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Incest घर की मुर्गियाँ

अजय को लगने लगा की ये चिड़िया मेरे जाल में फंस चुकी है। कोई मोका हाथ लग जाय तो टीना की कुंवारी चूत मिल सकती है। मगर ये काम बहुत खतरनाक है।

टीना ने फल काटकर एक प्लेट में रखे- “लीजिए अंकल.." और पलट गई। अजय का लण्ड टीना की गाण्ड की दरार से बाहर निकल गया। उफफ्फ... क्या हाल था इस वक्त अजय का। टीना के हाथों में फल की प्लेट थी। अजय फट से फल खाने लगा।

अजय- टीना तुम भी खाओ।

टीना- “अंकल, आप प्लेट पकड़ोगे। तभी तो मैं खऊँगी..."

अजय- “आहह.. लाओ मैं भी कैसा पागल हो गया हूँ.."

टीना ने फल की प्लेट अजय को पकड़ दी, और बास्केट से एक केला निकालकर खाने लगी- “अंकल मझे तो फल ऐसे ही खाने में मजा आता है...” और केला छीलकर अजय की तरफ स्माइल डाल लिया।

अजय को क्या सीन लग रहा था उफफ्फ... जैसे टीना ने अजय का लण्ड मुँह में डाला हो। अजय बोला- “तुमको केला इतना पसंद है?"

टीना- "जी अंकल, मुझे केला बहुत पसंद है। आई लव बनाना.."

अंजली भी तभी उठकर किचेन में आ गई, और कहा- “क्या हो रहा है यहां पर?"

अजय- "टीना बिना नाश्ता किए जा रही थी, तो मैंने कहा नाश्ता करके जाना..."

अंजली- हाँ बेटा, बिना नाश्ता किए नहीं जाओगी। चलो में नाश्ता तैयार करती

नेहा और समीर को उठा दो..."

टीना नेहा के रूम में चली गई।

अंजली- “सुनो, कम से कम अपना लोवर तो चेंज कर लेते। नीचे अंडरवेर भी नहीं पहना है। घर में जवान बेटियां हैं, कुछ तो शर्म किया करो। जाओ जाकर जल्दी से चेंज कर लो, तब तक मैं नाश्ता तैयार करती हूँ..."

अजय कुछ बोल नहीं पाया और सीधा अपने रूम में जाकर कपड़े चेंज किए, और नाश्ता करके दुकान पर पहुँच गया। टीना- अच्छा नेहा, अब मैं चलती हूँ। तू समीर से बात कर लेना और मुझे बताना।

नेहा- ओह बड़ी जल्दी में है समीर के साथ सोने में? थोड़ा सबर रख गरम-गरम खायेगी तो मुँह जल जायेगा।

टीना- यार रात में तूने बड़ा बेचैन कर दिया। मुझे तो लण्ड की चाहत सी हो गई है।

नेहा- चल, मैं कोशिश करती हैं।

***

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***

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अजय अपनी दुकान पर पहुँच चुका था मगर आज अजय का दिल नहीं लग रहा था। बार-बार टीना का चेहरा नजर आ जाता। अजय की दुकान पर दो लड़के काम करते थे- रोहित और अमित। अजय ने मोबाइल उठाया

और विजय के घर का नंबर मिला दिया। फोन किरण ने उठाया।

किरण- हेलो।

अजय- भाभीजी प्रणाम, मैं अजय बोल रहा हूँ।

किरण- अरे.. भाई साहब आप... नमस्ते।

अजय- और भाभी कैसी हैं आप?

किरण- बढ़िया है।

अजय- और रात तो आपने बैगन खाये होंगे?

किरण- जी भाई साहब बड़े स्वादिष्ट बने थे।

अजय- अकेले-अकेले खाते हो। हमें भी याद कर लिया करो। अभी क्या कर रही हो?

