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Incest परिवार में सबके साथ धुंआधार चुदाई।

पार्ट - 78

उन्होंने हंस कर बोला- रात को तुम्हे मम्मी से फुरसत कहाँ थी।

ये सुन कर मैं चुप हो गया तो डॉ दीदी बोली- मैंने रात को सब देखा है कि तुमने मम्मी को कैसे मज़े कराए है। मुझे भी आज वैसे ही मजे करवाना।

मैं- ओके दीदी।

डॉ दीदी- अब तुम जल्दी से मुझे चोद दो।

पर अभी मैं जल्दीबाजी नहीं करना चाहता था।

मैंने कहा- जान आज तुम्हें पूरा मजा दूंगा।

वो गिड़गिड़ाने लगीं- मजा बाद में देते रहना। पहले एक बार मुझे ठंडा कर दो।

मैंने डॉ दीदी की बात मान ली और उनको नंगी कर दिया। डॉ दीदी का क्या मस्त बदन था मेरी तो आंखें चुंधिया गई थीं। एकदम मक्खन सा चिकना शरीर न जाने कितने दिनों से किसी मर्द के सम्पर्क में नहीं आया था। और सच मे वो अभी तक चुदी नही थी।

डॉ दीदी की चिकनी चूत को मैंने अपने हाथों से छुआ, आह क्या मखमली थी।

मैंने चूत पर अपनी हथेली को फेरा तो उनकी एक मादक ‘आह्ह..’ निकल गई।

फिर मैंने डॉ दीदी को लिटा दिया और उनकी टांगों को फैला कर उनकी चूत की चाशनी को चाट कर चखा।

क्या मस्त नमकीन स्वाद भरी चूत थी ‘आह’

मैंने फिर से अपनी जीभ को चूत की फांकों में लगा दी और ऊपर से नीचे तक फेरने लगा।

वो तो मचलने लगी थीं और उन्होंने अपनी टांगों को फैलाते हुए चूत ऊपर उठा दी थी। वो अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगीं और एकदम जानवरों जैसे करने लगीं। मैं भी उनकी चूत को जोर जोर से चाटने लगा।

मेरी नाक से गर्म सांसें चूत को और भी गर्म कर रही थीं। वो तो एकदम से पागल हो गई थीं। साथ मैं अपने हाथों को ऊपर ले जाकर उनके मम्मों को दबा रहा था। डॉ दीदी ने अपनी चुत मेरे मुँह पर दबनी शुरू कर दी और मैं जीभ उनकी चुत के पूरी अंदर तक ले गया।

अचानक उनकी चुत ने अमृतरस छोड़ दिया और मैं उनका सारा अमृत चाट गया।

डॉ दीदी अब निढाल सी पड़ी थी और मै अब भी उनकी चुत चाट कर उनको गरम कर रहा था।

कोई पांच मिनट में ही वो फिर से गरमा गईं और बोलने लगीं कि ये सब बाद में तुम खूब कर लेना मेरी जान, मगर अभी एक बार प्लीज मुझे चोद दो।

मैं खड़ा होकर अपना लन्ड उनके मुह के पास लाया और मैंने कहा- पहले मेरा लन्ड तो चुसो।

तो उन्होंने मेरा लन्ड पकड़ा और उसको हिलाने लगी, फिर लन्ड को अपने मुह में ले गयी और चुसने लगी।

मैं भी अपना लन्ड उनके मुह में पेलने लगा।

फिर डॉ दीदी ने लन्ड मुह से निकाला और अपने हाथ से लन्ड का आगे का मास पीछे करके गुलाबी टोपा निकाल लिया और टोपे पर जीभ लगाई।

मेरी तो सिसकारी निकल गयी।

फिर डॉ नेहा दीदी अपनी जीभ मेरे लन्ड के टोपे पर घुमाने लगी। मेरी तो मज़े में सिस्कारियाँ निकलने लगी, जो पूरे कमरे में गूंजने लगी।

मैं- आ आ ह ह ह ऊ ऊ, दीदी बस करो, मेरारारा आह निकल जायेगा।

पर डॉ दीदी फिर भी टोपे पर जीभ घुमाती रही।

5 मिनट बाद एकदम से मेरा पानी निकल गया, जो सीधा डॉ दीदी के मुँह पर गया, जिस से उनका माथा, नाक, गाल, होंठ सब भीग गए।

