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Incest खाला जमीला

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कड़ी 08

अब्बू ने रिक्शा करवाया हवा था लारी अइडे के लिये। हम रिक्शा में बैठे, जो बाहर आ गया हुवा था। अब्बू साथ जा रहे थे लारी अड्डे पे बिठाने। लारी अइडे पहुँचे तो बस तैयार थी। अब्बू ने हमको क्स में बिठाया और क्लीनर को खयाल रखने की ताकीद की और वापस चले गये।

बस में सबसे आखिर में थी हमारी सीटें। हम तीनों वहां जाकर बैठ गये। एक सीट खाली थी वहां अभी कोई नहीं बैठा था। मैं बीच में बैठा था जानबूझ कर। बायें साइड खिड़की के साथ लुबना बैठ गई साथ में फिर खाला बैठ गई।

थोड़ी देर बाद बस चल पड़ी। ड्राइवर ने अंदर की लिइटें बंद कर दी। मैं लुबना की तरफ चेहरा किया और उससे गाँव की बातें करने लगा, और अपने बायें हाथ से उसका हाथ पकड़ लिया। हम दोनों खिड़की से बाहर ही देख रहें थे जी.टी. रोड की लाइटें साइनबोर्ड बगेरा। मैं उसके साथ जाकर बैठा हवा था। थोड़ी देर बाद लुबना ऊँघने लगी और आखीरकार, वो सीट से टेक लगाकर सो गई थी।

हम शहर से बाहर आ गये थे और बस तेजी से जा रही थी अपनी मंजिल की तरफ। बस में तकरबन सभी लोग

सो रहे थे या ऊँघ रहे थे। लेकिन मुझे नींद नहीं थी आ रही थी। मैं खाला की तरफ देखा तो खाला जाग रही थी। मैं खाला की तरफ खिसका और उनसे सटकर बैठ गया और अपना सिर उनके कंधे पे रख दिया।

खाला ने मुझे अपने बाजुओं के अंदर में ले लिया और सिर में किस की मुझे और कहा- "सो जाओ बेटा अभी.."

मैंने अपना दायां बाजू खाला के पीछे से घुमाकर और अपना बाया बाजू खाला के दुपट्टे के नीचे से गुजाकर उनके भारी मम्मों के नीचे पेट पे रख दिया। पीछे से जो बाज डाला था वो मैने खाला के दायें कंधे पे रख दिया

था। मेरा मुँह खाला के बायें मम्मे और कंधे पे था। पोजीशन की आप लोगों को समझ तो आ गई होगी।

मैने खाला के कंधे और मम्मों के बीच में दुपट्टे के ऊपर से ही किस की और खाला को कहा- "मुझं ऐसे ही सुला दें..."

खाला मुश्कुरा दी और कहा- "ऐसे ही क्यों सोना है? आराम से टेक लगाकर सो जाओ..."

मैंने कहा- "नहीं खाला, मुझे ऐसे ही अच्छे से नींद आयेगी आपके साथ लगकर..."

खाला ने कहा "मैं इतनी अच्छी लगती हूँ तुमका?"

मैंने कहा- "हाँ खाला, आप मुझे सबसे ज्यादा अच्छी लगती हो। आप तो मेरी प्यारी खाला हो." और चेहरा ऊपर करके खाला के गाल में किस कर दी।

खाला थोड़ा शर्मा गई और कहा- "देख तो लिया करो हम कहां बैठे हैं, बस शुरू हो जातें हो तुम... और मुश्कुरा भी रही थी खाला बात करने के साथ मैं भी मुश्कुरा दिया। मुझे शरारत सूझी। मैंने फिर से खाला को गाल पे किस कर दी। खाला ने मेरी तरफ देखा। हम दोनों एक दूसरे को देखते हुये मुश्कुरा दिए।

खाला ने मुझे अपने बाजू से दबाया और कहा- "बहुत शरारती हो गये हो तुम.."

मेरा जो हाथ खाला के दुपट्टे के नीचे उनके पेट पर मम्मों के नीचे था, मैं अब हाथ को उनके पेट पर घुमा रहा था। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं पूरा खाला के साथ चिपका हुवा था। मुझे खाला का नरम गरम जिश्म अच्छी तरह महसूस हो रहा था। मैं बहुत मज़े से खाला से लिपटा हुवा था।

मैंने खाला को कहा- "खाला एक बात कहैं..."

खाला ने कहा "हाँ बोला.."

मैंने कहा- "आप बहुत मुलायम मुलायम सी हैं। दिल करता है आपसे लिपटा ही रहूँ.."

खाला बोली- "ओह्ह... मेरे बेटे को इतनी अच्छी लगती ह मैं उम्म्म्म... आहह.. और खाला में थोड़ा झुक के मेरे गाल में किस कर दिया।

मैंनें कहा- "मुझे बहुत मजा आता है जब आपके पेट में हाथ फेरता है."

