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Incest खाला जमीला

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मैंने खाला का हाथ पकड़ रखा था। मैं बड़ा एंजाप कर रहा था। इस बात खाला के साथ पार्क में घूमाता हवा। खाला भी बड़ी खुश नजर आ रही थी। हम सब एक झूले के पास पहुँचे, जो गोल चक्कर में घुमाता था और साथ-साथ ऊपर नीचे भी होता था। माम में । टिकटें ले लिए। बड़ी मामी नहीं बैंठी, क्योंकी उनको चक्कर आ जाते थे।

मैं और खाला साथ बैठ गये। खाला थोड़ा घबराई हुई थी, बोली- "बेटा मुझे तो डर लग रहा है..."

मैंने कहा- "खाला, मैं हूँ ना आपके साथ। आप नहीं घबराओ.."

हम सब बैठ गयें झूले में। 5 मिनट बाद झूला जब भर गया तो चल पड़ा। जिस डब्बे में हम बैठे थे, उसमें हम जुड़ के बैठे हये थे, क्योंकी जगह कम थी। खाला जें मेरा दाया बाजू जोर से पकड़ लिया और अपनी बगल में दबा लिया। मेरा बाजू खाला के मम्मे में पूरा चिपक गया। मुझे अपने बाजू पे मम्मे का नरम एहसास महसूस हो रहा था। झला चल पड़ा तो मैंने अपना एक हाथ खाला की जांघ पे रख दिया। खाला को तसल्ली देने के अंदाज में।

मैं खाला को तसल्ली दंनें के अंदाज में उनकी जांघ दबाने लगा। जांघ का गरम गोस्त अपने हाथों में लेकर मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरी टांगों में लण्ड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा, जो एक मिनट में ही पूरा खड़ा हो गया। में अपने हाथ को खाला की जांघ पे फुद्दी के नजदीक लें गया और वहां हाथ को दबाने लगा। मुझे ये एहसास ही मार दे रहा था की मेरा हाथ इस वक़्त खाला की फुद्दी के करीब है। लण्ड झटके पे झटका मार रहा था, और बाजू को भी मैं मम्मै पे रगड़ने लगा।

इतनी देर में झला धीरे हवा, तो खाला ने सुख की सांस लिया और मेरा बाजू छोड़ दिया। नीचे उतर के हम कैंटीन की तरफ गये। वहां से गोल गप्पे लिए और खाने लगे। खाकर जब फारिग हमें तो एक झले में और बैठे सब- कस्ती वाले में। लेकिन मैं नहीं बैठा उसमें ।

वहां भूत बंगला भी था। माम ने कहा- "चला सब चलते हैं। देखते हैं क्या होता है?"

औरतें सब इर रही थी। लेकिन मामू ने सबके टिकेट लिए और जबरदस्ती साथ लेकर भूत बंगले में चले गये। वो एक छोटी जगह पे था। हम सब दीवार के साथ लग गये। जगह कम थी इसलिए खाला मेरे आगे खड़ी हुई। लुबना मेरी बगल में थी। बड़ी मामी भी आगे खड़ी थी बाजी छोटी मामी के साथ।

उन्होंने अंधेरा कर दिया और एक मधिम लाइट जला दी और उसको ओज आफ करने लगे। सामने दो झलें लगे हमें थे। जिसमें दो आदमी भूत बने झूलते आतें उन झलों में और हमारे बिल्कुल पास से होकर जाना होता उनको। ऐसे ही स्टंट थे जो टोटल 15 मिनट उन्होंने कर ना था। इर में भी रहा था लेकिन इतना ज्यादा नहीं।

आगे खाला खड़ी थी तो कुछ हौसला था ये भी।

अचानक एक आदमी आगे से आया और झलता हवा हम पे आया। खाला चीखती हुई पीछे हटी तो मुझसे चिपक गई। खाला का बस नहीं चल रहा था, की मेरे आर-पार गुजर जाती। खाला का जिक्ष्म कापने लगा। उनके माटे माटे चूतड़ मेरे लण्ड पे टिक गये थे। इस माहौल में भी मेरा लण्ड चूतड़ों की गर्मी पाकर खड़ा हो रहा था। लेकिन खाला को कोई होश नहीं था।

अगले दो आदमी झलते हये आए। तब तक मेरा लण्ड खड़ा होकर खाला के चूतड़ों में गायब हो चुका था। वहां स्पीकर लगा हुवा था, जहां से डरावनी आवाजें निकल रही थी। खाला इतने जोर से मुझसे चिपकी हुई थी की अगर बीच में कपड़े ना होते तो लण्ड इस वक़्त खाला की गाण्ड या फुद्दी में घुस गया होता।

दो आदमी झलते हमें आए और आगे तक आ गये। खाला चीखती हई हिली। मैंने अपने हाथ खाला के भारी और नरम चूतड़ों पे रख दिएरा मोका जानकर मैं उनको दबाने लगा। अफफ्फ क्या नरम चूतर थे खाला के क्या बताऊँ। ऐसा लग रहा था मैं गई को पकड़कर मसल रहा है जैसे इतनी नरम गाण्ड थी खाला की।
 
