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Guest
मैंने खाला का हाथ पकड़ रखा था। मैं बड़ा एंजाप कर रहा था। इस बात खाला के साथ पार्क में घूमाता हवा। खाला भी बड़ी खुश नजर आ रही थी। हम सब एक झूले के पास पहुँचे, जो गोल चक्कर में घुमाता था और साथ-साथ ऊपर नीचे भी होता था। माम में । टिकटें ले लिए। बड़ी मामी नहीं बैंठी, क्योंकी उनको चक्कर आ जाते थे।
मैं और खाला साथ बैठ गये। खाला थोड़ा घबराई हुई थी, बोली- "बेटा मुझे तो डर लग रहा है..."
मैंने कहा- "खाला, मैं हूँ ना आपके साथ। आप नहीं घबराओ.."
हम सब बैठ गयें झूले में। 5 मिनट बाद झूला जब भर गया तो चल पड़ा। जिस डब्बे में हम बैठे थे, उसमें हम जुड़ के बैठे हये थे, क्योंकी जगह कम थी। खाला जें मेरा दाया बाजू जोर से पकड़ लिया और अपनी बगल में दबा लिया। मेरा बाजू खाला के मम्मे में पूरा चिपक गया। मुझे अपने बाजू पे मम्मे का नरम एहसास महसूस हो रहा था। झला चल पड़ा तो मैंने अपना एक हाथ खाला की जांघ पे रख दिया। खाला को तसल्ली देने के अंदाज में।
मैं खाला को तसल्ली दंनें के अंदाज में उनकी जांघ दबाने लगा। जांघ का गरम गोस्त अपने हाथों में लेकर मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरी टांगों में लण्ड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा, जो एक मिनट में ही पूरा खड़ा हो गया। में अपने हाथ को खाला की जांघ पे फुद्दी के नजदीक लें गया और वहां हाथ को दबाने लगा। मुझे ये एहसास ही मार दे रहा था की मेरा हाथ इस वक़्त खाला की फुद्दी के करीब है। लण्ड झटके पे झटका मार रहा था, और बाजू को भी मैं मम्मै पे रगड़ने लगा।
इतनी देर में झला धीरे हवा, तो खाला ने सुख की सांस लिया और मेरा बाजू छोड़ दिया। नीचे उतर के हम कैंटीन की तरफ गये। वहां से गोल गप्पे लिए और खाने लगे। खाकर जब फारिग हमें तो एक झले में और बैठे सब- कस्ती वाले में। लेकिन मैं नहीं बैठा उसमें ।
वहां भूत बंगला भी था। माम ने कहा- "चला सब चलते हैं। देखते हैं क्या होता है?"
औरतें सब इर रही थी। लेकिन मामू ने सबके टिकेट लिए और जबरदस्ती साथ लेकर भूत बंगले में चले गये। वो एक छोटी जगह पे था। हम सब दीवार के साथ लग गये। जगह कम थी इसलिए खाला मेरे आगे खड़ी हुई। लुबना मेरी बगल में थी। बड़ी मामी भी आगे खड़ी थी बाजी छोटी मामी के साथ।
उन्होंने अंधेरा कर दिया और एक मधिम लाइट जला दी और उसको ओज आफ करने लगे। सामने दो झलें लगे हमें थे। जिसमें दो आदमी भूत बने झूलते आतें उन झलों में और हमारे बिल्कुल पास से होकर जाना होता उनको। ऐसे ही स्टंट थे जो टोटल 15 मिनट उन्होंने कर ना था। इर में भी रहा था लेकिन इतना ज्यादा नहीं।
आगे खाला खड़ी थी तो कुछ हौसला था ये भी।
अचानक एक आदमी आगे से आया और झलता हवा हम पे आया। खाला चीखती हुई पीछे हटी तो मुझसे चिपक गई। खाला का बस नहीं चल रहा था, की मेरे आर-पार गुजर जाती। खाला का जिक्ष्म कापने लगा। उनके माटे माटे चूतड़ मेरे लण्ड पे टिक गये थे। इस माहौल में भी मेरा लण्ड चूतड़ों की गर्मी पाकर खड़ा हो रहा था। लेकिन खाला को कोई होश नहीं था।
अगले दो आदमी झलते हये आए। तब तक मेरा लण्ड खड़ा होकर खाला के चूतड़ों में गायब हो चुका था। वहां स्पीकर लगा हुवा था, जहां से डरावनी आवाजें निकल रही थी। खाला इतने जोर से मुझसे चिपकी हुई थी की अगर बीच में कपड़े ना होते तो लण्ड इस वक़्त खाला की गाण्ड या फुद्दी में घुस गया होता।
दो आदमी झलते हमें आए और आगे तक आ गये। खाला चीखती हई हिली। मैंने अपने हाथ खाला के भारी और नरम चूतड़ों पे रख दिएरा मोका जानकर मैं उनको दबाने लगा। अफफ्फ क्या नरम चूतर थे खाला के क्या बताऊँ। ऐसा लग रहा था मैं गई को पकड़कर मसल रहा है जैसे इतनी नरम गाण्ड थी खाला की।
मैं और खाला साथ बैठ गये। खाला थोड़ा घबराई हुई थी, बोली- "बेटा मुझे तो डर लग रहा है..."
