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Guest
माँ ने पल्लू ठीक किया तब मुझे पता चला की माँ ने मेरी चोर नज़र को पकड़ लिया था फिर में माँ से नज़र नहीं मिला पाया. पर माँ के फेस पे फिर से नॉटी स्माइल आ गयी. पर मैंने फिर हिम्मत और शुरुआत करते हुए माँ के गाल पे अपने दोनों हाथ रक्खे और माँ के फेस को पकड़ के अपने लंड से चिपका दिया. माँ को पता नहीं था की में ऐसा करूंगा, पहले अपने आप ही उनकी और से थोड़ी सी झिझक हुई पर फिर माँ संभल गयी और वो भी मेरे पैंट से चिपक गयी.
मुझे भी पता नहीं कैसे मैंने माँ को अपने से लगा लिया. पर जैसे भी हुआ पर शुरुआत तो हुई. फिर माँ को मैंने छोड़ दिया और उन्हें अपने आप करने दिया. मम्मी भी ऐसे ही ऊपर से मेरे लंड को जगाने की कोशिश कर रही थी. फिर माँ ने मेरे पैंट की ज़िप खोली और दोनों साइड से पकड़ के निचे कर दि, फिर माँ ने ऐसे ही अंडरवेअर पर से मेरे लंड को पकड़ा और उसे ऐसे ही दो चार बार टटोला और उससे खेलने लगी. फिर माँ ने मेरी और देखा और कहा
"अच्छा लग रहा हे...?
"हा..मोम, बड़ा अच्छा लग रहा हे..!
"रेशु..पता नहीं में ये सब क्यों कर रही हू, सच में मेरी समझ में नहीं रहा ..?
माँ ने एक बार फिर से अपना कन्फ्यूजन दिखाई पर मेरे लंड को मसलना नहीं छोडा. मैंने इस बात पे कुछ कहा नहीं और फिर माँ भी निचे देख के अपने में मस्त हो गयी. मैंने माँ के शोल्डर पे हाथ रख दिया और ऐसे रक्खे के दोनों हाथों के अँगूठे माँ के क्लीवेज पे आ जाये और मैंने दबाव भी डाला अब मेरा लंड कड़क होने लगा था इसीलिए माँ ने मेरा अंडरवेअर भी धीरे धीरे उतार दिया और मेरे लंड को आज़ाद कर दिया. मेरा लंड अब माँ के सामने था..मोम ने उसपे मस्त प्यार से हाथ फेरा..और ऐसे एक दो बार हाथ फेर के सहलाया और फिर मेरी और एक बार देखा..फिर मैंने अपने लंड को पकड़ा और माँ के पास ले गया और माँ के होटो के आसपास लंड टच कर के घुमाने लगा..आँखोँ से लेकर, सर पे गालों पे, माँ अपने मुँह में लेने के लिए मेरे लंड का पीछा करती थी पर मैंने माँ को इतनी जल्दी लंड दिया नहीं और माँ ने फिर ट्राय करना बंद कर दिया , मेरा लंड अब ८०% जाग चुक्का था फिर माँ ऐसे बैठ गयी और मैंने फिर अपना लंड माँ के नाक के पास ले के माँ को सुँघाया और माँ ने भी मन भर के सूँघा और फिर धीरे से कब मेरे हाथ से लंड अपने हाथ में ले लिया पता ही नहीं चला..और में देखता ही रह..फिर माँ ने भी मेरी और मुस्कुरा के देखा और लंड को पकड़ के अपने नाक से ले के अपनी चिन और गले के पास भी घुमाय और में सोच रहा था की काश माँ इसे अपने बॉब्स तक जाये, पर माँ ने फिर उसे अपने मुँह में दाल दिया..और मस्त आगे पीछे हो के चूसने लगी, अब माँ मेरी और नहीं देख रही थी, अब वो मस्त थी और चाहती थी की में या कोई भी उन्हें डिस्टर्ब न करे,,धीरे धीरे माँ स्पीड में आगे पीछे हो के चूसने लागी और बीच बीच में अपनी जीभ पूरे लंड पे फेर लेती थी, एक दो बार मेरे बॉल्स को दबाया भी. माँ चूस तो मस्त रही थी पर पूरा मुँह में लंड नहीं ले रही थी. मेरा लंड तो अब कड़क हो के रॉड बन गया था,
कुछ देर ऐसे चूसने के बाद माँ मेरे लंड से वीर्य निकलने के लिए उसे मुँह से निकाल दिया और अपने हाथ से जोर से स्ट्रोक्स देणे लगी, तो मैंने कहा
"माँ एक मीनट...!
और माँ रुक गयी और मैंने फिर से अपने लंड को पकड़ के माँ के मुँह में डाला. माँ तो मुझे बस देख ही रही थी और फिर मैंने माँ के दोनों गालो को मस्त पकड़ा और अपने लंड से माँ के मुँह में धीरे से लंड अंदर बाहर कर रहा था एक दो बार माँ की तरह आधा लंड डाला. माँ मेरी और देख के मुस्कुरा रही थी, उन्हें मस्त लग रहा था फिर मैंने झटके से पूरा लंड माँ के मुँह में डाल दिया और माँ के सर को पकड़ के अपने लंड से चिपका दिया और माँ तो शॉक ही हो गयी, मैंने माँ को छोडा नही. माँ की चिन मेरे दोनों बॉल्स से चिपकी हुई थी. मैंने कुछ देर तक छोड़ा नहीं तो माँ ने जोर से मेरे गांड पे दोनों हाथों से मारा और मैंने माँ को छोड़ दिया. फिर माँ ने ग़ुस्से में मेरी और देखा और इतने में माँ का पल्लू फिर से सरक गया था और पूरा क्लीवेज दिख रहा था पर माँ को ग़ुस्से में ध्यान नहीं था पर मैंने फिर माँ को फिर से पकड़ा और अब इस बार मैंने माँ के मुँह में लंड डाल के चोदने लगा.
