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Incest जिंदगी के रंग अपनों के संग

फोन के दूसरी तरफ से शायद उस ने माफी माँगी और फोन ना उठाने का कारण बताया जिस को सुन के जॅक का गुस्सा कुछ कम हुआ.

जॅक-हमारे लिए एक बुरी खबर है .अजय की सिक्यॉरटी अब कमजोर हो रही है मुझे उसकी सेफ्टी के लिए तुम्हारे दो सबसे बेहतरीन

योद्धा चाहिए और ये कम कल सुबह होने से पहले होने चाहिए ..

फिर दूसरी तरह से कुछ बोला गया .

जॅक-हाँ में उसे ट्रनिंग दे रहा हू पर उस में अभी टाइम लगेगा तुम से जितना कहा जाए उतना करो समझे अपना दिमाग़ ना लगाओ …और जॅक ने गुस्से से फोन तोड़ दिया.में कभी सोच ही नही सकता था कि ये टाइम इतने जल्दी आ जाएगा मुझे कुछ करना होगा इस से पहले

कि कुछ बुरा हो मुझे उस की सिक्यॉरटी को दोबारा से ताक़त वर करना होगा…….

दोस्तो में यहाँ एक बात यहाँ पे क्लियर करना चाहूगा कि में किसी भी जगह (प्लेस) का नाम नही लिखुगा.और ना ही ये क्लियर कर पाउन्गा कि अगर किसी की न्यू एंट्री होती है तो वो कौन है और कहाँ से है बस में आप लोगो को ये बता सकता हूँ जैसे जैसे स्टोरी में उस की ज़रूरत होगी उस की जानकारी आप लोगो को मिलते रहे गी तो उम्मीद है की आप लोग मेरी एस बात को समझेगे …

इसका एक कारण ये भी है की आप लोग खुद अपने आप इमेजिन करे ना कि में करवाऊ ऐसे में आप को स्टोरी पढ़ने में ज़्यादा मज़ा आएगा.

जॅक वहाँ से उठ के बाहर आ जाता है और गार्डन में एक आ के बैठ जाता है कुछ देर बैठने के बाद वो किसी को फोन कर के कुछ

बात करता है और फोन बंद कर के वापस अपने जब में रख लेता है.(यहाँ आप लोगो को बता दूं कि जॅक के पास हमेशा दो फोन रहते

है एक वो अपने साथ लाया था और एक उस ने यहाँ आ के खरीदा था और उस ने जो फोन तोड़ा वो यहाँ वाला था.)

में अपने कमरे में सो रहा था कि मुझे बेचैनी होनी लगी जैसे कि कोई चीज़ मुझे सांस लेने में रुकावट बन रही है में एक दम से उठ गया .सबसे पहले मेने देखा कि आशु (गुड़िया ) आराम से सो रही है उस को कोई डिस्टर्ब ना हो ये सोच के में नीचे गार्डन में आ गया जहा जॅक पहले से ही मोजूद था .

जॅक-तो तुम नीचे आ ही गये में काफ़ी टाइम से तुम्हारा इंतेज़ार कर रहा हूँ .

में-मुझे नही पता था कि रात के 2 बजे मुझे तुम से मिलने के लिए नीचे गार्डन में आना होगा .

जॅक-हूँ ये बात तो है मुझे तुम से कुछ ज़रूरी बात करनी है क्या तुम मुझे पे भरोसा करते हो.

में-ये कैसा बच्चो जैसा सवाल है अगर तुम पे भरोसा नही होता तो हम साथ नही होते.

जॅक-में भरोसे के बात नही कर रहा में उस भरोसे की बात कर रहा हूँ जो तुम सिर्फ़ कुछ गिने चुने लोगो पे ही करते हो अपने से ज़्यादा .

में-में कुछ समझा नही .फिर भी जितना में समझा हूँ उस हिसाब से में तुम पर अभी उतना ही भरोसा करता हूँ जितना के अपने आप पे .

जॅक-गुड चलो जा के सो जाओ अब हम कल से यहाँ ट्रनिंग नही करेंगे मेने कुछ बड़ा सोचा है तुम्हारे लिए उम्मीद है कि तुम मेरा साथ दोगे.

.

में-मेरी तो ये समझ में नही आ रहा कि तुम मुझे ये ट्रनिंग दे ही क्यूँ रहे हो मुझे इसकी क्या ज़रूरत .है
 
में-मेरी तो ये समझ में नही आ रहा कि तुम मुझे ये ट्रनिंग दे ही क्यूँ रहे हो मुझे इसकी क्या ज़रूरत .है

जॅक-वक़्त आने पे सब पता चल जाएगा.तुम बस ये समझ लो कि अगर तुम ट्रनिंग पूरी नही करते तो तुम उन सब को खो दोगे जिन से तुम जुड़े हो चाहे वो कोई भी हो कोई फ़र्क नही पड़ता तुम पे कितनी जिंदगी डेपैंड करती है ये बात तुम नही जानते वक़्त आने पे तुम्हे सब पता चल जाएगा अभी के लिए जा के आराम करो.

