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Incest डॉक्टर का फूल पारीवारिक धमाका

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मैं उनके ऊपेर ऐसे ही लेटा रहा दोनो गहरी गहरी साँसे ले रहे थे, आंटी मेरे कान मे बोली के

आंटी- “थॅंक यू रेशु आज तो ज़िंदगी भर की चुदाई का मज़ा आ गया ऐसी चुदाई ज़िंदगी भर कभी नही हुई थी मुझे तुम ने जवान होने का एहसास दिला दिया मस्ती मे मेरे सारे बदन मे मीठा मीठा दर्द हो रहा है,आइ लव यू रेशु यू आर दा बेस्ट, तुम सच मे एक मर्द हो और मेरे कान मे धीरे से बोली के रेशु प्लीज़ मुझे हमेशा ऐसे ही चोद्ते रहना और मुझे ज़िंदगी भर ऐसी ही चुदाई का मज़ा देते रहना”

और फिर कान के लटकते हुए हिस्से को अपने मूह में ले के चूसने लगी मेरा लंड आंटी की रस से भरी चूत के अंदर ही अंदर एक बार फिर से अकड़ने लगा तो आंटी चौंक गयी और बोली के

आंटी- “वाह रेशु यह तो फिर से तय्यार हो रहा है तो”

रेशु- “आंटी इसे भी तो आपकी टाइट चूत को चोद के मज़ा आया है और यह फिर से चुदाई करना चाहता है”

आंटी- “मैंने कब मना किया है आज मेरी चूत को चोद चोद के फाड़ डालो और इस चूत का भोसड़ा ही बना दो रेशु”,

मैं आंटी की ज़ुबान से ऐसे शब्द सुन के हैरान रह गया के इतनी शांत दिखाई देने वाली आंटी ऐसी लंड, चूत और चुदाई की बातें कर रही है मैं ने पूछ ही लिया

रेशु- “आंटी आप इतनी शांत सुशील लगती हो मैं ने कभी सपने मे भी नही सोचा था के आप मेरे से चुदवायेगी और ऐसे शब्द का उपयोग करोगी”

तो वो हसने लगी

आंटी- “क्यों मैं औरत नही हू, क्या मेरे अंदर एमोशन्स नही है, क्या मुझे चुदवाने का शोक नही है, क्या मेरी प्यासी चूत को अच्छा तगड़ा लंड नही चाहिए”?

रेशु- “यु आर राइट आंटी”

आंटी- “रेशु, तुम्है क्या मालूम के मैं कितना तड़पति हू और कितने सालो से अपनी चूत की खुजली मैं अपनी उंगली से मिटा रही हू, मेरे हजबण्ड तो किसी काम के नही है, उनका 3,५ इंच कालंड तो मेरी चूत के करीब भी नही पहुँच पाता तो तुम ही बताओ मैं क्या करू”?

रेशु- “आंटी आप एक दम से सही बोल रही हो आपको भी चुदवाने का पूरा राइट है आपको अपने एमोशन्स नही रोकने चाहिए, और आपको हमेशा खुश रखूँगा यह मेरा आपसे वादा है”

तो आंटी ने मुझे बड़ी ज़ोर से लिपटा लिया मुझे चूमने लगी

आंटी- “आई लव यू रेशु मैं ज़िंदगी भर नही भूल सकती

के तुमने मेरे बदन की आग को कैसे मस्ती से शांत किया है, आइ लव यू आइ लव यू रेशु”,

वो किसी छोटी बच्ची की तरह से मेरी बाँहो मे लिपट कर पड़ी रही,मैं थोड़ी देर उनके बालो मे अपनी उंगलियाँ डाल के सहलाता रहा और उनको चूमता रहा तो थोड़ी देर मैं मेरे कान मे धीरे से कहा

आंटी- “आइ लव यू मेरे स्वीट रेशु, तुम ने मुझे वो खुशी दी है जिसके लिए मैं आज तक तरसती थी और हा अब मुझे आंटी मत समझना अपनी रंडी समझना और किसी रंडी की तरह से ही मेरी चुदाई करना मैं हमेशा ही तुम से चुदाने के लिए रेडी हू समझे”?

रेशु- “ ठीक है आंटी आप बिल्कुल फिकर ना करो, आंटी यह तो बताओ के आपकी चूत अभी तक इतनी टाइट कैसे है”?

तो वो मुझे प्यार करते हुए बोली

आंटी- “जब साल ओ साल चुदाई ना हो तो चूत तो टाइट ही होगी ना और मेरी चूत तो लंड का रास्ता देखते देखते थक्क गयी है और आज मुझे ऐसा लंड मिला है जिसकी मैं तबसे से तमन्ना करती थी जब मैंने तुम्हें खिड़की से मुठ मारते हुये देखा था, आज मुझे मेरे सपनो का लंड मिला है और बरसो की प्यासी चूत ने ऐसे शानदार लंड का पानी पिया है और आज मेरी चूत की बरसो की आग बुझी है, अब और देर ना करो रेशु, प्लीज़ और चोद डालो अपनी रंडी को और चोद चोद के इस चूत का भोसड़ा बना दो, अब मैं और सहन नही कर सकती”

आंटी के मूह से यह सुनते ही मेरे लंड मे जैसे हलचल मचने लगी और वो एक दम से आंटी की चूत के अंदर ही फुल टाइट हो गया और बिना लंड को बाहर निकाले चोदना शुरू कर दिया, चूत पहले से ही दोनो की क्रीम से भरी हुई थी और चुदाई शुरू होते ही पच पच पच की आवाज़ें आने लगी और मैं धना धन आंटी की टाइट चूत को चोदने लगा, आंटी ने अपने पैर मेरी पीठ पे लपेट लिए और मेरे मूह मे अपनी जीभ डाल के चूसने लगी, मैं आंटी के मस्त कड़क बॉब्स को मसल रहा था और आंटी को किस कर रहा था, थोड़ी ही देर मे आंटी के मूह से मस्ती भरी आवाज़ें निकलने लगी और बोली

“आआहह रेशुऊऊऊऊऊ आईसस्सीए हीईए ऊऊओिईई म्‍म्माआआ कचूओद्दड़ दददाअलल्ल्ल्ल र्रररीईए…,!!
 