किरण- गजर पकड़ रखी है, सोच रही हूँ आज इसी की सब्जी बना लूँ।

अजय- क्या बात है, कल बैगन, और आज गजर?

किरण- "हाँ भाई साहब, रोज-रोज एक ही टेस्ट में मजा नहीं आता, मन ऊब जाता है। आप रोज एक ही सब्जी

खाते हो क्या?"

अजय- भाभी क्या करूं अंजली रोज वही सब्जी परोस देती है। कभी आप ही खिला देना। मेरा भी स्वाद बदल जायेगा..."

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किरण- "आप आते ही नहीं, मैं तो आज भी खिला दूं। बस आप मार्केट से ताजी और लंबी मूली लेते आना, खाने

में टेस्ट आ जायेगा..."

अजय-आज तो नहीं आ सकता, कल का प्रोग्राम रखते हैं।

किरण- बोलो किसी टाइम आओगे? मुझे तैयारी भी करनी पड़ेगी।

अजय- लंच टाइम में आ जाऊँगा।

*****

*****

 
अंजली- नेहा समीर कहां है?

नेहा- अपने रूम में फाइल बना रहे हैं।

अंजली- मैं मार्केट से सब्जियां लेने जा रही हूँ, तू तब तक सफाई कर ले।

नेहा- जी मम्मी।

अंजली मार्केट चली गई, तो नेहा के चेहरे पर एक सेक्सी स्माइल आ गई। जैसे एकदम से दिमाग में प्लान ने जन्म लिया हो। नेहा ने मुख्य दरवाजा बंद किया और अपने रूम में जाकर शार्ट कमीज पहन ली, और समीर के रूम में पहुंच गई।

नेहा- क्या कर रहे हो भइया?

समीर बिना नेहा की तरफ नजर उठाए- “फाइल बना रहा हूँ.."

नेहा- कैसी फाइल बना रहे हो? क्या हल्प करूं?

समीर- नहीं, ये एक प्राजेक्ट फाइल है। कंप्यूटर से कापी कर रहा हूँ।

नेहा- इससे क्या होगा।

समीर- मुझे जाब मिलेगी।

नेहा- भइया कितना काम बाकी है?

समीर- बस 5 मिनट में तैयार हो जायेगी।

नेहा- चाय पियोगे?

समीर- “क्या बात है आज..." और इस बार समीर की नजरें नेहा की तरफ चली गईं। समीर नेहा की हालत देखकर चौंक गया, और कहा- "ये सब क्या पहन रखा है तूने? शर्म नहीं आई इस हालत में मेरे सामने आते हए? जा अभी चेंज कर ये सब..."

नेहा- "क्या भइया... टीना भी तो ऐसे ही कपड़े पहनती है। उसे तो कभी टोका नहीं। आज मैंने पहन लिए तो कितना डाँट रहे हो? और मेरी आँखों से आँसू निकल जायेंगे..."

समीर- “देख मेरी प्यारी बहना, लड़की जितनी ठकी-छुपी होती है उतना ही अच्छा है। जिश्म की नुमाइश करने से कुछ नहीं होता। बाहर वाले सब गंदी-गंदी नजरों से देखेंगे तो तुझे ये सब अच्छा लगेगा? कोई तेरा हाथ पकड़ ले और गंदे कामेंट मारे।

नेहा- “मैं कोई बाहर थोड़ी ही ऐसे कपड़े पहनकर जा रही हूँ। घर में मेरे और आपके अलावा कौन है? क्या घर में भी ऐसे कपड़े नहीं पहन सकती? अपने दिल की खावहिश पूरी नहीं कर सकती?" और नेहा सुबकने लगी, आँसू की बूंदें गालों पर बहने लगीं।

समीर- “अच्छा बाबा सारी... अब रो क्यों रही है? मगर सिर्फ घर पर ही पहनना ऐसे कपड़े..."

