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Incest पापी परिवार की पापी वासना (Completed)

"बरखुरदार, लगता है इस बेचारे की तो चोदते - चोदते हवा निकल गयी, क्यों सोनिया ?", रजनी जी मुस्कुरायीं , और छेड़खानी करती हुई अपनी उंगलियों को जय के शीथील लिंग पर फेरते हुए बोलीं।

"हाँ आँटी! आखिर दुनिया में कितने ऐसे लड़के होंगे जिन्हें इस उमर में इतनी चूतों के हमले को झेलने का नसीब हुआ हो :- मैने ठीक कहा जय?", सोनिया खिलखिला पड़ी।

"सच सोनिया, ऐसी गरम पटाखेदार चूतों को झेलना बड़ा मुश्किल है।" जय पलट कर अपनी छोटी बहन की ओर मुड़ा और उसने उत्तर दिया। "भई मुझे तो आँखों देखी पर यक़ीन नहीं होता! लगता है सपना देख रहा हूँ, बस जागने का मन नहीं करता !"

"सपना नहीं, ये सच है भैया!", सोनिया ने उत्तर दिया, वो उसके लिंग को रजनी जी की कुशल उंगलियों के तले पुनः जीवित होते देख रही थी। "और बड़े भैया, ध्यान रखिये, आज के बाद आपको टिपटॉप कन्डीशन में रहना है। क्योंकि अब आपको अपना दमखम दिखाने के ऐसे कईं मौके मिलेंगे !" ।

"बाद दमखम की निकली है तो," रजनी जी ने मुस्कुराते हुए कहा, "क्यों न हम बाहर जाकर देखें कि बाक़ी लोग क्या हरकतें कर रहे हैं।

हाँ!", जय ने स्वीकृति भरी। "अब भाई मुझे तो तुम दोनो ने इतना थका डाला कि मुझे दो घड़ी दम लेने की सख्त जरूरत है।"

"ममममम! जनाब जरूर आराम फ़र्माइये, पर कहीं हमें भुला न बैठियेगा! समझे मेरे पहलवान, तुझे तेरी रन्डी माँ का तक़ाजा है !" रजनी जी ने ऐसा कह कर जय के अर्ध-तैनात लिंग को प्रेम से निचोड़ दिया।

तीनो नग्नावस्था में ही एक दूसरे के गले में बाहें डाले जैकूजी से निकल पड़े और फ़ार्महाउस के भीतर को चल पड़े।

जैसे तीनो स्विमिंग पूल के निकट से गुजरे, उन्होंने उसे खाली पाया। लगता था मिस्टर शर्मा और डॉली ने फ़ार्महाउस के भीतर आरामदेह स्थान का चयन किया था। बाक़ी के लोग ड्राइंग रूम में रंगरेलियाँ मना रहे थे।

"आइये, आइये, बस आप तीनों की ही कमी थी यहाँ!", टीना जी ने हँस कर उनका स्वागत किया, वे अपने पुत्र के आधे तने हुए लिंग को खुल्लम-खुल्ला घूर रही थीं। । हालांकि वे राज के लिंग को अब भी अपनी योनि की गहराई में ग्रहण किये हुए थीं, फिर भी टीना जी अपने सौन्दर्यवान पुत्र के प्रति प्रचण्ड वासना का अनुभव कर रही थीं। इस तथ्य के ज्ञान -मात्र से, कि उनके सुन्दर बलिष्ठ पुत्र ने निश्चय ही अभी-अभी सोनिया और रजनी जी के संग सम्भोग सम्पन्न किया था, उनकी योनि बेलगाम हवस के मारे फड़कने लगी। उन्होंने अपनी योनि को राज के ढीले लिंग पर से खींच निकाला और हाथों में जय के हाथ को लेकर उठ खड़ी हुईं।

"आजा, मेरे लाल, टीना जी ने गुर्रा कर कहा, और अपने नग्न पुत्र को कमरे के खाली भाग की ओर खीं ले चलीं। "मम्मी को बड़ी खुजली हो रही है, जिसका इलाज बस तेरे पास है !"

