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Incest घर की मुर्गियाँ

विजय- अजय मेहमान किस टाइम तक आयेंगे?

अजय- “दोपहर के लिए बोला है। मैं संजना से पूछता हूँ.." और अजय संजना को काल करता है- “हेलो संजना जी कैसी हो?"

संजना- जी अंकल बढ़िया हूँ।

अजय- किस टाइम तक आयेंगे आप लोग?

संजना- एक बजे तक पहुँच जायेंगे अंकल।

अजय- “ओके...” और काल काट दिया।

विजय- अभी तो सिर्फ 9:00 बजे हैं, मैं तब तक दुकान पर हो आऊँ?

अंजली- नहीं भाई साहब, अब आप कहीं नहीं जायेंगे।

विजय- भाभी बस मैं एक घंटे में आ जाऊँगा। शाप की चाबी मेरे पास है।

अंजली- भाई साहब जल्दी से आ जाइएगा और आपको डी.जे. का इंतेजाम भी करना है।

विजय- “ठीक है। मैं वापसी में बुला लाऊँगा डी.जे. वाले को.." और विजय दुकान पर निकल गया।

अंजली अजय से- "सुनो जी, अभी तक फूल वाला नहीं आया। आप जरा फोन करना उसको.."

अजय- "अभी करता हूँ..." और अजय फूल वाले को फोन मिलाता है।

टीना- मम्मी आज दिव्या भाभी भी आयेंगी?

किरण- अच्छा।

टीना- जी मम्मी, एक गिफ्ट रखा है घर पर मैं ले आऊँ?

किरण- मुझे फोन पर बोल देती, तो मैं ले आती।

अजय अंजली से- “फूल वाले का फोन नहीं मिल रहा। मैं उसके पास होकर आता हूँ.."

टीना- अंकल मैं भी चलती हूँ आपके साथ, मुझे घर से गिफ्ट लाना है।

अजय- “हाँ चलो बेटा..." और दोनों बाइक से टीना के घर के लिए निकल गये।

टीना रास्ते में- "अंकल पहले फूल वाले के पास जाओगे?"

अजय- नहीं तो, घर चलते हैं।

टीना- और फूल वाले का कैसे करोगे?

अजय- उसको फोन पर बोल दूंगा।

टीना- आप तो बोल रहे थे फोन नहीं मिल रहा।

अजय- मैंने तब उसे मिलाया ही नहीं था।

टीना- वाह अंकल वाह... यू अरे ग्रेट माइंड।

अजय- “तेरा भी तो माइंड कमाल का है...” और दोनों इस वक्त टीना के घर में थे। अजय ने फूल वाले को आधे घंटे में पहुँचने को बोला।

फिर गेट बंद करके जल्दी-जल्दी दोनों ने कपड़े उतारे।
 
अजय- आज डोगी स्टाइल में करेंगे।

टीना- अंकल डोगी स्टाइल में दर्द होगा।

अजय- “अरें... किसने कहा तुमसे?” और अजय टीना के होंठों पर हाथ फेरने लगा, जिससे टीना में उत्तेजना आ जाय। दोनों एकदम नंगी अवस्था में थे।

अजय धीरे-धीरे टीना के जिश्म को सहलाने लगता है। हाथ चूचियों पर पहुँच चुके थे। टीना की उत्तेजना भड़कने लग गई। अजय ने अपना हाथ चूत तक पहुँचा दिया, ये देखने के लिए की लण्ड जा सकता है या नहीं? टीना की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था, और अजय का लण्ड भी पूरा खड़ा हो गया। अजय ने टीना को डोगी बनाया।

टीना- अंकल धीरे से डालना।

अजय- “क्यों फिकर करती हो, मजा आयेगा देखना...” और अजय ने अपना लण्ड चूत पर लगाकरर हल्का सा धक्का मारा।

टीना- “उईईई... अंकल बस्स रुक्क जाओ अभी.."