 
हम खाला भांजा फुसफुसाहट में बात कर रहे थे ताकी काई दूसरा सुने नहीं। लुबना गहरी नींद सो रही थी। मैं खाला के कहा के पास मुँह करके बात कर रहा था और खाला जब जवाब देती थी तो उनको श्रीड़ा झुकना पड़ता था। जिससे उनके मम्मे मुझे अपने हाथ और बाजू में महसूस होते थे। ऐसी हालत में बैठे हमें मेरा लण्ड इस बत पूरा अकड़ा हवा था और झटके पे झटके मार रहा था।

मैं अब बात करते हुये जानबूझ के खाला के कान को अपने होंठों से चू रहा था ताकी खाला भी गरम हो जायें और मुझे रोके नहीं। खाला भी अपने एक हाथ में मुझे थपक रही थी। गाड़ी में सब मो गये थे। सिर्फ बस के एंजिन की गो-गों की आवाज आ रही थी। जी.टी. रोड से भी इस बढ़त कोई-कोई गाड़ी गुजर रही थी। हमको एक घंटा हो गया था च ले हुये।

मैंने खाला से कहा- "खाला मुझे आपके पेट में हाथ रखना है."

खाला में कहा "नहीं बेटा, कोई देख लेगा घर जाकर लगा लेना."

मैंने थोड़ा डरकर ये बात कही थी। लेकिन खाला शायद मुझे बच्चा समझ के सीरियस नहीं ली बात को। जब मैंने देखा खाला ने गुस्सा नहीं किया तो मुझे होसला मिला और में बार-बार कहता रहा तो खाला मान गई।

खाला ने इधर-उधर देखा और मुझसे कहा- "चलो रख लो.."

मैने खाला की बगल से हाथ अंदर डाला और अपना हाथ उनके नंगे पेंट पे रख दिया। खाला का पेंट गरम था और नरम भी बहुत था। जरा सी उंगली दबाओ तो घुस जाती थी।

खाला ने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा- "घुमाओं नहीं, मुझं गुदगुदी होती है..."

लेकिन मैं हाथ छुड़ाकर हाथ घुमा रहा था। मैं हाथ घुमाता नीचे आया तो मेरी उंगली खाला की नाभि में गई। तो खाला में अपना पेंट पीछे को खींचा और फुसफुसाई- "नहीं करो, वरना मैंने हाथ निकाल देना है..."

मैंने हाथ निकाल लिया।

खाला ने कहा "चलो अब सो जाओं, बहुत टाइम हो गया है। मैं भी सोने लगी हूँ.." कहकर खाला में दुपट्टा पकड़ा और मेरे सिर के ऊपर डाल दिया और कहा- "सो जाओं बेटा अभी..."

मेरा हाथ अभी भी खाला के पेंट पे था। जब दुपट्टा मेरे ऊपर दिया तो मेरा चेहरा खाला के बायें भारी मम्म के ऊपर आ गया। मैंने वहां अपना चेहरा दबा दिया। खाला मुझे थपक रही थी। मैंने अपनी बापी टांग उठाई और खाला की मोटी जांघ पे रख दी, तो मेरा लण्ड बगल से उनकी जांघ को छू गया। खाला थोड़ी हिली लेकिन चुप रही। मेरा घुटना खाला की नरम जांघ के ऊपर था। मैं इस वक़्त पूरा सेक्सी मूड में था, दिमाग बेखौफ हो रहा था। मैंने हाथ ऊपर किया तो खाला की ब्रा को छू गया। मैंने वहां उंगली घुमाई और बा के बीच में आया, जहां थोड़ा सा सुराख था। मैंने वहां उंगली घुसाई तो उंगली ऊपर चली गई, और उंगली में मुझे खाला के मम्मे महसूस हुये।

खाला ने मेरा हाथ पकड़ा और बाहर निकाल दिया, और फुसफुसाकर कहा- "ना करी बेटा। मुझे नींद आ रही है, मैंने सोना भी है.."

थाड़ी देर बाद मेरी भी आँख लग गई। क्याकी खाला मुझे थपक रही थी। फिर आँख तब खुला जब बस ने एक जगह स्टाप किया रोड किनारे एक होटल पे ताकी लोग फ्रेश हो जाए।

मुझे खाला ने मुझे उठाया और कहा- "नीचे उत्तरों फ्रेश हो जाओ...

लुबना पहले की जागी हुई थी। मुझे देखकर स्माइल की उसनें। इस वक्त 4:00 बजे का टाइम हो गया था। हम सब नीचे उतरे वाशरूम से फारिग हुये तो खाला ने हमको चिप्स और जूस लेकर दिया। 15-20 मिनट बाद दुबारा हम बस में बैठ गये थे।

लुबना और मैं बस में बैठकर कांप रहे थे और बातें भी कर रहे थे। बस फिर चल पड़ी थी। लुबना में मुझे आँख मारी सबसे नजर बचक्कर। मैं समझ गया ये मस्ती के मूड में है। मैंने अपना हाथ इसकी जांघ में रख दिया