अगली बारी में 4 लोग एक्दम उछलकर आए और एक आदमी तो पैडल चलाता बिलकुल करीब आ गया। खाला पलटी और मुझे जोर से गले लगा लिया और जोर से चिपक गई मुझसे। मेग लण्ड अब उनकी फुददी पे छू रहा था। खाला डर की वजह से मुझसे जोर-जोर से चिपक रही थी और ऐसा लग रहा था जैसे वो मेरा लण्ड लेना चाहती हो अपनी फुदी में। मुझे इस वक्त अपने लण्ड पे खाला की फुद्दी का ज्यादा दबाओं महसूस हो रहा था। मुझे लग रहा था मेरा लण्ड अभी झड़ जायेंगा। क्योंकी मजा ही इतना ज्यादा आ रहा था।

खाला के मोटे-मोटे मम्मे मेरी छाती में फंसे हमें थे। मैं मजे में पागल हवा जा रहा था। एक-दो दृश्य और हमें

और हम भूत बंगले से बाहर आ गये। बाहर आकर देखा तो औरतों का बुरा हाल था। सब अपने आपको सेट करने लगी। मैं और माम खूब हँसे उनको देखकर।

टाइम काफी हो गया था। फिर हम वहां से निकले और होटेल आए। एक जबरदस्त डिनर करवाया माम् ने। टाइम देखा तो 10:00 से ऊपर हो गया था। करीद बा गाड़ी में हम आए थे, जो मामू ने बुक करवाई थी ड्राइवर भी साथ था।

वापसी पे माम् आगे बैठ गये दूसरी सीटों पे खाला, छोटी मामी और बाजी अमीना। आखिरी सीटों पे मैं लुबना

और बड़ी मामी। लुबना बैंठतें ह ऊँघने लगी उसको नींद आ रही थी।

मेरा लण्ड तबसे होशियारी दिखा रहा था जब से भूत बंगले से निकले थे। इस बात मामी की गरम जांघों का स्पर्श मुझे महसूस हो रहा था। हम इस वक़्त हम गाँव जाने वाली सड़क पे थे। सुनसान सड़क श्री गाड़ी में अंधेरा था।

मैंने हाथ उठाया और मामी की फुद्दी पे रख दिया। मामी ने मेरी तरफ देखा और फिर आगे देखा, जायजा लेकर मामी ने भी अपना हाथ मेरे लण्ड पे रखा और थोड़ी देर बाद सलवार में घुसा लिया हाथ और मेरा गर म लण्ड पकड़कर दबाने लगी। मामी ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी सलवार में डाल दिया। मैंने उंगली मामी की फुद्दी में फेरी जो इस वक़्त गीली हो रही थी। मामी ने अपनी टाँगें पूरी खोल ली थी, और मुझे ये इशारा था आगे बढ़ने का।

मैंने अपनी बीच की उंगली मामी की फुद्दी में घुसा दी। मैं महसूस कर रहा था मामी अपनी सिसकियां कंट्रोल कर रही हैं। मामी मेरे लण्ड को बड़े प्रोफेशनल अंदाज में मसल रही थी, और कभी अपने अंगठे की मदद से मेरे लण्ड की टोपी पे मसाज करती, जिसमें मुझे लगता मेरा अभी पानी निकल जायेगा।
 
मैंने अपनी बीच की उंगली मामी की फुद्दी में घुसा दी। मैं महसूस कर रहा था मामी अपनी सिसकियां कंट्रोल कर रही हैं। मामी मेरे लण्ड को बड़े प्रोफेशनल अंदाज में मसल रही थी, और कभी अपने अंगठे की मदद से मेरे लण्ड की टोपी पे मसाज करती, जिसमें मुझे लगता मेरा अभी पानी निकल जायेगा।

गाँव में दाखिल होने तक मस्ती चलती रही। गाँव आया तो हमने अपने हाथ निकाल लिए। हम घर पहुँचे और फ्रेश होकर सब लेटने चले गयें, क्योंकी थकावट सबको ही हो रही थी।

मैं भी लेटते ही सो गया। सुबह मेरी आँख काफी लेट खुली। जब उठा तो तबीयत सुस्त हो रही थी। मैं उठकर नहाया। किचन में देखा तो लंच का टाइम हो रहा था, जो मामी और खाना बना रही थी। छोटी मामी सलाद वगेरा काट रही थी।

मुझे सख़्त भूख लग रही थी। मैंने मामी को कहा- "मुझे बहुत भूख लग रही है.."

मामी ने कहा- "पुत्तर थोड़ी देर और सबर कर फिर खा लेना..."

में बाहर आया और बरामदे में बैठकर टीवी देखने लगा।

***** *****
 
कड़ी_16

थोरी देर बाद मुझे मामी ने आकर नाश्ता दिया और हल्की आवाज में कहा- "बेटा आज हम डैरे पे जाएंगे दोनों। तुम्हारे माम भी आज शहर जा रहे हैं..."

मैंने कहा- "ठीक है मामी।

मैं बड़ा खुश हवा की आज मामी जूबिया की भी फुद्दी मिल जायेगी मुझे। नाश्ता करके इधर-उधर घूम फिर के टाइम गुजारा।

जब 12:00 बजे तो मामी ने कहा- "चला बेटा चलें..." तब तक माम भी शहर चले गये थे।

मामी ने घर में कहा- "हम खेतों का चक्कर मारकर आते हैं। क्योंकी आज वहां अली के माम नहीं है.."

