S
StoryPublisher
Guest
अपडेट 30
मैं और..? दीदी भी नहीं चाहती थी, की इन बातों का सिलसिला रुक जाए.
.और. आप बहुत ख़ूबसूरत हे दीदी..सच में आप बहुत ख़ूबसूरत हे,
आप को कल रात छुआ तो समझ में आया की सही खुबसुरती किसे कहते हे?
और मैंने दीदी के नैवेल में एक ऊँगली दाल कर उसे घुमाया और दीदी को पीछे से अपने लंड से भी दबाव डाला.
दीदी अब तक प्लेट साफ़ कर रही थी पर अब उनके हाथ रुक गए थे और ऐसा लगता था की वो और भी सुनना चाहती थी,
इसीलिए उन्होंने कहा
“अच्छा.. इतनी दीदी पसंद आ गयी हे क्या.?
दीदी ने भी इस बात को कंटिन्यू किया
“सच्ची में बहोत मैंने रिप्लाई किया और तुरंत ही दीदी ने पूछ लिया.
.अच्छा, क्या पसंद आ गया, दीदी में जो इतना पसंद करने लगे हो”..
दीदी का यह सवाल तो क़ातिलाना था और अब मौका छोडना सही नहीं था इसीलिए मैंने अपना एक हाथ दीदी के नैवेल से ऊपर उठाय और दीदी के लिप्स पे रक्खा और कहा की
“दीदी यह लिप्स हैं ना,सच में बड़े अच्छे हे”,
हालाँकि दीदी भी यह जानती थी की में किस चीज़ पर मर मिटा हूँ
पर मैंने लिप्स से ही शुरू किया और अपनी एक ऊँगली दीदी के दोनों लिप्स के बीच में फिराई और दीदी के निचे के होठ को ऊँगली से प्रेस भी किया,
और दीदी ने मुँह खोल दिया,
बॉस क्या गरम साँसे चल रही थी.
फिर मैंने अपनी ऊँगली दीदी के होठो से हटा के दीदी के चिन पे से गुजारती हुई
दीदी के गले पर गोल गोल घुमायी और दीदी के गले पर से उसे दीदी के सीने पर रक्खा
और वहा घूमाते हुए मैंने दीदी के ब्लाउज के क्लीवेज में अपनी ऊँगली डाली
और जैसे ही मैंने अपनी ऊँगली दीदी के ब्लाउज में डाली की
दीदी ने मेरी ऊँगली को अपने हाथ से थाम लिया और में रूक गया,
दीदी पूरी तरह सिड्यूस हो चुको थी पर वो अभी शायद सेक्स करना नहीं चाहती थी,
इसीलिए वो न तो ऊँगली बाहर निकल रही थी की न ही मुझे अंदर हाथ डालने दे रही थी.
फिर इससे पहले की में कुछ करू, डरवाजे की घण्टी बजने लगी.
और हम दोनों होश में आए,
दीदी ने मेरी ऊँगली छोड़ि और अपनी साड़ी ठीक की,
और छूटने लगी पर मैंने छोड़ा नही,
तो उन्होंने मेरी और देखा और मैंने फट से दीदी के लिप्स पर अपने लिप्स रख के उन्हें चूम लिया और लिप्स मस्त चूसने लगा,
उधर घण्टी बज रही थी,
दीदी ने उन्हें छोड़ने के लिए मुझे धक्का दिया और मैंने भी उन्हें छोड़ दिया और डरवाजा खोलने के लिए भागा.
मैने जा कर देखा तो चाचा के नाम का कोई कूरियर था और मैंने उसे ५ मिनट में चलता कर दिया और फिर से किचन में गया
तो दीदी को फिर से पता चल गया की में आया हूँ तो
उन्होंने सामने से कहा की “अभी डिस्टर्ब मत करो,
बाद में बता देना क्या तुम्हे अच्छा लगा”.
मैं भी मन में खुश होते हुए,
बाहर आ गया. और उनके इंटेंशन से साफ़ पता चल रहा था की वो अब पूरी तरह से मेरी थी.