उनके डांस करती हुई बॉब्स को अपने मूह मे ले के चूसने लगा तो आंटी जैसे दीवानी हो गयी, उनके निपल्स बहुत ही सेनसेंटिव थे बूब्स को मूह मे लेते ही आंटी वासना की आग मे जल के पागल हो जाती थी, मैं फिर से पहले वाले स्टाइल मे मिशनरी पोज़िशन मे पैर पीछे टीका के फुल स्पीड और पूरी ताक़त से आंटी की चूत को चोद रहा था और वो भी मस्ती मे चुदवा रही थी, पचक पचक की चुदाई की आवाज़ें ही कमरे मे गूँज रही थी, लंड पूरा बाहर तक निकल निकल के लोंग स्ट्रोक्स दे रहा था, ऐसे पूरा लंड बाहर निकालने से आंटी के चूत के अंदर हमारा मिक्स रस थोड़ा थोड़ा बाहर निकल रहा था और बेड पे गिर रहा था, मैं फुल फोर्स से चोद रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड आंटी के पेट मे घुस रहा है, और आंटी भी मस्ती मे मेरे शोल्डर्स को काट रही थी, आंटी फिर से 3 – 4 बार झाड़ चुकी थी और चूत बेइंतेहा गीली हो गये थी, अब मैं भी छूटने के कगार पे था और मैं ने स्पीड बढ़ा दी और तूफ़ानी रफ़्तार से लंड आंटी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था और फिर एक इतनी ज़ोर से झटका मारा के मेरा लंड एक बार फिर से उनकी बच्चे दानी के अंदर घुस्स गया और आंटी अपनी चीख को रोकने की कोशिश करते हुए जो मेरे शोल्डर को मस्ती मे चूस रही थी अब तकलीफ़ से अपने दांतो से काट डाला फिर भी उनके मूह से निकल ही गया

“आआआआआहह म्‍म्म्ममाआआआआआआआअ र्र्र्र्र्ररराआआआजजजज्ज्ज्ज्ज्

ज्ज्ज्ज्जाआाआअ ऊऊऊऊओिईईईईईईईईईईईईईईई…,!!

और मेरे लंड मे से गाढा गाढ़ा रस का फव्वारा निकलना शुरू हुआ और आंटी की बच्चे दानी को भरने लगा,

मैं उनके सीने पे ही लेटा रहा, दोनो के बदन से पसीना पानी की तरह से बह रहा था, मैं थोड़ी देर के बाद उनके बदन से उठ के उनकी बगल मे लेट गया, जैसे ही लंड उनकी चूत से बाहर निकला वैसे ही उनकी चूत मे इकट्ठा हुआ दोनो का मिक्स जूस बह कर उनकी गांड पे से होता हुआ बिस्तर पे गिरने लगा और फिर हम दोनो एक दूसरे की बाँहो मे बाहें डाले लिपट के सो गया,

शाम 4 बजे के करीब मैं और आंटी दोनो नंगे ही साथ साथ उठे,

आंटी- “आहह आज से पहले इतनी मीठी और इतनी गहरी नींद कभी नही आई”,

आंटी की आवाज़ सुनते ही मेरे दिमाग़ मे चुदाई की फिल्म चलने लगी और देखते ही

देखते मेरा लंड अकड़ के हिलने लगा और आंटी के बदन से लंड लगा तो वो चोंक गयी और हाथ नीचे लगा के देखा तो लंड मूसल बना हुआ था तो वो मुस्कुरा के अपने हाथ मे मेरा लंड पकड़ के बोली,

आंटी- “अले अले बेचारे को शाएद पेट भर चोदने को नही मिला आजा मेरे प्यारे बाबू मैं तेरी भूक मिटा देती हू”

और मेरे लंड को प्यार से सहलाने और दबाने लगी, हम दोनो एक दूसरे की तरफ मूह कर के करवट लेते थे तो आंटी ने अपनी एक टांग उठा के मेरे थाइ पे रख ली जिस से उनकी चूत के पंखाड़ियाँ खुल गयी और लंड के सुपाडे से टच करने लगी और फिर आंटी ने लंड के डंडे को पकड़ के लंड के सुपाडे को अपनी चूत मे रगड़ना चालू कर दिया और देखते ही देखते उनकी चूत भी गीली हो गयी और मेरे लंड के प्री कम से स्लिपरी भी होगयि तो मैं ने उनको अपने ऊपेर खींच लिया, आंटी मेरे ऊपर जॉकी की तरह से बैठ गयी और मेरा लंड ऑटोमॅटिकली उनकी चूत के सुराख से सट गया और आंटी को पकड़ के एक ही धक्का मारा तो आधा लंड उनकी टाइट गीली चूत मे घुस गया, आंटी को झुका के उनके बूब्स को चूसने लगा, आंटी बहुत ही गोरी थी और उनके बॉब्स भी बड़े ही मस्त और टाइट थे उनके निपल्स इतने गुलाबी थे ट्यूब की रोशनी मे उनके निपल्स किसी सुलगते हुए अँगारे की तरह से लग रहे थे और उनका लाइट गुलाबी रंग का आरोला तकरीबन 1 इंच का था, आंटी के बूब्स बहुत सेन्सिटिव थे उन के निप्पल को मूह मे ले चूस्ते ही वो जैसे दीवानी हो जाती थी, मैं ने एक और धक्का दिया तो लंड कुछ और अंदर घुस गया, अब हमारी शरम ख़तम हो चुकी थी, आंटी अब मेरे लंड की सवारी कर रही थी, लंड रॉकेट की तरह से सीधा उनकी चूत के अंदर जा रहा था और आंटी मेरे लंड पे उछल रही थी और उनके बूब्स डांस कर रहे थे, अब आंटी आसानी से लंड को अपनी चूत के अंदर ले रही थी और उन्हे बहुत ही मज़ा आ रहा था, जबरदस्त , चुदाई चल रही थी दोनो के बदन एक बार फिर से पसीने मे भीग चुके थे, आंटी को पलटा के एक बार फिर उनको नीचे लिटा दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया, आंटी बहुत ही मज़े ले रही थी उनकी आँखें मस्ती मे बंद हो गयी थी, उनके पैर मेरी पीठ पे लिपटे हुए थे और अपने पैरो से और हाथो से मेरी गांड को अपनी तरफ खींच रही थी, लंड को पूरा सुपाडे तक बाहर निकल निकल के बड़ी बेदर्दी से आंटी की टाइट चूत को चोद रहा था, आंटी तो 3 बार ऑलरेडी झड़ चुकी थी और अब मेरा रस भी निकलने को तय्यार था फुल स्पीड से चोद रहा था और देखते ही देखते आंटी का बदन कांपने लगा और मैं ने भी एक जबरदस्त झटका मारा और लंड को उनकी बच्चे दानी के अंदर कर के अपने रस का फव्वारा छोड़ने लगा और एक बार फिर दोनो का पाणी साथ साथ निकल गया और उनकी चूत दोनो के रस से भर गयी,

