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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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अपडेट 30

मैं और..? दीदी भी नहीं चाहती थी, की इन बातों का सिलसिला रुक जाए.

.और. आप बहुत ख़ूबसूरत हे दीदी..सच में आप बहुत ख़ूबसूरत हे,

आप को कल रात छुआ तो समझ में आया की सही खुबसुरती किसे कहते हे?

और मैंने दीदी के नैवेल में एक ऊँगली दाल कर उसे घुमाया और दीदी को पीछे से अपने लंड से भी दबाव डाला.

दीदी अब तक प्लेट साफ़ कर रही थी पर अब उनके हाथ रुक गए थे और ऐसा लगता था की वो और भी सुनना चाहती थी,

इसीलिए उन्होंने कहा

“अच्छा.. इतनी दीदी पसंद आ गयी हे क्या.?

दीदी ने भी इस बात को कंटिन्यू किया

“सच्ची में बहोत मैंने रिप्लाई किया और तुरंत ही दीदी ने पूछ लिया.

.अच्छा, क्या पसंद आ गया, दीदी में जो इतना पसंद करने लगे हो”..

दीदी का यह सवाल तो क़ातिलाना था और अब मौका छोडना सही नहीं था इसीलिए मैंने अपना एक हाथ दीदी के नैवेल से ऊपर उठाय और दीदी के लिप्स पे रक्खा और कहा की

“दीदी यह लिप्स हैं ना,सच में बड़े अच्छे हे”,

हालाँकि दीदी भी यह जानती थी की में किस चीज़ पर मर मिटा हूँ

पर मैंने लिप्स से ही शुरू किया और अपनी एक ऊँगली दीदी के दोनों लिप्स के बीच में फिराई और दीदी के निचे के होठ को ऊँगली से प्रेस भी किया,

और दीदी ने मुँह खोल दिया,

बॉस क्या गरम साँसे चल रही थी.

फिर मैंने अपनी ऊँगली दीदी के होठो से हटा के दीदी के चिन पे से गुजारती हुई

दीदी के गले पर गोल गोल घुमायी और दीदी के गले पर से उसे दीदी के सीने पर रक्खा

और वहा घूमाते हुए मैंने दीदी के ब्लाउज के क्लीवेज में अपनी ऊँगली डाली

और जैसे ही मैंने अपनी ऊँगली दीदी के ब्लाउज में डाली की

दीदी ने मेरी ऊँगली को अपने हाथ से थाम लिया और में रूक गया,

दीदी पूरी तरह सिड्यूस हो चुको थी पर वो अभी शायद सेक्स करना नहीं चाहती थी,

इसीलिए वो न तो ऊँगली बाहर निकल रही थी की न ही मुझे अंदर हाथ डालने दे रही थी.

फिर इससे पहले की में कुछ करू, डरवाजे की घण्टी बजने लगी.

और हम दोनों होश में आए,

दीदी ने मेरी ऊँगली छोड़ि और अपनी साड़ी ठीक की,

और छूटने लगी पर मैंने छोड़ा नही,

तो उन्होंने मेरी और देखा और मैंने फट से दीदी के लिप्स पर अपने लिप्स रख के उन्हें चूम लिया और लिप्स मस्त चूसने लगा,

उधर घण्टी बज रही थी,

दीदी ने उन्हें छोड़ने के लिए मुझे धक्का दिया और मैंने भी उन्हें छोड़ दिया और डरवाजा खोलने के लिए भागा.

मैने जा कर देखा तो चाचा के नाम का कोई कूरियर था और मैंने उसे ५ मिनट में चलता कर दिया और फिर से किचन में गया

तो दीदी को फिर से पता चल गया की में आया हूँ तो

उन्होंने सामने से कहा की “अभी डिस्टर्ब मत करो,

बाद में बता देना क्या तुम्हे अच्छा लगा”.

मैं भी मन में खुश होते हुए,

बाहर आ गया. और उनके इंटेंशन से साफ़ पता चल रहा था की वो अब पूरी तरह से मेरी थी.

फिर मैंने लंच के बाद दीदी को उठा के बैडरूम में ले गया

हम बेडरूम जाते ही मैंने दीदी को अपनी बाहों में लिया और उसे चूमना चाटना शुरु किया दीदी भी अब पूरा मजा ले रही थी कुछ देर किस करने के बाद हम रुक गये मैने दीदी को कहा “दीदी मैं आपको ऐसे सेक्स करना चाहता हु, कि जैसे हमारे बीच पहली बार सेक्स हो रहा हो, जैसे रात को कुछ हुआ ही नही, मैं आपको नये तरीके से मजा देना चाहता हु, क्या आप इसके लिये तैयार है, बहुत मजा आयेगा थोड़ा अलग सेक्स करेंगें, बिल्कुल पहली बार जैसे करते है वैसे ही” दीदी बोली “वॉव मुझे क्या करना है,यह बता” मैंने कहा “हम सेक्स के साथ साथ गंदी गंदी बाते करेंगे एक दूसरे को गलियां देंगे” दीदी बोली “नही गालिया नही” मैंने कहा “कुछ नही होता मैंने सेक्सी मूवीज में देखा है बहुत मजा आता है” इससे सेक्स मे नयापन आता है और मैं आपको बहोत मजा देना चाहता हु, आई लव यू दीदी”

“मेरा भाई मुझे इतना पसंद करता है ये तो मुझे पता ही नहीं था…” कहते हुए आगे बढ़ कर मेरे होंठो पर एक जोरदार चुम्मा लिया और फिर दुबारा अपने होंठो को मेरे होंठो से सटा कर मेरे होंठो को अपने होंठो से दबोच कर अपनी जीभ मेरे मुंह में ठेलते हुए चूसने लगी.

उसके होंठ चूसने के अंदाज से लगा जैसे मेरे होंठो का पूरा रस दीदी चूस लेना चाहती हो.

होंठ चूसते चूसते वो मेरे लण्ड को अपनी हथेली के बीच दबोच कर मसल रही थी.

कुछ देर तक ऐसा करने के बाद जब दीदी ने अपने होंठ अलग किये तो हम दोनों की सांसे फुल गई थी.
 
अपडेट 31

मैं अपनी तेज बहकी हुई सांसो को काबू करता हुआ बोला “हाय दीदी आप बहुत अच्छी हो….”

अच्छा…बेटा मख्खन लगा रहा है….”

“नहीं दीदी…आप सच में बहुत अच्छी हो….और बहुत सुन्दर हो….” इस पर दीदी हंसते हुए बोली “मैं सब मख्खन बाजी समझती हूँ बड़ी बहन को पटाकर निचे लिटाने के चक्कर में…..है तू….”

मैं इस पर थोड़ा शर्माता हुआ बोला “हाय…नहीं दीदी….आप….” दीदी ने गाल पर एक प्यार भरा चपत लगाते हुए कहा

“हाँ…हाँ…बोल…..” मैं इस पर झिझकते हुए बोला” वो दीदी दीदी…आप बोल रही थी की मैं….दि…दि…दिखा दूंगी….”.

दीदी मुस्कुराते हुए बोली “दिखा दूंगी…क्या मतलब हुआ…क्या दिखा दूंगी….”

मैं हकलाता हुआ बोला ” वो….वो…दीदी आपने खुद बोला था”.

“खुलके बता ना रेशु….मैं तुझे कोई डांट रही हूँ जो ऐसे घबरा रहा है…. क्या देखना है”

“दीदी…वो…वो मुझे…चु….चु…”

“अच्छा तुझे चूची देखनी है….वो तो मैं तुझे दिखा दिया ना…यही तो है…ले देख…”

कहते हुए अपनी ब्रा में कसी दोनों चुचियों के निचे हाथ लगा उनको उठा कर उभारते हुए दिखाया.

छोटी सी नीले रंग की ब्रा में कसी दोनों गोरी गदराई बूब्स और ज्यादा उभर कर नजरो के सामने आई तो लण्ड ने एक उछाल मारी,

मगर दिल में करार नहीं आया.

एक तो बूब्स ब्रा में कसी थी, नंगी नहीं थी दूसरा मैं चुत दिखाने की बात कर रहा था और दीदी यहाँ चूची उभार कर दिखा रही थी.

होंठो पर जीभ फेरते हुए बोला “हाय…नहीं…दीदी आप समझ नहीं रही….वो वो दू…सरी वाली चीज़ चु…चु…चुत दिखाने….केलिए…”

“ओहहो…तो ये चक्कर है…

अपनी बड़ी बहन को बुर दिखाने को बोल रहा है….हाय कैसा बहन चोद भाई है मेरा….

मेरी चुत देखने के चक्कर में है…उफ्फ्फ….

ठीक है मतलब तुझे चुत देखनी है….अभी बाथरूम से आती हूँ तो तुझे अपनी बुर दिखाती हूँ”

कहती हुई बेड से निचे उतर ब्लाउज के बटन बंद करने लगी.

मेरी कुछ समझ में नहीं आया की दीदी अपना ब्लाउज क्यों बंद कर रही है मैं दीदी के चेहरे की तरफ देखने लगा तो दीदी आँख नचाते हुए बोली

“चुत ही तो देखनी है…वो तो मैं पेटिकोट उठाकर दिखा दूंगी…”

फिर तेजी से बाहर निकल बाथरूम चली गई.

मैं सोच में पड़ गया दीदी यह क्या कर रही है फिर सोचा देखते है दीदी करना क्या चाहति है

मैं दीदी को पूरा नंगा देखना चाहता था.