अजय- "क्या बेटा, थोड़ा तो दर्द होता ही है। दो-चार धक्कों के बाद मजा आने लगेगा..." और अजय ने तीन-चार शाट और मार दिए तो लण्ड जड़ तक घुस गया। अजय ने कहा- “अब तो दर्द गायब हो गया न?"

टीना- "जी अंकल, मजा आ रहा है...” और टीना भी अपने कूल्हे से पीछे को धक्के मारने लगी।

अजय को डोगी स्टाइल बड़ा पसंद है। अजय पूरा लण्ड बाहर निकालता और एक झटके से अंदर कर देता। दोनों को बड़ा मजा आ रहा था। इस बार अजय ने जैसे ही लण्ड बाहर निकालकर अंदर गुसाया, तो निशाना चूक गया

और लण्ड सीधा दूसरे सुराख पर जा भिड़ा।

टीना- “ओहह... माँ... ये कहां लगा रहे हो?" लण्ड की आधी टोपी घुस गई थी।

अजय- “बेटा सोरी..” और अपने हाथ से पकड़कर सही जगह लगाया और फिर बिना बाहर निकाले चुदाई करने लगा। फिर अजय ने पूछा- “कैसा लग रहा है?"

टीना- आहह... सस्स्सी ... अंकल मजा आ रहा है।

अजय- तुम्हें पता है ये दूसरे सुराख में भी चला जाता है?

टीना- अच्छा।

अजय-हाँ बेटा, वहां भी इतना ही मजा आता है। किसी दिन ट्राई करना।

टीना- जी अंकल।

अजय की स्पीड राजधानी एक्सप्रेस बन चुकी थी।

टीना- “अहह... अंकल मैं तो गई सस्स्सी ... अहह...”

और फिर अजय भी पीछे-पीछे झड़ गया।

टीना- मजा आ गया अंकल।

अजय- चल जल्दी कपड़े पहन। घर पर अंजली इंतजार करती होगी।

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काजल रूम से निकलते हुए- “जीजू, आप तो बड़े ठर्की हो... बीवी से पहले साली का रेप.." और एक सेक्सी स्माइल देकर नीचे चली गई।

समीर- “एक दिन तेरी सील मैं ही तोडूंगा..” और समीर भी नीचे पहुँच गया।

सब लोग पार्टी एंजाय कर रहे थे। अंजली और किरण दिनों दिव्या के पास बैठी थी, अपनी होने वाली बह को निहार रही थी। कितनी खूबसूरत और मासूम है दिव्या।

फिर गिफ्ट की रश्म सबने दिव्या और नेहा को गिफ्ट दिए। किरण ने भी दिव्या को गिफ्ट दिया और

एक गिफ्ट टीना भी पकड़ाती है।

टीना- "भाभी, ये छोटा सा गिफ्ट मेरी तरफ से और ये गिफ्ट नेहा की तरफ से..."

यूँ ही कब रात हो गई पता ही नहीं चला। सबको आज पार्टी में बड़ा मजा आया। रात के 10:00 बज चुके थे।

संजना- अच्छा अंकल, अब हमें इजाजत दीजिए। और हाँ शादी की तैयारी शुरू कीजिए।

अजय-जी संजना जी।

संजना- कल फार्महाउस आ जाना। देखना शादी का प्रोग्राम वहां कैसा रहेगा?

अजय- जी संजना जी, मैं सुबह पहुँच जाऊँगा।

फिर मेहमान चले गये। विजय और किरण भी चले गये। टीना यही रुक गई।

टीना और नेहा इस वक्त रूम में थे।

टीना- कैसा लगा राहुल?

नेहा- तू बता और ये तेरे हाथ में कैमरा कहां से आया?

एकदम हीरो लग रहा था। और ये मैंने बाथरूम में कैमरा फिट कर दिया था। देखते है सूसू करते हुए कैसा है?

नेहा- क्या बोल रही है तू? तुझे कैमरा कहां से मिला?

टीना- “सुबह घर से लाकर टायलेट में सेट कर दिया था...”

समीर भी नेहा के रूम में ही आ जाता है- “क्या हो रहा है?"

