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Incest पापी परिवार की पापी वासना complete

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77 मेजबान

डॉली अच्छी तरह से वाक़िफ़ थी कि उसकी मम्मी की चूत झड़ रही है। क्यों न हो, उसकी जीभ जो मम्मी की चूत से फेंके हुए वीर्य से लबालब चुपड़ी हुई थी, सुर्ख जीभ पर राज का हलका पीला वीर्य और चूत का मवाद लथेड़ा हुआ था। डॉली ने अपनी जीभ को रजनी जी की माड में और अंदर पेला, और खुशी की किलकारियाँ मारती हुई ‘सुपड़-चुपड़-गड़प्प' की आवाजें करती हुई, मजे से माँ की चूत को दुहती गयी, और चटखारे ले ले कर गुनहगार सैक्स का लुफ्त उठाती गयी। | मोहतरमा रजनी शर्मा अब हिल- हिल कर कराह रही थीं, उनका हूरों सा बदन वहशियाना अंदाज में सिहर रहा था, क्योंकि बेपनाह सुकून के झटके -दर-झटके उनके कंपकंपाते जिस्म में उमड़ते जा रहे थे।

“मम्मी, इत्मिनान से झड़िये, मेरे मुँह पर !”, डॉली कराही। उसकी आवाज उसकी मम्मी की झाँटेदार कसमसाती चूत में कही दब गयी। “झड़ती रहो मम्मी!” । | डॉली का मुँह माँ की चूत से फूटे वीर्य के एक और सैलाब से भर गया : उबलता हुआ, गरमा गरम और खुशबूदार वीर्य। उसने अपने पूरे चेहरे को मम्मी की बुर पर रगड़-रगड़ के पोंछा, और सिलसिलेवार अपनी जीभ को, जितना अंदर जा सकती थी, रजनी जी की गरम, काँपती चूत में घोंपती रही, बीच-बीच में उनके झाँटेदार चूत को बाहर से चूसती भी रहती।। | ऑरगैस्म की आखिरी लहर उनके जिस्म में उठी, और फिर रजनी जी का पूरा बदन ऐंठ गया। उन्होंने टाँगों को चौड़ा कर फैलाया, दोनों हाथों से बेटी के सर को दबोचा और अपनी चूत को गजब से सिकोड़ने-ढिलाने लगीं।

सोनिया को अपनी जवान टाइट चूत में राज के मोटे लन्ड की दनदनाहट से बड़ी मस्ती आ रही थी। उसने राज के कूल्हों पर बैठकर धीमे से अपनी नाजुक मुलायम चूत को उसके नौजवान तगड़े लन्ड पर उतारा था, फिर कुछ मिनट तक अपनी चूत में राज के लन्ड को थामे उसकी लम्बाई और मोटाई का ठीक से जायजा किया। अपनी जवान बुर को फिर एक दफ़े राज के लम्बे और टनाटन फड़कते लौड़े के गोश्त से टूसा हुआ पाकर कितना चहकी थी सोनिया। | अट्ठारह साल की परी जैसी लड़की सोनिया ने फिर उसके लन्ड पर बैठे बैठे फुदकना शुरू कर दिया। राज तो अपने रौंदते लन्ड के हर इन्च को उसकी टाइट चटखाती चूत से कसता हुआ पाकर ऐसा उतावला हो रहा था, जैसे जन्नत का सवाब मिल गया हो। उसके खम्बे जैसे लन्ड की रगों में खून खौलने लगा, उसका सुपाड़ा सूज गया, जब सोनिया की कसी फिसलन भरी बुर के गोश्त ने उसे अपनी गिरफ़्त में भींचा, और उसके तने को ऐसे पकड़ के ऊपर और नीचे मसल-मसल कर निचोड़ा, जैसे चूत से मुठ मार रही हो।