मैं उनकी चूची और चुत दोनों देखना चाहता था और साथ में उनको चोदना भी चाहता था,

दीदी जब वापस रूम में आकर अपने पेटिकोट को घुटनों के ऊपर तक चढा कर बिस्तर पर बैठने लगी तो मैं बोला ” दीदी….दीदी…मैं….चू…चू…चूची भी देखना…चाहता हूँ”.

दीदी इस पर चौंकने का नाटक करती बोली “क्या मतलब…चूची भी देखनी है….चुत भी देखनी है….मतलब तू तो मुझे पूरा नंगा देखना चाहता है….हाय….बड़ा बेशर्म है….अपनी बड़ी बहन को नंगा देखना चाहता है….क्यों मैं ठीक समझी ना…तू अपनी दीदी को नंगा देखना चाहता है…बोल,

…ठीक है ना….” मैं भी शरमाते हुए दिखाते बोला “हां दीदी….मुझे आप बहुत अच्छी लगती हो….मैं….मैं आपको पूरा…नंगा देखना….चाहता…हु”

“बड़ा अच्छा हिसाब है तेरा….अच्छी लगती हो…..अच्छी लगने का मतलब तुझे नंगी होकर दिखाऊ…कपड़ो में अच्छी नहीं लगती हूँ क्या….”

“हाय दीदी मेरा वो मतलब नहीं था ….वो तो आपने कहा था….फिर मैंने सोचा….सोचा….”

“हाय भाई…तुने जो भी सोचा सही सोचा….मैं अपने भाई को दुखी नहीं देख सकती….मुझे ख़ुशी है की मेरा भाई अपनी बड़ी बहन को इतना पसंद करता है की वो नंगा देखना चाहता है….हाय….रेशु मैं तुझे पूरा नंगा होकर दिखाउंगी…..फिर तुम मुझे बताना की तुम अपनी दीदी के साथ क्या-क्या करना चाहते हो….”.

मेरे चेहरे पर मुस्कान और आँखों में चमक वापस आ गई.

दीदी बिस्तर से उतर कर नीचे खड़ी हो गई और हंसते हुए बोली

“पहले पेटिको़ट ऊपर उठाऊ या ब्लाउज खोलू…” मैंने मुस्कुराते हुए कहा “हाय दीदी दोनों….खोलो….पेटिको़ट भी और ब्लाउज भी….”

“इश…स……स…बेशर्म पूरा नंगा करेगा….चल तेरे लिए मैं कुछ भी कर दूंगी….अपने भाई के लिए कुछ भी…पहले ब्लाउज खोल लेती हूँ

फिर पेटिको़ट खोलूंगी….चलेगा ना…” गर्दन हिला कर दीदी ने पूछा तो मैंने भी सहमती में गर्दन हिलाते हुए अपने गालो को शर्म से लाल कर दीदी को देखा.

दीदी ने चटाक-चटाक ब्लाउज के बटन खोले और फिर अपने ब्लाउज को खोल कर पीछे की तरफ घूम गई और मुझे अपनी ब्रा का हूक खोलने के लिए बोला

मैंने अपने हाथो से उनके ब्रा का हूक खोल दिया.

दीदी फिर सामने की तरफ घूम गई.

दीदी के घूमते ही मेरी आँखों के सामने दीदी की मदमस्त,

गदराई हुई मस्तानी कठोर चूचियां आ गई.

मैं दूसरी बार अपनी दीदी के इन गोरे गुब्बारों को पूरा नंगा देख रहा था.

इतने पास से देखने पर गोरी चूचियां और उनकी ऊपर की नीली नसे,

भूरापन लिए हुए गाढे गुलाबी रंग की उसकी निप्पले और उनके चारो तरफ का गुलाबी घेरा जिन पर छोटे-छोटे दाने जैसा उगा हुआ था सब नज़र आ रहा था.

मैं एक दम कूद कर हाय करते हुए उछला तो दीदी मुस्कुराती हुई बोली

“अरे, रे इतना उतावला मत बन अब तो नंगा कर दिया है आराम से देखना….ले…देख…”

कहती हुई मेरे पास आई.

मैं बिस्तर पर बैठा हुआ था और वो निचे खड़ी थी इसलिए मेरा चेहरा उनके चुचियों के पास आराम से पहुँच रहा था.

मैं चुचियों को ध्यान से से देखते हुए बोला “हाय…दीदी पकडु…”

“हाँ…हाँ….पकड़ले जकड़…ले अब जब नंगा करके दिखा रही हूँ तो…छूने क्यों नहीं दूंगी….ले आराम से पकड़कर मजा कर……अपनी बड़ी बहन की नंगी चुचियों से खेल….” दोस्तो दीदी के साथ आज बहुत मजा आरहा था दीदी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी.
 
अपडेट 32

”मैंने अपने दोनों हाथ बढा कर दोनों बॉब्स को आराम से दोनों हाथो में थाम लिया.

नंगी बॉब्स के स्पर्श ने ही मेरे होश उड़ाये.

उफ्फ्फ दीदी की बूब्स कितनी गठीली और गुदाज थी,

इसका अंदाजा मुझे इन मस्तानी बॉब्स को हाथ में पकड़ कर ही हुआ.

मेरा लण्ड फडफडाने लगा.

दोनों बॉब्स को दोनों हथेलीयो में कसकर हलके दबाब के साथ मसलते हुए चुटकी में निप्पल को पकड़के हलके से दबाया जैसे किशमिश के दाने को दबाते है.

दीदी के मुंह से एक हलकी सी आह निकल गई.

मैंने घबरा कर बॉब्स छोड़ी तो दीदी ने मेरा हाथ पकड़ फिर से अपनी बॉब्स पर रखते हुए दबाया

तो मैं समझ गया की दीदी को मेरा दबाना अच्छा लग रहा है और मैं जैसे चाहू इनकी बॉब्स के साथ खेल सकता हूँ.

गर्दन उचका कर बॉब्स के पास मुंह लगा कर एक हाथ से बॉब्स को पकड़ दबाते हुए दूसरी बॉब्स को जैसे ही अपने होंठो से छुआ मुझे लगा जैसे दीदी गनगना गई उनका बदन सिहर गया.

मेरे सर के पीछे हाथ लगा बालों में हाथ फेरते हुए मेरे सर को अपनी बॉब्स पर जोर से दबाया.

मैंने भी अपने होंठो को खोलते हुए उसकी बॉब्स के निप्पल सहित जितना हो सकता था उतना उसकी बॉब्स को अपने मुंह में भर लिया और चूसते हुए अपनी जीभ को निप्पल के चारो तरफ घुमाते हुए चुम लीया तो दीदी सिसयाते हुए बोली

“आह….आ…हा….सी…सी….ये क्या कर रहा है…उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़…..मार डाला….”

अब तो मैं जैसे भूखा शेर बन गया और दीदी की बॉब्स को मुंह में भर ऐसे चूसने लगा जैसे सही में उसमे से रस निकल कर खा जाऊंगा.

कभी बाई बॉब्स को कभी दाहिनी बॉब्स को मुंह में भर भर कर लेते हुए निप्पलों को अपने होंठो के बीच दबा दबा कर चूसते हुए रबर की तरह खींच रहा था.

बॉब्स के निप्पल के चारो तरफ के घेरे में जीभ चलाते हुए जब दुसरे हाथ से दीदी के बॉब्स को पकड़ कर

दबाते हुए निप्पल को चुटकी में पकड़ कर खींचा तो मस्ती में लहराते हुए दीदी लड़खड़ाती आवाज़ में बोली

“हाय रेशु….सीईई…ई…उफ्फ्फ्फ्फ्फ….चूसले…..पूरा रस चूस…..मजा आरहा है….तेरी दीदी को बहुत मजा आरहा है रेशु…..हाय तू तो बॉब्स को क्रिकेट की गेंद समझकर दबा रहा है….मेरे निप्पल क्या मुंह में ले चूस….तू बहुत अच्छा चूसता है….

हाय मजा आ गया रेशु….पर क्या तू बॉब्स ही चूसता रहेगा…..चुत नहीं देखेगा अपनी दीदी की चुत नही देखनी है तुझे…..हाय उस समय से मरा जा रहा था और अभी….जब बॉब्स मिल गई तो उसी में खो गया है….हाय चल बहुत दूध पीलिया…..अब बाद में पीना”

मेरा मन अभी भरा नहीं था इसलिए मैं अभी भी बॉब्स पर मुंह मारे जा रहा था.

दीदी पूरी तरह डुब गई थी और कुछ भी बोल रही थी जो अमूमन नॉर्मली नही बोलती पर कहते है ना सेक्स में हम अपना कैरेक्टर पूरी तरह भूल जाते है

कुछ याद नही रहता सिर्फ अपनी संतुष्टि किस तरह हो यही याद रहता है

मेरी दीदी जो वैसे तो पूरी शालीन है पर इस वक्त कोई उसे देखे जो अपने स्वभाव के एकदम विपरीत हरकते कर रही है

पूरी तरह सेक्स में डूबी हुई लग रही है मैंने सारी सोच को दिमाग से हटा कर दीदी के बूब्स पर ध्यान दिया

इस पर दीदी ने मेरे सर के बालों को पकड़ कर पीछे की तरफ खींचते हुए अपनी बॉब्स से मेरा मुंह अलग किया और बोली

“हाई रेशु….बॉब्स…छोड़….कितना दूध पिएगा….हाय.

दीदी लगता था अब गरम हो चूँकि थी और चुदवाना चाहती थी.