और मसलने लगा। बस में अधेरा था। लुबना में मेरा हाथ पकड़ा और अपनी सलवार में डाल दिया। मैं तो चकित हो गया और चोर नजर से खाला की तरफ देखा की कहीं वो देख ना रही हों।

लेकिन खाला आँखें बंद किए टेक लगाकर बैठी हुई थी।

मेरा जब हाथ सलवार के अंदर गया तो मैंने लुबना की फुद्दी पे रख दिया और वहां उंगली घुमाने लगा। फुद्दी पे हल्के-हल्के बाल थे। अब लुबना की फुद्दी गीली हो रही थी, जिसको मेरा हाथ महसूस कर रहा था। मैं अपनी बीच वाली उंगली उसकी फुद्दी की लकीर में ऊपर नीचे कर रहा था और फुद्दी के छेद में दबाओ भी डाल रहा था। लुबना मजे से आँखें बंद किए अपने होंठों को काट रही थी। मैं इधर-उधर नजर भी रख रहा था, स्पेशली खाला पे नजर थी मेरी।

कुछ देर बाद मैंने उंगली को फुद्दी के छेद में डाला तो दर्द की वजह से लुबना ने आँखें खोली और मेरा हाथ पकड़ लिया और जा में इशारा किया। मेरा अभी उंगली का तिहाई हिस्सा हो गया था अंदर। लेकिन मैंने उंगली दबाये, रखी बाहर नहीं निकली। लुबना सीट पे लेटने के अंदाज में बैठी हुई थी, जिस वजह से उसकी फुद्दी उठी हुई थी और मुझे उंगली करने में आसानी हो रही थी। लुबना जब रिलैक्स हुई तो मैं इतनी उंगली को ही आगे पीछे करने लगा। लुबना में मेरा बाजू पकड़ लिया लेकिन रोका नहीं, शायद उसका भी मजा आने लगा था।

मैं धीरे-धीरे दबाओ डाल रहा था। अब मेरी आधी उंगली उसकी फुद्दी में जा चुकी थी। लुबना ने अपना दायां हाथ आगे किया और मेरी सलवार में हाथ दे दिया और मेरा खड़ा लण्ड अपनी मुट्ठी में ले लिया, और धीमी रफ्तार में मसलने लगी। मेरा मजे से बुरा हाल हो गया था। डर भी लग रहा था, क्योंकी खाला साथ बैठी हुई थी। लेकिन इस डर पे सेक्स का मजा हावी था। मैंने धीरे-धीरे आधी से ज्यादा उंगली उसकी फुदी में डाल दी।

लुबना में अचानक हाथ बाहर निकाला और उसने अपने हाथ पे थूक डाला। मूठी बंद करके हाथ सलवार में दुबारा डाला और लण्ड पे थूक मल दिया और लण्ड को मसलने लगी। इस वक़्त लुबना के थूक में चिकनाहट आ गई थी। आप लोगों में अक्सर नोट किया होगा सेक्स के दौरान भूक कभी-कभी बहुत चिकना हो जाता है। इसीलिए लुबना का हाथ लण्ड पे फिसल रहा था। मैंने अब स्पीड तेज कर दी थी, लुबना की फुददी में उंगली अंदर-बाहर करने की।

कुछ देर बाद लुबना में अपनी टांगें बंद कर ली। मेरी उंगली दब गई लेकिन जैसे तैसे में उगली अंदर-बाहर करता रहा। लुबना की फुद्दी पानी से भरी हुई थी। लुबना खलास हो रही थी। उसने मेरे लण्ड को जार से दबाया हुवा था। मेरी तो जान ही निकल गई क्योंकी इस वक़्त लुबना का नरम हाथ ऐसे ही गरम था जैसे फुद्दी। मुझे ऐसे लगा कि मेरा लण्ड फुद्दी में जकड़ा हवा है। मैं भी मजे की इंतहा पे था।

मैने अपने चूतड़ उठाए और लुबना के हाथ में दबे लण्ड को ऊपर नीचे करने लगा। 4.5 झटके ही लगाये होंगे की मुझे अपनी टौंगों से जान निकलती महसूस हुई। ऐसा लगा की सब कुछ लण्ड के रास्ते निकल रहा है। ये सिर्फ एहसास था लेकिन लण्ड से कुछ निकला नहीं। मैं निटाल होकर पड़ा रहा सीट पें। लुबना ने मेरा हाथ कब निकाला अपनी सलवार से मुझे नहीं पता चला। कुछ देर बाद मुझे होश आया तो लुबना मुझे ही देख रही थी।

लुभबा ने इशारे से पूछा- "क्या हुवा?" और साथ मुश्कुरा रही थी।

मैं भी हल्का सा मुश्कुराया। फिर मैंने खाला को हिलाया तो वो जाग गई उनसे पानी की बोतल माँगी, पानी पिया

और रिलेक्स हवा।

*****

****

 
सुमन किचेंज में पहुँचकर नाश्ता लगाती है। सब मिलकर नाश्ता करते हुए बातें करते हैं। यूँ ही बातें करते हुए रात के 9:00 बज चुके थे।

राजेश- अरें सुमन, आज खाना नहीं खिलाओगी क्या?

