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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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चाची भी मेरी इस हरकत से थोड़ी सी हैरान हो गयी..और में चाची की फिंगर से चाची की चुत को चोदने लगा..और फिर चाची समझ गयी तो मैंने उनका हाथ छोड़ दिया और में उठा और चाची के मुँह में अपनी मिडिल फिंगर डाली और चाची ने भी मेरी ऊंगली को अपने मस्त सलीवा से गीला कर दिया. चाची मेरी ऊँगली चूसने में और अपनी चुत को सेहलाने में मस्त हो गयी थी, वो मेरी ऊंगली नहीं छोड़ रही थी, पर मैंने उनके मुँह से ऊंगली निकली और फिर चाची के एसहोल के पास आ गया और चाची की गांड के छेद को दुसरे हाथ से हल्का सा चौड़ा किया और अपनी ऊँगली उसमे दाल दी. जैसे ही मैंने चाची के गांड के छेद को चौड़ा करने के लिए छुआ तभी चाची समझ गयी की में क्या करने जा रहा हू..तो चाची मुझे रोकने को उठने गयी पर मैंने झट से ऊंगली दाल दी और चाची इससे पहले कुछ कहे..मैने उन्हें शांत रहने का इशारा किया और फिर से वो लेट गयी..और फिर चाची की चुत में से उनकी ऊंगली निकल के मैंने चाची की ऊँगली को अपने मुँह में फिर से लिया और चाची की ऊंगली को चाटा और मस्त चूसा भी, फिर अपने सलीवा से मैंने चाची की ऊंगली को भर के फिर से चाची की चुत में डाल दिया और चाची को सहलाने को कहा..और इधर मैंने धीरे धीरे चाची की गांड में अपनी ऊँगली अंदर बाहर करने लगा..पहले तो चाची को दर्द नहीं हुआ..पर कुछ देर बाद जैसे ही चाची की गांड में मैंने ऊंगली को थोड़ा स्पीड में अंदर बाहर करना शुरू किया..की चाची मचलने लगी..उनकी साँसे बड़ी तेज़ हो गयी..और वो रररस्सस्स्स्ससरेरेशू..प्लीज..स्टॉप बोल के सेंटेंस भी पुरा नहीं कर पायी.और इधर मैंने चाची की हालत देख के मैंने और भी स्पीड बढा दी और चाची तड़प के मरे और भी जोर से चिल्लने लागी..पर अभी वो रररस्सस्स्स्ससरेरेशू ही बोल पायी. फिर तो चाची ने चिल्लाना छोड़ दिया और वो बस मेरी शरण में हो ऐसे बस एन्जॉय कर रही थी, और एक वक़्त तो जितना स्पीड में में चाची की गांड में अपनी ऊँगली अंदर बाहर कर रहा था उससे भी तेज़ चाची अपनी ऊँगली अपनी चुत में अंदर बाहर कर रही थी.और उनकी स्पीड से पता चल रहा था की अब वो झाड़नेवाली हे.बॉस बड़ा अच्छा लग रहा था.फर थोड़ी देर बाद चाची ने अपनी ऊँगली अंदर हिलाना बंद कर दिया और एक दो सेकंड के लिए अपनी ऊँगली अंदर दाल के रुक गयी..मैने सोचा की अब वो झाड़नेवाली हे..पर वो फिर से ऊंगली अंदर बाहर करने लगी और फिर एकदम से ऊंगली बाहर निकल के मुझे चुत को चटने को कहा और जैसे ही मैंने चुत के पास मुँह रक्खा की चाची ने जोरदार दम लगा के स्क्वीरट किया..और झड गयी.

मास्त फव्वारे की झड़ी सी लग गयी, चाची ने एक एक कर के काम से काम ५ बार स्क्वीरट किया. मैंने अपने चेहरे से साफ़ किया और चाची अब चैन से लेटी थी. मैं उनके पास जा के बैठा..उन्होंने अपना सर मेरे गोद में रख दिया और में उन्हें सहलाने लगा..चाचि अब टोटली शांत हो गयी थी. पता नहीं मुझे इस हाल में भी अच्छा लग रहा था चाची मेरे गोद में वो भी स्क्वीरट करने के बाद फुल्ली नुड..मेरा लंड अभी भी तना हुआ था फिर कुछ देर बाद चाची को होश आया की में तो झडा ही नही..तो उन्होंने अपने आप मेरे बिना कोई फाॅर्स किये, और न ही बिना कोई हिंट दिये..अपना सर मेरे लंड के पास लाया और मैंने अपने पैर खोल दिया..और वो निचे आ के मेरे लंड को चूसने लगी. और वो तो हैंडजॉब इतनी अच्छे से कर रही थी, मुझे मज़ा आ रहा था मेरा लंड अब मस्त तन चुक्का था.चाचि भी मस्त अपने मुँह में डाल के अपनी जीभ से मेरे लंड से खेले जा रही थी..कुछ देर बाद मुझे लगा की अब जोर करने पे लंड से वीर्य निकल जायेगा तो मैंने चाची को रोक दिया.और मुस्कुरा के कहा

रेशु- "चाची..इतने जल्दी नही..अभी तो मज़ा बाकि हे...!

और चाची सरप्राइज हो के बैठ गयी और कहा..

चाची- "ओह गॉड नही..प्लीज रेशु, अब और नही, में थक गयी हू, और बाहर से भी में थक के आई थी, पता नहीं कैसे तुम ने ये सब स्टार्ट कर दिया..."!

और चाची मना करने लगी.

कहानी जारी रहेगी
 
मैं आप सब से माफी मांगता हूं देरी के लिए मेरे कुछ व्यक्तिगत कारण है जिसकी वजह से मैं अपडेट जल्दी जल्दी नही दे पा रहा पर जल्द ही मैं रेगुलर अपडेट देना शुरू कर दूंगा बस साथ बने रहीये,"होली की आप सब को बहुत शुभ कामनाएं".....सतीश
 
चाची निचे आ के मेरे लंड को चूसने लगी. और वो तो हैंडजॉब इतनी अच्छे से कर रही थी, मुझे मज़ा आ रहा था मेरा लंड अब मस्त तन चुक्का था.चाचि भी मस्त अपने मुँह में डाल के अपनी जीभ से मेरे लंड से खेले जा रही थी..कुछ देर बाद मुझे लगा की अब जोर करने पे लंड से वीर्य निकल जायेगा तो मैंने चाची को रोक दिया.और मुस्कुरा के कहा

रेशु- "चाची..इतने जल्दी नही..अभी तो मज़ा बाकि हे...!

और चाची सरप्राइज हो के बैठ गयी और कहा..

चाची- "ओह गॉड नही..प्लीज रेशु, अब और नही, में थक गयी हू, और बाहर से भी में थक के आई थी, पता नहीं कैसे तुम ने ये सब स्टार्ट कर दिया..."!

और चाची मना करने लगी.

मैने चाची को पकड़ा और चाची को डॉगी स्टाइल में बैठने को कहा और चाची ने ना चाहते हुये मेरे खातिर ऐसे बैठ गयी, और मैंने चाची की चुत पे अपना लंड आराम से ऊपर से निचे तक घिसा और चाची की चुत में लंड डाल दिया और चाची की गांड को पकड़ के मस्त धक्के लगाने लगा..चाचि को पहले तो असर नहीं हो रहा था क्यूँकि वो अभी अभी झड़ी थी, पर जैसे ही मेरे धक्को की स्पीड बढ़ती गयी, और मेरी साँसे बढ़ती गयी, चाची फिर से रंग में आने लगी थी. मेरे पूरे बदन से पसीना बह रहा था चाची भी अब

"आहमंम ऊऊओह्ह्ह ऊऊह्ह्ह"

कर के आहें भर रही थी. मैंने फिर चाची को तक़रीबन ऐसे १५ मिनट तक चोदने के बाद मैंने लंड को बाहर निकला और चाची को लगा की में अब थक गया हूँ तो वो उठने जा रही थी पर मैंने चाची को पकड़ के रक्खा और अपने लंड को चाची की गांड के छेद पे रखा. पता था की चाची ना कहेगी पर मैंने चाची को कहा..