उसकी टाइट चूत राज के लन्ड पर कसती गयी, जैसे साँचे में गरम मोम उडेल कर मोमबत्ती बनी हो। उसके नारंगी जैसे मम्मे राज की आँखों के सामने झूल-झूल कर ललचाता हुआ नाच कर रहे थे, सो राज ने आगे बढ़ कर उसके निप्पलों को चाटा, फिर अपने चेहरे को दिलफ़रेब हसीना के मखमल से मुलायम मम्मों पर दबा दिया। | ‘या भगवानया, तेरा लाख शुक्र जो आज सोनिया जैसी गुलबदन लड़की की चुदाई का मौक़ा बख्शा!', राज ने सोचा। | सोनिया तो, जाहिर था, चुदाई की शौक़ीन थी, और राज दावे के साथ कह सकता था, कि जब तक उसकी संगत में रहेगी, चुदाई से कभी महरूम नहीं रहेगी। इसके अलावा, सोनिया की तरकीब भी कामयाब हुई थी, लिहाजा देर-सवेर उसे सोनिया की बेहद दिलकश, और मोटे-मोटे मम्मों वाली माँ को चोदने का भी मौक़ा मिल ही जायेगा।

सोनिया दीवानगी से अपने सुडौल चूतड़ों को आजू-बाजू फटक रही थी और अपनी कमर को राज के तने हुए लन्ड पर ऊपर-नीचे पटके जा रही थी। चूत के ऊपर और नीचे घिसाव के अलावा, वो अपनी कमर को बलखाती हुई, उसे राज के लन्ड पर ताकीद कर रही थी। राज भी अपने कूल्हों को उचका कर सोनिया के नीचे पटकते चूतड़ से टकराता, और अपने मोटे लन्ड को उसकी भाप छोड़ती, और रिसती मांद में ऊपर को घुसेड़ डालता।

राज का लन्ड उसके जिस्म को ढूंसे दे रहा था, और उसकी मस्त जवान बुर से खोद - खोद कर चूत के मवाद को बाहर बहा रहा था। उसका फूला कटुवा सुपाड़ा किसी मूसल की तरह चूत के पेंदे को कूटता जा रहा था, जिसके कारण सोनिया की चूत लबालब मवाद बहा रही थी।

सोनिया किसी कुतिया जैसी हाँफ़ रही थी .:. उसका पाकीजा चेहरा हवस के मारे दमक रहा था :: :: पलकें भींची हुई और मुंह खुला हुआ था। और वो माहिर चुदाई से पैदा होने वाली बेपनाह जिस्मानी लज्जत के मारे हाँफ़-हाँफ़ कर कराहती जा रही थी!

राज का लम्बा तगड़ा लन्ड उनकी कस के जकड़ती योनि में इस क़दर वार कर रहा था कि सोनिया को लगा जैसे चूत को फाड़कर उनके मुंह से निकल आयेगा ::: और उनके मुँह से चीरता हुआ बाहर वीर्य निकालने लगेगा। । “चोद चोद चोद चोद.. ', रजनी जी जप रही थीं, जैसे ही वे राज के रौंदते शैतानी लन्ड पर नीचे फिसलती, तो उस लफ़्ज़ को बोल देती।

 
राज गुर्राता हुआ और दम लगाकर उसकी चूत में पेल रहा था, सोनिया की हड्डियों को झकझोर रहा था, और उसकी टाइट कुलुबुलाती मांद में ऐसे ठूस रहा था, कि सोनिया को एक पल लगा उसके कूल्हे टूट जायेंगे! बड़ा शौक़ था उसे राज की पहलवानी चुदाई का :: : पिछली रात अपने मजबूत बाप से की चुदाई की याद दिलाता था ::: दनादन, गहरे, खूब गहरे, और देर तक चलने वाली चुदाई ::::

दोनो ने इकट्ठे और भी फुर्ती से मसलना शुरू कर दिया, क्योंकि दोनो ही सैक्स के इंतेहाई सुकून की चोटी के करीब परवाज हो रहे थे। सुलगती हवस और मस्ती की लपटें सोनिया की जवान पसीने से सनी जाँघों में उमड़ती,

और उसकी अकड़ी पीठ में कौंधती हुई, दीवानगी के घूमते भंवर में तब्दील होकर उसकी लन्ड भरी चूत में गहरी उतर जाती।

