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Incest चक्रव्यूह

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StoryPublisher

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चक्रव्यूह

स्टोरी स्टार्ट करने से पहले छ्होटा सा इंट्रोडक्षन मैं कॅरेक्टर्स का,

विक्रम – माइ फादर

मंजू – माइ मदर

अभिमन्यु 'अभी' – मे

नेहा – माइ सिस

सुनील – माइ फ्रेंड

प्रेम – सुनील’स फादर

ममता – सुनील’स मॉम

शीतल – सुनील’स 1स्ट सिस्टर

ईशा – सुनील’स 2न्ड सिस

(पर्सनल डीटेल्स/ फिगर एट्सेटरा बाद में, अगर ज़रूरत पड़ी तो)

बाकी के लोगो का परिचय स्टोरी के बीच मे ही मिल जाएगा.
 
ये स्टोरी है अभिमन्यु उर्फ अभी नाम के एक लड़के की जो एक मध्यम दर्जे के एक शहर मे रहता है फिलहाल 18 साल का है और 12त के एग्ज़ॅम्स दिए है. आगे की स्टोरी कभी अभी की तो कभी 3र्ड पर्सन की ज़ुबानी चलेगी

सुनील से मेरी दोस्ती दो साल पहले हुई थी जब उसने 10त के बाद मेरे स्कूल मे अड्मिशन लिया था. इस दौरान हमारी दोस्ती बहुत गहरी हो गयी. हम आपस मे हर तरह की बाते शेर करते थे, लड़कियो की, सेक्स की और अपनी फॅंटसीस भी. मैं एक मिड्ल क्लास फॅमिली से हूँ जबकि वो एक अप्पर क्लास फॅमिली से. उसके पापा क हमारी सिटी मे एक बड़ा 3स्तर होटेल है और एक प्लाइवुड फॅक्टरी भी जबकि मेरे पापा गूव्ट एंप्लायी हैं. पढ़ाई मे हम दोनो ही टॉपर तो नही पर अच्छे स्टूडेंट्स थे.

12त का लास्ट एग्ज़ॅम देकर हम स्कूल से साथ ही निकले. सुनील ने मुझसे कहा, “यार कल मेरी बेहन के बर्तडे पर घर मे पार्टी है, तूने ज़रूर आना है”

मैं थोड़ा झिझका क्योकि बहुत अच्छी दोस्ती के बावजूद मे उसके बंगलो मे आज तक गया नही था, एक दो बार कहीं जाना था तो उसे घर के बाहर से ही पिक कर लिया था, मैने कोई बहाना बनाना चाहा पर वो ना माना.

अगले दिन शाम को बढ़िया से तैयार होके और एक सुंदर सा गिफ्ट लेकर मैं सुनील के बंगलो पर पहुचा, आज पहली बार उसके घर के भीतर गया था. घर बहुत बड़ा और सुंदर था, घर के इंटीरियर्स से पूरी रहीसी झलक रही थी. सुनील ने मुझे अपने पेरेंट्स से मिलवाया बस उसी पल से मेरी पूरी जिंदगी बदल गयी.
 
जैसा की एक्सपेक्टेड था उसके पापा टिपिकल बिज़्नेसमॅन लुक मे थे, 3 पीसी सूट पहना हुआ, थोड़े बल्की, सिन्सियर आवाज़ ओवरॉल रोआबदार पर्सनॅलिटी

पर ख़ास उसकी मा थी, बेइंतहा ब्यूटिफुल. शायद ही उनसे खूबसूरत हसीना कभी मेने देखी हो. शी वाज़ लुकिंग डॅम क्यूट आंड अडॉरेबल, मैं तो बस खो ही गया था उसमे. सुनील ने अपनी खूबसूरत बहनो से भी मिलवाया लेकिन मैं तो वहीं अटक सा गया था सो उस वक़्त वहाँ मौजूद उसकी बहनो या उनकी फ्रेंड्स वगेरह को इग्नोर करते हुए मैं बस बार बार उसकी मॉम ममता को ही ताड़ रहा था.

वो उनकी लगभग 5.5’ हाइट की केसर मिले दूध सी गोरी स्लिम बॉडी, गान्ड तक लहराते खुले स्ट्रेट सिल्की बाल, करीने से आइ लाइनर लगी हुई गहरी आँखें, ब्राइट कलर की लिपस्टिक मे डूबे रसीले होंठ, उफ़फ्फ़ स्पार्कल ब्लॅक कलर के बॅकसाइड से डीपकट गाउन मे कहर ढा रही थी वो. मैं बस धड़कते दिल से ममता मटकती गान्ड बालो की आड़ से झाँकति उसकी पीठ और उसकी ठोस चुचियो के नॉर्मल से कहीं ज़्यादा उठाव को ही देख रहा था. किसी भी आंगल से वो 27 – 28 साल से अधिक की नही लग रही थी (आक्चुयल एज मे बी 38-40).

एक दो बार उसने भी भी मुझे ताड़ते हुए देख लिया, कहते हैं ना हर औरत मे एक सिक्स्त सेंस होती है उपर से मैं तो बस दीदे फाड़ कर उसी को घूर रहा था. जब एक दो बार हमारी नज़रे मिली तो उसने एक स्माइल पास करी, कुछ देर बाद मेरे करीब से गुज़रते हुए मुझसे पूछा, “अरे तुमने कुछ लिया या नही” क्यूकी सुनील अरेंज्मेंट्स एट्सेटरा मे बिज़ी था मेने मुस्करा के जवाब दिया कि “यॅ ई हॅव टेकन एनफ”. लगभग 3 घंटे वो पार्टी डॅन्स वगेरह चला फिर डिन्नर के बाद सब विदा हुए.

मैं भी एक ऑटो लेकर अपने घर आ गया, रातभर बस ममता के सपने आते रहे बल्कि यू कहु कि रात भर उसके ख्यालो मे सो ही ना सका.

अब एग्ज़ॅम्स ख़तम हो चुके थे कुछ ख़ास करने को था नही सो लेट उठा फिर तैयार होकर अभी नाश्ता ही कर रहा था कि मेरा मोबाइल बजा. देखा तो सुनील की कॉल थी.

मेने कॉल पिक की ‘हाँ बोल भाई, सुबह सुबह कैसे याद किया’

सुनील -यार आज तू क्या कर रहा है

मे- कुछ ख़ास नही, बोल.

सुनील – तू एक काम कर मेरे घर आजा, आज लंच साथ मही करेंगे.

मैं जो पहले उसके घर ना जाने को बहाने मारता था, तुरंत तैयार हो गया. बोला, ठीक है यार घंटे भर मे पहुचता हूँ. और थोड़ी देर मे उसके घर के लिए निकल पड़ा.
 
जैसे ही मैं सुनील के बंगलो के गेट पर पहुचा, शीतल और ईशा बाहर निकल रही थी, उन्होने भी मुझे पहचान लिया. हाई हेलो के बाद पता चला वो अपनी फ्रेंड्स के साथ मूवी जा रही हैं, तभी एक कार मे उनकी फ्रेंड्स आ गयी और वो उनके साथ निकल गयी. मै आगे जाके जैसे ही उनके घर मे एंटर हुआ सामने मेरी ड्रीम क्वीन खड़ी थी. मुझे देख बोली, ‘हाई अभी , आओ अंदर आओ. सुनील अपने रूम मे है , मैं बुलाती हूँ.’

‘सुनील बेटा, अभी आया है’ शी स्पोक लाउड्ली टुवर्ड्स सुनील रूम. उस समय वो शर्ट और प्लाज़ो पहने हुए थी. उसकी तनी हुई चुचियों से मेरी नज़र ही नही हट रही थी. ‘प्रेम अंकल कहाँ है’?’ मेने उससे बात करने की कोशिश की.

‘वो तो फॅक्टरी गये हैं, रात तक ही लौटेंगे’ जवाब मिला. “क्या लोगे कोल्ड ड्रिंक ओर कॉफी”

इससे पहले मैं कुछ जवाब देता. “दो कॉफी मेरे रूम मे ही दे देना मॉम और मॉम ये आज लंच भी यहीं करेगा” पीछे से आते हुए सुनील बोला.