"प्लीज चाची, मज़ा आयेगा"

और बिना उनकी परवाह किये हुए मैंने चाची की गांड में अपने लंड से प्रेशर करने लगा, चाची की गांड में मेरा पिंक पार्ट आराम से चला गया पर मेरा लंड नहीं जा रहा था फिर मैंने जोर से चाची की गांड को दोनों हाथ से दम लगा के चौड़ा किया और लंड अंदर डालने लगा. "ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह..."

चाचि के मूँह से जोरदार चीख़ निकल गयी और चाची जैसे जली हो ऐसे फ़ूंक मारने लगी,पर मैंने उन्हें नहीं छोडा..और अंदर डालने के चक्कर में मेरा लंड चाची की गांड में आधा हो चुक्का था और थोड़ा सा प्रेशर डाला तो और भी थोड़ा सा लंड अंदर चला गया, पर अभी भी तक़रीबन आधा बाकि था.पर मैंने ऐसे ही चाची को चोदना ठीक समझा..

"चाची..!!

"क्या....!!

चाची को मुझ पे बड़ा गुस्सा आ रहा था.

"प्लीज थोड़ी देर सह लो, फिर आपको भी मज़ा आयेगा.. चाची ने "ऊऊह्ह्हूऊऊयःहःहःहन" करते कहा

"पता नहीं और कितनी कैपेसिटी हे तेरि....!!

और में चाची की गांड को हलके हलके से धक्का मारने लगा, और ये भी ध्यान रखने लगा की चाची की गांड से लंड बाहर न निकल जाए..इसीलिये मैंने चाची को हल्का सा ऊपर भी उठा लिया..और चाची ऊपर आते ही मेरा लंड और भी अंदर जाने लगा..और चाची को मेरे हलके स्टोक्स से भी जलन होने लगी..पर वो आँखें बंद कर के फ़ूंक मारती रही और दर्द सहती रही..ऐसे तक़रीबन १०-१२ स्ट्रोक्स में मेरा पूरा ९ इंच लंड चाची की गांड में चला गया..और फिर में रूक गया..और चाची को ले के बेड पे गिरपडा थोड़ी देर ऐसे ही रहने के बाद मैंने चाची की चुत के निचे तकिया रख दिए और चाची की गांड को चोदने लगा..चाचि समझ गयी की बिलकुल हलके स्ट्रोक से उनका बुरा हाल हो गया था तो अभी पता नहीं क्या होनेवाला था.

"रेशु..प्लीज धीरे धीरे करना...!!

और मैंने चाची की गांड को चौड़ा कर के चोदने लगा, शुरू शुरू में हलके स्ट्रोक के बाद मैंने चाची की गांड में अपने लंड से फायर करना स्टार्ट किया और चाची के मुँह से तो अब सिसकारियाँ बंद होने का नाम नहीं ले रही थी, बॉस वो अब तडप के मारे अपने हाथ बेड पे पछाडने लगी और बार बार..रेशु स्टोप,स्टॉप कहने लगी पर मैंने चाची को चोदने की स्पीड और भी बढा दी और चाची की तड़प बढ्ने लगी, आह एक दम कसी हुई चमड़ी में लंड डालने का मज़ा ही और है. मैं अब जैसे की चाची की चुत को चोद रहा हूँ ऐसे चाची को चोद रहा था और कुछ देर बाद मैंने नोटिस किया तो चाची की आहें अब बंद हो गयी थी..और वो अब तड़प की बजाय अब एन्जॉय कर रही थी..हालाँकि उनकी गांड के पास लाल लाल हो गया था पर अब वो ठीक से एन्जॉय कर रही थी, और फिर मैंने फिर से एक बार चाची का हाथ पकड़ा और चाची के हाथ से ही उनके जी-स्पॉट को मसलने लगा और चाची भी अब खुद ही अपने जी-स्पॉट को रगड़ने लगी और मैंने भी अपने स्ट्रोक की स्पीड बढा दी थी, में अब बुरी तरह से लंड से पिचकारियां मारनेवाला था मैंने चाची की गांड में ही अपने लंड से चोदते चोदते ही फायर कर दिया और चाची की गांड को वीर्य से भर दिया..
 
चाचि अब तक जी-स्पॉट को मसल रही थी और मैंने सोचा था की अब तक चाची फिर से झड़ा जायेगी, पर वो अब भी मसल रही थी तो मैंने चाची के हाथ को हटाया और चाची के जी-स्पॉट को अपने लिप्स से बस एक बार प्यार से हलके से चूमा और चाची भी झड गयी...आह चाची इस बार भी बहुत झड़ी थी. मैं फिर चाची के पास लेट गया और चाची मुझे अपनी बाँहों में लेके मुझे चूमति रही और में और चाची सो गये. शाम को ६.३० को में उठा..चाचि किचन में थी, और डिनर प्रेपर कर रही थी, में फ्रेश हो के बाहर आया, तब चाची ड्राइंग रूम में बैठी थी और सब्जी काट रही थी. मैं उनके पास जा के बैठा और चाची के गाल पे किस किया और उनसे सट के बैठकर कहा

"चाची..मज़ा आ गया..आपको अच्छा लगा... .?

"हाँ भी और नहीं भी...!

"क्यूं...?

"बहोत दिनों के बाद ऐसे मस्ती से सेक्स किया हे..पर सच में तुमने मेरी गांड की हालत बिगाड के रख दी हे, ठीक से चला भी नहीं जा रहा... और फिर वो भी और में भी मुस्कुरा बैठे. फिर कुछ देर बाद चाची ने कहा

"रेशु..एक बात पुछू.?

मैंने ऑफ़ कोर्स हाँ में सर हिलाया और चाची ने पूछ

"अभी माँ के साथ कुछ तो नहीं किया ना...?

में जानता था की चाची मेरे मन की बात समझती हे, और वो ये सवाल पुछेगी और झूठ बोलूँगा तो तुरंत पकड़ लेगी..

"नहीं चाची..कुछ भी नहीं हुआ..."

"रेशु..प्लीज उसे कुछ मत करना..तेरी माँ सच में बड़ी प्यारी है, बहुत चाहती हे हम सब को..तूझे जो भी करना हे, मेरे साथ कर, प्लीज उससे ये सब गलत काम मत कर..."! चाची और माँ बड़ी अच्छी सहेलियां थी, और माँ के लिए उन्हें बड़ी फ़िक्र थी.

"चाची प्लीज डोंट वरी..में कुछ गलत नहीं करूंगा..मोम के लिए मेरे दिल में भी बड़ी इज्जत हे..पर क्या करू माँ को देखता हू, तो दिल बहक जाता हे....!!

फिर चाची ने सब्ज़ियाँ छोड़ि और मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और कहा..

"रेशु..प्लीज मेरी एडवाइस मान तो तेरी माँ के बारे में सोच ही मत,पता नही, तू कोई ऐसी वैसे हरकत करेंगा..तो वो शायद हर्ट हो जायेगी..इतने सालो से में उसे जानती हू, उसने कभी मुझे अपनी सेक्सलाइफ़ के बारे में बताया ही नहीं.वो हर्ट हो गयी तो माँ-बेटे के रिश्ते में खोट आ जायेगी...."!!

चाची माँ के बारे में ना सोचने के लिए मना रही थी..और माँ कसम खा के कहता हूं..में उसी वक़्त माँ को चोद रहा हूँ ऐसा सोच रहा था,

सॉरी बट दैट्स ट्रू.....

फिर चाची ने टॉपिक चेंज करते हुए कहा..

