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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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अपडेट 87

कुछ मिनटों के बाद जब मेरे शरीर में थोड़ी सी जान आई तो मैंने देखा कि चाची के बाल अभी भी हल्के गीले ही थे और चाची क्या सुंदर लग रही थी ! मैं क्या बताऊँ आपको !

इस सबके बाद मुझे भूख लग गई थी और मैं यह भी जानता था कि चाची को अगर मैं फिर से चोदना चाहता हूँ तो उनके शरीर में थोड़ी सी जान भी होनी चाहिए जो मैं पहले ही पूरी तरह से निकाल चुका था. मैं उठा, अंडरवियर पहना, फिर रसोई में चला गया.

चाची ने खाना बना कर रखा तो मैं दो प्लेट में खाना लेकर चाची के पास गया और चाची को उठाया और खाने की प्लेट सामने रख दी खाना देखकर चाची बोली- भूख लगी थी तो मुझसे बोल देते, मैं खाना लगा देती!

और मेरा जवाब था- आप भी तो थक गई थी, अगर मैंने प्लेट लाया तो क्या गलत हो गया? और मैं जानता हूँ आपको भी भूख लगी होगी इस खेल के बाद !

यह सुनना था कि चाची ने मुझे गले लगा लिया और फिर एक प्यारा सा चुम्बन दे दिया और इसके बाद चाची बड़े प्यार से मुझे चुम्बन पर चुम्बन देती रही और मुझे ऐसे चूमती रही जैसे मुझसे ज्यादा प्यारा कोई है ही नहीं उनके लिए इस पूरी दुनिया में.

उसके बाद मैंने उनको अलग किया और अपने हाथों से खाना खिलाया, और उनके साथ मैंने भी खाया. इस सबके बाद चाची ऐसी फ़िदा हुई कि बोली- तुम बताओ रेशु, मैं क्या करूँ तुम्हारे लिए?

मैंने कहा- रहने दो चाची ! अभी बोलूँगा तो पीछे हट जाओगी ! मेरे मन की कोई नहीं करता है !

यह सुन कर चाची बोली- तुम जान मांग लो रेशु ! वो भी हाजिर है ! मैं बिलकुल मना नहीं करूंगी किसी भी बात के लिए ! तुम जो कहोगे वो करूंगी !

मैंने कहा- ठीक है ! पहले खा लो अच्छे से, फिर उसके बाद अपने बाल सुखा लो अच्छे से ! फिर बताता हूँ !

यह सुनना था कि चाची ने फिर से चूमना शुरू कर दिया.

मैंने पूछा- अब मैंने क्या कर दिया जिसका यह इनाम मुझे दे रही हो?

तो बोली- आज तक इतना प्यार मुझे कभी भी तुम्हारे चाचा से नहीं मिला तुम्हारे चाचा ने कभी मेरी चिंता नहीं की, इतनी ज्यादा जितना तुम करते हो !

चाची खड़े होकर बाल सूखा रही थी

उस वक्त उनको देख कर मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और जब चाची बाल सुखा कर आई वो भी मेरे लंड को देख कर मेरे पास आकर मेरे गले लग गई और बड़े प्यार से बोली- बताओ ना ? क्या करूँ मैं तुम्हारे लिए ?

मैंने कहा- ठीक है, बताता हूँ !

चाची से मैंने कहा- जाओ जाकर पहले काले रंग की ब्रा और पैंटी पहन कर आ जाओ और अच्छा वाला परफ्यूम भी लगा लो..

और चाची बिना कुछ सवाल किए सीधे कमरे में जाकर मेरे कहे अनुसार तैयार हो कर आ गई.

बोली- अब कहो, क्या करना है?

मैं पलट कर लेट गया, मैंने कहा- मेरी पीठ पर चूमना शुरू करो और हर चुम्बन के साथ चूसना भी !

चाची ने बिना कुछ सोचे समझे मुझे चूसना शुरू कर दिया. जैसे जैसे चाची मुझे चूसती जा रही थी, मेरी मस्ती बढ़ती जा रही थी. थोड़ी देर की बात थी, मेरा दिमाग मेरे काबू में नहीं रहा और मैंने पलट कर चाची को अपने ऊपर ले लिया, उनको चूमना शुरू कर दिया और धीरे से चाची को खिसका कर नीचे लिटाया और चाची से कहा- मेरा लंड निकालो और इसको पूरी मस्ती के साथ चूसो !

एक बार को तो चाची थोड़ा सा संकुचाई पर उसके बाद मेरी तरफ प्यार से देखा और सीधे मेरा अंडरवियर उतार कर मेरा लंड चूमना और चूसना शुरू कर दिया.

चाची चूसती रही और मैं मस्ती में चुसवाता रहा.

थोड़ी ही देर में मेरे लंड ने पानी छोड़ने की तैयारी कर ली, मैंने कहा- चाची, मैं झड़ने वाला हूँ ! जो कहूँगा वो करोगी ना?

चाची बोली- रेशु तुमसे वादा किया है, जान मांगोगे तो वो भी दे दूँगी लेकिन ना नहीं करूंगी.

मैंने कहा- ठीक है चाची ! आप घूम कर अपनी चूत को मेरे मुँह पर रख लो और मेरे लंड को चूसो और तब तक चूसती रहना जब तक मेरे लंड से आखरी बूँद भी ना निकल जाए.

चाची ने एक बार मेरी तरफ देखा और फिर बिना किसी झिझक के अपनी चूत को मेरे मुँह पर रख दिया और मैंने चाची की पेंटी को बगल में हटा कर चूत को चूसना शुरू कर दिया. और चाची ने मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया.

इधर मैं झड़ने की कगार पर था और चाची भी झड़ने ही वाली हालात में आ गई.

चाची बोली- आह रेशु, मैं अब टिक नहीं पाऊँगी !

तो मैंने चाची की चूत को चूसना बंद कीया और चाची ने मेरा लंड तेजी से चूसना शुरु कर दिया. इसका नतीजा यह हुआ कि मैं बस झड़ने की कगार पर आ गया, और उधर मैंने चाची की चूत को चूसना शुरू कर दिया और कुछ ही देर में हम दोनों ही एक दूसरे के मुँह में अपना अपना पानी छोड़ने लगे और चाची मेरे लंड को अपने वादे के मुताबिक़ तब तक चूसती रही जब तक उसमें से एक एक बूँद बाहर ना आ गई.

चाची की चुसाई ऐसी थी कि मैं पूरी तरह से पस्त हो चुका था,

जब चाची ने मुझे पूरा निचोड़ लिया तो मेरे बगल में आकर मुझे चूमा और बोली- बोलो रेशु? और क्या करूँ?

मैंने कहा- चाची, थोड़ी देर बस मेरे पास ऐसे ही मेरी बाँहों में आ कर लेटी रहो ! फिर बताता हूँ क्या करना है.

चाची ने पास में से एक कम्बल उठाया और उसे ओढ़ कर मेरे पास चिपक कर लेट गई. हम दोनों को कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला. और जब नींद खुली तो सुबह की रोशनी पूरे आंगन में बिखरी हुई थी, चाची मुझसे चिपक कर मेरी बाहों में लेटी हुई थी पर जागी हुई.

मैंने चाची को देखा तो चाची ने बड़े प्यार से मुझे होंठों पर चूम लिया.