टीना- गिफ्ट देख रहे हैं, तुम क्या समझे?

समीर- मैंने समझा कहीं लेज़्बियन तो नहीं चल रहा?

टीना- अब हम तो तुम्हारी तरह नहीं, जिसे देखा वहीं लार टपकनी शुरू। नेहा तुझे पता है समीर भइया ने तेरी ननद को भी नहीं छोड़ा।

नेहा- कय्या?

टीना- हाँ, मैं सच कह रही हैं। मैं जैसे ही दिव्या को समीर के रूम से लेकर नीचे आई। इन्होंने उसका हाथ पकड़कर अपने रूम में खींच लिया।

नेहा- भइया ये तो आपकी बहुत गलत बात है।

समीर- देखो नेहा, जहां गुड होता है मक्खियां तो भिनभिनाती ही हैं।

नेहा- क्या तुम मक्खी हो?

समीर- “तो क्या हुआ, जब तुम गुड हो सकती हो तो? ये सब बातें छोड़ो और ये बताओ की आज का प्रोग्राम कैसा रहा?"

नेहा- जी भइया बहुत अच्छा।

समीर- और राहुल कैसा लगा तुम्हें?

नेहा कुछ नहीं बोल पाई।

टीना- वाओ... भइया क्या जोड़ी है। एकदम किसी फिल्म का हीरो लग रहा था राहल।

समीर- अच्छा जी लेकिन तू जरा हेरोयिन बनने की कोशिश ना कर।

टीना- नहीं करूँगी, अगर तुम दूर ना जाओ तो?

समीर- मैं तो चला सोने।

टीना- मुझे भी इस रूम में नींद नहीं आती, मैं भी आ जाऊँ?

समीर- तुम्हारी मर्जी है।

नेहा- बस रहने दे, मुझे मालूम है। तू तो जैसे भइया के पास जाते ही सो जायेगी?

टीना- हाँ यार सच्ची में सो जाऊँगी, जाने दे।

नेहा- चली जाना पहले कैमरा तो चेक कर ले।
 
टीना ने कैमरे की रेकार्डिंग चालू कर दी। 5 मिनट तक कोई भी टायलेट में नहीं आया। थोड़ी देर बाद विजय टायलेट में आता है। टीना फार्वर्ड करने लगती है।

नेहा- क्या हुआ देखने दे?

टीना- ये मेरे पापा हैं।

नेहा- "अच्छा जी... जब मेरे पापा का देखती है तब नहीं सोचा?"

टीना वहीं से प्ले कर देती है। नेहा बड़े ध्यान से विजय को पैंट खोलते देखती है। आँखें कमरे की स्क्रीन पर थीं। विजय ने पैंट की बेल्ट खोलकर अंडरवेर में अपना हाथ डालकर लण्ड बाहर निकाला। नेहा और टीना की नजर एकदम लण्ड गई। दोनों की आँखें हैरत से फट गई। विजय का लण्ड तो समीर और अजय से भी दो इंच बड़ा लग रहा था।

नेहा- ओह माई गोड... टीना तेरे पापा का इतना बड़ा?

विजय सूसू की धार छोड़ने लगा। पेशाब करते हुए दो मिनट तक धार छोड़ी। और फिर पैंट की बेल्ट लगाकर बाहर चले गये।

नेहा- ओह्ह... यार तेरे पापा तो आँटी को रुला देते होंगे।

टीना- छोड़ यार उन्हें... आगे देख कौन आता है?

थोड़ी देर तक कोई नहीं आया फिर एक साया एंट्री करता है।

टीना- अरे वाह... नेहा ये तो तेरे ससुर हैं मिस्टर सुरेश। आज तेरे ससुर का भी हथियार देखते हैं।

फिर सुरेश पैंट खोलकर जैसे ही लण्ड बाहर निकालता है, तो एक छोटा सा मरियल लण्ड बाहर निकालता है।

टीना- खोदा पहाड़ निकला चूहा। हाय रे तेरी किश्मत... लगता है जैसा बाप का वैसा बेटे का भी।

नेहा- “नहीं ऐसा मत बोल। टीना शुभ-शुभ बोल..” और दोनों इसी इंतजार में हैं की कब राहुल आता है?