'रेशु..पढ़ई तो ठीक हे ना, कहीं इन सब में तुम अपना करियर तो नहीं बिगड रहे..' फ्रेंड्स मैंने चाची को मेरी इतनी फ़िक्र करते पहले कभी नहीं देखा ..और सही मायनों में यह सब थैंक्स टू सैक्सससससस........

'चाचि..प्लीज डोंट वरी, एग्जाम पास आ रही है, मुझे भी पता हे, और मैं फुल्ली प्रेपरड़ भी हू..'

मैं रात को खाना खाकर ऊपर बने कमरे में सोने चला गया, रात को आठ बजे आंटी बालकनी आ गयी शायद कपड़े निकालने आई थी,वह कपड़े निकालने लगी मैं खिड़की में खड़ा था, उन्होंने एक बार मेरी तरफ देखा और कपड़े समेट करअन्दर चली गई, उन्होंने अपनी गैलरी का दरवाजा बंद कर लिया,

मैंने जान लिया कि आज आंटी अकेली है और मैं समय खराब कर रहा हूँ, लेकिन क्या करूँ? ऐसे ही सोचते सोचते लंड को शॉर्ट से बाहर निकाल हिलाने लगा, बहोत दिनों से चुदाई नही की थी,चाची के पीरियड चालू थे,

मैंने फिर से खिड़की को खोल लिया था और उसी के कमरे की तरफ देखता हुआ लंड हिला रहा था, इस वक्त अँधेरा सा हो गया था, सिर्फ मेरे कमरे की बत्ती जल रही थी,

थोड़ी देर में उनका दरवाजा खुला, शायद वो पाणी पीने जा रही थी, अब उसे देख कर मैंने लंड हिलाने की स्पीड बढ़ा दी,

उन्होंने मुझे देख कर हाथ हिलाया कि क्या हुआ, मैंने गर्दन हिलायी- कुछ नहीं,

वो मुझे लंड हिलाते हुए देख रही थी, मेरा लंड तो उन्हे नहीं दिख रहा होगा, पर मेरा हाथ मुठ मारने के कारण आगे पीछे हो रहा था, जिससे उन्हें कुछ समझ आ गया होगा,

अब इस वक्त लंड पूरे उफान पर था, तो मेरा डर भी गायब हो गया था, वह समझ चुकी थी कि मैं उनको देख कर लंड हिला रहा था, इस पर हल्के से मुस्कुरा दी, उनको मुस्कुराते देखा तो मैंने इशारा किया कि तुम्हारे पास आ जाऊँ,

इस पर उन्होंने मुझे चांटा दिखाया और वापस कमरे में चली गई, मैं डर गया और लंड अंदर कर अन्दर जाकर लेट गया, अब मैं कल के बारे में सोच कर डर रहा था, मुझे लगा था कि मैं आंटी को अपना लंड दिखाकर सिड्यूस करूँगा पर यहा तो खेल ही दूसरा था अब मुझे नही पता कि उनपर कोई असर हुआ कि नही या फिर वापस चाची को मेरी शिकायत करती है ,पर मैंने जब उनकी ब्लू फिल्म की सीडी जो डीवीडी प्लेयर में फंसी थी वह निकाल कर दी थी और उनको किस भी किया था तो मुझे लगा कि वह मेरे साथ सेक्स को राजी होंगी पर बीच मे मैं मोम से मिलने गया था तो शायद उन्हें सोचने को वक्त मिला होगा, और वह अब मेरे साथ रिश्ता ना बनाना चाहती हो, मुझे फिर से शुरुआत करनी पड़ेगी, फिर मैं ये सोचते हुए सो गया कि जो होगा सो देखा जाएगा,
 
सुबह उठकर मैं कॉलेज गया, दोपहर को मैं वापस आया तो देखा आंटी चाची के पास बैठी थी, उन्हे देख कर मेरी गांड फटकर हाथ में आ गई,

रेशु- “चाची, मुझे बाहर जाना है, मेरा खाना लगा दो”

चाची- “कोई बात हो गई क्या … जो इतनी जल्दी जाने को कह रहा है”?

रेशु- “नहीं कोई बात नहीं हुई … बस काम है मुझे”,

चाची- “ठीक है तुम नहा लो, तब तक खाना लगा देती हूँ”,

चाची उठकर रसोई में चली गई, तो आंटी भी उठकर जाने को हो गई,

मैं नहाने जाने लगा,

आंटी- “क्या हुआ, जो इतनी जल्दी जा रहे हो और रात को क्या इशारा कर रहे थे”?

इतना सुनते ही मैं सुन्न हो गया,

आंटी- “मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी … डरो मत और ज्यादा स्मार्ट मत बनो … सारी हेकड़ी निकल जायेगी,

मैं चुप रहा, वो फिर हंसी,

आंटी- “बस हो गया … इतना ही दम था”?

इतना सुनते ही मेरा डर गायब हो गया, मैंने चारों तरफ देखा और उनको आंख मारी यह देखकर वो शर्मा गई,

उधर मैंने चाची को कह दिया कि मैं अब नहीं जाऊंगा,

आंटी मेरी इस बात पर मुस्कुरा दी और गांड हिलाते हुए अपने घर चली गई,

ऐसे ही कुछ दिन गुजरे कुछ खास नही हुआ,

एक दिन मेरी चाची ने मुझको कहा कि, “आंटी के लैपटॉप में कुछ खराबी आ गयी है, क्या तुम कुछ कर सकते हो? प्लीज़ उनकी मदद कर दो ना,”

मैं भी ऐसे ही मौके की तलाश में था और मैंने फ़ौरन चाची से कहा, “आंटी से कहो कि अपना लैपटॉप हमारे घर पर ले आये, मैं लैपटॉप ठीक कर दुँगा,”

एक शाम को आंटी अपना लैपटॉप मेरे घर पर ले आयी, मैंने उनको जाँच कर पाया कि उनके कम्प्यूटर में कुछ “बैड सैक्टर” और वायरस आ गये हैं, मैंने आंटी को यह बात बता दी और कहा कि लैपटॉप को फोरमैट करना पड़ेगा, आंटी ने अपना लैपटॉप फोरमैट करने की सहमती दे दी, मैंने फिर उनसे पूछा, “कोई जरूरी फाइल तो नहीं है जिसका बैक-अप लेना है,”

आंटी- “कुछ वर्ड फाइल ‘मॉय डॉक्यूमेंट’ फोल्डर में है, हो सके तो उनका बैक-अप ले लो”

फिर वो मेरी चाची के साथ जा कर बातें करने लगी, सबसे पहले मैंने उनके लैपटॉप में एक पेन-ड्राईव लगाकर और उनके ‘मॉय डॉक्यूमेंट’ में से सारी फाइल उसमें ट्राँसफर कर दीं, फिर मैंने अपनी उत्सुक्ता से उनके लैपटॉप में कोई सैक्सी फाइल ढूँढने लगा और मुझको उनके लैपटॉप में छुपी फाइलों में कुछ नंगी तसवीरें और क्लिप मिली और साथ में एक फोलडर में करीब चालीस पचास सैक्सी कहानियाँ भी थीं, कहानियाँ इंगलिश, हिंदी और गुजराती तीनों भाषाओं में थीं, मैंने उन फाइलों को भी अपने कम्प्यूटर में कॉपी कर लिया,उनकी इंटरनेट हिस्ट्री में कईं पोर्न वेबसाईट भी मिलीं, और फिर उनके लैपटॉप को फोरमैट कर दिया, फिर मैंने विंडो कॉपी कर दी, उसके बाद मैंने उनकी सब फाइलें पेन-ड्राईव से उनके लैपटॉप पर कॉपी कर दी और साथ में अपने लैपटॉप से भी कुछ नंगी क्लिप और तसवीरों की फाइलें और कहानी की फाइलें भी कॉपी कर दी, इन सब काम में मुझको करीब दो घंटे लग गये और इस दौरान आंटी मेरे चाची से बातें करती रही,