फिर मैं और मामी घर से निकल पड़े। गाँव की हद से बाहर निकले तो खेत शुरु हो गये। हम पगडंडी में चले जा रहे थे। इर्द-गिर्द ऊँची-ऊँची फसल उगी हुई थी। मामी मेरे आगे-आगे चल रही थी। मामी के चूतड़ इस वक़्त कयामत टा रहे थे। बहुत हिल रहे थे। मेरी नजर उन पे ही टिकी हुई थी। चलते हुये ही मेरा लण्ड खड़ा हो चुका था, जो सामने से साफ नजर आ रहा था।

मामी ने पीछे घूमकर मुझे देखा तो मेरी नजर अपनी गाण्ड पे पाकर बहुत खुश हुई, और मेरे लण्ड की तरफ देखा जो एक तंबू बना नजर आ रहा था।

मामी रुक गई। मैं भी उनके पास जाकर रुक गया तो मामी में हाथ बढ़ाकर मेरा लण्ड पकड़ लिया सलवार के ऊपर से ही। क्योंकी वहां किसी के आने का खतरा नहीं था। इसलिए मामी ने बेझिझक मेरा लण्ड पकड़ लिया था और उसको मसल दिया।

मामी ने कहा- "इसको सकून नहीं आ रहा। मेरी गाण्ड देखकर ही ये खड़ा हो गया है..."

मैंने कहा- "मामी आपकी गाण्ड इतनी सेक्सी है क्या बताऊँ... लण्ड तो खड़ा होना ही था..' कहकर मैं और आगे हवा और मामी के साथ लग गया और अपने हाथ उनके चूतड़ों पे रख दिए। मामी के मोटे-मोटे भारी चूतड़ इस वक़्त मेरे हाथों में थे। मैं उनको दबा रहा था।

मामी ने कहा- "वला बेटा डेरे पे चलते हैं। यहां ठीक नहीं है खड़ा होना..."

हम दोनों डेरे में पहुँच गये। डेरे में एक कमरा बना हवा था। मैं और मामी उसमें दाखिल हो और मामी ने कुण्डी लगा दी। फटाफट हम दोनों ने कपड़े उतार दिए।

मामी ने कहा- "आ जाओ बेटा आज अपनी मामी की गर्मी खतम कर दो। तुम्हारे मामू में तो कुछ नहीं होता अभी... फिर हम दोनों ने झप्पी डाल ली। इस वक्त पूरा नंगे थे हम।
 
हम दोनों डेरे में पहुँच गये। डेरे में एक कमरा बना हवा था। मैं और मामी उसमें दाखिल हो और मामी ने कुण्डी लगा दी। फटाफट हम दोनों ने कपड़े उतार दिए।

मामी ने कहा- "आ जाओ बेटा आज अपनी मामी की गर्मी खतम कर दो। तुम्हारे मामू में तो कुछ नहीं होता अभी... फिर हम दोनों ने झप्पी डाल ली। इस वक्त पूरा नंगे थे हम।

कमरे में रोशनी थी। पहली बार आज मामी का पूरा नंगा जिपम देख रहा था जो बेहद सेक्सी था। बड़े-बड़े चूतड़

और मम्मे सिर उठाए खड़े थे। मामी के निपल ब्राउन थे, और फुद्दी में हल्के से बाल थे। मामी की फुद्दी इस वक़्त उनकी टांगों में छुपी हई थी।

झप्पी लगाते ही हम दोनों किस करने लगे। मैंने मामी के मम्मे पकड़ लिए और दबाने लगा और साथ ही हाई निपल भी पकड़ कर मसल देता। नीचे से मेरे लण्ड की नोक मामी की फुद्दी से टकरा रही थी, और मामी अपनी फुद्दी को और आगे कर देती जैसे चाहती हो पूरा लण्ड छ लं। मुझे बड़ा मजा आ रहा था इस वक़्त। मम्में छोड़कर मैंने अपने हाथ से मामी के भारी चूतड़ पकड़ लिए और जोर-जोर से दबाने लगा।

मामी की सिसकियां निकल रही थी। फिर मैं और मामी वहां पड़ी एक चारपाई पे लेट गये और दोबारा किस करने लगे। मामी ने अपनी एक टांग उठाई और मेरे ऊपर रख दी। नीचे फुद्दी मेरे लण्ड के ऊपर आ गई। मामी अपनी फुद्दी को मेरे लण्ड पे रगड़ने लगी, और दबाओं डाल रही थी की मेरा लण्ड अंदर चला जाए। लेकिन मेरी हाइट काम होने की वजह से ऐसा नहीं था हो रहा था।

मैं फिर थोड़ा सा नीचे हवा जिसमें अब मेरा सिर मामी के मम्मे पर आ गया। इस बार मामी ने फुद्दी दबाई तो मेरा आधा लण्ड उनकी फुद्दी में चला गया। मेरी टोपी जब फुद्दी के अंदर गई तो मुझे एकदम गरम एहसास हुवा, फुद्दी अंदर से तन्दूर बनी हुई थी।

मामी का बस नहीं चल रहा था लण्ड पूरा अंदर ले लें। जोश में अचानक मामी मेरे ऊपर आ गई और लण्ड में बैठ गई। लेकिन सारा वजन नहीं डाला मझ पे। जैसे ही परा लण्ड फददी में गया मामी जोर-जोर से सिसकिया लेने लगी, और अपने चूतड़ों को अब ऊपर नीचे कर रही थी। मामी के भारी चूतड़ ठप-ठप मेरे जांघों से टकरा रहे थे। मामी एक बार फारिग हो चुकी थी। फुद्दी के पानी से मेरे लण्ड के इर्द-गिर्द का एरिया गीला हो गया हवा था।

मैंने मामी के मम्मे पकड़ते हुये कहा- "मामी बहुत चिकनी फुद्दी है आपकी.. मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है.."

