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Incest खाला जमीला

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मैंने इस दौरान अपना हाथ आगे किया और खाला के गाल पे रख दिया और गाल पे हाथ फेरने लगा।

खाला में मेरे हाथ पे एक चपत लगाई और कहा- "बड़े तेज हो... अब भी तुम्हारा दिल नहीं भरा.."

मैंने कहा- "खाला आपसे मेरा दिल कभी नहीं भरता। आपकी चारपाई पे आ जाऊँ? इधर अकेले मुझसे नहीं लेटा जा रहा..."

खाला बोली- नहीं लेटे रो वहीं। अच्छा नहीं लगता। तुम्हारी मामी बगेरा ने देखा तो वो क्या कहेंगी?"

मैंने कहा- "खाला कुछ नहीं कहेंगी। मैं आपका भांजा ही तो है..."

खाला ने कहा, "अभी रुक जा, थोड़ी देर बाद आ जाना..."

अभी हम बातें कर रहे थे तो मामी अपने रूम से निकली और टायलेट में चली गई। थोड़ी देर बाद वो दुबारा रूम में चली गई। इस बक्त रात का एक बज रहा था। खाला सीधी लेटी हुई थी।

मैंने खाला को हिलाया और कहा- "खाला आपके पास आ जाऊँ? मुझे नींद नहीं आ रही.."

खाला ने कहा, "आ जाओ.."

में उठा खाला, बगल में हुई, और में उनकी चारपाई पे चला गया। मैं खाला की तरफ मुह किया और टांग उनके बाज उनके पेंट के ऊपर रख दी। खाला का एक बाजू मेरे सिर के नीचे था, और मेरे मुँह से खाला का भारी मम्मा लग रहा था। मैंने अपना चेहरा उनके नरम मम्मे पे दबा दिया और पेट पे हाथ फेरने लगा। नीचे मेरा लण्ड भी अकड़ रहा था, जो सीधा खाला की जांघ में घुस रहा था। जैसे-जैसे लण्ड में जान पड़ रही थी मेरा दिल तेज धड़कता जा रहा था।

खाला में कहा "तुमको गमी नहीं लगती लिपटें रहने से?"

मैंने कहा- "नहीं खाला, मुझे तो अच्छा लगता है। आपको लगती है तो बता दो। मैं अलग हो जाता हैं.."

खाला बोली- "नहीं मेरी जान, मुझे क्यों में लगेगा? अपने बेटे को तो मैं सारी रात भी लिपटाए रख सकती हैं..."

और इसके साथ ही खाला ने मेरी तरफ करवट ले लो।

अब मेरा लण्ड सीधा उनकी फुदद्दी के पास छू रहा था। मैंने खाला को कहा- "खाला मुझे अब दिखाए ना अपनी बनियान। अब तो सब सो चुके हैं। दोपहर को देखी नहीं गई अच्छी तरह आपकी बनियान..."

खाला ने इधर-उधर देखकर कमीज ऊपर कर दी अपनी गर्दन तक। मैं अंधेरे में आँखें फाड़े खाला के मोटे मम्में देख रहा था, जो मेरी नजरों के सामने थे। लण्ड झटके खा रहा था जो खाला को भी महसूस हो रहा था, क्योंकी खाला अपनी टाँग हिला रही थी। मैंने अपना एक हाथ आगे किया और उनके मम्मे के ऊपर रख दिया। मम्मे बा में कैद थे।

मैंने खाला से धीरे आवाज में पूछा- "खाला ये क्यों पहनते हैं?"

खाला ने कहा "बेटा पहनने से ये कंट्रोल में रहते हैं.." खाला ने मम्मों का नाम नहीं लिया।

मैं समझ गया वो नाम लेना नहीं चाहती मेरे सामने। मैंने उनका मम्मा दबा दिया।

खाला की आवाज आई- "ना करा बेटा, ऐसे नहीं करते अच्छे बच्चे."

मैं चुप रहा। लेकिन हाथ को अब नंगे पेट पै ले आया था। थोड़ी देर वहाँ हाथ रखा। मैं खाला को सीधा किया

और उनके ऊपर लेट गया। लण्ड सीधा फुद्दी के निशाने पे था।
 
मैं चुप रहा। लेकिन हाथ को अब नंगे पेट पै ले आया था। थोड़ी देर वहाँ हाथ रखा। मैं खाला को सीधा किया

और उनके ऊपर लेट गया। लण्ड सीधा फुद्दी के निशाने पे था।

खाला ने कहा "क्या हुवा बेटा, ऐसे क्यों लेटे हो?"

मजे कहा- "खाला इस तरह आपसे अच्छी तरह चिपक जाऊँगा.."

खाला मुश्कुरा दी। मैंने खाला को गाल पे किस की और उनके होंठ पे भी अपने होंठ रगड़े। फिर अपने दोनों हाथ खाला के मम्मों पा रख दिये लेकिन दबाए नहीं। मुझे अचानक जोश आया। पता नहीं कैसे खुद-ब-खुद मेरा निचला हिस्सा हिला और लण्ड खाला की जांघों को चीरता डूबा घुस गया।

खाला ने मुझे वहीं रोक दिया और हिलने नहीं दिया। मुझे लण्ड पे खाला की फुद्दी की गर्मी महसूस हो रही थी, क्योंकी उनकी फुद्दी पे बारीक कपड़े की सलवार ही थी। मेरा दिल कर रहा था लण्ड अंदर-बाहर करू, लेकिन खाला में ऊपर हाथ रखा हवा था। मेरा लण्ड फटा जा रहा था। कुछ देर बाद खाला ने मुझे नीचे होने को कहा, तो मेरा मुँह बन गया और नीचे उतर के अपनी चार पाई में आ गया। लेकिन खाला ने मुझे गोका नहीं। खाला में करवट ली, दूसरी तरफ मुँह कर लिया। मुझसे कोई बात नहीं की। मेरा मूड सख्त आफ हो गया था। लेकिन मेरा लण्ड अभी भी खड़ा था वो बैंठने का नाम नहीं था ले रहा था।