मैंने सब काम खतम करने के बाद आंटी को बुलाया और अपने लैपटॉप को चैक करने के लिये कहा, वो मेरे कमरे में मेरी चाची के साथ आयी और बोली, आंटी- “तुम को तसल्ली है तो ठीक ही होगा,”

मैंने कहा, “हाँ मेरे ख्याल से आपका लैपटॉप अब बिल्कुल ठीक है और फिर आपको दिक्कत नहीं देगा,”

फिर मैंने चाची से लैपटॉप से धूल साफ़ करने के लिये एयर स्प्रे का कैन लाने को कहा, चाची कमरे के बाहर गयी,

रेशु- "आपकी वर्ड फाइलें सब उसी फोल्डर में हैं और आपके लैपटॉप में कुछ क्लिप और तसवीरें भी थीं, मैंने उनको भी आपके लैपटॉप में फिर से कॉपी कर दिया है,”

फिर मैंने उनके लैपटॉप पर वो तसवीरों की फाइल खोल दी, वो उन तसवीरों को देख कर बहुत हैरान हो गयी,

रेशु- “आपका संग्रह बहुत ही अच्छा है, खास कर कहानियों का संग्रह, मैंने आपके लैपटॉप से आपका संग्रह अपने लैपटॉप पर कॉपी कर लिया है, आशा है की आप बुरा नहीं मानेंगी”

मेरी इन सब बातों को सुन कर वो बहुत ही शर्मा गयी और मेरे से नज़रें चुराने लगी और अपनी नज़र को झुकाते हुए बोली,

आंटी- “प्लीज़ यह बात तुम किसी से भी मत कहो” उनकी ज़ुबान कुछ लड़खड़ा रही थी,
 
रेशु- “आप बिल्कुल मत घबराइये, मेरे पास ऐसी बहुत सी क्लिप, तसवीरें और कहानियाँ हैं और उनमें से मैंने कुछ आपके लैपटॉप में कॉपी कर दी हैं”

फिर मैंने उनको अपने लैपटॉप स्क्रीन पर देखने को कहा, तब आंटी बोली, “प्लीज़ वो (मेरी चाची) आ रही है, लैपटॉप को बंद कर दो”

मैंने उनकी लैपटॉप की धूल एयर स्प्रे से साफ़ कर दी और वो अपना लैपटॉप लेके चली गयी, लेकिन उनके जाने से पहले मैंने उनको धीरे से कहा कि,

रेशु- “क्या हम अपने संग्रह की अदला-बदली कर सकते हैं? मुझको कहानियाँ चाहिये और मैं आपको क्लिप और तसवीरें दुँगा”

वो कुछ बोली नहीं और चली गयी, उसके बाद हमारे घर पर करीब एक हफ़्ते तक नहीं आयी,

एक हफ़्ते के बाद वो हमारे घर पर आयी, मैंने दरवाजा खोला, लेकिन वो मुझसे बिना नज़रें मिलाय अंदर चली गयी और मेरी चाची के पास बैठ कर उनसे बातें करने लगी, कुछ देर के बाद मेरी चाची मेरे कमरे में आयी और बोली,

चाची- “आंटी कह रही है कि उनको वी-जी-ए ड्राईवर की फाइल चाहिये और उन्होंने अपनी एक पेन-ड्राईव दी है फाइल कॉपी कर के देने के लिये”

मेरी चाची ने मुझे एक पेन-ड्राईव दी,

मैं फौरन बात समझ गया,

रेशु- “उनको रुकने के लिये बोलिये और मैं अभी फाइल कॉपी कर देता हूँ,”

जैसे ही मेरी चाची बाहर गयी, मैंने पेन-ड्राईव को अपने कम्प्यूटर से खोला और पाया की उसमें कुछ देसी वेबसाइट्स की कहानियाँ हैं, मैंने उन कहानियों को अपने कम्प्यूटर पर कॉपी कर लिया और अपने कम्प्यूटर से कुछ क्लिप और तसवीरों की फाइल आंटी की पेन-ड्राईव पर भी कॉपी कर दी, उनके बाद मैंने एक टेक्स्ट फाइल उनकी पेन-ड्राईव में बना कर लिखा,

“धन्यवाद, मैंने आपकी कहानियाँ पढ़ीं, कहानियाँ बहुत ही अच्छी और सैक्सी थी, आपको क्लिप कैसी लगीं?”

फिर मैं उनके पास गया और उनको पेन-ड्राईव दे दी, उन्होंने मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुरा कर मेरे से अपनी पेन-ड्राईव ले ली, इसके बाद कुछ दिन वो हमारे घर पर नहीं आयी, मेरी चाची ने मुझसे कहा,

“आंटी को फ़्लू हो गया है और वो घर पर है,”

फिर एक दिन सुबह फोन पर चाची के मायके में किसी के मरने की खबर मिली, पढ़ाई की वजह से मुझको छुट्टी नहीं मिल सकी तो चाचा चाची ने यह तय किया कि म चाचा चाची चली जायेंगे, मैं उसी सुबह चाची और चाचा को एयरपोर्ट छोड़ने चला गया और उनके जाने के बाद मैं घर वापस आ गया, हम लोगों को सुबह-सुबह जाते समय आंटी ने देख लिया था और जैसे ही मैं घर वापस आया वो हमारे घर पर पूछताछ करने आ गयी,

मैंने दरवाजा खोला और मुझको देखते ही वो शर्मा गयी, वोह काफी सज-धज कर आयी थी, मैंने उनको हेलो बोल कर अंदर आने के लिये कहा, अपने खाली घर में आंटी को अकेली देख कर मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा होना शुरू हो गया, आंटी ने मेरी चाची के बारे में पूछा तो मैंने उनको सारी बात बता दी, मेरी बात सुन कर और यह जान कर कि मेरी चाची घर पर नहीं है, वो मुझसे बोली,

आंटी- “मैं फिर आऊँगी,”

फिर उन्होंने मुझको एक पेन-ड्राईव दी और बाहर जाने के लिये मुड़ी,

रेशु- “सुनिये, मैं इस पेन-ड्राईव से आपकी फाइल अभी कॉपी कर लेता हूँ और आपको भी अपने लैपटॉप से कुछ फाइल कॉपी कर देता हूँ,”

मैंने उनसे कहा,

आंटी- “मैं बाद में ले लुँगी”

उन्होंने कहा,

मैं यह मौका चूकना नहीं चाहता था और उनसे पूछा, रेशु- “आप मुझसे डरती हैं क्या?”

आंटी- “न.... न... नहीं, असल में मुझे घर में कुछ काम करना है!”

उन्होंने कहा,

अब तक सुबह के साढ़े दस बज चुके थे और मुझको पता था कि उनके पति अपने ऑफिस जा चूके हैं,

रेशु- “मुझे मालूम है कि घर पर कोई काम नहीं है और आप मुझसे डर रही हैं,”

मैंने उनसे कहा लेकिन उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया और मुझसे नज़रें चुराने लगी,

रेशु- “आपके आने के पहले मैं चाय बना रहा था, चलिये हम लोग साथ बैठ कर चाय पीते हैं और मैं फाइलें कॉपी कर लेता हूँ,”

और उनके कुछ कहने के पहले मैंने घर का दरवाजा बंद कर दिया और उनसे कहा,

रेशु- “आइये बैठिये, हम मिल कर चाय पीते हैं,”

अब तक मैं यह समझ गया था कि उनको मेरे साथ रहना पसंद है, मैं आंटी को मेरे कमरे में लाया और अपने लैपटॉप को चालू कर दिया, मैंने उनकी पेन-ड्राईव को अपने लैपटॉप में डाला और उसमें से कहानियाँ कॉपी करने लगा, मैंने उनको एक कुर्सी दी और बैठने के लिये कहा, वो कुर्सी पर बैठ गयी, मैंने अपने लैपटॉप पर नंगी क्लिप्स का अपना संग्रह खोला और उनसे कहा,