मैं निढाल हो कर बेड पर लेट गया। डॉ दीदी ने मेरा लन्ड चाट कर साफ किया। फिर खुद के मुह पर लगा सारा पानी उंगली से लगाकर चाट गयी और मुह धोने चली गई।

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पार्ट- 79

10 मिनट बाद डॉ दीदी बाथरूम से बाहर आई और आते ही मुझसे लिपट गयी और कहने लगी।

डॉ दीदी- भाई प्लीज, अब मुझे चोद दे और मुझे किस करने लगी।

मैं डॉ दीदी के ऊपर लेट गया और उनकी चुचियाँ पीने लगा।

डॉ दीदी मेरे बालों में हाथ फेरने लगी।

डॉ दीदी- भाई फ़क मी, प्लीज।

मैंने भी अब डॉ दीदी को ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और उनकी चूत के ऊपर लंड रगड़ने लगा। डॉ दीदी लंड की रगड़ से और भी व्याकुल होने लगीं और अपनी गांड उठाने लगीं। मैंने भी सुपारा चूत की फांकों में फंसा दिया और धीरे धीरे लंड चूत के अन्दर डालने लगा।

वो भी अपनी चूत को उठाने लगीं। उनकी ये बदहवासी बता रही थी कि वो जल्द से जल्द मेरे लंड को अपनी चूत में समा लेना चाहती थीं।

पर मैं धीरे धीरे लंड पेल रहा था।

उन्होंने कहा- जल्दी से अन्दर तक घुसेड़ो न … क्यों सता रहे हो?

उनका इतना कहना हुआ और मैंने एक तेज झटका मार दिया।

‘इस्सस्स … उईई … माँ मर गई..’

डॉ दीदी लंड घुसते ही बहुत जोर से चीख पड़ीं … और खुद को छुड़वाने की कोशिश करने लगी पर मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और थोड़ा रुक रुक कर उनको किस करने लगा।

डॉ दीदी- भाई प्लीज निकाल ले, बहुत दर्द हो रहा है। वो छूटने की कोशिश करने लगी और टांगे हिलाने तो मैंने उन्हें कस कर दबा लिया ताकि सो छूट नआ सके।

10 मिनट बाद उनका दर्द कुछ कम हुआ तो दीदी मुझे किस करने लगीं।

लंड घुसेड़ने से मुझे एक बड़ा ताज्जुब हुआ कि उनकी सचमुच कुंवारी थी और बहुत टाइट थी।

मैंने पूछा, तो डॉ दीदी बोलीं- हां मैं कभी नही चुदी हूँ, बस उंगली ही ली है आज तक चुत में इसीलिए कुंवारी हूँ …

मैं- दीदी आप इतनी सेक्सी हो। आप पर तो हजारों लड़के मरते होंगे, फिर भी आप अभी तक बिना चुदी कैसे रह गयी।

डॉ दीदी- जब से मेरे बॉयफ्रेंड ने मुझे धोखा दिया है उसके बाद कोई मिला ही नही मुझे ऐसा जिसने मेरे दिल को छुआ हो, जिस से मुझे चुदने का दिल करे और तेरी एक स्माइल पर फ़िदा हो गई थी।

मैं- आई लव यू दीदी।

दीदी- आई लव यू टू भाई।

अब मैं लन्ड दीदी की चुत में पूरा डालने लगा, डॉ दीदी को थोड़ा दर्द और हुआ पर अब वो सहन कर गयी।

लंड चूत की जड़ तक पहुंच चुका था। अब वो अपनी कमर को हिलाने लगीं। मैं उनका इशारा समझ गया तो अब मैं भी धक्का देने लगा और चुदाई होने लगी। चुदाई के साथ में मैं कभी उनके मम्मों को मसलता, तो कभी निप्पल को होंठों में दबा कर चूसने लगता … या कभी होंठों को चूसने लगता और स्वीट बाईट भी दे देता … तो डॉ दीदी मचल भी जातीं।

क्या मस्त पल थे। मैं डॉ दीदी को जोर जोर से … तो कभी धीरे धीरे पेल रहा था। पूरी चुदाई को तीन तरह के पोज़ में अंजाम दिया। करीब पच्चीस मिनट तक डॉ दीदी की चूत चोदने के बाद मैं झड़ने वाला हो गया था। इस बीच दीदी एक बार झड़ चुकी थी।