लंड को आंटी के चूत के अंदर ही रखे रखे थोड़ी देर हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे को चूमते चाटते रहे, आंटी का बदन बेजान हो के बिस्तर पे पड़ा था लंड चूत के अंदर ही था थोड़ी देर के बाद आंटी की साँसें ठीक हुई

आंटी- “रेशु आज तुम्हारे रस का टेस्ट करा दो”

तो मैं फॉरन ही अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकल के 69 की पोज़िशन मे आ गया, मेरा लंड हम दोनो के रस से भरा हुआ था और लंड की टोपी से रस की बूँदें टपक रही थी जिसे आंटी ने फॉरन ही अपने मूह मे ले लिया और चूसने लगी और मैं भी झुक के आंटी की गुलाबी चूत को देखने लगा जो अंदर से बहुत ही लाल हो गयी थी और चूत का सुराख इंग्लीश के “ओ” जैसा हो गया था जिसमे से दोनो का मिला जुला रस निकल के बिस्तर पे गिर रहा था, उनकी चूत के पंखाड़ियाँ जम कर चोदने की वजह से डबल रोटी की तरह सूज गये थे, लाल और मोटे हो गये थे और सच मे उनकी नाज़ुक चूत का भोसड़ा बन चुका था, चूत अंदर से एक दम से लाल ब्लड रेड जैसे हो गयी थी, मैं ने आंटी की चूत पे किस किया और फिर उनकी चूत को चाटने लगा, आंटी की टाँगें मूडी हुई थी और अब वो फिर से अपनी गांड उचका उचका के मेरे मूह मे अपनी चूत को घुसा रही थी और अपने दोनो रानो से मेरे सर को दबा भी रही थी आंटी एक बार फिर से फुल मूड मे आ चुकी थी और मे उनकी चूत के खुले हुए सुराख मे अपनी ज़ुबान अंदर बाहर कर ज़ुबान से उनकी चूत को चोद रहा था, आंटी मेरे लंड को किसी आइस क्रीम की तरह से चूस रही थी और आज मुझे उनके चूसने मे इतना मज़ा आ रहा था के किसी के भी चूसने मे उतना मज़ा नही आया था और आंटी काँपते बदन के साथ मेरे मूह मे झड़ने लगी और मैं उनके मूह मे अपने रस के फव्वारे छोड़ता रहा जो आंटी के डाइरेक्ट हलक मे गिरता रहा, हम दोनो ने एक बार फिर से एक दूसरे के ज्यूस का टेस्ट किया,

कहानी जारी रहेगी
 
मैं थोड़ी देर उनके ऊपेर ऐसे ही पड़ा रहा उनके बूब्स मेरे सीने से चिपके हुए थे और फिर मैं आहिस्ता से रोल हो के आँखें बंद कर के उनके साइड मे लेट गया,

थोड़ी देर के बाद मैं करवट ले के आंटी के बूब्स को सहलाने लगा जिस से उनके निपल्स एक बार फिर से एरेक्ट होना शुरू हो गये और फिर मैं उनके निपल्स को मसल्ने लगा तो आंटी ने हाथ बढ़ा के मेरे लंड को पकड़ लिया जो फिर से लोहे के मूसल की तरह खड़ा हो गया था

आंटी- “अरे बाप रे रेशु, क्या मस्त लंड है तुम्हारा और यह तो फिर से अकड़ गया है, क्या इरादा है आख़िर इसका”?

तो मैं आंटी के गांड पे हाथ फिराते हुए हंस के बोला

रेशु- “आंटी शाएद यह अब किसी दूसरे सुराख की खोज मे है”

आंटी- “क्या मतलब”?

रेशु- “आंटी शायद यह आपकी गांड मे घुसना चाहता है अब”

आंटी- “क्या ? कही तुम्हारा दिमाग़ तो नही खराब हो गया मैं लुंगी इस घोड़े जैसे लंड को अपनी गांड मे, ना बाबा मैं तो मर ही जाउंगी अगर यह मेरे पीछे घुस गया तो”?

रेशु- “आंटी कुछ नही होगा मैं आपको गॅरेंटी देता हू ना आप बिल्कुल भी फिकर ना करो मैं बहुत धीरे धीरे ही अंदर डालुगा तेल लगाकर तो आपको कोई तकलीफ़ नही होगी”

फिर भी आंटी नही मानी पर थोड़ी देर के बाद आख़िर आंटी मान ही गयी और फिर मैने आंटी को उल्टा पेट के बल लिटा दिया और टेबल पे से हेअर ऑयल की बॉटल उठा लि और खुद उनके ऊपेर आ गया, उनकी दोनो टांगो के बीचे मैं अपनी दोनो टाँगें रख के उनकी टाँगो को फैला दिया और पहले तो पीछे से एक ही धक्के मैं अपने लंड को उनकी चूत मे घुसा दिया उनके मूह

से ‘हप्प्प्प’ की आवाज़ निकली और उनका बदन एक सेकेंड के लिए अकड़ गया और फिर रिलॅक्स हो गयी, थोड़ी देर तक उनकी गीली चूत को चोद्ता रहा और फिर उनके बूब्स को दबा रहा था,

रेशु- “आंटी गांड मरवाने के लिए रेडी हो”?

