माया- हाँ, आइस्ता बोलिये। दरवाजा खोलिए।
रवि ने दरवाजा खोला। माया अंदर घुस गई और फौरन दरवाजा बंद कर दिया। फिर रविकांत की ओर पलटी। रवि- तुमको यहां नहीं आना चाहिए था।" माया उसके सर को पकड़ लेती है और चुम्मों कि बौछार करने लगती है। रवि ने उसको नहीं रोका। हालांकि, वो रिश्ते में उसका जेठ था, पर पहले उसका प्रेमी था। माया ने पहले, रवि को बच्चे की तरह चेहरे को टटोला, फिर उसके कंधों को। फिर बोली," आप ठीक है ना। हमको आपकी चिंता हो रही थी।" रविकांत मुड़कर बिस्तर की ओर जाने लगा। तो माया ने उसका हाथ थाम लिया और बोली," आपने हमारे सवाल का जवाब नहीं दिया।" रविकांत ने उसकी ओर देखा और कमर में हाथ डालते हुए बोला," आओ ना।"
दोनों बिस्तर की ओर चल दिये। बिस्तर पर रवि बैठ गया और माया सामने खड़ी हो गयी।
माया उसके चेहरे पर हाथ फेडते हुए बोली," आप बहुत उदास हैं। हमसे आपका उदासी देखा नहीं जाता है। आपको उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।"
रवि- चलो, इस घर में कोई तो है, जो हमारा इतना ध्यान रखता है।
माया- हम आपके भाई की बीवी बाद में हैं, और आपकी प्रेमिका पहले। आपका सुख हमारा सुख है, और आपका दुख हमारा।" ये बोलकर वो उसके बगल में बैठ गयी। रवि उसकी ओर देख बोला," थक गए हैं हम, माया । इस समाज से लड़ते लड़ते, लोगों को मनवाते मनवाते की ये तीनों बच्चे, हमारे हैं और उनका बाप रविकांत है। और घर में ये बात सबको पता होते हुए, भी इसकी चर्चा नहीं हुई थी। पर आज वो भी हो गया। अब तो भगवान बस मुक्ति दे दे इस जीवन से बस.....।"
माया- छी.... क्या बोलते हैं आप। आप बाप नहीं बन सके तो क्या हुआ?? बाप का फर्ज तो निभा रहे हैं। वो आपका खून, भले ही ना हो पर आप कर्म से उनके बाप हो। आइए हमारे बांहों में आइए।" कहकर माया ने रविकांत को अपने बांहे फैलाकर आने का इशारा किया। रवि उसकी ब्लाउज से झांकती, अधनंगी चुच्चियों पर सर रख दिया। माया ने उसको एक मां की तरह सांत्वना दी।" आप नपुंशक नहीं है, आपका तो लण्ड खड़ा होता है, आपका स्पर्म काउंट बस कम है। और इसलिए आप दीदी को बच्चा नहीं दे पाए। आप हमारे नज़र में मर्द है, नामर्द नहीं। काश हम आपकी पत्नी बनते। प्रेमी प्रेमिकाओं के बीच हमेशा से भगवान समाज के रूप में दीवार खड़ा कर देते हैं। दोनों का मिलन जल्दी नहीं होता या होता ही नहीं। फिर भी दोनों समाज के बंधनों को तोड़कर, मिलते रहते हैं। जैसे हम और आप इस वक़्त हैं। समाज ने हमको आपसे जेठ का रिश्ता जोड़ दिया है। पर ना तो हमने और ना कभी आपने इस रिश्ते को मान दिया है। हम तो आपकी प्रेमिका बैंकर सारा जीवन बिताना चाहते थे। पर आपने ही हमको अपने पास रखने जे लिए, अपने छोटे भाई से शादी करने को कहा। आपके साथ और आपके लिए हम कुछ भी कर सकते हैं। इसलिए हमने ये भी कर लिया। पर आपको इस तरह देखते हैं तो, लगता है कि आपका सारा दुख हमको मिल जाये।"