फिर मैंने लंच के बाद दीदी को उठा के बैडरूम में ले गया
हम बेडरूम जाते ही मैंने दीदी को अपनी बाहों में लिया और उसे चूमना चाटना शुरु किया दीदी भी अब पूरा मजा ले रही थी कुछ देर किस करने के बाद हम रुक गये मैने दीदी को कहा “दीदी मैं आपको ऐसे सेक्स करना चाहता हु, कि जैसे हमारे बीच पहली बार सेक्स हो रहा हो, जैसे रात को कुछ हुआ ही नही, मैं आपको नये तरीके से मजा देना चाहता हु, क्या आप इसके लिये तैयार है, बहुत मजा आयेगा थोड़ा अलग सेक्स करेंगें, बिल्कुल पहली बार जैसे करते है वैसे ही” दीदी बोली “वॉव मुझे क्या करना है,यह बता” मैंने कहा “हम सेक्स के साथ साथ गंदी गंदी बाते करेंगे एक दूसरे को गलियां देंगे” दीदी बोली “नही गालिया नही” मैंने कहा “कुछ नही होता मैंने सेक्सी मूवीज में देखा है बहुत मजा आता है” इससे सेक्स मे नयापन आता है और मैं आपको बहोत मजा देना चाहता हु, आई लव यू दीदी”
“मेरा भाई मुझे इतना पसंद करता है ये तो मुझे पता ही नहीं था…” कहते हुए आगे बढ़ कर मेरे होंठो पर एक जोरदार चुम्मा लिया और फिर दुबारा अपने होंठो को मेरे होंठो से सटा कर मेरे होंठो को अपने होंठो से दबोच कर अपनी जीभ मेरे मुंह में ठेलते हुए चूसने लगी.
उसके होंठ चूसने के अंदाज से लगा जैसे मेरे होंठो का पूरा रस दीदी चूस लेना चाहती हो.
होंठ चूसते चूसते वो मेरे लण्ड को अपनी हथेली के बीच दबोच कर मसल रही थी.
कुछ देर तक ऐसा करने के बाद जब दीदी ने अपने होंठ अलग किये तो हम दोनों की सांसे फुल गई थी.
मैं और..? दीदी भी नहीं चाहती थी, की इन बातों का सिलसिला रुक जाए.
.और. आप बहुत ख़ूबसूरत हे दीदी..सच में आप बहुत ख़ूबसूरत हे,
आप को कल रात छुआ तो समझ में आया की सही खुबसुरती किसे कहते हे?
और मैंने दीदी के नैवेल में एक ऊँगली दाल कर उसे घुमाया और दीदी को पीछे से अपने लंड से भी दबाव डाला.
दीदी अब तक प्लेट साफ़ कर रही थी पर अब उनके हाथ रुक गए थे और ऐसा लगता था की वो और भी सुनना चाहती थी,
इसीलिए उन्होंने कहा
“अच्छा.. इतनी दीदी पसंद आ गयी हे क्या.?
दीदी ने भी इस बात को कंटिन्यू किया
“सच्ची में बहोत मैंने रिप्लाई किया और तुरंत ही दीदी ने पूछ लिया.
.अच्छा, क्या पसंद आ गया, दीदी में जो इतना पसंद करने लगे हो”..
दीदी का यह सवाल तो क़ातिलाना था और अब मौका छोडना सही नहीं था इसीलिए मैंने अपना एक हाथ दीदी के नैवेल से ऊपर उठाय और दीदी के लिप्स पे रक्खा और कहा की
“दीदी यह लिप्स हैं ना,सच में बड़े अच्छे हे”,
हालाँकि दीदी भी यह जानती थी की में किस चीज़ पर मर मिटा हूँ
पर मैंने लिप्स से ही शुरू किया और अपनी एक ऊँगली दीदी के दोनों लिप्स के बीच में फिराई और दीदी के निचे के होठ को ऊँगली से प्रेस भी किया,
और दीदी ने मुँह खोल दिया,
बॉस क्या गरम साँसे चल रही थी.