नेहा के चेहरे पर खुशी झलक आई, और समीर के हाथ पकड़कर- “थॅंक यू भइया...' कहा।

समीर- चल जा चाय बना ला। तब तक मेरी फाइल भी कम्प्लीट हो जायेगी।

फिर नेहा किचेन से चाय बना लाई।

 
नेहा के चेहरे पर खुशी झलक आई, और समीर के हाथ पकड़कर- “थॅंक यू भइया...' कहा।

समीर- चल जा चाय बना ला। तब तक मेरी फाइल भी कम्प्लीट हो जायेगी।

फिर नेहा किचेन से चाय बना लाई।

समीर- मम्मी ने तुझे कुछ नहीं कहा इन कपड़ों में देखकर?

नेहा- वो तो मार्केट गई हैं।

समीर- तभी तुझे ये सब करने की सूझी।

नेहा- भइया आप कल शर्त भी तो हार गये थे?

समीर- हाँ बोल, क्या करना है मुझे?

नेहा- आपको गुस्सा तो बहुत जल्दी आ जाता है।

समीर- ऐसा क्या करना चाहती है मुझसे?

नेहा- पहले प्रामिस करो मुझे डाँटोगे नहीं।

समीर- “अच्छा बाबा प्रामिस... अब बोल..."

नेहा- टीना एक रात आपके रूम में सोयेगी।

समीर- "ये क्या बकवास है? तेरा कोई दिमाग तो नहीं चल गया? डाक्टर के पास चली जा...”

नेहा- “मुझे पागल बना दिया। क्या मैं तुम्हें पागल दिखती हैं? ऐसे ही शर्त लगाते हो जब पूरी नहीं कर सकते.."

समीर- नेहा ये सब गलत है। तू समझती क्यों नहीं?

नेहा- "सिर्फ सोने के लिए ही तो बोल रही हूँ, उल्टा सीधा कुछ करने को तो नहीं बोला मैंने। एक रात की ही तो बात है। आगे से शर्त पूरी ना कर सको तो लगाना भी मत.."

समीर को अब जैसे चेलेंज सा मिल रहा था। अब मना करने का सवाल ही नहीं उठता। समीर बोला- "अच्छा अगर मैं कहूँ की टीना मेरे साथ सो सकती है, तो टीना इस बात के लिए तैयार होगी?"

नेहा- वो सब मुझ पर छोड़ दो।

समीर- तू जरूर किसी दिन मुझे मरवायेगी।

नेहा- “मरें आपके दुश्मन.." और नेहा ने समीर को हग कर लिया।

 
समीर- तू जरूर किसी दिन मुझे मरवायेगी।

नेहा- “मरें आपके दुश्मन.." और नेहा ने समीर को हग कर लिया।

इस हालत में नेहा का समीर से कोली भरना, किसी बुड्ढे का भी लण्ड खड़ा हो जाय। समीर तो एक जवान लड़का शायद पूरे मुहल्ले में ऐसी बाडी किसी की हो। आज तक जिसने कभी मूठ तक नहीं मारी, आज उसके लण्ड ने पहली बार झटका मार ही दिया। सीने से चिपटी हुई नेहा की चूचियां समीर को महसूस हुई तो समीर एक झटके से अलग हो गया।

समीर- नेहा मेरी बहन ये सब तू क्या कर रही है? ये सब गलत है।

नेहा- भइया मेरा दिल ये सब करना चाहता है।

समीर- "अच्छा तू बैठ मेरे पास, में तुझे समझाता हूँ। इस उमर में ऐसा हो जाता है। तू अपना मन पढ़ाई में लगा। ये सब करने का तेरा भी वक्त आयेगा। जब तेरी शादी होगी, तब अपने पति से रात दिन प्यार करना। चल अब मेरी फाइल भी कंप्लीट हो गई है। मुझे इंटरव्यू के लिए जाना है..."