मैं पीछे हट गया और दीदी के पेट पर किस ले कर बोला

दीदी अब बचे हुए कपड़े तो निकालो दीदी बोली तू खुद ही निकाल ले तब मैंने पेटीकोट का नाडा खींच दिया

पेटिको़ट सरसराते हुए निचे गिरता चला गया

पैंटी तो पहनी नहीं थी इसलिए पेटिको़ट के निचे गिरते ही दीदी पूरी नंगी हो गई.

मेरी नजर उनके दोनों जन्घो के बीच चुत पर गई.

दोनों चिकनी एकदम सफेद गुलाबी टांगो के बीच में दीदी की चुत नज़र आ रहा थी.

दीदी की गोरी गुलाबी चुत बहुत प्यारी लग रही थी. दोनों जांघ थोडी अलग थी चुत के लिप्स अंदर की और थे दीदी की कमर को पकड़कर सर को झुकाते हुए चुत के पास ले जाकर देखने की कोशिश की

तो दीदी अपने आप को छुड़ाते हुए बोली

“हाय…रेशु ऐसे नहीं….ऐसे ठीक से नहीं देख पाओगे….दोनों पैर फैला कर अभी दिखाती हूँ…फिर आराम से बैठकर मेरी चुत को देखना …घबरा मत रेशु…मैं तुझे अपनी चुत पूरी खोल कर दिखाउंगी

…चल छोड़ कहते हुए पीछे मुड़ी.

पीछे मुड़ते ही दीदी की एप्पल शेप गांड मेरी आँखों के सामने नज़र आ गई.

दीदी चल रही थी और उसकी गांड थिरकते हुए हिल रही थी

और आपस में चिपके हुये दोनों पार्ट हिलते हुए ऐसे लग रहे थे जैसे आपस मे बात कर रहे हो

और मेरे लंड को पुकार रहे हो.

लंड दुबारा अपनी पूरी औकात पर आ चूका था और फनफना रहा था.

दीदी ड्रेसिंग टेबल के पास रखि गद्देदार सोफे वाली कुर्सी पर बैठ गई और हाथो के इशारे से मुझे अपने पास बुलाया और बोली

“हाय…रेशु…आजा तुझे मजे करवाती हूँ….देख रेशु मैं इस कुर्सी के दोनों हत्थों पर अपनी दोनों टांगो को रखकर जांघ टिकाकर फैलाऊंगी

ना तो मेरी चुत पूरी उभरकर सामने आ जायेगी

और फिर तुम उसके दोनों लिप्स को अपने हाथ से फैलाकर अन्दर चाटना….इस तरह से तुम्हारी जीभ पूरी चुतके अन्दर घुस जायेगी….

ठीक है रेशु…आजा….जल्दीकर…..” “यह मेरी फैंटसी थी पर तुम्हारे जीजाजी को चुत चाटना पसंद नही

” मैं जल्दी से बिस्तर छोर दीदी की कुर्सी के पास गया और जमींन पर बैठ गया.
 
अपडेट 33

दीदी ने अपने दोनों पैरो को कुर्सी के हत्थों के ऊपर चढा कर अपनी दोनों जांघो को फैला दिया.

टांगो के फैलाते ही दीदी की चुत उभर कर मेरी आँखों के सामने आ गई.

उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़….क्या खूबसूरत चुत थी.

गोरी गुलाबी….बिना बालो वाली एकदम सफाचट.

एक दम पावरोटी के जैसी फूली हुई चुत थी.

दोनों पैर कुर्सी के हत्थों के ऊपर चढा कर फैला देने के बाद भी चुत के दोनों होंठ अलग नहीं हुए थे. .

मैं जमीन पर बैठ कर दीदी के दोनों टांगो पर दोनों हाथ रख कर गर्दन झुका कर एक दम ध्यान से दीदी की चुत को देखने लगा.

चुत के दोनों फांको पर अपना हाथ लगा कर दोनों फांको को हल्का सा फैलाती हुई दीदी बोली “रेशु….ध्यान से देखले….अच्छी तरह से अपनी दीदी की चुत को देख …. ….….” दीदी के चुत के दोनों होंठ फ़ैल और सिकुड रहे थे.

मैंने अपनी गर्दन को झुका दिया और जीभ निकल कर सबसे पहले चुत के आस पास वाले भागो को चाटने लगा.

टांगों के जोड और जांघो को भी चाटा.

जांघो को हल्का हल्का काटा भी फिर जल्दी से दीदी की चुत पर अपने होंठो को रख कर एक किस लिया और जीभ निकाल कर पूरी दरार पर एक बार चलाया.

जीभ चलाते ही दीदी सिसया उठी और बोली

“सीईई….बहुत अच्छा रेशु…. ऐसेही….रेशु तुने शुरुआत बहुत अच्छी कीहै….अब पूरी चुत पर अपनी जीभ फिराते हुए…चाट मुझे बताने की जरुरत तो नहीं थी पर दीदी ने ये अच्छा किया था की मुझे बता दिया था की कहाँ से शुरुआत करनी है.

मैंने अपने होंठो को खोलते हुए टीट को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया.

टीट को होंठो के बीच दबा कर अपनी दांतों से हलके हलके काटते हुए मैं उस पर अपने होंठ रगड रहा था.

टीट और उसके आस पास ढेर सारा थूक लग गया था और एक पल के लिए जब मैंने वहा से अपना मुंह हटाया तो देखा की मेरी चुसाई के कारण टीट चमकने लगी है.

एक बार और जोर से टीट को पूरा मुंह में भर कर किस लेने के बाद मैंने अपनी जीभ को कडा करके पूरी चुत की दरार में ऊपर से निचे तक चलाई और फिर चुत के एक फांक को अपने दाहिने हाथ की उँगलियों से पकड कर हल्का सा फैलाया.

चुत की गुलाबी छेद मेरी आँखों के सामने थी.

जीभ को टेढा कर चुत के स्माल लिप्स को अपने होंठो के बीच दबा कर चूसने लगा.

फिर दूसरी लिप्स को अपने मुंह में भर कर चूसा उसके बाद दोनों लिप्स को आपस में सटा कर पूरी चुत को अपने मुंह में भर कर चूसने लगा.

चुत से रिस रिस कर पानी निकल रहा था और मेरे मुंह में आ रहा था.

चुत का नमकीन पानी शुरू में तो उतना अच्छा नहीं लगा पर कुछ देर के बाद मुझे कोई फर्क नहीं पड रहा था और मैं दुगुने जोश के साथ पूरी चुत को मुंह में भर कर चाट रहा था.

दीदी को भी मजा आ रहा था और वही कुर्सी पर बैठे-बैठे अपने गांड को ऊपर

उछालते हुए वो जोश में आ कर मेरे सर को अपने दोनों हाथो से अपनी चुत पर दबाते हुए बोली

“हाय रेशु….बहुत अच्छा कर रहा है उछालते हुए वो जोश में आ कर मेरे सर को अपने दोनों हाथो से अपनी चुत पर दबाते हुए बोली

“हायरेशु….बहुत अच्छा कर रहा है….राजा…..हाय……सीईई….बड़ा मजा आर हा है….हाय मेरी चुत ….मेरे भैयां…..ऊऊऊउ…सीईईइ…..खाली ऊपर-ऊपर से चूस रहा है….….जीभ अन्दर घुसाकर चाटना…..चुत में जीभ पेल दे और अन्दर बाहर कर के जीभ से मेरी चुत चोदते हुए अच्छी तरह से चाट….अपनी बहन की चुत अच्छी तरह से चाट मेरे राजा…. ….लेले…..ऊऊऊऊ……इस्स्स्स्स्स…घुसा चुत में जीभ….चाट….दे…….” कोमल दीदी बहुत जोश में आ चुकी थी और लग रहा था की उनको काफी मजा आ रहा है.

उनके इतना बोलने पर मैंने दोनों हाथो की उँगलियों से दोनों लिप्स को अलग कर के अपनी जीभ को कड़ा करके चुत में पेल दिया.

जीभ को चुत के अन्दर बाहर करते हुए लिबलिबाने लगा और बीच बीच में चुत से चूत के रस को जीभ टेढा करके चूसने लगा.

दीदी की दोनों जांघे हिल रही थी और मैं दोनों जांघो को कस कर हाथ से पकड कर चुत में जीभ डाल रहा था.

जांघो को मसलते हुए बीच बीच में जीभ को आराम देने के लिए मैं जीभ निकाल कर जांघो और उसके आस-पास किस लेने लगता था.

मेरे ऐसा करने पर दीदी जोर से गुर्राती और फिर से मेरे बालों को पकर कर अपनी चुत के ऊपर मेरा मुंह लगा देती थी.

दीदी मेरी चुसने से बहुत खुश थी और चिल्लाती हुई बोल रही थी “हाय….रेशु…जीभ बाहर मत निकालो….हाय बहुत मजा आ रहा है…ऐसेही…..अपनी जीभ से अपनी दीदी की चुत चोद दे….हाय भैयां….बहुत मजा आया है…...तेरा लंड अपनी चुत में लुंगी….….अपनी चुत तेरे से मरवाऊगीं….मेरे रेशु…..मेरे सोनामोना….मन लगा कर दीदी की चुत चाट….मेरा पानी निकलेगा….तेरेमुंहमें….हाय जल्दी जल्दी चाट पुरी जीभ अन्दर डाल कर सीईई…..”.

दीदी को क्या पता मैं उसको ही नही उसकी माँ को भी चोद चूका हूँ पर जो मजा नादान बनने में है वह समझदार बनने में कहा

दीदी पानी छोडने वाली है ये जान कर मैंने अपनी पूरी जीभ चुत के अन्दर पेल दी

और अंगूठे को टीट के उ़पर रख कर रगडते हुए जोर जोर से जीभ अन्दर बाहर करने लगा.