रेशु- “मैं चाय लाने जा रहा हूँ, तब तक आप अपनी पसंद की फाइलें अपनी पेन-ड्राईव में कॉपी कर लिजिए,”
 
उन्होंने शर्मा कर अपना सिर हिला कर अपनी सहमती जतायी, मैं कमरे से बाहर निकल कर रसोई में गया और दो कप चाय बनाने लगा, जब मैं चाय बना कर वापस आया तो वो मेरे लैपटॉप से नंगी क्लिप्स कॉपी कर रही थी और लैपटॉप स्क्रीन पर एक क्लिप चालू थी जिसमें एक औरत कईं मर्दों से एक साथ चुदवा रही थी... उन्होंने जब मुझको देखा तो जल्दी से क्लिप बंद करना चाहा, जल्द्बाज़ी में क्लिप बंद नहीं हुईं,

वो घबरा गयी और शरम के मारे नज़रें झुका लीं, मैंने आगे बढ़ कर चाय मेज पर रखी और उनके कँधों को पकड़ कर उनको कुर्सी से उठाया, वो जोर लगा कर मेरा हाथ हटाना चाहती थी, लेकिन मैंने भी जोर लगा कर उनको कुर्सी से उठा लिया, वो मेरे सामने नज़रें झुकाये खड़ी हो गयी, मैं उनको खींच कर अपने पास ले आया और उनको अपनी बाँहों में भर कर जकड़ लिया, उनका शरीर काँप रहा था और उनकी साँसें उखड़ रही थी, मैंने उनकी गर्दन और कान के पीछे किस कीया और उनके कान पर मुँह लगा कर धीरे से कहा,

रेशु- “आंटी आप बहुत ही सुंदर हो, क्या आपको मालूम है कि मैं हमेशा तुम्हारे बारे में ही सोचता हूँ? आप मेरे सपनों में हमेशा आती हो और आप ही मेरे सपनों की रानी हो, मैं आपसे प्यार करता हूँ,”

इसके साथ मैंने उनके कान को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया और वो मेरी बाँहों में खड़ी-खड़ी काँप रही थी, मैंने उनके चेहरे को अपने हाथों से ऊपर किया, वो बहुत शर्मा रही थी और उनकी आँखें बंद थीं और उनके होंठ आधे खुले थे,

मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए और उनके मुँह में अपनी जीभ डाल दी और उनको फिर से अपनी बाँहों में भर कर भींच लिया, उन्होंने अपने चेहरे से अपने हाथों को हटा कर मुझे जकड़ लिया और अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी, मैंने अपना दाँया हाथ उनके गांड पर ले जा कर उनको अपने और पास खींच लिया, मेरा लंड अब तक पूरी तरह से कड़क हो गया था और उनकी जाँघों के अंदर घुसना चाह रहा था, उन्होंने मेरी जीभ को अपने दाँतों तले हल्का सा काट लिया और अपने होंठ मेरे होंठों से हटा कर मेरी गरदन पर रखे और वहाँ हल्के से दाँत गड़ कर काँपती हुई आवाज में बोली,

आंटी- “अगर तुम्हारी चाची को यह बात पता चल गयी तो?”

मैं उनके गालों को चूमते हुए बोला,

रेशु- “हम यह बात किसी से भी नहीं कहेंगे, आंटी मैं आपको कब से प्यार करना चाहता हूँ,”

मैंने अब फिर से उनके मुँह में अपनी जीभ डाल दी और वो मेरी जीभ को चूसने लगी, थोड़ी देर मेरी जीभ को चूसने के बाद वो मुझसे बोली,

आंटी-“हाँ, मैं भी तुमको कईं दिनों से चाहती हूँ,”

रेशु-“तुम मुझसे क्यों डरती हो”

मैंने उनसे पूछा,

आंटी- “नहीं तो…!”

उन्होंने उत्तर दिया,

मैंने अपना दाँया हाथ उनकी चूंची पर रखते हुए कहा,

रेशु- “मुझे मालूम है, आप मुझसे क्यों डरती हो, आपको डर इस बात का है मैं आपको चोद दुँगा,” मैंने कुछ चुप रहने के बाद उनसे कहा,

रेशु- “क्या मैं सही बोल रहा हूँ?”

वो एक लम्बी साँस लेने के बाद अपना सिर हिला कर हाँ बोली,

रेशु- “क्या मैं आपको चोद सकता हूँ?”

मैंने उनसे कहा और उनके बॉब्स को जोर से दबा दिया,

वो एक आह भरते हुए मुझसे बोली,

आंटी- “नहीं रेशु, ये ठीक नहीं है,”

मैंने उनकी बॉब्स और जोर से दबा कर पूछा,

“क्यों? क्यों ठीक नहीं है?”

आंटी ने तब मेरे कान को अपने मुँह में लिया और हल्का दाँत लगाया,

आंटी- “जरा धीरे से दबाओ, मुझको दर्द हो रहा है,”

रेशु- “क्यों ठीक नहीं है?”

मैंने फिर से पूछा,

आंटी- “क्योंकि मैं शादीशुदा हु”

वो अपनी सैक्सी आवाज में मुझसे बोली, मैंने अपना हाथ उनके ब्लाउज़ में डाल कर उनके बॉब्स को पकड़ कर मसलना शुरू किया, उनके बॉब्स बहुत सख्त थे और उनके निप्पल खड़े थे,

रेशु- “हाय आंटी, प्यार करने वाले भी चुदाई कर सकते हैं”

मैंने उनके बूब्स मसलते हुए कहा,

आंटी- “लेकिन ये पाप है,”

उन्होंने उत्तर दिया,

मैंने उनके निप्पल अपनी अँगुली के बीच ले कर मसलते हुए कहा,

रेशु- “ये पाप करने में बहुत मज़ा है, आंटी, प्लीज़ मुझे चोदने दो, प्लीज़ चोदने दो ना”

और मैं उनकी बूब्स को कस कर दबाते हुए उनके होठों को पागलों की तरह चूमने लगा,

उन्होंने कोई उत्तर देने की बजाय मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल दी, मैंने उनकी जीभ को थोड़ी देर के लिये चूसा

थोड़ी देर बाद हम दोनों अलग हुए, अब हम दोनों को एक दुसरे से अलग होना मुश्किल लग रहा था, हम दोनों लगातार एक दुसरे का जिस्म सहला रहे थे, आंटी के हाथ सिर्फ मेरी पीठ और सर पर चल रहे थे पर में उनकी पीठ और गांड को सहला रहा था और थोड़ी थोड़ी देर में उनके गांड को दबा भी देता था जिससे आंटी की एक हलकी से सिसकारी निकल जाती थी,
 
मैने अपनी ऊंगली उनके गांड की दरार में भी चला दी थी, उनके हाथ से हट जाने के कारन में अपने सीने पर बॉब्स का दबाब महसूस कर सकता था, बहुत कसे और उभरे हे बॉब्स थे आंटी के जिनको अब मैं अपने हाथों में पकड़ कर मसल रहा था, जोर जोर से दबा रहा था

मै आंटी को पकड़ कर पलंग के पास ले आया और पलंग पर बैठ कर मैंने अपनी गोद में बैठा लिया और दुबारा से उनके होठो को चुस्ने लगा, वो मेरे बालो को सहला रही थी और मेरे होठो को चूस रही थी, गोद में बैठने के कारन में अब उनकी जांघे आसानी से छु पा रहा था,

मैने अपना हाथ साड़ी के अंदर ड़ाला और उनकी जाँघो को सहलाने लगा, मेरे हाथ उनके नंगे घुटनो से उनकी गांड तक आसानी से जा रहे थे, में अपने हाथ उनकी गांड तक ले के जाता और उनकी पेंटी के किनारो तक उनको सहलाता,