मेने फॉर्मली मना किया पर ममता बोली ‘ नही अभी तुम यहीं लंच कर के जाओगे आज वैसे भी बस मैं और सुनील हैं घर पर. हमे भी कंपनी मिल जाएगी’ फिर मुझे लेके सुनील अपने रूम मे ले गया.

सुनील – आबे आ यार तुझे एक मस्त चीज़ दिखाऊ

मे- क्या है

सुनील- ‘देख कल रात एक सेक्स स्टोरीस की साइट राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम मिली मुझे.’ उसके रूम मे उसका अपना पीसी था वित इंटरनेट कनेक्षन.

सुनील – देख क्या मस्त स्टोरीस हैं राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर

मे वो सब देख के – वाउ यार ये तो मस्त हैं भाई.

इतने मे ममता ने कॉफी के लिए आवाज़ लगाई तो सुनील कॉफी लेने चला गया और लाकर टेबल पर रख दी.

मैं कॉफी पीते हुए, ‘सुनील एक बात कहूँ यार तेरी मॉम बहुत अच्छी हैं, मैने इनके जैसी खूबसूरत और केरिंग औरत आज तक नही देखी’(दिल तो कर रहा था सेक्सी बोलू पर…)

ये सुनकर सुनील खुश होता हुआ बोला, हाँ वो तो है पर मेरी मॉम इतनी जल्दी सबसे नही बोलती और मेरे दोस्तो मे तो शायद तुम पहले हो जिसे खुद मॉम ने आग्रह कर के खाने के लिए कहा है.

इस बीच सुनील पीसी पर राजशर्मास्टॉरीजडॉटकॉम पर ओपन सेक्स स्टोरी देखने लगा इट वाज़ ऑन मॉम सन इन्सेस्ट रिलेशन्स. मेरे कमीने दिमाग़ मे अचानक एक प्लान आया.

मे- क्या ये स्टोरीस सच होती हैं.

सुनील- मे बी

मे- तुझे क्या लगता है

सुनील- लगता तो है कि सही ही होंगी

मे- {मन मे आगे बढ़ने की सोचते हुए}- एक बात बोलू, अगर तेरी मॉम जैसी मेरी मॉम होती तो पक्का मे ट्राइ ज़रूर करता.

कुछ पल सन्नाटा.. फिर मैं बोला – डोन्ट माइंड यार, क्या तुझे वो सेक्सीयेस्ट लेडी नही लगती

सुनील ने मुझे घूरा फिर बोला – धीरे बोल यार, मॉम ना सुन ले, सच बताऊ, मैं भी कई बार उनके बारे मे सोच के मूठ मार चुका हूँ. लेकिन बस सोचा ही है, आज तक उनके नंगे बूब्स तक नही देखे.

सुनकर मैं मुस्करा उठा तभी डोर पे नॉक हुआ, ममता कुछ स्नेक्स लेकर आई थी, सुनील दरवाजे से ही लेके आ गया और वो वापिस किचन मे चली गयी. मैने मन मे सोचा कि आज मौका अच्छा है मुझे आज ही आगे बढ़ने की कोशिश करनी चाहिए.

मे- सुनील एक बात सच बता ये क्या तू वाकई, अपनी मॉम के साथ रीलेशन बनाना चाहता है ?

सुनील- क्या ये हो सकता है

मे- एक काम कर तू कुछ देर हमे अकेला छोड़ दे, मैं उन्हे लाइन पे लाने की कोशिश करता हूँ.

सुनील- लेकिन जब तू उसे चोदेगा तो मैं सब देखूँगा ताकि मैं भी उसे चोद सकु.

मे- लेकिन तेरे सामने तो वो मुझे शायद हाथ भी ना रखने दे. देख आज तेरे पापा और बहने भी नही हैं घर पे तो वक़्त बर्बाद ना कर, कोई भहना बनाकर थोड़ा खिसक ले.

उसने कुछ सोचा फिर निकल लिया, मेने मैंन डोर की आवाज़ सुनी, अब मैं और ममता अकेले थे.
 
अपडेट 4

कुछ देर मे मैं भी उठ कर बाहर लॉबी मे आ गया, सामने ही ओपन किचन मे ममता लंच तैयार कर रही थी. ‘सुनील कहाँ गया हे’ उसने मुझसे पूछा.

मे- ‘वो उसको किसी का फोन आया था तो वो उसे मिलने गया ह, आधे घंटे तक आएगा, मुझे वेट करने के लिए कह गया हे.’

ममता- कॉफी एक कप और लोगे, मैं अपने लिए बना रही थी.

मे (उसे घूरते हुए)-श्योर

कॉफी लेकर वो मेरे साथ आकर सोफे पर ही बैठ गयी. हम साथ साथ कॉफी पी रहे थे, मैने सारा साहस इकट्ठा किया और मैं उसके थाइ पर हाथ रखते हुए नीचे उसके पैरों मे बैठ कर बोला ‘आंटी आप बहुत खूबसूरत हो बिल्कुल परियो जैसी, मैने आप से पहले कोई इतना प्यारा इतना क्यूट नही देखा. मैं आपको चाहने लग गया हूँ और अगर आपने मेरा प्रपोज़ल आक्सेप्ट नही किया तो कसम से मर जाउन्गा मैं पता नही ऐसे ही क्या क्या मैं बोले जा रहा था. बस एक ही बात थी दिमाग़ मे कि अभी नही तो कभी नही.

वो भी कुछ रियेक्शन नही दे रही थी बस चुपचाप मुझे देखे जा रही थी. मेरे हाथ उसकी थाइस को प्लाज़ो के उपर से ही रब करते हुए उपर की ओर बढ़ रहे थे साथ ही उसकी स्मूद्नेस और फर्मनेस भी फील कर रहा था.

नीचे से ही मेरे हाथ टी शर्ट के अंदर उसके बेल्ली पोर्षन तक पहुच गये. उसके बदन को डाइरेक्ट टच करते ही एक झुरजूरी से दौड़ गयी मुझमे और शायद उसमे भी. उफ़फ्फ़… क्या माखन जैसी स्मूद स्किन थी उसकी, थोड़ा और उपर बढ़ते हुए उसकी मस्त ठोस चुचियो को अपने हाथों मे लेते हुए उसे झुकाते हुए सोफे पे ही लिटा सा दिया, दोनो हाथों से ब्रा मे कसी हुई चुचियाँ दबाते हुए मैने टी शर्ट उपर की और उठा दी और उनके बेल्ली पर किस करते हुए चाटने लग गया.

उसने सिसकी सी ली, ब्रा मे क़ैद उसकी चुचियाँ देखते हुए मैं पागल सा उनपे टूट पड़ा. उसने मुझसे अलग हटने की कोशिश की पर मैने उसे उठने ना दिया और उसकी ब्रा को अनहुक करते हुए टी शर्ट समेत सिर की तरफ से निकाल दी, अब वो दोनो चुचिया नग्न अवस्था मे मेरी साँस रोक रही थी. शैदाईयों की तरह मैं उनपे टूट पड़ा कभी लेफ्ट वाली को मूह मे लेता कभी राइट वाली को कभी दोनो बूब्स के बीच चाटने लग जाता, मेरा घुटना उसके पैरों के बीच उसकी चूत से रगड़ खा रहा था. वो सिसकिया सी ले रही थी, मुझे उसकी तरफ से किसी प्रतिरोध का एहसास नही हो रहा था. कुछ देर ऐसे ही चूसने और चाटने के बाद मैने सिर उठा या तो हमारी नज़रे मिली. उसकी मदहोश आँखे देखते ही मेने फिर से उसकी चुचि मूह मे भर कर उसपर दाँत गढ़ा दिए.