मुझे भी पता नहीं कैसे मैंने माँ को अपने से लगा लिया. पर जैसे भी हुआ पर शुरुआत तो हुई. फिर माँ को मैंने छोड़ दिया और उन्हें अपने आप करने दिया. मम्मी भी ऐसे ही ऊपर से मेरे लंड को जगाने की कोशिश कर रही थी. फिर माँ ने मेरे पैंट की ज़िप खोली और दोनों साइड से पकड़ के निचे कर दि, फिर माँ ने ऐसे ही अंडरवेअर पर से मेरे लंड को पकड़ा और उसे ऐसे ही दो चार बार टटोला और उससे खेलने लगी. फिर माँ ने मेरी और देखा और कहा
"अच्छा लग रहा हे...?
"हा..मोम, बड़ा अच्छा लग रहा हे..!
"रेशु..पता नहीं में ये सब क्यों कर रही हू, सच में मेरी समझ में नहीं रहा ..?
माँ ने एक बार फिर से अपना कन्फ्यूजन दिखाई पर मेरे लंड को मसलना नहीं छोडा. मैंने इस बात पे कुछ कहा नहीं और फिर माँ भी निचे देख के अपने में मस्त हो गयी. मैंने माँ के शोल्डर पे हाथ रख दिया और ऐसे रक्खे के दोनों हाथों के अँगूठे माँ के क्लीवेज पे आ जाये और मैंने दबाव भी डाला अब मेरा लंड कड़क होने लगा था इसीलिए माँ ने मेरा अंडरवेअर भी धीरे धीरे उतार दिया और मेरे लंड को आज़ाद कर दिया. मेरा लंड अब माँ के सामने था..मोम ने उसपे मस्त प्यार से हाथ फेरा..और ऐसे एक दो बार हाथ फेर के सहलाया और फिर मेरी और एक बार देखा..फिर मैंने अपने लंड को पकड़ा और माँ के पास ले गया और माँ के होटो के आसपास लंड टच कर के घुमाने लगा..आँखोँ से लेकर, सर पे गालों पे, माँ अपने मुँह में लेने के लिए मेरे लंड का पीछा करती थी पर मैंने माँ को इतनी जल्दी लंड दिया नहीं और माँ ने फिर ट्राय करना बंद कर दिया , मेरा लंड अब ८०% जाग चुक्का था फिर माँ ऐसे बैठ गयी और मैंने फिर अपना लंड माँ के नाक के पास ले के माँ को सुँघाया और माँ ने भी मन भर के सूँघा और फिर धीरे से कब मेरे हाथ से लंड अपने हाथ में ले लिया पता ही नहीं चला..और में देखता ही रह..फिर माँ ने भी मेरी और मुस्कुरा के देखा और लंड को पकड़ के अपने नाक से ले के अपनी चिन और गले के पास भी घुमाय और में सोच रहा था की काश माँ इसे अपने बॉब्स तक जाये, पर माँ ने फिर उसे अपने मुँह में दाल दिया..और मस्त आगे पीछे हो के चूसने लगी, अब माँ मेरी और नहीं देख रही थी, अब वो मस्त थी और चाहती थी की में या कोई भी उन्हें डिस्टर्ब न करे,,धीरे धीरे माँ स्पीड में आगे पीछे हो के चूसने लागी और बीच बीच में अपनी जीभ पूरे लंड पे फेर लेती थी, एक दो बार मेरे बॉल्स को दबाया भी. माँ चूस तो मस्त रही थी पर पूरा मुँह में लंड नहीं ले रही थी. मेरा लंड तो अब कड़क हो के रॉड बन गया था,
कुछ देर ऐसे चूसने के बाद माँ मेरे लंड से वीर्य निकलने के लिए उसे मुँह से निकाल दिया और अपने हाथ से जोर से स्ट्रोक्स देणे लगी, तो मैंने कहा
"माँ एक मीनट...!
और माँ रुक गयी और मैंने फिर से अपने लंड को पकड़ के माँ के मुँह में डाला. माँ तो मुझे बस देख ही रही थी और फिर मैंने माँ के दोनों गालो को मस्त पकड़ा और अपने लंड से माँ के मुँह में धीरे से लंड अंदर बाहर कर रहा था एक दो बार माँ की तरह आधा लंड डाला. माँ मेरी और देख के मुस्कुरा रही थी, उन्हें मस्त लग रहा था फिर मैंने झटके से पूरा लंड माँ के मुँह में डाल दिया और माँ के सर को पकड़ के अपने लंड से चिपका दिया और माँ तो शॉक ही हो गयी, मैंने माँ को छोडा नही. माँ की चिन मेरे दोनों बॉल्स से चिपकी हुई थी. मैंने कुछ देर तक छोड़ा नहीं तो माँ ने जोर से मेरे गांड पे दोनों हाथों से मारा और मैंने माँ को छोड़ दिया. फिर माँ ने ग़ुस्से में मेरी और देखा और इतने में माँ का पल्लू फिर से सरक गया था और पूरा क्लीवेज दिख रहा था पर माँ को ग़ुस्से में ध्यान नहीं था पर मैंने फिर माँ को फिर से पकड़ा और अब इस बार मैंने माँ के मुँह में लंड डाल के चोदने लगा.