मैंने कहा- "खाला, मैं हूँ ना आपके साथ। आप नहीं घबराओ.."
हम सब बैठ गयें झूले में। 5 मिनट बाद झूला जब भर गया तो चल पड़ा। जिस डब्बे में हम बैठे थे, उसमें हम जुड़ के बैठे हये थे, क्योंकी जगह कम थी। खाला जें मेरा दाया बाजू जोर से पकड़ लिया और अपनी बगल में दबा लिया। मेरा बाजू खाला के मम्मे में पूरा चिपक गया। मुझे अपने बाजू पे मम्मे का नरम एहसास महसूस हो रहा था। झला चल पड़ा तो मैंने अपना एक हाथ खाला की जांघ पे रख दिया। खाला को तसल्ली देने के अंदाज में।
मैं खाला को तसल्ली दंनें के अंदाज में उनकी जांघ दबाने लगा। जांघ का गरम गोस्त अपने हाथों में लेकर मुझे बहुत मजा आ रहा था। मेरी टांगों में लण्ड धीरे-धीरे खड़ा होने लगा, जो एक मिनट में ही पूरा खड़ा हो गया। में अपने हाथ को खाला की जांघ पे फुद्दी के नजदीक लें गया और वहां हाथ को दबाने लगा। मुझे ये एहसास ही मार दे रहा था की मेरा हाथ इस वक़्त खाला की फुद्दी के करीब है। लण्ड झटके पे झटका मार रहा था, और बाजू को भी मैं मम्मै पे रगड़ने लगा।
इतनी देर में झला धीरे हवा, तो खाला ने सुख की सांस लिया और मेरा बाजू छोड़ दिया। नीचे उतर के हम कैंटीन की तरफ गये। वहां से गोल गप्पे लिए और खाने लगे। खाकर जब फारिग हमें तो एक झले में और बैठे सब- कस्ती वाले में। लेकिन मैं नहीं बैठा उसमें ।
वहां भूत बंगला भी था। माम ने कहा- "चला सब चलते हैं। देखते हैं क्या होता है?"
औरतें सब इर रही थी। लेकिन मामू ने सबके टिकेट लिए और जबरदस्ती साथ लेकर भूत बंगले में चले गये। वो एक छोटी जगह पे था। हम सब दीवार के साथ लग गये। जगह कम थी इसलिए खाला मेरे आगे खड़ी हुई। लुबना मेरी बगल में थी। बड़ी मामी भी आगे खड़ी थी बाजी छोटी मामी के साथ।
उन्होंने अंधेरा कर दिया और एक मधिम लाइट जला दी और उसको ओज आफ करने लगे। सामने दो झलें लगे हमें थे। जिसमें दो आदमी भूत बने झूलते आतें उन झलों में और हमारे बिल्कुल पास से होकर जाना होता उनको। ऐसे ही स्टंट थे जो टोटल 15 मिनट उन्होंने कर ना था। इर में भी रहा था लेकिन इतना ज्यादा नहीं।
आगे खाला खड़ी थी तो कुछ हौसला था ये भी।
अचानक एक आदमी आगे से आया और झलता हवा हम पे आया। खाला चीखती हुई पीछे हटी तो मुझसे चिपक गई। खाला का बस नहीं चल रहा था, की मेरे आर-पार गुजर जाती। खाला का जिक्ष्म कापने लगा। उनके माटे माटे चूतड़ मेरे लण्ड पे टिक गये थे। इस माहौल में भी मेरा लण्ड चूतड़ों की गर्मी पाकर खड़ा हो रहा था। लेकिन खाला को कोई होश नहीं था।
अगले दो आदमी झलते हये आए। तब तक मेरा लण्ड खड़ा होकर खाला के चूतड़ों में गायब हो चुका था। वहां स्पीकर लगा हुवा था, जहां से डरावनी आवाजें निकल रही थी। खाला इतने जोर से मुझसे चिपकी हुई थी की अगर बीच में कपड़े ना होते तो लण्ड इस वक़्त खाला की गाण्ड या फुद्दी में घुस गया होता।
दो आदमी झलते हमें आए और आगे तक आ गये। खाला चीखती हई हिली। मैंने अपने हाथ खाला के भारी और नरम चूतड़ों पे रख दिएरा मोका जानकर मैं उनको दबाने लगा। अफफ्फ क्या नरम चूतर थे खाला के क्या बताऊँ। ऐसा लग रहा था मैं गई को पकड़कर मसल रहा है जैसे इतनी नरम गाण्ड थी खाला की।