मैंने कहा- आपने मुझे जगाया क्यों नहीं?

तो बोली- तुम सोते हुए बड़े प्यारे लग रहे थे, इसलिए नहीं जगाया.

मैंने पूछा- कब से देख रही हो?

तो जवाब मिला- नहीं मालूम !

चाची का इस तरह से देखना और उनका लगभग नंगा बदन मेरे लंड को खड़ा करने के लिए काफी था, मैंने चाची से कहा- चाची, अभी कल वाला वादा बाकी है !

तो वो बोली- हाँ रेशु, बोलो ना अब क्या करूँ? वैसे भी तुम्हारे चाचा का अभी फोन आया था वह अभी चार घंटे और नहीं आएंगे तो अगले चार घंटे पूरी तरह से हमारे हैं.

मैंने कहा- पीछे तो नहीं हटोगी?

तो जवाब मिला- जब कल पीछे नहीं हटी तो अभी कैसे पीछे हट जाऊँगी?

मैंने कहा- ठीक है चाची ! आपकी मर्जी !

मैंने उनसे कहा- जाओ, जाकर दूध से मलाई निकाल कर ले आओ एक कटोरी में !

और चाची ने बिना सोचे समझे आदेश का पालन किया.

 
अपडेट 88

जब चाची मलाई ले आई तो मैंने पूछा- आपको पता है मैं क्या करने वाला हूँ?

वो बोली- नहीं रेशु ! तुम क्या करोगे, अब मैं समझ भी नहीं सकती.

चाची के हाथ से कटोरी ले कर मैंने तख्त पर रखी और चाची को अपने पास खींच लिया और उनके रसीले होंठों को चूसने लगा.

यह बड़ा ही अजीब पर मजेदार स्वाद होता है दोस्तो ! सुबह-सुबह बिना ब्रश किए चूमना…

हालांकि हर किसी को इस तरह से चूमना पसंद नहीं आता पर उस वक्त तो मैं जन्नत की सैर कर रहा था. मैंने चाची को चूमते हुए ही उनकी ब्रा के दो टुकड़े कर दिये और पेंटी को भी लगभग फाड़ दिया और फाड़ने के बाद उनकी पैंटी को खिसका कर नीचे कर दिया क्योंकि उनकी पैंटी फटने के बाद भी पूरी तरह से नहीं उतर पाई थी.

चाची बोली- अब क्या करना है? बोलो?

मैंने कहा- पहले अपने मुंह में ढेर सारी मलाई रखो और उसके बाद मेरे लंड पर अपने मुंह से वो सारी मलाई लगाओ और बची हुई मलाई निगल जाओ.

चाची उठी, हाथ में मलाई की कटोरी ली और थोड़ी सी मलाई उठा कर मेरे लंड पर रख दी, उसके बाद उस पूरी मलाई को चूस गई और फिर मेरे लंड को अपने मुह में ले लिया और उस पर मलाई लगाने लगीं और बची हुई मलाई निगल गई.

चाची ने मुझे चूमते चूमते मेरे लंड को पकड़ लिया.

क्या एहसास था वो! मैं जैसे जन्नत में पहुँच गया था!

फिर उन्होंने मेरे लंड को मुँह में लेकर काफी चूसा, लगभग दस मिनट बाद मैं झड़ गया. यह ऐसा अहसास था कि मैं बयां नहीं कर सकता!

फिर चाचीने कहा- अब तुम मेरी चूत को करो!

मैंने बची हुई मलाई उनके चुत के ऊपर और चुत में लगाई और

मैं उनकी चूत के पास मुँह लेकर गया. एक अजीब सी खुशबू आ रही थी, मैं उसमें खो गया उसे जीभ निकालकर पूरी मलाई चाटने लगा.

चाची जोर जोर से आह भरने लगी! आह उह आह ह ह मह ह आह ह!

उनकी आवाज मुझमें एक मदहोशी ला रही थी, मैं पागलों की तरह उनकी चूत को चूस रहा था. मैन उनकी पूरी चुत चाट चाट कर साफ कर दी “बॉस क्या मजा रहा था”

थोड़ी देर बाद उन्होंने मेरे बाल पकड़ कर खींचने शुरू कर दिए और एक जोर की पिचकारी मेरे मुँह में भर दी. मैं उनका पूरा पानी पी गया! मैं पता नहीं किस दुनिया में था पर मैं जहाँ भी था बहुत खुश था.

चाची ने मुझे जगह जगह चूमना शुरू कर दिया, मैं फिर से उत्तेजित होने लगा. चाची ने मुझे चूम चूम कर फिर से गर्म कर दिया, मेरा लंड बहुत चूसा और वो फिर सख्त हो गया काम के लिए एक बार फिर तैयार!

चाचीने कहा- अब इसे अंदर में डाल दो!

मैंने उन्हें चूमा और अच्छे से चूमा.

मैंने उन्हें जोर से बाहों में जकड़ा और अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए! इसका तो मुझे काफी एक्सपिरियंस था. उनके गुलाबी गुलाबी होंठ बड़े रसीले थे, मैं उनके होंठ चूस रहा था और मेरे हाथ उनके नंगे जिस्म पर चल रहे थे, कभी उनके बोब्स दबाता, कभी उनकी चूत पर चुटकी ले लेता!

वो बोली- रेशु, अब मत तड़पाओ! मेरी प्यास बुझा दो!

पर मैं अभी और मूड में था! मैं उन्हें मदहोश किये जा रहा था!

चाची बार बार कह रही थी- रेशु, आइ लव यू, फक मी हार्ड, प्लीज़ जल्दी उईई इइ आइ आह ह ओह!

हमारी सांसें एक दूसरे से टकरा रही थी, हमारे नंगे बदन चिपके पड़े थे!

फिर मैं उनको चूमते हुए फिर से नीचे पहुँचा और उनकी चिकनी चूत में जीभ डालकर उनको चोदने लगा! मुझे मज़ा आ रहा था!

उन्होंने कहा- अब हट जाओ रेशु! मुझे पूरा कर दो, मत तड़पाओ!

उनकी आँखों की प्यास में एक अज़ब सा नशा था.

मैंने उन्हें ज्यादा ना तड़पाते हुए नीचे आ गया और चाची की चुदाई करने के लिए आसन में बैठ गया! मैंने हाथ से चाची की चूत के मुँह को खोला और अपने लंड का सिर उस पर लगा दिया! उनकी चूत काफी गीली थी. मैंने लंड लगा कर धीरे धीरे फिराना शुरू किया.फिर मैंने कपड़े से उनकी चुत पूरी साफ कर दी मैं उनकी सुखी चुत मारना चाहता था

 
अपडेट 89

चाची में बोली- अब तो अन्दर करो ना!

मैंने एक झटका दिया पर मेरा लंड आधा ही चूत के अन्दर गया, चाची की चूत बहुत सुखी थी.

मैंने एक और झटका दिया, उनकी चीख निकल गई पर लंड अब भी पूरा नहीं उतरा था! मैंने एक और झटका दिया उनकी और चीख निकली और चाची के आँखों से आँसू बह निकले. मुझे भी थोड़ा दर्द हुआ, सच में ही चाची की चूत काफी टाईट हो गई थी.