“ओह्ह्ह.. खा जाओगे क्या, प्यार से चूसो..” वो पहली बार कुछ बोली. मैने उन मस्त चुचियों पे अपना काम जारी रखा.

वो फुसफुसा ई, “छोड़ो आ…. स.. सुनील आ जाएगा”

मुझे भी अचानक वक़्त की कमी का एहसास हुआ मैं उसे वैसे ही टॉपलेस अपनी बाहों मे उठा कर सामने वाले बेडरूम मे ले गया (जो शायद उसीका था). उसे बेड पर लिटा कर मैने झट से अपने सारे कपड़े उतार फेंके, मेरा लंड अपने पूरे शबाब पर था. मैने उसका पलज़ो और पेंटी एक साथ झटके मे खींचते हुए उतार डाली. उसकी क्लीन शेव चूत ने मुझे पागल सा कर दिया था. बिना कपड़ो क तो वो पहले से भी कहीं ज़्यादा मादक और जानलेवा लग रही थी. मैं उसपर झुक सा गया. पहली बार आगे बढ़ते हुए उसने मेरा लॉडा अपने हाथों मे ले वो उसे मसलने लगी और मैं उसके होंठों पर होंठ रख स्मूच करने लगा. मेरे दोनो हाथ उसके पूरे बदन को मसले जा रहे थे. उसने मेरा लॉडा अपनी बुर पे सेट किया और मैंने एक हल्का झटका दिया, जल्द ही मेरा पूरा लंड उसकी चूत की गहराइयों मे गुम हो गया. उसने अपनी बाँहे मेरे कमर मे लपेट ली. किस्सिंग के साथ साथ मे उसकी चुचिया निचोड़े जा रहा था और साथ ही साथ हल्के पेस मे लगातार धक्के लगाए जा रहा था.

मुझे अपनी किस्मत पे यकीन नही हो रहा था वो हुस्न परी अब मेरे नीचे थी. कल ही तो मैने कल ही तो ममता को पहली बार देखा था और दीवाना सा हो गया था ओर आज मैं पूरे शब ओ शबाब के साथ उसे उसके ही बिस्तर पर दनादन ठोंक रहा था. वॉट आ लकी बस्टर्ड आई ऍम. ये मेरा पहला सेक्स था उसे भी शायद ये एहसास था, वो बोली “बस ऐसे ही धक्के लगाते रहो अफ… ये मत ध्यान दो क मैं कितनी सेक्सी हूँ ह… ओह… तभी लंबा टिक पाओगे हूंम्म्म……आ..”

“कल तुम्हारी नज़र देखकर लग रहा था क़ि ज़रूर एक ना एक दिन तुम मुझे ज़रूर छोड़ ही डालोगे पर ये नही लगा था क़ि 24 घंटे से भी कम मे तुम मेरे बेड तक पहुच जाओगे आह….. पहली बार क हिसाब से बढ़िया कर रहे हो तुम…. और ज़ोर से… आ और तेज.. अफ….” वो वैसे ही उखड़ी हुई सांसो मे बोलती गयी. मुझे तो बस चुदाई का मतलब यही पता था की लॉडा बुर में पेलो और दनादन धक्के लगाए जाओ. मुझे नही ध्यान कितनी देर मैं वही करता गया, अचानक मेरी बॉडी बहुत गरम फील होने लगी और वीपी बढ़ता सा लगा “मुझे कुच्छ हो रहा है रानी…” मैं बोला.

“बस, थोड़ा और कंट्रोल करो… मैं भी झरने बाली हुन्न्ं…” वो बोली.

मैं पूरी स्पीड मे धक्के लगा रहा था और वो भी नीचे से पूरे रिदम मे साथ दे रही थी, हम पसीने मे लथपथ एक दूसरे को बाँहो मे दबाए हुए बस सब भूल के अंधाधुंढ़ लगे हुए थे. सडन्ली मैने अपना सारा खून लंड की और दौड़ता हुआ फील हो रहा था, झटको के साथ मैं झड़ने लगा “आ… अया… आहह….” वो भी मेरे साथ ही झड् रही थी. पस्त होकर मैं वहीं उसके बगल मे गिर गया. कुछ देर हम वैसे ही पड़े रहे फिर उसने उठकर अपनी पेंटी उठाई और अपनी बुर पोंच्छ कर मेरी और बढ़ा दी,

मैने भी अपना लॉडा सॉफ किया. वो उठकर पहले ही एसी ओंन किया फिर बिना पैंटी के ही अपने कपड़े पहनने लगी मैं वैसे ही पड़ा उसे देख रहा था, वो वापस बेड पर आकर मेरे लौड़े की तरफ झुकी सुपाडे पे किस करते हुए मेरा लॉडा मूह मे भर लिया, कुछ देर चूसा वो फिर खड़ा होने लगा तो छोड़ के उठ गयी और कपड़े पहनने के लिए कहा. मैं कपड़े पहनने लगा.
 
अपडेट 5

वो बोली “जल्दी करो, सुनील ना आ गया हो” मेने जवाब दिया, “डॉन’ट वरी जान वो हमारे साथ है, बल्कि उसने ही ये मौका बनाया. अब मैं बाहर उसके पास जाता हूँ तुम भी आ जाओ.”

मैं बाहर लॉबी मे आया तो सामने सोफे पे सुनील बैठा था, मुझे आँख मारता बोला “कर ली चुदाई” मेने पास जाकर उसका हाथ दबाया और उसे थॅंक्स बोला. तभी पीछे से ममता बाहर आई पर सुनील को देख कर शरमाई नही बल्कि हमारे साथ ही बैठ गयी. वो बोली “खाना रेडी है, लगाऊँ या पहले स्टारटर लोगे.”

“स्टारटर मे क्या है” सुनील ने पूछा तो ममता ने वो झटका दिया क़ि हम दोनो हिल गये, उसने अपना टी शर्ट उतार दिया, ब्रा उसने पहनी नही थी. अब वो हमारे सामने टॉपलेस बैठी हुई थी और हम दोनो बस आँखे फाड़े उसे ही घूरे जा रहे थे.

“भूख लगी है तो जूस पी कर ही शुरुआत कर लो” वो बोली. बस फिर क्या था मुझसे पहले सुनील लपका. कुछ ही देर मे उसकी एक एक चुचि हम दोनो के मुंह मे थी. मेरा एक हाथ उसके बदन पे घूम रहा था तो दूसरा उसकी बुर पर , उसने लोवर के नीचे पैंटी भी नही पहनी थी, तभी सुनील का हाथ रेंगता हुआ उसकी बुर की तरफ आया तो वो मदभरी आवाज़ मे उसे बोली, “ये तुम्हारे लिए नही है बेटे , इसे अपने दोस्त के लिए ही छोड़ दो. तुम बस इनसे ही मज़े लो.” और उसका सिर अपनी चुचि पर ही दबा दिया.

मैं चुचि चूसने लगा. लगभग 15 मीं तक यही सब चलता रहा.

“बस काफ़ी हुआ,” उसने बोलते हुए हमे अलग कर दिया. और उठ कर टी शर्ट वापस पहनती हुई किचन मे चली गयी. कुछ ही देर मे डाइनिंग टेबल पर खाना लग चुका था. हम तीनो ने साथ साथ खाना खाया. खाने के बाद वो बर्तन ले कर किचन मे गयी और कुछ ही देर मे पूरी नंगी हाथ मे कस्टर्ड से भरा बोल लेके आई.

सुनील मूह फाड़े हुए उसकी चूत की तरफ देख रहा था, उसे ऐसे घूरते देख वो मुस्कुराते हुए टेबल के पास आकर स्टाइल से खड़ी हुई बोली, “ये तुम्हारे लिए नही है सुनील , हाँ तुम्हारा दोस्त जब चाहे इसके मज़े ले सकता. तुम जब भी चाहो मौका मिलते ही मुझे न्यूड करके उपर उपर से जैसे चाहो मज़े ले सकते हो चुदाई के अलावा.” वो टेबल पर चढ़ कर एक हाथ से चूत को फैलाते हुए दूसे हाथ से सर्विस स्पून मे भरकर केस्टर्ड अपनी चूत और चूचो पे बिखेर लेती है और बड़ी ही सेक्सी आवाज़ मे बोलती है “ वॉट आर यूं लुकिंग फॉर, हॅव स्वीट डिश बाय्स. अभी यूं स्टार्ट फ्रॉम टनेल आंड सुनील यूं स्टार्ट फ्रॉम माउंटन्स.”