तो उन्हो ने अपना सर हा मे हिला दिया तो मैने अपना लंड बाहर निकाल लिया और ऑइल के बॉटल से चारो उंगलियाँ भर के ऑइल निकाल के आंटी की गांड मैं लगा दिया और थोडा ऑइल उनकी गांड के पिंक होल के अंदर भी उंगली घुमा के लगा दिया जिस से उनकी गांड का छेद थोड़ा रिलॅक्स हुआ और उनकी गांड आयल से भर गयी और अपने लंड को बहुत सारा आयल लगाया, लंड कुछ ज़ियादा ही फूला हुआ लग रहा था, अपने पैरो से आंटी के पैरो को खोल दिया और अपने पैर पीछे मिशनरी पोज़िशन मे कर के आंटी ऊपेर झुक गया और आंटी की नेक पे चूमने लगा और दोनो हाथ अंदर डाल के आंटी के कड़क बॉब्स को दबाने लगा और लंड के सुपाडे को उनकी गांड मे घुसाते घुसाते उनके कान मे आहिस्ता से बोला के

रेशु –“आंटी अपने बदन को रिलॅक्स रखना नही तो आपको दरद होगा”

आंटी- “ओके”

ऐसी पोज़िशन मे आंटी उल्टा लेटी थी और उनकी गांड थोड़ा ऊपेर को उठी हुई थी, थोड़े से प्रेशर से मेरे मूसल लंड का सूपड़ा आंटी की गांड के छेद मे स्लिप हो गया, लंड का सूपड़ा आंटी की गांड के अंदर घुसते ही आंटी का बदन थोड़ा सा अकड़ गया फिर मैं अपने हाथ से आंटी के बदन को सहलाने लगा जिस से वो रिलॅक्स होने लगी और फिर इसी तरह से थोड़ा और घुसाया तो लंड तकरीबन 3 इंच और अंदर घुस गया, आंटी की गांड और मेरे लंड मे ऑइल लगाने से गांड बहुत ही चिकनी हो गयी थी और जिसमे लंड आसानी से घुस भी रहा था, अब मैं ऐसे ही आधे लंड से आंटी की गांड मारने लगा और थोड़ा थोड़ा अंदर डाल भी रहा था जिस से आधा लंड तो अंदर घुस ही गया था और अब ऐसे करने से आंटी की गांड का छेद भी थोड़ा रिलॅक्स हो चुका था और फिर पूरा लंड को सुपाडे तक बाहर निकाल के एक ज़ोर का झटका मारा तो पूरे का पूरा लंड आंटी की गांड मे घुस्स गया और वो हल्की आवाज़ से चिल्लाई “आआआआआआआईईईईईईईई और सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स”

मैं आंटी के ऊपेर ऐसे ही लेटा रहा थोड़ी देर के बाद उनकी गांड मारने लगा गपा गप गांड मार रहा था अब आंटी भी मज़े से गांड मरवा रही थी

आंटी- “मेरे पति ने तो कभी भी मेरी गांड नही मारी”

तो मैं खुश हो गया के चलो आंटी की वर्जिन चूत नही मिली तो क्या हुआ वर्जिन गांड तो मिल गयी, थोड़ी देर तक गांड मारने के बाद मैं उनकी गांड के अंदर ही झड़ गया और आंटी भी झड़ गयी,
 
आंटी- “चलो रेशु बाथरूम मे चलो साबुन से धो लेते है”

क्यॉंके उनकी गांड और मेरा लंड ऑइल और वीर्य से भरा हुआ था, हम दोनो उठ के बाथरूम मे घुस गये और शावर खोल दिया तो आंटी ने मेरे लंड पे साबुन लगा दिया और मल मल के

धोने लगी जिस से एक मिनिट के अंदर ही मेरा लंड फिर से लहरा के खड़ा हो गया आंटी मेरे लंड को हैरत से देख रही थी और बोली के

आंटी- “रेशु, यह क्या है कितना पावर है तुम्हारे लंड में”?

तो मैं हंस दिया और कुछ बोला नही आंटी साबुन से मेरे लंड को धोती रही जब मेरे लंड पे से साबुन निकल गया तो मैंने आंटी की चूत पे साबुन लगाया और हम दोनो का मिला जुला वीर्य रस अच्छी तरह से सॉफ कर दिया और फिर उनको झुकने के लिए बोला तो वो झुक गयी तो मैं साबुन से उनके गांड पे लगी पूरे ऑइल को धो दिया और आंटी मेरे सामने डॉगी स्टाइल मे खड़ी थी और उनकी गांड मे साबुन लगा हुआ था तो मैं ने अपने लंड पे भी थोड़ा साबुन लगाया और बिना आंटी को सिग्नल दिए अपने लंड को उनकी गांड के छेद मे अड्जस्ट किया और एक ही धक्के मे पूरे का पूरा लंड उनकी गांड के अंदर पेल दिया वो एक दम से चिल्ला पड़ी “हहाआआआआऐईईईईईईई निकाल्ल्लूऊऊऊ जल्ल रहा है निक्काअलल्ल्ल्लूऊऊ बाआहररररर”

पर मैं ने लंड को उनकी गांड से बाहर नही निकाला बलकी लंड को उसकी गांड के अंदर रखे रखे थोड़ी देर के लिए गांड मारना बंद कर दिया और उसकी गर्दन को चूमने लगा तो वो फिर से रिलॅक्स हो गयी, अब मैं ने उनकी गांड मारना शुरू कर दिया, मुझे उनकी टाइट गांड मारने मे बोहोत ही मज़ा आ रहा था, लंड को पूरा हेड तक बाहर खींच खींच के घपा घप गांड मार रहा था, अब वो भी बड़ी मस्ती मैं गांड मरवा रही थी और अपना हाथ अपने नीचे चूत पे ले गयी और चूत का मसाज करने लगी, जितनी तेज़ी से मैं उनकी गांड मार रहा था उतनी ही तेज़ी से वो अपनी चूत के दाने का मसाज कर रही थी, अब उनके मूह से मस्ती भरी आवाज़ें निकल रही थी, “मारूव रेशऊऊऊऊऊ आअहह फाआद्दद्ड दद्दल्ल्लूऊ म्मईएरररिई गग्ग्गाआअन्न्न्ँद्दद्ड अओउर्र ज़्ज़्ज़्ज़ूओररर्र सस्स्स्सीईए हह सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स आऐईस्स्सीए हिह्ह्हीइ आआआआआआहह”