दीदी अब और तेजी के साथ गांड उछल रही थी और मैं लप लप करते हुए जीभ को अन्दर बाहर कर रहा था.

कुत्ते की तरह से दीदी की चुत चाटते हुए टीट को रगडते हुए कभी कभी दीदी की चुत पर दांत भी गडा देता था,

मगर इन सब चीजों का दीदी के ऊपर कोई असर नहीं पड रहा था और वो मस्ती में अब गांड को हवा में लहराते हुए सिसीया रही थी “
 
अपडेट 34

थी “हाय मेरा निकल रहा है….हाय रेशु…निकल रहा है मेरा पानी पूरी जीब घुसादे….…..बहुत अच्छा….ऊऊऊऊऊ…..सीईईईईईइ….मजा आगया राजा…मेरे चुत चाटू भैयां….मेरी चुत पानी छोड रही है………..इस्स्स्स्स्स्स्स्स……मजा आगया….….पीले अपनी दीदी के चुत का पानी….हाय चूसले अपनी दीदी की जवानी का रस…..ऊऊऊऊ…….……” दीदी अपनी गांड को हवा में लहराते हुए झडने लगी और उसकी चुत से पानी बहता हुआ मेरी जीभ को गीला करने लगा.

मैंने अपना मुंह दीदी की चुत पर से हटा दिया और अपनी जीभ और होंठो पर लगे चुत के पानी को चाटते हुए दीदी को देखा.

वो अपनी आँखों को बंद किये शांत पड़ी हुई थी और अपनी गर्दन को कुर्सी के पुश्त पर टिका कर ऊपर की ओर किये हुए थी.

उसकी दोनों जांघे वैसे ही फैली हुई थी. पूरी चुत मेरी चुसने के कारण गुलाबी से लाल हो गई थी और मेरे थूक और लार के कारण चमक रही थी.

दीदी आंखे बंद किये गहरी सांसे ले रही थी और उनके माथे और छाती पर पसीने की छोटी-छोटी बुँदे चमक रही थी.

मैं वही जमीन पर बैठा रहा और दीदी की चुत को गौर से देखने लगा.

दीदी को सुस्त पड़े देख मुझे और कुछ नहीं सूझा तो मैं उनके जांघो को चाटने लगा.

चूँकि दीदी ने अपने दोनों पैरों को मोड़ कर जांघो को कुर्सी के पुश्त से टिका कर रखा हुआ था इसलिए वो एक तरह से पैर मोड़ कर अधलेटी सी अवस्था में बैठी हुई थी और दीदी की गांड आधी कुर्सी पर और आधी बाहर की तरफ लटकी हुई थी.

ऐसे बैठने के कारण उनके गांड का हल्का गुलाबी छेद मेरी आँखों से सामने थी. छोटी सी गुलाबी रंग की सिकुडी हुई छेद किसी फूल की तरह लग रही थी और मेरे लिए अपना सपना पूरा करने का इस से अच्छा अवसर नहीं था.

मैं हलके से अपनी एक ऊँगली को दीदी की चुत के मुंह के पास ले गया और चुत के पानी में अपनी ऊँगली गीली कर के गांड के दरार में ले गया.

दो तीन बार ऐसे ही करके पूरी गांड की खाई को गीला कर दिया फिर अपनी ऊँगली को पूरी खाई में चलाने लगा.

धीरे धीरे ऊँगली को गांड की छेद पर लगा कर हलके-हलके केवल छेद की मालिश करने लगा.

कुछ देर बाद मैंने थोडा सा जोर लगाया और अपनी ऊँगली के एक पोर को गांड की छोटी सी छेद में घुसाने की कोशिश की.

ज्यादा तो नहीं मगर बस थोड़ी सी ऊँगली घुस गई मैंने फिर ज्यादा जोर नहीं लगाया और उतना ही घुसा कर अन्दर बाहर करते हुए गांड की छेद की मालिश करने लगा.

बड़ा मजा आ रहा था.

मेरे दिल की तम्मना पूरी हो गई.

दीदी की गांड कुँवारी थी उंगली भी नही घुस रही थी बाथरूम में नहाते समय जब दीदी को देखा था तभी से सोच रहा था की एक बार दीदी की गांड जरूर मारूंगा

में तब तक इसके छेद में ऊँगली डाल कर देखूंगा कैसा लगता है इस सिकुडी हुई गुलाबी रंग के छेद में ऊँगली डालने पर.

पर गांड की सिकुडी हुई छेद इतनी टाइट लग रही थी की मुझे लगा जब मेरा लण्ड उसके अन्दर घुसेगा तो बहोत मजा आएगा.

खैर दो तीन मिनट तक ऐसे ही मैं करता रहा.

दीदी की चुत से पानी बाहर की और निकल कर धीरे धीरे रिस रहा था.

मैंने दो तीन बार अपना मुंह लगा कर बाहर निकलते रस को भी चाट लिया और गांड में धीरे धीरे ऊँगली करता रहा.

तभी दीदी ने मुझे पीछे धकेला “हटो…….क्या कर रहा है….गांड पर नजर है क्या? वहा नही करूंगी बहोत दर्द होगा वहा….फिर अपने पैर से मेरी छाती को पीछे धकेलती हुई उठ कर खड़ी हो गई.

मैं हड़बड़ाता हुआ पीछे की तरफ गिरा फिर जल्दी से उठ कर खड़ा हो गया.

मेरा लण्ड पूरा खड़ा हो कर नब्बे डिग्री का कोण बनाते हुए लप-लप कर रहा था मगर दीदी के इस अचानक हमले ने फिर एक झटका दिया.

मैं दो कदम पीछे हुआ. दीदी नंगी ही बाहर निकल गई लगता था फिर से बाथरूम गई थी. मैं वही खड़ा सोचने लगा की अब क्या होगा.

थोड़ी देर बाद दीदी फिर से अन्दर आई और बिस्तर पर बैठ गई और मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखा फिर मेरे खड़े लण्ड को देखा और अंगराई लेती हुई बोली

“हाय रेशु बहुत मजा आया….अच्छा चूसता है…तू…. मुझे लग रहा था की तू अनाडी होगा मगर तुने तो अपने जीजाजी को भी मात कर दिया….उन को चूसना पसन्द नही लेकिन मेरी बहुत इच्छा थी कि मेरी चुत वह चूसे पर कोई बात नही तुमने मेरी इच्छा पूरी की थैंक्स…खैर उनका क्या इधर काम आ,………वहां क्यों खड़ा है रेशु…..….” दीदी के इस तरह बोलने पर मुझे शांति मिली की चलो नाराज़ नहीं है और मैं बिस्तर पर आ कर बैठ गया.

दीदी मेरे लण्ड की तरफ देखती बोली “कितना लंबा और मोटा है एकदम खड़ा हो गया है…..” रात में कितना मजा दिया है इसने

मैं तो इसकी दीवानी हो गई हूं अब तुझे मेरी प्यास बुझानी होगी

मैं खिसक कर पास में गया तो मेरे लण्ड को मुठ्ठी में कसकर उसने कुछ देर ऊपर निचे किया.

लाल-लाल सुपाड़े पर से चमडी खिसका. उस पर ऊँगली चलाती हुई बोली

“हाय रे मेरा सोना….मेरे प्यारे रेशु…. तुझे दीदी अच्छी लगती है…. मेरे प्यारे रेशु ….मेरे राजा….आज दिन और रात भर अपने मोटे लण्ड से अपनी दीदी की चुत का बाजा बजाना……अपने भाई का लण्ड अपनी चुत में लेकर मैं सोऊगीं……हाय राजा…॥अपने मुसल से अपनी दीदी की ओखली को खूब कूटना….. …..चल आजा…..आज फिर मुझे जन्नत की सैर करा दे…..” फिर दीदी ने मुझे धकेल कर निचे लिटा दिया

और मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठो को चूसती हुई अपनी बेल शेप बॉब्स को मेरी छाती पर रगड़ते हुए मेरे बालों में अपना हाथ फेरते हुए चूमने लगी. मैं भी दीदी के होंठो को अपने मुंह में भरने का प्रयास करते हुए अपनी जीभ को उनके मुंह में घुसा कर घुमा रहा था.

मेरा लण्ड दीदी की दोनों जांघो के बीच में फस कर उसकी चुत के साथ रगड़ खा रहा था.

दीदी भी अपनी गांड नचाते हुये मेरे लण्ड पर अपनी चुत को रगड़ रही थी और कभी मेरे होंठो को चूम रही थी कभी मेरे गालो को काट रही थी.

कुछ देर तक ऐसे ही करने के बाद मेरे होंठो को छोड उठ कर मेरी कमर पर बैठ गई.

और फिर आगे की ओर सरकते हुये मेरी छाती पर आकर अपनी गांड को हवा में उठा लिया और अपनी गुलाबी खुश्बुदार चुत को मेरे होंठो से सटाती हुई बोली

“जरा चाटकर गीला करदे… बड़ा तगड़ा लण्ड है तेरा…सुखा लुंगी तो…..फट जायेगी मेरी तो…..”
 
अपडेट 35

एक बार मुझे दीदी की चुत का स्वाद मिल चूका था, इसके बाद मैं कभी भी उसकी गुदाज फूल जैसी चुत को चाटने से इंकार नहीं कर सकता था, मेरे लिए तो दीदी की चुत रस का खजाना थी.

तुंरत अपने जीभ को निकाल कर गांड पर हाथ जमा कर चुत चाटने लगा.