मैंने डॉ दीदी से बोला, तो वो बोलीं- अन्दर ही आ जाओ … मैं तुम्हारे पानी को फील करना चाहती हूँ।

उनकी सहमति मिलते ही मैं तो मानो चूत पर पिल पड़ा … फिर एक जोर के झटके के साथ उनके अन्दर झड़ गया और डॉ दीदी भी मेरे साथ फिर से झड़ गयी, मैं उनके ऊपर ही ढेर हो गया।

वो भी इस दरम्यान दो बार झड़ चुकी थीं तो काफी थक गई थीं।

डॉ दीदी मुझे अपनी बांहों में समेटे हुए मेरे बालों को सहलाने लगीं … और मेरे माथे पर चूमने लगीं।

इसी तरह से सहलाते चूमते मुझे और उनको कब नींद आ गई, कुछ पता ही नहीं चला।

फिर रात को 8 बजे डॉ दीदी का फ़ोन बजा, तो हमारी नींद खुली।

डॉ आँटी का फ़ोन था, उन्होंने कहा कि नागपाल अंकल को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया, लता मौसी और वो आशा आँटी के साथ उनके घर जा रही है, रात को वहीं रहेंगी। तुम बाहर से खाना मंगवा लेना और राज का ख्याल रखना।

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पार्ट -80

डॉ दीदी(मुझे किस करती हुई)- हाँ मम्मी, मैं राज का पूरा ख्याल रखूंगी।

फिर फ़ोन काट दिया और दीदी ने किसी को फ़ोन करके खाना व साथ मे बियर आर्डर कर दिया, और मुझे कहा कि राज फ्रेश हो जा और नहा ले, फिर खाना खा कर तुझे बहुत मजे करवाउंगी।

मैंने दीदी को कहा कि चलो एक साथ नहाते है, तो दीदी मान गयी।

हम दोनों अंदर बाथरूम में नहाने चले गए। मैंने बाथटब पूरा भर लिया। उपरवाले ने डॉ दीदी को बड़े आराम से और फुर्सत में बनाया था। डॉ दीदी बहुत गोरी और चिकना माल थी। उसकी छातियाँ बहुत ही भरी हुई थी। मैंने डॉ दीदी को सीने से लगा लिया और पागलों की तरह चूमने लगा।

“ओह्ह्ह्हह….दीदी..आप कितनी गजब की माल हो???

“अई, इसस्स्स्स्स्स्स्स्….भाई मैं भी दिल ही दिल में तुमसे चुदवाना चाहती थी….अब मुझे तुम नहाते ही नहाते चोद लो”

उसके बाद हम दोनों गर्म गर्म किस करने लगे। एक दूसरे का चुम्बन लेने लगे। उसके बाद मैंने दीदी को बाथतब में बिठा लिया। इसको मैंने पूरा भर लिया था और फुल कर लिया था। जब पानी में हम मजे से बैठ गये तो बहुत मजा आने लगा। एक तो मनभावन ठंडा ठंडा पानी और उपर से नंगी गदराई चुदासी डॉ दीदी का साथ। मानो पानी में ही आग लग रही थी। मैंने डॉ दीदी को बाहों में भर लिया। मैंने बाथटब पूरी तरह से भर लिया था, इसलिए जब दीदी पानी में बैठी तो उसके गुब्बारे, उसके दूध पूरा पानी में उतर गये। नंगी दीदी का गोरा जिस्म मानो पानी को आग लगा रहा था।

हम दोनों आपस में शरारत करने लगे और एक दुसरे के उपर हाथ से पानी फेकने लगे। मेरा हाथ पानी में चला गया और डॉ दीदी के दूध पर जाकर टिक गया। अह्ह्ह्हह्ह…कितने मुलायम मुलायम और जूसी मम्मे थे। मैं हाथ से दीदी के दूध दबाने लगा और फिर हम आपस में किस करने लगे। डॉ दीदी के कंधे भी आधे पानी में भीगे थे जो बहुत ही सेक्सी लग रहे थे। मैं उसके नर्म नर्म ओंठ पी रहा था और उसके दूध दबा रहा था। फिर मैं उसकी निपल्स को ऊँगली और अंगूठे से मसलने लगा। डॉ दीदी आह्ह्हह्ह ह्ह्ह करने लगी। मेरा हाथ पानी में अंदर चला गया। डॉ दीदी पूरी तरह से जलमग्न थी और उसकी चूत भी पानी के अंदर अन्दरग्राउंड थी। मैंने बाथटब के भीतर पानी में डॉ। दीदी की चूत खोज ली और चूत छूने लगा। फिर चूत में ऊँगली करने लगा। डॉ दीदी तड़पने लगी और उसकी निपल्स और भी जादा टाईट हो गयी।