खाला सो गई थी अब, क्योंकी उनकी सांसों से पता चल रहा था मुझे। लेकिन लण्ड में मुझे परेशान किया हवा था। मैंने फिर एक फैसला किया और चार पाई से आराम से उठा ताकी चारपाई के चिखने की आवाज ना निकले। मैं छत पे चला गया। मुझं लुबना की तलाश थी, वही इस वक़्त मेरे लण्ड को सुकून दे सकती थी।

ऊपर सब सो रहे थे। सीदियों के साथ है लुबना की चारपाई थी। जहां लुबना सोई नजर आईं। मैं आगे बढ़ा और लुबना को हिलाया तो वो उठ गई। मैंने होंठ में उंगली रखकर उसको चुप रहने का इशारा किया। और इशारे से उसको उठने का कहा की रूम में आओ मेरे साथ। लेकिन वो मान नहीं हो रही थी। मैं आगे बढ़ा और उसकी चारपाई में बैठ गया। मुझे बिल्कुल डर नहीं लग रहा था क्योंकी इस वक़्त दिमाग पे लण्ड ही सवार था।

थोड़ी देर बाद लुबना उठ गई और उसके साथ में पेटियों वाले रकम में चला गया, क्योंकी वहीं मेरा देखा भाला था। रूम में जाकर दरवाजा बंद कर दिया अब खिड़की से बस चाँद की रोशनी आ रही थी। जिस वजह से मुझे लुबना धुंधली सी नजर आ रही थी। मैं आगे बढ़ा और लुबना को गले लगा लिया। उसके 32" इंच के मम्मे मेरी छाती में दब गये। ला उसको किस करने लगा गालों पे, गर्दन पे और हाथों से उसके चूतड़ मसलने लगा, जो बहुत नरम थे।

कुछ देर बाद लुबना भी जवाब देने लगी। उसने मेरे होठ को अपने होंठा में लिया और चूसने लगी। चूसना उसका भी बस नार्मल ही आता था, लेकिन मुझसे बहरहाल अच्छा चूस रही थी। मुझे भी अंदाजा हो गया की वो कैसे चूस रही है। मैं भी अब उसको वही जवाब देने लगा। इस वक़्त हमारे जिश्म भट्टी बने हुये थे। मैंने सलवार में हाथ डाले और उसके नंगी चूतड़ों को मसलने लगा और चूतड़ों की लकीर में गहराई तक उंगली फेरने लगा। मेरी उंगली को लुबना की गाण्ड का सुराख महसूस हो रहा था।

लुबना की अब सिसकियां निकालने लगी थी, मुझे उसने जोर से पकड़ा हवा था। फिर उसने अपना मुँह हटाया और मेरी सलवार घुटनों तक नीचे कर दी। कमीज में पहले ही नीचे उतार कर आया था। मेरा लण्ड झटके से बाहर हवा में लहराया, जिसको लुबना ने अपनी मुट्ठी में दबा लिया और उसको मसलने लगी।
 
मैंजे लुबना को फुसफुसाया- "तुम अपनी सलवार उत्तारो, मैं भी उतारता है."

लुबना नहीं मानी की कोई आ गया तो घर बाहर हो जायेगी।

मैंने उसकी गीली फुद्दी में उंगली फेरी और थोड़ी सी फुद्दी में डाली, और उसको दुबारा कहा- "प्लीज जानू उतारो ना सलवार..."

लुबना अब पूरा गरम हो गई थी उसने अपनी सलवार उतारी। मैंने भी अपनी सलवार उतार ली।

नीचे से अब हम दोनों नंगे हो गये थे। लुबना की कमीज पकड़कर ऊपर गले तक कर दी और वहीं गले में फैंमा दी। मैं आगे हवा और लण्ड को उसकी जांघों में घुसाया, जहां लुबना की गरम और गीली फुद्दी मेरे लण्ड को लगी। फिर दोनों हाथों से उसकी बा हटाकर उसके मम्मे पकड़ लिए। जो इस बात मेरे हाथों में आ रहे थे। जिपल टाइट थे जो इस वक़्त मेरी हथेली में चुभ रहे थे। मैंने अपना चेहरा नीचे किया और बायें मम्मे का निपल मुँह में ले लिया और चूसने लगा।

लुबना ने जीचे अपनी टांग बंद की, और हिलने लगी। जिससे मेरा लण्ड अंदर-बाहर हो रहा था। इस बात मेरा लण्ड भी उसके चिकनें पानी की वजह से गीला हो गया था और आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। मैं मजे से पागल हो रहा था और मेरी टांगें कांप रही थी। एक तो सेक्स का नशा और ऊपर से पकड़े जाने का भी डर था। क्योंकी माम मामी के सिर में ही तो हम मक्स कर रहे थे। लुबना के नरम मम्मे पकड़कर बहुत मजा आ रहा था। मैं साथ-साथ उनको दबा भी रहा था। अब में भी लण्ड को अंदर-बाहर कर रहा था। फिर थोड़ी देर बाद मैंने लुबना को गम में रखे एक लकड़ी के टेबल पे लेटने को कहा जो आम टेबलों से ऊँचा था।

लबजा को उसके ऊपर लिटाया। उसकी गाण्ड को टेबल के किनारे तक रखा और उसकी टांगें उठा ली। मैं आगे हुवा और लण्ड में थूक लगाया और लुबना की चिकनी फुद्दी के ऊपर फेरने लगा।

लुबना के कहा- "अंदर नहीं करना अली प्लीज... बहुत दर्द होगा और माम मामी भी बाहर हैं.."