सुमन- खाना एकदम तैयार है, चलो सब टेबल पर।

और फिर सब मिलकर खाना खाते हैं। रात के 11:00 बज चुके थे। राजेश और सुमन अपने रूम में जाकर लेंट जाते हैं। राहुल और विशाल टीवी देख रहे थे।

आरोही- विशाल मैया मैं और प्रिया ऊपर वाले गम में सो जाते हैं। आप दोनों नीचे ही सो जाना।

विशाल- ठीक है।

आरोही और प्रिया ऊपर रूम में चली जाती है।

प्रिया- आरोही मुझे कपड़े बदलने हैं, कोई नाइट शूट है तेरे पास?

आरोही प्रिया को एक लोवर और टीशर्ट देती है। निया आरोही के सामने ही कपड़े बदलने लगती है।

आरोही- तुझे जरा भी शर्म नहीं आती? अंदर बाथरूम में जाकर भी बदल सकती है।

प्रिया खिलखिलाकर हँसतं हए आरोही के सामने अपने सारे कपड़े उतार देती है, और कहती हैं- "अब तेरे सामनें क्या शर्माना? राहल ने तो मुझे कपड़े पहनने ही नहीं दिए थे." और प्रिया लोबर टीशर्ट पहनकर आरोही के बराबर में आकर लेट जाती है।

प्रिया- "आरोही, मेरी सुहागत की बातें सुनेंगी?"

आराही चुप हो जाती है जैसे कह रही हो- "हाँ सुनूँगी.."

प्रिया भी मुश्कुराते हुए बोलना शुरू करती हैं- "राहुल मुझे शिमला के एक होटल में लेकर पहुँचता है। पहले हमने खाना खाया फिर राहुल ने होटल में रूम बुक किया और हम जैसे ही रूम में पहचते हैं। गहल एकदम से सामान का बैग नीचे रखकर मुझे बाँहों में भर लेता है। मैं राहुल को रोकती रह गईं। मगर राहुल से सबा करना मुश्किल था, और मुझे अपनी गोद में उठाकर बेड की तरफ ले जाने लगा..."

आरोही बड़े गौर से प्रिया की बातें सुन रही थी।

प्रिया- "राहुल बड़े ही रामाटक मूड में मेरी तारीफ करना लगा..."

राहल- "प्रिया तुम बहुत खूबसूरत हो। तुम्हारे होंठ एकदम किसी गुलाब की कली जैसे लग रहे हैं। ऐसा जी कर रहा है की इनका सारा रस पी जाऊँ..."

 
मैंने कहा- "हाँ, पानी पीने आया है. फिर में पानी पिया फ़िज़ से और नजर मामी की तरफ की। मामी इस वक़्त बगैर दुपट्टे के वहां खड़ी थी, बालों का जड़ा बनाया हवा था, तो उनकी गर्दन नंगी नजर आ रही थी। कमीज भी पतली सी पहनी हुई थी यौन कलर की। पीछे से उनके ब्रा की पट्टी नजर आ रही थी और बड़े-बड़े चूतर थिरक रहे थे।

मैं वहां से निकला और बाहर आ गया। 3:00 बजे का टाइम था। सब अपने रूम में चले गये थे लेटने। में वयोंकी सा लिया था, जिस वजह से मुझे नींद नहीं आ रही थी। लुबना बाजी अमीना के गम में उनके साथ लेटी हई थी। दोनों मामी अपने रूम में। खाला नानी के रूम में चारपाई पे लेटी हुई थी। मैं खाला के पास गया तो देखा की खाला भी सो रही थी और नानी भी। रूम में बिल्कुल अंधेरा था।

मैने खाला को हिलाया और कहा- "मुझे भी लेटना है, बाहर कोई भी नहीं है सब अपने रूम में हैं.."

खाला करवट लेकर लेटी हुई थी। वो थोड़ा खिसकी और जगह दी ता में भी सीधा लेट गया। मुझे खाला का नीचे वाला चूतर अपनी जांघ पे महसूस हो रहा था। मैंने करवट ली और खाला के ऊपर टांग रखी और बाजू खाला की गर्दन में डाल दिया।

खाला ने मेरा हाथ पकड़ा, उसको चूमा और कहा- "सो जाओ.'

मैंने कहा- "मैं तो सो लिया। अब मुझे नींद नहीं आ रही.."