सुनील खड़ा होके बूब्स चाटना स्टार्ट कर देता है और मैं उसके दोनो पैरो के बीच सिर घुसा कर चाटना शुरू कर देता हूँ. कस्टर्ड थोड़ी देर मे ख़त्म हो जाती है फिर भी मैं उसकी चूत फैला कर अंदर तक चाटना जारी रखता हूँ. वो जोरो से छटपटा रही थी.

मुझसे और बर्दाश्त नही होता तो मैं उसे लेकर बेडरूम मे आता हूँ, फिर पीछे हट के अपने कपड़े उतार के लॉडा सीधा उसकी बुर में पेल देता हूँ और लगातार धक्के लगाना लग जाता हूँ, वो भी नीचे से झटके लगाकर पूरा एंजाय कर रही थी, वहीं मुझे देख कर सुनील भी अपने कपड़े उतारने लगता है. और फिर नंगा लॉडा हाथ मे लेकर बेड पर आ जाता है. मैं उसे इशारा करता हूँ और ममता की बुर में से लंड निकाल कर उपर को बढ़ते हुए उसके बूब्स के दोनो और पाओ फैलाकर उसके मूह मे डाल देता हूँ. हम दोनो के रस मे लिपदे लौड़े को वो बड़े चाव से चूसने लग जाती है साथ ही दोनो हाथो से मेरी दोनो जांघे सहला रही थी. मैने सुनील को हाथ से इशारा किया और उसने भी आओ देखा ना ताओ और अपना लंड ममता की बुर में पेल दिया. उसे झटका सा लगा वो कसमसाई पर मेने उसे हिलने नही दिया.

आँखे चौड़ी कर वो गु गु कर कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी पर मेने मूह से अपना लॉडा नही निकाला. जल्द ही मैं और सुनील दोनो ने पूरे जोश से अपना माल उगल डाला उसी समय उसकी चूत भी घनघना उठी. रिलॅक्स होके हम तीनो बेड पे ही पसर गये.

“तो नही माने तुम आख़िर अपनी मा की चूत मार ही ली” वो सुनील के बालो मे उंगलिया घुमाते हुए बोली. फिर हम से इस पूरे इन्सिडेंट को सीक्रेट रखने का वादा लिया और साथ ही वॉर्न किया क़ि अगर किसी को बताया तो उसकी चूत भूलनी पड़ेगी. फिर वो उठकर कपडे पहनने लगी. सुनील की बहनो के वापस आने का टाइम हो गया था. मैं भी कपड़े पहन वहाँ से अपने घर निकल गया.

लेट ईव्निंग मे घर पहुचा तो पापा जोकि अभी ऑफीस से आए थे अपने दोस्त के यहाँ जा रहे थे, मॉम किचन मे बिज़ी थी और मेरी सिस्टर अपने कमरे मे बैठी एग्ज़ॅम्स की तैयारी कर रही थी.
 
अपडेट 6

मा किचन मे काम कर रही थी, हमारा किचन घर के कॉर्नर मे था, किचन की विंडो से लॉबी का पूरा व्यू दिखता था. जिसमे लगी जैल की वजह से अंदर से बाहर का तो सब दिखता था पर पर बाहर से किचिन के अंदर का नही दिखता था.

किचन मे झाँकते हुए मेने मा को बोला, “क्या बना रही हो मॉम”

“इधर आ, कहाँ था तू”

‘ओह मा, बोला तो था अपने दोस्त सुनील के घर जा रहा हूँ”तभी मेरी नज़र मॉम के खुले गान्ड तक लंबे बालो पर पड़ी साथ ही सारी मे मा की उभरी हुई गान्ड पर पड़ी. शॉर्ट मे मॉम का डिस्क्रिप्षन दूँ तो वो जस्ट विद्या बालन की कॉपी लग रही थी उस वक़्त, ममता को चोदने के बाद मेरे दिमाग़ मे सेक्स ही सेक्स भरा पड़ा था. किचन के अंदर जाते हुए मैने मॉम को पीछे से हग कर लिया. और अपनी नाक मॉम के बालो मे डाल के मदहोश कर देने वाली गंध लेने लगा. मेरे दोनो हाथ मॉम की कमर मे लिपटे हुए थे. बचपन से ही मुझे मां के बालो के प्रति अलग ही अट्रॅक्षन था, ये मॉम को भी पता था . और मैं ऐसे ही उसके बालो से खेलता था.

मॉम के बालो मे नाक घुमाते हुए सडन्ली मेरे लिप्स उसके कंधो पे टच हुए, वैसे तो ये कोई बड़ी बात नही थी पर उस दिन की मुझ पर सेक्स की मदहोशी का अलग ही असर था. मेने फिर से मॉम के कंधे पर किस जड़ दिया. मुझे मॉम की बॉडी मे सिहरन सी फील हुई साथ ही एक सिसकी सी उसके मूह से निकली. मैने अपनी कमर आगे घुमाते हुए अपने लंड को सारी के उपर से ही मॉम के हिप्स मे घुसा दिया. मैं उसके हिप्स को फील करते हुए अपनी नाक बालो के उपर से ही उसकी पीठ पर रगड़ रहा था.

मॉम- “क्या कर रहा है” कहते हुए उसने हिप्स से मुझे पीछे को धकेला.

“ओह मा, आपके बालो की खुश्बू दीवाना बना देती है. आई रियली लव इट.’ मैने पकड़ ढीली ना करते हुए जवाब दिया.

“और तेरी बदबू, जा पहले जाकर नहा के आ. और तंग मत कर मुझे खाना बनाने दे”

मैं नहा के लोवर न टी शर्ट चेंज कर के वापस आया तो मा किचन मे नही थी. बेडरूम मे देखा तो वो बेड पर लेट किसी मॅगज़ीन के पन्ने पलटते हुए शायद कुछ सोच रही थी.

“खाना बन गया क्या,” मैने पूछा.

“रोटी बनाना बाकी है, तेरे पापा आ जाए तो बनाती हूँ.” मॉम ने बिना मुझसे नज़रे मिलाए जवाब दिया. मैं लॉबी मे आकर टीवी देखते हुए आज जो भी हुआ उसके बारे मे सोचने लगा. ममता की याद आते ही लंड मे सिहरन सी दौड़ गयी. मैं सोच ही रहा था क़ि कैसे ममता ने रंडी की तरह बिहेव करते हुए मेरे और सुनील के साथ सेक्स किया और मेरा लॉडा भी चूसा. अचानक मेरे दिमाग़ मे आया क़ि क्या मा भी ऐसे मेरा लॉडा चूस सकती है. ये तो तय है अब ममता को मैं बार बार चोदूगा लेकिन अभी मेरा ध्यान बार बार मॉम की चुदाई की और जा रहा था. वैसे तो मेरा चाइल्डहुड क्रश मेरी अपनी बेहन थी पर मेरी मॉम भी कोई कम सेक्सी नही थी.

तभी मेरे कानो मे बर्तन की आवाज़ आई तो पता लगा क मॉम किचिन मे आ गयी है. मैं उठ कर किचन की और बढ़ गया, उसने किचन के डोर पर मुझे देखा पर कुछ बोली नही. मैं अंदर जाकर उसके पीछे खड़ा हो गया. उसने बालो का जुड़ा सा बनाकर क्लिप लगा रखा था. मेने क्लिप खोलकर उसके बालो को फ्री कर दिया. और धीरे धीरे बालो मे उंगलियाँ उपर से नीचे घुमाने लगा.

