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91 तारीफ़
रजनी जी आगे की तरफ़ गिरीं और अपने सर को उसके कन्धे का सहारा देकर जय की बाँहों में सिमटने लगीं। उनके स्तनों के दोनो निप्पल किशोर जय के मजबूत सीने के पुट्ठों में गड़ रहे थे।
“तू भी खासा अच्छा चोद रहा था, जय मादरचोद !”, रजनी जी ने उत्तर दिया, वे जय की बात का अर्थ ठीक प्रकार से समझी नहीं थीं, “अम्म्म्म :: अपनी माँ को चोद - चोद कर तुझे बड़ी उमर की औरतों को खुश कराने के सारे गुरों में उस्तादी हासिल हो गयी है!” ।
सैक्स पश्चात तृप्ति के आनन्द में विलिप्त होकर वे जय के बदन से लिपटती जा रही थीं, और अपनी योनि को उसके फड़कते युवा लिंग पर कसमसाती जा रही थीं।
“मेरा मतलब है कि आप गजब की सैक्सी लग रही हैं !”, वो अपने चेहरे को उनके चेहरे के एकदम करीब लाकर बोला। “सच रजनी आंटी, आप इस वक़्त अपनी उमर से कहीं ज्यादा जवाँ लग रहीं हैं। आपको ऐसा बला का खूबसूरत मैंने पहले तो कभी नहीं देखा।”
रजनी जी उसे देख कर मुस्कुरायीं।। “अरे मुस्टंडे, आज से पहले तूने मुझे कभी चोदा भी है?”
“चोदा तो पहले कभी नहीं पर ... पर उम्मीद करता हूँ आगे भी ऐसी सेवा का मौक़ा मिलता रहेगा !”, उसने पूछा।
“क्यों नहीं बेटा, पब्लिक का माल है, जब दिल करे बेधड़क होकर मेरी चूत को चूस लेना, ठीक है ना ?”
रजनी जी ने किशोर जय को अपनी बाँहों में भरा और तन्मयता से चुम्बन लिया, उसके गरम जवाँ होठों से अपने स्वयं के योनि द्रवों के रोमांचक स्वाद का रसास्वादन किया। उन्होंने अपने स्तनों को उसके सीने पर दबाया, और जैसे जैसे उत्तेजना बढ़ी, शीघ्र ही उनके कोमल चुम्बन की तपन में वृद्धि होने लगी। जय अपनी सौन्दर्यवान सैक्सी पड़ोसन आँटी के साथ संभोग क्रिया करने की संभावना पाकर अविश्वस्नीय रूप से रोमांचित होकर सर से पैर तक कांपने लगा था। उसकी अनेक काम कल्पनाओं की नायिका थीं वे, और उनकी गरम टपकती योनि पर मुख मैथुन मात्र से उस कामुक किशोर लड़के की अतृप्त कामवासना तीव्र हो चली थी।
जय का युवा लिंग वज्र सा कठोर हो चला था, और रजनी जी की कुलबुलाती योनि पर पीड़ादायक रूप में फड़क - फड़क कर दस्तक कर रहा था। शीतल जल के अंदर भी, वो अपने लिंग पर उनकी योनि की ऊष्मा का अनुभव कर सकता था। जय ने अपने मुँह को उनके चिपटते नम होठों से जुदा करा और उनके रौशन नेत्रों में झाँक कर देखा। जय के आकर्षक युवा चेहरे पर वासना का स्पष्ट भाव तैर रहा था।
“रजनी आँटी, अब मैं आपको चोद सकता हूँ?, निर्भीकता से उसने पूछा। “आपने वादा किया था कि मुझे चोदने देंगी, और मेरा लन्ड ऐसा फूल गया है, कि बड़ा दर्द कर रहा है!::: देखिये, आप छू कर देखिये ना कैसा मोटा और सॉलिड हो चला है।” जय ने रजनी जी का हाथ अपने हाथों में लेकर जल के नीचे अपने लिंग पर दबा डाला।
