ऐसे क्या, डैडी ?", वो खिलखिलायी।
उफ़्फ़, भगवान! बदमाश छोरी! लन्ड को फड़ डलेगी क्या !", मिस्टर शर्मा भी मुस्कुराये।
सोनिया तो सातवें आसमान पर थी! अपने पिता पर एक आधिपत्या सा जमा चुकी थी वो, हालंकि वे उसे चोद रहे थे, पर वो अच्छी तरह से जानती थी कि वो उन्हें अपनी उंगलियों के इशारे पर नचा रही है। दरसल , चूत के इशारे पर, सोनिया ने सोचा, जहाँ तक मर्दो का सवाल है, बात एक ही है।
उनके बाजू में मिसेज़ शर्मा और जय अपने पाप भरे आवेग में खोये हुए थे। किशोर जय अपनी माँ के बड़े-बड़े खड़बूजे जैसे गुलाबि निप्पलों वाले स्तनों को वात्सल्य से मसल रहा था, और टीना जी बड़े चाव से उसके चमचमाते काले लिंग की तीमरदारी कर रही थीं। कभी-कभी अनायास ही वे पुत्र-लिंग की लम्बायी को लाड़ से चाटतीं और कभी-कभी जय के रोम-रहित अण्डकोष को अपने गरम मुँह में चूस लेतीं। उनकी यह हरकत जय को उनके स्तनों को अधिक जोर से दबाने पर मजबूर कर देतीं, और दोनों के मुँह से स्वतः ही मस्ती भरी आहें और कराहें निकल पड़तीं। टीना जी की योनि तो जैसे सुलग रही थी! वे तिन लम्बी और पतली उंगलियँ अपनी लबलबाती कामगुहा में घुसाये हुए थीं और उन्हें बड़े जोश के साथ भीतर - बाहर रगड़ रही थीं। साथ-साथ अपने पुत्र के काले धड़कते लिंग को भी बिना रुके चूसती जा रही थीं। मिसेज शर्मा अपने अंगूठे के द्वारा बड़ी निपुणता से अपनी योनि के चोंचले को दबाती और मसल-मसल कर अपनी कामंद्रियों को उत्तेजित करती हुई हस्तमैथुन का भी रसास्वादन कर रही थीं।
उफ़्फ़, भगवान! बदमाश छोरी! लन्ड को फड़ डलेगी क्या !", मिस्टर शर्मा भी मुस्कुराये।
सोनिया तो सातवें आसमान पर थी! अपने पिता पर एक आधिपत्या सा जमा चुकी थी वो, हालंकि वे उसे चोद रहे थे, पर वो अच्छी तरह से जानती थी कि वो उन्हें अपनी उंगलियों के इशारे पर नचा रही है। दरसल , चूत के इशारे पर, सोनिया ने सोचा, जहाँ तक मर्दो का सवाल है, बात एक ही है।
उनके बाजू में मिसेज़ शर्मा और जय अपने पाप भरे आवेग में खोये हुए थे। किशोर जय अपनी माँ के बड़े-बड़े खड़बूजे जैसे गुलाबि निप्पलों वाले स्तनों को वात्सल्य से मसल रहा था, और टीना जी बड़े चाव से उसके चमचमाते काले लिंग की तीमरदारी कर रही थीं। कभी-कभी अनायास ही वे पुत्र-लिंग की लम्बायी को लाड़ से चाटतीं और कभी-कभी जय के रोम-रहित अण्डकोष को अपने गरम मुँह में चूस लेतीं। उनकी यह हरकत जय को उनके स्तनों को अधिक जोर से दबाने पर मजबूर कर देतीं, और दोनों के मुँह से स्वतः ही मस्ती भरी आहें और कराहें निकल पड़तीं। टीना जी की योनि तो जैसे सुलग रही थी! वे तिन लम्बी और पतली उंगलियँ अपनी लबलबाती कामगुहा में घुसाये हुए थीं और उन्हें बड़े जोश के साथ भीतर - बाहर रगड़ रही थीं। साथ-साथ अपने पुत्र के काले धड़कते लिंग को भी बिना रुके चूसती जा रही थीं। मिसेज शर्मा अपने अंगूठे के द्वारा बड़ी निपुणता से अपनी योनि के चोंचले को दबाती और मसल-मसल कर अपनी कामंद्रियों को उत्तेजित करती हुई हस्तमैथुन का भी रसास्वादन कर रही थीं।