आंटी की गांड पूरी तरह से फट के खुल चुकी थी और मैं तेज़ी से उनकी गांड मार रहा था इधर जितनी तेज़ रफ़्तार से मैं उनकी गांड मार रहा था उतनी ही तेज़ रफ़्तार से उनका हाथ अपनी चूत मे चला रहा था, मेरे सारे बदन मे सन सनाहट दौड़ रही थी और जैसे ही मेरे लंड से वीर्य का फव्वारा निकलने लगा उधर से उनकी चूत ने भी दम तोड़ दिया और उनकी चूत मे से रस बह के निकलने लगा, जैसे जैसे मेरे लंड से वीर्य उनकी गांड मे गिर रही थी वैसे ही उनका भी ऑर्गॅज़म चल रहा था ऐसा लग रहा था कैसे सुर और ताल एक साथ बज रहे हो जैसे मेरी क्रीम और उनके रस के निकलने का कोई कनेक्शन हो, आंटी का ऑर्गॅज़म ख़तम हुआ, उनकी चूत ने झड़ना बंद कर दिया और और वो फर्श पे ढेर हो गयी उसी तरह से मेरा वीर्य निकलना भी बंद हो गया और मैं आंटी की पीठ पे ढेर हो गया, दोनो मस्ती मे चूर थे साँसें गहरी चल रही थी, आंटी का और मेरा ऑर्गॅज़म कुछ इतना जबरदस्त था के आंटी को मेरे बदन का वज़न महसूस ही नही हो रहा था,

लंड उनकी गांड मे अभी तक जड़ तक घुसा हुआ था और अब वो धीरे धीरे नरम होना शुरू हो गया था, थोड़ी ही देर मे मैं उनके बदन से लुढ़क के उनके साइड मे लेट गया और उनको अपनी बाँहो मे लेके चूमने लगा, आंटी भी मुझे बेतहाशा चूम रही थी

आंटी- “रेशु, आज मैं बोहोत ही खुश हू और मैं तुम्हारे जैसे मर्द से चुदवा के फुल्ली सॅटिस्फाइड हू और आज मुझे पता चल गया है के अगर स्वर्ग कही है तो वो मर्द के नीचे है और स्पेशली तुम्हारे जैसे मर्द के नीचे”

रेशु- “आंटी आप जैसी हसीन तरीन औरत अगर साथ हो तो मेरे लिए दुनिया मे ही स्वर्ग है”

हम दोनो एक दूसरे को अपनी बाँहो मे लेके फिर से चूमने लगे,
 
दोस्तो कहानी को हो रही देरी के लिए आपसे माफी मांगता हूं मेरा मोबाइल फॉरमेट हो गया था और मैंने कोई बैकआप नही लिया था इसलिए मेरी सारी लिखी हुयी कहानिया डिलीट हो गयी थी इसलिए मुझे सारि कहानिया फिर से लिखनी पड़ रही है पिछले महीने मैं कोरोना पॉजिटिव हो गया था अब स्वस्थ हु अब फिरसे कहानी लेखन चालू किया है आपको जल्द से जल्द इसके अपडेट मिलेंगे मैं अपनी किसी कहानी को अधूरा नही छोड़ता धन्यवाद.... सतीश
 
साथ बने रहने के लिये आप सब का बहुत आभारी हूं
 
दोस्तो आपने अब तक पढा की मैं बाजूवाली आंटी को सिड्यूस करके चोद चुका हु,मेरी पुरानी तमन्ना थी उन्हें चोदने की वह अब पूरी हुयी थी,

अब आगे...

मैं उनके ऊपर ऐसे ही लेटा रहा हम दोनो गहरी गहरी साँसे ले रहे थे.

आंटी मेरे कान मे बोली के

"थॅंक यू रेशु, आज तो ज़िंदगी भर की चुदाई का मज़ा आ गया ऐसी चुदाई ज़िंदगी भर कभी नही हुई थी मुझे तुम ने जवान होने का एहसास दिला दिया मस्ती मे मेरे सारे बदन मे मीठा मीठा दरद हो रहा है,

आइ लव यू रेशु, यू आर दा बेस्ट, तुम सच मे एक मर्द हो....

और मेरे कान मे धीरे से बोली के

"रेशु प्लीज़ मुझे हमेशा ऐसे ही चोद्ते रहना और मुझे ज़िंदगी भर ऐसी ही चुदाई का मज़ा देते रहना....

और फिर कान के लटकते हुए हिस्से को अपने मूह मैं ले के चूसने लगी मेरा लंड आंटी की रस से भरी चूत के अंदर ही अंदर एक बार फिर से अकड़ने लगा,

आंटी- (चौंक कर)"वाह रेशु, यह तो फिर से तय्यार हो रहा है....

रेशु- (मुस्कुरा के)"आंटी इसे भी तो आपकी टाइट चूत को चोद के मज़ा आया है और यह फिर से चुदाई करना चाहता है....

आंटी- "मैं ने कब मना किया है आज मेरी चूत को चोद चोद के फाड़ डालो और इस चूत का भोसड़ा ही बना दे रेशु.....

मैं आंटी की ज़ुबान से ऐसे शब्द सुन के हैरान रह गया के इतनी संस्कारी और पतिव्रता दिखाई देने वाली आंटी ऐसी लंड, चूत और चुदाई की बातें कर रही है,

रेशु- "आंटी आप इतनी संस्कारी लगती हो, मैं ने कभी सपने मे भी नही सोचा था के आप मेरे से चुदवाओगी और ऐसे शब्द का उपयोग करोगी...

तो वो हसने लगी,

आंटी- "क्यों मैं औरत नही हू, क्या मेरे अंदर एमोशन्स नही है, क्या मुझे चुदने का शोक नही है, क्या मेरी प्यासी चूत को अच्छा तगड़ा लंड नही चाहिए...??

रेशु- "यू आर राइट आंटी..!