खाला ने कहा "अच्छा चला वैसे ही लेटे रहो आराम करो.." और खाला चुप हो गई।

रूम में इस वक़्त बस फैन चलने की आवाज आ रही थी। खाला की कमीज हवा की वजह से उनके चूतरों से हट गई हुई थी, लेकिन उन्होंने ठीक नहीं थी की हुई थी। मेरा दीला लण्ड उनके चूतरों पे दबा हुवा था। लण्ड खाला के चूतरों की गर्मी को पकड़ने लगा, जिससे लण्ड फूलने लगा। इस दौरान मैंने अपनी कमीज भी बगल में कर ली और सलवार समेत खाला के चतरों पे लण्ड दबा दिया, और अपने हाथ को खाला की गर्दन पे फेरने लगा।

 
रूम में इस वक़्त बस फैन चलने की आवाज आ रही थी। खाला की कमीज हवा की वजह से उनके चूतरों से हट गई हुई थी, लेकिन उन्होंने ठीक नहीं थी की हुई थी। मेरा दीला लण्ड उनके चूतरों पे दबा हुवा था। लण्ड खाला के चूतरों की गर्मी को पकड़ने लगा, जिससे लण्ड फूलने लगा। इस दौरान मैंने अपनी कमीज भी बगल में कर ली और सलवार समेत खाला के चतरों पे लण्ड दबा दिया, और अपने हाथ को खाला की गर्दन पे फेरने लगा।

मैंने लण्ड को अडजस्ट किया और उनके चूतरों की लाइन पर दबा दिया। खाला ने मेरा हाथ पकड़ा उसका दबाया लेकिन बोली कुछ नहीं। मैं खाला के कान में बोला- "खाला क्या हवा?"

खाला बोली- "बेटा आराम से लेटो ना क्या परेशान कर रहे हो?"

मैंने कहा- "खाला आप मुझसे लिपट जाओ ना... मेरा दिल कर रहा है.."

खाला ने करवट ली और मेरी तरफ मुँह कर लिया और झप्पी डालकर कहा- "अब खुश?"

मैंने हाँ में सिर हिलाया। खाला में मेरी नाक पकड़कर हिलाई और मुश्कुरा दी। मेरा लण्ड खड़ा था जो अब खाला की जांघों में दबा हवा था। खाला ने मुझे किस की और अपने साथ लिपटा लिया। मेरा मुँह उनके मम्मों पे टिक गया। मैंने अपना हाथ खाला की कमीज में डाला और उनकी कमर पे हाथ फेरने लगा। नानी इस वक़्त गहरी नींद सो रही थी।

खाला ने कहा, "बड़े तेज हो. फिर हाथ डाल दिया मेरी कमीज में।

मैं बस मुश्करा दिया। मेरा हाथ उनकी बा को छू रहा था। मैंने कहा- "खाला ये क्या है?"

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खाला ने कहा "ये बजियान है जो औरतें नीचे पहनती हैं, जैसे मर्द पहनते हैं नीचे..."

मैंने कहा- "उनकी तो और तरह की होती है आपकी और है...

खाला ने कहा "औरतें यही पहनती हैं। जब बड़े होगें खुद पता चल जायेगा तुमको बेटा..."

मैं चुप हो गया लेकिन हाथ मेरा वहीं था। खाला की पीठ बहुत मुलायम थी, हाथ जैसे फिसल रहा था। उधर लण्ड जांघों पे झटके खा रहा था, जो खाला को भी साफ महसूस हो रहा था। लेकिन खाला में कुछ कहा नहीं। खाला ने अब आँखें बंद कर ली हुई थी।

मैंने हाथ नीचे किया और खाला के एक चूतर पे रखा और अपनी तरफ खींचा और कहा "खाला मेरी तरफ और हो जाएं ना..."

खाला थोड़ा और आगे हुई। इस हिला-धुली में लण्ड खाला की जांघों के बीच में आ गया था। और लण्ड में दबाओ डाला हवा था, लेकिन खाला की जांघे मिले हुई थी, जिस वजह से जांघों में लण्ड नहीं जा रहा था। मैंने अपने हाथ को उनके चूतर पे ही रहने दिया। ये पहली बार था जब मैंने खाला के चूतरों पे हाथ लगाया हुवा था। खाला के चूतर बहुत नरम थे। खाला ने वहां से मेरा हाथ उठाया और ऊपर कर दिया।
 
मैं मुँह सीधा किया और खाला के गाल पे किस करने लगा। 3-4 किस की और होंटों भी किस की मैंने जैसे गाल पे कर रहा था। मैंने खाला को कहा- "खाला आपके होंठ बहुत नरम हैं मैं और किस कर लूं यहां?"

खाला ने हाँ में सिर हिलाया। मैं होठों को और चूमने लगा और अपने होंठों रगड़ भी रहा था उनके होंठों पे। मैंने अपनी जीभ को खाला के होंटों में घुमाया और खाला से कहा- "आप करो ना ऐसे मुझे.

खाला ने भी फिर मुझे ऐसे ही किया। मुझे शरारत सूझी मैंने काट लिया उनकी जीभ पे। खाला और मैं हँस दिए। इस दौरान मैं अपना हाथ उनके नंगे पेंट में फरजें लगा। मैं मजे से पागल हो रहा था। मैं अब हिल रहा था और लण्ड जांघों पे रगड़ रहा था।

नीचे मैं अपना हाथ खाला की ब्रा पे लगाया और खाला को कहा- "ये है आपकी बनियान?"

खाला ने कहा "हाँ, यही है बेटा.."