ये बोल के जॅक तो चला गया और जिस अंदाज में जॅक ने ये बाते कही थी में चाह के भी उस को हल्के में नही ले सकता था कोई मेरे साथ कुछ भी करे मुझे कोई फ़र्क नही पड़ता था पर जब बात मेरी फॅमिली की हो तो मेरी जान तो छोटी सी चीज़ है में उन के कुछ भी कर जाउन्गा .जॅक तो चला गया पर मेरे दिमाग़ में हज़ारो सवाल छोड़ गया की आख़िर ऐसा क्या है मेरी जिंदगी में जो में ही नही जानता

मुझे बचपन से ऐसा लगता था की कोई तो है जो मुझे पे हमेशा नज़र रख रहा है पर क्या सच में ऐसा है या सिर्फ़ ये मेरा वहम है जिसे

में जॅक की बातो में आ जोड़ के देख रहा हू…………

में कुछ देर तक वही बैठा रहा और अपने आने वाली ज़िंदगी के बारे में सोचता रहा.उसके बाद में अपने रूम चला गया मेने टाइम देखा तो 4 बजने वाले थे मेने सोचा कि अब लेटना तो बेकार है इसलिए में फ्रेश हो के वापस ग्राउंड में आ गया और जो जॅक ने सिखाया था उस

की प्रॅक्टीस करने लगा मुझे अभी आए कोई 30 मीं के आस-पास ही हुए थे कि जॅक भी आ गया.

जॅक-गुड तुम्हे यहाँ देख के अच्छा लगा .

में-बाते हो गयी तो अब प्रॅक्टीस स्टार्ट करें .अगर तुम बुरा ना मानो तो एक चीज़ पुच्छू .

जॅक-ठीक है पर ये पहला और आख़िर सवाल होगा इसके बाद ना तुम कोई सवाल पुछोगे और ना ही में जबाब दूँगा.

में-मुझे मंज़ूर है .ऐसा कुछ है मेरे लाइफ के बारे में जो मुझे नही पता और तुम्हे पता है.

जॅक-हाँ बहुत कुछ जो समय आने पे तुम खुद जान जाओगे चलो आज की प्रॅक्टीस सुरू करते है .

में-ओके मुझे क्या करना है आज.

जॅक-तुम सोच रहे होगे कि में तुम्हारे शरीर पे ये काय्न्स बाँध के ही तुम से प्रॅक्टीस क्यूँ करवाता हूँ तो इसका जबाब है कि तुम्हारी बॉडी अभी बहुत कमजोर है और दूसरा रीजन ये है कि इस से तुम्हारी स्पीड बढ़ेगी .और आज से हम तुम्हारी असली ट्रैनिंग स्टार्ट करते है जो बहुत ही मुस्किल होने वाली है पर मुझे पूरा भरोसा है की तुम कामयाब होगे.

में-में सिर्फ़ कोशिश कर सकता हूँ .आगे देखते है क्या होता है.

जॅक-ओके चलो आज तुम्हारा वजन बढ़ा देते है जिस से तुम्हारी बॉडी को अड्जस्टमेंट करने में आगे प्रॉब्लम नही होगी.
 
फिर जॅक ने मेरा वजन पहले से 10गुना कर दिया मुझे मेरे हाथ पाँव हिलाने में भी दिक्कत हो रही थी किसी तरह 1घंटे की मेहनत के

बाद अब में अपने हाथ पाँव को थोड़ा कंफर्टबल हिला सकता था फिर धीरे धीरे मेरा शरीर खुलने लगा और मुझे कुछ अच्छा लगने लगा.

जॅक-तुम बहुत ही अच्छा कर रहे हो अब तुम्हे इस पैड पे किक और पंच की प्रॅक्टीस करनी है जब तक तुम इसे कंप्लीट नही कर लेते तब तक हम आगे नही बढ़ सकते तुम ये जान लो कि तुम इसको जितनी जल्दी कर लोगे उतना ही अच्छा होगा और अभी के लिए काफ़ी प्रॅक्टीस हो गयी अब तुम्हे अपने कॉलेज के तैयारी करने चाहिए जब भी तुम को टाइम मिले तुम्हे अपनी प्रॅक्टीस कंटिन्यू रखनी होगी.

में-ठीक है में समझ गया.

में अपने कमरे में गया गुड़िया अभी भी सो रही थी मेने उस के माथे पे एक किस किया जिस से उस की नीद खुल गयी .उस ने मुझे भी एक किस किया और गुड मॉर्निंग विश किया.

चल जा के तैयार हो तुझे स्कूल नही जाना क्या .

गुड़िया -जा रही हूँ ना जब देखो तब भगाते रहते हो .

और वो गुस्से में उठ के वहाँ से चली गयी.मेने सोचा कि इसको बाद में मना लूँगा फिर में फ्रेश होने ले लिए चला गया .फ्रेश हो के में नीचे हॉल में गया जहाँ गुड़िया नही थी मेने मोम से पता किया तो पता चला कि वो जा चुकी है.ओह तेरी लगता है ज़्यादा नाराज़ है चलो अब

तो कुछ सोचना ही पड़ेगा उस को मनाने के लिए .