राज के टट्टे फूल गये थे, अब वो हवस के लावा की बौछारें उडेलने को बस तैयार हो चुके थे। वो बेतहाशा अपने भूखे गोश्त को अपने ऊपर बैठी जवान लौन्डिया के अंदर पीटे जा रहा था, उसकी चूत के पेंदे पर चाबुक जैसा मार रहा था, और उसकी कंपकंपाती जवान बुर को अपने तमतमाते लन्ड से चोदता हुआ शदीद धक्कों से उसके बदन को झकझोर रहा था।

| सोनिया आगे को गिरी और राज की गरम जीभ को अपने मुँह में चूस कर उसे चूम लिया। उसकी तो ये तमन्ना थी कि काश राज के एक नहीं, दो लन्ड होते, तो वो एक को चूस लेती और दूसरे से चुद लेती ... दो से भले तीन होते, ताकि अपनी गाँड में एक लन्ड को भरकर वो लुफ्त भी उठा लेती। फिर उसे एहसास हुआ की उसकी चाहतों का हल तो उसके खुद के घर में है! थे तो सही उसके पास तीन लन्ड, बस देर थी, तो उन्हें एक साथ, एक कमरे में इकट्ठा करने की, बाक़ी अपने आप हो जाता। सोनिया तो उस मुबारक घड़ी के लिये बेताब हुई जा रही थी! ।

राज की जीभ को, जिससे अब भी उसकी मम्मी की चूत के मवाद का जायका आ रहा था, चूसते हुए सोनिया ने अपनी गाँड के नीचे हाथ किया और प्यार से उसके टट्टों को सहलाया। दूसरे हाथ से वो कभी अपने तने निप्पलों को मसलती, तो कभी अपनी गाँड के सुराख में घुसेड़-घुसेड़ कर उंगल करती। वो अपनी जवानी की हवस के मारे बड़े जुनून से अपने क़ायनाती जिस्म के हर हिस्से पर अपना हाथ फेरती जा रही थी।

“ऊ ऊहहहह, मादरचोद! राज मैं झड़ने वाली हूँ! साले कटुवे! मैं झड़ने वाली हूँ !”, सोनिया ने राज के हाँफ़ते मुँह में गरम साँसें फेंकते हुए बोला। “साले मादरचोद! तू भी मेरी चूत में अपना लन्ड झड़ा! तेरे वास्ते हरामी पिल्ले पैदा करूंगी मैं ! तेरे जैसे कटुवे पिल्ले, जो तेरे जैसे मादरचोद भी होंगे! अहहहह! मादरचोद !”

 
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 


78 राज का हरम




राज ने हुंकार निकाली और जोश से अपने लन्ड को उसकी फड़कती बुर में पेलने लगा। उसका भारी-भरकम लन्ड सोनिया की चूत में मूसलों की तरह बरस रहा था। सोनिया की जवान चूत की माड से किसी फ़व्वारे की तरह मवाद बह रहा था, झागदार और दूधिया रंग का मवाद, जो राज के झाँटेदार टट्टों के ऊपर से बहता हुआ उसकी जाँघों को भिगो रहा था।

ऊऊऊहहह, मादरचोद! साले माँ की भोंसड़ी चोद चोद कर तेरा लन्ड कमजोर हो गया है क्या ? हरामी, मजाल है तो मेरी टाइट चूत में वीर्य निकाल , तुझे कसम है तेरे ईमान की, हरामजादे !” वो चीखी।।

राज ने उसकी चूतड़ों को ऊपर उठा दिया, जैसे सिरफ़ उसका सुपाड़ा सोनिया की चूत के झपटते होठों के अंदर कैद रहा, और कुछ देर तक वहीं पर उठाकर पकड़े रखा, और अचानक उसने दाँत पीसे और दे पटका नीचे अपने तने लन्ड के ऊपर।

“ले हरामजादी काफ़िर रन्डी, देख इस मादरचोद लन्ड का जमाल ! बोल साली, है तेरे हिजड़े बाप के लन्ड में ऐसा दम? चोद-चोद के तेरी काफ़िर चूत को भोंसड़ी नहीं बना दिया, तो मेरा माँ बहन को चोदना बंद कर देना !”, राज गुर्राया, “ऊपर वाले! देख मैं भी झड़ रहा हूँ !!”