मामी ने कहा- "तुम्हारा लण्ड भी मुझे इस वक़्त बहुत मजा दे रहा है बेटा..."

मैंने कहा- मामी आपकी फुद्दी बहुत गरम है अंदर से।

मामी ने कहा- "पत्तर कई महीनों से मेरी फुद्दी को लण्ड नहीं मिला, फिर इसने गरम तो होना ही था ना..."

मैं और मामी सेक्स के साथ सेक्सी बातें भी कर रहे थे। मैंने कहा- "मामी आपके चूतड़ बड़े भारी हैं। मेरा इन पे दिल आ गया है..."

मामी ने कहा- "बेटा तुम्हारे माम बड़े शौकीन हैं गाण्ड के। उन्होंने मेरी गाण्ड बहुत मारी है, जिस वजह से मेरे चूतड़ इतने बड़े-बड़े हो गये हैं..."

मैंने कहा- "मामी मैंने भी आपकी गाण्ड मारनी है.."

मामी ने कहा- "मार लेना बेटा लेकिन, आज मेरी फुद्दी मारो.."

मैंने कहा- "ठीक है मामी..."

फिर मैंने मामी को नीचे किया और टांगें उठाकर उनकी फुद्दी में लण्ड डाला और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। सिर्फ दो मिनट मामी की फुद्दी मारी और मैं फारिग हो गया। एक बार और मामी की फुद्दी मारी। फिर घर की तरफ निकल पड़े हम। दूसरी बार फुद्दी मारते हुये मामी की फुद्दी दुखने लगी थी।
 
मैंने कहा- "मामी मैंने भी आपकी गाण्ड मारनी है.."

मामी ने कहा- "मार लेना बेटा लेकिन, आज मेरी फुद्दी मारो.."

मैंने कहा- "ठीक है मामी..."

फिर मैंने मामी को नीचे किया और टांगें उठाकर उनकी फुद्दी में लण्ड डाला और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। सिर्फ दो मिनट मामी की फुद्दी मारी और मैं फारिग हो गया। एक बार और मामी की फुद्दी मारी। फिर घर की तरफ निकल पड़े हम। दूसरी बार फुद्दी मारते हुये मामी की फुद्दी दुखने लगी थी।

घर पहुँचे तो इस वक़्त 3:00 बज रहे थे। नहाकर मैं सोने के लिये लेट गया थकावट महसूस हो रही थी। शाम को उठा, फ्रेश हवा तो मामी ने मुझे मिल्कशेक बनाकर दिया।

खाला ने कहा "बड़ी खिदमत हो रही हैं भांजे की?"

मैं और मामी मुश्कुरा दिये। मैं फिर छत पे चला गया।

मेरे पीछे पीछे खाला भी आ गई। और आते ही मुझे गले लगा लिया और कहा- "आज तुम बड़े याद आ रहे थे, जब तुम डेरे में गये थे, और उम्माह उम्म्म... करके खाला ने मुझे चूमना शुरू कर दिया। चारपाई में बैठी-बैठी खाला मुझे चूम रही थी। खाला का इतना जोश देखकर मेरे लण्ड में जोश आने लगा। इस वक्त अंधेरा छाने लगा था। मैंने खाला को पकड़ा और चारपाई पे लिटाकर खुद भी उनके साथ लेट गया। दुबारा से मुझे खाला में गले लगा लिया और अपने मम्मे मेरे सीना में दबाने लगी, और मेरे लण्ड पे अपनी फुद्दी जोड़ दी। मैं भी खाला को किस करने लगा गाल पे।

खाला ने कहा, "आज मेरा बँटा होंठों पे किस नहीं करेंगा?"

में साथ ही खाला के होंठ चूसने लगा और खाला भी चूसने लगी। मैंने उनके मुँह में पहली बार आज जुबान डाल दी। मुझे पता था आज खाला जोश में हैं, वो नहीं रोकेगी मुझ। जब जुबान डाली तो खाला ने मेरी जुबान पकड़ ली अपनें नरम होंठों से। उफफ्फ... क्या बताऊँ कितना स्वाद आया जब खाला में मेरी जुबान पकड़ ली, और उसको चूसने लगी।

फिर मैंने भी खाना की जुबान चूसी, और मुँह हटाकर कहा- "खाला आपकी जुबान तो बहुत टेस्टी है। दिल करता चूसता ही रहैं." फिर मैंने एहतियातन खाला से कहा- "खाला जान अब मुझे अपनी जुबान भी चूसने दिया करना है आपने.."

खाला ने कहा, "ठीक है मेरी जान... जो मज़ी कर जा तुम तो मेरी नन्ही सी जान हो.." और मुझे चूम लिया।

मैंने कहा- "खाला मुझे आपके दूध देखने हैं और उनको पीना भी है..

खाला ने कहा "बेटा पहां कोई ऊपर आ ना जाए? किसी को पता चल गया तो बहुत बुरा होगा.."