फिर मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किये. कुछ देर बाद उनके अन्दर के तरल ने थोड़ी राहत दी. मैंने धक्कों की स्पीड बढ़ाई!

उनके मुँह से दर्द और आनन्द की मिली जुली आवाज निकल रही थी- आह मार डाला! जोर से और बस धीरे! धीरे! उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाँ बस ऐसे ही ओह ह ह ह.. आऽऽह… आ…धीरे… आऽऽह… हां… आऽऽह… जोर से…

मेरे मुँह से भी आह उम्म्ह की आवाजें निकल रही थी. मेरे धक्के बढ़ते जा रहे थे, चाची भी अपनी गांड हिला हिला कर मेरा साथ दे रही थी.

थोड़ी देर बाद चाची ने मुझे कस के पकड़ा और बोली- मेरा हो गया!

पर मैं लगा रहा.

थोड़ी देर बाद चाची जी को फिर से जोश आ गया और उन्होंने फिर से वही आवाज निकालनी शुरू की! वो बीच बीच में मुझे जगह जगह काट रही थी, मैं धक्के दिए जा रहा था और उन्हें मज़ा आ रहा था.

वो एक बार और झड़ गई, मेरा भी टाइम आ गया, मैंने कहा- चाची, अब मेरा भी होने को है… आई एम कमिंग टू!

उन्होंने कहा- अपनी चाची की चूत के अन्दर ही डाल दो!

मैं हल्के हल्के झटके देता हुआ चाची की चूत के बाहर गांड के छेद के ऊपर झड़ गया! कुछ देर आराम करने के बाद चाची फिर से मेरी छाती को मस्त चूमने लगी, में भी यही सोच रहा था की एक बार की चुदाई से तो चाची का मन शायद नहीं भरेगा, फिर वो चूमते चूमते मेरे निप्पल्स को भी चूमने लगी, मेरा लंड फिर से हरकत कर रहा था थोड़ा टाइम तो हो गया था तो उसका उठना भी जायज़ था फिर चाची मुझे चूमते चूमते मेरे ऊपर आई और मुझे किस करने लगी, किस करते करते चाची ठीक से मेरे ऊपर आ गयी और मेरे दोनों पैरो को अपने पाँव से थोड़ा सा स्प्लिट किया और अपनी चुत को मेरे लंड पे घीसने लगी. लेकिन लंड इतना भी खड़ा नहीं था की चुत में फिर से डालूं, ये चाची भी समझ गयी तो वो मुझे चूमते चूमते निचे चलि और मेरे लंड को सहलाने लगी, और मस्त चूमने लगी, मैंने चाची की गांड पे हाथ से एक थपथपाया तो चाची भी समझ गयी और मेरे मुँह के पास अपनी चुत ले के ६९ में हो गयी और मेरे लंड को चूसने लगी, चाची की चुत पे अभी भी उनके लिक्विड था और मैंने फिर चाची की चुत में अपनी मिडिल फिंगर डाली और चाची की चुत को चोदने लगा, चाची की चुत अभी भी शायद गरम थी, मैंने बस दो तीन मिनट तक चाची की चुत को फिंगरिंग किया की चाची की चुत फिर से गीली होने लगी और फिर मैंने अंदर दूसरी भी ऊँगली दाल दी और चाची की चुत को मस्त तेज़ी से चोदने लगा, चाची की चुत से और भी रस आने लगा तो मैंने फिर चाची की चुत से निकलते रस को अपना हाथ से चाची की गांड पे डाइवर्ट कर दि, वैसे भी मेरे लंड से निकले लिक्विडे को मैंने जानबूझ के चाची के गांड के पास झड़ा था चाची तो मेरे लंड को चूसने में मस्त थी, उनकी तेज़ साँसे भी मेरे लंड को महसूस हो रही थी. मेरा लंड अब तन चुक्का था

तो मैंने समझते हुए, मैंने आराम से चाची के दोनों गांड चक्स को अपने हाथों से अलग किया और चाची की गांड से मेरे वीर्य और चाची के चुत के रास के मिलने से मस्त महक आ रही थी, तो मैंने उसे दो तीन बार मस्त सूंगा. फिर मैंने अपने मुँह में अपनी मिडिल फिंगर दाल के गीला किया और चाची की गांड में ऊँगली दाल डी. जैसे ही चाची ने महसूस किया की मेरी ऊँगली उनके गांड में हे तो वो एक दम से उठी और मेरे हाथ पे ही बैठ गयी, अब मेरी ऊँगली पहली बार में आधी ही अंदर गयी थी, पर चाची के एक दम उठ के बैठ जाने से पूरी मेरी ऊँगली अंदर चलि गयी और चाची के मुँह से एक आअह्ह्ह्ह निकली. चाची के बैठ जाने से में ऊँगली अंदर बाहर तो नहीं कर पा रहा था

 
अपडेट 90

चाची के बैठ जाने से में ऊँगली अंदर बाहर तो नहीं कर पा रहा था

“रेशु, यह नहीं करना..इसमे बड़ा दर्द होगा”..

“चाची सच में बड़ा मज़ा आयगा. आप को दर्द हो तो ना बोल देना”..

“नहीं रेशु, बाद में तुम नहीं मानोगे”, .

“मैं पक्का मानूँगा.. और ऐसे कह्के मैंने चाची के बैक पे प्रेशर किया और चाची को फिर से आगे की और झुका दीया और खुद बाहर आ गया, अब चाची का फेस बेड में धस गया था और मैंने चाची की गांड में ऊँगली दाल रक्खी थी, फिर मैंने साइड में से एक क्रीम लिया और उसे गांड पे डालते हुए, चाची की गांड में ऊँगली अंदर बाहर करने लगा, चाची धीरे आह ओह कर रही थी, मुझे पता था की अभी तक दर्द तो हुआ नहीं हे, तो मै चाचीसे पूछ लिया, “चाची दर्द तो नहीं हो रहा ना”, और चाची ने भी कहा नही, तो मैंने थोड़ी तेज़ी से चाची की गांड को चोदने लगा, और चाची की मोनिओंग भी तेज़ तो हो रही थी, पर बड़ा मज़ा आ रहा था फिर मैंने टाइम वेस्ट न करते हुये, अपने घुटनो पे बैठते हुए, चाची की गांड पे अपना लंड रक्खा और चाची की गांड में डालने लगा. सच में दो बार तो जरा सा भी नहीं गया, और चाची समझ गयी की ऊँगली तो एक इंच की थी और लंड की चैडाई तीन इंच हे, तो बड़ा दर्द होगा, और वो उठने गयी, और मैंने इतने में दोनों हाथों से गांड को चौड़ा करते हुए लंड के आगे वाले पिंक पार्ट को अंदर दाल दिया, और चाची उठने गयी, इससे लंड के टिप के अलावा और भी दो इंच लंड अंदर चला गया, और बॉस चाची तो कुदने लगी, जलन के मारे बोल भी नहीं पा रही थी, मुझे लगा की वो अगर ऐसे ही कुदने लगी, तो मुश्क़िल से डाला लंड भी बाहर निकल जायेगा, तो मैंने चाची को अपने सीने से लगा लिया और चाची को चोदने के लिये, एक्ससाइटमेंट बढाने के लिये, जी स्पोट को मसलने लगा, एक दो मिनट में ही चाची शांत हो गयी, और मैंने फिर से चाची को बैठा दिया और चाची के गांड में लंड डालने लगा, लेकिन अंदर जा नहीं रहा था तो मैंने शुरू शुरू में आधे लंड से ही चोदना शुरू किया और अपने हाथ से चाची के जी-स्पॉट को मसलने लगा, चाची को सच में एक्सट्रीम पैन तो हो रहा था पर फील नहीं हो रहा था वो अब चुदाई के बाद होगा.