नेहा अपना सिर झुकाये समीर की बातें सुनती रही, जैसे समीर भइया सही कह रहे हों।

समीर- “जा जाकर कपड़े चेंज कर ले। मम्मी ने इस हालत में तुझे देख लिया, तो बड़ी डाँट मिलेगी। मैं भी कंपनी जा रहा हैं। एक टाय कंपनी में मैनेजर की नौकरी का ओफर मिला था समीर को। उसी की फाइल कम्प्लीट करके कंपनी चला गया। इस कंपनी की मलिक का नाम संजना कपूर था।

संजना 35 साल की शादीशुदा औरत थी, जिसके पति की किडनी खराब हो चुकी थी। अभी तक कोई वारिश नहीं था, और ना ही कोई उम्मीद थी। बस संजना की एक छोटी बहन थी दिव्या, वही साथ रहती थी। संजना ने आज अपनी कंपनी को बहुत ऊंचे लेवेल पर पहुँचा दिया था। समीर इंटरव्यू के लिए आफिस में मेडम के सामने बैठा था।

संजना मेडम- “हाँ तो समीर, तुम्हें कितना अनुभव है?"

समीर- "मेडम में पहली बार जाब के लिए आया हूँ। मगर मुझे अपने पर इतना कान्फिडेंट है की आपको मुझसे कोई शिकायत नहीं होगी। मुझे इस जाब पर एक महीना रखकर देखिये.."

संजना को समीर की बातों में दम लग रहा था, और फिर समीर था भी ऐसा की जो एक बार देखे वो उसकी तरफ खिंचता चला जाता है। संजना बोली- “तो फिर हम भी तुम्हें अपनी कंपनी में रख लेते हैं। तुम कल से कंपनी जान कर सकते हो..."

समीर- "थॅंक यू मेडम...” और समीर ने अपना हाथ आगे बढ़ाकर संजना से हाथ मिलाया, और फिर एक मिठाई की दुकान से मिठाई लेकर घर पहुंचा।

शाम के 7:00 बज चुके थे। पापा भी घर पर थे। पापा ने ये खुशखबरी सुनकर अपने गले से लगा लिया, और मम्मी भी बहुत खुश थी। मम्मी ने पहले मिठाई का टुकड़ा मेरे मुँह में डाला उसके बाद पापा को खिलाई। मुझे नेहा नजर नहीं आई।

समीर- मम्मी नेहा कहां है?

अंजली- इस लड़की का मन ही नहीं लगता घर में। टीना के पास जा रही हैं, बोलकर गई है।

समीर- "मम्मी इस साल इसका फाइनल साल है। कोई अच्छा सा रिश्ता देखकर इसकी शादी कर दो.."

 
अंजली- “बेटा, मैं तो सोच रही हूँ दोनों की शादी एक साथ करूंगी। कैसी लड़की चाहिए तुझे बोल?"

समीर- "क्या मम्मी तुम भी ना... मैं नेहा को कह रहा हूँ और तुम मेरे पीछे ही पड़ गई.."

अंजली- “बता दे... फिर अगर हमने पसंद कर लिया किसी को तो फिर तेरी पसंद का मोका नहीं मिलेगा, या कोई लड़की है तेरी नजर में?"

समीर- मम्मी, मैं अभी दो साल शादी नहीं करूँगा। पहले कछ बन तो जाऊँ, अपने पैरों पर खड़ा हो जाऊँ... अच्छा मम्मी, मैं नेहा को मिठाई टीना के यही खिला आऊँ?"

अंजली- हाँ बेटा चले जाओ।

समीर टीना के घर या। समीर ने डोरबेल बजाई। टीना ने दरवाजा खोला। समीर को एक और जोर का झटका लगा। टीना ने ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी हुई थी।

टीना- आओ समीर भइया, कैसे हो?

समीर- अंकल आंटी कहा हैं?

टीना- एक पार्टी में गये हुए हैं।

समीर- नेहा कहां है?

टीना- मेरे बेडरूम में है, क्यों क्या हुआ?