वो चुप चाप रोटी बेलने मे लगी रही. मैने आगे को होते हुए अपने लंड से उसके हिप्स को छुआ. उसके बदन की थरथराहट मैं फील कर सकता था. उसके बालों को सूंघते हुए मैने उसके हिप्स को थोड़ा और दबाया. उसे पक्का ये फील ज़रूर हुआ होगा. उसकी कमर पे हाथ रखते हुए मैं उसके बेल्ली पोर्षन को सहलाने लगा. उसने सारी नाभि से एक इंच नीचे बाँधी हुई थी. मैं हाथ घुमाते हुए उंगली उसकी नाभि मे डाल दी.

“अफ….. अहह…” एक सिसकी सी उसने ली. उसने कुछ कहा नही बस बेलन का हॅंडल मेरे पेट मे लगाते हुए मुझे पीछे को धकेला और फिर अपने काम मे लग गयी. मेरा लंड पूरा एग्ज़ाइटेड था मेने फिर से आगे होते हुए मा की गान्ड की दरार मे फसा दिया.

उसकी बेल्ली पे हाथ घुमाते घुमाते मैने उंगलिया उसके पेटिकोट मे घुसा दी, उसने फिर मुझ पर बेलन यूज किया. मैं पीछे नही हटा और उसके पब्लिक एरिया की सॉफ्टनेस अपनी उंगलियो क पोरो पर फील कर रहा था.

रोटी बनाना रोक वो दोनो हाथ किचन स्लीप पर टिका कर गहरी साँसे ले रही थी, मेने हाथ थोड़ा और अंदर डालने की कोशिश की तो उसके झाटों के बाल से हाथ टच हुआ तो मैं उसके कान मे फुसफुसाया, “आपके सिर के बालो की तरह ये भी बहुत मस्त हैं”

मुझे कंधे से पीछे धकेलते हुए मा ने सिस्टर को आवाज़ दी. “नेहा, बेटी आ जाओ डिन्नर रेडी है”

इससे पहले की मैं कुछ करता या कहता डोरबेल की आवाज़ आई. मैने पीछे हट कर अपने खड़े लंड को लोवर मे अड्जस्ट किया और जाकर दरवाजा खोला,बाहर पापा थे, फ्रेंड्स के यहाँ से शायद थोड़ा ड्रिंक कर के आए थे. सबने साथ मे डिन्नर किया, इस बीच मॉम मुझसे नॉर्मली बिहेव कर रही थी. फिर मॉम टेबल समेटने लगी और बाकी सब अपने अपने कमरो मे आ गये. मैं अपनी कमीनी किस्मत पर इतरा रहा था. अब मुझे इंतज़ार था मॉम को अपने नीचे लेने का.

रात के 11:30 हो गये थे, बिस्तर पे लेटे हुए मुझे नींद नही आ रही थी. मेरे ख्यालो मे बस ममता के साथ की मस्तिया और मॉम की अनदेखी चूत ही आ रही थी. मैं बिस्तर से उठ मॉम के रूम की और बढ़ गया. दरवाजे पे जाके मैने हल्के से पुश किया, दरवाजा खुला हुआ था. मैं अंदर गया. डॅड के खर्राटे सुनाई दे रहे थे वैसे भी वो ड्रिंक कर के आए थे तो उम्मीद थी घोड़े बेच कर सो रहे होंगे. दरवाजे की तरफ ही मॉम सो रही थी (शायद).

मेने फ्लोर के एक साइड मे मॉम की सारी पड़ी हुई देखी तो समझ गया कि मॉम ब्लाउस और पेटिकोट मे ही सो रही है. उन्होने एक सिल्की सी चादर ओढ़ रखी थी. डॅड मॉम की तरफ पीठ करे हुए सो रहे थे.

मैं मॉम के पास जाकर घुटनो पर बैठ गया और हाथ चादर मे डाल दिया. मेरा हाथ मॉम की नंगी पिंडलियो पर पड़ा, मैं सहलाता हुआ उपर की और बढ़ा और उनकी लोवर थाइस तक पहुच गया. कुछ समय वही सहलाने के बाद मैं उपर की और बढ़ने लगा तो उनके इकट्ठे हुए हुए पेटिकोट मे उलझ गया. आई गेस्ड या तो आज मॉम की चुदाई हुई है या फिर उन्होने मास्टरबेट किया है. क्योकि मैं कामरस की महक भी फील कर रहा था. मैं मॉम को उठाना नही चाहता था तो कुछ देर वही मिड थाइस मे सहलाता रहा फिर हाथ बाहर निकाल कर उनके चेहरे की तरफ बढ़ा. उपर की तरफ दोबारा हाथ चादर मे डाल कर उनकी एक चुचि अपने हाथ मे भर ली और धीरे धीरे दबाने लगा. डिम लाइट मे मुझे लगा जैसे मॉम मुस्करा रही थी.

कुछ देर ऐसे ही करने मे मैं बहुत हॉट फील कर रहा था. ब्लाउस के शायद दो फ्रंट हुक खुले थे. मैं उनके बूब्स फील कर रहा था, अचानक कसमसाते हुए उन्होने करवट ली और सीधी लेट गयी. मैने हिम्मत करते हुए उनकी चादर हटा दी, मैं बारी बारी दोनो बूब्स दबा रहा था. इससे एक बूब ब्लाउस से ऑलमोस्ट बाहर आ गया था. मेने बाकी के हुक खोल दिए. अब मॉम ऑलमोस्ट न्यूड मेरे सामने लेटी थी पेटिकोट कमर तके ब्लाउस ओपन , अंडरगारमेंट्स उन्होने पहने नही थे. उनके बूब्स किसी भी आंगल से ममता से कम नही थे. देख कर ही मैं पागल हो रहा था. आगे बढ़ कर मेने उनका एक बूब मूह मे ले लिया और हाथ पेटिकोट मे डाल दिया, सीधे लेटने की वजह से मेरा हाथ सीडे उनकी चूत तक पहुच गया. मैं बूब्स चुसते हुए उसकी चूत को सहलाने लगा बीच बीच मे उंगली चूत के अंदर भी डाल रहा था.

अनलाइक ममता मा की चूत बड़ी बड़ी झाटों मे गुम थी और उसमे से कामरस टपक रहा था. नींद मे ही पैर फैला कर लेटी हुई मा शायद कोई चुदाई का ही सपना देख रही थी. बूब्स छोड़कर मैने अपने होंठ मा की चूत पर टीका दिए और लम्बी जीभ निकाल कर चाटने लगा. चूत से बहुत मस्त स्मेल आ रही थी.

मेरा लंड फटने को हो रहा था. एक हाथ से मैं अपना लंड मसल रहा था. अचानक मुझे अपना वीपी बढ़ता हुआ फील हुआ और झटके खाते हुए मेरे लंड ने अपना माल छोड़ दिया जो की सीधा मा की चूत पर गिरा. मैं कुछ देर वही कार्पेट पर लेट गया. फिर उठा तो अभी मेरे लंड मे कुछ अकड़न बाकी थी तो मैं मॉम के मुंह के पास जाकर अपना लॉडा उनके लिप्स पर लगा दिया जिसमे अभी भी कुछ बूंदे माल की लगी हुई थी. उसके होंठों मे हल्की सी कपकपाहट सी हुई, कुछ पल यू ही हल्के हल्के रगड़ कर मैं हट गया. मॉम को वैसे ही छोड़ कर मैं अपने रूम मे आकर लेट गया और मस्त नींद मे खो गया.
 
सुबह 7 बजे मेरी नींद खुली तो मैने देखा मेरे कमरे का दरवाजा थोड़ा सा खुला हुआ था, मुझे अच्छे से याद था क़ि मैने दरवाजा भले ही बोल्ट नही किया पर प्रॉपेरेली बंद किया था और बिना लोवर पहने ही सो गया था. मेने नीचे देखा तो लंड महाराज पूरे ज़ोर शोर से सलामी दे रहे थे. इसका मतलब मॉम या सिस कोई तो आया था रूम मे जिसने शायद मुझे नंगा देखा भी होगा. ये सोचते ही हाथ खुद ब खुद लंड को सहलाने लग गया. धीरे धीरे पूरे ज़ोरो से मूठ मारी और सारा माल वही बेड पे टपका दिया. फिर उठा और फ्रेश होके बाहर गया.