जब-जब मेरे हाथ उनकी पेंटी तक जाते, वो मेरे से और चिपक जाती, उन्होंने मेरा सर पकड़ कर उसको अपने सीने पर रख दिया जहा से मैं उनके उभारो के ऊपर नीचे होने का एह्सास ले सकता था, मैंने ब्लाउज के ऊपर से उनके बॉब्स को चूम लिया और अपने होठो से उनको दबाने लगा,

आंटी ने धीरे धीरे अपनी टाँगे थोड़ी चौड़ी कर दि, अब में आसानी से उनकी टांगो के अंदर की तरफ भी सहला पा रहा था, मैंने उनकी टांगो को सहलाना जारी रखा और बार- बार उनकी पेंटी के पास हाथ ले जाकर छोड देता था,

मेरी यह हरकत उनको उतेजित कर रही थी क्यूँकि शायद वो बार- बार यही सोच रही थी की अबकी बार मेरा हाथ उनके गुप्तांगो को छुयेगा पर हर बार उनका यह सोचना गलत हो जाता था,

मुझको बड़ा मज़ा आ रहा था पर जब जब मेरा हाथ उनकी चुत के पास जाता तो उसकी गर्मी महसूस हो रही थी,

आंटी ने मेरी टी-शर्ट उतार दि, मैंने अंदर बनियान भी नहीं पहनी थी, वो टी-शर्ट उतारते ही मुझसे चिपक गयी और मेरे शोल्डर्स और मुह पर चुम्बन करने लगी, में भी उनके चुम्बन का जवाब चुम्बन से दे रहा था और उनके गले, कान, गालो, होठो को चूम रहा था, मेरी साँसों में उनके जिस्म की महक आ रही थी जो मुझको और पागल बनाये जा रही थी,

मैने अपना हाथ उनके पीछे से ब्लाउज में डाल दिया और धीरे-धीरे उनके बॉब्स की तरफ बढ़ने लगा, मैंने ब्रा के ऊपर से हे उनके बॉब्स पकड़ लिए और उनको दबाने लगा,

थोड़ी देर बाद बॉब्स दबाने के बाद में अपना हाथ दुबारा से उनकी पीठ पर ले गया और उसको सहलाने लगा, पर अबकी बार मेरा इरादा कुछ और था, थोड़ी देर ऐसे ही उनकी पीठ सहलाते हुए अचानक में अपना हाथ उनके पीठ पर ऊपर से नीचे लाया और अपना हाथ सीधे उनकी पेंटी में पीछे डाल दिया, आंटी इसके लिए तैयार नहीं थी तो वो मुझसे अलग हो गयी, पर अब तक मेरा काम हो चुक्का था और मेरा हाथ उनके गांड की दरार के ठीक बिच में वह था,

उनके अलग होने से उनका दवाब उनके गांड पर बढ़ गया और मेरा हाथ उनकी दरार में सेट हो गया, मैंने अपनी ऊंगली उनकी दरार में चलानी शुरू कर दी और उसको सहलाने लगा, अब हम लोगो की उतेजना इतनी हो गयी थी की बता नहीं सकता, मैंने आंटी को इशारा किया और आंटी की साड़ी को उनके जिस्म से अलग करने लगा,

आंटी ने अपने हाथ ऊपर कर दिए ताकि में ब्लाउज भी निकाल सकु और जब साड़ी, पेटीकोट और ब्लाउज उनके जिस्म से अलग हुआ तो वो मेरे सामने ब्रा और पेंटी में मेरी गोद में थी, वो मुझसे शर्मा कर चिपक गयी, मैंने उनके कन्धो और सीने पर किस कर रहा था और उनके पूरे जिस्म को सहला रहा था, अब मैंने अपना हाथ उनकी चुत पर रख दिया और उसको दबाने लगा, उनकी चुत इतनी उभरि हुई थी जैसे पावरोटी हो, में उसको मसल रहा था और आंटी सिसकारियां भर रही थी, मैंने बिना पेंटी उतारे अपनी ऊंगली पेंटी की साइड से अंदर डाल दी और चुत सहलाने लगा,

दोस्तॉ, एक बात बताना चाहूंगा की औरत की उत्तेजना एक दम से चोदने से नहीं बल्कि उसको सहलाने से बढ़ती है, औरत मर्द के मुकाबले देर से उतेजित होती है और एक बार पूरी तरह से उतेजित होने के बाद ही सम्भोग का माज़ा ले पाती है,

यह बात शायद आप लोगो को अच्छे से पता होगी और यही में आंटी के साथ भी कर रहा था, मैंने उनको वही पलंग पर लिटा दिया और सीने को चाटते हुए उनके कन्धो से उनके ब्रा के स्ट्रेप उतारने लगा, जल्दी ही उनका सीना नँगा हो चुका था और उनके उभार आधे चाँद की तरह ब्रा से झाँक रहे थे, पता नहीं आप लोग मुझसे सहमत है या नहीं पर मेरे अकोर्डिंग औरत का खुला हुआ भाग उतना उतेजित नहीं करता जितना की छुपा हुआ करता है,

उनके सीने और बाहर निकले हुए बॉब्स को चाट रहा था और वो मुझको अपनी और दबाये पड़ी थी, अबकी बार आंटी ने पहल करते हुए अपना एक बॉब्स अपने ब्रा से पूरा बाहर निकाला और मेरे मुह के आगे कर दिया, ३६ के आकर का गोल बॉब्स अपने गुलाबी उभरे हुए निप्पल के साथ मेरे सामने था तो में अपने आप को कैसे रोकता, मैंने झट से उसको मुह में ले लिया और एक बच्चे की तरह चूसने लगा,
 
मैने उसी वक़्त पीठ पर हाथ ले जाकर उनकी ब्रा का हुक खोल दिया और ब्रा को हम दोनों के बिच से निकाल कर बाहर का रास्ता दिखा दिया,

अब आंटी के दोनों बॉब्स मेरे सामने नंगे थे, एक को में दबाता और दुसरे को चूसता, आंटी अपनी आँखे बंद किये हुए अपने बॉब्स को चुसवा रही थी, थोड़ी देर ऐसे ही उनके बॉब्स चुस्ने के बाद में उनके पेट और नाभि को चूमते हुए उनकी चुत तक आ गया, पेंटी के ऊपर से ही मुझको एह्सास हो गया थी की आंटी की चुत पर बाल नहीं होंगे, एक दम चिकनी चुत मिलने वाली है मुझको आज चुदायी के लिये,

मेरा लंड तो यही सोच सोच कर क़ाबू से बाहर हो रहा था की आज मेरी बाहो में ऐसी गदरायी और मस्त औरत है और मेरा लंड जल्दी हे अपनी सहेली से मिलने वाला है,

मैंने पेंटी के ऊपर से हे उनकी चुत को अपने मुह में ले लिया और उसको चूसने लगा, मैंने उनकी टांगो को भी खूब चाटा, आंटी भी अपनी टाँगे पूरी खोल कर मुझको अपनी चुत की और बुला रही थी, उनकी टाँगे पूरी खुलि हुई थी और अभी तक शर्माने वाली आंटी अब चुदायी के पूरे मूड में आ चुकी थी,

अब बारी उनकी पेंटी उतार कर पूरा नँगा करने की है, मैंने उनको उलटा करके पेट के बल लिटा दिया और उनकी पीठ पर जीभ फेरने लगा, उनकी पूरी पीठ को चाटते हुए में उनके गांड पर आ गया और उनकी पेंटी उतारने लगा, जल्दी ही मैंने उनकी पेंटी को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया, आंटी मेरे सामने पेट के बल बिलकुल नंगी लेटी हुई थी और उनकी उभरी हुए गांड मुझको अपनी और बुला रहे थी, मैंने उनके दोनों चूतड को चूमा और अपने हाथो से उन् दोनों को एक दुसरे से दूर किया,