मेरा लण्ड भी चुकी थोड़ा बड़ा था इस उम्र के लड़कों से। लेकिन मेरा दिल कर रहा था अब लण्ड अंदर डाल दूं। मैंने बहुत कोशिश की लुबना मान जाए, लेकिन वो डर रही थी। मैं भी फिर खामोश हवा और अपनी उंगली उसकी फुद्दी में डाल दी, जो धीरे-धीरे सारी अंदर कर दी और उंगली को हिला लगा। लुबना में भी हाथ बढ़ाकर मेरा लण्ड पकड़ लिया और उसकी मूठ लगाने लगी। टेबल पे मेरा हाथ एक कपड़े से टकराया तो देखा वो चादर थी। मैंने लुबना को छोड़ा और चादर नीचे बिछा दी। फिर लुबना को उस पे लेटने को कहा। जब वो लेट गई तो में भी उसके ऊपर लेट गया। लेकिन इससे पहले मैं टेर सारा थूक लण्ड में लगाना नहीं भुला।

मैंनें लण्ड को लुबना के जांघों में अडजस्ट किया और उसकी टाँगें बंद कर दी बगल से दबाकर। फिर लुबना और मैं पूरा लेट गये। मैं अब लण्ड को ऊपर नीचे कर रहा था। लुबना ने मेरा चहरा पकड़ा और किस करने लगी। लुबना भी अब चरम पे थी। मेरा हाल भी कुछ ऐसा ही था।

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अचानक लुबना के जिश्म ने झटका खाया और मुझे लण्ड में गरम-गरम कतरे गिरते हुये महसूस हुमें। इसके साथ ही मेरे जिश्म को भी झटके लगे, तो उसकी जांघों में मेरा लण्ड झटके खाने लगा। मुझे अपनी जान निकलती हई महसूस हो रही थी लण्ड के रास्ते। कुछ सेकंड बाद लुबना ने मुझे हटाया। मैं उठा और सलवार पहन ली। लुब्बना भी उठी और सलवार पहनकर बाहर चली गईं, और मुझे ताकीद करके गई 5 मिनट बाद आना तुम।

लुबना बाहर जाकर अपनी चारपाई पे लेट गईं। मैंने जाली वाली खिड़की से बाहर देखा और सब कुछ ठीक था। मैंने चादर उठाई और तह करकं वहीं टेबल पे रख दी, और बाहर निकल आया। दरवाजा बंद किया और वे आवाज चलता सीढ़ियां उत्तर गया और नीचे आकर लेट गया। फिर बहुत गहरी नींद आई मुझको, और सुबह 8:00 बजे खाला में उठाया की नाश्ता कर लो।

मैं चूंकी खाला से नाराज था। इसलिए उनको देखे बगैर उठा, वाशरूम गया, नहाकर फ्रेश हवा, नाश्ता किया। तब तक 10:00 बजने वाले थे।

बाजी अमीना मेरे पास आई और कहा- "किताबें ले आओ, अपना काम कर लो। बच्चे आने वाले हैं। तुम भी साथ ही लिख लेना अपना काम। लुबना भी कर लेगी अपना काम।

मैंने हाँ में सिर हिलाया। मैं उठा अंदर से अपनी किताबें ले आया, और जहां बाजी चयर रखकर बैठी थी, वहीं पास बैठ गया। जमीन पे दरी बिछाई हई थी। मैंने किताबें निकली और काम लिखने लगा। थोड़ी देर बाद सारे बच्चे जमा हो गये और बाजी भी चंपर पे बैठ गई। बाजी के पैर मुझसे एक फूट की दूरी पे थे। बहुत साफ सुथरे पैर थे उनके। नाटूनों पे में पोलिश लगाई हई थी उन्होंने।
 
बाजी ने कहा- "रात को ऊपर नया करने आए थे?"

ये बात बाजी ने हल्की आवाज में कही थी, जो मुझ तक ही पहुँच रही थी। मेरे तोते उड़ गये ये सुनकर। मैंने चेहरा ऊपर उठाया तो देखा बाजी मुश्कुरा रही थी। मेरा रंग उड़ गया था। मैंने हकलाते हुये कहा- "मैं तो रात को नीचे सोया था, ऊपर मैंने क्या करने आना था?"

बाजी ने कहा- "जो करने आना था, वो मैंने खिड़की से देख लिया था..."

मैं अब चुप हो गया। क्योंकी कुछ रहा ही नहीं था अब कहने को। मुझे तो मेरे लण्ड ने मरवा दिया आज। मैंने बाजी को कहा- "प्लीज... किसी को बताना नहीं। मैं आइन्दा ऐसा नहीं करूंगा प्लीज... बस एक चान्स दे दो..."

बाजी ने मुझसे कहा- "काई बात नहीं अली, इस उमर में ऐसा हो जाता है। फिकर नहीं करो मैं नहीं बताती। लेकिन तुम देख-भालकर ये काम किया करो। ऐसे काई और भी देख सकता है?"

मैं सिर हिलाया और दोबारा काम करने लगा। लेकिन दिल में एक डर बैठ चुका था कही, बाजी में बता ना दें किसी को? 12:00 बजे तक में काम लिखता रहा। फिर मैंने किताबें समेटी और उठ गया।

मामी जूबिया ने मुझे आवाज लगाई- "बेटा चलो चलें खेतों पे। तुम्हारे माम् का खाना भी लेकर जाना है हम भी वहीं खाएंगे। अपना भी साथ ले जाते हैं."

फिर मैं, मामी जूबिया और गबी खाला और लुबना जाने को तैयार हो गई। हम घर से पैदल ही निकले। गौंव से बाहर निकली और खेतों में बनी पगडंडियों में चलते हमें खेतों पे पहुँच गये। रास्ते में सिर्फ हरे खेत थे। 15-20 मिनट लगे हमको पहुँचने में। वहां पहुँचे तो खाला और लुबना वही दरी पे बैठ गई माम् के पास।

मैं और दोनों मामी घूमने निकाल गयें। मामी मुझे फसलें दिखा रही थी जामुन और अमरुद के दरख्त भी लगे हुये थे, जहां से तोड़कर हमने खाए। हम घूमते हुये एक जगह पहुँचे तो देखा वहां पे बड़ा पंप चल रहा था, जहां से खेतों को पानी दिया जा रहा था।

मैंने कहा- "चलो नहाते हैं यहां.." क्योंकी एक छोटी सी हौदी बनी हुई थी वहां।

मामी राबी भवे कहा- "ना भाई, मुझे तो नहीं नहाना। आप ही नहाओ.."