मैंने कहा- "खाला अंदर रूम में चलते हैं वहां तो कोई खतरा नहीं होगा ना?" फिर में और खाला उठे अंदर चले गये। खिड़की के पास खड़े हो गये। ताकी वहां से बाहर की नजर रख सके।

खाला में कमीज ऊपर कर ली। तब मैंने बा को पकड़कर ऊपर किया तो खाला के सफेद मम्मे उछल के बाहर निकले। खाला के निपल पिंक कलर के थे, और अकड़े हये थे। मैंने धड़कते दिल के साथ खाला के गरम मम्में पकड़ लिए और उनको दबाने लगा। मैं उनके मम्मे दबा भी रहा था और मसल भी रहा था।

मैंने कहा- "खाला आपर्क दूध बहुत प्यारे हैं। आप प्लीज... मुझे रोज इनको पार्ने दिया करना..

खाला में ही में सिर हिलाया, और कहा- "बेटा जल्दी कर लो, कोई ऊपर ना आ जाए."

मैंने कोई जवाब नहीं दिया और एक मम्मा मुँह में लिया और चूसने लगा। खाला के निपल बहुत मुलायम थे। जैसे ही मैंने निपल मुँह में लिया खाला आहें भरने लगी और मुझे अपने साथ दबा लिया। मुझ में पता नहीं कहाँ से हिम्मत आ गई। मैंने खाला का एक हाथ पकड़ा और अपने लण्ड पे रख दिया। खाला को जैसे करेंट लगा और उन्होंने हाथ हटा लिया। दूसरी बार मैंने उनका हाथ लण्ड पे दबाकर रखा थोड़ी देर, और अपना हाथ छोड़ दिया।

खाला ने टीला सा हाथ मेरे लण्ड पे बस रखा हवा था।

मैंने खाला को कहा- "इसको अच्छी में पकड़ें ना प्लीज..."

खाला ने कांपते हाथों से मेरे लण्ड पे मुठी बना ली। अब मेरा लण्ड फूल रहा था खाला के हाथ में की अचानक एक झटका लगा मुझे और मेरा लण्ड खाला के हाथ का दबाओ बर्दाश्त ना कर सका और में खाला के हाथ में फारिग होने लगा। मेरा लण्ड झटके ले रहा था। खाला का पता चल गया था मेरे साथ क्या हुवा है।

खाला ने कहा "बदतमीज... ये क्या किया तुमने? अपने आप में कंट्रोल रखा करो.."

***** *****
 
कड़ी 17

मैंने कहा- "खाला आपके हाथ इतने नरम थे, मैं किया करता?"

खाला ने कहा "मैं फिर अगली बार वहां हाथ नहीं लगाऊँगी। अभी तुम छोटे हो बेटा..."

मैंने कहा- "ठीक है खाला..."

फिर हम रूम से बाहर आए और नीचे आ गये। डिनर करके फारिग हवा।

बाजी अमीना ने कहा- "यं कुछ किताबें हैं, मेरी सहेली के घर दे आओ."

मैंने कहा- "आज टहलने नहीं जाना आपने..."

बाजी अमीना ने कहा- "नहीं, आज मेरा मूड नहीं है..."

मैंने किताबै ली और घर से बाहर निकल आया। थोड़ी देर बाद बाजी की सहेली के घर पहुँचा। दरवाजा खाटकाया तो बाहर बाजी की दोस्त आई। उसनें आज भी दुपट्टा नहीं था लिया हुवा था। उसके मोटे-मोटें मम्मे मेरी नजरों के सामने थे।

में जाने के लिये मुड़ा तो उसने कहा- "रुको छाए पीकर जाना.."

मैंने बहुत ना ना की लेकिन उसने जबरदस्ती मुझे अंदर बुलाया और बैठक में बिठा दिया। काफी खुश हाल लोग लग रहे थे। बैठक में काफी कीमती सामान पड़ा हबा था। कुछ देर बाद एक औरत मेरे लिए चाय लेकर आ गई, साथ कुछ खाने को भी था।

औरत मेरे पास बैठ गई, और मेरे में पूछने लगी- "कैसे हो? घर में कौन-कौन है? कहां से आए हो? इत्यादि.." आँटी देखने में बड़ी सोबर खातून लग रही थी। नजर का चश्मा लगाए हमें थी और कीमती ईस पहना हवा था। जिश्म बड़ा सुडौल था, मम्मे और गाण्ड सामान्य। उनका जिम लचकदार था जैसे वो वर्जिश करती हों, ऐसा मुझे लगा, क्योंकी जिम की शेप बहुत अच्छी थी उनकी।

फिर बाजी की सहेली आ गई और आँटी उठकर चली गई। वो मुझे तेज नजरों से देख रही थी। मैं शर्मा रहा था। मैंने जाना ही मुनासिब समझा। मैं उठा और इजाजत ली उनसे और बाहर आ गया।

वो भी उठी और मेरे साथ ही दरवाजे तक आई। दरवाजे पे मुझे रोक लिया, और धीरे आवाज में कहा- "कल इसी टाइम आ सकते हो?"

मैं चौका और कहा- "क्यों, क्या करना है आपजे?"

उसने कहा- "कल आओगे तो बताऊँगी.." और मुझे एक प्यार सी स्माइल दी, जिससे मेरा दिल बाग-बाग हो

गया।

मैंने कहा- "ठीक है आ जाऊँगा.."