आंटी- "रेशु, तुम्है क्या मालूम के मैं कितना तड़पति हू और कितने सालो से अपनी चूत की खुजली मैं अपनी उंगली से मिटा रही हू. मेरे हजबण्ड तो अब किसी काम के नही है. उनका पेट ही मेरे बदन से लगता है उनका लंड तो मेरी चूत के करीब भी नही पहुँच पाता तो तुम ही बताओ मैं क्या करू..?

तो मैं ने उनको चूमते हुए,

"आंटी आप एक दम से सही बोल रही हो आपको भी चुदवाने का पूरा राइट है आपको अपने एमोशन्स नही रोकने चाहिए....

आंटी मुझे चूमते हुए बोले जा रही थी के

"आइ लव यू रेशु, मैं ज़िंदगी भर नही भूल सकती के तुमने मेरे बदन की आग को कैसे मस्ती से शांत किया...

मैं थोड़ी देर उनके बालो मे अपनी उंगलियाँ डाल के सहलाता रहा और उनको चूमता रहा तो थोड़ी देर मैं मेरे कान मे धीरे से,

आंटी- "आइ लव यू रेशु, तुम ने मुझे वो खुशी दी है जिसके लिए मैं आज तक तरसती थी और हा अब मुझे आंटी मत समझना अपनी रंडी समझना और किसी रंडी की तरह से ही मेरी चुदाई करना मैं हमेशा ही तुम से चुदाने के लिए रेडी हू समझे... ?

रेशु- "ठीक है आंटी आप बिल्कुल फिकर ना करो. आंटी यह तो बताओ के आपकी चूत अभी तक इतनी टाइट कैसे है...?

तो वो मुझे प्यार करते हुए,

आंटी- "जब साल ओ साल चुदाई ना हो तो चूत तो टाइट ही होगी ना और मेरी चूत तो लंड का रास्ता देखते देखते थक्क गयी है,

और आज मुझे ऐसा लंड मिला है जिसकी मैं सालो से तमन्ना करती थी आज मुझे मेरे सपनो का लंड मिला है,

और बरसो की प्यासी चूत ने ऐसे शानदार लंड का पानी पिया है और आज मेरी चूत की बरसो की आग बुझी है,

अब और देर ना करो रेशु प्लीज़ और चोद डालो अपनी रंडी को और चोद चोद के इस चूत का भोसड़ा बना दो अब मैं और सहन नही कर सकती....!!

आंटी के मूह से यह सुनते ही मेरे लंड मे जैसे हलचल मचने लगी और वो एक दम से आंटी की चूत के अंदर ही फुल टाइट हो गया और बिना लंड को बाहर निकाले चोदना शुरू कर दिया. चूत पहले से ही दोनो की क्रीम से भरी हुई थी और चुदाई शुरू होते ही पच पच पच की आवाज़ें आने लगी और मैं धना धन आंटी की टाइट चूत को चोदने लगा. आंटी ने पैर मेरी पीठ पे लपेट लिए और मेरे मूह मे आनी जीभ डाल के

चूसने लगी. मैं आंटी के मस्त कड़क बूब्स को मसल रहा था और आंटी को किस कर रहा था. थोड़ी ही देर मे आंटी के मूह से मस्ती भरी आवाज़ें निकलने लगी और बोली

"आआहह रेशूऊऊ आईसस्सीए हीईए ऊऊओिईई म्‍म्माआआ कचूओद्दड़ दददाअलल्ल्ल्ल र्रररीईए.

उनके डॅन्स करती हुई बूब्स को अपने मूह मे ले के चूसने लगा तो आंटी जैसे दीवानी हो गयी. उनके निपल्स बोहोत ही सेनसेंटिव थे बूब्स को मूह मे लेते ही आंटी वासना की आग मे जल के पागल हो जाती थी. मैं फिर से पहले वाले स्टाइल मे मिशनरी पोज़िशन मे पैर पीछे टीका के फुल स्पीड और पूरी ताक़त से आंटी की चूत को चोद रहा था और वो भी मस्ती मे चुदवा रही थी.

पचक पचक की चुदाई की आवाज़ें ही कमरे मे गूँज रही थी. लंड पूरा बाहर तक निकल निकल के लोंग स्ट्रोक्स दे रहा था. ऐसे पूरा लंड बाहर निकालने से आंटी के चूत के अंदर हमारा मिक्स रस थोडा थोडा बाहर निकल रहा था और बेड पे गिर रहा था.
 
मैं फुल ताकत से चोद रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरा लंड आंटी के पेट मे घुस रहा है और आंटी भी मस्ती मे मेरे शोल्डर्स को काट रही थी.

आंटी फिर से 3 – 4 बार झाड़ चुकी थी और चूत बे इंतेहा गीली हो गये थी. अब मैं भी छूटने के कगार पे था और मैं ने स्पीड बढ़ा दी और तूफ़ानी रफ़्तार से लंड आंटी की चूत के अंदर बाहर हो रहा था और फिर एक इतनी ज़ोर से झटका मारा के मेरा लंड एक बार फिर से उनकी बच्चे दानी के अंदर घुस्स गया और आंटी अपनी चीख को रोकने की कोशिश करते हुए जो मेरे शोल्डर को मस्ती मे चूस रही थी अब तकलीफ़ से अपने दांतो से काट डाला फिर भी उनके मूह से निकल ही गया "आआआआआहह म्‍म्म्ममाआआआआआआआअ... रेशुऊऊऊऊ...

मज्ज्ज्ज्जाआाआअ... ऊऊऊऊओिईईईईईईईईईईईईईईई

और मेरे लंड मे से गाढ़ा गाढ़ा रस का फव्वारा निकलना शुरू हुआ और आंटी की बच्चे दानी को भरने लगा.

मैं उनके सीने पे ही लेटा रहा. दोनो के बदन से पसीना पानी की तरह से बह रहा था. मैं थोड़ी देर के बाद उनके बदन से उठ के उनकी बगल मे लेट गया. जैसे ही लंड उनकी चूत से बाहर निकला वैसे ही उनकी चूत मे इकट्ठा हुआ दोनो का मिक्स जूस बह कर उनकी गांड पे से होता हुआ बिस्तर पे गिरने लगा,

दो घंटे आराम करने के बाद मैं और आंटी दोनो नंगे ही साथ साथ उठे.

आंटी- "आहह रेशु,मैंने आज से पहले इतनी चुदायी कभी नही की....!