मैंने कहा- "मुझे देखनी है खाला की ये बनियान कैसी होती है?"

खाला ने कहा "नहीं बेटा, अभी आप छोटे हो। अच्छे बच्चे नहीं देखतो"

में जिद करने लगा।

खाला ने कहा, "देखो बेटा ऐसे जिद ना करो। किसी को पता चला तो क्या सोचेगा वो?"

मैंने कहा- "खाला मैं नहीं बताऊँगा किसी को, ना आप बताना किसी को."

खाला थोड़ी ऊपर हुई और कमीज ऊपर कर ली। अंधेरे में भी काफी हद तक नजर आ रहा था। खाला ने जैसे ही कमीज ऊफा की तो मुझे ब्लैक बा नजर आई और आधे मम्मे भी नजर आ रहे थे। खाला के भारी मम्मे इस वक़्त ब्रा में कैद मेरे सामने थे।

खाला ने कहा "देख लिया अभी?"

मैंने बात का जवाब नहीं दिया। अपना हाथ आगे किया और बायें मम्मे पे हाथ लगाया।

खला ने कहा "ना करी बेटा..."

मैंने कहा- "खाला में देख रहा है कैसी है ये बनियान?" मैंने 3-4 बार हाथ फेरा उनके मम्मे पे। फिर खाला ने कमीज नीचे कर ली। अचानक आवाज हुई तो खाला सीधी हो गई। मैं उठा और बाहर आ गया।

जब बाहर आया तो देखा मामी जूबिया श्री। वा सोकर उठकर बाहर आई थी। मुझे देखा और स्माइल की। मामी के मम्मे इस वक्त तने हमें थे और कंधे पर उनकी ब्रा की पट्टी नजर आ रही थी। मम्मों की लकीर भी दिख रही थी। बा की वजह से मम्मे आपस में मिले हुये थे। बहुत सेक्सी नजारा था ये। मामी फिर टायलेट चली गई।

मैं सहन में बैठ गया एक चारपाई पे।

थोड़ी देर बाद सब लोग उठ गये। माम भी आ गये थे खेतों से। वो बड़ी गरमजोशी से मिले। सभी लोग सहन में खुले आसमान के नीचे बैठे हुये थे। गप्प लगा रहे थे। बाजी अमीना मेरे साथ बैठी हुई थी। अचानक बाजी में मेरे जांघ पे चुटकी काट दी, तो मेरी चीख निकलते-निकलते रह गई, क्योंकी अचानक हुवा था ऐसा। मैं हैरान सा होकर बाजी को देखा, तो बाजी शरारती मुश्कान लिए मुझे देख रही थी। मैंने उनका हाथ पकड़ लिया।
 
हम दोनों पीछे बैठे थे। हमारे आगे माम और खाला बैठे हुये थे, जिस वजह से हम पे किसी की नजर नहीं पड़ती जब तक कोई गौर से ना देखता। मैंने भी अपना हाथ उनकी नरम जांघ में रखा और कहा- "काटू मैं?" मुझे उनकी जांघ का गरम स्पर्श अपने हाथ पै महसूस हो रहा था।

उन्होंने इशारे से कहा- "ना काट नहीं.."

मैंने उनकी जांघ का गोस्त पकड़ा और कहा- "काटने लागा है में..."

उन्होंने फिर कहा- "ना काट नहीं.."

मैंने कहा- "दुबारा मुझे कटोगी?"

बाजी ने इशारे से कहा- “नहीं काटूंगी..."

मैं फिर हाथ नार्मल अंदाज में कर लिया, लेकिन हाथ उनकी मोटी जांघ में ही रहने दिया। बाजी का एक हाथ अभी भी मेरे हाथ में था। मैं बाजी का हाथ दबाने लगा। बाजी ने मेरी तरफ देखा लेकिन बोली कुछ नहीं। थोड़ी देर ऐसा ही चलता रहा। फिर बाजी को मामी जोबिया ने आवाज लगाई तो बाजी उठकर चली गई। किचेन का काम था उनको।

मैं आगे जाकर बैठ गया मामू के पास। माम मुझसे बातें करने लग गये। मामी जोबिया और बाजी किचेन में थी। मामी रूबी चारपाई पे बैठी सब्जी काट रही थी। बातों में टाइम का पता ही नहीं चला और शाम का टाइम हो गया, हल्का-हल्का अंधेरा छाने लगा। मैं उठा और छत पे चला गया। बाँड्री वाल के साथ खड़ा बाहर का नजारा कर रहा था, दूर दूर तक खेत नजर आ रहे थे।

थोड़ी देर बाद मुझे आहट सुनाई दी सीदियों की तरफ से। जब देखा तो मामी जूबिया ऊपर आ रही थी। सीदियों के साथ दीवार बनी हुई थी, जिसमें सुराख थे जिनसे मुझे नजर आई। बायें तरफ सीटियां थी। सीढ़ियां चढ़कर दागी और से छत शुरू होती थी। पीछे दो रूम थे और आगे काफी खाली जगह थी, और बाँड्री वाल के आखीर पे बाथरूम बना हुवा था। छत की दीवारें इतनी ऊँची थी की मेरे सीने तक आ रही थी।