समीर- और ये कैसी ड्रेस पहनती हो तुम?

टीना- क्या भइया, तुम भी कौन सी दुनियां में जी रहे हो? ये तो आजकल आम सा फैशन है।

समीर- तुम और तुम्हारा फैशन। बस इस फैशन को नेहा से दूर ही रखो। मैं ये मिठाई खिलाने आया था, मेरी नौकरी लग गई है..." तभी नेहा भी रूम से बाहर आ गई।

नेहा- भइया आप... और ये मिठाई कैसी है?

समीर- मेरी नौकरी लग गई है।

नेहा- वाउ... भइया ये तो बड़ी खुशी की बात है। हमें तो पार्टी चाहिए।

समीर- हाँ हाँ क्यों नहीं?

टीना- भइया मुझे तो मूवी देखनी है,

समीर- ओके ओके... जैसी चाहो ले लेना पार्टी। चल नेहा घर पर मम्मी पापा डिनर पर इंतेजार करते होंगे।

टीना- “यही रुक जाओ आज भइया...” ललचाई नजरों से देखकर।

समीर- “नहीं, मुझे सुबह कंपनी जाय्न करनी है। मेरा कल पहला दिन है..”

 
समीर जानता था की अगर आज रात टीना के घर रुक गया तो इज्जत लुट सकती है, और नेहा और समीर अपने घर के लिए निकल गये।

समीर- नेहा

नेहा- जी भइया।

समीर- तू नेहा का साथ छोड़ दे। मुझे ये लड़की सही नहीं लगती।

नेहा- “क्या भइया, तुम हमेशा ये मत करो, वो मत करो, इससे मत मिलो। क्या मेरी लाइफ मेरी नहीं है? मैं अपनी जिंदगी आजादी से नहीं जी सकती? मेरे अंदर भी फीलिंग्स आती हैं। तुम क्या चाहते हो? क्या मैं उनका गला घोटती रहूँ? मैं कोई घर का समान हूँ जिसे जैसा चाहा इश्तेमाल कर लिया? क्या आपने कालेज में, पार्क में, रेस्टोरेंट में कभी लड़के लड़कियों को नहीं देखा की किस तरह चिपके रहते हैं? क्या उनके भाई नहीं हैं?"

समीर- नेहा, मेरा मतलब तुझे हार्ट करने का नहीं है।

नेहा- बस रहने दो। तुम चाहते हो की मैं घर के किसी कोने में दुबकी छुपी बैठी रहूँ? किसी की नजर भी मुझे पे ना पड़ जाय।

समीर को अपनी गलती लगने लगी, शायद कुछ ज्यादा ही कह दिया। समीर बोला- "ओहह... मेरी प्यारी बहना सारी... यार माफ कर दे अपने भाई को..."

नेहा- एक शर्त पर माफी मिलेगी। मेरी शर्त पूरी करो पहले। .

समीर- “चल ठीक है। मैं तेरी शर्त पूरी करने को तैयार हूँ.." और बातें करते हुए दोनों घर आ गये।

सबने मिलकर डिनर किया। समीर अपने बेड पर लेटा नेहा के बारे में सोच रहा था- “क्या मेरा नेहा को रोकना गलत है? क्या सचमच नेहा जवान हो गई है? कहीं ऐसा तो नहीं की नेहा और टीना में समलैंगिंग संबंध हों? मुझे ही नेहा को इस जंजाल से निकलना होगा, और उसके लिए मुझे पहले टीना की आग ठंडी करनी पड़ेगी..."

और पता नहीं कब समीर को नींद ने अपनी आगोश में ले लिया।

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सुबह समीर कंपनी चला गया।

अजय तो आज कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहा था। आज बाथरूम में नहाने के साथ अपने लण्ड के बाल भी साफ किए और आज जीन्स और टी-शर्ट पहन ली। आज अजय ऐसे तैयार हो रहे थे, जैसे दूल्हा तैयार होता है।

अंजली- क्या बात है, आज कहां की तैयारी हो रही है?