एकदम से टायलेट में राहुल की एंट्री होती है। नेहा का दिल राहुल को देखते ही धड़क उठा- धक-धक धक-धक।

टीना भी सांसें थामे राहुल को ही देख रही थी। नेहा मन ही मन ऊपर वाले को याद करने लगी।

तभी राहुल ने पैंट की चेन खोलकर पैंट उतारी, लण्ड को बाहर निकालकर हाथों में पकड़कर सूसू करने लगा

और जो दोनों ने देखा तो मारे हैरत के आँखें खुली की खुली रह गई। बिना खड़े लण्ड ने समीर को भी फेल कर दिया।

टीना- बाप रे बाप... नेहा ये तो किसी गधे से कम नहीं। तेरी तो बल्ले-बल्ले हो गई।

नेहा ने भी राहत की सांस ली। मगर एक डर भी था- इतना बड़ा?

टीना- क्या हुआ नेहा खामोश क्यों हो गई?

नेहा- ज्यादा बड़ा लग रहा है।

टीना- "पगली, ये तो किश्मत वालों को मिलता है। देख एक बात मेरी सुन... सुहागरात पर ज्यादा सीधी मत बनना। आजकल लड़कों को बिंदास सेक्स वाली लड़कियां पसंद होती हैं। खुल के एंजाय करना। चल अब तू राहुल के सपने देख, मैं चली समीर के पास..." और टीना नेहा को छोड़कर रूम से बाहर निकलने लगी।

नेहा- यार मुझे अकेला छोड़कर जा रही है?

टीना- तुझे किसने मना किया है? आ जा।

नेहा- नहीं यार, आज तो मैं बहुत तक गई हूँ। तू ही चली जा।
 
रात के 11:00 बज रहे थे। नीचे किसी की हल्की-हल्की कराहने की आवाज आ रही थी

टीना मन ही मन- “लगता है अंकल भी लगे हुए हैं। चलो आज इनका शो देखते हैं.." और टीना दबे पैर अंजली

के रूम तक पहुँचती है। मगर दरवाजा बंद था, कुछ देखने का चान्स ही नहीं था। तभी टीना को खिड़की का एक पल्ला खुला हुआ महसूस होता है। टीना धीरे से पल्ले को धकेलती है, और खिड़की से अंदर का नजारा साफ दिखाई दे गया।

टीना- "ओह माई गोड... अंकल और आँटी तो एकदम नंगी 69 की पोजीशन में थे। टीना की चूत ये नजारा देखते ही गीली हो गई।

थोड़ी देर बाद अंकल ने आँटी को डोगी स्टाइल बनाया और अपना लण्ड गाण्ड के पीछे वाले

वाले सुराख में छुवाया।

अंजली एकदम तड़प उठी।

टीना ने कभी सोचा भी नहीं था की अंकल गाण्ड भी मारते हैं। टीना आँखें फाड़े अंजली आँटी को देख रही थी टीना को लगने लगा की अंजली आँटी शायद आज पहली बार ये काम करा रही थी।

अंजली- “तुम्हें ये पीछे से करने का भूतत कहां से सवार हो जाता है? सीधा सीधा आगे से डालो। पीछे से एक तो आराम से जाता नहीं ऊपर से इतना दर्द होता है वो अलग...”

अजय- मेरी जान आराम से तो पहली रात को इसमें भी नहीं गया था। याद है तुम्हें कैसे उछल रही थी तुम?

अंजली- हाँ सब याद है? भला कोई वो रात कैसे भूल सकता है? तुमने जरा भी रहम नहीं दिखाया था।

अजय- अगर उस दिन रहम दिखा देता तो आज तक कँवारी रहती तुम।

अंजली- तुम आज मनोगे नहीं?