मामी ऊपर आई और पहले रूम में चली गई। मामी को देखकर मेरा दिल उथल-पुथल होने लगा। सुबह जबसे मैं आया था और जब भी मामी को अपने सामने देखता तो दिल तेजी से धड़कता था। ऐसे लगता था जैसे अभी मामी की फुद्दी मिल जायेगी मुझे। इस वक़्त भी यही हवा जब मामी ऊपर आई। जब रूम खुला तो देखा वहां दो पेंटियां और दो संदक पड़े हैं।

मामी ने मुझे आवाज लगाई और कहा- "इधर आओ बेटा, पेटी से बिस्तर निकाले..."

मैं अंदर गया। बल्ब रोशन था।

मामी ने कहा- "पेटी का ढक्कन पकड़कर रखना मैं बिस्तर निकालती है.."

मामी अच्छी खासी सेहतमंद थी। कद सामान्य था। मामी जूबिया पेंटी में झुक के बिस्तर निकाल रही थी। जब झुकती तो उनकी गाण्ड का नजारा बहुत अच्छा लगता मुझे। मेरा मुह मामी की गाण्ड की तरफ था। मामी थोड़ा पीछे हई बिस्तर निकालने के लिये तो उनके भारी चूतर मुझसे टकराए। लेकिन मेरा लण्ड सोया हवा था। मामी को कोई फर्क नहीं पड़ा। 5-7 सेकेंड तक उनके चूतड़ मुझसे लगे रहे। जब लण्ड सिर उठाने लगा तो वो आगे हो गई हई थी। बिस्तर निकालकर हम रूम से बाहर निकल आए।

मामी नीचे जाने लगी तो मैंने उनको आवाज दी और कहा- "मामी मेरे पास थोड़ी देर खड़े हो जाओ, मैं बोर हो रहा हूँ...

 
मामी मुश्कुराई और मेरे पास चली आई। बगल से हग करके मुझे चूमा और कहा- "ला बेटा मैं आ गई..."

छत पे अब अंधेरा काफी हो गया था। कोई दूसरा हमको सरसरी नजर से नहीं देख सकता था। मुझे मामी का बाया मम्मा अपने बाजू पं महसूस हो रहा था। मैंने कहा- "मामी आप बहुत अच्छी लगती हो मुझे..."

मामी ने कहा- "अहह.... मक्खन लगा रहे हो मुझे..."

मैंने कहा- "नहीं मामी, आप वाकई बहुत अच्छी हैं और प्यारी भी..')

मामी मुश्कुराई और मुझे जोर में अपने साथ लगाया- "ओहह... मेरा बच्चा मुझे इतना पसन्द करता है."

मैंने ही में सिर हिलाया और मामी की तरफ मुड़ गया। अब हम आमने सामने थे। मैं आगे बढ़ा और मामी के चिकने गाल में किस कर दी और मामी की गर्दन में बाजू डाल लिए। इतने करीब होने से मुझं मामी के जिश्म की महक महसूस हो रही थी, जो सीधा मेरे लण्ड पे असर कर रही थी जो अब धीरे-धीरे सिर उठा रहा था।

मैंने पूछा- "मामी क्या पकाया है?"

मामी ने कहा- "बिरयानी बनाई है."

मैंने कहा- "मामी सुबह आलू वाले पराठे पकाना, मुझे बहुत पसन्द हैं.."

मामी ने कहा- "ठीक है बेटा। पका दूंगी अपने सोने से पुत्तर के लिये.."

में मामी के और करीब हो गया और उनको झप्पी डाल ली। मेरे हाथ अब उनकी कमर पे थे। मैंने कहा- "मामी आप माटी हो गई हो पहले से."

मामी बोली- "हाँ पत्तर, उमर के साथ-साथ अब यही होगा.."

मैंने कहा- "मामी आप तो अब भी जवान लगती हो। मुझे तो लड़कियों से ज्यादा आप खूबसूरत लग रही हो.."

मामी मुश्कुराई और कहा- "तुमको तो अच्छी लगेगी ही। आखीरकार तुम्हारी प्यारी सी मामी हूँ..'

हम दोनों हस दिए।

मामी ने कहा- "पुत्तर अब चलते हैं, काफी टाइम हो गया है."

मैंने कहा- "मामी जाते हैं बस 5 मिनट और..

मामी ने कहा- "5 मिनट से क्या हो जायेगा?"

में आगे हवा और उनका किस की और कहा- "ये होगा.."