मामी जूबिया ने कहा- "चलो मैं नहाती हूँ अपने बेटे के साथ..." और मुश्कुरा दी मुझे देखकर।

फिर मामी राबी ने कहा- "मैं चलती हैं, तुम लोग आ जाना नहाकर..."

मामी जूबिया ने दुपट्टा उतारा और बगल में रख दिया। मामी ने यौन कलर का सूट पहना हवा था, जो काफी पतला था। मैंने कमीज उतारी और सलवार समेत पानी वाली हौंदी में उतर गया, जहां पंप का पानी गिर रहा था। पानी मेरे पेट तक आ रहा था। मामी भी पानी में आ गई। मामी को इतना पास देखकर और अकेला महसूस कर के मेरे जिस्म में सनसानी दौड़ रही थी।
 
मामी ने डुबकी लगाई। पानी से जब बाहर निकली तो मामी की कमीज जिएम के साथ चिपक गई थी। मामी के भारी मम्मै शेप में नजर आ रहे थे ब्रा के साथ। ऊपर से आधे मम्मे नंगे थे मामी के। मेरा लण्ड खड़ा होने लगा। मामी मुझसे दो फीट ही तो दूर खड़ी थी। मैंने डुबकी लगाई और मामी की जांघों को पकड़ लिया। मामी को लगा डर की वजह से मैंने उनको पकड़ा है। मामी की चूतड़ बहुत ज्यादा भारी हैं, उस हिसाब से उनकी जांघे भी बहुत मोटी-माटी थी। बेहद सेक्सी लगते हैं उन पे लगा।

मैंने पानी से सिर बाहर निकाला और सांस लेने लगा। मामी मुझे देखकर मुश्कुराई। मैंने कहा- "मामी बहुत प्रेशर है पानी का इसलिए आपको पकड़ लिया था..."

मामी बोली- "काई बात नहीं बेटा.."

मैं मामी के करीब हवा और उनको कहा- "मामी इकठे डुबकी लगाते हैं..."

मामी ने कहा- "ठीक है.."

मैंने लंबी सांस खींची और पानी में डुबकी लगा दी। मामी ने भी लगा दी। मैंने मामी का बाजू पकड़ लिया था मम्मे के पास से। दूसरे हाथ को मैंने उनके मम्मे पे रख दिया। मामी ने मुझे अपनी तरफ खींचा और में उनके साथ लग गया। मुझे बहुत मजा आया। मेरा खड़ा लण्ड उनकी जांघ से टकराया। हम फिर ऊपर उठे। सांस लिया और एक मिनट बाद फिर पानी पे इबकी लगाई। इस बार मैंने पोजीशन चेंज कर ली थी।

मैंने मामी की टॉग खोली और उनकी टाँगों में आ गया। आगे बढ़ा और कंधे को पकड़ लिया और नीचे में अपना जिश्म उनको लगा दिया। मेरा लण्ड सीधा उनकी फुद्दी के बराबर में एक बगल पे लगा। मैंने दो-तीन घस्में मारे और ऊपर आ गया। मुझे बहुत मजा आया ऐसा करके।

मामी भी जब पानी से बाहर आई तो मुझे अजीब नजरों से देखा, और मुश्कुराते हाँ कहा- "बड़े तेज हो तुम अली मुझे नीचे पानी में धक्के मार के गिरा रहे थे। अब देखना ऐसा किया ता में भी तुमको पकड़ लूंगी.."

मैं हँस दिया और कहा- "देखते हैं आप पकड़ लेती हो कि नहीं?"

कुछ देर बाद सांस लेकर दुबारा हमने पानी में डुबकी मारी। मैंने फिर वैसा किया। लेकिन कुछ ऐसा हवा की में मजे की इंतहा को पहुँच गया। मामी ने मुझे झप्पी वाले अंदाज में पकड़ा और अपनी खींचा। मामी ने अपनी टांगें खोली हुई थी। मेरा अकड़ा हवा लण्ड सीधा उनकी फुददी पे जा टकराया। मुझे एक्दम लण्ड में गरम सा और नरम सा एहसास हवा।

मैंने बे-इख्तियार वहां लण्ड को झटका दिया, जिससे मंरा चुभ सा गया मामी की फुद्दी पे। ऊपा में हाथ मामी के मम्मों के ऊपर आ गये, क्योंकी बचने के लिये मैंने हाथ आगे किए जो सीधा मम्मों से टकराए मैंने उनको भी पकड़कर मसल दिया। ये सारा दृश्य 30-40 सेकेंड में हुवा। क्योंकी इतनी देर ही सांस रोका जाता था मुझसे। मैं पानी से बाहर आया और जोर-जोर से सांस लेने लगा, क्योंकी जो कुछ नीचे हवा था वो मेरे लिये हैरत था। दिल तेज-तेज धड़क रहा था।

मामी भी ऊपर आई और हँसते हसे कहा- "अब बताओ आया मजा?"