अजय ने जैसे सोच रखा था की अंजली जरूर टोकेगी। अजय ने कहा- “आज हमारे बेटे की नौकरी लगी है। इसी खुशी में आज तो तुम्हें भी खुशियां मनानी चाहिए। शाम को छोटी सी डिनर पार्टी कर लो..."

अंजली- ठीक है जैसा आप चाहें।

अजय- "तुम शाम की तैयारी करो.." और अजय दुकान के लिए निकल गया। पहले विजय के पास जाकर शाम का प्रोग्राम बताया की सबको डिनर साथ करना है, और अपनी दुकान पर आ गया।

अजय एक-एक पल किरण से मिलने को तड़प रहा था, और फिर किरण का नंबर मिला दिया।

अजय- हेलो किरण कैसी हो?

किरण- हेलो भाई साहब मैं तो अच्छी हूँ। बस आपकी सब्जी तैयार कर रही हूँ।

अजय- “सच में... आप भी मुझे सब्जी खिलाने को तड़प रही हैं?"

किरण- "और नहीं तो क्या?" टीना भी नहीं है। नेहा का फोन आया था शाम को पार्टी है आपके यहा..."

अजय- तो आप इस वक्त अकेली हैं।

किरण- “जी भाई साहब, बस सब्जी तैयार है। आपके आने की देर है। मैंने तो आपके लिए आम भी धोकर रखे हैं, आपको आम चूसना अच्छा लगता है ना?"

अजय- भाभीजी मुझे दूध भी पसंद है।

किरण- अरें... भाई साहब आप जल्दी आ जाओ, आपको दूध भी मिलेगा। मेरे लिए कुछ लेते आना।

अजय- “ठीक है, मैं मूली लेता आऊँगा..."

अब अजय से एक पल और रुकना नामुमकिन था। किरण अजय को खुला आफर दे रही थी। लण्ड पैंट में बार बार झटके मार रहा था, और फिर अजय किरण के घर के लिए निकल पड़ा। रास्ते में एक गलाब और चाकलेट

और किरण के लिए प्यारी सी नाइटी पैक करा ली। अजय बस रास्ते भर यही सोचता जा रहा था की बात कैसे शुरू करनी है? अजय ने किरण के घर पर डोरबेल बजाई।

किरण शायद दरवाजे के पास ही खड़ी थी। उसने अजय का स्वागत किया। अपना हाथ आगे बढ़ाकर अजय से हाथ मिलाया। किरण ने कहा- 'आज तो बड़े खूबसूरत लग रहे हो.."

अजय- आपने भी तो कयामत ढा रही हैं।

किरण ने बिना दुपट्टे के कमीज पहनी हुई थी, जिसमें से किरण की आधी चूची चमक रही थी। अजय अंदर सोफे पर आकर बैठ गया और किरण ने दरवाजा बंद कर लिया।

किरण- क्या लेना चाहोगे पहले, ठंडा या गरम?

अजय- भाभी पहले मुझे दूध पिला दीजिए।

किरण- “अभी लाई...” कहकर किरण किचेन में जाने लगी।

अजय ने उठकर किरण का हाथ पकड़ लिया- “अरे... भाभी सुनिए तो, मुझे एकदम ताजा दूध पीना है..."

किरण- "भाई साहब एकदम ताजा दूध कहा से लाऊँ?"

अजय- ये आप जानो। जब आपने हमें दावत पर इन्वाइट किया है तो इंतजाम भी आपको ही करना पड़ेगा। आज हमें एकदम शुद्ध दूध पिलाओ।

किरण- कैसे पीना पसंद करोगे?

अजय- कैसे मतलब?

किरण ने एक सेक्सी मुश्कान के साथ अपनी साड़ी का पल्लू खिसका दिया- “मतलब ग्लास में पियोगे या... ..."