मेरे सामने अब उनकी हलकी गुलाबी सी छोटे से छेद वाली गांड थी, मैंने अपनी जीभ उनकी दरार में डाल दी और उसको चाटने लगा, मैंने उनकी एक टाँग को ९० डिग्री पर मोड़ दिया ताकि में उनकी गांड के छेद को अच्छे से चूम सकु पर टाँग मोडते ही मुझको उनकी चुत की झलक भी मिलने लगी जो गांड से शुरू हो जाती है,

जैसा मैंने सोचा था उनकी चुत पर एक भी बाल नहीं था, मानो आज ही चुत साफ़ की हो, एक दम मस्त चिकनी चुत थी उनकी, मैंने आंटी को सीधा किया, मेरे सामने रसमलाई का कटोरा था जिसको खाने से रोकने की हिम्मत अब मेरे में नहीं थी,

मैने उनकी चुत को मुह में ले लिया और उसको चूसने लगा, उनकी चुत के दोनों होठ मेरे मुह में थे, फिर मैंने उनके चुत के दोनों होठ अलग किये और उसमे अपनी जीभ डाल के उसको चाटने लगा, में अपने ही काम में मस्त था और में आंटी को देख भी नहीं रहा था,

जब मैंने देखा तो आंटी आँखे बंद किये हुए अपने बॉब्स दबा रही थी, वो अपने होठो को उत्तेजना से काट रही थी, मैंने उनकी हेल्प करने के लिए उनके बॉब्स अपने हाथो में ले लिए और उनको दबाने लगा, उन्होंने अपने हाथ मेरे सर पर रख दिए और मुह को अपनी चुत में और अंदर की तरफ दबाने लगी,

उनको मेरा चुत चाटना अच्छा लग रहा था और वो कहने लगी,

आंटी- “और ज़ोर से चाटो, मेरी पूरी चुत खा जाओ”

उनकी चुत से पानी निकलने लगा था और में उसको चाट रहा था, थोड़ी देर बाद में सीधा हो कर उनके साथ में लेट गया, अब उनकी बारी थी एक्शन में आने की, वो उठि और मेरे सीने पर चुम्बन करते हुए मेरी ही तरह मेरे नीचे की और बढ़ने लगी,

उनहोने मेरी जीन्स का बटन और ज़िप खोल कर मेरी जीन्स उतार दि, मेरा लंड अभी तक बहुत टाइट हो चुक्का था और जीन्स के उतरने से मुझको बहुत अच्छा लग रहा था, ऐसा लग रहा था मानो मेरे किये का बदला ले रही हो,

फिर बिना वक़्त लगाये मेरी जॉकी उतार दि, जॉकी उतारते हे मेरा लंड क़ुतब-मीनार की तरह सिद्ध खड़ा हो गया और उसको देखते ही आंटी की आँखों में एक चमक और होठो पर मुस्कान आ गयी, वो मेरे लंड को अपने नाज़ुक हाथो में ले कर मूठ मरने लगी,

मै उनकी तरफ आशा भरी नज़रो से देख रहा था क्यूँकि मुझको औरत से लंड चुसवाना बहुत पसंद है, शायद वो भी यह बात समझ गयी थी तो उन्होंने मेरे लंड के टोपे को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया, धीरे-धीरे वो मेरे लंड को नीचे से ऊपर तक ऐसे चाटने लगी जैसे कोई आइस-क्रीम चाट रही हो,

आंटी मेरे साइड मे ही बैठी हुई थी लैकिन शाएद उनको यह पोज़िशन कंफर्टबल नही लग रही थी इसी लिए वो साइड से उठ के मेरी दोनो टाँगो के बीच मे घुटने मोड़ के बैठ गयी और दोनो हाथो से मेरे लंड को पकड़ के मूठ मारने लगी, मैं खामोश ही लेटा रहा और आंटी के हाथो का मज़ा लेता रहा और यह सोच रहा था के क्या आंटी को चोदने का मोका मिलेगा या नही, मेरे लंड की सेवा कर रही थी जो किसी मूसल की तरह से मोटा और लोहे जैसा सख़्त हो के किसी मिसाइल की तरह से खड़ा था, दो जलते बदन होने की वजह से कमरे का माहौल कुछ ज्यादा ही गरम और सेक्सी हो गया था,

आंटी- “रेशु यह तो इतना शानदार है के इसको किस करने का मन कर रहा है”

और बिना कुछ बोले वो झुकी और झुक के मेरे लंड को सुपाडे पे किस किया और चूसना भी शुरू कर दिया, ऐसा लग रहा था जैसे आंटी मेरे लंड को देख के अपने होश ही खो बैठी है,
 
आंटी दोनो हाथो से मूठ मार रही थी और सुपाडे को चूस भी रही थी फिर उन्होने दोनो हाथ हटा लिए और पूरे लंड को अपने मूह मे ले के चूसने लगी तो मैने अपने पैर आंटी के बॅक पे लपेट लिए और उनका सर पकड़ के उनके मूह को चोदने लगा, मेरा लंड बोहोत बड़ा और मोटा है इसी लिए पूरा उनके मूह मे नही घुस रहा था उनके दाँत मेरे लंड के डंडे पे लग रहे थे, ऐसे ही चूस्ते चूस्ते आंटी का मूह मेरे लंड से अड्जस्ट हो गया और अब वो पूरा मूह के अंदर ले के चूस रही थी, मेरा लंड उनके हलक तक जा रहा था, मैं ने बोला के आंटी कुछ स्वाद मुझे भी तो दो, तो वो मेरा मतलब समझ गयी और पलट के मेरे ऊपेर 69 की पोज़िशन मे आ गयी, उनकी चूत तो बेइंतिहा गीली हो चुकी थी और उनकी चूत से बड़ी मस्त खुशबू भी आ रही थी, मैं आंटी की चूत को चाट रहा था ज़ुबान नीचे से ऊपेर और ऊपेर से नीचे और फिर क्लाइटॉरिस को दांतो से पकड़ा तो आंटी काँपने लगी और मेरे मूह मे ही झड़ गयी, आंटी की चूत का जूस बोहोत मीठा था, आंटी बड़ी मस्ती से मेरा लंड चूस रही थी आंटी के बूब्स मेरे पेट से लग रहे थे तो मैं ने उनको अपने हाथो मे पकड़ लिया

आहह क्या मस्त बूब्स थे आंटी के, इतनी एज मे भी इतने कड़क और निपल्स भी एरेक्ट हो गये थे मैं उनको पकड़ के मसलने लगा और अपने पेट से उनकी चुचिओ को रगड़ने लगा, मैं अपने पैर घुटनो से मोड अपनी गांड उठा उठा के उनके मूह को चोद रहा था और फिर मेरी रस भी रेडी हो गया था और फिर उनके सर को पकड़ के अपने लंड को पूरे का पूरा उनके हलक तक घुसा के पकड़ लिया और मेरे लंड मे से गरम गरम रस का फव्वारा निकल के आंटी के पेट मे डाइरेक्ट गिरने लगा जिसे वो एक ड्रॉप गिराए बिना पी गयी,

मेरा रस निकल जाने के बावजूद आंटी मेरे लंड को चूस रही थी और मैं उनकी गांड पे हाथ रख के उनकी चूत को अपने मूह मे दबा के रखा था और चाट रहा था, मेरा लंड अभी भी फुल्ली एरेक्ट था, आंटी की चूत समंदर की तरह से गीली हो रही थी वो बिना कुछ बोल के पलट गयी और मेरे थाइस के दोनो तरफ अपने दोनो घुटने मोड़ के मेरे ऊपेर आ गयी और मेरे लंड के डंडे को एक हाथ से पकड़ के अपनी चूत के सुराख से लंड के सुपाडे पे सटा दिया और एक ही झटके मे बैठ गयी चूत और लंड दोनो गीले होने की वजह से लंड एक ही धक्के मे चूत के अंदर घुस्स गया और आंटी के मूह से

आंटी- “ऊऊऊऊऊीीईईईईईईईई म्‍म्म्ममममममाआआअ”

निकला और वो फॉरन ही मेरे लंड पे से उछल पड़ी और लंड बाहर निकल गया

रेशु- “क्या हुआ आंटी”?