मै काफी धीरे धीरे चोद रहा था तो चाची को दर्द भी नहीं हुआ, और थोड़ी देर में मेरा पूरा लंड भी अंदर चला गया, अब चाची मेरे हाथ में थी, अब मैंने चाची के जी-स्पॉट को छोडा और अपने दोनों हाथ से चाची की गांड को पकड़ के मस्ती से चुदाई करने लगा, अब चाची असली पैन फील कर रही थी, वो अपने हाथ पछाड के मुझे छोड़ने के लिए कह रही थी, पर मैंने नहीं छोड़ा और वो अब कुदने लगी, तो मैंने कहा, चाची अब कुछ नहीं होगा, थोड़ा सा सह लो, बड़ा मज़ा आयेगा.

लेकिन चाची नहीं नहीं कहते कहते, रोने लगी और उनकी आँख से आंसू बहने लगे, लेकिन मुझे चोदने में बड़ा मज़ा आ रहा था फिर १० मिनट रोने के बाद वो भी समझ गयी की अब में उन्हें नहीं छोड़ने वाला, तो उन्होंने भी हाथ पाँव मारना बंद कर दिया और बेड पे बस अपना मुँह कर के रोने लगी और चिल्ला रही थी, पर में तो मस्त चोदे जा रहा था बॉस क्या मस्त गांड चुदाई थी, फिर धीरे से मैंने चाची के हाथ को पकड़ा और चाची के जी-स्पॉट पे रख्ख, तो चाची भी समझ गयी की अगर दर्द से बचना हे, तो इसे मसलना होगा, और वो भी अपने जी-स्पॉट को मसलने लगी, और २-३ मीनट में ही उनका रोना बंद हो गया और वो अब डॉगी स्टाइल में बैठ के मज़ा करने लगी, फ़ीर एक बार तो मैंने चोदना छोड़ के बस लंड अंदर दाल के बैठा रहा तो चाची खुद ही अपने आप अंदर बाहर होने लगी, और एन्जॉयमेंट फील करने लगी. “आह,ओहहहह” फिर मैंने चाची की कमर को पकड़ा और अब तेज़ी से चोदने लगा, और चाची का पैन ग़ायब हो के प्लेअजर बन गया था वो भी अब उछल उछल के साथ दे रही थी, हालाँकि चाची की गांड एक दम लाल हो गयी थी, लेकिन अब उन्हें मज़ा आ रहा था

अब में थोड़ा सा थकने लगा था तो मैंने और तेज़ी से चोदना कंटिन्यू किया और फटा फट चोदने लगा. चाची भी आह..ओह कर रही थी, फिर ऐसे चाची को दस मिनट तक चोदने के बाद मेरे झड़ने का टाइम हो गया तो मैंने चाची को धक्का दे के बेड पे उलटा पूरा लीटा दिया और खुद भी चाची पे लेट के चोदने लगा, ऐसे चोदने में काफी दर्द होता हे, क्यूँकि फीमेल के पास लंड का धक्का खाने की जगह नहीं होति, तो चाची परेशान होने लगि, पर मैंने चाची को पकड़ के रक्खा और धक्के मारने लगा, बस ऐसे दस बारह धक्के मारे और मेरा लंड झड़ने लगा, मैंने चाची की गांड में ही अपना सारा वीर्य उडेल दिया और लंड नरम पड़ते ही चाची पे से हट के फिर से सीधा लेट गया, लेकिन चाची ऊल्टी लेट के थोड़ी देर रोती रही. मैंने एक दो बार चाची की बैक को छू के उन्हें मनाना चाहा पर वो एक शब्द भी नहीं बोली तो में भी उठ के बाथरूम में चला गया और फ्रेश हो गया. मैं फ्रेश हो के बाहर आया तो चाची अभी भी ऐसे ही लेटी थी, पर मैंने ठीक से देखा तो वो आराम से सो रही थी, तो मैंने उन्हें डिस्टर्ब न करते हुए सोने दि, और अपना सामान पैक करने लगा. फिर चाचा को भी जाने के बारे में कॉल कर दिया और प्लानिंग से तीन घंटे के बाद आने को कहा ताकी चाची भी उठ जाये.

 
अपडेट 91

फिर जब चाचा की कार आई तब चाची उठी, और एक दम शॉक हो के अपने कपडे पहनने लगी, में बाहर जा के चाचा से बातें करने लगा, इतने में चाची चेंज कर के आई और वो फिर चाचा को शक़ न आये इसीलिए किचन में जा के चाय बनाने लगी. चाची की चाल से साफ़ लग रहा था की चाची की गांड फट चुकी हे, और इसमेंसे दर्द हो रहा हे. फिर में भी थोड़ी देर में किचन में पाणी पीने गया, चाची अब भी बात तो नहीं कर रही थी, पर मेरे जाने से दुखी तो थी. मैंने भी चाचीसे कहा

“चाची, ये दर्द कल तक चला जायेगा, पर कल के बाद आप मुझे याद करेंगी”..

लेकिन चाची ने उस टाइम न सुनती हो ऐसे अपना काम करने लगी. मैं बाहर आ गया और चाय पी के जाने लगा. चाचा मुझे छोड़ने स्टेशन आ रहे थे, में जब कार में बैठा तब चाची ने कहा

“रेशु, हो सके तो जल्दी आना”..

मैने भी मुस्कुरा के हाँ कहा और कार चल पडी, मैंने मूड के देखा और हाथ हिलाया तो चाची भी हाथ हिला रही थी. चाची ने जो कहा वो मिक्स्ड सेंटेंस लगा, वो एक तरह से सिर्फ कहने को कहा था पर ऐसा भी लग रहा था की वो दिल से कह रही थी. खैर में परेंट्स से मिलने के लिए घर को निकला और बस में बस छोटी चाची के बारे में ही विचार आ रहे थे. मंदिर में चाची की गांड को दबाना, और चाची का भी मान जाना, फिर क्लिनिक में चाची को फिंगरिंग करते देखना, चाची का थोड़ा सा मिक्स्ड रिस्पांस हर बार मुझसे ही शुरुआत चाहना. बस में एक घंटे का सफर था पर बस ऐसे ही सोचते सोचते बीत गया.

बडी चाची के बारे में भी ख्याल आया और कोमल दीदी के बारे में भी सोचा और दोनों को बहुत दिनों से कॉल नहीं किया था तो मैंने दोनों से फ़ोन पे बात की और दोनों ही मुझे मिस कर रही थी, मैंने बताया की दो तीन दिन में में लौट आउंगा और ये सुन के दोनों खुश हो गयी. बॉस चाची तो थोड़ा सा ज्यादा ही एक्ससायटेड थी, मेरे आने से, हो भी क्यों ना, बड़े दिनों से मुलाकात नहीं हुई थी.