इस अवस्था में दीदी की गांड को मसलने का भी मौका मिल रहा था और मैं दोनों हाथो की मुठ्ठी में गांड के मांस को पकड़ते हुए मसल रहा था और चुत की लकीर में जीभ चलाते हुए अपनी थूक से चुत के छेद को गीला कर रहा था. वैसे दीदी की चुत भी ढेर सारा रस छोड़ रही थी.

जीभ डालते ही इस बात का अंदाज हो गया की पूरी चुत पसीज रही है, इसलिए दीदी की ये बात की वो चुत को गीली कर रही थी हजम तो नहीं हुई,

मगर मेरा क्या बिगड रहा था मुझे तो जितनी बार कहती उतनी बार चाट देता कुछ ही देर दीदी की चुत मेरी थूक से गीली हो गई.

दीदी दुबारा से गरम भी हो गई और पीछे खिसकते हुए वो एक बार फिर से मेरी कमर पर आ कर बैठ गई और अपने हाथ से मेरे मोठे खड़े सख्त लण्ड को अपनी मुठ्ठी में कसकर हिलाते हुए अपनी गांड को हवा में उठा लिया और लण्ड को चुत के होंठो से सटा कर सुपाड़े को रगड़ने लगी.

सुपाड़े को चुत के फांको पर रगड़ते चुत के रिसते पानी से लण्ड के टोपे को गीला कर रगड़ती रही.

मैं बेताबी से दम साधे इस बात का इन्तेज़ार कर रहा था की कब दीदी अपनी चुत में मेरा लंड लेती है.

मैं निचे से धीरे-धीरे गांड उछाल रहा था और कोशिश कर रहा था की मेरा सुपाड़ा उनके चुत में घुस जाये.

मुझे गांड उछालते देख दीदी मेरे लण्ड के ऊपर मेरे पेट पर बैठ गई और चुत की पूरी लम्बाई को लंड की औकात पर चलाते हुए रगड़ने लगी तो मैं सिसियाते हुए बोला “दीदी प्लीज़….ओह….सीईई अब नहीं रहा जा रहा है….जल्दी से अन्दर कर दो…..उफ्फ्फ्फ्फ्फ……ओह दीदी….बहुत अच्छा लग रहा है….और तुम्हारी चु…चु….चु….चुत मेरे लण्ड पर बहुत गर्म लग रही है…

ओह दीदी…जल्दी करो ना….क्या तुम्हारा मन नहीं कर रहा है…..” अपनी गांड नचाते हुए लण्ड पर चुत रगड़ते हुए दीदी बोली “हाय…रेशु जब इतना इन्तेजार किया है तो थोड़ा और इन्तेजार कर लो….देखते रहो….मैं कैसे करती हूँ….मैं कैसे तुम्हे जन्नत की सैर कराती हूँ….मजा नहीं आये तो अपना लंड मेरी गांड में घुसेड़ देना…..….अभी देखो मैं तुम्हारा लण्ड कैसे अपनी चुत में लेती हूँ…..…घबराओ मत…..रेशु अपनी दीदी पर भरोसा रखो….ये मेरा पहली बार है तुम्हारे जीजा बस सिम्पल सी चुदाई करते है चुदाई क्या होती है वह मैं तुमसे सिख पाई हु मैं तुम्हारी दीवानी हो गई हूं अब तुम्हारे सिवा चुदाई में मजा नही आएगा अब तुम्हे ही मेरी प्यास बुझानी पडेगी …” फिर अपनी गांड को लण्ड की लम्बाई के बराबर ऊपर उठा कर एक हाथ से लण्ड पकड़ सुपाड़े को चुत की दोनों लिप्स के बीच लगा दुसरे हाथ से अपनी चुत के एक लिप्स को पकड़ कर फैला कर लण्ड के सुपाड़े को उसके बीच फिट कर ऊपर से निचे की तरफ कमर का जोर लगाया. चुत और लण्ड दोनों गीले थे. मेरे लण्ड का सुपाड़ा वो पहले ही चुत के पानी से गीला कर चुकी थी इसलिए सट से मेरा पहाड़ी आलू जैसा लाल सुपाड़ा अन्दर दाखिल हुआ. तो उसकी चमडी उलट गई. मैं आह करके सिसकी ली तो दीदी बोली “बस हो गया रेशु…हो गया….एक तो तेरा लण्ड इंतना मोटा है…..मेरी चुत एकदम छोटी है….घुसाने में….येले बस एक दो तीन और….उईईईइमाँ…..सीईईईई….….इतना मोटा…..हाय…तेरे जीजा का इससे आधा है मुझे तो वह भी बहोत बडा लगता था ययय…..उफ्फ्फ्फ्फ़….” करते हुए गप गप दो तीन धक्का अपनी गांड उचकाते उछालते हुए लगा दिए. पहले धक्के में केवल सुपाड़ा अन्दर गया था दुसरे में मेरा आधा लण्ड दीदी की चुत में घुस गया था, जिसके कारण वोउईईईमाँ करके चिल्लाई थी मगर जब उन्होंने तीसरा धक्का मारा था तो सच में उसकी गांड भी फट गई होगी ऐसा मेरा सोचना है. क्योंकि उसकी चुत एकदम टाइट मेरे लण्ड के चारो तरफ कस गई थी और खुद मुझे थोड़ा दर्द हो रहा था और लग रहा जैसे लण्ड को किसी गरम भट्टी में घुसा दिया हो. मगर दीदी अपने होंठो को अपने दांतों तले दबाये हुए कच-कच कर गांड तक जोर लगाते हुए धक्का मारती जा रही थी. तीन चार और धक्के मार कर उन्होंने मेरा पूरा नौ इंच का लण्ड अपनी चुत के अन्दर धांस लिया और मेरे छाती के दोनों तरफ हाथ रख कर धक्का लगाती हुई चिल्लाई “उफ्फ्फ्फ्फ़….….कैसा मोटा लंड पाल रखा है….ईई….हाय…. फट गई मेरी तो…...सीईईईइ…..रेशु आज तुने….अपनी दीदी की फाड दी….ओह सीईईई….….उईईइमाँ…..गई मेरी चुत आज के बाद…किसी के काम की नहीं रहेगी….है….हाय बहुत दिन संभाल के रखा था….फट गई….मेरी तो हाय मरी….” इस तरह से बोलते हुए वो ऊपर से धक्का भी मारती जा रही थी और मेरा लण्ड अपनी चुत में लेती भी जा रही थी तभी अपने होंठो को मेरे होंठो पर रखती हुई जोर जोर से चूमती हुई बोली“हाय….….आरामसे निचे लेट कर चुत का मजा ले रहा है…….मेरी चुत में गरम लोहे का राँड घुसाकर गांड उचका रहा है….उफ्फ्फ्फ्फ्फ…रेशु अपनी दीदी को कुछ आराम दो….हाय मेरी दोनों लटकती हुई बूब्स तुम्हे नहीं दिख रही है क्या…उफ्फ्फ्फ्फ़…उनको अपने हाथो से दबाते हुए मसलो और….मुंह में लेकर चूसो रेशु….इस तरह से मेरी चुत गीली होने लगेगी और उसमे और ज्यादा गीलापन बनेगा…फिर तुम्हारा लंड आसानी से अन्दरबाहर होगा….हाय रेशु ऐसा करो मेरे राजा….तभी तो दीदी को मजा आएगा और….वो तुम्हे जन्नत की सैर कराएगी….सीईई…” दीदी के ऐसा बोलने पर मैंने दोनों हाथो से दीदी की दोनों लटकती हुई ठोस बॉब्स को अपनी मुठ्ठी में कैद करने की कोशिश करते हुए दबाने लगा और अपनी गर्दन को थोड़ा निचे की तरफ झुकाते हुए एक बॉब्स को मुंह में भरने की कोशिश की.

हो तो नहीं पाया मगर फिर भी निप्पल मुंह में आ गया उसी को दांत से पकड़ कर खींचते हुए चूसने लगा.

दीदी अपनी गांड अब नहीं चला रही थी वो पूरा लंड घुसा कर वैसे ही मेरे ऊपर लेटी हुई अपने बॉब्स दबवा और निप्पल चुसवा रही थी.
 
अपडेट 35

उनके माथे पर पसीने की बुँदे छलछला आई थी.

मैंने दीदी के चेहरे को अपने दोनों हाथो से पकड़ कर उनका माथा चूमने लगा और जीभ निकल कर उनके माथे के पसीने को चाटते हुए उसकी आँखों को

चुमते हुए नाक और उसके निचे होंठो के ऊपर जो पसीने की छोटी छोटी बुँदे जमा हो गई थी उसके नमकीन पानी पर जीभ फिराते हुए चाटा और फिर होंठो को अपने होंठो से दबोच कर चूसने लगा.

दीदी भी इस काम में मेरा पूरा सहयोग कर रही थी और अपनी जीभ को मेरे मुंह में डाल कर घुमा रही थी.

कुछ देर में मुझे लगा की मेरे लंड पर दीदी की चुत का कसाव थोड़ा ढीला पड गया है.

लगा जैसे एक बार फिर से दीदी की चुत से पानी रिसने लगा है.

दीदी भी अपनी गांड उछालने लगी थी.

ये इस बात का सिग्नल था का दीदी की चुत में अब मेरा लण्ड एडजस्ट कर चूका है.

धीरे-धीरे उसकी कमर हिलाने की गति में तेजी आने लगी.

थप-थप आवाज़ करते हुए उसकी जान्घे मेरी जांघो से टकराने लगी और मेरा लण्ड सटासट अन्दर बाहर होने लगा.

