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पार्ट - 78
उन्होंने हंस कर बोला- रात को तुम्हे मम्मी से फुरसत कहाँ थी।
ये सुन कर मैं चुप हो गया तो डॉ दीदी बोली- मैंने रात को सब देखा है कि तुमने मम्मी को कैसे मज़े कराए है। मुझे भी आज वैसे ही मजे करवाना।
मैं- ओके दीदी।
डॉ दीदी- अब तुम जल्दी से मुझे चोद दो।
पर अभी मैं जल्दीबाजी नहीं करना चाहता था।
मैंने कहा- जान आज तुम्हें पूरा मजा दूंगा।
वो गिड़गिड़ाने लगीं- मजा बाद में देते रहना। पहले एक बार मुझे ठंडा कर दो।
मैंने डॉ दीदी की बात मान ली और उनको नंगी कर दिया। डॉ दीदी का क्या मस्त बदन था मेरी तो आंखें चुंधिया गई थीं। एकदम मक्खन सा चिकना शरीर न जाने कितने दिनों से किसी मर्द के सम्पर्क में नहीं आया था। और सच मे वो अभी तक चुदी नही थी।
डॉ दीदी की चिकनी चूत को मैंने अपने हाथों से छुआ, आह क्या मखमली थी।
मैंने चूत पर अपनी हथेली को फेरा तो उनकी एक मादक ‘आह्ह..’ निकल गई।
फिर मैंने डॉ दीदी को लिटा दिया और उनकी टांगों को फैला कर उनकी चूत की चाशनी को चाट कर चखा।
क्या मस्त नमकीन स्वाद भरी चूत थी ‘आह’
मैंने फिर से अपनी जीभ को चूत की फांकों में लगा दी और ऊपर से नीचे तक फेरने लगा।
वो तो मचलने लगी थीं और उन्होंने अपनी टांगों को फैलाते हुए चूत ऊपर उठा दी थी। वो अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगीं और एकदम जानवरों जैसे करने लगीं। मैं भी उनकी चूत को जोर जोर से चाटने लगा।
मेरी नाक से गर्म सांसें चूत को और भी गर्म कर रही थीं। वो तो एकदम से पागल हो गई थीं। साथ मैं अपने हाथों को ऊपर ले जाकर उनके मम्मों को दबा रहा था। डॉ दीदी ने अपनी चुत मेरे मुँह पर दबनी शुरू कर दी और मैं जीभ उनकी चुत के पूरी अंदर तक ले गया।
अचानक उनकी चुत ने अमृतरस छोड़ दिया और मैं उनका सारा अमृत चाट गया।
डॉ दीदी अब निढाल सी पड़ी थी और मै अब भी उनकी चुत चाट कर उनको गरम कर रहा था।
कोई पांच मिनट में ही वो फिर से गरमा गईं और बोलने लगीं कि ये सब बाद में तुम खूब कर लेना मेरी जान, मगर अभी एक बार प्लीज मुझे चोद दो।
मैं खड़ा होकर अपना लन्ड उनके मुह के पास लाया और मैंने कहा- पहले मेरा लन्ड तो चुसो।
तो उन्होंने मेरा लन्ड पकड़ा और उसको हिलाने लगी, फिर लन्ड को अपने मुह में ले गयी और चुसने लगी।
मैं भी अपना लन्ड उनके मुह में पेलने लगा।
फिर डॉ दीदी ने लन्ड मुह से निकाला और अपने हाथ से लन्ड का आगे का मास पीछे करके गुलाबी टोपा निकाल लिया और टोपे पर जीभ लगाई।
मेरी तो सिसकारी निकल गयी।
फिर डॉ नेहा दीदी अपनी जीभ मेरे लन्ड के टोपे पर घुमाने लगी। मेरी तो मज़े में सिस्कारियाँ निकलने लगी, जो पूरे कमरे में गूंजने लगी।
मैं- आ आ ह ह ह ऊ ऊ, दीदी बस करो, मेरारारा आह निकल जायेगा।
पर डॉ दीदी फिर भी टोपे पर जीभ घुमाती रही।
5 मिनट बाद एकदम से मेरा पानी निकल गया, जो सीधा डॉ दीदी के मुँह पर गया, जिस से उनका माथा, नाक, गाल, होंठ सब भीग गए।
मैं निढाल हो कर बेड पर लेट गया। डॉ दीदी ने मेरा लन्ड चाट कर साफ किया। फिर खुद के मुह पर लगा सारा पानी उंगली से लगाकर चाट गयी और मुह धोने चली गई।