उसने कहा- "बैठक का दरवाजा खुला होगा कल इस टाइम। तुम देखकर अंदर आना। मैं इतंजार करंगी तुम्हारा.."

मैंने हामी भरी और वहां से निकल आया।
 
उसने कहा- "कल आओगे तो बताऊँगी.." और मुझे एक प्यार सी स्माइल दी, जिससे मेरा दिल बाग-बाग हो

गया।

मैंने कहा- "ठीक है आ जाऊँगा.."

उसने कहा- "बैठक का दरवाजा खुला होगा कल इस टाइम। तुम देखकर अंदर आना। मैं इतंजार करंगी तुम्हारा.."

मैंने हामी भरी और वहां से निकल आया।

घर पहुँच गया। घर में दाखिल हुआ तो वाशरूम के पास बाजी अमीना खड़ी थी। मैंने उनकी गाण्ड में चुटकी काट दी। वो उसली और मुझे चपत लगाई- "देख लिया करो आगे-पीछे भी..."

मैंने कहा- "कोई भी नहीं है यहां बाजी.." और एक बार उनका चूतड़ पकड़कर दबा दिया।

लेकिन इस बार बाजी में कुछ नहीं कहा। एक बार और दबाया उनका चूतड़ तो बाजी ने कहा- "क्या बात है दिल कर रहा है क्या फुद्दी लेने का?"

मैंने कहा- "बाजी, मिल जाए तो अच्छा है। वाकई बहुत दिल कर रहा है...'

बाजी ने कहा- "अच्छा मैं करती है कुछ.. तुम अंदर चलो.."

मैं अंदर चला गया और घर वालों के पास बैठ गया। थोड़ी देर बाद बाजी अंदर आई और मुझे इशारा किया ऊपर जाने का। मैं आराम से उठा और ऊपर चला गया। 5 मिनट बाद बाजी भी ऊपर आ गई।

बाजी ने कहा- "वहां वाशरूम में चलते हैं..."

फिर में और बाजी अमीना वाशरूम में चले गये, और कुण्डी लगा ली लेकिन लाइट नहीं जलाई।

बाजी ने कहा- "जल्दी-जल्दी कर लो, कोई ऊपर ना आ जाए। बहुत रिस्क लेकर हम आये हैं यहां.."

मेरा लण्ड तो पहले से ही खड़ा हो चुका था, जब से ऊपर आया हुवा था। बाजी में मेरा लण्ड पकड़कर चेक किया खड़ा है की नहीं? फिर बाजी ने सलवार नीचे की और दीवार के साथ घोड़ी बन गई। मुझे इशारा किया की आ जाओं जल्दी, अली अपना लण्ड अंदर करो।

मैं बाजी की गाण्ड के पास जाकर अपनी सलवार नीचे की और लण्ड में अच्छी तरह थूक लगाई, और लण्ड को फुद्दी पे फेरा, और जहां मुझे फुद्दी का सुराख लगा, वहा लण्ड पे प्रेशर डाला और लण्ड मेरा घुसता चला गया उनकी फुद्दी में।

बाजी को थोड़ा झुकना पड़ा था, फिर जाकर मेरा लण्ड उनकी फुद्दी के बराबर आया था। लण्ड डालकर मैंने बाजी के चूतड़ों को पकड़ लिया और फुदद्दी में लण्ड को धक्के लगाने लगा। मेरा लण्ड बाजी की फुददी में फँसा-फंसा जा रहा था, और अदर से फुद्दी गरम थी, जो लण्ड के रास्ते मुझे पूरा गरम कर रही थी।

बाजी ने अपनी टांगों के नीचे से अपना हाथ गुजारा और मेरे टट्टे पकड़कर सहलाने लगी। इससे मेरी टाँगें अकड़ गई। क्योंकी सिर से पैर तक की लहरें मेरे जिम में दौड़ रही थी। बाजी बड़े मस्त अंदाज में मेरै टटें सहला रही थी। में बात भी नहीं कर रहा था बाजी से की कही बाहर कोई सुन ही ना ले। वरना मेरा बड़ा दिल कर रहा था बाजी से सेक्सी बातें करने को। बाजी एक बार फारिग हो चुकी थी।

मैंने अपने हाथ मम्मों पे रख दिए थे, बा में अपना हाथ घुसा दिया था और बाजी के टाइट मम्मे पकड़ लिए जो मेरे हाथों में नहीं आ रहे थे। मैं फुद्दी में धक्के लगाने के साथ-साथ मम्मे भी लय के साथ दबा रहा था। बाजी की गरम सिसकियां निकल रही थी। मैं पूरा जोर-जोर बाजी को धक्के लगा रहा था। मैं थक गया था और बाजी भी। लेकिन मेरा लण्ड था की फारिग नहीं था हो रहा था।

अचानक बाजी आगे से बगल हुई और उकड़ होकर नीचे बैठ गई और मेरे लण्ड को पकड़ लिया। लण्ड पे बाजी की फुद्दी का पानी लगा हुआ था। अचानक मुझे नरम-नरम एहसास हुआ लण्ड पे। मैंने गौर किया तो बाजी में मेरा लण्ड होंठों में दबाया हुआ था। उफफ्फ... क्या जरम एहसास था लण्ड पे। इतना नरम एहसास तो बाजी की फुददी का भी नहीं हुवा था।