मेने रवि को कॉल किया ये पता करने के लिए कि वो कब से जाय्न कर रहा है तो पता चला कि वो अपने मामा के पास गया है किसी काम से तो उस को आने में कम से कम 10 दिन का टाइम तो लग ही जाएगा.

फिर में और रघु निकल पड़े कॉलेज के लिए .

रघु-भाई आज कॉलेज का पहला दिन है तो रेगिंग तो होने पक्की है सीनियर जो बोले वो कर लेना बात को ज़्यादा मत बढ़ाना .

में-पर वो तो बन है ना हर कॉलेज में.

रघु-भाई ये इंडिया है यहाँ वो ही चीज़े ज़्यादा होती है जो करना मना हो इसलिए प्लीज़ मेरी खातिर जोश में मत आना.

में-चल ठीक है तू भी क्या याद करेगा कि किस दिलदार से पाला पड़ा है.

ऐसे ही बाते करते करते हम कॉलेज पहुँच गये जहाँ रघु बाइक पार्क करने चला गया और में एंट्री गेट की तरफ.वहाँ का सीन देख के

ऐसा लग रहा था कि में किसी चिड़याघर में आ गया हूँ जहाँ सीनियर रिंग्मास्टर और फ्रेशर उन के कोडे पे उछल कूद करने वाले जानवर हो.

में अभी गेट के पास पहुँचा ही था किसी ने मेरी गरदन पीछे से पकड़ ली .मेने जब देखा तो मुझे एक बार फिर अपनी किस्मत पे हसी आ गयी क्यूँ कि वो और कोई नही प्रिया और समीर था और समीर मेरा सीनियर था मेने सोचा चलो अब एक बात तो क्लियर है कि मेरी जबरदस्त लगने वाली है.

समीर और उस के दोस्त जो की आज भी वो ही पँचो थे जो उस दिन माल में थे मुझे घर के कॅंपस के ग्राउंड में ले गये.

समीर-चल बच्चे तुझे एक लास्ट चान्स देता हूँ मेरे और प्रिया के पैरो पे गिर के माफी माँग ले.

प्रिया-चान्स अच्छा है नही तो में तो तुझे माफ़ करने के बिल्कुल भी फेवर में नही हूँ पर समीर के बात को टाल भी नही सकती.

में-जिस कम को दिल ना करे वो नही करना चाहिए मेने तुम्हे प्रॉमिस किया था कि में तुम्हे एक चान्स दूँगा .तुम्हे अपना बदला लेने का सोच लो वो मोका आज ही दे दिया तुम्हे जो करना है कर लो में ना तो किसी से कुछ बोलने वाला हूँ और ना ही किसी से तुम्हे कोई प्रॉब्लम

होने वाले है.
 
मेरा इतना बोलते ही समीर ने एक जोरदार मुक्का मेरे पेट में मारा मुक्का इतना जोरदार था कि में अपना पेट पकेड़ के वहाँ बैठ गया और वो सभी हँसने लगे और अब लगभग आधा ग्राउंड भर चुका था पर किसी ने भी आगे आ के मेरी मदद करने की कोशिश भी नही की. उन

को ऐसे हँसते हुए देख के मुझे भी हसी आ गयी असल में मुझे ये सोच के हसी आ गयी कि में क्या क्या सोच के इंडिया आया था और यहाँ आ के मुझे सिवाए दर्द के मुझे कुछ भी नही मिला था.

मुझे ऐसे हँसते हुए देख समीर और उस के दोस्तो को अपनी बेज़्जती महसुह होने लगी और सब ने मिल के मोर्चा संभाल लिया और अपना गुस्सा निकालने लगे करीब 10मिनट तक मारने के बाद समीर ने सब को अलग किया और इस टाइम तक मेरी हालत काफ़ी खराब हो

चुकी थी मेरे पूरा चेहरा सूज गया था होठ फट गये थे नाक से खून निकल रहा था घुटने छिल गये थे टोतली शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नही था जो दर्द ना कर रहा हो समीर मेरे पास आ के .

समीर-बेटा देख ले हम से पंगा लेने का अंजाम इस पूरे कॉलेज में तो क्या इस पूरे शहर में ऐसा कोई नही है जो समीर के खिलाफ

आवाज़ उठा सके तेरे पास अब भी मोका है माफी माँग ले और में तुझे छोड़ दूँगा.

में-खाँसते हुए जब मेने बोलने के लिए अपना मूह खोला तो उस में खून आ गया खून को साइड में थुक्ते हुए .समीर जिसे तू अपनी जीत समझ के खुश हो रहा है असल में वो मेरा दिया हुआ वो वादा है प्रिया को नही तो तुझे मेने दो बार बिना हाथ उठाए हरा दिया तो आज कौन सी बड़ी बात है पर में अपना वादा अपनी जान दे के भी निभाता हूँ तेरे पास सिर्फ़ आज का ही मोका है चाहे जो कर ले में तुझे कुछ

नही कहुगा पर आज के बाद नो चान्स जिंदगी भर तुझे हारना ही है मुझ से तो बातों में टाइम ना बेकार कर और अपना और प्रिया का

बदला ले ले कही ऐसा ना हो की बाद में प्रिया जी को हम से शिकायत रह जाए और में वो बिल्कुल नही चाहता .