रजनी जी, सोफ़े पर लेट कर कामुकतापूर्वक एक दूसरे का चुम्बन लेते हुए मिस्टर शर्मा और डॉली के निकाट जाकर बैठ गयीं और अपनी उंगलियों को मिस्टर शर्मा के वज्र से कठोर लिंग पर लपेट डाला।

"आदाब अर्ज है, शर्मा जी !", वे उनके कान में फुसफुसायीं। मिस्टर शर्मा ने अपने होठों को डॉली के होठों से अलग किया और उसकी मम्मी की दिशा में मुड़ गये।।

"जहे नसीब, रजनी जी ? आपको मेरा भी आदाब !" वे हँस पड़े, और अपने बायें हाथ को नीचे रजनी जी की पटी हुई जाँघों के बीच सरकाने लगे। उन्होंने अपनी एक उंगली को उस स्त्री की पटी हुई कामगुहा में घुसाया और लगे उनके चोंचले को रगड़ने । उनका दायाँ हाथ डॉली की तप्त किशोर योनि से खेलने में व्यस्त था। मिस्टर शर्मा माँ-बेटी पर एक ही समय हस्त-मैथुन कर रहे थे। रजनी जी ने कराह कर अपने नरम कोमल होठों को मिस्टर शर्मा के होठों पर सटा दिया। जब वे आवेशपूर्वक चुम्बन कर रहे थे, डॉली ने अपने सर को मिस्टर शर्मा की टाँगों के बीच घुसेड़ा और उनके विशाल लिंग को अपने मुख में ग्रहण कर, उत्सुकता से लगी चूसने।।
 
सोनिया ने भी उनके साथ-साथ अपने शीर्ष आनन्द को प्राप्त किया, और अपनी जिह्वा को रजनी जी के तप्त मुँह में गहरा घुसेड़ कर अपने भाई के मुंह पर अपनी जवान योनि से मादा दवों का छिड़काव करने लगी।

रजनी जी की कम्पायमान योनि के भीतर वीर्य की अंतिम बून्दों को स्खलित करने के कई मिनट बाद तक जय के लिंग ने बेतहाशा फड़क - फड़क कर फुदकना जारी रखा। रजनी जी कराहीं, वे अति आह्लाद से अपनी कसमसाती योनि की प्रत्येक फड़कन का भरपूर आनन्द उठा रही थीं। अपने दैहिक आनन्द के प्रभाववश उन्होंने अपनी लाज को त्याग दिया था, और मुख से किलकारियाँ निकालती हुई बेहूदी व अभद्र तिप्पणियाँ कर रही थीं। वे अपनी योनि को आगे और पीछे झुलातीं, फिर दायें -बायें कूटतीं और अपनी काम-गुहा को बड़ी अदा से जय । के मोटे स्तम्भ की सम्पूर्ण लम्बाई पर ऊपर से नीचे तक फिसलातीं।

सोनिया भी ऐसे ही अनुभव से गुजर रही थी, कोई अंतर था तो बस इतना ही जय की जिह्वा शीथील नहीं परी थी, वो अब भी कुशलतापूर्वक बहन की योनि पर मैथुनरत थी। सोनिया की काम अनुभूतियाँ मुख्यतय उसकी योनि के चोंचले पर केन्द्रित थीं, और अपने चरमानन्द के शीर्ष की घड़ी में उसने धीरे से खिसक कर अपने संवेदनशील चोंचले को उसकी निरन्तर मैथुन करती जिह्वा के ऐन विपरीत ला टेका था।

जय ने स्वाभाविक रूप से उसकी मनोकामना को जान लिया और उसकी बहन को जो चाहिये था, वही किया। उसकी कामेन्द्रियों के केन्द्रीय बिन्दू पर उसने अपनी जिह्वा से सहलाना प्रारम्भ कर दिया। सोनिया के सूजे हुए चोंचले पर वो अपनी जिह्वा को आगे-पीछे घसीटता गया जब तक कि दैहिक आनन्द की अनुभूतियों की प्रचण्डता उसकी बर्दाश्त के बाहर नहीं हो गयी।

"ऊ ऊहहह, जय भैया। और मत तड़पाओ मुझ बेचारी को !" वो कराही, और अपनी पीठ को तना कर कस के अपनी योनि को उसके चेहरे पर रौन्दने लगी।