फिर में घर पहुंचा, तब शायद ६ बज रहे थे और पता था की घर पे शायद माँ अकेली ही होगी, पर तो मैं सरप्राइज डैड भी आ गए थे मुझे सरप्राइज देख के उन्होंने कहा की बड़े दिनों बाद आ रहे हो तो तुम्हारे लिए टाइम निकालना ही था फिर मैंने उनके पाँव छुये और माँ से जान बूझ के गले मिला, माँ को थोड़ा सा अजीब लगा पर कुछ कहा नही, मैंने हलके से माँ के पीठ पे हाथ भी फिराया, मुझे भी इतनी जल्दी ऐसे करना ठीक नहीं लगा पर फिर इसके बारे में बड़ा सोचा नही, माँ ने भी इसे इग्नोर कर दिया.

फिर उस दिन कुछ तो ख़ास नहीं हुआ, और मैंने भी शुरू शुरू में ज्यादा करना मुनसिब नहीं सम्झ.रात को खाना निपटा के में अपने रूम में था की छोटी चाची का एसएमएस आया.

“कैसे हो रेशु.?

तो मैंने रिप्लाई करने के बजाय कॉल ही कर दिया और कहा

“मैं ठीक हूँ चाची, पर आप को ऐसे एसएमएस के जरिये बात करने की जरुरत नही, आप कॉल भी तो कर सकती थी. लेकिन अच्छा लगा”..

“रेशु, सच में तुमने कहा था पता नहीं मुझे तब क्यों गुस्सा आ गया था आई एम सॉरी”.. चाची सच में ग़लती फील कर रही थी.

“अरे चाची, ऐसे सॉरी कहने की कोई जरूरत नही, ऐसे तकलीफ में गुस्सा आना नार्मल हे, और बाद में वो उतर भी जाता हे”. . मैंने चाची को कंसोल करने की कोशिश की.

फिर चाची ने आराम से बात की और एन्ड में कहा भी की हो सके तो जल्दी आना, तो मैंने कहा की चाची अब तो अगले साल ही मुमकीन लग रहा हे, नेक्स्ट इयर स्टार्ट हो रहा हे, और पढना भी जरूरी हे.

“रेशु, तुम वाकई, अच्छे लड़के हो”..

“मुझे पता हे., चाची”...

ओर फिर हँसते हँसते चाची को बाई कहा और कॉल डिसकनेक्ट कर के अपने पर प्रौड़ भी आया की जो सोचा था वही हुआ. चाची से बात कर के अच्छा लगा, फिर मैंने माँ के बारे में सोचा और मन में विचार आगया की चलो देखता हू, कोई रिप्लाई आया की नही, मैंने लैपटॉप ओपन किया और देखा तो माँ की और से कोई रिप्लाई नहीं था मुझे थोड़ी सी हैरानी सी हुई कि, माँ ने ये जानने की भी कोशिश नहीं की, की कौन ये सब मेल भेज रहा हे. तो मैंने इस बार १० इरोटिक स्टोरीज माँ को मेल कर दि, अब तो पक्का यकीन था की माँ रिप्लाई तो करेंगी. और में माँ के बारे में सोच सोच के मूठ मार के सो गया.
 