आंटी की आवाज़ सुनते ही मेरे दिमाग़ मे आंटी की चुदाई की फिल्म चलने लगी और देखते ही देखते मेरा लंड अकड़ के हिलने लगा और आंटी के बदन से लंड लगा तो वो चोंक गयी और हाथ नीचे लगा के देखा तो लंड मूसल बना हुआ था तो वो मुस्कुरा के अपने हाथ मे मेरा लंड पकड़ लिया,

आंटी- "बेचारे को शाएद पेट भर चोदने को नही मिला आजाओ मेरे प्यारे छोटे रेशु, मैं तेरी भूक मिटा देती हू...

और मेरे लंड को प्यार से सहलाने और दबाने लगी. हम दोनो एक दूसरे की तरफ मूह कर के करवट लेते थे तो आंटी ने अपनी एक टांग उठा के मेरे थाइ पे रख ली जिस से उनकी चूत के पंखाड़ियाँ खुल गयी और लंड के सूपाडे से टच करने लगी और फिर आंटी ने लंड के डंडे को पकड़ के लंड के सूपाड़े को अपनी चूत मे रगड़ना चालू कर दिया और देखते ही देखते उनकी चूत भी गीली हो गयी और मेरे लंड के प्री कम से स्लिपरी भी होगयी तो मैं ने उनको अपने ऊपेर खेच लिया.

आंटी मेरे ऊपेर जॉकी की तरह से बैठ गयी और मेरा लंड ऑटोमॅटिकली उनकी चूत के सुराख से सट गया और आंटी को पकड़ के एक ही धक्का मारा तो आधा लंड उनकी टाइट गीली चूत मे घुस गया. आंटी को झुका के उनके बूब्स को चूसने लगा.

आंटी बहोत ही गोरी थी और उनकी बूब्स भी बड़े ही मस्त और टाइट थे उनके निपल्स इतने गुलाबी थे के बाहर से आती सूरज की रोशनी मे उनके निपल्स किसी सुलगते हुए अँगारे की तरह से लग रहे थे और उनका लाइट गुलाबी रंग का अरोला तकरीबन 1 इंच का था. आंटी के बूब्स बहोत से सेन्सिटिव थे उन के बूब्स को मूह मे ले चूस्ते ही वो जैसे दीवानी हो जाती थी. मैं ने एक और धक्का दिया तो लंड कुछ और अंदर घुस गया. अब हमारी शरम ख़तम हो चुकी थी. आंटी अब मेरे लंड की सवारी कर रही थी. लंड रॉकेट की तरह से सीधा उनकी चूत के अंदर जा रहा था और आंटी मेरे रॉकेट लंड पे उछल रही थी और उनके बूब्स डॅन्स कर रहे थे. अब आंटी आसानी से लंड को अपनी चूत के अंदर ले रही थी और उन्हे बहोत ही मज़ा आ रहा था.

पावरफुल चुदाई चल रही थी दोनो के बदन एक बार फिर से पसीने मे भीग चुके थे. आंटी को पलटा के एक बार फिर उनको नीचे लिटा दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया. आंटी बहोत ही मज़े ले रही थी उनकी आँखें मस्ती मे बंद हो गयी थी, उनके पैर मेरी पीठ पे लिपटे हुए थे और अपने पैरो से और हाथो से मेरी गांड को अपनी तरफ खिच रही थी. लंड को पूरा सूपाड़े तक बाहर निकाल निकाल के बड़ी बेदर्दी से आंटी की टाइट चूत को चोद रहा था.

आंटी तो 3 बार ऑलरेडी झाड़ चुकी थी और अब मेरी रस भी निकलने को तय्यार थी फुल स्पीड से चोद रहा था और देखते ही देखते आंटी का बदन कांपने लगा और मैं ने भी एक पावरफुल झटका मारा और लंड को उनकी बच्चे दानी के अंदर कर के अपनी क्रीम का फव्वारा छोड़ने लगा और एक बार फिर दोनो का रस साथ साथ निकल गया और उनकी चूत दोनो के रस से भर गयी.

लंड को आंटी के चूत के अंदर ही रखे रखे थोड़ी देर हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे को चूमते चाट ते रहे. आंटी का बदन बेजान हो के बिस्तर पे पड़ा था लंड चूत के अंदर ही था थोड़ी देर के बाद आंटी की साँसें ठीक हुई,

आंटी- "रेशु अब तुम्हारे रस का टेस्ट करा दो...

तो मैं फॉरन ही अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकल के 69 की पोज़िशन मे आ गया. मेरा लंड हम दोनो की रस से भरा हुआ था और लंड की टोपी से रस की बूँदें टपक रही थी जिसे आंटी ने फॉरन ही अपने मूह मे ले लिया और चूसने लगी और मैं भी झुक के आंटी की गुलाबी चूत को देखने लगा जो अंदर से बोहोत ही लाल हो गयी थी और चूत का सुराख इंग्लीश के “ओ” जैसा हो गया था जिस्मै से दोनो का मिला जुला जूस निकल के बिस्तर पे गिर रहा था. उनकी चूत के पंखाड़ियाँ जम कर चोदने की वजह से डबल रोटी की तरह सूज गये थे, लाल और मोटे हो गये थे और सच मे उनकी नाज़ुक चूत का भोसड़ा बन चुका था.

चूत अंदर से एक दम से लाल ब्लड रेड जैसे हो गयी थी. मैं ने आंटी की चूत पे किस किया और फिर उनकी चूत के अंदर से बहते हुये मिक्स रस को चाटने लगा.

आंटी की टाँगें मूडी हुई थी और अब वो फिर से अपनी गांड उचका उचका के मेरे मूह मे अपनी चूत को घुसा रही थी और अपने दोनो रानो से मेरे सर को दबा भी रही थी आंटी एक बार फिर से फुल मूड मे आ चुकी थी और मे उनकी चूत के खुले हुए सुराख मे अपनी ज़ुबान अंदर बाहर कर ज़ुबान से उनकी चूत को चोद रहा था. आंटी मेरे लंड को किसी आइस क्रीम की तरह से चूस रही थी और आज मुझे उनके चूसने मे इतना मज़ा आ रहा था के किसी के भी चूसने मे उतना मज़ा नही आया था और आंटी काँपते बदन के साथ मेरे मूह मे झड़ने लगी और मैं उनके मूह मे अपनी क्रीम के फव्वारे छोड़ता रहा जो आंटी के डाइरेक्ट हलक मे गिरता रहा. हम दोनो ने एक बार फिर से एक दूसरे की रस का टेस्ट किया.
 