समीर मेरी तरफ आगे बड़ा ही था कि प्रिया ने उसे रोकते हुए.

प्रिया-समीर क्या कर रहे तो उस की हालत देखो अगर उस को कुछ हो गया तो खमखा का टेन्षन हो सकती है.

समीर-तुम उस की चिंता ना करो में सब संभाल लूँगा .

प्रिया-तुम्हे ये इतना आसान लग रहा है तुम्हे नही पता वो क्या कर सकता है कल मेने उस की पवर देखी है सिर्फ़ कुछ मिंटो में ही

प्रिन्सिपल मेरी साइड ना लेते हुए उस के साइड पे चले गये.और वैसे भी जब ये ठीक हो जाएगा तब अपनी इच्छा पूरी कर लेना अभी के लिए छोड़ दो.

फिर प्रिया उस को समझा के उस को ले गयी और मेरी आखे भी बंद हो गयी जैसे कि उन का जाने का ही वेट कर रही हो .......

मुझे होश जब आया जब किसी ने मेरे मूह पे पानी डाला.मेने देखा तो वो कोई और नही निशा थी.

में-आज का दिन ही खराब है अब ये मत बोलना कि तुम ने भी यहाँ अड्मिशन लिया है और अब तुम.....

निशा-हाँ मेने भी यहाँ अड्मिशन लिया है.तुम्हे तो काफ़ी चोट आई है चलो पहले डॉक्टर के पास चलते है उस के बाद जितने भी क्वेस्चन हो पूछ लेना पहले तुम डॉक्टर के पास चलो.

में-तुम टेन्षन ना लो अब तो आदत से पड़ गयी है अब तो दर्द भी अच्छा लगता है जैसे मेरे शरीर का ही कोई खास हिस्सा हो बिना उस

के मज़ा नही आता.पर फिर भी तुम मुझे यहाँ के स्पोर्ट्स टीचर के पास ले चलो में उन्हे जानता हूँ.

फिर में निशा के सहारे से जॅक(जॅक ने भी जाय्न कर लिया था ऐज आ स्पोर्ट्स टीचर)के पास चल दिया और कुछ ही देर में हम लोग उस के पास पहुँच गये.

जॅक-अब तुम को क्या हुआ अजय.

में-घूरते हुए वो क्या है ना कि मेरा पैर फिसल गया था बाथरूम में.

निशा में तुम को आधे घंटे में कॅंटीन में मिलता हूँ मुझे हमारे स्पोर्ट्स टीचर से कुछ ज़रूरी बात करनी है प्ल्ज़ तुम हम को अकेला छोड़ दो.
 
निशा-लगता है भलाई का तो जमाना ही नही है.

फिर वो वहाँ से चली गयी.

में-जॅक तुम थे वहाँ पे हाँ ना तुम चाहते तो ये सब रोक सकते थे मेने तुम्हे देखा था वहाँ पे.

जॅक-बिल्कुल था और शायद रोक भी लेता पर फिर मुझे तुम्हारी बात याद आ गयी कि तुम्हे मेरी हेल्प की ज़रूरत नही है इसलिए में आ

गया वहाँ से आख़िर में कैसे अपने एक्लोते स्टूडेंट को पिटते हुए देख सकता था.

में-तुम्हे जान से मार दूँगा जॅक अगर किसी दिन मुझे मोका मिला तो.

जॅक-हाँ ज़रूर पर तुम्हारे लिए एक गुड न्यूज़ है.

में-चलो कुछ तो अच्छा मिलेगा सुनने को बोलो.

जॅक-इस मार के बाद तुम्हे बहुत हेल्प मिलेगी तुम्हारी ट्रैनिंग में चलो तुम्हारे जख़्मो(चोट) पे नमक लगाते है .मेरा मतलब दवा लगाते है.

फिर जॅक ने मेरे ज़ख़्मों की ड्रेसिंग की और एक पेनकिलर दी जिसे मेने खा लिया .

आज शाम तक तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगे.

में-और घर पे क्या बोलना है वो भी बता दो .

जॅक-तुम बॉक्सिंग करते हो .

में-नही .

जॅक-आज से स्टार्ट कर दे और ये उसी का इनाम है .

में-समझ गया चलो में कॅंटीन में जा रहा हूँ अब तो दर्द भी ना के बराबर है तुम्हारी पेनकिलर तो कमाल की है.