सोनिया मारे खुशी के चीख पड़ी जब उसे राज को अपनी बुर में वीर्य की पिचकारियाँ मारते महसूस किया। उसकी चूत से भी मवाद बहने लगा, और राज तो अपने टट्टों को बहते नल जैसा खाली कर रहा था। हर दफ़े जब वो जवान सोनिया की कुलुबुलाती चूत को हाथों में पकड़कर अपने लन्ड पर नीचे पटकता, तो राज वीर्य की एक भरपूर बौछार उसकी बुर में भर देता।

सोनिया कराही और हाँफ़ी, फिर दीवानों जैसे अपने सर को आजू-बाजू पटकती हुई उसके पुखता, धड़कते और चूत में वीर्य भरते लन्ड पर ऊपर और नीचे फुदकने लगी। लगता था जैसे चूत को त्यूब-वैल पर बैठा रखा है। राज के लन्ड पर सवार सोनिया अपने चूतड़ों को बेतहाशा झटक रही थी, जैसे उसके अपनी चूत के पुट्ठों से खींच-खिंच कर राज के टट्टों में भड़े वीर्य को चूस रही हो।

राज थक कर बिस्तर पर देर हो गया, उसका मजबूत सीना दम उठ उठ कर साँसें ले रहा था। सोनिया अपनी वीर्य से सराबोर चूत को लौन्डे के अब भी तने लन्ड पर ऊपर और नीचे रगड़ाती रही, राज के लन्ड से वीर्य की आखिरी बून्दों को निचोड़-निचोड़ कर निकाला उसने, और जितना होता था, अपने ऑरगैस्म की मुद्दत को खींचती चली गयी।

फिर वो भी गश खा बिस्तर पर गिर गयी, और उसे मोहब्बत से अपनी बाँहों में भर कर लेट गयी। उसने जब बड़ी अक़ीदत से राज को चूमा, तो उसके अकड़े मम्मे राज के सीने पर रगड़ने लगे। फिर धीमे से उसने अपनी चूत को राज के लन्ड पर से निकाल खींचा। दो पल के लिये राज के लन्ड ने अपनी तनातनी को क़ायम रखा, पर फिर ढीला पड़कर, उसकी जाँघों पर एक कुंडली मारे काले साँप जैसा सो गया। आधा - तना होने पर भी मुआ कैसा रोबदार लगता था ::वीर्य और चूत के मवाद से चुपड़ा हुआ।

इस गैर काबिल-ए-बर्दाश्त मंजर को देख रजनी जी के गले से एक कराह निकली और वे अपने बेटे की चौड़ी फैलायी जाँघों के बीच लपक कर आ पहुँचीं। उन्होंने उसके लिसलिसे लन्ड को अपने गरम मुँह में लिया और ममता से उसे चूसने लगीं। वीर्य और चूत के मवाद की आमेजिश से बने लाजवाब शहद का जायका लेकर वे कराह उठीं, और लिसलिसी जवान चूत में सोखे हुए बेटे के लन्ड के कट्टे-मीठे जायके का लुफ्त लेने लगीं।

 
बड़ी महारत से चाट-चाट कर उन्होंने अपने बेटे के पीले- सफ़ेद मवाद से सने लन्ड को चमचमाता गहरा बैंगनी कर दिया। बड़ी सफ़ाई से उन्होंने उसके टट्टों से बहे वीर्य को राज के छड़ जैसे लन्ड पर से चाट कर उसे चमका दिया था। और तो और, उन्होंने उसकी जाँघे और पेट भी चाटे, किसी सूअरनी की तरह वे अपनी थोथनी उसकी झाँटों में गाड़े और ‘सर्र- सर्र-सुड़प-सड़ाप्प' आवाजें निकालती हुई चाटती जा रही थीं।

उधर बिस्तर के दूसरे छोर पर डॉली और सोनिया ने एक दूसरे की चूत चटाई शुरू कर दी थी। सोनिया डॉली की झाँटेदार चूत को अपनी जीभ से चाट जा रही थी, और डॉली अपने भाई का मलाईदार वीर्य