मुझे लग रहा था जैसे चुत की दीवारें मेरे लण्ड को जकड़े हुए मेरे लण्ड की चमडी को सुपाड़े से पूरा निचे उतार कर रगडती हुई अपने अन्दर ले रही है. मेरा लण्ड शायद उसकी चुत की अंतिम छोर तक पहुच जाता था.

दीदी पूरा लण्ड सुपाड़े तक बाहर खींच कर निकाल लेती फिर अन्दर ले लेती थी.

दीदी की चुत वाकई में बहुत टाइट लग रही थी.

गजब का आनंद आ रहा था. ऐसा लग रहा था जैसे किसी बोत्तल में मेरा लंड एक कॉर्क के जैसे फंसा हुआ अन्दर बाहर हो रहा है.

दीदी को अब बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था ये बात उनके मुंह से फूटने वाली सिस्कारियां बता रही थी. वो सीसियते हुए बोल रही थी “आआआ…….सीईईईइ…..रेशु बहुत अच्छा लंड है तेरा…..हाय एकदम टाइट जा रहाहै…….सीईईइ हाय मेरी….चुत…..ओहहो….ऊउउऊ….बहुत अच्छा से जा रहा है…हाय….गरम लोहे के रॉड जैसा है….हाय….कितना तगड़ा लंड है….. हाय रेशु मेरे भैया…तुम को मजा आ रहा है….हाय अपनी दीदी की टाइट चुतको चोदने में…हाय रेशु बताना….कैसा लग रहा है मेरे राजा….क्या तुम्हे अपनी दीदी की चुत की लिप्स के बीच लंड दालकर चोदने में मजा आरहा है…..हाय मेरे चोदु….अपनी बहन को चोदने में कैसा लग रहा है….बताना….अपनी बहन को…. मजा आ रहा…सीईईई….ऊऊऊऊ….” दीदी गांड को हवा में लहराते हुए जोर जोर से मेरे लण्ड पर पटक रही थी.

दीदी की चुत में ज्यादा से ज्यादा लंड अन्दर डालने के इरादे से मैं भी निचे से गांड उचका-उचका कर धक्का मार रहा था.

कच कच चुत में लण्ड डालते हुए मैं भी सिसयाते हुए बोला “ओहसीईईइ….दीदी….….ओह बहुत मजा…..ओहआई……ईईईइ….मजा आ रहा है दीदी….उफ्फ्फ्फ्फ़…बहुत गरम है आपकी चुत….ओह बहुत कसी हुई….है…….मेरे लण्ड को छिल….देगी आपकी चुत….उफ्फ्फ्फ्फ़….एकदम गद्देदार है… चुत है दीदी आपकी…हाय टाइट है….हाय दीदी आपकी चुत में मेरा पूरा लण्ड जा रहा है….सीईईइ…..मैंने कभी सोचा नहीं था की मैं आपकी चुत में अपना लंड डाल पाउँगा….हाय….. उफ्फ्फ्फ्फ़… कितनी गरमहै….. मेरी सुन्दर…सेक्सी दीदी….ओह बहुत मजा आ रहा है….ओह आप….ऐसे ही चोदती रहो…ओह….सीईईई….हाय सच मुझे आपने जन्नत दिखा दिया….सीईईई… चोद दो अपने भाई को….” मैं सिसिया रहा था और दीदी ऊपर से लगातार धक्के पर धक्का लगाए जा रही थी. अब चुत से फच फच की आवाज़ भी आने लगी थी और मेरा लण्ड सटा-सट चुत के अन्दर जा रहा था. पुरे सुपाड़े तक बाहर निकाल कर फिर अन्दर घुस जा रहा था.

मैंने गर्दन उठा कर देखा की चुत के पानी में मेरा चमकता हुआ लंड लप से बाहर निकलता और चुत के दीवारों को कुचलता हुआ अन्दर घुस जाता.

दीदी की गांड हवा लहराती हुई थिरक रही थी और वो अब अपनी गांड को नचाती हुई निचे की तरफ लाती थी और लण्ड पर जोर से पटक देती थी फिर पेट अन्दर खींच कर चुत को कसती हुई लण्ड के सुपाड़े तक बाहर निकाल कर फिर से गांड नचाती निचे की तरफ धक्का लगाती थी.

बीच बीच में मेरे होंठो और गालो को चूमती और गालो को दांत से काट लेती थी. मैं भी दीदी की गांड को दोनो हाथ की हथेली से मसलते हुए चुदाई का मजा लूट रहा था.

दीदी गांड नचाती धक्का मारती बोली “रेशु….मजा आ रहाहै….हाय….बोलना….दीदी को चोदने में कैसा लग रहा है रेशु….….बहुत मजा दे रहा है तेरा लंड…..मेरी चुत में एकदम टाइट जा रहा है….सीईईइ….….इतनी दूर तक आजतक…..मेरी चुत में लौड़ा नहीं गया….हाय…खूब मजा दे रहा है…. ….हाय मेरे राजा….तू भी निचे से गांड उछालना….हाय….अपनी दीदी की मदद कर….सीईईईइ…..मेरे भैयां…..जोर लगाके धक्का मार…हाय बहनचोद….चोद दे अपनी दीदी को….चोददे… ओहआई……ईईईइ…” दीदी एकदम पसीने से लथपथ हो रही थी और धक्का मारे जा रही थी.

लौड़ा गचा-गच उसकी चुत के अन्दर बाहर हो रहा था और अनाप शनाप बकते हुए दाँत पिसते हुए पूरा गांड तक का जोर लगा कर धक्का लगाये जा रही थी.

कमरे में फच-फच…गच-गच…थप-थप की आवाज़ गूँज रही थी. दीदी के पसीने की मादक गंध का अहसास भी मुझे हो रहा था.

तभी हांफते हुए दीदी मेरे बदन पर पसर गई.

“हाय…थका दिया तुने तो…..मेरी तो एकबार निकल भी गई तेरा एकबार भी नहीं निकला…हाय…अब तुम ऊपर आजाओ.

” कहते हुए मेरे ऊपर से निचे उतर गई. मेरा लण्ड सटाक से पुच्च की आवाज़ करते हुए बाहर निकल गया.

दीदी अपनी दोनों टांगो को उठा कर बिस्तर पर लेट गई और जांघो को फैला दिया. चुदाई के कारण उसकी चुत गुलाबी से लाल हो गई थी.

दीदी ने अपनी जांघो के बीच आने का इशारा किया.

मेरा लपलपाता हुआ खड़ा लण्ड दीदी की चुत के पानी में गीला हो कर चमचमा रहा था.

मैं दोनों जांघो के बीच पंहुचा तो मुझे रोकते हुए दीदी ने पास में पडे अपने पेटिकोट के कपड़े से मेरा लण्ड पोछ दिया और उसी से अपनी चुत भी पोछ ली फिर मुझे डालने का इशारा किया.

ये बात मुझे बाद में समझ में आई की उन्होंने ऐसा क्यों किया.

उस समय तो मैं जल्दी से जल्दी उसकी चुत के अन्दर घुस जाना चाहता था.

दोनों जांघो के बीच बैठ कर मैंने अपना लौड़ा चुत के गुलाबी छेद पर लगा कर कमर का जोर लगाया.

सट से मेरा सुपाड़ा अन्दर घुसा. चुत एक दम गरम थी. तमतमाए लंड को एक और जोर दार झटका दे कर पूरा पूरा चुत में उतारता चला गया.

लण्ड सुखा था चुत भी सूखी थी. सुपाड़े की चमरी फिर से उलट गई और मुंह से आह निकल गई मगर मजा आ गया.

चुत जो अभी दो मिनट पहले थोडी ढीली लग रही थी फिर से किसी बोतल के जैसे टाइट लगने लगी. एक ही झटके से लण्ड पेलने पर दीदी चिल्लाने लगी थी.

मगर मैंने इस बात पे कोई ध्यान नहीं दिया और तबड़तोब लंड को ऊपर खींचते हुए सटासट चार-पॉँच धक्के लगा दिए.

दीदी चिल्लाते हुए बोली“मादरचोद…साले दिखाई नहीं देता की चुत को पोछके सुखा दिया था… सुखा लंड डालकर दुखा दिया… …. …अभी भी….चोदना नहीं आया…एसे भी कोई करता है.” मैं रुक कर दीदी का मुंह देखने लगा तो फिर बोली “अब मुंह क्या देख रहा है….मारना….धक्का….जोर लगाके मार…हाय मेरे राजा…मजा आगया…इसलिए तो पोछ दिया था….हाय देख क्या टाइट जा रहा है…इस्स्स्स्स….” मैं समझ गया अब फुल स्पीड में चालू हो जाना चाहिए.

फिर क्या था मैंने गांड उछाल उछाल कर कमर नचा कर जब धक्का मरना शुरू किया तो दीदी की चीखे निकालनी शुरू हो गई.

चुत फच फच कर पानी फेंकने लगी.

गांड हवा में लहरा कर लंड लीलने लगी
 
शाजिया जी कमेंट करने के लिए आपका बहोत धन्यवाद मैं अपडेट जल्दी जल्दी देने का प्रयास करूंगा और सिर्फ mr & mis patel यह कहानी अपने अंत की और बढ़ रही है आप सब दोस्तो का तहे दिल से धन्यवाद

..........सलिल
 
अपडेट 36

हाय चोद…रेशु ऐसेही बेदर्दीसे….. चोद अपनी कोमल दीदी की चुतको….ओह माँ….कैसा बेदर्दी रेशु है….हाय कैसे चोद रहा है….अपनी बड़ी बहन को….हाय माँ देखो….……चोदना इसके लिए कोई बात नहीं….मगर कमीने को ऐसे बेदर्दी से चोदने में पता नहीं क्या मजा मिल रहा है उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़…….मर गई….हाय बड़ा मजा आ रहा है…..सीईईईई…..मेरे चोदु भैयां…मेरे जानू….हाय मेरे चोदु रेशु…..सीईईईई….” मैं लगातार धक्के पर धक्का लगता जा रहा था.