(ये कमाल पेनकिलर का नही है ये उस चीज़ का कमाल है जो तुम्हारे अंदर है जो तुम्हे कोई भी दर्द ज़्यादा देर तक तुम्हारे पास नही रहने देता.तुम नही जानते उस की असली ताक़त को जिस दिन तुम ने उस की पूरी ताक़त को अपने काबू में कर लिया उस दिन दुनिया

तुम्हारे आगे छोटी होगी.तुम्हारे जख्म इंसानो से दस गुना तेज़ी से भर रहे है मतलब वो वक़्त करीब ही है जिस का मुझे इंतज़ार था)

मैं--कहाँ खो गये जॅक .दिन में सपने देखना अच्छी बात नही है.में कॅंटीन जा रहा हूँ घर पे सब को तुम्हे ही संभालना है और एक बात वो लड़की जो ग्राउंड में उन लड़को के साथ थी प्रिया उस की डीटेल चाहिए मुझे .

जॅक-में कोई तुम्हारा नोकर नही हूँ समझे जो हुकुम दे रहे हो.

में-जॅक जी आप तो बुरा मान गये यार में तो दोस्त के नाते बोल रहा था.तुम्हें बुरा लगा तो सॉरी .

जॅक-ठीक है पता करता हूँ चल जा यहाँ से अभी मुझे काम है.

में बाहर आ गया और कॅंटीन के तरफ चल दिया .

वहाँ जॅक के रूम में-मेरे बाहर आते ही जॅक ने रूम का गेट लॉक किया और विंडो के सभी पर्दे बंद किए पर्दे बंद करते ही वहाँ कमरे में

ना जाने कहाँ से एक साया सा उभर आया.

जॅक-अब तो आप ने देख लिया कि इसकी सील ज़्यादा दिनो तक नही टिक सकती और अब तो इसकी हिल्लिम पवर भी आक्टिव हो गयी

है जिस से इसके जख्म इंसानो से दस गुना तेज़ी से ठीक हो रहे है और अगर सब ऐसा ही चलता रहा तो हमारे पास ज़्यादा टाइम नही है.

साया-ऊह मेने सब देखा तुम इसके गार्जियन हो ये तुम्हारी ज़िम्मेदारी है तुम्हे इसे तैयार करना होगा.

जॅक-पर में इसकी बढ़ती हुई ताक़त का सामना ज़्यादा देर तक नही कर सकता मुझे मदद की ज़रूरत है आप को भी इस बात को समझना होगा.

साया-हमे पता है कब क्या करना है जल्द ही तुम्हारी मदद के लिए हम एक ए लेवेल के फाइटर को भेजेगे जो तुम्हारी मदद करेगा एक

बात याद रहे तुम्हे किसी भी कीमत पे इसे तैयार करना है.

जॅक-आप चिंता ना करे हमे कामयाब होने से कोई नही रोक सकता.

फिर जैसे साया आया था वैसे ही गायब हो गया.

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में जब कॅंटीन में पहुँचा तो निशा वही एक कोने की टेबल पे बैठी हुई थी और साथ में रघु भी था.

में-तो निशा तुमने मेरी मदद क्यूँ की जब कि वहाँ पे काफ़ी स्टूडेंट थे जो कि मेरी मदद कर सकते थे पर किसी ने भी नही की ऐसा क्यूँ.

निशा-तुम हमेशा से ही ऐसे हो पहले में तुम से माफी चाहती हूँ उस दिन माल वाली बात को ले कर सॉरी.

में-हूँ कोई नही चलो माफ़ किया.

निशा-वो समीर यहाँ के मिनिस्टर का बेटा है ये उस दिन मुझे पार्टी में पता चला तुम्हे याद है तुम्हारे दोस्त के अंकल की पार्टी थी असल में वो मेरी फ्रेंड अमृता के भी अंकल है तो में भी इन्वाइट थी और हम ने बात भी की थी पर मेरे चहरे पे मास्क था इसलिए तुम मुझे पहचान नही पाए.

में-अच्छा तो वो तुम थी में सारी रात सो नही सका ये सोच सोच के वो कौन थी तुम ने ये अच्छा नही किया.(जबकि ऐसा कुछ नही था जिन दोस्तो ने पार्टी वाला अपडेट पड़ा है वो समझ गये होगे)

निशा-सॉरी मुझे नही पता था कि तुम इतना परेशान होगे .

में-चलो छोड़ो तुम समीर के बारे में बता रही थी.

निशा-हाँ तो में उस को उसी पार्टी में मिली थी मिनिस्टर का बेटा होने की वजह से अपने आप को ज़्यादा स्मार्ट समझ रहा था तो मेने इसे काफ़ी सुनाया था.अमृता मेरी बेस्ट फ्रेंड है इसलिए मुझे अंकल की सपोर्ट भी है जब उसे पता चला तो वो कुछ नही कर सकता था क्यूँ

कि गुप्ता अंकल इस सिटी के उन चुनिंदा लोगो में से है जिन्होने सरकार की हमेशा मदद की है चाहे सरकार किसी की भी हो इसलिए

सभी उन का बहुत ही सम्मान करते है.फिर गुप्ता अंकल को पब्लिक का भी पूरा सपोर्ट रहता है.

में-तुम तो काफ़ी पवरफुल हो यार तुम से तो बच के रहना पड़ेगा.

निशा-हाँ वो तो है मेरे पास एक रास्ता है तुम मुझ से दोस्ती कर लो इस से तुम्हे मुझ से डरने की ज़रूरत नही रहे गी.