सोनिया की सुर्ख - लाल चूत में से चूस-चूस कर साफ़ किये दे रही थी।

रजनी जी ने पल भर के लिये अपना सर उठा कर दोनों लड़कियों को एक दुसरे को चाटते हुए देखा। दोनों हसीनाओं के बदन एक दूसरे से काफ़ी मुखतलिफ़ बनावट के थे। डॉली के लम्बे बाल, मोटे-मोटे ख़रबूजों जैसे मम्मे थे, पतली कमर, और मोटे चूतड़, क़द कुछ ठिगना, मजबूत काठी। दूसरी ओर सोनिया चुंघराले छोटे बालों वाली, लम्बे क़द की और नारंगी जैसे मम्मों वाली, नाजुक काठी की हसीना थी। अपनी बेटी के शातिर मुंह से अपनी चूत में सैक्स के इंतेहाई सुकून को पाने के बाद उन्होंने दम भी नहीं लिया था, कि उनकी हवस की आग फिर से भभक उठी। उनके खानदानी सैक्स जश्न में हसीन गुलबदन सोनिया कि शिरक़त हो जाने से रजनी जी और उनके बच्चों के बीच के हवसनाक और गुनहगार रिश्ते में एक नया जाविया जुड़ गया था, जिसका वे भरपूर लुफ्त उठाने का मंसूबा रखती थीं। उन्होंने सर उठाकर बेटे की ओर देखा और बाजारू अदा से मुस्कुरायीं।

“नन्हें पहलवान, उतरियेगा एक दफ़े और मैदान में ?”, वे हुंकार कर बोलीं, “बांदी की गाँड आपकी तवज्जो की मुन्तजिर है। आपसे गुजारिश है कि आप अपने मादरचोद लन्ड के जलवों से वालिदा की गाँड को नवाजें !”

“आपका हुक्म सर आँखों पर, पर बंदा अर्ज करना चाहता है कि लन्ड जरा सुस्ता रहा है, आपकी सरगर्मी ही इसकी खोयी बुलन्दगी को बहाल कर सकती है! एक बार खड़ा कर दे हरामजादी, फिर तू जहाँ बोल चोद हूँगा !”, दाँत पीस कर वो बोला।

राज ने हाथ नीचे कर के अपने टट्टों का जायजा लिया, हौले से दबा कर देखा, और जब मालूम हो गया कि ताजा-तराव हो गये हैं, तो अपनी हथेली को ऊपर, अपने लन्ड पर लपेटा और हौले-हौले ऊपर नीचे पम्प करने लगा।

रजनी जी भी उसका हाथ बंटाते हुए किसी बछड़े जैसे उसके सुपाड़े को चूसने लगीं।

“ऊ ऊह, हाँ, मेरे जिगर! मार मुठ मम्मी के मुँह में, वे हाँफ़ीं, मादरचोद, जब तन जाये तो याद से मेरी गाँड में घुसाना, कमबख़त जल रही है लन्ड के इंतजार में !”

बजा फ़र्माया मम्मी !”, राज हँसा, “तू गाँड में तेल लगाये रख बस !” * डॉली बेटा, ले आयीं वैसलीन की डिबिया ?”, उन्होंने अपनी बेटी से पूछा।

आँटी, मैं लगाऊँ ?”, उतावली सोनिया ने बीच में टोका।

 
हाँ, हाँ बेटी, क्यों नहीं, तू भी तो मेरी बेटी जैसी है, फिर तेरी घर पर भी तो मर्द होंगे जिन्हें कभी तेरी गाँड मारनी होगी !” सोनिया ने दो उंगलियों में वैसलीन भरकर उनकी गाँड के सुराख़ पर लथेड़ दी।

अरे बेटा, सिरफ़ बाहर नहीं, अंदर भी डालो, ये तेरे बाप का हिजड़ा लन्ड नहीं है, मेरे बेटे की तोप है, गाँड चिकनी होगी तभी तो दनादन दारोगी!”, रजनी जी ने हिदायत दी। सोनिया ने दोनो उंगलियों पर और वैसलीन ली और उनकी गाँड में घुसा दी, फिर अंदर मल-मल कर चारों ओर चुपड़ा दी। ऐसे मुस्कुरा मुस्कुरा कर मल रही थी सोनिया, पहली बार गाँड में उंगल करने पर उसे खूब मस्ती आ रही थी। जब ठीक से रजनी जी की गाँड में वैसलीन मल चुकी, तो उनके चूतड़ों पर एक चपत लगा कर बोली, “चल मेरे घोड़े, हो गयी तेरी घोड़ी रैडी !”