*सूर्य संवेदना पुष्पे:, दीप्ति कारुण्यगंधने|*

*लब्ध्वा शुभम् नववर्षेअस्मिन् कुर्यात्सर्वस्य मंगलम् ||*

```जिस तरह सूर्य प्रकाश देता है, संवेदना करुणा को जन्म देती है, पुष्प सदैव महकता रहता है, उसी तरह यह नूतन वर्ष आपके लिए हर दिन, हर पल के लिए मंगलमय हो।```

_*नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें !*_
 


अपडेट 92

सुबह को पापा जाने वाले थे तब उठा और वो थोड़ी ही देर में निकल गयी, और में भी फ्रेश हो गया, फिर बाथरूम से बाहर आ के मैंने देखा की माँ मेरा फेवरेट फ़ूड बना रही हे, तो मैंने माँ से कहा

“माँ मुझे एक दो मेल करने हे, तो क्या आपका लपटॉप, यूज कर लू.? जवाब ऑफ़ कोर्स हाँ ही होना था और मैंने माँ का लैपटॉप ओपन किया, माँ का आईडी डाला. माँ को बहुत पता हे कम्प्यूटर्स के बारे में, पर सब पता नहीं तो उन्होंने अपना पासवर्ड सेव रक्खा था तो मैंने मेल ओपन कर के देखा तो मैंने रात को १० बाजे जो १० स्टोरीज भेजीं थी, वो भी माँ ने पढ़ रक्खी थी...में तो हैरान हो गया, की माँ ने वो पढ़ी क़ब? लेकिन पहले मैंने माँ का अकाउंट साइन आउट किया, और अपने रूम में जा के अपना आईडी ओपन किया तो माँ ने कोई रिप्लाई नहीं किया था स्टोरीज के बारे मे. बॉस आई वास् रियली शॉकेड. में साला ये समझ नहीं पा रहा था की ये हो क्या रहा हे.

मैने अपना लैपटॉप बंद किया, साइड में रक्खा और माँ के बारे में सोचने लगा. बॉस अब तक मैंने १७ स्टोरीज मेल की, माँ ने सारी पढि, अननोन मेल से आई स्टोरीज पढ़ने के बाद भी माँ ने एक भी रिप्लाई नहीं किया, साला मतलब समझ में नहीं आया. सच में मेरी माँ को समझना थोड़ा मेरे लिए मुश्क़िल था जैसे की मैंने आपको पहले बताया की मेरी माँ मिक्स्ड टाइप की हे, वो डॉक्टर्स की वेस्टर्न टाइप की पार्टीज में जाती हे, बाहर जाते वक़्त फैशनेबुल कपडे पहनती हे, और सब से ऐसे मिलति हे जैसे वो ओपन माइंडेड हो, पर घर में टोटली चेंज बिहेवियर करती हे, मुझे थोड़ा सा कण्ट्रोल में रखती हे, घर में सिर्फ सारीस पहनती हे, मैंने पहले बताया, अब तक मुझे माँ को छूने का मौका भी ज्यादा नहीं मिला, क्यूँकि कभी माँ से ज्यादा ऐसे छूना नहीं हुआ. लेकिन इस बार जब घर आ के माँ से डायरेक्ट गले मिला तो अच्छा लगा, बॉस क्या गर्मी थी, माँ के बदन की. माँ को भी थोड़ा सा शॉक तो हुआ, पर शायद उन्हें भी अच्छा लगा होगा. मैं माँ के बारे में सोच रहा था की इतने में माँ ने चाय के लिए आवाज़ डी. मेरे मन में एक बात क्लियर थी, की माँ को पटाना साला थोड़ा सा मुश्क़िल तो होगा.

लेकिन में अपने रूम से बाहर आया और माँ मेरे लिए चाय ले के आयी, में माँ के बॉब्स की और देख रहा था माँ भी मेरे साथ ही चाय ले कर बैठी और मैंने चाय पिते पिते ठीक दो बार माँ के बॉब्स की और ग्लान्स कर के तीरछी नज़र से देख लिया.

बोस क्या मस्त बॉब्स थे, यार साइज भी सच में परफेक्ट की मेरे हाथ के लिए ही जैसे बने हो. फिर माँ उठ के किचन में चलि गयी और में न्यूज़ पेपर पढता रहा, मुझे लगा की माँ को पहले मेरे इरदों का पता चल जाना चहिये, इसीलिए में माँ को बस गोर से देखने लगा, माँ किचन से बाहर आती, तो में माँ की साइड से कमर, बॉब्स को देखता रहता, एक दो बार में किचन में पाणी पिने के बहाने से गया, तब भी मैंने माँ के बॉब्स को ग्लान्स कर के देखा. लेकिन साला ये समझ के बाहर था की कहीं माँ मेरे बिहेवियर को समझ रही हे की नही, माँ की और से ऐसा तो नहीं लग रहा था की उन्होंने मुझे पकड़ा हो. साला पहली बार फैल होने का डर लग रहा था दोपहर लंच के बाद भी में अपने रूम में सोचता रहा, की आगे क्या करू.. कुछ पता नहीं चल रहा था सच में माँ को पटाना सब से टफ था अच्छा फिर एक बार जरा माँ के बारे में बता दुं, तो आप सब लोग भी माँ को अच्छे से फ़न्तासी कर पाएँगे, माँ दोनों चाची की तरह क्रीमी बदन वाली गोरी गोरी तो नही, पर गोरी हे और बॉस माँ ऐसी ही ज्यादा खूबसूरत लगती हे. बॉस वो साक्षी तंवर की तरह लगती हे, मस्त और हलके से बड़े होठ,छोटे से स्माल, हमेशा सोच समझ के बोलने वालि, बॉब्स भी साक्षी तंवर की तरह हमेशा थोड़े से बाहर की और ऊभर देते हुये, और कभी कभी जब माँ बैकलेस ब्लाउज पहनती हे, तो में तो माँ के आगे पीछे होने के लिए बेताब बन जाता हू. लेकिन माँ इतना अपने आप को सम्हालती हे, की मैंने बड़ी मुश्क़िल से एक दो बार माँ की ब्रा ब्लाउज से स्लीप होते हुए देखा होगा. सच में मेरे माँ के क्लिनिक में कुछ लोग तो ऐसे ही आते होंग, मुझे ऐसा लगता था हमेशा से. पता नहीं माँ को देखने से उनके दर्द की दवा मिल जाती थी की एक नया दर्द मिल जाता था

अच्छा अब एक बात तो साफ़ थी की माँ ने मेरी भेजीं हुई सारी स्टोरीज पढि, पर रिप्लाई नहीं किया, ये साला टिपिकल बिहेवियर माँ के पास सेक्सुअली आगे बढ्ने से मुझे रोकता था पर आप लोग भी जानते हे की इतनी आसानी से हम हार मानने वाले हे नहीं और एक बात तो साफ़ हे और सच भी हे की दुनिया में किसी भी औरत को पटाया जा सकता हे, बस थोड़ा सा टाइम, थोड़ा सा दिमाग और थोड़ी से एक्टिंग...हर लड़की का गेम ओवर हो सकता हे. माँ का भी होगा. लंच के बाद में अपने रूम में बैठ के माँ के ही बारे में सोच रहा था की माँ ने मेरे रूम पे नॉक किया, पता नहीं मुझेकैसे आहट लग गयी थी माँ के आने की.शायद मेरा दिमाग माँ माँ ही कर रहा था

“माँ प्लीज आप को आने से पहले नॉक करने की जरूरत नही... माँ को भी शॉक लगा और उन्होंने रूम में आ के पूछ

“रेशु, तुम्हे कैसे पता की में हूँ.

“ओफ़्फ़ओ, माँ आप को में दूर दूर से पहचान सकता हूँ”. बस ऐसी बातों से ही तो काम बनता हे.

“अच्छा, वो सब छोडो, में जरा क्लिनिक हो के आती हू, जल्दी आ जाऊंगी”.. माँ ने स्माइल के साथ कहा और ऐसा लग रहा था की माँ ने साला अब तक मुझे ऑब्सेर्वे ही नहीं किया की में सुबह से उन्हें स्टेर किये जा रहा हू.

 


अपडेट 93

माँ बाई बोल के चलि गयी, मैंने फिर अपना लैपटॉप लिया और माँ को इस बार एक नया मेल भेजा,