मेरा जोश भी अपनी चरम सीमा पर पहुँच चूका था और मैं अपनी गांड तक का जोर लगा कर कमर नचाते हुए धक्का मार रहा था.

दीदी की बॉब्स को मुठ्ठी में दबोच ते दबाते हुए गच गच धक्का मारते हुए मैं भी जोश में सिसिया हुए बोला

” ओह मेरी प्यारी बहन ओह….सीईईईइ….कितनी मस्त हो तुम….हाय…सीईईई सीईई…दीदी बहुत मजा आ रहा है…हाय सच में दीदी आपकी गद्देदार चुत में लौड़ा डालकर ऐसा लग रहा है जैसे…..जन्नत….हाय…पुच्च..पुच्चओह दीदी मजा आगया….ओह दीदी तुम गाली भी देती होतो मजा आता है….हाय…मैं नहीं जानता था की मेरी दीदी इतनी बड़ी चुदक्कड़ है….हाय मेरी चुदैल बहना….

सीईईईई हमेशा अपने रेशु को ऐसे ही मजा देती रहना….ऊऊऊऊउ….दीदी मेरी जान….हाय….मेरा लण्ड हमेशा तुम्हारे लिया खड़ा रहता था….हाय आज….मन की मुराद….पूरी हुई.सीईईई….” मेरा जोश अब अपने चरम सीमा पर पहुँच चूका था और मुझे लग रहा था की मेरा पानी निकल जायेगा

दीदी भी अब बेतहाशा अंट-शंट बक रही थी और गांड उचकाते हुए दांत पिसते बोली

“हाय साले….चोदने दे रही हूँ तभी खूबसूरत लग रहीहूँ …. मुझे सब पता है…..चुदैल बोलता है….साले तूने अपने लंड का दीवाना बनाया है तभी बनि हु चुदैल नहीं तो मैं तेरे जीजाजी से ही खुश होती……..हाय जोर….अक्क्क्क्क…..जोर से मारता रह बहनचोद…. मेरा अब निकलेगा…हाय रेशु मैं झरने वाली हूँ….सीईईईई….और जोर से ….चोद चोद….चोद चोद…. रेशु….बहनचोद….बहनकेलंड…..” कहते हुए मुझे छिपकिली की तरह से चिपक गई.

उसकी चुत से छलछला कर पानी बहने लगा और मेरे लण्ड को भिगोने लगा. तीन-चार तगड़े धक्के मारने के बाद मेरा लण्ड भी झरने लगा और वीर्य का एक तेज फौव्वारा दीदी की चुत में गिरने लगा.

दीदी ने मुझे अपने बदन से कस कर चिपका लिया और आंखे बंद करके अपनी दोनों टांगो को मेरी कमर पर लपेट मुझे बाँध लिया.

जिन्दगी में दूसरी बार अपनी बहन की चुत के अन्दर झड़ा था.

वाकई मजा आ गया था. ओह दीदी ओह दीदी करते हुए मैंने भी उनको अपनी बाँहों में भर लिया था.

हम दोनों इतनी तगड़ी चुदाई के बाद एक दम थक चुके थे मगर हमारी कमर अभी भी आगे पीछे हो रही थी दीदी अपनी चुत का रस निकाल रही थी और मैं लंड को चुत की जड़ तक ठेल कर अपना पानी उसकी चुत में झड रहा था.

सच में ऐसा मजा मुझे आज के पहले कभी नहीं मिला था.

अपनी खूबसूरत बहन को चोदने की दिली तम्मन्ना पूरी होने के कारण पुरे बदन में एक अजीब सी शान्ती महसूस हो रही थी.

करीब दस मिनट तक वैसे ही पडे रहने के बाद मैं धीरे से दीदी के बदन से निचे उतर गया.

मेरा लण्ड ढीला हो कर पुच्च से दीदी की चुत से बाहर निकल गया.

मैं एकदम थक गया था और वही उनके बगल में लेट गया.

दीदी ने अभी भी अपनी आंखे बंद कर रखी थी.

मैं भी अपनी आँखे बंद कर के लेट गया और पता नहीं कब नींद आ गई. शाम को अभी नींद में ही था की लगा जैसे मेरी नाक को दीदी की चुत की खुसबू का अहसास हुआ.

एक रात से मैं चुत के चटोरे में बदल चूका अपने आप मेरी जुबान बाहर निकली चाटने के लिए…ये क्या…मेरी जुबान पर गीलापन महसूस हुआ.

मैं ने जल्दी से आंखे खोली तो देखा दीदी अपने पेटिकोट को कमर तक ऊँचा किये मेरे मुंह के ऊपर बैठी हुई थी और हँस रही थी.

दीदी की चुत का रस मेरे होंठो और नाक ऊपर लगा हुआ था.

रोज सपना देखता था की कोई मुझे ऐसा मजा दे अब दीदी मुझे शाम को ऐसे जगा कर मजा दे रही है.

झटके के साथ लण्ड खड़ा हो गया और पूरा मुंह खोल दीदी की चुत को मुंह में भरता हुआ जोर से काटते हुए चूसने लगा.

उनके मुंह से चीखे और सिसकारियां निकलने लगी.

उसी समय पहले दीदी को एक बार और चोद चोद कर ठंडा करके बिस्तर से निचे उतर बाथरूम चला गया.

फ्रेश होकर बाहर निकला तो दीदी उठ कर रसोई में जा चुकी थी.

रविवार का दिन था मुझे भी कही जाना नहीं था.

कोमल दीदी ने उस दिन लाल रंग की साड़ी और काले रंग का ब्लाउज पहन रखी थी.

उस दिन फिर दिन भर हम दोनों भाई बहन दिन भर आपस में खेलते रहे और आनंद उठाते रहे.

दीदी ने मुझे दुबारा चोदने तो नहीं दिया मगर रसोई में खाना बनाते समय अपनी चुत चटवाई और मेरे ऊपर लेट कर चुत चटवाइ और लंड चूसा. टेलिविज़न देखते समय भी हम दोनों एक दुसरे के अंगो से खेलते रहे.

कभी मैं उसकी बॉब्स दबा देता कभी वो मेरा लंड खींच कर मरोड देती.

मुझे कभी मादरचोद कह कर पुकारती कभी बहनचोद कह कर.

इसी तरह रात होने इसी तरह रात होने पर हमने टेलिविज़न देखते हुए खाना खाया और फिर वो रसोई में बर्तन आदि साफ़ करने चली गई और मैं टीवी देखता रहा थोड़ी देर बाद वो आई और कमरे के अन्दर घुस गई.

मैं बाहर ही बैठा रहा.

तभी उन्होंने पुकारा “रेशु वहां बैठ कर क्या कर रहा है…रेशु आजा….….” मैं तो इसी इन्तेज़ार में पता नहीं कब से बैठा हुआ था.

कूद कर के कमरे में पहुंचा तो देखा दीदी ड्रेसिंग टेबल के सामने बैठ कर मेकअप कर रही थी और फिर परफ्यूम निकाल कर अपने पुरे बदन पर लगाया और आईने में अपने आप को देखने लगी.

मैं दीदी की गांड को देखता सोचता रहा की काश मुझे एक बार इनकी गांड का स्वाद चखने को मिल जाता तो बस मजा आ जाता.

मेरा मन अब थोडा ज्यादा बहकने लगा था.

ऊँगली पकड़ कर गर्दन तक पहुचना चाहता था.

दीदी मेरी तरफ घूम कर मुझे देखती मुस्कुराते हुए बिस्तर पर आ कर बैठ गई. वो बहुत खूबसूरत लग रही थी.

बिस्तर पर तकिये के सहारे लेट कर अपनी बाँहों को फैलाते हुए मुझे प्यार से बुलाया.

मैं कूद कर बिस्तर पर चढ़ गया और दीदी को बाँहों में भर उनके होंठो का किस लेने लगा.

तभी लाइट चली गई और कमरे में पूरा अँधेरा फ़ैल गया.
 