मेरे लण्ड में झटके लेने शुरू कर दिए। बाजी में जानदार चुप्पे लगाने शुरू कर दिए। मुँह की गरम महक मुझे लण्ड पे महसूस हो रही थी। मैंमें हरान भी था और मजा भी बहुत आ रहा था। कोई एक मिनट ही बाजी ने लण्ड को मुँह में रखा होगा की मेरा लण्ड फूलने लगा। बाजी को पता लग गया की मैं फारिग होने लगा हूँ। बाजी ने मुँह से लण्ड बाहर निकाला और हाथ से लण्ड को हिलाया और मैं फारिग हो गया।

वहीं मैंने लण्ड साफ किया और एक-एक करके वाशरूम से बाहर आ गये। फिर नीचे भी ऐसे गये जिससे घर वालों को शक ना हो। नीचे थोड़ी देर गप-शप हुई, और साने को लेट गये। में नीचे खाला के पास ही लेटा था। में जल्द सो गया था। रात को मेरी आँख खुली क्योंकी प्यास लग रही थी।

मैं उठा और पानी पीने किचन में गया। वापस आया तो खाला कर बट लिए सो रही थी। मैं दुबारा लेटा और सो गया। अगले दिन सारा दिन बस ऐसे ही छेड़छाड़ करते गुज़रा। जैसे है रात हई मुझे बाजी के घर जाने की जल्दी पड़ गई। मैंने खाना खाया और टहलने के बहाने बाहर निकाल आया, और मेरे कदम बाजी की दोस्त के घर की तरफ उठ गये।

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वहीं मैंने लण्ड साफ किया और एक-एक करके वाशरूम से बाहर आ गये। फिर नीचे भी ऐसे गये जिससे घर वालों को शक ना हो। नीचे थोड़ी देर गप-शप हुई, और साने को लेट गये। में नीचे खाला के पास ही लेटा था। में जल्द सो गया था। रात को मेरी आँख खुली क्योंकी प्यास लग रही थी।

मैं उठा और पानी पीने किचन में गया। वापस आया तो खाला कर बट लिए सो रही थी। मैं दुबारा लेटा और सो गया। अगले दिन सारा दिन बस ऐसे ही छेड़छाड़ करते गुज़रा। जैसे है रात हई मुझे बाजी के घर जाने की जल्दी पड़ गई। मैंने खाना खाया और टहलने के बहाने बाहर निकाल आया, और मेरे कदम बाजी की दोस्त के घर की तरफ उठ गये।

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बाजी की दोस्त के घर के बाहर पहुँचा तो देखा वो लड़की बैठक के दरवाजे में खड़ी थी। मैं इधर-उधर देखता अंदर चला गया बैठक के बाहर वाले रास्ते से। अंदर अधेरा था बैठक में। बस सहन की रोशनी से बैठक में हल्का सा उजाला था। मैं आ तो गया था, लेकिन दिल धड़क रहा था। अंदर से डर भी लग रहा था।

बाजी की दोस्त मेरे पास आई और अपना नाम उसने ज़ारा बताया। ज़ारा एक भरे हुये जिस्म की लड़की थी उम 20 साल से ऊपर थी। थी बड़ी सेक्सी, हाइट थोड़ी कम थी इसकी बाजी अमीना से।

मैंने कहा- "जी बतायें क्या कहना था अपने?" मैंने डरते-डरते सवाल किया।

जारा ने कहा- "मैं तुमसे दोस्ती करना चाहती हैं। क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगे?"

ये सुनकर मैं बहुत खुश हुआ की एक लड़की मुझसे खुद दोस्ती करना चाहती है। मैंने कहा- "जी ठीक है, मैं तैयार हूँ आपसे दोस्ती के लिये.."

जारा ने कहा- "ठीक है... अब हम अच्छे दोस्त हैं, और मुझे आप आप ना कहो, तुम कहो."

मैं मुश्कुराया और कहा- "ठीक है जैसे तुम खुश.."

फिर ज़ारा मेरे करीब हुई।

मैंने उससे पूछा- "अम्मी अब्बू किधर हैं?"

उसने कहा- "भाई तो एक काम से शहर से बाहर गया है और अम्मी अब्बू इधर गाँव में है। एक घर फोतगी की ताजियत करने गये हैं..."

अब हम दोनों करीब खड़े थे। मैंने कहा- "ये रिस्क है, कोई आ ना जाए?"

जारा ने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे तसल्ली दी. "कोई नहीं आता." और मेरे हाथ को वो अपने दोनों हाथों में लेकर मसलने लगी थी।

मैं चुप रहा और अपना हाथ नहीं छुड़वाया। क्याकी मुझे मजा आ रहा था उसके नरम हाथों को महसूस करके। तन्हाई में एक लड़की के साथ खड़ा था और अब मेरे लण्ड में सरसराहट हो रही थी। में समझ गया अब लण्ड खड़ा हो जायेगा।

जारा ने इस वक्त दुपट्टा नहीं लिया हुवा था। उसके मम्मे काफी टाइट थे। उसने शार्ट कमीज पहनी हुई थी और जीचे चूड़ीदार पाजामा। कुल मिलाकर ज़ारा एक सेक्स मशीन लग रही थी।

कुछ देर बाद मैंने कहा- "मैं अब चलता है काफी टाइम हो गया है..."