उसके बाद मैंने तेज तेज डॉ दीदी की चूत में ऊँगली करने लगा। कुछ देर बाद मैंने दीदी के उपर आ गया। वो बाथरूम तब के एक किनारे लेट सी गयी। पानी के भीतर ही मैंने उसकी चूत में लंड डाल दिया और उसको चोदने लगा। दीदी ने बाथटब का किनारा कसकर पकड़ लिया वरना वो चुदवाते चुदवाते अंदर पानी में फिसल जाती। मैं उसे पानी में छप छप करके चोदने लगा तो बार बार पानी के बुलबुले मेरी चुदासी और लंड की प्यासी डॉ दीदी की चूत से निकलने लगे। ये देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं जोर जोर से अपनी डॉ दीदी को चोद रहा था। उसकी चूत की पट पट की आवाज भी मैं नही सुन पा रहा था, क्यूंकि दीदी की गांड और चूत दोनों पानी के अंदर थी।

पानी के भीतर चूत मारने का अपना विशेष आनंद था। सब कुछ बड़ा हल्का हलका लग रहा था। मैंने दीदी को 25 मिनट पानी में ही चोदा फिर माल गिरा दिया। आधे घंटे तक हम साथ में नहाते रहे और बाथटब में आनंद लेते रहे। फिर हम बाहर निकल आये। मैंने पानी का शावर खोल दिया और बाथरूम के फर्श पर लेट गया।

“दीदी…आओ जरा मेरा लंड चुसो आकर??” मैंने कहा

डॉ दीदी मेरे पास आकर बाथरूम के गीले फर्श पर बैठ गयी। शावर का पानी हम दोनों के उपर गिर रहा था। किसी रंडी की तरह मेरा मोटा गबरू जवान लंड मुंह में लेकर मुंह में लेकर चूसने लगी। उसने मेरा पूरा 9 इंच का लंड मुंह में भर लिया और गले तक अंदर ले जाकर चूसने लगी। दोस्तों मुझे सुकून मिल रहा था। डॉ दीदी के रसीले स्ट्राबेरी जैसे दांत मेरे लंड पर आगे पीछे हो रहे थे। उफ्फ्फ्फ़…क्या नशीली रगड़ थी । बाथरूम के शावर से बहुत सारा पानी हम दोनों के उपर लयबद्ध रूप में गिर रहा था। ठन्डे पानी में हम दोनों पूरी तरह नंगे होकर मजा ले रहे थे। डॉ। दीदी के सारे बाल भीग चुके थे और पानी से आपस में लिपट गये थे। शायद उसको लंड चूसने में बहुत मजा आ रहा था तभी वो बड़े आराम से मेरा लंड हाथ से मुठ देकर फेट रही थी।

मैंने उसकी भीगी चिकनी और नंगी पीठ में हाथ लगा दिया और सहलाने लगा। फिर मैंने उनके सर पर अपना हाथ रख दिया और नीचे से कमर चला चलाकर उसके मुंह में लंड देने लगा। फिर मैंने उसको बाथरूम के भीगे फर्श पर लिटा दिया और उसके उपर लेट गया और फिर से अपनी डॉ, दीदी के दूध पीने लगा।

शावर के ठन्डे पानी में हम दोनों अठखेलियाँ करने लगे और मैंने चुदासी डॉ दीदी के दूध फिर से पीने लगा।