फिर मैंने अपनी ऊँगली दीदी के होठो से हटा के दीदी के चिन पे से गुजारती हुई
दीदी के गले पर गोल गोल घुमायी और दीदी के गले पर से उसे दीदी के सीने पर रक्खा
और वहा घूमाते हुए मैंने दीदी के ब्लाउज के क्लीवेज में अपनी ऊँगली डाली
और जैसे ही मैंने अपनी ऊँगली दीदी के ब्लाउज में डाली की
दीदी ने मेरी ऊँगली को अपने हाथ से थाम लिया और में रूक गया,
दीदी पूरी तरह सिड्यूस हो चुको थी पर वो अभी शायद सेक्स करना नहीं चाहती थी,
इसीलिए वो न तो ऊँगली बाहर निकल रही थी की न ही मुझे अंदर हाथ डालने दे रही थी.
फिर इससे पहले की में कुछ करू, डरवाजे की घण्टी बजने लगी.
और हम दोनों होश में आए,
दीदी ने मेरी ऊँगली छोड़ि और अपनी साड़ी ठीक की,
और छूटने लगी पर मैंने छोड़ा नही,
तो उन्होंने मेरी और देखा और मैंने फट से दीदी के लिप्स पर अपने लिप्स रख के उन्हें चूम लिया और लिप्स मस्त चूसने लगा,
उधर घण्टी बज रही थी,
दीदी ने उन्हें छोड़ने के लिए मुझे धक्का दिया और मैंने भी उन्हें छोड़ दिया और डरवाजा खोलने के लिए भागा.
मैने जा कर देखा तो चाचा के नाम का कोई कूरियर था और मैंने उसे ५ मिनट में चलता कर दिया और फिर से किचन में गया
तो दीदी को फिर से पता चल गया की में आया हूँ तो
उन्होंने सामने से कहा की “अभी डिस्टर्ब मत करो,
बाद में बता देना क्या तुम्हे अच्छा लगा”.
मैं भी मन में खुश होते हुए,
बाहर आ गया. और उनके इंटेंशन से साफ़ पता चल रहा था की वो अब पूरी तरह से मेरी थी.
फिर मैंने लंच के बाद दीदी को उठा के बैडरूम में ले गया
हम बेडरूम जाते ही मैंने दीदी को अपनी बाहों में लिया और उसे चूमना चाटना शुरु किया दीदी भी अब पूरा मजा ले रही थी कुछ देर किस करने के बाद हम रुक गये मैने दीदी को कहा “दीदी मैं आपको ऐसे सेक्स करना चाहता हु, कि जैसे हमारे बीच पहली बार सेक्स हो रहा हो, जैसे रात को कुछ हुआ ही नही, मैं आपको नये तरीके से मजा देना चाहता हु, क्या आप इसके लिये तैयार है, बहुत मजा आयेगा थोड़ा अलग सेक्स करेंगें, बिल्कुल पहली बार जैसे करते है वैसे ही” दीदी बोली “वॉव मुझे क्या करना है,यह बता” मैंने कहा “हम सेक्स के साथ साथ गंदी गंदी बाते करेंगे एक दूसरे को गलियां देंगे” दीदी बोली “नही गालिया नही” मैंने कहा “कुछ नही होता मैंने सेक्सी मूवीज में देखा है बहुत मजा आता है” इससे सेक्स मे नयापन आता है और मैं आपको बहोत मजा देना चाहता हु, आई लव यू दीदी”
“मेरा भाई मुझे इतना पसंद करता है ये तो मुझे पता ही नहीं था…” कहते हुए आगे बढ़ कर मेरे होंठो पर एक जोरदार चुम्मा लिया और फिर दुबारा अपने होंठो को मेरे होंठो से सटा कर मेरे होंठो को अपने होंठो से दबोच कर अपनी जीभ मेरे मुंह में ठेलते हुए चूसने लगी.
उसके होंठ चूसने के अंदाज से लगा जैसे मेरे होंठो का पूरा रस दीदी चूस लेना चाहती हो.
होंठ चूसते चूसते वो मेरे लण्ड को अपनी हथेली के बीच दबोच कर मसल रही थी.
कुछ देर तक ऐसा करने के बाद जब दीदी ने अपने होंठ अलग किये तो हम दोनों की सांसे फुल गई थी.