। “अब देख जब मैं गाँड मारूंगा, तो बीच में वैसलीन कम पड़ जाती है, जब मैं तुझसे बोलू , तो होशियारी से मेरे लन्ड पर बाहर खींचते समय लथेड़ देना और वैसलीन। और हाँ, हाथ बचा के, जाब गाँड मारता हूँ तो भगवान की कसम, माँ बहन का भी लिहाज़ नहीं करता हूँ !”, राज ने भी सोनिया को कुछ गुर सिखाये।

बक़ौल रजनी जी, बेटे का लन्ड चूसने से ज्यादा कमीनी हरकत तो अपने मुंह में बेटे से मुठ मरवाना था। अपने मुँह में मुठ मारते बेटे के लन्ड दो देख इस वक़्त उनके जेहन में ऐसे कमीनगी भरे खयाल आ रहे थे कि उनकी चूत हवस के मारे फड़कने लगी थी। राज ने एक हाथ अपनी मम्मी जान के सर के पीछे लगाया और अपने लन्ड को उनके मुंह में डाल धुआँदार घिसने लगा। सुपाड़े पर चमड़ी तो कटी हुई थी, सो अपनी मम्मी के होठों ही उसके सुपाड़े को गुदगुदाते हुए सुरूर दे रहे थे। | रजनी जी ने अपने बेटे के लन्ड के पुट्टेदार गोश्त को अपने होठों के दरम्यान ठोस होते पाया तो खुशी की आह उनके मुंह से निकल पड़ी। उन्होंने ऊपर देखकर राज की आँखों से आँखें मिलायीं, फिर उसके लन्ड को देखा और मुँह को नीचे धकेल कर उसकी ऊपर की आधी लम्बाई को मुंह में निगल गयीं। नीचे के हिस्से को राज अब भी मुट्ठी में दबोचे लगाथार रगड़े जा रहा था, जब वो लन्ड को बाहर खींचता तो उसकी मुट्ठी रजनी जी के होठों से टकराती, और जब अंदर को खींचता तो उसके टट्टों पर टकराती।

झटके-दर-झटके, राज का मर्दाना लन्ड अपनी पुरानी बुलंदी को परवान चढ़ने लगा। रजनी जी ने भी अपने होठों को अब सिरफ़ उसके सुपाड़े पर जकड़ा हुआ था। जल्द ही राज का लन्ड ने अपनी मुक़म्मल बुलन्दी को हासिल कर लिया।

“देख सोनिया बेटी, देखा खालिस लन्ड !”, रजनी जी कराहीं, उनके दिमाग पर शैतानी हवस सवार थी। उन्होंने बेटे के लन्ड से अपने होंठ जुदा किये और किसी लावारिस कुतिया जैसी हाथों और खुटनों के बल बिस्तर पर बैठ गयीं। उन्होंने अपनी गाँड को राज की ओर उचका कर अच्छा खासा खोल रखा था।

आजा मादरचोद, ले खोल दी मैने अपनी गाँड, दिखा अपनी मर्दानगी, लन्ड में दम है तो मार मम्मी की गाँड, मैं भी देखें कैसा शेर जना है मैने !”, रजनी जी ने बेटे को ललकारा।

 
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 


79 दरवज्जा खुल्ला छोड़ आयी




79 दरवज्जा खुल्ला छोड़ आयी ::

राज ने चेहरे पर लटके अपने बालों को हाथ से हटाया, और मुस्तैदी से अपनी मम्मी की मोटी कमर को हाथों में दबोचकर, उनके चूतड़ों को पीछे अपने बेलगाम लन्ड पर खींचा। फिर अपने फूले सुपाड़े को उनकी गाँड के झुरींदार सुराख़ पर दागा। राज का जवाँ लन्ड वालिदा की चिपचिपी गाँड में ऐसे इत्मिनान से अंदर फिसलता चला गया, मानो गरम चाकू मक्खन की डली को काट रहा हो। रजनी जी और अपने बेटे के लम्बे लन्ड की मोटाई को पीछे की ओर झपट-झपट कर अपनी गाँड की तपती गहराई में निगलती हुईं, गहरा सुकून पा रही थीं, और घायल शेरनी सी कराहती जा रही थीं।

“ऊ :: ऊहहह ... ऊहह :: या ऊपर वाले! आँहह ... ! मेरे जिगर, मम्मी को जन्नत का मजा आ रहा है ! जन्नत का !”, वे चीखीं, और निहायत बेहयाई से अपने चूतड़ों को बेटे के लोहे की छड़ जैसे कड़े लन्ड पर पीट पीट कर मारने लगीं।