में भी हँस दिया। क्योंकी मुझे अब इस खेल में मजा आने लगा था। मेरा मूड और ज्यादा मुझे ऐसा करने को कर रहा था। इस बार मुझे शरारत सूझी। मैंने सलवार घुटनों तक पानी के अंदर ही उतार ली, जिसका मामी को पता नहीं चला, और नीचे पानी में जाते हुये मैंने मामी की कमीज का पल्लू आगे से पकड़ लिया। जैसे है वो नीचे हुई कमीज ऊपर हो गई उनकी जांघों से।

मामी ने मुझे दुबारा वैसे ही पकड़ लिया और मेरा नंगा लण्ड सीधा उनकी पतली सलवार के ऊपर से फुद्दी में लगा मैंने वहां 3-4 घस्से मारे और पानी के अंदर ही मामी के गाल में किस किया। जैसे मैं मामी से चिपका हवा था मुझे ऐसे चिपकना बहुत मजा दे रहा था। पानी के अंदर ही मुझं मामी की सिसकी सुनाई दी।

मैं ऊपर हवा। मामी बाद में ऊपर हई और अपना एक हाथ मेरे नंगे लण्ड पे रखा और दबा दिया। ये एक सेकंड के लिये था, लेकिन में उछल ही तो पड़ा। उधर मामी भी हैरान थी जब ऊपर आई, क्योंकी उनको मेरा लण्ड बड़ा लगा था। उनकी सोच से ज्यादा बड़ा।

मैने मामी को कहा- "मामी बहुत मजा आ रहा है। जब आप पकड़ती हो तो और ज्यादा मजा आता है। आपके जिश्म के साथ लगना मुझे बहुत अच्छा लग रहा है."
 
मामी मुश्कुराई और कहा- "लो बेटा, तुम चिपक जाया करो मुझसे फिच । क्या हुवा बेशक झप्पी लगा लिया करो बेटा। मैं तुम्हारी मामी हैं कोई गैर थोड़ी हूँ। तुम तो मेरे प्यारे से भान्जे हो.." कहकर मामी ने मुझे गले लगाया और सिर पे किस की।

मामी ने कहा- "चलो अब चलते हैं। काफी टाइम हो गया है। वहां सब इंतजार कर रहे होंगे.."

हम दोनों पानी से बाहर आ गये और थोड़ी देर धूप में खड़े हो गये ताकी पानी निचुड़ जाए। मेरा लण्ड अभी भी पूरा होशियार खड़ा था, जो गीली सलवार में साफ नजर आ रहा था। मामी की नजर मेरे लण्ड पे पड़ी और गौर में मेरे लण्ड को देखने लगी। मैं शर्मा गया और लण्ड को टांगों में फंसा लिया। ऐसा करतं मामी ने देखा तो जोर-जोर से हँसने लगी। मेरी झिझक भी कम हो गई और मैं भी जवाब में हँस दिया।

मैंने कमीज पहनी और मामी में दुपट्टा लिया और डेरे में आ गये, जहां वो लोग खाना खा रहे थे। हम भी बैठ गये और खाना खाया। फिर मामी और खाला ने बर्तन समटे और घर की तरफ चल दिए। घर पहुँचकर सब लेट गर्य, क्योंकी थके हुसे थे और खाना खाया था तो सुस्ती चढ़ रही थी। मैं नानी के रूम में जाकर चारपाई पे लेट गया। जानी सो रही थी। मुझे कब नींद आई पता नहीं चला।

मेरी आँख तब खुली, जब मुझे अपनी चारपाई में दूसरा बंदा महसूस हवा, जो मेरे साथ लेटा हवा था। मैं पूरी तरह जब जागा तो देखा वो खाला थी। आज सुबह से मैंने खाला से कोई बात नहीं की थी। हालांकी खाला ने एक-दो बार मुझे बुलाया था, लेकिन मैंने हूँ हाँ में जवाब देकर बातें खतम कर दी थी। खाला को पता चल गया था की मैं रात के वाकिये से नाराज हूँ।

खाला ने मुझे अपने साथ भींच लिया और कहा- "मेरा प्यारा बेटा मुझसे नाराज है?"

मैंने कहा- "हौं नाराज हैं। आपने मेरे साथ अच्छा नहीं किया.."

खाला ने मुझे चूमा और अपने मम्मों में मेरा मुँह दबाया और थपका मुझे। एक टांग खाला ने मेरे ऊपर रखी हुई थी। मैंने करवट ली और खाला की तरफ हवा, खाला की टांग अब भी मेरे ऊपर थी। मुझे खाला की आगोश की गर्मी पिघला रही थी और मेरा गुस्सा खतम हो रहा था।

खाला ने कहा "बेटा मुझे नींद आ रही थी। तुमको पता ता है इतना सफर करके आए थे इसलिये ऐसा हवा..."

मैंने कहा- "खाला आप मुझे वैसे ही कह देती तो में चला जाता। आपकी वजह से मेरा मूड गत से खराब था।

खाला ने कहा, "मैं अपने पाले बेटे का मूड ठीक कर देती है." खाला लाड़ से मुझसे बात कर रही थी इसलिए प्यारे को पाले बोलकर बात कर रही थी।

नीचे से मेरा लण्ड सिर उठा रहा था और लण्ड के निशाने पै ठीक खाला की फुद्दी थी। खाला मुझसे पूरा चिपकी हुई थी। मैंने खाला के मम्मों में किस की और कहा "आइन्दा आपने ऐसा नहीं करना, वरना मैंने आपसे नाराज हो जाना पक्का पक्का।

खाला ने कहा "नहीं बेटा मैं अब नाराज होने ही नहीं दूंगी अपने सोने बेटे को...' और खाला मुझे चूमने लगी।

मैंने चेहरा ऊपर किया तो खाला के होंठ मेरे होंठों से लग गये। खाना में वहां भी मुझे चमा जैसे गाल पे चूमते हैं। मैंने खाला के होठों पे किस की और खाला का निचला होंठ अपने होंठों में दबाया और चूसने लगा। क्योंकी गत को मुझे पता चल चुका था कैसे चूसते हैं।

खाला ने अपना होंठ खींचा और कहा- "बेटा से नहीं करते, बस ऊपर में किस करते हैं.."
 
नीचे से मेरा लण्ड खड़ा हो गया था, जो खाला की जांघ के अंदर की तरफ छू रहा था। मैंने कहा "खाला मुझे आपके होठ बहुत नरम लगते हैं। इसलिए चूसने को दिल किया और चूस लिया। खाला और चूसने दें ना अपने होंठ मुझे.."