ऐसे ही दो महीने बीत गये कभी आंटी तो कभी बड़ी चाची को चोदता था,पर अपनी पढ़ाई का नुकसान ना हो इस तरह, अब मेरी एग्जाम भी ओवर हो चुकी थी, गर्मिया शुरू होने को थी और इस बार पता नहीं कहीं पे किसीने घुमने का प्लान नहीं बनाया, वैसे तो हर वेकेशन में हम कहीं न कहीं हिल स्टेशन पे जाने का प्लान बनाते थे. पर मेरे लिए अच्छा था की में कम से कम मोम के पास तो जा सकता था और में मोम से मिलने चला गया. चाची ने भी मुझे इस बार बेस्ट ऑफ़ लक कहा था वो भी शायद समझती थी की इस बार शायद फुल एंड फाइनल प्रोग्राम हो जायेगा.

मैं अपने घर पहुंचा, में बिना बताये आया था मोम को सरप्राइज देना चाहता था मैं घर पहुंचा तो मोम नहीं थी, में समझ गया की मोम अपने क्लिनिक पे होगी, तो में मोम के क्लिनिक पे चल दिया. पेशेंट्स सच में थोड़े से ज्यादा थे. मैं भी वहीँ पे बैठा और पेशेंट्स के ख़त्म होने का इंतज़ार करने लगा. फिर आधे घंटे में मोम के पेशेंट्स ख़त्म हुए और वो निकलने में रेडी हो रही थी. मैं चुपके से एंटर हुआ, मोम अपना एप्रन निकाल रही थी..एप्रन जो डॉक्टर्स पेशेंट्स को एक्सामिन करते टाइम पहनते हे. उनकी बैक मेरी और थी, में उनके पीछे गया और उनकी आँखें झट से बंद कर दी..पहले तो मोम चौंक गयी और छूटने की ट्राय करने लगी पर फिर उन्हें सरप्राइज का एहसास हुआ, तो वो चुप सी खड़ी रह गयी और मेरे हाथों को छू के महसूस करने लगी. मैं आगे आ गया और मोम को फुल टच कर के खड़ा हो गया और मोम को शायद पता चल गया होगा, की में हूँ तो मोम ने कहा

"सरप्राइज अच्छा लगा, सच में में सरप्राइज हो गयी...

मैने कुछ कहा नही..बस अपना नाम मोम के मुँह से निकलने का इंतज़ार करता रहा,

"अच्छा तो अपना नाम सुनना चाहते हो..तो.थैंक्स रेशु...

और मैंने मोम की आँखों पे से हाथ हटा दिये.

"मोम तुम्हे कैसे पता लगा, की में हूँ.. ?

"बस पता चल गया...

और फिर में मोम की हेल्प करने लगा, टेबल पे सब अरेंज किया और क्लिनिक अटेंडेंट के हवाले छोड़ के हम चलपडे.मोम ने और मैंने लंच बाहर करने का प्लान बनाया और पापा को भी साथ में ले के हमने एक होटल में डिनर किया. मैंने तब सोचा की अच्छा हुआ की में मोम के क्लिनिक चला गया, वर्ना शायद मोम से घर पे क्याजुअली मिलता तो मोम शायद पिछले इंसिडेंट के बारे में सोचती और इतना खूल के बात नहीं करती..पर अभी ऐसे मिलने के बाद मोम सच में खुश लग रही थी. फिर से हम ने पापा को हॉस्पिटल ड्राप किया और घर चलपडे घर को पहुंचते ही मैंने मोम से कहा

"मोम तुम्हे आखिर पता कैसे चला...?

"अरे पता चल जाता हे..ऐसे ही तुम भी मुझे पहचान लोगे, अगर सरप्राइज देणे का टाइम आया तो में भी तुम्हे सरप्राइज दूंग़ी...

फिर कुछ देर बाद, मैंने मोम से बात की

"मोम आर यु ऑलराइट.?

"अरे रेशु..अभी तुम्हारी मोम इतनी भी बुढी नहीं हुई की तुम्हे अपने मोम की तबियत का हाल चाल पूछना पडे....

और मोम हंस पडी और में भी..समझ में मेरी आ रहा था की मोम इन दो महीनो में मोम सोच सोच के ना ही अपने आप को कोस रही हे, और ना ही मुझे इसके बारे में जिम्मेदार ठहरा रही हे..मोम सच में अब मेरे साथ खूल के हंस रही थी, मज़ाक कर रही थी. ऐसे ही पूरा दिन गुजर गया और नेक्स्ट डे पापा के जाने के बाद में मोम के कमरे में गया.

"मोम...!!

"हा...!

मोम अपने रूम को ठीक से साफ़ कर रही थी, क्याजुअल कपड़ो में थी. वो उस वक़्त आईने को साफ़ कर रही थी.

"मोम एक बात करनी हे...

मोम के हाथ आइना साफ़ करते करते रूक गये, और उन्हें पता चल गया की में सेक्स के बारे में शायद डिस्कस करना चाहता हू. .

"मोम में है..नाआआ, में..आपको भूला नहीं.....

"रेशु..मुझे पता हे, बस अब आगे कहने की जरूरत नहीं हे.....

मोम मेरी और नहीं देख रही थी.

"मोम..सच कहूं, वो सब भूलना सच में नामुमकिन है, मेरे लिए सच में इम्पॉसिबल हे....

और मोम ने आईने पे से केमिकल हटाया और मोम आइना साफ़ करती जा रही थी और में उनके सामने साफ़ होता जा रहा था मोम ने आईने में मेरी और देखा और मैंने भी मोम को आईने में से देखा..मोम एक पल भी बिना कहीं देखे, मेरी और देखति रही और में भी मोम को. कुछ देर बाद में मोम की और पास आया और मोम के एकदम पास खड़ा रहा.
 
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