अजय- बिल्कुल नहीं।

अंजली- कम से कम कोई चिकनाई तो लगा लो।

अजय खुश हो गया और नारियल तेल की शीशी उठाई, और ढेर सारा तेल अपने लण्ड और अंजली की गाण्ड में लगाया, और फिर डोगी स्टाइल में अपना लण्ड के छेद से टिकाया।

अंजली- धीराsssI

अजय ने धक्का लगाया, तो लण्ड गाण्ड की गहराई में घुसता चला गया।

अंजली- “उईईई... इसस्स्स... सस्स्सी ... आअहह.." और अंजली बेड की चादर पकड़े दर्द बर्दाश्त कर रही थी।

टीना अंजली का ये हालत देखकर कांप गई- “बाप रे बाप... मैं तो कभी नहीं करूँगी पीछे से..."
 
अजय के धक्के चालू हो गये। तेल लगा होने से लण्ड ने जगह बना ली थी। अब लण्ड अंदर-बाहर होने लगा। मगर अजय को बड़ी मेहनत करनी पड़ रही थी। दोनों हांफ रहे थे।सांसें रूम में सिसकी गूंज रही थी।

अजय- देखो पूरा चला गया, कैसा लग रहा है तुम्हें?

अंजली- मेरी क्या परवाह है तुम्हें? कितना दर्द हुआ मुझे?

अजय- यार एक बार तो होता ही है। अब जगह बन गई। अब बोलो कैसा लग रहा है?

अंजली- ठीक है।

अजय धक्के लगाता रहा। अंजली भी हल्के-हल्के पीछे को मूव करने लगी।

टीना की हालत बहुत खराब हो चुकी थी। चूत से झर-झर झरना बहने लग गया था। टीना अंकल को छोड़कर

समीर के रूम में पहुँची। मगर यहां तो नेहा और समीर की चुदाई हो रही थी।

टीना मन ही मन- “ये नेहा कब आ गई?" टीना की हालत ऐसी नहीं थी जो बाहर खड़े ये रासलीला देखती। इसलिये अंदर घुस गई।

समीर का लण्ड नेहा की चूत में बड़ी स्पीड से अंदर-बाहर हो रहा था।

टीना- तू कब आई?

नेहा- “आह्ह... सस्स्सी ... 10 मिनट हो गये.."

टीना- तुझे तो नींद आ रही थी।

नेहा- हाँ अहह... सस्स्सी ... अब छोड़ इन बातों को."

टीना भी जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार देती है, और बोलती है- "नेहा अब मुझे सवारी करने दे...”

नेहा- “मेरा होने वाला है अहह.. अहह... आह..”

समीर- क्या बात है बड़ी जल्दी में हो?

टीना- नजारा ही ऐसा देख आई हूँ?

समीर- क्या देख लिया?

टीना- आपके मम्मी पापा पिछले घर में पार्टी कर रहे हैं, समझे कुछ?

समीर- क्या?

टीना- हाँ जी... अब जल्दी से नेहा को उठाओ..."

समीर के दो-चार धक्कों में ही नेहा फारिग हो गई।

टीना जल्दी से समीर के लण्ड पर बैठी, तो गप्प से पूरा लण्ड घुसता चला गया, और खुद ही ऊपर-नीचे बैठने लगी। आज टीना को सब्र नहीं हो रहा था, जल्दी-जल्दी ऊपर-नीचे होती रही, और 5 मिनट में ही झड़ गई।

समीर- लगता है तुझे भी गाण्ड मरवानी है।

टीना- नहीं जी, मैंने देखा आँटी की हालत। इस उमर में भी आँसू निकाल रहे थे।

और इस वक्त सबकी काम-लीला शांत हो चुकी थी।

*
 
सुबह सभी देर से उठते हैं। नेहा और टीना 9:00 बजे तक सोते रहे। समीर और अजय नाश्ता करके निकल चुके थे। अंजली नेहा के रूम में पहुँचती है।

अंजली- अरें... मेरे बच्चों, 9:00 बज गये। तुम अभी तक सो रहे हो चलो उठो।

टीना आँखें मलते हुए- “क्या आँटी 9:00 बज गये?"