मॉम ऐज यूषुयल किचन मे बिज़ी थी, पापा न्यूसपेपर पढ़ते हुए नेहा दी के साथ चाय पी रहे थे.

मे- गूडमॉर्निंग.

मुझे देख कर वो स्माइल करते हुए बोले, “उठ गये साहबज़ादे गूडमॉर्निंग, और अब आगे क्या करना है, कुछ सोचा है”

मे-“पापा जैसा की मैने आपको पहले भी बोला है, मैं किसी नौकरी मे इंट्रेस्टेड नही हूँ. इसलिए अब एम बी ए कर के कोई छोटा मोटा बिज़्नेस स्टार्ट करूँगा. इसके लिए अपने ही शहर का एक कॉलेज सेलेक्ट भी कर लिया है बस रिज़ल्ट आ जाए.” कहकर मैं किचन मे घुस गया और जाकर मॉम को पीछे से हग कर लिया.

मॉम- “बिना कपड़ो क सोना हो तो कम से कम दरवाजा लॉक तो कर लिया कर” –.

मैं ये सोचकर खुश हो गया की वो मॉम है जिसने सुबह मेरे लौड़े के दर्शन किए हैं, मैने पीछे से ही मॉम के गॉल पर किस कर दिया.

मॉम ने मुझे बाहर की और धकेलते हुए कहा , “बाहर बैठो मैं चाय ला रही हूँ.”

चाय के बाद मैं टीवी देखने लग गया, डॅड ऑफीस और दी कॉलेज के लिए निकल गये. लगभग 8:30 बजे हमारी मैड झरना आई और काम मे लग गयी. लगभग 25 साल की थी वो, रीसेंट्ली मॅरीड, मुझे हमेशा बाबू या राजा कहकर बुलाती थी. बहुत सुंदर तो नही पर भरे पूरे शरीर की मालकिन थी, नैन नक्श तीखे, सिंप्ली ब्लॅक ब्यूटी.

नेहा के रूम की सफाई करवाने के बाद मॉम झरना को मेरे रूम मे भेज कर मुझे बोली - “अभी जाके अपना रूम सॉफ करवा लो.”

मैं उठ कर अपने रूम की और चल पड़ा. मैं घुसा ही था की बेड के पास खड़ी झरना मुझे देख कर बोली, “ राजा, ये क्या है? नया बेड शीट गंदा कर दिया!”

“मैने क्या किया..” मैं बोला.

उसके हाथ मे बेडशीट थी और उंगली सुबह मारी हुई मूठ के दाग पर. वो बोली “तुम अभी छोटे हो… किसको याद कर.. पानी गिराया… मा को या दीदी…को.” और हँस दी.

“चुप कुतिया… तुमको याद कर रहा था..” मैं बोला.

“हाय,.. फिर से बोलो…”

“क्या?”

“वोही जो तुमने अभी मुझे कहा..”

“ क्या… कुतिया!”

“हाँ, मुझे… कुतिया कहलाना बहुत अच्छा लगता है…”

“अपने घरवाले को बोलो वो तुझे कुतिया कहकर पुकारेगा, कुतिया …”

“साला कुतिया बनाता है लेकिन कुतिया बोलता नही. अब से तुम मुझे ‘कुतिया’ के नाम से पुकारो…लेकिन अकेले मे..”

शी कंटिन्यूड, “ लेकिन राजा अभी से ये पानी गिराओगे तो कमजोर हो जाओगे और फिर तुम्हारी घरवाली दूसरे के साथ मज़ा मारेगी.. अभी तुम बच्चे हो..”

मैने उसे घूरा. मेरी आँखे उसके लो कट कॉटन के ब्लाउस से झाँकते हुए चुचियो पर जम गयी, नीचे वो लहंगा पहने हुए थी. उसे देख कर मन खराब होने लगा, उसके मम्मो को पकड़ के चूसने का दिल किया.

“कुतिया, तेरा पति तेरे दूध चुसता है या नही..?” मैने पूछा.

जवाब ना देते हुए उसने चादर बदली की फिर बोली “अब इसे गंदा मत करना.. और … ?

“और क्या कुतिया…” आँख मारते हुए मैं बोला.

“ओह.. कुतिया सुनना बहुत अच्छा लग रहा है..”

“बोल ना कुतिया.. पति को अपना दूध पिलाती है?..”

“हा रे …. वो तो मुआ छोड़ता ही नही है”

मैने जाकर उसका हाथ पकड़ लिया और बोला, “ कुतिया, मुझे अपना चुचि चूसने दो,” मैने दूसरा हाथ उसकी चुचि की ओर बढ़ाया तो वो पीछे को हो गयी

“छी.. क्या गंदा बात करते हो” वो बोली “ ना तो तुम छोटे बच्चे ना ही मर्द बने हो…तुम्हे अभी इंतज़ार करना होगा”.

“ कुतिया, प्लीज़ कुतिया ,मैने अभी तक नंगी चुचि नही देखी..प्लीज़ एक बार दूध पिला दो…” मैं रिक्वेस्ट करने के अंदाज मे उसे बोला. पर वो मुस्करा के हाथ छुड़ा के रूम से निकल गयी

मैं अपना पीसी खोल कर उसपे बिज़ी हो गया. कुछ देर मे वो आके मेरे पास खड़ी हो गयी

“क्या हुआ झरना!.”

“झरना नही ‘कुतिया’ बुलाओ.. भाभी जी (मेरी मॉम) नहाने गयी है.. जल्दी से चूस लो..”

मेरा चेहरा 100 वाट के बल्ब की तरह रोशन हो गया. उसकी दोनो चुचि अपने हाथो मे लेता हुआ मैं बोला “ ओह्ह्ह कुतिया तुम बहुत अच्छी हो..”

मैने उसका ब्लाउस खोल दिया. उसने हाथ पीछे ले जाते हुए ब्रा के हुक खोल दिए. उसकी नंगी चुचिया मेरे सामने तनी हुई खड़ी थी, मैं एक के बाद एक दोनो को दबाने और चूसने लग गया. मैने एक हाथ से अपना लोवर नीचे खिसकाते हुए अपना लॉडा बाहर निकाल लिया, फिर लहंगे के उपर से ही उसकी चूत को हथेली मे भरकर भींच दिया. उसने पेंटी नही पहनी थी, मुझे उसका चूत से निकलते कामरस का आभास हो रहा था. मैने उसकी चूत मे कपड़े समेत ही उंगली घुसा दी

“ओह्ह्ह्ह्ह राजा… क्या कर रहे हो.. तुम तो खाली दूध पीना चाहते थे. आह… मत करो, उंगली बाहर निकालो…”

उसने हाथ नीचे किया तो मेरे लौड़े से टकरा गया. तो उसने मेरे लंड को मुट्ठी मे जकड़ लिया.

“राजा.. यह तो पूरा तैयार है…”

“ कुतिया, मुझसे चुदवाएगी….”

“हाँ.. राजा… लेकिन अभी नही”

मैने हाथ उसके लहंगे के अंदर डाल दिया. ममता की तरह उसकी चूत भी चिकनी (शेवन)थी. मैने उसमे उंगली डाल दी.

“बस राजा… मा आ जाएगी” उसने खुद को हटाते हुए अपने कपड़े ठीक किए.

मेरा लॉडा अभी भी बाहर था, वो उसे पकड़ते हुए बोली “ लगता है इसे कमरे के अंदर बंद करना पड़ेगा..” फिर उसने मेरा अंडरवेर और लोवर उपर चढ़ा दिया.

“कुतिया, आज रात को यहा रुक जा खूब जमकर चोदूगा..”