कहकर मैंने 3-4 और किस कर दी उनको। नीचे से लण्ड को आगे किया जो सीधा उनकी फुद्दी के ऊपर लगा। मामी की टाँग खुली हुई थी। मैंने थोड़ा अडजस्ट करके लण्ड को उनकी जांघों में डाला तो मामी एक बार हिल गई। लेकिन मुझे कुछ कहा नहीं, और मुझे अजीब नजरों से देखने लगी। मैं अंदर से घबरा भी रहा था। इसी घबराहट में मैंने लण्ड को पीछे कर लिया।

 
मैंने थोड़ा अडजस्ट करके लण्ड को उनकी जांघों में डाला तो मामी एक बार हिल गई। लेकिन मुझे कुछ कहा नहीं, और मुझे अजीब नजरों से देखने लगी। मैं अंदर से घबरा भी रहा था। इसी घबराहट में मैंने लण्ड को पीछे कर लिया।

मामी ने कहा- "चला बेटा नीचे चलते हैं. और साथ ही बाहर दरवाजे पे दस्तक हुई।

हम नीचे चले गये तो देखा छोटे माम् आ गये थे अपनी दुकान से। मैं उनमें मिला और टायलेंट चला गया। पेशाब कर के बाहर निकाला तो अंदर से खाला और लुबना निकाल रहे थे, साथ में नानी भी थी। सबने सहन में बैठकर खाना खाया। खाने से फारिग हुये।

बाजी अमीना ने कहा- "चलो बाहर एक चक्कर लगाकर आते हैं खाना हाजाम हो जायेगा..."

फिर मैं, खाला, लुबना और बाजी अमीना बाहर निकल आए। खाला और बाजी अमीना हमसे दो कदम आगे थी। पीछे में और लुबना थे। मैंने लुबना का हाथ पकड़ लिया और लण्ड पे रख दिया। लेकिन लुबना हाथ खींच लिया। मैंने दुबारा जोर लगाया लेकिन वो हाथ पीछे खींच रही थी।

मुझे एक रकीब सूझी। मैंने उसका हाथ छोड़कर अपने हाथ को चलते हमें ही उसकी फुद्दी पे रख दिया। दो सेकंड बाद ही लुबना में मेरा हाथ खींच लिया, और मुश्कुराती हुई आगे चली गई खाला के पास। फिर मैं भी आगे हो गया और खाला के साथ-साथ चलने लगा।

इस वक़्त आसमान सितारों से भरा हवा था। कभी-कभी कुत्तों के भौंकने की आवाज आ रही थी दूर से। आस-पास कीड़े मकोड़ों के चिंगारने की आवाजें आ रही थी। हमने दो-तीन गलियों का चक्कर लगाया और 15-20 मिनट बाद घर आ गयें। मौसम खुशगवार हो गया था। मुझे प्यास लग रही थी तो मैं सीधा किचेन में चला गया, जहां मामी जबिया बर्तन धो रही थी। मैं आगे बढ़कर ग्लास उठाया। इस दौरान में पीछे से मामी के साथ लग गया।

मामी ने पीछे मुड़कर देखा और मुश्करा दी, फिर कहा- "मुझे कहतें, मैं अपने बेटे को पानी पिला देती..."

मैंने कहा- "मामी आपको क्यों कहता? बल्की आप मुझे कहाँ कोई काम, तो में कर देता हैं आपकी हेल्प। आप बहुत काम करती हो का या थकती नहीं आप? सुबह से आप लगी हुई हो.."

मामी बोली- "पुत्तर ये तो घर के काम हैं जो करने ही होते हैं। नहीं करंगे तो खाली रहकर और मोटी हो जाऊँगी..." कहकर मामी हँसी। क्योंकी मामी छत वाली बात को लेकर हँसी थी, तो मैं भी हँस दिया।

मैंने कहा- "मामी आप मोटी भी हो गई तो भी प्यारी लगोगी...'

में किचेन से बाहर आया तो खाला ने कहा- "कहां सोना है, ऊपर या नीचे?"

मेने कहा- "खाला जहां अपने सोना है वहीं में सोऊंगा."

खाला ने कहा "चलो ठीक है..."

फैसला ये हवा की बरामदे में जानी के साथ खाला और में लेट जायेंगे। छत में लुबना बाजी अमीना और बड़ी मामी और माम्। छोटे मामू और मामी अपने रूम में सोते थे।

थोड़ी देर बाद बिस्तर लगे। मामी लोग ऊपर चले गये, और हम बरामद में लेट गये। 3 चारपाई बिछी हुई थी। नानी पहले ही सो गई थी। लाइट बंद कर दी हई थी सारी। मैंने अपनी चारपाई खाला की चारपाई के करीब कर ली। फिर लेट गया मैं। फन चल रहा था। 11:00 बजे का टाइम था लेकिन नींद मुझे नहीं आ रही थी। खाला भी आ गई थोड़ी देर बाद, और लेट गई मेरी तरफ चेहरा करके। हम बातें करने लगे।

खाला ने कहा "मुबह खेतों में जायेंगे तैयार रहना.."

मैंने हाँ में सिर हिला दिया। मैंने कहा- "खाला कितने दिन रहेंगे हम यहा?"

खाला बोली- दो हफ्ते तो रहेंगे। आगे रहना है तो देखेंगे अगर दिल लगा यहां तो..."
 
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