“चूसो…..भैया अच्छे से चूसो!!” डॉ दीदी बोली

मैं जोश में आ गया और डॉ दीदी के आम पीने और चूसने लगा। दीदी के दूध के घेरे बहुत आकर्षक थे और निपल्स काफी बड़ी बड़ी थी जो मेरे चूसने से खड़ी हो गयी थी। फिर मैंने उसकी सेक्सी और गहरी नाभि चूमने लगा। शावर का पानी सीधा दीदी की चूत पर गिर रहा था, जिससे वो और जादा साफ़, सुथरी और चिकनी हुई जा रही थी। नाभि पीते पीते मैं अपनी दीदी की चूत पर पहुच गया। उसने अपनी दोगो सफ़ेद उजली भरी हुई जांघ खोल दी। मैंने उसकी बुर में घुस गया और उसकी रसीली चूत पीने लगा। अब शावर का पानी सीधा मेरे सर पर गिर रहा था जिससे मैं मजा आ रहा था। मैं जीभ चला चलाकर अपनी दीदी की बुर पीने लगा। फिर 10 मिनट बाद दीदी की चुत ने पानी छोड़ दिया और मैं सारा पानी पी गया। तभी दरवाजे की घंटी बजी। और हम जल्दी से कपड़े वह कर बाहर आ गए और डॉ दीदी ने गेट खोला तो उनकी फ्रेंड करिश्मा खाना और बियर लेकर आई थी।

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पार्ट - 81

जब में बाहर से आया तो मैंने देखा कि करिश्मा और डॉ दीदी हॉल में बैठी थी, तो मैंने सोचा कि आज तो सब चौपट हो गया। फिर डॉ दीदी ने मुझे करिश्मा से मिलवाया और कहा कि ये मेरा भाई है राज और मुझे कहा कि ये मेरी फ्रेंड है करिश्मा और मुझे आँख मारी। मैंने करिश्मा को हेलो बोला तो उसने उठ कर मुझे गले लगा लिया और कहा कि तू भी मेरा भी भाई बन जा। मैंने कहा ओके। फिर करिश्मा दीदी ने मुझे गाल पर किस किया। फिर हम तीनो बैठ गए और बाते करने लगे। डॉ दीदी और करिश्मा दीदी की बातों से मुझे आता लगा कि करिश्मा की उम्र 36 साल की थी, वो शादीशुदा है, पर उसके कोई बच्चा नही था। ये बाते उस वक़्त बाते करते हुए मुझे पता लगा। फिर मैंने डॉ दीदी से कहा कि दीदी पानी देना। फिर जब डॉ दीदी पानी लेने गयी, तो में भी किचन में चला गया और डॉ दीदी से बोला कि करिश्मा दीदी कब जाएगी? तो डॉ दीदी बोली कि मेरे साथ और आज यहाँ पर ही रहेगी।

फिर में बोला कि आज की रात अपनी सुहागरात नहीं हो पाएगी। फिर दीदी बोली कि उसकी चिंता मत करो, आज तो तुमको दोनों साथ में मिलेगी। फिर में बोला कि वो कैसे? करिश्मा दीदी को सब पता है क्या? तो डॉ दीदी बोली कि हाँ और उसके पति से उसको बच्चा नही हो सकता, इसलिए मैंने उसे बुलाया है कि वो तुमसे बच्चा ले ले। मै ये सुन कर खुश हो गया, फिर हम दोनों हाल में आ गए। डॉ दीदी ने बियर निकली और हम तीनो बियर पीने लगे। बियर पीते पीते करिश्मा दीदी मुझे बार बार हवस भारी नजरो से देख रहे थी। फिर हम सबने एक साथ डिनर कर लिया और करीब 9 बजे बैडरूम में चले गये। फिर डॉ दीदी बोली आओ शुरू करते है। डॉ दीदी मुझसे और करिश्मा दीदी अपने पति से मज़ा ले चुकी थी, इसलिए उनको सब मालूम था कि कहा से ज्यादा सेक्स का मज़ा मिलता है। फिर डॉ दीदी ने धीरे-धीरे करिश्मा दीदी के सब कपड़े निकाल दिए। अब करिश्मा सिर्फ ब्रा और पेंटी में हो गयी थी। फिर डॉ दीदी धीरे-धीरे उसके निप्पल को सहलाने लगी तो करिश्मा दीदी जल्दी ही उत्तेजित हो गयी और ज़ोर-जोर से आआआआआ, आआ करने लगी। मैं बेड पर बैठ ये सब देख रहा था और बियर पी रहा था। अब डॉ दीदी को भी सेक्स चढ़ने लगा था और अब डॉ दीदी अपने चूतड़ मेरी तरफ रगड़ने लगी थी। फिर में झट से डॉ दीदी के पास गया और उसकी चुत पैंटी के ऊपर से ही चाटने लगा और अपना लंड करिश्मा दीदी को लेटकर उनकी चूत पर ऊपर से रगड़ने लगा। अब करिश्मा दीदी मज़ा अपनी आँखे बंद करके ले रही थी और इधर डॉ दीदी अपनी पेंटी को थोड़ा सरका दिया था और मैं उनकी चुत में जीभ डालने लगा।