आंटी- “इतना बड़ा मूसल मैं ने कभी नही लिया दर्द हुआ इसी लिए”

रेशु- “आंटी धीरे धीरे बैठो”

तो उन्होने फिर लंड को पकड़ा और लंड को चूत के सुराख मे अटका के धीरे धीरे बैठ ने लगी और आधा लंड चूत के अंदर लेने के बाद वो मेरे ऊपेर झुक गयी और मेरे मूह मे अपनी जीभ डाल के चूसना शुरू कर दिया बड़ा मज़ा आ रहा था उनकी जीभ चूसने मे, मैं हाथो से उनकी गांड को और उनकी पीठ को सहला रहा था फिर मैं उनके बूब्स को चूसने लगा और अपनी गांड उठा उठा के उनको चोदने लगा, आंटी तो मेरे लंड से मस्ती मे चुदवा रही थी आंटी अपनी तरफ से तो पूरी कोशिश कर रही थी के पूरा लंड अंदर लेने की पर उनसे हो नही रहा था

आंटी- “रेशु मेरे ऊपेर आ जा और ज़ोर ज़ोर से धक्के मार मार के मुझे चोद”

तो मैं पलट के उनको नीचे लिटा दिया और अपनी टाँगो से उनकी टाँगे खोल के अपने पैर पीछे कर के उनकी चूत के सुराख मे लंड को सेट किया और एक ही जबरदस्त झटका मारा तो उनके मूह से चीख निकलगई

“आम्‍म्माआमअरर्ररर गग्ग्गाआआयययययईई र्र्र्र्रररीईईई ऊऊीीईईईई हहाआआआआआआआअ……!!

और मेरा लंड पूरा अंदर घुस के उनकी बच्चे दानी तक पहुच गया था,

मैं एक मिनिट तक उनके ऊपर ऐसे ही लेटा रहा और जब उनकी टाइट चूत मेरे लंड की मोटाई से अड्जस्ट हो गयी और देखा के आंटी के हाथ मेरे पीठ पे और गांड पे घूम रहे है तो फिर मैं उनकी चुदाई करने लगा, जबरदस्त झटके मार रहा था और आंटी मस्ती मे चीख रही थी “पफहाआड़ड़ड़ड़ डाआअल्ल्ल्ल्ल्ल्ल ऊऊीीईईईई आऐईएसस्स्सीईए हहिईीईईईईईई रेशऊऊऊऊऊ ऊऊफफफफफफफफफ्फ़ म्माअरर्र्ररर ज़्ज़्ज़ूओररर ज़्ज़्ज़्ज़ूऊररररर सस्स्सीईई आअहीईए आप्प्न्नीईइ पूओररीई त्त्ताअक्क्क्काआत्त्त्त सस्सीई माआररररर आआहह……,!!!!

मैं फुल फोर्स से चोद रहा था तो फिर भी आंटी ने बोला के

“आओउउर्र्रर जोओर सेस्सीई चोददददद”

तो मैं ने अपने पैर पीछे बेड के किनारे की लकड़ी से टीका दिया और हाथ से बेड के दूसरे किनारे की लकड़ी को पकड़ के बहुत से ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा तो आंटी बोली आंटी- “आआआहह रेशुऊऊ ऊऊउ आऐईएसस्स्सीई हहिईीईई कक्चहूऊओददड़ आअहह म्‍म्माआज़्ज़्ज़्ज़्ज़ाआअ एयाया र्राअह्हाआ हहाअईई र्रररीईई ऊऊओह माआर प्पफहाआड्द्ड़ दददाअलल्ल्ल्ल्ल आऔउन्न्ञतट्ट्तीई ककक्कीईईईई कक्चहूऊततततत्त…,!!

और मैं दीवानो की तरह से उनको चोदने लगा उनके बूब्स डांस कर रहे थे आंटी की चूत बोहोत ही टाइट थी पता नही कितने सालो से नही चूदी थी उनकी चूत, उनके डांस करते बूब्स को मैं झुक के अपने मूह मे ले के चूसने लगा, मेरी इतनी जबरदस्त चुदाई से बेड भी हिलने लगा था और पच पच की आवाज़े आ रही थी आंटी तो 3 या 4 बार झड़ भी चुकी थी और उनकी चूत जूस से भर चुकी थी और इसी लिए लंड

अब आसानी से अंदर बाहर हो रह था और आंटी मुझे ज़ोर से पकड़े हुए थी मेरे झटको से उनका पूरा बदन आगे पीछे हो रहा था और मैं भी पूरे जोश मे पूरी ताक़त से चोद रहा था, आंटी की आँख से आँसू निकलने लगे और मुझे लगा जैसे अब मेरा रस भी रेडी हो गया है और मैं ने चोदने की स्पीड बढ़ा दी और आंटी बोल रही थी चोऊऊऊऊद दददाअलल्ल्ल रेशऊऊऊऊऊ इससस्स बबबीईककककचहाआऐययईईन्न्न्न् प्प्प्पयय्य्ाआसस्सिईईईईई आअहह ककककचहूऊतततत्त कककूऊ…,,!!

वो मुझ से लिपट गयी थी और मेरा फाइनल झटका इतना जबरदस्त था के आंटी के मूह से एक बार फिर से चीख निकल गयी

“आआईईई र्र्र्र्रररीईई म्‍म्म्माअरर्र्ररर ग्गगाआईईई उूउउफफफफफफफफ्फ़

और मेरा लंड शाएद उनकी चूत को चीरता हुआ उनकी बच्चे दानी से होता हुआ उनके पेट के अंदर तक घुस्स गया और मेरे लंड मैं से गरम गरम रस का फव्वारा निकलने लगा जिस से आंटी एक बार फिर से झड़ने लगी, उनका बदन काँप रहा था और वो झड़ रही थी, दोनो के बदन पसीने से लत पथ थे, मेरे लंड मे से भी इतना रस निकला जो शाएद पहले कभी नही निकला था और आंटी की चूत हम दोनो के प्रेमरस से भर गयी,

मैं उनके ऊपेर ऐसे ही लेटा रहा दोनो गहरी गहरी साँसे ले रहे थे, आंटी मेरे कान मे बोली के

आंटी- “थॅंक यू रेशु आज तो ज़िंदगी भर की चुदाई का मज़ा आ गया ऐसी चुदाई ज़िंदगी भर कभी नही हुई थी मुझे तुम ने जवान होने का एहसास दिला दिया मस्ती मे मेरे सारे बदन मे मीठा मीठा दर्द हो रहा है,आइ लव यू रेशु यू आर दा बेस्ट, तुम सच मे एक मर्द हो और मेरे कान मे धीरे से बोली के रेशु प्लीज़ मुझे हमेशा ऐसे ही चोद्ते रहना और मुझे ज़िंदगी भर ऐसी ही चुदाई का मज़ा देते रहना”

और फिर कान के लटकते हुए हिस्से को अपने मूह में ले के चूसने लगी मेरा लंड आंटी की रस से भरी चूत के अंदर ही अंदर एक बार फिर से अकड़ने लगा तो आंटी चौंक गयी और बोली के

आंटी- “वाह रेशु यह तो फिर से तय्यार हो रहा है तो”

रेशु- “आंटी इसे भी तो आपकी टाइट चूत को चोद के मज़ा आया है और यह फिर से चुदाई करना चाहता है”

कहानी जारी रहेगी
 
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