिए आगे बढ़ने लगी। उसके बाल गीले हो चुके थे, चेहरा भी गीला था। चुचकों पर मूत की बूंदे मोतियों की तरह लटककर चू रही थी। उसका साया भी थोड़ा सा गीला हो चुका था।
जय ने उसे देखा और अपनी बांहों में पकड़ लिया। ममता बोली," जय हमको छोड़ो ना, धोने दो देखो पूरा पेशाब से गीला कर दिए हो। हमको बहुत शर्म आ रहा है। पूरा बदबू है।"