rajveer arora 6373 @ gmail . com
उन्होंने हंस कर बोला- रात को तुम्हे मम्मी से फुरसत कहाँ थी।
ये सुन कर मैं चुप हो गया तो डॉ दीदी बोली- मैंने रात को सब देखा है कि तुमने मम्मी को कैसे मज़े कराए है। मुझे भी आज वैसे ही मजे करवाना।
मैं- ओके दीदी।
डॉ दीदी- अब तुम जल्दी से मुझे चोद दो।
पर अभी मैं जल्दीबाजी नहीं करना चाहता था।
मैंने कहा- जान आज तुम्हें पूरा मजा दूंगा।
वो गिड़गिड़ाने लगीं- मजा बाद में देते रहना। पहले एक बार मुझे ठंडा कर दो।
मैंने डॉ दीदी की बात मान ली और उनको नंगी कर दिया। डॉ दीदी का क्या मस्त बदन था मेरी तो आंखें चुंधिया गई थीं। एकदम मक्खन सा चिकना शरीर न जाने कितने दिनों से किसी मर्द के सम्पर्क में नहीं आया था। और सच मे वो अभी तक चुदी नही थी।
डॉ दीदी की चिकनी चूत को मैंने अपने हाथों से छुआ, आह क्या मखमली थी।
मैंने चूत पर अपनी हथेली को फेरा तो उनकी एक मादक ‘आह्ह..’ निकल गई।
फिर मैंने डॉ दीदी को लिटा दिया और उनकी टांगों को फैला कर उनकी चूत की चाशनी को चाट कर चखा।
क्या मस्त नमकीन स्वाद भरी चूत थी ‘आह’
मैंने फिर से अपनी जीभ को चूत की फांकों में लगा दी और ऊपर से नीचे तक फेरने लगा।
वो तो मचलने लगी थीं और उन्होंने अपनी टांगों को फैलाते हुए चूत ऊपर उठा दी थी। वो अपने हाथों से मेरे सर को अपनी चूत पर दबाने लगीं और एकदम जानवरों जैसे करने लगीं। मैं भी उनकी चूत को जोर जोर से चाटने लगा।
मेरी नाक से गर्म सांसें चूत को और भी गर्म कर रही थीं। वो तो एकदम से पागल हो गई थीं। साथ मैं अपने हाथों को ऊपर ले जाकर उनके मम्मों को दबा रहा था। डॉ दीदी ने अपनी चुत मेरे मुँह पर दबनी शुरू कर दी और मैं जीभ उनकी चुत के पूरी अंदर तक ले गया।
अचानक उनकी चुत ने अमृतरस छोड़ दिया और मैं उनका सारा अमृत चाट गया।
डॉ दीदी अब निढाल सी पड़ी थी और मै अब भी उनकी चुत चाट कर उनको गरम कर रहा था।
कोई पांच मिनट में ही वो फिर से गरमा गईं और बोलने लगीं कि ये सब बाद में तुम खूब कर लेना मेरी जान, मगर अभी एक बार प्लीज मुझे चोद दो।
मैं खड़ा होकर अपना लन्ड उनके मुह के पास लाया और मैंने कहा- पहले मेरा लन्ड तो चुसो।
तो उन्होंने मेरा लन्ड पकड़ा और उसको हिलाने लगी, फिर लन्ड को अपने मुह में ले गयी और चुसने लगी।
मैं भी अपना लन्ड उनके मुह में पेलने लगा।
फिर डॉ दीदी ने लन्ड मुह से निकाला और अपने हाथ से लन्ड का आगे का मास पीछे करके गुलाबी टोपा निकाल लिया और टोपे पर जीभ लगाई।
मेरी तो सिसकारी निकल गयी।
फिर डॉ नेहा दीदी अपनी जीभ मेरे लन्ड के टोपे पर घुमाने लगी। मेरी तो मज़े में सिस्कारियाँ निकलने लगी, जो पूरे कमरे में गूंजने लगी।
मैं- आ आ ह ह ह ऊ ऊ, दीदी बस करो, मेरारारा आह निकल जायेगा।
पर डॉ दीदी फिर भी टोपे पर जीभ घुमाती रही।
5 मिनट बाद एकदम से मेरा पानी निकल गया, जो सीधा डॉ दीदी के मुँह पर गया, जिस से उनका माथा, नाक, गाल, होंठ सब भीग गए।
मैं निढाल हो कर बेड पर लेट गया। डॉ दीदी ने मेरा लन्ड चाट कर साफ किया। फिर खुद के मुह पर लगा सारा पानी उंगली से लगाकर चाट गयी और मुह धोने चली गई।
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