“मे आई कंटिन्यू और नॉट? बस इतना सा सवाल एक बोल्ड से लेटर में लिख के भेजा, पर वो भी साला बेक़ार, शाम तक माँ भी क्लिनिक से आ गयी, पर जवाब नहीं आया. फिर में इस ट्रिक को छोड़ के कोई और प्लान के बारे में सोच्ने लगा. इतना तो पता था की पापा को अस्थमा था मतलब वो माँ के साथ सेक्स नहीं कर सकते, पर क्या माँ सेक्स में इंटेरेस्टेड हे की नही, ये अभी मेरे लिए क्वेश्चन था क्यूँकि अगर माँ को इंटरेस्ट हे, और प्यास हे, तो मेरा काम आसान हे, पर अगर माँ को इंटरेस्ट ही नही, तो पहले इंटरेस्ट जगाना पड़ेगा, और काम थोड़ा सा मुश्क़िल और लम्बा बन जायेगा. बड़ी चाची, कोमल दीदी और छोटी चाची के बारे में तो पता चल गया था की वो सेक्स के लिए हंगरी हे पर माँ के बारे में पता नहीं था जैसे ही माँ के एक्टिवा के आने की आवाज़ सुनाई दी तो मैंने फ़टाफ़ट एक नया प्लान सोचा और फ़टाफ़ट अपने कपडे उतार दिया और बस वी-शेप अंडरवेअर ही पेहन रक्खा और एक्सरसाइज करने लगा. माँ ने घर में आने के बाद जब तक मेरे रूम में आई तब तक में अपने बदन पे थोड़ा सा पसिना जमा चुका था और मेरे बैक पे और सीने पे काफी पसिना आ गया था में पुश उपस कर रहा था जब माँ ने मेरे रूम का दूर ओपन किया. माँ ने देखा की में सिर्फ अंडरवेअर में हू,

“ओह..सॉरी, रेशु”. और वो दरवाजा बंद कर के वापस जा रही थी.

“माँ प्लीज फॉर्मल मत बने, आप अंदर आ सकती हे”. माँ के लिए ये थोड़ा सा अजीब था क्यूँकि माँ के साथ ऐसे पहले कभी कन्वर्सेशन नहीं हुआ था और वो मुझे ऐसे पहले बार देख रही थी, फिर भी माँ से मैंने कहा तो माँ धीरे से दबे पाँव सोचते सोचते हुये, मेरे बेड पे आ के बैठ गयी. माँ ऑफ़ कोर्स मुझे ही देखे जा रही थी. मैं भी माँ के साइड में ही रह के एक्सरसाइज कर रहा था

“रेशु, ये एक्सरसाइज का कब से चस्का लगा”.? माँ ने पहली बार मुझे ऐसे देखा था तो ऐसे ही पूछ लिया.

“बस माँ कॉलेज में, फ्रेंड्स के साथ जिम में जाता था तो वहीँ से आदत लग गयी, और अब तो रोज़ करता हू, तो मज़ा आता हे”.. और ऐसे कह्के में उठ गया. और माँ को अपने बाइसेप्स फुला के दिखाए. माँ सच में एक टक मेरे बदन को देख रही थी, लेकिन फिर नाटक करते हुए कहा की “जा जाके नहा ले, पसीने से बेहाल हो गया हे”. और वो उठ के बाहर चलि गयी.

मों के जाने के बाद, ऐसा लगा की हश कुछ तो शुरुआत हुई, माँ ने न सही मेरी और से तो तरय कंटिन्यू ही होना चहिये. माँ दरवाजे से निकलते हुए, जाते जाते मेरी और पलट के देखने लगी, और जैसे ही माँ ने मेरी और नज़र कर के देखा तो मैंने भी माँ को देख लिया और माँ ने फिर बहाना कर के मेरे रूम का डरवाजा बंद किया, बस ये बताने के लिए की वो मुझे नहीं बस दरवाजा बंद करने के लिए मूड़ी थी.

मै फिर बाथरूम में जा के फ्रेश हो गया और नाईट ड्रेस में चेंज कर लिया. फिर में बाहर आ के माँ के साथ ड्राइंग रूम में बैठा माँ ऐसे ही बैठी थी. पापा ने डिनर के लिए बाहर जाने का प्रॉमिस किया था तो उन्हें डिनर की झंझट नहीं थी.

“रेशु..अहमदबाद में कैसे लग रहा हे... में माँ के पास बैठा और उन्हें अब ठीक से बात करने को टाइम मिला.

“बस माँ आप देखिये ना, कैसा लग रहा हू”... मैंने माँ को जवाब देणे के बहाने से नया टॉपिक भी खोल दिया और सवाल के बदले सवाल भी पूछ लिया.

“ह्म्म्म..वईसे तो काफी अच्छे लग रहे हो, अहमदाबाद जा क़र, बड़े अच्छे लग रहे हो, लेकिन एक साल में काफी बदल गए हो, ऐसा लग रहा हे”.. बस ये बदलने वाली बात माँ बोले उस बात का इंतज़ार था

“क्यूँ मोम..क्या हुआ”...

“नही..कुछ खास नही, पहले थोड़े से शरमीले थे, अब थोड़ा सा खुल के बात करते हो, एक्सरसाइज भी करने लगे हो, लेकिन पहले से काफी अच्छे भी लग रहे हो. अब लगता हे तुम बड़े हो गए हो”.. माँ ने साफ़ कर दिया की मुझे बस अंडरवेअर में देखने के बाद वो मुझे बच्चा नहीं एक आदमी की तरह सोचने लगी हे. चलो पहला गेम छोटा था पर सही निकला. अब माँ के डिस्क्रिप्शन का मेरे पास कोई सवाल या जवाब नहीं था तो में शर्मा गया और माँ के सामने ही शर्मा के सर निचे कर के देखने लगा.

“अरे इसमें शर्माने की क्या बात हे, अभी अभी तो कहा की अब शरमाते नहीं तो अच्छे लग रहे हो”.. बॉस एक तरह से माँ ग्रीन सिग्नल दे रही थी की शर्माओ मत्, और जो चाहे वो करो. मैं अभी भी कोई बात करने की सिचुएशन में नहीं था माँ समझ रही थी की उनकी बातों से मुझे शर्म आ रही हे तो उन्होंने बात चेंज करते हुए कह्

“अच्छा वो सब छोडो, यह बतओ, कोमल कैसी हे..? पता नहीं चला की माँ अचानक कोमल दीदी के बारे में क्यों पूछ रही हे.

 
अपडेट 94

“दीदी अच्छी हे, क्यों क्या हो गया, माँ.?

“बस ऐसे हि, एक बार उसका कॉल आया था तो तुम्हारे बारे में काफी बातें कर रही थी, उसके मुँह से बड़ी तारीफ़े निकल रही थी, एक पल के लिए तो लगा की ये क्या हो गया, दोनों भाई बहन कभी एक साथ नहीं रहते थे, तो ये चेंज कैसे हो गया, मैंने उससे पुछा पर उसने बताया”..

“अरे वो कुछ नहीं मोम, बस वो शादी में एकट्ठा हो गये थे तब हम दोनों को कोई ज्यादा पहचानता नहीं था तो ज्यादा टाइम हम एक दूसरे से ही बात कर रहे थे, तब से बातों बातों में अच्छा टाइम बीत गया और थोड़ा सा क्लोज हो गए हम, लेकिन माँ कोमल दीदी भी बड़ी अच्छी हे”.. उफ्फ्फ कोमल दीदी ने फसा दिया था कैसे भी जवाब दे के में बचा. बॉस माँ के साथ नार्मल रहने में ही भलाई लग रही थी मुझे, क्यूँकि अभी तक कुछ सिडक्टिव सिचुएशन नहीं हो रही थी. इतने में पापा आ गए और में माँ के सवालों से बच गया. फिर माँ डैड के साथ में बाहर डिनर करने गया, और माँ ने मानो मेरे मन की बात पढ़ ली, हो ऐसे सच में बैक लेस्स ब्लाउज पहना था डार्क ब्लू साड़ी और मैचिंग ब्लौस, क्या मस्त माँ लग रही थी, में होटल में जाते ही माँ के पास में ही बैठा और पापा सामने बैठ गयी. माँ मेरी राईट साइड थी, और साइड से माँ की कमर और थोड़ा सा पीछे होते ही माँ की बैक दीखती थी. बॉस अब तो मेरा मन माँ माँ कर के रो रहा था मैंने पूरे डिनर के दौरन माँ की और ही ध्यान रक्खा और माँ को ही झाँकता रहा, माँ ने भी कई बार ऑब्सेर्वे किया, क्यूँकि और भी कुछ लोग माँ को देख रहे थे.

लोगों का भी क़सूर नहीं हे, माँ हे ही ऐसी कसी हुई, तो उनका भी क़सूर नही. पर मेरे बार बार देखने से माँ सच में मन में हलकी सी नराज़ हुई होगी, पर कुछ कहा नही, क्यूँकि इतने दिनों के बाद वापस आया था हम डिनर कर के वापस लौटे, साला ये दिन भी वेस्ट हो गया. मैं अपने रूम में बैठ के अपनी काबिलियत पे सवाल उठने लगा की यार, माँ पटेगी की नहीं...?