रजनी जी आगे की तरफ़ गिरीं और अपने सर को उसके कन्धे का सहारा देकर जय की बाँहों में सिमटने लगीं। उनके स्तनों के दोनो निप्पल किशोर जय के मजबूत सीने के पुट्ठों में गड़ रहे थे।
“तू भी खासा अच्छा चोद रहा था, जय मादरचोद !”, रजनी जी ने उत्तर दिया, वे जय की बात का अर्थ ठीक प्रकार से समझी नहीं थीं, “अम्म्म्म :: अपनी माँ को चोद - चोद कर तुझे बड़ी उमर की औरतों को खुश कराने के सारे गुरों में उस्तादी हासिल हो गयी है!” ।
सैक्स पश्चात तृप्ति के आनन्द में विलिप्त होकर वे जय के बदन से लिपटती जा रही थीं, और अपनी योनि को उसके फड़कते युवा लिंग पर कसमसाती जा रही थीं।
“मेरा मतलब है कि आप गजब की सैक्सी लग रही हैं !”, वो अपने चेहरे को उनके चेहरे के एकदम करीब लाकर बोला। “सच रजनी आंटी, आप इस वक़्त अपनी उमर से कहीं ज्यादा जवाँ लग रहीं हैं। आपको ऐसा बला का खूबसूरत मैंने पहले तो कभी नहीं देखा।”
रजनी जी उसे देख कर मुस्कुरायीं।। “अरे मुस्टंडे, आज से पहले तूने मुझे कभी चोदा भी है?”
“चोदा तो पहले कभी नहीं पर ... पर उम्मीद करता हूँ आगे भी ऐसी सेवा का मौक़ा मिलता रहेगा !”, उसने पूछा।
“क्यों नहीं बेटा, पब्लिक का माल है, जब दिल करे बेधड़क होकर मेरी चूत को चूस लेना, ठीक है ना ?”
रजनी जी ने किशोर जय को अपनी बाँहों में भरा और तन्मयता से चुम्बन लिया, उसके गरम जवाँ होठों से अपने स्वयं के योनि द्रवों के रोमांचक स्वाद का रसास्वादन किया। उन्होंने अपने स्तनों को उसके सीने पर दबाया, और जैसे जैसे उत्तेजना बढ़ी, शीघ्र ही उनके कोमल चुम्बन की तपन में वृद्धि होने लगी। जय अपनी सौन्दर्यवान सैक्सी पड़ोसन आँटी के साथ संभोग क्रिया करने की संभावना पाकर अविश्वस्नीय रूप से रोमांचित होकर सर से पैर तक कांपने लगा था। उसकी अनेक काम कल्पनाओं की नायिका थीं वे, और उनकी गरम टपकती योनि पर मुख मैथुन मात्र से उस कामुक किशोर लड़के की अतृप्त कामवासना तीव्र हो चली थी।
जय का युवा लिंग वज्र सा कठोर हो चला था, और रजनी जी की कुलबुलाती योनि पर पीड़ादायक रूप में फड़क - फड़क कर दस्तक कर रहा था। शीतल जल के अंदर भी, वो अपने लिंग पर उनकी योनि की ऊष्मा का अनुभव कर सकता था। जय ने अपने मुँह को उनके चिपटते नम होठों से जुदा करा और उनके रौशन नेत्रों में झाँक कर देखा। जय के आकर्षक युवा चेहरे पर वासना का स्पष्ट भाव तैर रहा था।
“रजनी आँटी, अब मैं आपको चोद सकता हूँ?, निर्भीकता से उसने पूछा। “आपने वादा किया था कि मुझे चोदने देंगी, और मेरा लन्ड ऐसा फूल गया है, कि बड़ा दर्द कर रहा है!::: देखिये, आप छू कर देखिये ना कैसा मोटा और सॉलिड हो चला है।” जय ने रजनी जी का हाथ अपने हाथों में लेकर जल के नीचे अपने लिंग पर दबा डाला।