“जल्दी मौका दूँगी” बोलते हुए वो बाहर निकल गयी.
 
कुछ देर मॉम और झरना बाकी घर के काम करती रही और मैं कंप्यूटर पर नेट सर्फ करता रहा. तभी सुनील का कॉल आया

वो बोला “और कमीने क्या हाल हैं”

“भोंस डी के हाल तो तेरे बता, अब तो अपनी मा की चूत फाड़ रहा होगा”

“साले कसम से तेरे कारण वो हो गया जिसके मैं बस ख्वाब ही देख सकता था. अब तो बस अपनी बहनो की और चोदने की तमन्ना है. सोच साले दो दो कुँवारी चुते … उन्हे फाड़ने मे कितना मज़ा आएगा.”

“ तो तू अपनी बहनो को भी चोदना चाहता है.” मैने पूछा.

“साले जब मादर चोद बन सकता हूँ तो बहन चोद क्यो नही”

“ह्म…. एक काम कर इनडाइरेक्ट्ली उनको सेक्स मॅगज़ीन्स वगेरह लाकर दे और उनसे बातचीत के दोरान कुछ कुछ सेक्सी वर्ड्स यूज करा कर. ट्राइ टू ओपन देम. उन्हे भी देख लेंगे.”

मैं उसे और क्या कहता मैं भी तो अपनी मा और बेहन दोनो को चोदना चाहता था.

तभी मॉम की आवाज़ आई “अभी तुम्हारा लंच रेडी है, नेहा भी आने वाली होगी. मैं कुछ काम से मार्केट जा रही हूँ. थोड़ी लेट आउन्गी” नेहा के आने के बाद मैं लंच कर के सो गया.

शाम को जब उठा तो फ्रेश होकर लॉबी मे आ गया. मॉम भी वापस आ गयी थी और किचन मे बिज़ी थी, नेहा अपने रूम मे स्टडी कर रही थी. मैने कुछ देर टीवी देख फिर टीवी चलता छोड़ कर सीधा किचन मे घुस गया , मुझे अंदर आता देख कर मॉम ने इग्नोर कर दिया, मैं सीधा जाकर मॉम के पीछे खड़ा हो गया. सबसे पहले उनके रेशमी बालो को क्लिप की क़ैद से आज़ाद किया फिर अपना मूह बालो मे डालकर रब करने लगा. “आई लव यूं मॉम” मैने कहा.

मैने अपना सेमिएरेक्ट लॉडा लोवर से बाहर किया और मॉम के हिप्स से रगड़ने लगा. अब मैं अपनी पूरी बॉडी से उसकी बॉडी दबा रहा था. वो बीच बीच मे अपना काम रोक कर गहरी साँसे भरने लगती थी. मैने अपना काम बिना कोई ध्यान दिए चालू रक्खा. धीरे धीरे गर्दन से लेकर गान्ड तक पूरी बॉडी पर पीछे से हाथ घुमा रहा था. दूसरे हाथ से हिप्स रब कर रहा था. अब मेरा लॉडा भी पूरा तन चुका था. उसे भी सारी और पेटिकोट के उपर से ही पूरा फील हो रहा होगा.

ऐसे ही मेरे हाथ खिसकते हुए मॉम की जाँघो तक पहुच गये, मैने उनकी थाइस पर पूरी तसल्ली से लगभग 10 मीं तक हाथ फेरा, उसकी थाइ ठोस और सुडोल थे. फिर मैं पीछे से ही हाथ उपर बेल्ली एरिया मे ले आया. अब मेरे हाथ बेल्ली पोर्षन और कमर के पीछे के हिस्से मे ही घूम रहे थे.

अब शायद सिचुयेशन मॉम के कंट्रोल से बाहर हो गयी थी, लास्ट ईव्निंग की तरह मॉम ने मुझे बेलन से पीछे की ओर धकेला पर बोला कुछ नही, मैं मॉम की बेल्ली को सहलाते हुए उनके कान मे बोला. “मॉम, पापा के सोने के बाद मेर रूम मे आना प्ल्ज़”

“तू आज झरना को कुतिया क्यू बोल रहा था, शरम नही आती” मॉम ने कहा.

“मॉम वो तो वही बोली थी के उसे कुतिया सुनना अच्छा लगता है” मेने अपनी नाक और अप्पर लिप्स उसकी गर्दन से स्टेट हुए एक हाथ तो बेल्ली पे ही रहने दिया और दूसरा चुचियो के निचले हिस्से तक ले गया. मेरी उंगलिया अब मॉम की चुचि को छू रही थी.

“मैं समझ नही पा रही हूँ कि कोई अगर मुझे कुतिया बोले तो मैं कैसा फील करूँगी” मॉम ने बेखुदी मे शायद खुद से कहा.

“आपको पता है मॉम झरना कह रही थी की उसका घरवाला उसे रोज कुतिया बनाता तो है पर बुलाता नही है… अब इसका क्या मतलब है की रोज कुतिया बनाता है” मैने पूछते हुए अपनी उंगलियो को मॉम के बूब्स पर घुमाया.

“क्या पापा भी आपको कुतिया बनाते हैं” बोलते हुए बड़े ही सॉफ्ट्ली मैं एक हाथ उनके पूरी चुचि पर फेरने लग गया. मेरा दूसरा हाथ खिसक कर उनके पब्लिक एरिया मे पहुच गया, स्मूद स्किन फील होतेही मुझे झटका लगा शायद आज ही दिन मे मॉम ने सारी खेती सॉफ की थी.

सिसकी भरते हुए मॉम बोली “ आह… आ.. … तेरे पापा अक्सर मुझे कुतिया बनाते हैं.” मेरा हाथ खिसक कर सारी के उपर से ही चूत पर पहुच गया था. अब मैं एक हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था और दूसरे से चूत. मुझे लग रहा था क़ि मॉम सब एंजाय कर रही हैं. तभी कल्लबेल्ल बजी , पापा आ गये थे. मैं किचन से निकलते हुए मॉम को बोला, “मैं रात मे वेट करूँगा”

फिर सब नॉर्मल रहा. डिन्नर के बाद मैं अपने रूम मे चला गया.

आधी रात हो गयी पर वो नही आई तो मैं उठकर उनके रूम की और चल पड़ा. कल की तरह रूम खुला था, मैं बेड के पास पहुचा. मा चादर ओढ़ के सो रही थी. मेने धीरे से चादर हटाई. आज शायद मेरी किस्मत काम नही कर रही थी, मा ने सोने से पहले चेंज नही किया था. वो वैसे ही सारे मे प्रॉपर्ली कवर्ड सो रही थी. मैं उन्हे मॅग्ज़िमम न्यूड देखना चाहता था इसलिए धीरे धीरे उनकी सारी की गाँठ खोलने लगा. सारी निकलना तो संभव था नही तो मैने सारी पेटिकोट से निकल कर पेटिकोट की गाँठ भी खोल दी और जितना हो सके दोनो को नीचे खिसका दिया. या तो मा को इस सबका एहसास नही हो रहा था या वो नाटक कर रही थी.

अब उसकी नंगी चूत मेरी नज़ारो के सामने थी, मैने अपना तना हुआ लॉडा बाहर निकाल कर उसकी नंगी चूत पर रख दिया और कपड़ो के उपर से ही धीरे धीरे उसके बूब्स दबाने लगा. कुछ देर ऐसे ही करने के बाद मैने उसके ब्लाउस के हुक्स खोल दिए. उसकी ब्रा मे कसी हुई बड़ी बड़ी चुचियाँ देखकर मैं पागल हुआ जा रहा था. मैं एक हाथ से उसकी ब्रा मे क़ैद चुचि और दूसरे हाथ से अपना लंड लगातार दबाने लग गया. मेरा लंड फटने को हो रहा था, मैने झटके लेते हुए अपना सारा माल उसके मूह और चुचियो पर छोड़ दिया, कल रात की तरह जाने से पहले मैने उसके होंठो से अपने लंड को किस करवाया , फिर जाकर अपने कमरे मे शांति से सो गया.
 
