कड़ी_06
मैं घर गया तो अम्मी लोग खाना खा रहे थे। मैं भी पास में बैठ गया एक चारपाई पै और खाने लगा। खाना खाकर फारिग हये।
अम्मी ने कहा "चलो आओं तुम्हारी खाला के घर चलते हैं.."
मैं खुशी-खुशी तैयार हो गया। घर से निकले और खाला के घर पहुँच गये। खाला ने मुझे गले लगाया और प्यार दिया। फिर अम्मी और खाला सहन में बैठकर बातें करने लगी। खालू अंदर रूम में टीवी देख रहे थे। खाला से लुबना का पूछा तो उन्होंने कहा वो छत पें गई है। मैं छत पे गया तो देखा लुबना दीवार के पास खड़ी साथ वाले घर की लड़की, जो उसकी दोस्त थी उससे बातें कर रही थी।
खटका हवा तो लुबना मुझे देखा और अपनी तरफ बुला लिया। मैं लुबना के पास चला गया और उसकी दोस्त से सलाम लिया और लुबना से भी। छत में पूरा अंधेरा था। में लुबना के दायें साइड पे खड़ा था। लुबना का एक हाथ ऊपर दीवार पे टिकाया हुवा था, एक नीचे था। मैंने उसको पकड़ लिया और दबाने लगा, साथ-साथ उनकी बातें भी सुन रहा था। मुझे लुबना के हाथों का स्पर्श बहुत मजा दे रहा था।
लण्ड में अकड़ाव आता जा रहा था। मैं लुबना के साथ जाकर खड़ा हो गया। गर्मियों के दिन थे, लुबना बारीक कमीज पहनी हुई थी। मैंने उसका हाथ अपने दायें हाथ में ले लिया और बाया हाथ खुला छोड़ दिया। मैंने अपना हाथ अपने आगे से गुजार कर लुबना का हाथ पकड़ा हुवा था, जो मेरे लण्ड के पास ही था। लुबना भी उससे बातें करते हुये सरसरी तौर पे जवाब दे रही थी। ऐसे करते एक बार हाथ ज्यादा हिल गया और लुबना का हाथ मेरे टाइट लण्ड से टकरा गया।
जैसे ही ऐसा हुवा लुबना ने अपना हाथ पीछे कर लिया। लेकिन मेरा हाथ अभी भी नहीं छोड़ा। मुझे बहुत मजा आया जब लुबना का नरम हाथ लण्ड पे लगा। मैंने अपना बायां बाजू अब लुबना के साइड पे दबा दिया और धीरे-धीरे उसको रगड़ने लगा। मेरा बाजू उसकी कमर को साइड से और जांघों की साइड पे रगड़ हो रहा था। मैं अंदर से पूरा गरम हो गया था, लण्ड झटके मार रहा था। मेरा दिल कर रहा था लुबना मेरे लण्ड को पकड़ लें और उसको दबाए।
मुझसे रहा नहीं गया। मैं उसका हाथ अपने लण्ड पे रख दिया, जो पहले से मेरे हाथ में था उसका हाथ। लुबना ने पीछे करना चाहा, लेकिन मैंने दबाकर रखा। मैं मोके का फायदा उठा रहा था, क्योंकी पास में सहेली खड़ी थी तो लुबना कुछ कह नहीं सकती थी। थोड़ी देर उसका हाथ वहीं रहा, लेकिन उसने मेरा लण्ड नहीं पकड़ा।
थोड़ी देर बाद उसकी सहेली चली गई, और लुबना ने अपना हाथ छुड़ा लिया और कहा- "ये क्या बदतमीजी है?"
मैं एक बार घबरा तो गया लेकिन जब देखा की लुबना अपनी स्माइल को दबा रही हैं तो इतने से ही मैं शेर हो गया। मैंने कहा- "सारी मुझसे कंट्रोल नहीं हवा। तुम्हारा हाथ ही बहुत नरम है। दिल ही नहीं करता इसको छोड़ने का..."
लुबना बोली- "तुमको बड़ा शौक है मेरा हाथ पकड़ने का?"
मैंने कहा- "अब आदत हो गई हैं क्या करंग.." और मैंने फिर से लुबना का हाथ पकड़ लिया।
अब लुबना मेरी तरफ हो गई हई थी। हम बिल्कुल पास खड़े थे। पूरा अंधेरा और दो जवान लड़का लड़की है तो शैतान आ ही जाता है। मेरा लण्ड अभी भी खड़ा था। मैं थोड़ा और करीब हो गया लुबना के। उसका हाथ मैंने अपने दोनों हाथों में लिया हुवा था।
हम दोनों स्कूल की बातें कर रहे थे। कितना काम मिला छुट्टयों का? साथ-साथ मैंने करवाई जारी रखी। थोड़ा और करीब हवा तो मेरे लण्ड की टोपी लुबना की जांघ पे लगी हल्की सी। मेरे अंदर करंट दौड़ गया क्योंकी पहली बार में लुबना के इतने करीब गया था। मैंने अपने लण्ड का दबाओं बढ़ाया तो मेरा लण्ड उसकी नरम जांघों में धंस गया। लुबना की जांघ रई के जैसे नरम थी, और इस बात गरम भी थी।
लुबना बात करते हुये एक बार रुकी भी। क्योंकी उसको भी पता चल गया था मेरा लण्ड कहां लग रहा था, लेकिन उसने कुछ कहा नहीं। मेरा मजे से बुरा हाल हो रहा था। मैं लुबना को खींचकर और करीब कर लिया। अब हमारी साँसें आपस में टकरा रही थी। मैंने मोका गनीमत जाना और थोड़ा पीछे होकर लुबना की जांघों के बीच का अंदाजा लगाया जहां उसकी फुदी थी, और लण्ड को आगे कर दिया। लण्ड उसकी कमीज समेत उसकी जांघों में घुस गया और लण्ड झटके खाने लगा।
लुबना भी अब चुप हो गई थी और मजे ले रही थी। मैं अब लण्ड को खुलकर आगे-पीछे कर रहा था। मैंने धीरे से अपनी लमीज साइड पे की और लण्ड दुबारा लुबना की जांघों में घुसाया, जहां मुझे और ज्यादा गर्मी महसूस हुई। मैंने लुबना का हाथ छोड़ा और उसकी जांघों को पकड़ा और टीला करने लगा। लुबना समझ गई उसने अपनी टांगें थोड़ी खोली और लण्ड सीधा फुद्दी से जा टकराया। उसने टांगें बंद कर ली।
मैंने झप्पी डाल दी और लण्ड अंदर-बाहर करने लगा। शर्म की वजह से हम दोनों में से कोई भी बात नहीं कर रहा था। मैं उसको गाल पे किस करने लगा, कभी गर्दन में करता। होंठों पे कर नहीं रहा था झिझक हो रही श्री दूसरा मुझे करनी नहीं आती थी।
लुबना आहे बढ़ने लगी- “आहह.. उहह... ओहह... आह.. ओफफ्फ..."