राज ने अपने लन्ड को अपनी मम्मी की कस के भींचती गाँड में पम्प करना शुरू कर दिया, और उनकी कमर पर राज के पुट्ठों की ताक़तवर झटकों की वजह से रजनी जी के चूतड़ों पर माँस के लोथड़े फुदक रहे थे, और उनके मोटे-मोटे मम्मे बेहूदगी से झूल रहे थे। रजनी जी कराहती रहीं, हौले-हौले, जनाना अदा से , अपने बेटे के झाँटेदार टट्टों की अपनी चूत पर सिलसिलेवार टक्कर से उन्हें बेहद मज़ा आ रहा था।

टट्टों का हर पुरतशद वार उनके फड़कते चोंचले में हवस की टीस उठा देता था। | मम्मी की सुकून भरी कराहों ने राज में और भी जोश भर दिया, वो और फुर्ती से उनकी गाँड मारने लगा। उनकि कुलबुलाती, मोटी कमर को हाथों में दबोचकर वो अपने लन्ड को उनकी कास के जकड़ती गाँड में लम्बे, तगड़े और सफ़्फ़काना ठेले देकर पम्प करने लगा, जिसकी हैवानी कुव्वत ने रजनी जी के तंदुरुस्त बदन को भी झकझोर रखा था।

“मार मेरी गाँड मादरचोद! बहा दे अपना वीर्य मेरी गाँड में, मेरी कोख के लाल ! भर दे मम्मी जान की गाँड को अपने वीर्य से, मेरे आशिक़ !”, भर्रायी आवाज में रजनी जी बोली थीं।

रजनी जी का बदन अब पसीने की महीन परत की वजह से दमकने लगा था। राज का भी ऐसा ही हाल था • • • जल्द ही रजनी जी के चिकने चूतड़ों का माँस उनके बेटे की मजबूत पुट्ठेदार जाँघों पर थपेड़े मारने लगा। अपने हवस के गुनाह की मीठी-मीठी सजा, जो उन्हें इन थपेड़ों से मिल रही थी, बेशक़ रजनी जी को बेहिसाब लुफ्त दे रही थी।

“साला लन्ड आराम से नहीं फिसल रहा, सोनिया वैसलीन !”, राज ने ताक़ीद की। सोनिया ने झट से हाथ में रखी वैसलीन की डिबिया से उंगलियों पर और वैसलीन निकाली और राज के लन्ड के उस हिस्से पर, जो ठेलते-ठेलते रजनी जी की गाँड से बाहर नजर आता था, लथेड़ दिया। राज का लन्ड लथेड़ी हुई वैसलीन को अंदर घुसते वक़्त अपने साथ गाँड में ले चलता था। जब चिकनायी वापस बरक़रार हो गयी, तो राज ने खुशी से सोनिया को आँख मारी और बोला:

* देख मम्मी, कैसी होशियारी से काफ़िर लौन्डी गाँड चुदाई सीख गयी है !”

रजनी जी ने गर्दन घुमा कर पूरा वाक़या देख लिया था, देखकर उनकी जाँघे कॉपी और गाँड सिकुड़ गयी। राज ने उन्हें आहें भरते सुना, एक बाद एक भरी हुई साँसों का सिलसिला। उसने अपने ठेलों की ताल को जरा धीमा कर दिया। वो अपनी मम्मी को झड़ने के कगार पर ले आया था, और कगार पर ही रोक कर उन्हें तड़पाना चाहता था।

अपनी जिम्मेवारी निबाह कर सोनिया और डॉली ने फिर से आपस में चूत चटायी शुरू कर दी थी। दोनो पागलों जैसी एक दूसरे की चूतों को चाटती, चूसती और उंगली घुसाती जा रही थीं, और अपनी गैर-कुदरती हवस के सुलगते जुनून में पूरी तरह मसरूफ़ हो गयी थीं। राज ने गाँड मारने की रफ़्तार धीमी करके अपनी बहन को देखा, जो जीभ बाहर को लटकाये हुए किसी कुतिया के माफ़िक सोनिया की सुर्ख - लाल चूत को चाटे जा रही थी।

 
“चूस मेरी चूत , डॉली !” सोनिया चीखी, उसका बदन तूफ़ान में पत्ते की तरह काँप रहा था। “चूस जहाँ मेरे बाप ने मुझे चोदा है! चाट मेरी बुर को! ओहहह, डॉली, डॉली, डॉली ! और मत तड़पा ! रन्डी, कैसी-कैसी कमीनगी भरी है तेरे खानदान में ! चूस हरामजादी !”