अगले दिन फिर मैने झरना की चुचियाँ चूसी और उसकी चूत मे उंगली भी की. आज भी उसने खुद को कुतिया कहलवाया. मॉम नॉर्मल थी, रात के बारे मे मुझसे कोई सवाल जवाब नही हुए (रात मैं अध नंगी ही छोड़ आया था). फिर मैने सुनील के घर जाकर ममता को चोदने की सोची, सुनील को कॉल लगाया तो उसने सिस्टर्स के घर होने की बात बोलकर केएलपीडी कर दी. तो मैं एक दूसरे दोस्त के साथ मूवी देखने चला गया.

शाम को जब मैं वापस घर पहुचा तो हमेशा की तरह मॉम किचन मे थी और नेहा दी शायद अपने रूम मे. मौका देखकर मैं किचन मे घुस गया. मॉम की चुचि दबाते हुए बोला, “ कुतिया, कल रात मेरे रूम मे आई क्यो नही.”?

मॉम बिना कोई जवाब दिए अपना काम करती रही. पिछली दोनो रातो को मैने मॉम के बूब्स से अच्छे से खेला था फिर भी इस वक़्त का मज़ा अलग ही था. मैने बूब्स प्यार से प्रेस करते हुए पीछे से ही अपना लंड मॉम की गान्ड से सटा दिया और बोला, “कुतिया, मुझे और कितना तड़पओगी..”

“जो कर रहे हो तुम कर रहे हो, मैने क्या किया..” वो बोली

“ओह्ह क्या मस्त चुचि है तुम्हारी.. मज़ा आ गया दबाने मे..”

“इमॅजिन व्हाट विल हॅपन इफ़ युवर फादर आंड दीदी सीज यूं डूयिंग दिस..”

“दे विल बीट मी.. सो व्हाट..” मैने पेटिकोट उठा कर उसकी बुर सहलाने लगा. उसने पैंटी नही पहनी हुई थी. उसकी नंगी बुर कामरस छोड़ रही थी.

“कुतिया, तेरी बुर बहुत टपक रही है…. मुझे चूसने दे..”

“तू जा झरना के पास ये तेरे लिए नही है’

“देख कुतिया जो आज रात तू मेरे कमरे मे ना आई तो कल मैं अपने एक दोस्त को बुला लूँगा और हम दोनो मिलकर तेरा रेप कर डालेंगे”

“ कल की कल देखेंगे , अभी छोड़ मुझे, नेहा आने वाली है किचन मे”

मैने एक बार और चूत को कस कर भींच दिया, उसकी आ निकल गयी. अब वो भी पूरी गरम हो रखी थी. मुझसे कंट्रोल नही हुआ और मैने अपना लॉडा बाहर निकाल कर उसकी नंगे चुतड़ों से सटा दिया और दोनो हाथ उसकी कमर पर जमा दिए. जो मज़ा आ रहा था मैं बयान नही कर सकता.

‘रानी, थोड़ा चुतड़ पीछे करो.” मैं भारी आवाज़ से बोला

“रानी मत बोलो, मुझे भी कुतिया बोलो,,

”मॉम ने गॅस बंद किया और किचन की स्लॅब पकड़ के झुकते हुए अपने हिप्स पीछे की और बढ़ा दिए. मैने आओ देखा ना ताओ और पीछे से ही अपना लॉडा उसकी बुर में पेल दिया. उसने बड़ी मुश्किल अपनी चीख रोकी.

शी स्विच्ड ऑफ गॅस आंड पुश्ड हर हिप्स बॅक. आई स्प्रेड हिप्स अवे आंड सॉ कंट होल. विदाउट वेटिंग आई पुश्ड लौडा इन कंट आंड स्टार्टेड फक्किंग माइ मदर फॉर फर्स्ट टाइम इन किचन.

“बेटे, जल्दी से पानी गिरा दो.. कोई आ जाएगा..”

“रात मे चुदवाओगी.. रंडी साली…”

“हाँ राजा.. बुर खोलकर आउन्गी.. अभी नेहा देखेगी तो अच्छा नही होगा..”

मैने जल्दी जल्दी और तेज झटके लगाने शुरू कर दिए, और कुछ ही धक्को मे झड गया. मॉम भले ही खूबसूरती मे ममता से 19 थी पर मेरे ख्वाबो की रानी थी. मैं ज़्यादा देर टिक ना पाया, आख़िर आज पहली बार अपनी मा को चोद रहा था.

“इसिको कुतिया बनाना बोलते है, समझे प्यारे..” मॉम बोली

“मॉम कम इन नाइट ऑन माइ बेड.’

“कमीने अब तो मुझे मॉम मत बुला. कुतिया बुला, रंडी हूँ मैं अब तेरी.”

तभी लॉबी मे कोई आहट सुनकर मैं तुरंत अपने कपड़े ठीक कर के किचिन से बाहर निकल आया और टीवी लगाकर बैठ गया. डिन्नर के बाद मैं अपने रूम मे जाकर लेट गया. मॉम का वेट करते हुए मेरी आँख लग गयी. अचानक किसी के हिलाने से मैं जागा, सामने थी मेरे ख्वाबो की रानी, मेरी कुतिया, फुल न्यूड.

मैने उसे बेड पर खींच लिया और एक ज़ोरदार स्मूच दिया. फिर अचानक मैं उठा और लाइट ऑन करदी साथ ही दरवाजा भी खोल दिया, जो शायद अंदर आते हुए मॉम ने बंद कर दिया था.

“ये क्या कर रहे हो, कोई आ जाएगा” वो बोली.

“आज मैं तुम्हे ऐसे ही चोदुन्गा मेरी रानी, लाइट और दरवाजा खोलकर”

“डोंट कॉल मी रानी. आई एम रंडी आंड कॉल मी रंडी. पर प्लीज़ दरवाजा बंद कर दो कोई आ सकता है”

मैने दरवाजा बंद कर दिया और बेड के पास जाकर मॉम के दमकते हुए नंगे बदन को निहारने लगा.

“अब तुम मत तडपाओ.. जल्दी से इस कुतिया को चोदो..” वो टांगे चौड़ी कर कर दोनो हाथों से अपनी चूत की फांको को फैलाते हुए बोली.

मैं उसकी टाँगों के बीच बैठ गया और उसकी रसीली टपकती चूत पर अपने होंठ टिका दिए. कुछ देर किस करने के बाद मैं जीभ निकल कर चाटने लग गया.

“आउच.. अफ… क्या कर रहे हो…” वो रोकते हुए बोली

“ओह्ह्ह कुतिया, लेट मी ईट कंट..”

“नही पहले मुझे चोदो … मुझे खूब चोदो.. तीन दिन से तडपा रहे हो..”

मैने जीभ सिकोड कर अंदर तक घुसा दी.

“ओह्ह्ह्ह. नो.. आह…”

आई चूड कंट आंड रब्ब्ड इट. आई मसाज्ड कंट वित मी पाम्स.

“ओह्ह्ह्ह… लौडा अंदर डालो.. चोदो मुझे….”

वो मस्ती मे मेरी जीभ की हर हरकत पर अपने चूतर उठा रही थी. अब मुझ से भी कंट्रोल नही हो रहा था मैने पोज़िशन लेते हुए अपना लॉडा उसकी बुर में पेल दिया.

“आ.. मंजू मेरी जान… मेरी रंडी, कैसा लग रहा है.. कुतिया.” मैं धक्के लगाता हुआ बोला.

“बस राजा , पेलते रहो…आह…” मुझे अपनी बाहो मे लेकर किस करते हुए वो बोली. कुछ देर बाद जब तूफान थम गया तो हम दोनो अगल बगल पड़े अपनी सांसो को कंट्रोल कर रहे थे.

“ एक बात बताओ, 3 दिन पहले तक सब कुछ नॉर्मल था. फिर ऐसा क्या हुआ जो तुमने अपनी ही मा को चोद डाला.”
 
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