अब डॉ दीदी आआआआ माआआआआअ करके करिश्मा से चिपक गयी थी और करिश्मा भी दीदी से चिपक गयी थी। फिर जब डॉ दीदी के बूब्स को दबाते हुए करिश्मा ने मुझसे कहा की भाई मेरी चुत भी चाट। फिर करिश्मा बोली कि तो मेरी चूत में यहाँ खाली पड़ी है। फिर मैंने भी आव देखा ना ताव और सीधा उठ करिश्मा दीदी से चिपक गया, तो करिश्मा ने भी मेरा साथ दिया। अब में आपको करिश्मा के फिगर के बारे में बता देता हूँ, उसकी हाईट 5 फुट 1 इंच, फिगर साईज 32-28-36 था, अब में करिश्मा के साथ मजे ले रहा था।

और करिश्मा दीदी के बूब्स को धीरे-धीरे मसलने लगा। अब इधर डॉ दीदी मेरा लंड अपने मुँह में लेकर अंदर बाहर कर रही थी। फिर मैंने डॉ दीदी और करिश्मा को साथ में लेटा दिया और बारी से उन दोनों की चुत चाटी ओर उनका पानी पी गया।

फिर करिश्मा दीदी ने मेरा लन्ड चूसा तो बोली कि मेरे पति का तो इस से आधा भी नही है और पूरा लन्ड मुह में लेने की कोशिश करने लगी। 10 मिनट लन्ड चुसाने के बाद बोली राज मुझे आज तेरे बच्चे की माँ बना दे। फिर मैने करिश्मा दीदी को सीधा लेटा दिया, उनकी टांगे खोली और करिश्मा की चूत में अपना लंड डालने लगा और लन्ड का टोपा उसकी चुत में गया तो उसकी आहे निकल गयी।

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पार्ट- 82

करिश्मा- आह आह भाई आराम से डाल, इतना बड़ा लन्ड मैंने कभी नही लिया।

फिर मैंने एक जोर से झटका लगाया तो आधे से ज्यादा लन्ड करिश्मा दीदि की चुत में चला गया और दीदी के मुह से चीख निकलिनॉर आंखों में आंसू आ गए।

फिर भी वो बोली- फाड़ दे मेरी चुत, मेरे पति को भी पता लगे कि आज मैं सच मे एक मर्द के लन्ड से चुद के आयी हुँ।

फिर मैंने पूरा लन्ड उनकी चुत में डाल दिया और धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा। 10 मिंट बाद करिश्मा दीदी को मज़ा आने लगा और अब मेरा लैंड भी बड़ी आसानी से करिश्मा की चूत में घुसने लगा, क्योंकि करिश्मा बहुत पानी छोड़ चुकी थी। अब में डॉ दीदी के बूब्स को मसलता और करिश्मा दीदी की चूत पर अपने लंड से धक्के लगा रहा था और फिर 10 मिनट तक करिश्मा की चूत में धक्के लगाता रहा। और उसका पानी निकाल गया। मैं फिर भी उसको चोदता रहा और 20 मिनट बाद मेरा पानी निकलने को हुआ तो मैंने करिश्मा दीदी की चुत में झड़ गया। और सारा पानी उनकी चुत में छोड़ा। मैं ऐसे ही 10 मिनट उनके ऊपर लेता रहा। 10 मिनट बाद उनकी चुत में ही मेरा लन्ड वापिस खड़ा हो गया।