रवि ने उसकी ओर देखा तो, माया ने उसके माथे को चूम लिया। रवि ने उसको पकड़कर उसके होंठ पर अपने होंठ रगड़ने लगा, ऐसा करते हुए उसने माया को बिस्तर के बीच ले आया। माया उसका भरपूर साथ दे रही थी। उसके होंठ और जीभ रवि के होंठों के साथ पकड़म पकड़ाई का खेल खेलने लगे। दोनों एक दूसरे में लीन थे, चुम्बन का कोई अंत ही नज़र नहीं आ रहा था। माया रवि को अपने ऊपर खींच रही थी, अपने बांहों से पकड़ उसको अपने अंदर समा लेना चाहती थी। रवि माया के होंठों पर बुरी तरह टूट चुका था। वो, उसके अधरों के यौवन का रसपान कर रहा था। कभी वो नीचे होता तो कभी माया। दोनों किसी बिछड़े प्यासे प्रेमी युगल की तरह, खो गए थे। तभी माया ने शशि के कपड़े उतार दिए, और खुदकी, ब्लाउज उतारने लगी। रवि ने उसका ब्लाउज उतारने में उसकी मदद की और, माया के सुडौल चुच्चियों को आज़ाद कर दिया। उसने माया की साड़ी को कमर से पकड़ा और उसका सूक्ष्म चीरहरण कर साड़ी को उसके जिस्म से अलग कर दिया। माया अब सिर्फ साया में थी। साया को खोलने की बजाय, उसने साया उठा लिया, और पैंटी, उताड़ फेंक दी। फिर रवि के मुंह के पास आकर, अपनी बुर को उसके मुंह पर रगड़ने लगी। रवि को बुर चाटना बड़ा अच्छा लगता था, माया की बुर से बेहिसाब नमकीन पानी चू रहा था। वो कमर हिलाकर, बुर रगड़ रही थी। रवि उसके चूतड़ थामे हुआ था।
रवि ने दरवाजा खोला। माया अंदर घुस गई और फौरन दरवाजा बंद कर दिया। फिर रविकांत की ओर पलटी। रवि- तुमको यहां नहीं आना चाहिए था।" माया उसके सर को पकड़ लेती है और चुम्मों कि बौछार करने लगती है। रवि ने उसको नहीं रोका। हालांकि, वो रिश्ते में उसका जेठ था, पर पहले उसका प्रेमी था। माया ने पहले, रवि को बच्चे की तरह चेहरे को टटोला, फिर उसके कंधों को। फिर बोली," आप ठीक है ना। हमको आपकी चिंता हो रही थी।" रविकांत मुड़कर बिस्तर की ओर जाने लगा। तो माया ने उसका हाथ थाम लिया और बोली," आपने हमारे सवाल का जवाब नहीं दिया।" रविकांत ने उसकी ओर देखा और कमर में हाथ डालते हुए बोला," आओ ना।"
दोनों बिस्तर की ओर चल दिये। बिस्तर पर रवि बैठ गया और माया सामने खड़ी हो गयी।
माया उसके चेहरे पर हाथ फेडते हुए बोली," आप बहुत उदास हैं। हमसे आपका उदासी देखा नहीं जाता है। आपको उनकी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए।"
रवि- चलो, इस घर में कोई तो है, जो हमारा इतना ध्यान रखता है।
माया- हम आपके भाई की बीवी बाद में हैं, और आपकी प्रेमिका पहले। आपका सुख हमारा सुख है, और आपका दुख हमारा।" ये बोलकर वो उसके बगल में बैठ गयी। रवि उसकी ओर देख बोला," थक गए हैं हम, माया । इस समाज से लड़ते लड़ते, लोगों को मनवाते मनवाते की ये तीनों बच्चे, हमारे हैं और उनका बाप रविकांत है। और घर में ये बात सबको पता होते हुए, भी इसकी चर्चा नहीं हुई थी। पर आज वो भी हो गया। अब तो भगवान बस मुक्ति दे दे इस जीवन से बस.....।"