खाला मान गई और कहा- "अच्छा चूस ली लेकिन बताना नहीं किसी को की खाला को यहां किस करते हो.."

मैंने कहा- "ठीक है खाला, नहीं बताता। खाला आप बहुत अच्छी हो..."

खाला मुश्कुराई। मैं फिर खाला का निचला होंठ पकड़ा और चूसने लगा। एक अलग ही टेस्ट आ रहा था खाला के होंठा से, फीका सा लेकिन मुझे क्या था। मैं उनके ऊपरी होंठ को भी होंठों में लिया और चूसता रहा। फिर मैंने देखा की खाला की आँखें बंद हैं, उन्होंने अपने साथ मुझे दबाया हुवा था।

मैंने अपने होंठ हटाए तो खाला ने आँखें खोली और पूछा- "क्या हुवा बेटा?"

मैंने कहा- "कुछ नहीं खाला.." और मेरे चेहरे पे शरारती मुश्कान थी। मैंने फिर खाला के नरम और सुर्ख गाल अपने होंठ में दबाए और उनको चूसने लगा, साथ में अपनी जुबान भी टच कर देता बीच-बीच में उनके गाल पे।

खाला ने कहा "गंदा... बहुत शैतान हो गये हो तुम। सुधार जाओ अभी..."

मैंने दोनों गालों पे ऐसा किया। रूम में इस वक्त अंधेरा था बस हल्की-हल्की रोशनी आ रही थी बाहर से। मैंने अपने लण्ड को हरकत दी और खाला की फुद्दी पे दबा दिया और खाला के जांघ पे हाथ रख दिया जो मेरे ऊपर रखा हवा था खाला ने। मेरी उंगली धस गई खाला के मोटे गोस्त से भरी हुई जांघ में।

खाला थोड़ी सी आगे हई जिससे मेरा लण्ड अच्छी तरह उनकी फुद्दी पे दब गया। मुझे अपने लण्ड पे खाला की फुद्दी की गमी अच्छी खासी महसूस हो रही थी। मैं बहुत खुश हवा की खाला ने काई रोक-टोक नहीं की अभी। मैंने चहरा नीचें किया और खाला के मम्मों में किस की। मैंने कहा- "खाला मुझे आपकी बनियान में किस करनी है." बनियान वाला वाकिया आप ऊपर पढ़ा होगा इसलिए मैंने जानबूझ के बनियान कहा।

खाला ने कहा "अच्छा बेटा... आज तो तुम मुझसे खूब बदला ले रहे हो रात की नाराजगी का..."

में हंसा और कहा- "अब नाराज हुई तो इससे भी ज्यादा करणगा.."

खाला ने कहा "मेरी तौबा जो अब किया तुमको नाराज.."

मैंने खाला की कमीज ऊपर की जिसमें खाला ने भी हेल्प किया थोड़ा उठकर। खाला ने आज पिंक वा पहना हवा था। मैंने कहा- "खाला आज तो बहुत खूबसूरत बनियान पहनी है अपनें..." और अपने होंठ उनकी वा पे रख दिए,

और अपना एक हाथ भी उनके गरम मम्मे पे रख दिया। ब्रा के ऊपर खाला के आधे मम्मे नंगे थे। मैंने वहां होंठ लगाए और गोस्त को होंठ में दबाया और चूसने लगा।

खाला ने कहा "ना करो बेटा, गुदगुदी होती है."

खाला सिमकियों को दबाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन मुझे दबी-दबी सिसकियां सुनाई दे रही थी। मैंने खाला के आधे नंगे मम्मे चूक से गीले कर दिये थे। मैंने ऊपर चेहरा किया और दुबारा खाला के होंठ चूसने लगा। इस बार खाला ने भी जवाब दिया मुझे, शायद वो भी गरम हो गई थी। मेरा हाथ जो मम्मे पर था उस हाथ से खाला का मम्मा पकड़ कर दबाने लगा। खाला का मम्मा इतना बड़ा था शायद दो हाथों में पूरा आता। मैं इस वक़्त पूरा मजे में था। लण्ड फटने वाला हो रहा था। मैं अब जोर-जोर से लण्ड रगड़ने लगा खाला की फुद्दी पे। इस वक़्त खाला मुझे रोक नहीं रही थी, बल्की खुद भी मजा कर रही थी।

हम दोनों सेक्स में मस्त थे की अचानक नानी की चारपाई चरचराई, शायद नानी उठ रही थी। खाला को एकदम जैसे होश आया। वो मुझसे अलग हुई और उठकर बाहर चली गई। मैं इस बार वक़्त को कोसता रह गया, जो बीच में ही में रह गया था। मजबूरन थोड़ी देर बाद में भी उठ गया। टाइम देखा तो शाम के 6:00 बज रहे थे। बाहर निकला हाथ मुँह धोया, और सहन में बैठ गया। खाला मुझे शरारती नजरों से देख रही थी।

में मुश्कुराया और खाला के पास उठकर गया और पूछा- "क्या हवा खाला, बड़ी हैंसी निकल रही है आपकी?"

खाला ने कहा "कुछ नहीं बेटा, बस तुमको खुश देखकर में भी खुश हो रही हैं."

मैं भी फिर मुश्कुरा दिया। रात तक बातें होती रही। दोनों माम् भी आ गये हुये थे। लेकिन बड़े माम को खेतों पे वापस जाना था। क्योकी आज रात पानी की बारी थी उनकी खेतों पे। इसलिए फैसला हबा की में आज ऊपर लेट्गा मामी जूबिया और लुबना के साथ। बाजी अमीना और खाला नीचे दादी के पास। छोटे माम और मामी राबी को आलरेडी रूम में सोना था उनको।
 
मैं भी फिर मुश्कुरा दिया। रात तक बातें होती रही। दोनों माम् भी आ गये हुये थे। लेकिन बड़े माम को खेतों पे वापस जाना था। क्योकी आज रात पानी की बारी थी उनकी खेतों पे। इसलिए फैसला हबा की में आज ऊपर लेट्गा मामी जूबिया और लुबना के साथ। बाजी अमीना और खाला नीचे दादी के पास। छोटे माम और मामी राबी को आलरेडी रूम में सोना था उनको।

जब खाना खाकर फारिग हमें तो बाजी अमीना ने कहा- "चलो बाहर टहलकर आयें..."