कल को वापस बड़ी चाची के पास लौटना था सोचा की बड़ी चाची से इस बारे में बात करूंग, और फिर आगे कुछ सोचूंगा.और में अपने लैपटॉप में खो गया, फिर दोपहर के मेल का ख्याल आया तो मैंने मेल चेक किया, और कमाल हो गया, माँ ने रिप्लाई किया था

“हु आर यु ?

बस इतना सा ही पूछा था मैंने सोचा था की माँ थोड़े ग़ुस्से में होगी, तो पुछेगी की हु द हेल यु आर? पर सवाल माँ की तरह कुछ कॉम्प्लीकेटेड था साला अब इसका क्या जवाब दूँ.पहले सोचा की लिख दून की तुम्हारा आशिक़ हू, पर ये काम का जवाब नहीं था. फिर मैंने बहुत सोचने के बाद रिप्लाई किया

ओर रिप्लाई में कुछ नहीं लिख, बस एक मस्त इरोटिक सी स्टोरी स्पेशली माँ सन एनकाउंटर वाली स्टोरी माँ को मेल कर दी. एक्स्ट्रा कुछ भी नहीं लिक्खि, पता था की माँ ये जवाब तो मेरे से एक्सपेक्ट नहीं करेगि, और ये सब से अलग था फिर मैंने फिर इन्बॉक्स में देखा तो माँ का रिप्लाई अभी अभी आया था..मतलब की वो अभी अपने रूम में ऑनलाइन थी..लकिन आधे घंटे तक माँ ने रिप्लाई नहीं किया.और में माँ के बारे में ही सोच रहा था साला माँ ख़यालों के बाहर जा ही नहीं रही थी.माँ के ही सपने आ रहे थे, की माँ की बैकलेस ब्लाउज को फाड़ रहा हूं..मोम को इतने जोर से चोद रहा हूँ की पूरा बेड हिल रहा हे..और माँ चीख़ के दर्द केमारे तड़प रही है..लकिन उनको भी मज़ा आ रहा हे..में भी लगा ही रहा हूँ धड़..धड़ चोदने में....लकिन ये सब ख्याल की बातें थी और ऐसे सोचते सोचते ही नींद आ गयी, और दूसरे दिन की सुबह भी हो गयी.

 
अपडेट 95

साला ये तो जाने का दिन आ गया, और कुछ भी नहीं हुआ, लेकिन ये तो होना ही था माँ हे एक दो दिन में कैसे पटने वाली थी, लेकिन इतना पक्का हो गया था की माँ दूसरे दिन जब उठी और में फ्रेश हो के बाहर ड्राइंग रूम में आया तो माँ ने अपना पल्लु ठीक किया.ये साफ़ इशारा था की वो अब समझ चुकी हे की में भी दूसरे मर्दो की तरह उन्हें सेक्स की नजऱों से देखता हू. और तो और जब में उनके नजदीक से पास हुआ तो उन्होंने मेरे लंड की और देखा, ये भी इशारा था की माँ को अब भी सेक्स की प्यास हे, क्यूँकि उन्होंने मुझे सिर्फ अंडरवेअर में देखा और अब मेरे क्रोच की और देख रही थी..बोस मेरा काम बन रहा था मुझे अब यकीन हो रहा था की माँ अब भी सेक्सुअली एक्टिव हे, और मुझे बस ये ही जानना था.की अगर माँ में सेक्स की प्यास हे, तो किसी भी तरह से माँ को पटा लूँगा मुझे शाम को निकलना था पापा क्लिनिक को निकल गये, माँ लेट जाती थी इसीलिए हम दोनों ही बैठे रहे, लेकिन बात करने को कोई टॉपिक नहीं था तो माँ ने नॉर्मली ही पूछ लिया

“रेशु..पैकिंग कर ली क्या तुमणे...?

“नहीं माँ.बाकि हे, लेकिन में कर लूंगा..

“तेरा ना..एक काम ढंग का नहीं होता, चल ठीक हे, में करे देती हू.. और वो उठ के मेरे रूम में चलि गयी, और मैंने टीवी ऑन कर दिया और म्यूजिक चैनल जोर से लगा के माँ के पीछे पीछे अपने रूम की और चल दिया. माँ दरवाजे की और पीठ कर के बैठी थी, और पीछे से क्या मस्त लग रही थी, में माँ को ही देख रहा था माँ ने मेरे एक एक कर के कपडे मोड़ के अच्छे से बैग में भर्ना शुरू किया और पहले सब जीन्स रखने के बाद, टी-शर्ट्स और शर्ट्स रक्खे, फिर में झट से बाथरूम में गया और अपने बनियन और अंडरवेअर ले के आ गया. माँ अब बैग बंद ही कर रही थी की में रूम में आ गया, और माँ कसम से इतनी इंटेलीजेंट हे की मेरे आने की आहट से ही उन्होंने मेरी और मूड के देखा की कौन रूम में आया हे, मुझे कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पडी.

फिर जैसे ही माँ ने मेरी और देखा तो में बनियन और अंडरवेअर ले के बेड पे माँ के सामने बैठ गया और माँ ने अंडरवेअर को देखते हुए कहा

“ला, इसे भी रख देती हू, वर्ना भूल जायेगा,,.. और ऐसा कहते हुए हलके से मेरे सर पे मारा. और सर पे मारते वक़्त उन्होंने अपना हाथ उठाय और क्लीवेज देखने को मिला,बॉस मज़ा आ गया. इतने में ही एक आईडिया दिमाग में आया और मैंने अपने बनियन को अपने कंधे पे रक्खा हुआ था तो माँ को कहा

“माँ आप कौन सा, डिटर्जेंट इस्तेमाल करती हो? .

“क्यूं...?

“अरे माँ मस्त हे, इसमें से मस्त खुशबू आ रही हे... और मैंने माँ के सामने अपने बनियन को सूँघा और माँ की और दे दि, फिर अपने हाथ में रक्खे हुए एक अंडरवेअर को हाथ में लिया और उसे भी सूंघा, और कभी कभी में अंडरवेअर में मूठ मारता था इसीलिए उसकी खुशबू आ रही थी, और लाइट ब्राउन कलर के अंडरवेअर पे तो वाइट वाइट हलके से दाग भी थे. मैं वो अंडरवेअर माँ की और कर दिया, माँ ने पहले मेरी बात को मज़ाक में उड़ा दिया पर फिर कुछ सोचा और मेरे बनियन की बजाय मेरे अंडरवेअर को अपने हाथ में लिया, फिर मेरी और देखा और मैंने स्माइल दी माँ को, माँ ने फिर अपने हाथ को उठा के नाक के पास लायी और मेरे अंडरवेअर को सूँघने लगी, मस्त यार माँ ने दो नहीं तीन बार उसे सूंघा, और वो भी डीपलि. फिर माँ ने कुछ कहा नहीं पर मेरे अंडरवेअर को बैग ओपन कर के उसमे रखने लगी, और रखने से पहले माँ ने उसमे लगे वाइट दाग भी देखे, माँ का चेहरा शर्म से हल्का लाल हो गया और आँखों की भावनाएं बदली है उससे अंदाज़ा आ गया, लेकिन माँ ने कुछ कहा नही. फिर मेरा दिया हुआ बनियान भी बैग में रखा, ऐसी एक जोड़ी मेरे हाथ में थी, तो माँ ने फिर मेरे हाथ से बनियाँ लिया और उसे झट से बैग में डाला और अब मेरे हाथ में लास्ट अंडरवेअर था

“ला, जरा देखूं तो इसमें से भी स्मेल आ रही हे क्या”...? और माँ ने इसे भी दो तीन बार मस्त गहरी सांस लेते हुए सूंघा. मेरा लंड मेरे शॉर्ट्स में उठने लगा था माँ भी सिड्यूस हो रही थी. ऐसा मस्त लग रहा था माँ के सामने बैठ के माँ को ऐसे देखना.

“सही कह रहा हे तु, बड़ी अच्छी स्मेल आ रही हे”.. और ज्यादा कुछ कहा नहीं और अंडरवेअर को बैग में दाल के बैग बंद कर दिया. और मुझसे कहा की उन्हें २-३ घंटे के लिए क्लिनिक जाना पड़ेगा, तो वो हो के आती हे. मैंने भी ठीक हे, कहा और माँ निकल गयी.
 
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