में-हाँ मज़ाक अच्छा था .तुमने ये नही बताया कि तुम ग्राउंड पे कैसे पहुँची.

निशा-में कोई मज़ाक नही कर रही मुझे सच में तुम से दोस्ती करनी है.और ग्राउंड पे तो में किसी को ढूँढते हुए पहुँच गयी थी.पर वो सब हुवा कैसे .

रघु-हाई में भी यही हूँ .में आप लोगो के बीच में आना तो नही चाहता पर क्या कोई कुछ मुझे भी बताएगा.

में-वो छोड़ ये बता कि तू था कहाँ तुझे बाइक पार्क करने में कितना टाइम लगता है.

रघु-भाई में जैसे ही बाइक पार्क के निकल रहा था मुझे कुछ सीनियर लड़को ने घेर लिया और मुझे वहीं मुर्गा बना दिया वो तो भला हो निशा जी का इन्होने आ के मुझे बचाया मुझे.फिर में तुझे ढूँढ ने लगा पर तू मिला ही नही मुझे काफ़ी चिंता हो रही थी में घर पे फोन करने ही वाला था की फिर निशा जी मिली और बताया की तू कुछ देर में कॅंटीन में आ जाएगा तब से तेरा वेट कर रहा हू .पर ये ग्राउंड का क्या मसला है.

में-बताता हूँ जा पहले तीन कॉफफी और कुछ खाने को ला फिर सब बताता हूँ.

रघु-ठीक है में अभी ले के आता हूँ फिर मुझे सारी बात जाननी है. और वो वहाँ से कॉफ़्फीे लेने के लिए चला गया.

में-ये तुम ने अच्छा किया जो इसे कुछ नही बताया थॅंक्स.

निशा-वो छोड़ो तुम मुझे बताओ कि ये सब क्या हुआ और कैसे हुआ.
 
मेने उसे अड्मिशन से ले आज तक की सारी रामायण सुना दी जिस को सुन के उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया मुझे नही पता क्यूँ पर वो उस वक़्त सच में बहुत गुस्से में लग रही थी ...........

निशा –में उन दोनो को जान से मार दूँगी तुम चलो अभी के अभी मेरे साथ .

में-झासी की रानी शांत हो जा सब काम टाइम पे ही होते है और तुझे क्यूँ इतना गुस्सा आता आ रहा है तू तो मुझे जानती भी नही,

निशा-क्यूँ अभी तो हमारी फ्रेंडशिप हुई ना इतनी जल्दी भूल गये.

में-सपने मत देख हमारी दोस्ती कब हुई और वैसे भी में ऐसे फ्रेंड नही बनाता जिस को अपने पैसे या रुतबे का गुरूर हो.

निशा-उस के लिए मेने सॉरी बोला तो अब क्या चाहते हो में बच्चो की तरह अपने कान पकड़ के सॉरी बोलू,

में-आइडिया अच्छा है चलो ट्राइ करते है.

निशा-तुम मज़ाक कर रहे हो हा ना.

में-में मज़ाक कम ही करता हूँ दोस्ती करनी है तो कान पकड़ के ही सॉरी बोलना पड़ेगा वो भी कॅंटीन के सेंटर में जा के ताकि सब देख सके.

निशा-प्ल्ज़ यार देखो ना कितने लोग है यहाँ.

में-इसलिए बोल रहा हूँ आगे तुम्हारी मर्ज़ी.

निशा-ओके पर कभी ना कभी मेरा मोका भी आएगा तब जो में बोलुगी तुम को भी करना होगा .

में-तब का तब देखते है अभी जो कहा है वो करो.

और सच में वो खड़ी हो गयी ये मेरे लिए एक और झटका था और वो सेंटर में जा के अपने कान पकड़ के सॉरी बोलने लगी .

में भी अपने टेबल से उठ गया और उस के पास जा के उस को गले लगा लिया .

में-वेलकम टू माइ वर्ल्ड.तुम्हे पता है मेने ये क्यूँ कहा कि तुम कॅंटीन के सेंटर में जा के ही सॉरी बोलोगि.

निशा-नही पर जो भी हो मुझे अब सच में अच्छा लग रहा है और मुझे माफ़ करने के लिए थॅंक्स आज से हम फ्रेंड्स .

में-बिल्कुल चलो बैठो में तुम्हे बताता हूँ कि मेने ऐसा क्यूँ किया.

फिर हम वापस अपने टेबल पे बैठ गये और तब तक रघु भी कॉफ़्फीे ले के आ गया.

रघु-भाई ये सब क्या हो रहा है .

में-आज से निशा भी हमारे फ्रेंड्स सर्कल में है.

राघ-ये तुमने अच्छा काम किया है में भी ये ही बोलने वाला था.

निशा-तुम कुछ बताने वाले थे .

में-बताता हूँ जल्दी क्या है.पहले बात तो ये कि तुम को ये सब को पता होना चाहिए कि इतनी खूबसूरत और सेक्सी लड़की मेरी फ्रेंड है.

निशा-अच्छा आज में खूबसूरत और उस दिन तो ..