खाला ने तो मना कर दिया और लबना ने भी।

बाजी ने कहा- "अली, चलो तुम और मैं चलते हैं...

मैंने कहा- "ठीक है.."

हम घर से बाहर निकल आए। बाहर गलियों में अंधेरा था। अभी हम गली को नुक्कड़ पे पहुँचे तो सामने से एक लड़का आ रहा था। जब करीब आया तो हमको देखकर रुक गया, और बाजी में हाय हेला की और कुछ इशारे भी किए बाजी को। जो मुझे तो समझ में नहीं आई लेकिन बाजी समझ गई। वो लड़का निकल गया आगें, और हम भी चल पड़े।

मैंने बाजी से पूछा, "ये कौन था?"

बाजी ने कहा- "मेरी दोस्त का भाई है..."

मैंने हाँ में सिर हिलाया। गाँव के आखीर में पहुँचें जहां से आगे फसलें शुरू होती थी।

वहां बाजी अचानक रुकी और कहा- "अली तुम रुको एक मिनट... मुझे बहुत तेज पेशाब आया है मैं करके आई."

और बाजी एक तरफ चल दी।

वहां कुछ दूर एक झोपरी टाइप कच्चा कमरा बना हवा था। बाजी उस तरफ गई। अंधेरा बहुत था मुझे इर भी लग रहा था इतने अधेरे में अकेला खड़ा रहकर। जब कुछ देर तक बाजी नहीं आई तो मैं उस तरफ चल दिया झोपड़ी की तरफ, क्योंकी अब तक उनको आ जाना चाहिए था। मैं अभी झोपड़ी से 10-12 कदम दूर ही था की मुझे झोपड़ी से कुछ आवाजें आने लगी। मेरे कान खड़े हो गये की यहां कौन है बाजी के इलावा और? मैं करीब गया उस कमरे के। दरवाजा दूसरी तरफ था लेकिन पीछे से दो-तीन जगह सुराख थे बड़े-बड़े। मैंने वहां से अंदर देखा तो मेरा दिल उछलकर गले में आ गया, दिल 100 की स्पीड से धड़कने लग। क्योंकी दृश्य ही ऐसा था।

अंदर बाजी दीवार के साथ घोड़ी बनी हुई थी। उनकी सलवार घुटनों तक नीचे थी और एक लड़का पीछे खड़ा उनकी फुदी मार रहा था। मुझे हल्का-हल्का सा नजर आ रहा था, वो भी चाँद की रोशनी की वजह से। लड़के ने अपने हाथ बाजी की कमीज में डाले हमें थे, और शायद उनके मम्मे पकड़े ही थे। मैं हैरान परेशान बाजी का चुदता हुवा देखता रहा। मैं समझ गया ये पहले भी यहां मिलते रहते होंगे। यहां तो दिन में भी कोई नहीं आता होगा, क्योंकी वीरन सी जगह थी। मुझे होश तब आया जब उन दोनों की सिसकियों की आवाज तेज हो गई।

बाजी ने कहा- "जल्दी कर लो पार, बाहर अली खड़ा है, वो कहीं आ ही ना जाए."

इसके साथ है लड़के ने लण्ड बाहर निकाला और अपना पानी गिराने लगा। इस दौरान लड़के का चेहरा मुझं बगल से दिखा और में पहचान गया क्योंकी ये वहीं लड़का था जो वहां हमें गली की नुक्कड़ पे मिला था। मैं फटाफट निकला वहां से और तेज-तेज चलता अपनी जगह पै पहुँच गया। मंरा रंग उड़ा हबा था। लेकिन अंधेरे की वजह से पता नहीं चल सकता था किसी को।

बाजी आई और कहा- "चला चलते हैं.."

मैंने कहा- "बहुत देर लगा दी। मुझे यहां डर लग रहा था.."

बाजी ने कहा- "वो झाड़ियों में दुपट्टा फंस गया था निकलने में टाइम लगा.."

मैंने दिल में सोचा- "हाँ मुझे पता है क्या कहाँ से निकाला है." हम घर आ गये। तब तक में रिलैक्स हो चुका था काफी हद तक

बाजी बहुत चहक रही थी। वो आते ही टायलेट गई थी। मैं समझ गया अपनी सफाई करने गई हैं। फिर मेरे पास

आई और धीरे से कहा- "आज तो तुम्हारी मौज है ऊपर ही साना है तुमने..."

मैं अंजान बनकर पूछा- "कैसी मौजा."
 
बाजी बोली- "लुबना के साथ कर लेना जो करना होगा..'

मैंने कहा- "मामी होती हैं वहां। में तो नहीं करूंगा.."

बाजी बोली- "कल तो फिर कर लिया था तुमने... तब तो तुम्हारे मामू भी ऊपर थे."

मैं हकलाया और कहा- "वो तो बस ऐसे ही हो गया था.'

बाजी मुश्कुराती हुई उठकर अंदर चली गईं। मैं सहन में बैठा आज की वारदात के बारे में सोचता रहा, जो बाजी ने की थी बाहर। मैं अब समझ रहा था बाजी इतनी फुदकती क्यों है? क्योंकी वो लण्ड ले चुकी थी अब उसकी झिझक दूर हो गई हुई थी।

खैर, मैं उठा और किचन में गया। वहां मामी जबिया बर्तन धो रही थी। मैं उनके पास गया और कहा- "मामी आज मैंने भी ऊपर सोना है आपके साथ...'