राज ने देखा, कि सोनिया ने अपना मुँह उसकी बहन डॉली की चूत पर दबाया, और अपनी जीभ से उसकी अंधेरी उमस भरी चूत के दर को खोलकर, बार-बार अंधाधुंध अंदर, और अंदर मारने लगी: ‘सोनिया उसकी बहन की गरम, उबलती चूत को नये जोश से चाट रही थी और अंदर टटोल रही थी। दोनो नाजनीने मुंह से बेहूदी ‘सुपड़-चुपड़ - सड़ाप्प' आवाजें निकालती हुई भूखों की तरह एक दूसरे की रिसती चूतों को चूस चूस कर चाटते जा रही थीं।

इस दौरान, राज ने अपने लन्ड को मम्मी की गरम, पिघलती गाँड में ठेलना जारी रखा था, जिससे रजनी जी मारे मस्ती के कुलबुला रही थीं। जाहिर था कि वे तरस रहीं थी झड़ने के लिये। उनका बेटा उन्हें ऑरगैस्म के कगार पर रोके हुए बड़ी अदा से उन्हें सता रहा था। रजनी जी अपने गुनाहगार बदन की हवस की प्यास से हर हाल में निजात पाने के लिये बेचैन हो चली थीं!

“ऊँह ऊँह ऊँह ऊहहह, राज ! मेरे भगवान, राज ! और कस के चोद मुझे, बेटा! खूब कस के मार मम्मी की गाँड! ऊहह, अपनी गुनाहगार मम्मी की गाँड को सजा दे, बेटा! मेरे अंदर तेरा लन्ड कितना मोटा, कितना गरम और कितना मजबूत है !”

“और तेज हिला, नामर्द! और तेज! आँह ‘आँहह शाबाश! बहुत खूब, राज ! मुझे चोद, बेटा! मेरी गाँड मार, मेरे आशिक़ !”

“देख बेटी सोनिया, मेरी चूत से पैदा हुआ है ये पिल्ला, और आज मेरी गाँड मार रहा है! ", इस तरह वे कराहती रहीं, अपने संगीन गुनाह की हवस की आग में डूब गयी थीं रजनी जी। । राज अपने पूरे हौसले से अपनी मम्मी की कसी हुई और मुलायम गाँड को चोदे जा रहा थे, उसका अंग-अंग अब अपने दिमाग में बैठा शैतान के क़ाबू में था। रजनी जी भी लगातार उसपर अपनी चूतड़ों को पटके जा रही थीं, हर जोरदार झटके के साथ उनकी गाँड पर दो मोटे माँस के लोथड़े हिल- हिल कर झूलते थे, और उनकी छाती के नीचे उनके तरबूजों जैसे मम्मे झूम-झूम कर फुदकते थे।

ओहहहह! शाबाश! मार मेरी गाँड राज ! जोर-जोर से, खूब गहरा चोद अपनी रन्डी मम्मी की गाँड को !” वे मन्तर जपने लगीं, “ऊ ऊ ऊ ऊह, मेरे पिल्ले ! ऊपर वाले, तुझसे गाँड मरवाने में खूब मस्ती आ रही है, हरामजादे, ऊपर वाले तुझे इस नेकी का सवाब दे !”

“अंहह अँह उँहह, ऊपर वाले! सच मम्मी, गाँड हो तो ऐसी, साली रन्डी गाँड मेरे लन्ड को निचोड़ रही है, कसम से ऐश हो रही है !” राज जोर से कराहा। | मेरी भी ऐश हो रही है, मादरचोद ! अब ज्यादा बक मत, मुझे मेरे मम्मों के दूध का सवाब चाहिये, कुछ तेरे लन्ड में दम है या नहीं ?” हाँफ़ते हुए रजनी जी ने ललकारा, हवस के मारे उनकी आवाज भर्रा रही थीं और साँसें उखड़ रही थीं।

 
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 
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