रजनी जी आगे की ओर झुकीं, उन्होंने जय के युवा लिंग पर अपनी योनि की सशक्त गिरफ़्त का कब्जा बरकरार रखा, और सोनिया के होठों का कामुक चुम्बन लिया। उन्होंने किशोरी के नारंगी जैसे स्तनों को निचोड़कर सहलाया। दोनो मादाओं की देह हौले-हौले जय के ऊपर कसमसा रही थीं, और वे अपने ऑरगैस्म के उपरांत की मधुर सुखद अनुभूतियों का आनन्द उठा रहे थे। | ऑरगैस्म के लम्बे सिलसिले का आनन्द ले लेने के पश्चात जय का नवयौवन और पौरुष भी अब शीथील पड़ने लगा था, और उसका लिंग कुम्हला कर ढीला पड़ा और धीरे से रजनी जी की योनि से निकल बाहर हुआ। मारे थकान के वो हाँफ़ता हुआ आँखें मून्द कर लेट गया।
 
"सच सोनिया, ऐसी गरम पटाखेदार चूतों को झेलना बड़ा मुश्किल है।" जय पलट कर अपनी छोटी बहन की ओर मुड़ा और उसने उत्तर दिया। "भई मुझे तो आँखों देखी पर यक़ीन नहीं होता! लगता है सपना देख रहा हूँ, बस जागने का मन नहीं करता !"

"सपना नहीं, ये सच है भैया!", सोनिया ने उत्तर दिया, वो उसके लिंग को रजनी जी की कुशल उंगलियों के तले पुनः जीवित होते देख रही थी। "और बड़े भैया, ध्यान रखिये, आज के बाद आपको टिपटॉप कन्डीशन में रहना है। क्योंकि अब आपको अपना दमखम दिखाने के ऐसे कईं मौके मिलेंगे !" ।

"बाद दमखम की निकली है तो," रजनी जी ने मुस्कुराते हुए कहा, "क्यों न हम बाहर जाकर देखें कि बाक़ी लोग क्या हरकतें कर रहे हैं।

हाँ!", जय ने स्वीकृति भरी। "अब भाई मुझे तो तुम दोनो ने इतना थका डाला कि मुझे दो घड़ी दम लेने की सख्त जरूरत है।"

"ममममम! जनाब जरूर आराम फ़र्माइये, पर कहीं हमें भुला न बैठियेगा! समझे मेरे पहलवान, तुझे तेरी रन्डी माँ का तक़ाजा है !" रजनी जी ने ऐसा कह कर जय के अर्ध-तैनात लिंग को प्रेम से निचोड़ दिया।

तीनो नग्नावस्था में ही एक दूसरे के गले में बाहें डाले जैकूजी से निकल पड़े और फ़ार्महाउस के भीतर को चल पड़े।

101 सिंह और सिंहनी जैसे तीनो स्विमिंग पूल के निकट से गुजरे, उन्होंने उसे खाली पाया। लगता था मिस्टर शर्मा और डॉली ने फ़ार्महाउस के भीतर आरामदेह स्थान का चयन किया था। बाक़ी के लोग ड्राइंग रूम में रंगरेलियाँ मना रहे थे।

"आइये, आइये, बस आप तीनों की ही कमी थी यहाँ!", टीना जी ने हँस कर उनका स्वागत किया, वे अपने पुत्र के आधे तने हुए लिंग को खुल्लम-खुल्ला घूर रही थीं। । हालांकि वे राज के लिंग को अब भी अपनी योनि की गहराई में ग्रहण किये हुए थीं, फिर भी टीना जी अपने सौन्दर्यवान पुत्र के प्रति प्रचण्ड वासना का अनुभव कर रही थीं। इस तथ्य के ज्ञान -मात्र से, कि उनके सुन्दर बलिष्ठ पुत्र ने निश्चय ही अभी-अभी सोनिया और रजनी जी के संग सम्भोग सम्पन्न किया था, उनकी योनि बेलगाम हवस के मारे फड़कने लगी। उन्होंने अपनी योनि को राज के ढीले लिंग पर से खींच निकाला और हाथों में जय के हाथ को लेकर उठ खड़ी हुईं।

"आजा, मेरे लाल, टीना जी ने गुर्रा कर कहा, और अपने नग्न पुत्र को कमरे के खाली भाग की ओर खीं ले चलीं। "मम्मी को बड़ी खुजली हो रही है, जिसका इलाज बस तेरे पास है !"

रजनी जी, सोफ़े पर लेट कर कामुकतापूर्वक एक दूसरे का चुम्बन लेते हुए मिस्टर शर्मा और डॉली के निकाट जाकर बैठ गयीं और अपनी उंगलियों को मिस्टर शर्मा के वज्र से कठोर लिंग पर लपेट डाला।
 
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