में-उस दिन तुम पे गुरूर कुछ ज़्यादा ही था जिस ने तुम्हारी खूबसूरती को छुपा लिया था .पर आज तुम इस पूरे कॉलेज की सबसे

खूबसूरत लड़की लग रही हो.विश्वास ना हो तो देख लो सभी तुम्हे कैसे देख रहे है.

निशा-ज़्यादा तारीफ करने की ज़रूरत नही है.और दूसरी वजह ?

में-वो टाइम आने पे तुम को खुद ही पता चल जाएगी.

रघु-अब भाई मुझे भी कोई कुछ बता दे .

में-अबे कुछ खास नही बस मेने आज से बॉक्सिंग भी स्टार्ट की है और ये सब उसी का इनाम है बाकी की बाते घर पे बता दूँगा अभी कुछ और बात कर.

रघु-मेरे पास एक सॉकिंग न्यूज़ है तुझ को विश्वास नही होगा.

में-क्या ?

रघु-अपने जॅक यहाँ के स्पोर्ट्स टीचर है.

में-मुझे पता है में उन से मिल चुका हूँ और कुछ.

निशा-तुम दोनो जानते हो उन को .

में-हाँ थोड़ा बहुत.

हम लोग अभी बात ही कर रहे थे कि समीर और उस के फ्रेंड कॅंटीन में आ जाते है .समीर जब निशा को मेरे पास बैठा हुआ देखता है तो उस के होश उड़ जाते है और वो मुझे घूर्ने लगता है में उस को देख के निशा को एक बार कस के हग करता हूँ वो अपने टेबल से उठ के हमारी तरफ आने लगता है….

सॅम(यहाँ से में समीर का सॅम के नाम से इंट्रो करवाउंगा)-कुछ लोगो को बाते समझ में नही आती .

मेने उस की तरफ देखते हुए कहा .

में-पर कुछ लोग अपनी कही हुई बातो पे अटल रहते है क्यूँ निशा तुम क्या कहती हो.

निशा का इस टाइम गुस्से से बुरा हाल था ये बात कोई भी बता सकता था वो तो गनीमत थी कि मेने उस का हाथ पकड़ रखा था नही

तो शायद वो सॅम को थप्पड़ भी मार देती.

निशा-अजय इसको बोलो कि ये यहाँ से चला जाए नही तो.

सॅम-नही तो क्या .

रघु-देख भाई हमे यहाँ कोई लफडा नही चाहिए तू अपनी टेबल पे वापस क्यूँ नही चला जाता.

में-या मेरे पास एक और रास्ता है आज का मेरा अब तक का मेरी लाइफ का सबसे खराब दिन बीता है क्यूँ ना अब कुछ अच्छा किया

जाए और तुम को भी एक और मोका दिया जाए अपनी बात और ताक़त दिखाने का क्यू क्यँ बोलते हो.

सम-इतनी जल्दी भूल गये कि मेने तुम्हारे साथ क्या किया था और क्या कर सकता था.
 
में-एक बात अच्छी से जान ले कि तू ने कुछ नही किया वो में अपने ही बड़बोले पन में फस के प्रिया को वादा दे बैठा था और दूसरी बात

ये तेरी बदक़िस्मती है कि में तेरी उस खातिरदारी को भूल नही सकता जब तक में तुझे रिटर्न गिफ्ट ना दे दूं क्या बोलता है चले ग्राउंड पे.(और में भी अपने सीट से खड़ा हो गया)

रघु/निशा-ये क्या बेबकूफी है अजय .

में-अब क्या करूँ दोस्तो मुझे किसी का उधार रखने की आदत नही है जब तक में उस का कर्ज़ सूद समेत ना चुका दूं मुझे कही चैन मिलता ही नही है.

निशा-पर तुम्हारे जख्म अभी पूरी तरह ठीक नही है तुम ज़्यादा ज़ख्मी हो सकते हो और इसकी कोई ज़रूरत नही है ये कुछ नही कर सकता.

में-तुम लोग मेरी चिंता छोड़ो में ठीक हूँ और में चाहता हूँ कि सॅम को भी पूरा मोका मिले आख़िर उस की ग़लतफमी भी दूर हो जाए.

सॅम-तुझे बहुत ही गुरूर है अपने उपर चलो चलते है इस बार तुम को ऐसे नही छोड़ने वाला.

मेने रघु को जॅक के पास भेज दिया मदद के लिए .मुझे पता था कि वो नही आएगा पर रघु को इस सब से दूर रखने का यही तरीका था.
 
घने जंगल के बीचो बीच में दो लोग दो पत्थर पे आमने सामने वोगा आसान में बैठे थे.

(उन की ड्रेस भी बड़ी अजीब है ड्रेस के नाम पे इन लोगों ने ब्लॅक कलर वाले गाउन पहने है जिस से उन के शरीर से सिर्फ़ हाथ की उंगलिया ही दिख रही है और चहरे पे बड़े ही अजीब तरह का मास्क है जिस पे गोल्डन कलर्स के फ्लवर्स जो कि उस की पूरी ड्रेस पे एक सही दूरी पे बने हुए थे.)