[अपडेट 37

मैं और दीदी दोनों हसने लगे. फिर उन्होंने ने कहा “हाय रेशु….ये तो एकदम टाइम पर लाइट चली गई…मैंने भी दिन में नहीं चुदवाया था की….रात में आराम से मजा लुंगी….चल एक काम कर अँधेरे में चुत चाट सकता है….देखू तो सही…..तू मेरी चुत की सुगंघ को पहचानता है या नहीं….साड़ी नहीं खोलनी ठीकहै….” इतना सुनते ही मैं होंठो को छोर निचे की तरफ लपका उनके दोनों पैरों को फैला कर सूंघते हुए उनके चुत के पास पहुँच गया. साड़ी को ऊपर उठकर चुत पर मुंह लगा कर लफर-लफर चाटने लगा. थोड़ी देर चाटने पर ही दीदी एक दम सिसयाने लगी और मेरे सर को अपनी चुत पर दबाते हुए चिल्लाने लगी ” हाय रेशु….चुत चाटू…..राजा….हाय सच में तूतो कमाल कर रहा है….एकदम एक्सपर्ट हो गया है….अँधेरे में भी सूंघलिया….सीईईईइ बहनचोद….….है…..है मेरे राजा…..सीईईईइ” मैं पूरी चुत को अपने मुंह में भरने के चक्कर मैं चुत पर जीभ चलाते हुए बीच-बीच में उसकी गांड को भी चाट रहा था और उसकी खाई में भी जीभ चला रहा था. तभी लाइट वापस आ गई. मैंने मुंह उठाया तो देखा मैं और दीदी दोनों पसीने से लथपथ हो चुके थे. होंठो पर से चुत का पानी पोछते हुए मैं बोला “हाय दीदी देखो आपको कितना पसीना आ रहा है…जल्दीसे कपडे खोलो….” दीदी भी उठ के बैठते हुए बोली “हाँ बहुत गर्मी है….उफ्फ्फ्फ्फ्फ….लाइट आजाने से ठीक रहा नहींतो मैं सोच रही थी….. …” कहते हुए अपनी साड़ी को खोलने लगी. साड़ी और पेटी कोट खुलते ही दीदी कमर के नीचे से पूरी नंगी हो गई. फिर उन्होंने ब्लाउज खोला उन्होंने ब्रा नहीं पहन रखी थी ये बात मुझे पहले से पता थी. क्यों की दिन भर उसकी ब्लाउज के ऊपर से उनके बॉब्स के निप्पल को मैं देखता रहा था.

दोनों बॉब्स आजाद हो चुके थे और कमरे में उनके बदन से निकल रहे पसीने और परफ्यूम की मादक गंध फ़ैल गई. मेरे से रुका नहीं गया. मैंने झपट कर दीदी को अपनी बाँहों में भरा और निचे लिटा कर उनके होंठो गालो और माथे को चुमते हुए चाटने लगा. मैं उनके चेहरे पर लगी पसीने की हर बूँद को चाट रहा था और अपने जीभ से चाटते हुए उनके पुरे चेहरे को गीला कर रहा था. दीदी सिसकते हुए मुझ से अपने चेहरे को चटवा रही थी. चेहरे को पूरा गीला करने के बाद मैं गर्दन को चाटने लगा फिर वह से छाती और बॉब्स को अपनी जुबान से पूरा गीला कर मैंने दीदी के दोनों हाथो को पकड़ झटके के साथ उनके सर के ऊपर कर दिया. उसकी दोनों कांख मेरे सामने आ गई. कान्खो के बाल अभी भी बहुत छोटे छोटे थे. हाथ के ऊपर होते ही कान्खो से निकलती भीनी-भीनी खुश्बू आने लगी. मैं अपने दिल की इच्छा पूरी करने के चक्कर में सीधा उनके दोनों छाती को चाटता हुआ कान्खो की तरफ मुंह ले गया और उसमे अपने मुंह को गाड दिया. कान्खो के मांस को मुंह में भरते हुए चूमने लगा और जीभ निकाल कर चाटने लगा. कांख में जमा पसीने का नमकीन पानी मेरे मुंह के अन्दर जा रहा था मगर मेरा इस तरफ कोई ध्यान नहीं था. मैं तो कांख के पसीने के सुगंध को सूंघते हुए मदहोश हुआ जा रहा था. मुझे एक नशा सा हो गया था मैंने चाटते-चाटते पूरी कांख को अपने थूक और लार से भींगा दिया था. मुझे इस बात की चिंता नहीं थी की दीदी क्या बोल रही है. दीदी समझ गई की मैं सच में आज उनको नहीं छोड़ने वाला. उनको भी मजा आ रहा था. उन्होंने अपना पूरा बदन ढीला छोर दिया था और मुझे पूरी आजादी दे दी थी. मैं आराम से उनके कान्खो को चाटने के बाद धीरे धीरे निचे की तरफ बढ़ता चला गया और पेट की नाभि को चाटते हुए दांतों से पेटीकोट के नाडे को खोल कर खीचने लगा. इस पर दीदी बोली “फाडदेना….…….औरफाडदे….” पर मैंने खींचते हुए पूरे पेटीकोट को निचे उतार दिया और दोनों टांग फैला कर उनके बीच बैठकर एक पैर को अपने हाथ से ऊपर उठा कर पैर के अंगूठे को चाटने लगा धीरे धीरे पैर की उँगलियों और टखने को चाटने के बाद पुरे तलवे को जीभ लगा कर चाटा. फिर वहां से आगे बढ़ते हुए उनके पुरे पैर को चाटते हुए घुटने और जांघो को चाटने लगा. जांघो पर दांत गडाते हुए मांस को मुंह में भरते हुए चाट रहा था. दीदी अपने हाथ पैर पटकते हुए छटपटा रही थी. मेरी चटाई ने उनको पूरी तरह से गरम कर दिया था. वो मदहोश हो रही थी. मैं जांघो के जोड को चाटते हुए पैर को हवा में उठा दिया और लप लप करते हुए कुत्ते की तरह कभी चुत कभी उसके चारो तरफ चाटने लगा फिर अचानक से मैंने जांघ पकर कर दोनों पैर हवा में ऊपर उठा दिया इस से दीदी की गांड मेरी आँखों के सामने आ गई और मैं उस पर मुंह लगा कर चाटने लगा. दीदी एक दम गरमा गई और तरपते हुए बोली “क्या कर रहा है…हाय गांड के पीछे हाथ धोकर पड गया….है….सीईईई गांड मारेगा क्या….जब देखो तब चाटने लगता है…उस समय भी चाट रहा था….हाय .सीईई…चाट मगर ये याद रख मारने नहीं दूंगी…… आज तक इसमें ऊँगली भी नहीं गई है…..और तू…..जबदेखो…उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़….हाय चाटना है तो ठीक से चाट…..मजा आ रहा है….रुक मुझे पलटने दे……” कहते हुए पलट कर पेट के बल हो गई और गांड के निचे तकिया लगा कर ऊपर उठा दिया और बोली “ले अब चाट….…. अपनी बहन की गांड….को…..बहनचोद…..बहन की गांड….खा रहाहै…..उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ बेशरम……” मेरे लिए अब और आसन हो गया था. दीदी की गांड को उनके दोनों गांड को मुठ्ठी में कसते हुए मसलते हुए खोल कर उसकी पूरी गांड की खाई में जीभ डाल कर चलाने लगा. गांड का छोटा सा गुलाबी रंग का छेद पक पका रहा था. होंठो को गांड के छेद के होंठो से मिलाता हुआ चूमने लगा. तभी दीदी अपने दोनों हाथो को गांड के छेद के पास ला कर अपनी गांड की छेद को फैलाती हुई बोली “हाय ठीक से चाट…चाटना हैतो….छेद पूरा फैलाकर….चाट…मेरा भी मन करता था चटवाने को…..तेरी जो वो राज शर्मा की किताब है न उसमे लिखा है….हाय रेशु…..मुझे सब पता है…बेटा….तू क्याक्या करता है….इसलिए चौंकना मत….बस वैसेही जैसे किताब में लिखा है वैसे चाट..हाय…जीभ अन्दर डालकर चाट….हाय सीईईईईई…..” मैं समझ गया की अब जब दीदी से कुछ छुपा ही नहीं है तो शर्माना कैसा अपनी जीभ को कडा कर के उसकी गांड की भूरी छेद में डाल कर नचाते हुए चाटने लगा. गांड के छेद को अपने अंगूठे से पकड फैलाते हुए मस्ती में चाटने लगा. दीदी अपनी गांड को पूरा हवा में उठा कर मेरे जीभ पर नचा रही थी और मैं गांड में अपनी जीभ डाल कर चोदते हुए पूरी खाई में ऊपर से निचे तक जीभ चला रहा था. दीदी की गांड का स्वाद भी एक दम नशीला लग रहा था. कसी हुई गांड के अन्दर तक जीभ डालने के लिए पूरा जीभ सीधा खड़ा कर के गांड को पूरा फैला कर पेल कर जीभ नचा रहा था. सक सक गांड के अन्दर जीभ आ जा रही थी. थूक से गांड की छेद पूरी गीली हो गई थी और आसानी से मेरी जीभ को अपने अन्दर खींच रही थी. गांड चटवाते हुए दीदी एक दम गर्म हो गई थी और सिसकते हुए बोली“हाय राजा…अब गांड चाटना छोड़ो….हाय राजा….मैं बहुत गरम हो चुकी हूँ…..हाय मुझे तुने….मस्त कर दिया है…हाय अब अपनी रसवंती दीदी का रस चूसना छोड़ और…….उसकी चुत में अपना मस्त लंड डालकर चोद और उसका रस निकाल दे…..हाय सनम….मेरे राजा….चोद दे अपनी दीदी को अब मत तड़पा….” दीदी की तड़प देख मैंने अपना मुंह उसकी गांड पर से हटाया और बोला ” हायदीदी जब आपने राज शर्मा की किताब पढ़ी थी तो…आपने पढ़ा तो होगा ही की….कैसे गांड….में…हाय मेरा मतलब है की एकबार दीदी….अपनी गांड….” दीदी इस एक दम से तड़प कर पलटी और मेरे गालो पर चिकोटी काटती हुई बोली “हाय हरामी….रेशु…..तू जितना दीखता है उतना सीधा है नहीं….सीईईईइ…बहनचोद….मैं सब समझती हूँ….तू साला गांड के पीछे पड़ा हुआ है…..कुत्ते मेरी गांड मारने के चक्कर में तू….साले…यहाँ मेरी चुत में आग लगी हुई है और तू….हाय….नहीं रेशु मेरी गांड एकदम कुंवारी है और आजतक मैंने इसमें ऊँगली भी नहीं डालीहै…
 
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