अंजली- जी हाँ।

टीना- ओह माई गोड.. मुझे तो ब्यूटी पार्लर भी जाना था।

अंजली- बेटा अब तुम भी जब तक नेहा और समीर की शादी नहीं होती, कहीं नहीं जाओगी।

टीना- आँटी मुझसे क्या करवाओगी?

अंजली- बेटा शादी की कितनी तैयारी होती है? कपड़े ज्यूयेलरी, मेकप ये सारी शापिंग तुम्हें ही तो करनी है, और शादी के कार्ड भी छापने हैं। सिर्फ 14 दिन बाकी हैं, कैसे होगा इतना सब? आज शाम को तेरे अंकल आ जायें तो लिस्ट बनवा लेना, कितने कार्ड छापने हैं?

टीना- जी आँटी।

अंजली- मैं किरण भाभी से बोल दूं की तेरे कपड़े यहीं भेज दें?

टीना- आँटी मैं ले आऊँगी जाकर। मम्मी को नहीं मालूम मेरे कपड़ों का।

अंजली- “ठीक है.." और अंजली किचेन में चली गई।

टीना- यार अब तो मुझे 15 दिन तेरे पास ही रुकना पड़ेगा।

नेहा- “ये तो बड़ी अच्छी बात है.." और एक आँख मारते हुए- “तेरे लिए भी.."

टीना- चल, मैं अब चलती हूँ। घर से मुझे अपने कपड़े भी लाने हैं।

नेहा- “मैं भी चलती हूँ तेरे साथ..” और दोनों टीना के घर के लिए निकल गये।

टीना- नेहा तेरी शादी के बाद तो मैं एकदम अकेली पड़ जाऊँगी।

नेहा- मैं करूं आँटी से बात की तेरी भी शादी करवा दें?

टीना- हाँ यार अब तो मुझे भी लगता है की मेरी भी शादी हो जानी चाहिए। मैं अकेले कैसे रहंगी?

नेहा- तेरी रोहित से फिर कोई बात नहीं हुई?

टीना- नहीं यार, अभी तो नहीं। तेरी शादी के बाद शायद जरूरत पड़े?

नेहा- एक बात सुन... रोहित बाहर का लड़का है, ऐसा कुछ मत करना जिससे किसी प्राब्लम में फँस जाओ।

टीना- कैसी प्राब्लम?

नेहा- कहीं कोई तेरा एम.एम.एस. बनाकर ब्लैकमेल ना करने लगे?

टीना- "हाँ, मैं ध्यान रखूगी इस बात का." और दोनों बातें करते हुए घर पहुँच गये।
 
उधर अजय भी फार्महाउस पहुँच चुका था। संजना की गाड़ी देखकर अजय के चेहरे पर मुश्कान दौड़ गई- “ओहह... तो मेडम यहां पर पहले से मौजूद हैं..” और अजय अंदर पहुँचता है।

संजना सोफे पर बड़े ही हाट कपड़ों में बैठी कुछ सोच रही थी। संजना का ये रूप देखकर अजय का लण्ड फौरन पैंट में फुदकने लगा।

संजना की नजर अजय पर पहुँचती है- “अरे... अंकल आप कब आये?"

अजय- बस अभी-अभी।

संजना सोफे पर थोड़ी जगह अजय के लिए बनाते हुए- “आइए बैठिये.."

GO

अजय- आज फार्महाउस पर कोई दिखाई नहीं दिया।

संजना- हाँ, वो बहादर कई दिन से घर नहीं गया था। तो मैंने उससे शाम तक के लिए घर भेज दिया।

अजय- आह्ह... अच्छा है। बस यहां पर बहादुर ही रहता है?

संजना- नहीं नहीं, माली भी आता है पेड़ पोधों में पानी डालकर चला गया।

संजना- यहां पर कैसा रहेगा फंक्सन?