मामी ने कहा- "मेरे साथ तो नहीं। हौं अलग चारपाई पे सोना है तुमनें..." और हँस दी।

मैं भी शमिंदा सा हँस दिया, और कहा- "मेरा वा मतलब नहीं था। मैं भी यही कह रहा था मतलब साना तो अलग ही है..."

मामी बोली- बेटा, मैं भी वैसे ही कह रही थी। बेशक मेरे साथ सो जाना तुम.."

मैं खुश हो गया और पीछे से मामी को झप्पी लगाकर गाल पे किस कर दी और नीचे से लण्ड को उनकी भारी चूतड़ों में टिका दिया। किस करके अलग हवा और कहा- "मामी फिर तो मैं आपके साथ ही साऊँगा "."

मामी बोली- "अच्छा सो जाना बेटा... लेकिन लुबना पहले सा जाए फिर तुम आ जाना मेरी चारपाई ..."

मैंने कहा- "ठीक है मामी.." और पीछे होते हुये मैंने मामी की मोटी और नरम गाण्ड पे चुटकी काट दी।

मामी आगे हई और कहा- "बहत शैतान हो गये हो तुम। तुम्हारा इलाज करना पड़ेगा..."

मैं हँसता हुवा बाहर निकल आया। बाहर सहन में खाला बैठी हुई थी और कोई भी नहीं था। खाला को अकेला देखकर लण्ड ने अंगड़ाई ली। मेरा दिल किया खाला को झप्पी लगाऊँ, लेकिन जगह नहीं थी वहां। मुझे अचानक एक खयाल आया। बैठक सहन से कुछ दूर बाहर गेट के साथ थी।

मैं खाला के पास गया और उनको कहा- "खाला एक मिनट बैठक में आना आप मेरे साथ.."

खाला ने कहा, "क्यों वहां क्या है?"

मैंने कहा- "खाला आओ तो सही, फिर बताता हूँ आपको... मैंने नजर भी रखी हुई थी इधर-उधर।

मैंने खाला का हाथ पकड़ा उनको उठाया, तो खाला मेरे साथ चल पड़ी। खाला में भी एक बार पूरा घर पे नजर डाली, शायद उनको आइडिया हो गया था। हम दोनों बैठक में चले गये लाइट आफ ही रहने दी। दरवाजे के साथ ही खड़े हो गये। मैं आगे बढ़ा और खाला को बाहों में ले लिया, और उनको एक किस कर दी गाल पे। लण्ड मेरा पहले ही खड़ा हो चुका था उत्तेजना के मारे। जो इस वक़्त खाला की जांघों में दबा हवा था।

खाला ने कहा, "ये काम था क्या?"

मैंने कहा- "हाँ खाला, यही काम था.."

खाला ने कहा "बड़े तेज हो तुम वैसे। इस बात किसी को भी नहीं पता हम यहां हैं.." और खाला ने मुझे अपने बाजू में दबा लिया।
 
मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था जैसे कुछ होने वाला हो। मैंने हिम्मत करके खाला के होठों पे किस कर दी। फिर खाला ने मुझे भी की। मेरी हिम्मत बढ़ी में खाला के होंठों को चूसने लगा, और हाथ नीचे ले गया खाला के नरम चूतर पकड़ लिए। मैंने मुँह हटाया और कहा- "खाला ये बहुत नरम हैं आपके.."

खाला ने कहा- "बेशर्म... ऐसी बात नहीं करतंसाथ ही मुझे उनके हँसने की आवाज आईं- "चला वहां में हाथ हटाओ.."

मैंने कहा- "नहीं खाला, मुझे अच्छा लग रहा है यहां आपको हाथ लगाकर..."

खाला ने कहा "देख लो बेटा, तुम मुझसे नाजायज चीजें भी मनवा रहे हो। मैं सिर्फ तुम्हारे प्यार में मान जाती है। लेकिन ये किसी को बताना नहीं, जो तुम करते हो मेरे साथ.."

मैंने कहा- "नहीं बताता खाला। मैं आपका भला कैसे बदनाम कर सकता है."

खाला चुप हो गई। मैं दुबारा खाला को किस करने लगा खाला भी जवाब दे रही थी। नीचे मैं खाला की पूरी गाण्ड पे हाथ फेरने लगा। आगे मेरा लण्ड उनकी जांघों पे रगड़ खा रहा था।

फिर खाला ने कहा- "चलो अब चलते हैं कोई आ ना जाए इस तरफ?" खाला ने बाहर देखा पहले। किसी को ना पाकर बाहर चली गई। मैं भी पीछे-पीछे बाहर आ गया।

कुछ देर बातों में गुजारा और सब सोने के लिये उठाने लगे। मैं ऊपर चला गया पहले हो।

लुबना ऊपर आई उसने मुझे कहा "अली आज प्लीज... कुछ ना करना। मामी पास ही हैं। उनको पता चल जायेगा."

मैंने कहा- "ठीक है मेरी जान ... जैसे तुम चाहो.."

लुबना ने मुझे किस की और बिस्तर बिछाने लगी। मैं बीच में लेट गया चारपाई पे। लुबना सीदियों के साथ और आखीर में मामी की चारपाई थी। फिर मामी ऊपर आई और दुपट्टा उतारा और लेट गई चारपाई पे।

मामी ने मुझसे कहा- "बेटा टोंगे दबा दो, बहुत दुख रही हैं."

में बड़ा खुश हुवा की मामी के जिश्म को हाथ लगाने का मौका मिल रहा है। मैं उठा उनकी चारपाई पे बैठ गया लुबजा की तरफ पीठ करके ताकी उसको कुछ नजर ना आए। में लुबना और मामी बातें भी कर रहे थे साथ साथ। मैंने मामी की टांगें घुटनों के नीचे से दबाना शुरू किया, और धीरे-धीरे ऊपर आ गया उनकी जांघों पें।

मामी एक बार हिली, और कहा- "बेटा यहां से ही दबाओं जरा जोर से। यही से दख रही हैं."
 
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