माया- छी.... क्या बोलते हैं आप। आप बाप नहीं बन सके तो क्या हुआ?? बाप का फर्ज तो निभा रहे हैं। वो आपका खून, भले ही ना हो पर आप कर्म से उनके बाप हो। आइए हमारे बांहों में आइए।" कहकर माया ने रविकांत को अपने बांहे फैलाकर आने का इशारा किया। रवि उसकी ब्लाउज से झांकती, अधनंगी चुच्चियों पर सर रख दिया। माया ने उसको एक मां की तरह सांत्वना दी।" आप नपुंशक नहीं है, आपका तो लण्ड खड़ा होता है, आपका स्पर्म काउंट बस कम है। और इसलिए आप दीदी को बच्चा नहीं दे पाए। आप हमारे नज़र में मर्द है, नामर्द नहीं। काश हम आपकी पत्नी बनते। प्रेमी प्रेमिकाओं के बीच हमेशा से भगवान समाज के रूप में दीवार खड़ा कर देते हैं। दोनों का मिलन जल्दी नहीं होता या होता ही नहीं। फिर भी दोनों समाज के बंधनों को तोड़कर, मिलते रहते हैं। जैसे हम और आप इस वक़्त हैं। समाज ने हमको आपसे जेठ का रिश्ता जोड़ दिया है। पर ना तो हमने और ना कभी आपने इस रिश्ते को मान दिया है। हम तो आपकी प्रेमिका बैंकर सारा जीवन बिताना चाहते थे। पर आपने ही हमको अपने पास रखने जे लिए, अपने छोटे भाई से शादी करने को कहा। आपके साथ और आपके लिए हम कुछ भी कर सकते हैं। इसलिए हमने ये भी कर लिया। पर आपको इस तरह देखते हैं तो, लगता है कि आपका सारा दुख हमको मिल जाये।"
रवि ने उसकी ओर देखा तो, माया ने उसके माथे को चूम लिया। रवि ने उसको पकड़कर उसके होंठ पर अपने होंठ रगड़ने लगा, ऐसा करते हुए उसने माया को बिस्तर के बीच ले आया। माया उसका भरपूर साथ दे रही थी। उसके होंठ और जीभ रवि के होंठों के साथ पकड़म पकड़ाई का खेल खेलने लगे। दोनों एक दूसरे में लीन थे, चुम्बन का कोई अंत ही नज़र नहीं आ रहा था। माया रवि को अपने ऊपर खींच रही थी, अपने बांहों से पकड़ उसको अपने अंदर समा लेना चाहती थी। रवि माया के होंठों पर बुरी तरह टूट चुका था। वो, उसके अधरों के यौवन का रसपान कर रहा था। कभी वो नीचे होता तो कभी माया। दोनों किसी बिछड़े प्यासे प्रेमी युगल की तरह, खो गए थे। तभी माया ने शशि के कपड़े उतार दिए, और खुदकी, ब्लाउज उतारने लगी। रवि ने उसका ब्लाउज उतारने में उसकी मदद की और, माया के सुडौल चुच्चियों को आज़ाद कर दिया। उसने माया की साड़ी को कमर से पकड़ा और उसका सूक्ष्म चीरहरण कर साड़ी को उसके जिस्म से अलग कर दिया। माया अब सिर्फ साया में थी। साया को खोलने की बजाय, उसने साया उठा लिया, और पैंटी, उताड़ फेंक दी। फिर रवि के मुंह के पास आकर, अपनी बुर को उसके मुंह पर रगड़ने लगी। रवि को बुर चाटना बड़ा अच्छा लगता था, माया की बुर से बेहिसाब नमकीन पानी चू रहा था। वो कमर हिलाकर, बुर रगड़ रही थी। रवि उसके चूतड़ थामे हुआ था।