अजय- बहुत अच्छा। हमें समीर की बारात लेकर ज्यादा दूर भी नहीं जाना पड़ेगा। मगर आपको इतनी दूर से बारात लानी पड़ेगी।

संजना- अब किसी को तो परेशानी उठानी ही पड़ेगी। एक ही फंक्सन में दोनों की शादी निपट जायेगी।

अजय- संजना जी हलवाई का इंतजाम मैं करूं?

संजना- अरें... नहीं अंकल आप ये सब मुझे पर छोड़ दीजिए। आपके बारात में कितने मेहमान हो जायेंगे?

अजय- आज लिस्ट बनाकर बता दूँगा।

संजना- अंकल मैं सोच रही हूँ ये फार्महाउस समीर को गिफ्ट कर दूं।

अजय-आहह... मेडम आप क्यों हम पर इतना अहसान चढ़ा रही हो? हम आपका अहसान कैसे उतारेंगे?
 
संजना एक हाथ से अपनी नाइटी जरा सा ऊपर करते हुए- “उतार सकते हो...'

अजय मुश्कुराता हुआ- “मैं तो सारी उमर ये अहसान उतार सकता हूँ..."

संजना अजय की जाँघ पर हाथ रखती है- “आज सोफे पर उतार दो.."

अजय- “क्यों नहीं संजना जी?” और अजय ने भी संजना के हाथों को थाम लिया, और अपने होंठों को संजना के होंठों के करीब लेजाकर रुक गया।

संजना की सांसें अजय की सांसों में घुलने लगी, और संजना ने अपने होंठ अजय के होंठ से मिला दिए, और अजय की जीभ से खेलने लगी। अजय भी संजना को करना चाहता था। आज जो संजना ने गिफ्ट दिया, उसका अहसान तो सारी उमर भी ना उतरे। दोनों की चुसाई बड़ी मस्त चल रही थी। छपार-छपार आवाज आ रही थी। फिर संजना अजय की शर्ट के बटन खोलने लगी और अजय की छातियों के निप्पल को मुंह में भर लिया। छोटे-छोटे निप्पल ठीक से मुँह में भी नहीं आ रहे थे।

मगर अजय का जोश बढ़ता जा रहा था, और अजय ने भी संजना की नाइटी पकड़कर ऊपर खींच दी। आहह... क्या मस्त नजारा सामने था। संजना की चूत एकदम क्लीन शेव थी। अजय से देखकर रुका नहीं गया और अपने हाथ चूत पर टिका दिए।

संजना की सिसकी निकलने लग गई- “आईईई... इसस्स्स्स

.."

अजय भी पूरी मस्ती के मूड में था। अजय ने अपनी एक उंगली चूत की फांकों में घुसा दी। संजना तो बिल्कुल गीली हो चुकी थी। उंगली अपना रास्ता बनाती अंदर घुसने लगी। अजय ये देखकर अपनी दूसरी उंगली भी घुसाने लगा। संजना की चूत दोनों उंगली आराम से ले गई। अब अजय दोनों उंगली धीरे-धीरे हिलाने लगा।

संजना को बड़ा अच्छा लग रहा था- “अहह... हाय... स्स्सी ... आहह... आहह... अंकल जी मजा आ रहा है... आहह... अजय फक मी...” और संजना पहली बार अजय का नाम लेती है।

अजय- "पहले शहद की मिठास तो ले लूँ?” और अजय अपने होंठों को चूत से लगा देता है।

संजना तड़प गई- “सस्स्सी ... अहह... अहह... अहह... उईईई... उईईई.."

अजय बड़े ही प्यार से शहद की मिठास चूस रहा था।

संजना- अहह... अजय प्लीज़्ज़ फक मीईई... अब और बर्दाश्त नहीं हो रहा है...” और संजना उठती है, अजय की पैंट भी उतार देती है।

अजय का लण्ड एकदम स्प्रिंग की भाँति लहराता हआ बाहर निकलता है। संजना लण्ड को ललचाई नजरों से देखती है, और दोनों हाथों में पकड़कर मुँह में ले लेती है। अब अजय की सिसकी निकलने लगी।

अजय- "आअहह... आहह.. संजना जी... मजा आ गया...”
 