अभी इन लोगों को ऐसे बैठे हुए कोई दो मिंट ही हुए थे कि उन के आस पास से ज़मीन से एक अजीब सी रोशनी निकलती है उन दोनो को कवर कर लेती है.और एक शील्ड तैयार करती है .

तुम दोनो लेट हो तुम्हे पता होना चाहिए कि यहाँ इस मिट्टिंग में टाइम पे आना कितना ज़रूरी है .

(किसी गुफा में जहाँ कुछ अजीब तरह की कुछ मूर्तियाँ थी जिस के उपर एक आदमी के खड़े होने की जगह थी जहाँ टोटल 8मूर्तिया थी

जिन पे पहले से ही 4 लोग खड़े थे और इन दोनो के आ जाने से वहाँ पे टोटल 6 हो गये.)

तुम लोगो ने ये मिट्टिंग तो बुला ली पर अगर वह दमदार ना हुई तो तुम दोनो के लिए अच्छा नही होगा उन में से सबसे पहली मूर्ति पे खड़े शक्स ने कहा.(यहाँ एक बात बता दूं कि यहाँ मजूद सभी लोगो की ड्रेस लगभग सेम थी बस उन की ड्रेस पे फ्लवर की तादाद कम या

ज़्यादा थी जो इस बात को साबित करती थी कि पोज़ीशन क्या है जिस के ड्रेस पे ज़्यादा फ्लवर वो उतना ही पवरफुल होता है .यहाँ में

सब को नंबर से ही इंट्रो करवाउंगा सिर्फ़ उन दोनो को छोड़ के)

पहला-हमे पता है कि हम ने क्या किया है.विश्वास करे ये मीटिंग बहुत ज़रूरी थी.मुझे खबर मिली है कि वो लोग अजय को ट्रैनिंग दे रहे है.

दूसरा-और पिछले एक वीक के अंदर उन्होने मेरे 4 आदमियों को मार दिया जो कि सी+लेवेल के फाइटर थे और ये कोई अच्छी बात नही है.

1-तुम दोनो के कहने का मतलब क्या है.

पहला-यही कि जब हमारे पास मोका था हमे उस बच्चे को मार देना था.

2-तुम जानते हो कि ये हम नही कर सकते क्यूँ कि हमे उस की ताक़त की ज़रूरत है.

दूसरा-बिल्कुल है पर अब हम उस के आस पास भी जा सकते उन्होने स्पेशल फाइटर की दो टीम्स को उस की सुरक्षा के लिए बुलाया है और जल्द ही वो उन्हे जाय्न कर लेगे .या तो हमे अभी हमला करना होगा या कभी नही.

3-हूँ हमे वो किसी भी कीमत पे चाहिए पर अभी वो हमारे किसी काम का नही है .इसलिए अभी उस से दूर रहना ही अच्छा है और

हमे अपनी ताक़त बढ़ानी चाहिए बिना किसी को पता लगे.

1-तो तय रहा कि सभी अपनी टीम से एक बी+लेवेल का फाइटर देगा और उन की एक टीम बनाए जाए और उसी जल्द ही इंडिया के लिए भेजा जाए.

4-कोई हमे ढूँढने की कोशिश कर रहा है और वो काफ़ी ताकतवर है में उसे ज़्यादा देर तक नहीं रोक पाउन्गा हमे अब मिट्टिंग ख़तम करने होगी जल्दी. फिर सभी वही खड़े खड़े धुँआ बन के गायब होने लगे और 1मिनट से भी कम समय में सब वहाँ से जा चुके थे. फिर कुछ ही देर में उन दोनो के पास की रोशनी कम होती है और जल्द ही ख़तम हो जाती है फिर दोनो अपनी सीट से खड़े होते है और एक दूसरे को देख के अपना सिर हिलाते है और दोनो अलग अलग दिशा में चले जाते है................

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यहाँ कॉलेज में एक बार फिर सब ग्राउंड पे थे बस इंतज़ार था तो किसी आक्षन का..........

सॅम-तेरे पास लास्ट चान्स है माफी माँग और निकल ले यहाँ से.

में-(अपने शरीर को झटकते हुए जैसे कि कोई बहुत बड़ा बोझ उतार रहा हूँ) आज लाइफ में पहली बार तो अपने आप को टेस्ट करने का मोका है .चलो देर मत करो और सुरू कर.

मेरा इतना ही कहना था कि सम ने अपने दोस्तो में से एक को इशारा किया और वो मेरी तरफ आने लगा .

में-यार इतना टाइम नही है मेरे पास ये बोलते हुए उस के दोस्त की तरफ दौड़ लगा दी और वो कुछ समझ पाए उस से पहले ही अपने सिर से एक जोरदार टक्कर दे मारी वो वही अपना सिर ले के बैठ गया और फिर नही उठ पाया .पर मेरी भी हालत कुछ अच्छी नही थी

सिर बिल्कुल घूम गया था में ऐसे झूम रहा था की जैसे किसी ने पूरा ड्रम भर के वाइन पिला दी हो.
 
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