जारा ने कहा- "नहीं, अभी टाइम है अम्मी अब्बू के आने में..." इसके साथ ही ज़ारा मरे और करीब आ गई और मुझसे उसका जिस्म टच हुवा तो मुझे उसकी गरम साँसें अपने ऊपर महसूस हुई और धीरे से उसने मुझसे कहा "आओ इधर सोफे पे बैठते हैं.."
 
जारा ने कहा- "नहीं, अभी टाइम है अम्मी अब्बू के आने में..." इसके साथ ही ज़ारा मरे और करीब आ गई और मुझसे उसका जिस्म टच हुवा तो मुझे उसकी गरम साँसें अपने ऊपर महसूस हुई और धीरे से उसने मुझसे कहा "आओ इधर सोफे पे बैठते हैं.."

जब ज़ारा सोफे पे बैठी तो मुझसे सटकर बैठ गई और अपना चेहरा मेरी तरफ करके बैठी और अपना एक हाथ मेरी जांघ पे रख दिया। उसका हाथ मेरी जांघ पे रंगने लगा था। मेरा दिल उछल के गले में आ गया। लण्ड जो पहले ही खड़ा था उसने झटका लिया, जिसको जारा ने भी महसूस किया। इस वक़्त हम दोनों चुप थे और खामोश जबान समझ रहे थे एक दूसरे की।

अचानक जारा ने हाथ बढ़ाकर मेरा लण्ड पकड़ लिया। जैसे ही मेरा लण्ड उसके हाथ में जकड़ा गया, साथ ही जारा की आवाज निकली- "ओहहह... इतना लंबा वाउ... इस उम्र में 5 इंच का लण्ड बड़ी बात थी उसके लिये। फिर ज़ारा ने कहा- "अली तुमनें तो पूरा नाग पाल रखा है..."

मैं मुश्कुरा के रह ग्या। अब ज़ारा का हाथ लण्ड पे चल रहा था। मैंने अपना एक हाथ ज़ारा की मोटी जांघ पे रख दिया। रेशमी सूट के ऊपर से उसका जिश्म ऐसे ही था जैसे नंगे जिस्म का हाथ लगा रहा है। मेरी झिझक खतम हो गई थी। मैं ज़ारा की नरम जांघ को दबा रहा था अब, और मजे से लण्ड दबवा रहा था। ज़ारा ने अपना हाथ मेरी सलबार में डाल दिया और लण्ड को पकड़ लिया। लण्ड की टोपी पें एक खास अंदाज में अपने हाथ के अंगूठे का दबाया जिससे मेरा लण्ड जोश से सनसना उठा।

मेरे लण्ड में एक्सट्रा एनर्जी आ गई ऐसा करने से। मेरी आँखें बंद हो गईं। ज़ारा में मेरी सलवार पकड़कर नीचे खिसकाई। अब मेरा लण्ड नंगा हो गया था। ज़ारा ने लण्ड को मुँह में लिया और जबरदस्त चुप्पा लगाया और टोपी की नोक पे जुबान की नोक फेर रही थी साथ में। मुझे हैरानगी नहीं हुई। क्योंकी बाजी की सहेली थी तो ऐसा ही होना था।

जारा लण्ड को मुंह में गोल-गोल घुमा रही थी। अचानक वो उठी उसने अपनी सलवार उतार दी और मेरे ऊपर आकर बैठ गई टाँगें बायें दायां रखकर, और मुह मेरी तरफ कर लिया। उफफ्फ... जब वो बैठी तो उसकी गरम फुद्दी मेरे लण्ड से टच हुई। मेरा गरम लण्ड उसकी गीली फुद्दी की नीचे दब गया था। उसने मुझे किस की

और मैं भी उसका जवाब देने लगा।

जारा धीरे-धीरे हिलने लगी, जिससे उसकी फुद्दी मेरे लण्ड पें घिसने लगी थी। मेरा मजं से बुरा हाल हो गया था। मैंने अपने हाथ बढ़ाए और उसके चूतड़ बगल से पकड़कर मसलने लगा। चूतड़ों पे गास्त बहुत नरम था उसका। दिल कर रहा था यहां से जारा के चूतड़ पकड़े रखें बंदा।

किस करते हमें ज़ारा हिल रही थी। उसकी फुददी से पानी निकलकर मेरे लण्ड पे बह रहा था। मैं समझ गया

ज़ारा फारिग हो रही है, लेकिन उसकी हवस कम नहीं हुई थी। इसलिए अभी भी लण्ड में बैठी फुद्दी को मसले जा रही थी लण्ड पें।

मेरे लण्ड का इस वक़्त बुरा हाल हो रहा था। मुझे लग रहा था अब मेरा भी निकलने वाला है। मैंने ज़ारा के चूतड़ों को जोर से पकड़ लिया और घस्से लगाने लगा उसकी फुद्दी पें। ज़ारा की सिसकियां निकाल रही थी। कुछ देर बाद में फारिग हो गया।

जारा मुझपर से उठी सलवार पहनी, और मैंने भी अपने कपड़े ठीक किए। ज़ारा को लंबी किस की और बाहर निकल आया बैंठक के रास्ते। कल गत दुबारा आने का टाइम हमने फिक्स कर लिया था।

में घर पहुँचा तो खाला ने कहा- "इतनी देर कहां लगा दी?"
 
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