अजय- या मतलब?

किरण स्माइल के साथ- “चमड़े से पियोगे...'

अजय भी पूरे जोश में आ गया, और किरण को बाहों में भर लिया, और कहा- "हमें तो चूसकर पीना है ताजा ताजा दूध..."

 
अजय भी पूरे जोश में आ गया, और किरण को बाहों में भर लिया, और कहा- "हमें तो चूसकर पीना है ताजा ताजा दूध..."

धर किरण के निप्पल तन गये, जैसे कह रहे हों की आओ और चूस लो सारा दूध। ये सब तुम्हारे लिए है। अब अजय का सबर का बाँध टूट चुका था। अजय की नजरें तने हुए निप्पल को देखकर अपने हाथ वहां पर टिका दिए।

किरण- "हाईईई... उईई... उम्म्म्म ... सस्स्सी ... हाँ भाईई सहब चूस्स लो सारा दूध... आपके लिये ही है सब..."

अजय ने अपने होंठों को निप्पल से लगा लिया, और चूसने लगा। अजय को बड़ा मजा मिल रहा था।

किरण- "हाय भाई साहब ऐसे ही... ओहह... ओहह... हाँ हाँ...” कहकर किरण भी पूरी मस्ती में चूचियां चुसवा रही

थी। किरण पूरी गरम हो चुकी थी।

किरण- "भाई साहब, मेरा दिल भी कुछ खाने को कर रहा है। आप मेरे लिए कुछ लाए हो?"

अजय- क्या खाना चाहती हो?

किरण- मेरा दिल तो इस वक्त केला खाने को कर रहा है।

अजय- “वो तो है मेरे पास, मगर छोटा नहीं है। ज्यादा बड़ा केला है आपके मुँह में कैसे जायेगा?"

किरण- भाई साहब मुझे बड़े केले ही पसंद हैं।

अजय- "जैसी आपकी मर्जी..." और अजय ने किरण का हाथ पकड़कर अपनी पैंट की जिप पर रख दिया।

किरण- बाप रे ये केला है या साँप है?

अजय- खुद ही देख लो।

किरण- ना बाबा ना... मुझे तो डर लगता है, कही इस लिया तो?

अजय- "भाभी जान, आप तो बेकार में डर रही हो। सच में केला ही है, खोलकर देख लो.." किरण ने पैंट की जिप खोल दी, तो लण्ड बाहर आ चुका था।

किरण- अरे... हाँ भाई साहब ये तो सचमुच केला ही है। वैसे बहुत बड़ा केला है आपके पास।

अजय- तुम तो बेकार में डर रही थी। अब जैसे मर्जी खाना है खा लो। सिर्फ आपके लिए ही लाया हूँ."

किरण बड़ी ही दक्ष लग रही थी लण्ड चूसने में।

"उफफ्फ..” अजय की हल्की सिसकारी निकल गई- “हाय भाभी, क्या केला चूसती हो... मजा आ गया...”

अजय- लगता है आपको केला बहुत पसंद है?

किरण- जी भाई साहब।

अजय- विजय भी खिलाता है आपको केला?

किरण- “कभी-कभी जब मैं जिद करती हूँ तब। नहीं तो बस सब्जी में ही डालकर खाना पड़ता है..” कहकर किरण लण्ड को मुँह में गहराई तक लेजाकर फिर बाहर कर देती।

अजय भी पूरी मस्ती से अपना लण्ड चुसवा रहा था, कहा- “भाभी विजय आपकी सब्जी कैसे-कैसे खाते हैं?"

किरण- बस जब भी सब्जी खाने आते हैं, कौव्वे के तरह चोंच मारकर खाते हैं, और सो जाते हैं

अजय- ओहह... बुरा लगा। इतनी अच्छी सब्जी को भला ऐसे खाया जाता है?

किरण- तो फिर कैसे खाते हैं?

 
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