पर करिश्मा दीदी अब पूरी सुस्त पड़ गयी थी और मुझसे बोली कि बस अब नेहा के साथ कर। अब डॉ नेहा दीदी तो जैसे तैयार थी, तो डॉ दीदी तुरंत मुझसे बोली कि अब मुझे डॉगी स्टाइल में करो। फिर में डॉ दीदी को तुरंत झुकाकर डॉग शॉट लगाने लगा। अब वो भी मेरे हर शॉट का जवाब अपने चूतड़ हिला-हिलाकर दे रही थी आआआआआआअ, आह बहुत मज़ा आ रहा है राज सैया, ज़ोर से और ज़ोर से और ज़ोर से। फिर कुछ देर के बाद वो बोली कि बस अब थोड़ा आराम दो, मेरी टाँगे दुख रही है। फिर मैंने डॉ दीदी को पलंग पर सीधा लेटा दिया और उसकी दोनों गोरी- गोरी चूचीयों को सहलाने लगा और उसकी चूत के दाने को भी धीरे-धीरे मसलने लगा। अब वो चिल्लाने लगी थी राजाआाआ मत सताओ, अब ज़रा जल्दी से अपना लंड घुसाओ। फिर में अपना लंड डॉ दीदी की चूत में घुसाकर उनकी की चूत को चोदने लगा।

अब नीचे से दीदी अपने चूतड़ को रेल के इंजन के पहिए जैसे हिलाने लगी थी। फिर करीब आधे घंटे के बाद डॉ दीदी की चूत में से जो पानी गिरा ऐसा लगता था कि कोई नल फट गया हो। अब इधर डॉ दीदी की मदमस्त सिसकारी बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी। अब डॉ दीदी पानी छोड़ते हुए कराहने लगी थी और बोली कि थोड़ा दर्द हो रहा है। तो में बोला कि शाम से चुद रहीं हो थोड़ी तकलीफ़ होगी। तो डॉ दीदी बोली कि अब थोड़ा आराम दो। फिर मैंने करिश्मा दीदी को उठाया और उसके साथ शुरू हो गया। दीदी के निप्पल को धीरे-धीरे सहलाने लगा। अब उनके दोनों निप्पल एकदम काले जामुन जैसे कड़क हो गये थे और मेरा लंड जैसे करिश्मा दीदी की चूत फाड़ देगा। इस तरह से दीदी की चूत में अंदर बाहर होने लगा था। अब में कभी दीदी के निप्पल दबाता, तो कभी दीदी की जीभ को चूस लेता था, तो दीदी आआआआआआ, उई राज आआआआआआ की आवाजे निकालती और दीदी से पूरी तरह सट गया था।

अब दीदी इतना होने पर धीरे-धीरे अपना पानी छोड़ने लगी थी। मुझे दीदी की चूत का पानी बहुत अच्छा लगता है तो मैंने झट से दीदी की चूत पर अपना मुँह लगा दिया और धीरे-धीरे दीदी की चूत का पानी पीने लगा। अब दीदी एकदम मस्त आवाजे निकालने लगी थी और फिर में दीदी कि चूत का एक-एक बूँद पानी पी गया। अब दीदी एकदम निढाल होकर पलंग पर सो गयी थी और बोली कि राज आज तो तुमने जन्नत दिखा दी। फिर में बोला कि दीदी थोड़ा और करो, मेरा अभी तक गिरा नहीं है। फिर करिश्मा दीदी बोली कि आज तुम्हारा जितना भी पकङी गिरेगा सब मेरी चुत में ही डालना। फिर करिश्मा बोली कि इतना मज़ा आएगा मैंने सपने में कभी नहीं सोचा था। अब करिश्मा दीदी एक बार फिर से सहवास करने लगी थी और 1 घंटे में थक गयी और बोली कि बस और नहीं।

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पार्ट-83

फिर तब डॉ दीदी उठी और मेरा लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और करीब 20 मिनट तक चूसती रही। फिर में भी डॉ दीदी की चूचीयों को सहलाता रहा, तो थोड़ी देर के बाद मेरा भी वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपना लन्ड जल्दी से सोई हुई करिश्मा दीदी की चुत में डालाऔर करिश्मा दीदी ने मेरे वीर्य की एक-एक बूँद को अपनी चुत के अंदर तक लिया। करिश्मा दीदी फिर से मुझसे लिपट गयी। अब इस बार डॉ दीदी भी करिश्मा दीदी के साथ मेरे लंड को साईड-साईड से चूमने लगी थी, तो तभी घड़ी का अलार्म बजा और हमने देखा कि 6 बज चुके थे। हम तीनों भी अब तक चुके थे। और हम ऐसे ही नंगे लिपट कर सो गए। दोपहर को 1 बजे डोरबेल बजी तब हमारी नींद खुली और हम तीनों नंगे सो रहे थे। फिर हमने कपड़े पहने, डॉ दीदी गेट खोलने गयी और मैं डॉ आँटी के रूम में जाकर लेट गया।