अजय का लण्ड एकदम स्प्रिंग की भाँति लहराता हआ बाहर निकलता है। संजना लण्ड को ललचाई नजरों से देखती है, और दोनों हाथों में पकड़कर मुँह में ले लेती है। अब अजय की सिसकी निकलने लगी।

अजय- "आअहह... आहह.. संजना जी... मजा आ गया...”

संजना की चूत पानी छोड़ रही थी। संजना लण्ड मुँह से निकालकर अजय की गोद में जा बैठी और अपने हाथ से लण्ड पकड़कर चूत के सेंटर में लगाकर चूत का सारा दबाव लण्ड पर दे दिया। लण्ड चूत की गहराई में घुसता चला गया।

संजना- हाय अजय बड़ा ही मस्त है आपका।

अजय- क्या?

संजना- “आहह... सस्सी... आपका लण्ड...”

अजय को ऐसा सुनकर और जोश चढ़ गया। खुद भी नीचे से उठा-उठाकर धक्के मारने लगा। क्या मस्त चुदाई हो रही थी। करीब आधे घंटे तक दोनों ने जमकर शाट मारे। तब जाकर संजना की प्यास बुझी।

संजना- वाउ... अंकल आज तो मजा ही आ गया।

अजय भी और दो शाट मारकर झड़ गया, और संजना को कसकर भींच लिया। दोनों को चरम सुख प्राप्त हो चुका था।

संजना- “अंकल, आप तो अब यहां रोज ही आ जाया करो..."

अजय- "ठीक है संजना जी..” और दोनों साथ ही फ्रेश हुए। फिर अजय वहां से निकलकर अपनी दुकान पर पहुँचा।

और शाम को जल्दी घर पहुँच गया।

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आज समीर के घर पर टीना भी आ चुकी थी।

अंजली- कार्ड तो छापने को दे दो, टाइम बहुत कम है।

अजय- टीना बेटा, कापी पेन लो और मेहमानों की लिस्ट बनाओ। कितने कार्ड छापने हैं?

तभी विजय भी आ जाता है- “क्या तैयारी चल रही है?" ।

अजय- यार कार्ड छापने हैं, लिस्ट बना रहा हूँ। तू बता तेरे कितने कार्ड हो जायेंगे?

विजय- एक कार्ड ससुराल का, एक घर पहुंचा देंगे।

अजय- बस दो कार्ड? अपनी बहन पूजा को नहीं बुलाओगे?

विजय- छोड़ यार, अब इतनी दूर मुंबई कौन जायेगा?

अजय- इतनी दूर है तो क्या बहन को छोड़ देगा?

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समीर- अंकल आप फिकर ना करो मैं चला जाऊँगा।

विजय- ओके। जैसा तुम बेहतर समझो।

अजय- मुंबई तो समीर चला जायेगा। मगर गाँव कौन जायेगा कार्ड लेकर?

विजय- यार तेरी सुसराल भी वहीं है। तू ही चला जा और भाभी को भी ले जा।

अजय- “यार गाँव जाने में पूरे 3 दिन लग जायेंगे, और समीर भी मुंबई चला जायेगा। यहां इतनी तैयारी करनी है, तो मैं कैसे जा सकता हूँ? एक काम कर गाँव तू चला जा.."

अंजली- सुनो जी गाँव तो मुझे भी जाना है।

अजय- एक काम करना तुम, किरण को भी अपने साथ लेकर टैक्सी से विजय के साथ में चली जाना।

विजय- कार्ड कब तक छप जायेंगे?

अजय- सुबह छापने को दे दूंगा, दो दिन में कार्ड आ जायेंगे।

और यूँ ही तैयारी में एक-एक दिन जा रहे थे। अब शादी में सिर्फ 8 दिन बाकी थे। कार्ड भी छपकर आ चुके थे। समीर मुंबई जाने के लिए बैग पैक कर रहा था, और अंजली भी गाँव जा रही थी। अब घर पर सिर्फ अजय, नेहा

और टीना ही बचे थे।

टीना को तो कोई टेंशन नहीं थी।
 
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