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पार्ट - 84

दरवाजे पर लता मौसी और डॉ आँटी आयी थी।

वो डॉ दीदी से पूछने लगी आज क्लिनिक नही गयी, उन्होंने आँटी को कहा कि राज की बुखार है इसलिए वो नही गयी। मैंने सुन लिया और सोने का नाटक करत रहा। फिर डॉ आँटी और मौसी रूम में आई और मुझे उठाने लगी। मैं उठा डॉ आँटी ने मेरा बुखार चेक किया और कहा अब नही है बुखार, थोड़ा रेस्ट करो सही हो जाओगे। अब डॉ आँटी शावर लेने बाथरूम में चली गयी और लता मौसी मेरा सिर अपनी गोद मे रखकर सहलाने लगी। उनकी बड़ी बड़ी चुचियाँ मेरे मुह पर लग रहे थी, जिस से मेरे लन्ड में तनाव आ गया और वो निक्कर में पहाड़ बन गया। लता मौसी ने वो देखा तो निक्कर के ऊपर से मेरा लण्ड पकड़ लिया और सहलाने लगी। मैं भी अपना मुंह उनके मुम्मो पर दबाने लगा। लता मौसी ने मेरा मुँह पकड़ा और मुझे लिप किस करने लगी। हम दोनों किस में इतना मशगूल हो गए कि पता ही नही चला की कब डॉ आंटी शावर लेकर बाहर आ गयी और हमे देख रही थी। मौसी की नज़र एक दम से उन पर पड़ी तो उन्होंने मुझे छोड़ दिया तो डॉ आंटी बोली कोई बात नही लता लगी रह, मजे कर मैं भी मज़े करूंगी, कह कर डॉ आंटी मेरे पास आई और मेरी निक्कर नीचे कर के मेरा लण्ड पकड़ लिए और सहलाने लगी। मौसी डॉ आंटी को देख रही थी।

डॉ आंटी ने मेरा लण्ड अपने मुंह मे ले लिया जिस से मेरी आआआआआहहहहहह निकल गयी। फिर लता मौसी भी शुरू हो गयी और मुझे किस करने लगी।

फिर मैंने उन दोनों को 2-2 बार चोदा।

फिर हम तीनों एक साथ नहाए।

शाम को लता मौसी ने मुझे बोला कि कल दोपहर को अपने दोनों हरिद्वार के लिए निकल जाएंगे। मेरा दिल ये सुन कर उदास हो गया क्योंकि मैं डॉ नेहा दीदी को छोड़ कर नही जाना चाहता था। मुझे डॉ नेहा दीदी से प्यार हो गया था। मैं बाहर सिगरेट पीने चला गया और सोच ही रहा रहा कि कल जाना है। तभी मेरे फ़ोन की घंटी बजी तो दीपिका दीदी का फ़ोन था।

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पार्ट - 85

मैने फ़ोन उठाया।

मैं- हेल्लो

दीपिका दीदी- हेलो मेरे प्यारे राजा मेरी जान भाई, कब आ रहा है तू।

में- दीदी मौसी कल आने का कह रही है।

दीदी- जल्दी आजा मेरे भाई, तेरे बिना मेरा दिल नही लग रहा। मुझे तेरे लण्ड की बहुत याद आ रही है।

मैं- दीदी कल रात को आपको मेरा लण्ड दूँगा, बस आप तैयार रहना।

दीदी- ओके भाई जल्दी आ, मेरी चूत और गाँड़ में आग लगी हुई है, जल्दी से आकर आग बुझा दें। लव यू।

मैं- लव यू टू, बाए।

मैं दीपिका दीदी कि मोटी गांड मारने का सोच कर खुश हो गया कि डॉ दीदी नही तो दीपिका दीदी तो है ही।

फिर मैं डॉ आंटी के घर गया तो मौसी ने कहा कि आज अपने आशा आंटी के घर सोएंगे और डॉ आंटी का ड्राइवर हमे आशा आंटी के घर छोड़ कर आया।

जाने से पहले मैं डॉ नेहा दीदी के कमरे में उनसे मिलने गया तो वो मेरे गले लग कर बहुत रोई। पर मैन उनसे जल्दी मिलने का वादा किया और उनसे विदा ली।

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